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Tuesday, December 25, 2018

पड़ोसी प्रिया दीदी

indian sex story हाय फ्रेंड्स. में सूरत से मे अपने मम्मी पापा के साथ रहता हूँ यह मेरी
B.A की एग्जाम देने के बाद की कहानी है हमारे बाजू मे एक फैमिली रहती थी
उनकी बेटी का नाम प्रिया है पर उनको घर मे सब प्रिया कह कर बुलाते थे
प्रिया दीदी की नई नई शादी हुई थी, मे प्रिया को 5-6 साल से जानता था. अब
आगे की बात एग्जाम के बाद मे ऐसे ही अपने दोस्तो के साथ इंटरनेट कैफे
जाने लगा. मे अपने एक दोस्त निखिल के साथ एक कंप्यूटर शेयर करता था निखिल
मेरे से इंटरनेट के बारे मे ज़्यादा जानता था. तो ज़्यादा करके वही साइट
सर्च करता था.एक दिन मे इंटरनेट कैफे देर से पहूँचा तो देखा निखिल
कंप्यूटर पे बेठा हूआ था. मेने देखा वो
ज़्यादा भाई-बहन की स्टोरी पढ़ रहा था. मे उसी समय निखिल को बोला यार यह
सब बंद कर ले मूझे अच्छा नही लगता. फिर निखिल बोला यार तुझे मालूम नही
कभी एक बार तेरे बाजू मे प्रिया [सेजल] दीदी के बारे मे सोच के देख बहूत
मज़ा आयेगा. मे यह सुनते ही उसे बोला चल यार मे घर जाता हूँ.
तो निखिल बोला बेठ ना यार तो मे बोला नही यार, फिर वो बोला तू एक बार
दीदी के बारे मे सोच के देख. फिर मे उसे पागल बोलते हूये वहाँ से घर की
और निकल पड़ा. मे जेसे ही घर पहूँचा तो मेने एक बड़ा सा बैग अपने कमरे मे
देखा. और मेरे कमरे के बाथरूम से पानी की आवाज़ आ रही थी. मम्मी किचन मे
शाम का खाना बना रही थी.और पापा कही बाहर गये थे. मे तुरंत किचन मे गया
और मम्मी से पूछा दीदी आई हे क्या. तो मम्मी बोली हाँ. मे दीदी के बारे
मे बताता हूँ. प्रिया दीदी की उम्र 28 साल की है. रंग गोरा. दीदी की शादी
8 महीने पहले हूई थी और दीदी पहली बार शादी के बाद सूरत आई थी वो अपने
मम्मी – पापा को सरप्राइज देना चाहती थी तो बिना फोन किये ही सूरत आ गई
पर उनका नसीब खराब था की कोई घर पर नही था प्रिया दीदी के मम्मी पापा
ऑफीस के काम से बाहर गये हुये थे. तो हमारे घर पे थी मे अपने रूम मे जाकर
उन्हे ढूँढने लगा की. फिर अचानक किसी ने पीछे से मूझे पकड़ लिया और मेरे
गालो को चूमा. मैने तुरंत पीछे देखा प्रिया अपने भीगे बालो पे टावल लपेटे
ग्रीन नाइटी पहने बिल्कुल एक औरत की तरह दिख रही थी. मेने दीदी से कहाँ
तुम तो बिल्कुल बदल चुकी हो. फिर दीदी ने पूछा तुम्हारी एग्जाम कैसी रही.
और हम लोग बाते करने लग गये. जब मे दीदी के साथ बाते कर रहा था तो मूझे
मेरे दोस्त निखिल की बाते याद आने लगी मूझे बड़ी अजीब सी फीलिंग होने
लगी. मेरे ना चाहते हूये भी मे दीदी के फिगर को देखने लगा. फिर बाहर से
पापा आये. और वो भी दीदी के साथ बाते करने लगे. उदाहरण — आपके पति क्या
करते हे बोम्बे मे किस जगह रहते हो उनको क्यों साथ नही लेकर आई और भी
बाते करने लगे.
फिर मे वहाँ से निकल कर फोन करने चला गया. मेने तुरन्त निखिल को फोन करके
अपनी हालत बताई. फिर निखिल बोला मे ना कहता था ऐसा मेरे साथ भी हुआ था और
सुन ऐसा सबके साथ होता हे क्योकि हम पहले इंसान है बाद मे रिश्तेदारी मे
है इसी का नाम जिंदगी हे. फिर मेने फोन रख दिया. फिर मे दीदी मम्मी पापा
सब लोग खाना खाने बेठे खाना खाते हूये मेने देखा दीदी बिल्कुल टीवी
सीरियल की प्रेरणा जेसी दिख रही थी. पहले दीदी बहुत पतली थी लेकिन अब तो
दीदी की गांड पूरी कुर्सी की दोनो साइड से बाहर निकल रही थी दीदी के
बूब्स बहुत बड़े बड़े और आम की तरह थे. मूझे पता नही जीजू ने दीदी को ऐसा
क्या किया की दीदी इतनी भारी भारी हो गई. फिर हम लोग खाना खाने के बाद
टीवी देखने लगे. मे और दीदी सोफे पर बेठे थे. और मम्मी पापा बाजू के सोफे
पे बेठे थे. रात के 10 बजे थे. फिर मम्मी और पापा अपने कमरे मे सोने के
लिए चले गये.
फिर दीदी ने अपने आप को सोफे की एक साइड अपना सर रख लिया और अपने दोनों
पेरो को मोड के सोफे पे ले लिये. फिर दीदी ने कहाँ मेरे पेर बहूत दर्द कर
रहे हे प्लीज़ दबा दो. मेने कहाँ जी दीदी. फिर दीदी ने अपने पेर मेरी गोद
मे रख दिये फिर मैने दीदी के पेर दबाना शूरू किया. दीदी के पैर दबाते
हूये मे अब गरम हो रहा था. अब मेरा नज़रिया बिल्कुल बदल रहा था. फिर मेने
अपने हाथ थोड़ा ऊपर ले जाके दीदी के घुटनो को दबाने लगा. अब मेरे हाथ कभी
कभी जांघों तक फेरने लगा. दीदी की जाघे बहूत नरम थी. अब मेरा लंड दीदी के
पेरो से दबा हूआ खड़ा हो रहा था मे उसे रोक नही पा रहा था. फिर अचानक
दीदी ने पूछा क्या तुमने कोई गर्लफ्रेंड बनाई. मेने शरमाते हूये कहाँ नही
दीदी फिर दीदी बोली इसलिये तुम मेरे पेर घुटनो से ऊपर दबा रहे हो. मे
तुरंत शरमाते हूये सॉरी बोला तो दीदी बोली अरे पगले इस मे कोई बड़ी बात
नही इस उम्र मे ऐसा होता हे फिर दीदी ने कहाँ चलो अब मेरी कमर भी दबा दो.
दीदी को मुस्कुराते हूये यह सब बोलते हूये मूझे बहुत अच्छा लगा. फिर दीदी
और मे हमारे बेडरूम मे चले गये फिर दीदी मेरे बेड पर उलटी लेट गई.
फिर मे दीदी के बाजू मे बेठ कर दीदी की कमर को दबाने लगा. मे दीदी से
बोला आप 1 मिनिट इन्तजार करो में अभी आया. और मेरा लंड खड़ा होने के
कारण मे 61-62 यानी हस्तमैथुन करने के लिये बाथरूम मे चला गया और दीदी ने
2 मिनिट इन्तजार करने के बाद डाइरेक्ट ही बिना बोले बाथरूम मे आ गई और
मुझे लंड को आगे पीछे करते देख लिया और मे शर्म के मारे बाहर आ गया फिर
दीदी बोली मे बोम्बे से आई तब से तुम मूझे कुछ अलग नज़र से देख रहे हो
क्या मूझे तुम इतना पसन्द कर रहे हो. फिर मेने कुछ जवाब नही दिया तो दीदी
बोली शरमाओ मत मे तुझको डाटूगी नही. फिर मेने निखिल और मेरे बीच हुई सब
बाते बता दी. फिर दीदी ने मुस्कुराते हूये कहाँ तो बोलो मेरे नादान बच्चे
मे तुम्हारे लिये क्या कर सकती हूँ. तो मेने अपना सर शरम से नीचे झुका
दिया. फिर दीदी बोली अच्छा एक काम करो रूम की लाइट दरवाजा बंद करके यहाँ
आओ. फिर मे लाइट और दरवाजा बंद करके पलंग की और आ रहा था तो रूम मे बहुत
अंधेरा था और जेसे मे पलंग के करीब आया तो दीदी ने अचानक मेरा हाथ पकड़
के मूझे अपनी गोद मे बिठा दिया रूम मे इतना अंधेरा था की जब मेने अपने दो
हाथ दीदी की जांघों पे रखे तब मूझे पता चला की दीदी ने अंधेरा होते ही
अपनी नाइटी निकाल के सिर्फ़ ब्रा और पेन्टी मे थी फिर दीदी ने मेरी टी
शर्ट निकाल दी और मेरी पेंट भी निकाल दी फिर दीदी ने अपनी ब्रा खोल कर
कान मे कहाँ एक मिनिट खड़े हो जाओ तो मे अपनी पेन्टी निकाल दूँ.
फिर मैने दीदी की गोद से खड़ा होकर देखा तो दीदी अब अंधेरे मे सफ़ेद
पेन्टी अपनी बड़ी गांड ऊपर करके निकाल रही थी. अब मेरा लंड बहुत कड़क हो
चुका था. फिर दीदी पलंग के किनारे बेठे मेरा हाथ पकड़ के मूझे अपनी दोनो
जांघो के बीच ले लिया और अपने दोनो नरम होठों से मेरे होठों को चूमने लगी
फिर दीदी ने अपनी दोनो भारी जांघों से मेरी कमर को पकड़ के मूझे घुटनो के
बल पलंग के किनारे हाफ स्टेंडिंग पोज़ मे कर दिया. फिर दीदी ने अपने एक
हाथ को नीचे लेकर अपनी हथेली मेरे दोनो बॉल्स और लंड पे फेरने लगी अब
मेरा लंड खीच के ऊपर नीचे होने लगा तो दीदी ने मेरे कान मे कहाँ अच्छा लग
रहा हे ना. मे शरमा के हसं दिया तो दीदी भी हँसते हूये मेरा एक हाथ पकड़
के अपने बूब्स पे रखा दीदी का बूब्स बहुत नरम और मुलायम थे और दीदी की
निपल छोटी छोटी और दानो जैसी निकली हुई थी फिर दीदी ने मेरा दूसरा हाथ
पकड़ के अपनी
गीली चूत पे रख दिया. दीदी की चूत का हिस्सा बहुत ही गरम था और दीदी के
चूत के दोनो सूजे हूये लिप्स ऐसे लग रहे थे जेसे मानो सास ले रहे हो. फिर
दीदी ने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर रख दिया और हँसते हूये बोली
बच्चे एक बात का ख्याल रखना की तेरा वीर्य जब निकलने लगे तो उसे बाहर
निकाल ना. क्योकी मेरे पति यानी तेरे जीजू को अभी बच्चा नही चाहिये.
फिर उतना बोलते ही दीदी ने अपने दोनो पेरो से मेरी कमर को अपनी और कमर से
चिपका दिया अब मेरा पूरा लंड दीदी की चूत मे चला गया था फिर मेने अपने
दोनो हाथो से दीदी की कमर पकड़ के मे अपनी कमर हिलाने लगा फिर दीदी ने
अपनी चूत अपने हाथो के बल मेरे लंड से दबाने लगी. अब मेरा लंड बहुत जोरो
से दीदी की चूत मे फिसल रहा था. और में अपने लंड को दीदी की चूत में जोर
जोर से डाल रहा था जिससे दीदी को भी मजा आ रहा था और फिर 15 मिनिट तक ऐसा
करने के बाद अब मेरे लंड से पानी निकलने जा रहा था की मेने अपना लंड बाहर
निकाल दिया और मेरी चुदाई का सारा वीर्य दीदी की जांघ पे निकाल दिया फिर
दीदी ने भी अपनी उगंली तेज़ी से चूत पे रगड के चूत का पानी निकाल दिया और
मूझे अपने साथ नंगे बदन सुला दिया और दीदी ने उस रात मुझको खूब मजे दिये.

मैने दूसरा बोब्स चूसना स्टार्ट किया

indian boobs हेलो दोस्तों…
आशा करता हूँ आप को यह कहानी पसंद आएगी….मैं अपने भाई की शादी में गया
हुआ था. वहाँ मिली मुझे एक गाव की गोरी फूलमती… वो लड़की बेहद खूबसूरत
थी…। 24 को मेरे भाई की शादी थी। मैं अपने घर से 20 तारीख को ही चला गया।
क्योंकि गाव मे अक्सर लड़कियाँ आसानी से अपना सब कुछ दे देती हैं इसलिए
मैने जल्दी जाना ठीक समझा।
मैं जिस दिन पहुंचा उसी दिन मेरी नज़र फूलमती पर पड़ी. और उसने मुझे देख
कर स्माइल कर दिया. मैने जान लिया की इससे मेरी सेक्स की इच्छा पूरी हो
सकती है. जब मैने अपने भाई के दोस्तों से पूछा तो उन्होने बताया की लड़की
रंडी है. मैं तो मानो खुशी से उछल गया। मैने उससे पहले दिन ही पटा लिया.
और गाव की गोरी को पटाना कोई मुश्किल बात नही होती.
उसी रात मैने उससे भाई के घर के बाहर कमरे मैं बुलाया और सारा इंतजाम कर
लिया. हमारे घर के बाहर कमरे के पास लड़कियों का शोचालय था. इसलिए रात
को उसको आने जाने से कोई कुछ नही बोलेगा. यह हमने बनाया था। क्यूंकी
लड़कियों का बाहर जाना अच्छा नही होता और बाहर कमरे के बाहर मेरा दोस्त
पहरा दे रहा था।
मैने जब उसे देखा तो मेरे होश ही उड गये साली क्या दिखती थी और रात को
मानो कोई परी उतर आई हो ज़मीन पर। मैने उसे अपने पास बिटाया और उस से
ढेरों बात की और बात करते करते मेने उसे किस कर लिया. वो कुछ नही बोली.
और मैने उसके बोब्स को दबा लिया (उसने ब्रा नही पहनी थी… मज़ा आ गया ) और
वो हंसती रही..
मैने उससे कहा की चल आज रात यही सो जाते हैं वो बोली की वो नही रुक सकती…
तो मे बाहर निकला और अपने दोस्त को कहा की तू चल मैं आ रहा हूँ… मैं जब
लौट के आया तो देखा की फूलमती बैठी हुई है. और मुझे अपने पास बुला रही
है.. मैं उसके पास गया और बोला की मैं तेरे बारे मे सब कुछ जनता हूँ….
तो वो बोली क्या जानते हो…. मैने कहा की तू बहुत से लड़कों के साथ
सेक्स कर चुकी है… तो वो रोने लगी… मैने कहा क्या हुआ.. तो वो उठ कर
जाने लगी. मैने उससे रोका और पूछा क्या हुआ बता मुझे।फूलमती ने बताया की
वो पहले एक लड़के से प्यार करती थी… वो दोनो एक दूसरे से शादी भी करना
चाहते थे… वो उसके साथ सब कुछ कर चुकी थी और प्रेग्नेंट हो गयी थी. मगर
वो लड़का जब शहर जाकर काम ढूँढने लगा था. वहाँ एक ऐक्सिडेंट मे उसकी मौत
हो गयी.. और जब यह खबर उसको मिली वो भी मरने के लिए नदी मैं कूद पड़ी मगर
गाव वालों ने उसे बचा लिया… और जब उसकी माँ को यह बात पता चला तो वो उसे
लेकर अपने भाई के घर चली गयी।
उसकी माँ बहोत रोई थी. क्योंकि उसका बाप किसी और औरत के चक्कर मे था और
उनसे कभी मिलता भी ना था… वो बोली की उसकी माँ अपने पति को खो चुकी है
अपनी बेटी नही खोना चाहती… मगर तब तक देर हो चुकी थी. गर्भपात के लिए।
इसलिए उसने बच्चे को जनम देकर हॉस्पिटल मे ही उसे छोड़ दिया। मैं चौंक
पड़ा की यह सब क्या हो गया बेचारी के साथ.. उसने बताया की उसके बोब्स मे
दर्द होता है. क्योंकि बच्चे ने दूध नही पिया तो एक बार नहाते वक़्त वो
अपना दूध निकाल रही थी तो कुछ गाव के लड़कों ने उसे देख लिया… और यह खबर
फैला दी की वो एक रंडी टाइप की लड़की है।
अब मुझे और बुरा लगने लगा मैने उससे कहा की तू घर चली जा… मैं तुझे क्या
सोच रहा था… वो बोली तो क्या हुआ तुम औरों जेसे बिल्कुल नही हो। मैने
कहा कैसे तो वो बोली की तुम तो सिर्फ़ इतना जानकर ही मुझे जाने के लिए कह
दिया.. बाकी सब लड़के तो मुझे हमेशा परेशान करते रहते है.. मुझे मेरे
मुहं पर रंडी कह देते हैं. मगर तुमने नही कहा… यह अलग बात है की मैं सोच
रहा था मगर मैने कहा नही। फिर मुझे अचानक से याद आया की उसका दूध अब तक
निकल रहा है. मैने उससे पूछा की कब की बात है यह वो बोली कुछ ही हफ्ते
हुए हैं।
मेरा मन नाचने लगा. लेकिन मैं उससे क्या बोल पाता. मैने उसे कुछ नही कहा.
वो बोली दोस्त अब मैं चलती हूँ…. मैने कहा तुम मुझे अपना दोस्त मानती हो
ना… वो बोली अगर नही मानती तो आती क्या… ( गाव की लड़की बड़ी भोली भाली
बनती हैं मगर होती नही… जान लो) मैने कहा मैं तेरी मदद करना चाहता हूँ
वो बोली कैसे… मैने कहा तेरे बच्चे ने तेरा दूध नही पिया इसलिए तुझे दर्द
होता है.. वो बोली हां… मैने कहा मैं तेरा दर्द कम करना चाहता हूँ… वो
चुप हो गयी. मैने कहा क्या हुआ।वो बोली किसी को बताना मत मैने कहा दोस्त
भी कहती है और भरोसा भी नही करती… वो बोली ठीक है… मैने लाइट बुझाया और
मैने उसे बेड पर बिटाया और उसकी गोद मे सर रखके लेट गया। उसने अपना
कुर्ता उठाया और थोड़ी आगे की और झुक गयी. उसके बोब्स मेरे होठों को छू
रहे थे। मैने अपना मूह खोला और उसके बोब्स को अपने मूह से चूसने लगा. वो
आ.. आ.. कर रही थी. मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।
मैं चूसते वक़्त उसका दूसरा बोब्स को दबा रहा था. कुछ देर मे उसका एक
बोब्स खाली हो गया. और मैने दूसरा बोब्स चूसना स्टार्ट किया. वो मेरे
बालों को सहलाती तो कभी ज़ोर से मेरा सर अपने बोब्स से लगा लेती। मैने
धीरे धीरे उसके बोब्स का दूध खत्म कर दिया और फिर उसने मुझे ज़ोरदार किस
किया और उसने बाय कहा… । मन तो कर रहा था की पकड़ के फाड़ दूँ साली कि
चूत मगर मैने सोचा की इतना जल्दी भी आगे बढ़ना ठीक नही….हो सकता है।
उसका मन ना हो अगर मैने ज़बरदस्ती की तो शायद मेरे नसीब मे दूध भी ना हो…
इसलिए मैने उससे जाने दिया. दूसरे दिन आस पास के गाव वाले सब शादी की
तेयारी के लिए मदद करने आए थे. वो और उसकी माँ भी आई थी। मैं उसकी माँ
से मिला और मैने नमस्ते किया. वो मुझे नही जानती थी. फिर मैने अपने पापा
और मम्मी का नाम बता कर उनसे अपनी पहचान बढ़ायी. वो बोली कितना बड़ा हो
गया है तू… पहचान मे नही आ रहा।
मैने कहा आपको बड़ी मम्मी बुला रही थी आप जाकर उनसे मिलिए…. वो चली गयी
और मैं उसकी बेटी का हाथ पकड़ा और मेरे कमरे मे ले गया. वो बोली कोई आ
जाएगा। मैने कहा कोई नही आएगा और उसे किस करने लगा. ओर उसके बोब्स दबाने
लगा। उसने मुझे दूर किया और कहा रात का तो इंतेज़ार करो… मैने कहा नही
हो रहा है… वो बोली थोड़ा सब्र करो.. और मुस्कुरा के चली गयी. मैं उसके
आस पास ही भटकता रहता और किसी बहाने उसे छू लिया करता था. और वो मुस्कुरा
देती।
शाम को उसकी माँ ने कहा की आज से यहीं रुक जाते हैं… बहुत काम है और
कितना जाना आना करेंगे… मुझसे कहा की मैं फूलमती के साथ जाकर उनके और
उसकी बेटी के कपड़े ले आऊँ. मैने कहा ठीक है… और हम शाम को उसके घर चले
गये।
उसका घर हमारे घर से कुछ ही दुरी पर था. मैने रास्ते में उसे कहा की तू
कपड़े लेने जा रही है मगर मैं तो तेरे घर पहूंचते ही तेरे कपड़े उतार
दूँगा… वो हसंने लगी.
मैने जैसे ही उसके घर के अंदर कदम रखा. मैने दरवाज़ा बंद कर दिया और उसकी
और बढ़ने लगा. वो मुस्कुरा रही थी। मैने कहा आज मैने खाना नही खाया मुझे
भूख लगी है… वो बोली रूको मैं बिस्कट देती हूँ,.. मैने कहा मुझे दूध
पीना है.. वो बोली अच्छा इसलिए मेरा बच्चा मेरे साथ आया है.. मैने कहा
हा.. तो उसने कहा चलो…. मैने कहा एक मिनिट… और मैने उसके कपड़े उतारे और
उसकी ब्रा खोल दिया. उसने कहा मुझे शर्म आ रही है।
मैने कहा ठीक है लाइट बुझा देते हैं… फिर मैने झुक कर उसके बोब्स से दूध
पीने लगा और दूसरे के साथ खेलने लगा. उसने कहा जल्दी करो… घर भी जाना
है… मैं तो भूल ही गया था। मैने तोड़ा तोड़ा दूध दोनो से पिया और कपड़े
लेकर वहाँ से चले आये। उस रात हम फिर दोनो बाहर कमरे मे गये और मैने उसका
दूध फिर से पिया और हम दोनो ने सेक्स भी किया। मगर स्टाइल ज़रा अलग था।
हमने एक छोटा सा नाटक खेला. मैने कहा तू सो जा मैं आता हूँ.. वो लेट गयी
और थोड़ी देर बाद मैं आया और मैने अंडरवेयर के सिवा कुछ नही पहना था।
मैने कहा मम्मी मम्मी मुझे भूख लगी है… वो हंसने लगी मैने कहा मम्मी मुझे
भूख लगी है… वो बोली आजा मेरा बच्चा… और मैं उसके साइड मे जाकर लेट गया।
उसने अपने लेफ्ट साइड से कुर्ता उठाया और अपना ब्रा खोला. मैं साइड से
उसके बोब्स के उपर अपना मूह लगाया और दूध पीने लगा।
मैने कहा की पुरे कपड़े उतार दो… उसने उतार दिए. और मैं बोब्स से दूध
पीने लगा। मैने दोनो बोब्स के दूध को खत्म कर दिया और अब मैने उसका
सलवार खोला उसने कुछ नही कहा। मैने अपना हाथ उसके पेंटी के अंदर डाल दिया
और उसकी चूत को सहलाने लगा. थोड़ी देर मे ही वो मुझसे लिपट गयी और मुझसे
आगे बढ़ने को कहा। मैने आपना लंड निकाला और उसकी टाँगो पर लंड से सहलाने
लगा. वो कहने लगी और कितना तड़पाओगे…..।
फिर मैने अपनी और उसके पुरे कपड़े उतार दिए और उसके उपर चड गया. और मैने
अपना लंड उसकी चूत मे डाल दिया.. ( दोस्तों सेक्स के टाइम कॉंडम का
इस्तेमाल ज़रूर करें ) फिर हमने सेक्स किया और मैने बीच बीच मैं उसके
बोब्स को चूसने लगा. वो कहती है पी लो ताकत आ जाएगी और हम हंस पड़ते और
फिर स्टार्ट कर देते. उस रात वो मेरे साथ ही रुकी और हमने ढेरो बातें की
और एक दूसरे को पूरी रात किस किया और एक दूसरे को छूते रहते. और सुबह
सुबह वो शौच के बहाने से चली गयी।
तीसरे दिन हम दोनो ने गाव के जंगल को घूमने का फ़ैसला किया. मैने उनकी
माँ से पूछा और वो मान गयी. फूलमती को मेरे साथ जाने दिया। मेरे दोस्तों
ने भी जाने की ज़िद्द की मगर मैने उन्हे सॉफ मना कर दिया की मेरे होते
हुए कोई उसके साथ गलत काम नही कर सकता.. वो लोग कहते रहे और मैं चल पड़ा
तभी मेरा दोस्त राजू अपनी गर्लफ्रेंड विमला के साथ आया और वो भी हमारे
साथ चल पड़ा।
मैं जब जा रहा था तो मैने पूछा की यहा कोई नदी है. उन्होने कहा की झरना
है… मैने राजू को अपने से घर से टॉवेल और साबुन लाने के लिए कहा.. और
फूलमती अपने घर से अपने लिए और राजू की गर्लफ्रेंड के लिए कपड़े लेकर आ
गयी। उस जगह पहूंचने के बाद मैं और राजू अंडरवेयर मे ही चले गये झरने के
पास और वहाँ नहाने लगे। थोड़ी देर मे फूलमती और विमला भी टॉवेल मे आ गयी।
मैने राजू को आँख मारी और हम दोनो झरने का पानी जो जमा हुआ था. उसके अंदर
कूद पड़े वहीं से झरने के पास जाया जा सकता था। जब विमला और फूलमती वहाँ
उतरे मैं और मेरा दोस्त अंदर से उनके पास पहुच कर उनको पकड़ लिया। दोनो
डर गयी और हमसे लिपट गयी. राजू ने मेरी तरफ देखा और आँख मारी। फिर हम
लोग साथ साथ नहाने लगे और खूब मस्ती की एक दूसरे को साबुन लगाया (जान लो
हर जगह लगाया) उन्होने भी हमे लगाया और हम नहाते नहाते जोश मे आ गये।
मैने राजू को थोड़ी दुर जाने को कहा राजू समझ गया और फिर मैने फूलमती की
टॉवेल खोल दी और पानी के अंदर गर्दन तक गहराई में उसे ले आया और अपने
अंडरवेयर को तोड़ा साइड करके उसके पास ले आया वो बोली क्या कर रहे हो..
मैने कहा प्यार कर रहा हूँ करने नही दोगी क्या… वो बोली राजू और विमला…..
मैने कहा इसलिए तो दुर भेजा उन्हे और मैने अपना लंड उसकी चूत मे डाल दिया
और खड़े खड़े हम दोनो ने सेक्स करना स्टार्ट कर दिया. मैने जब राजू की
और देखा तो वो भी स्टार्ट हो चुका था। हम दोनो ने अपनी अपनी बोट चला दी
पानी मे.
दोपहर को जब हम लौटे तो विमला और फूलमती काम करने के लिए चले गये और मैं
और राजू मेरे कमरे मे. मैं और राजू बचपन मे बहोत मस्ती करते थे। फिर वो
काम के सिलसिले मे बाहर चला गया और में मम्मी पापा के साथ शहर आ गया था
पढ़ाइ करने। राजू ने कहा की विमला उसके साथ ही रहती है वो दूसरे जात की
थी. इसलिए दोनो के घर वालों ने शादी के लिए रजामंदी नही दी तो वो एक साथ
शहर मे रहने लगे. उनका एक बेटा भी है जो अभी अपनी नानी के साथ था।
मैने जब सुना मैं चौंक गया. मैने कहा की मैं तबसे विमला को तेरी
गर्लफ्रेंड सोच रहा था. तो वो हंसने लगा. उसने कहा धन्यवाद आज के लिए।
मैने कहा क्या हुआ. उसने कहा की कई दिनों से वो यहाँ आया हुआ है मगर
अपने घर मे उसे जाने नही देते और उसके ससुराल मे वो अपनी बीवी के साथ सो
नही पाता. मैने उससे कहा की वो और उसकी बीवी यहीं हमारे घर मे रुक जाए
और रात का इंतजाम मैं कर दूँगा। उसने कहा धन्यवाद यार… मैने कहा कोई बात
नही..
उस रात मैने फूलमती को समझा दिया की विमला को लेकर बाहर कमरे चली जाये
सोने के लिए… और मैं और राजू रात को आएँगे…. जब मैं और राजू वहाँ पहूंचे
तो विमला और फूलमती अपने अपने कुर्ते को उठाए हुएँ हैं. कभी विमला तो कभी
फूलमती बच्चे को दूध पीला रही है. यह देखकर हम बाहर आ गये. राजू बोला की
फूलमती किसे दूध पीला सकती है.. ( मैने उसे सब कुछ बता दिया…) उसने कहा
की वो फूलमती के साथ सेक्स करना चाहता है… मैने कहा तेरी बीवी को कोई
प्रोब्लम नही.. उसने कहा नही… मैने पूछा कैसे तो उसने बताया की जब उसकी
गर्लफ्रेंड प्रेग्नेंट थी तो उसकी गर्लफ्रेंड खुद उसे पैसा देती और कहती
जाओ बाहर से रंडी के साथ सेक्स कर के आओ… मैं चौंक गया… मैने कहा तेरी
बीवी….. वो बोला हां बे ठीक है.. वो भी कुछ नही बोलेगी… मै बहुत खुश
हुआ। फिर हम दोनो अपनी अपनी को लेकर बात करने चले गये जब लौटे तो सब हंस
पड़े।विमला मेरे पास आई और बोली की एक मैं मुन्ना है एक तुम ले लो… मैने उसे
बिठाया और और एक तरफ बच्चा और दूसरी तरफ मैं उसका दूध पीने लगा. वो बोली
तोड़ा आराम से बच्चों की तरह पियो… मैने कहा ठीक है…. और थोड़ी देर मे
बच्चा सो गया और मैने दूसरा बोब्स भी स्टार्ट कर दिया। मैं जब उठा तो
मैने देखा की राजू भी बच्चों की तरह दूध पी रहा है. फिर मैं फूलमती की और
बड़ा और मैने उसका दूसरा बोब्स चूसने लगा. विमला पीछे से आई और राजू उसकी
और पलट गया और उसका बोब्स चूसने लगा। हम दोनो कभी विमला तो कभी फूलमती का
बोब्स चूसते रहे।
फिर हम दोनो ने विमला और फूलमती दोनो को चोदा. जैसे दूध पीते रहे वेसे ही
सेक्स करते रहे कभी यहाँ तो कभी वहाँ…. यह सिलसिला भाई की शादी के बाद और
दो दिनो तक चलता रहा. मैने और राजू ने बहुत मज़ा किया।
मैं आशा करता हूँ की ऐसा मौका मुझे बार बार मिले और मैं हमेशा दूध पीता
बच्चा बना रहूं…….. जब तक मैं ज़िंदा हूँ तब तक मैं किसी ना किसी का दूध
ज़रूर पीता रहूँगा

माँ को जमकर चोदा

maa ki chudai देहरादून में मेरा एक दोस्त है सोनू वो मेरे साथ ही पढ़ता है. और मेरे
साथ ही बी.एफ भी देखता है. एक दिन में उसके साथ उसके घर गया और उसकी माँ
उषा आंटी उम्र 40 (34-30-36) और उसकी बहन शालू उम्र 17(28-26-32) से
मिला दोनो मस्त माल है. में उषा आंटी को ऊपर से नीचे तक देखता रह गया और
मेरे लंड मे वाइब्रेशन होने लगा. सोनू और में अच्छे दोस्त थे मुझे पता था
सोनू भी मेरी तरह चूत का प्यासा है. हम दोनों ने कुछ कॉल गर्ल भी चोदी
है.
अब तो रोज मुझे उषा आंटी को चोदने के सपने आने लगे. मुझे पता था सोनू
अपनी माँ को चोदने नही देगा और आंटी भी ऐसी औरत नही है, तो मेने सोनू को
फंसाने की सोची और उसे कहाँ की मेरी माँ आ रही है और सीमा आंटी (मेरे
दूसरे दोस्त की माँ जो गावं में रहती है जिसे में पहले चोद चुका था) को
बुला लिया, मैने सीमा आंटी को पहले ही प्लान बता दिया था की आप मेरी माँ
है।
फिर एक दिन सोनू मेरे से मिलने आया मे जानबुझ कर थोड़ी देर के लिए बाहर
गया और इसी बीच सीमा ने सारे घर में झाड़ू और पोछा लगाया जिससे उसके मस्त
बोबे सोनू को दिखे. उसके बाद वो रोज आने लगा और माँ के शरीर के मज़े लेने
लगा. एक दिन मैने उससे कहाँ की कल मे अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मसूरी जा
रहा हूँ.
अगले दिन सोनू घर आया और माँ से पूछा राहुल कहाँ है. तो वो बोली वो तो
कही गया है शाम तक आयेगा उस दिन मैने माँ को कुछ इस तरह से तरीके बताये
ताकि वो आसानी से माँ को चोद ले. पहले माँ ने उसके कपड़ो पर पानी डाल
दिया, सोनू ने अपने कपड़े बदल लिये फिर माँ ने बाथरूम मे फिसलने का नाटक
किया और सोनू उन्हे रूम मे उठा के ले आया फिर माँ ने सोनू से मालिश करवाई
और फिर चुदाई भी. मेरे घर मे लगे केमरे मे उनकी चुदाई रिकॉर्ड हो रही थी.
तभी में घर आ गया और उन दोनो को रंगे हाथो पकड़ लिया सोनू मेरे घर से चला
गया. अगले दिन मे उससे मिलने उसके घर गया वो बहुत झिजक रहा था मैने उसे
बहुत बुरा बला कहाँ और वो कुछ ना बोला. अगले दिन सोनू ने मुझसे माफी
माँगी तो मैने कहाँ की एक शर्त पर माफ़ कर सकता हूँ वो बोला क्या मैने
कहाँ माँ के बदले माँ चाहियें, वो तो चोक गया और बोला ये क्या कह रहा
है. ऐसा नही हो सकता मैने कहाँ अच्छा मेरी माँ को चोदते वक्त नही सोचा,
फिर मैने उसको अपनी माँ की और उसकी चुदाई की विडियो दिखाई और कहाँ की ये
तेरी माँ को भी दिखाउगां. वो थोड़ा शांत हुआ और सोचने लगा और बोला में कल
सोच के बताऊंगा, मुझे पता था अगर ये सोचेगा तो ना ही कहेगां. तो मैने
उसे समझाया की उसके पापा को मरे हुये 6 साल हो गये उसकी माँ को भी तो इन
सब की ज़रूरत है और अगर वो मेरी माँ को सुख दे सकता है तो उसकी माँ को
मे क्यो नही. वो तैयार तो हो गया पर डरा हुआ था की माँ कैसे मानेगी.
मैने उससे कहाँ की वो मेरे ऊपर छोड़ दे पर दोस्तो उसकी माँ को मनाना इतना
आसान नही था. मैने बहुत सोचा फिर एक प्लान समझ में आया मैने एक दिन सोनू
को कहा की किसी शादी में अगर जाना हो तो आंटी के साथ मे जाऊँगा तभी एक
दिन शादी मे जाना था तो सोनू ने कहा की माँ मुझे बुखार है आप राहुल को ले
जाये उषा आंटी तैयार हो गयी, में उन्हे उनकी गाड़ी में ले के शादी में
गया दोस्तो आज वो परी से कम नही लग रही थी ब्राउन कलर की साड़ी मे मस्त
माल लग रही थी मन कर रहा था की अभी चोद दूँ, फिर हम शादी में पहुँचे वहाँ
डिनर करते वक्त में आंटी से कई बार टच हुआ.
फिर मैने एक कोल्ड ड्रिंक ली और सफाई के साथ उसमे नींद की गोली डालकर
आंटी को पीला दी, हम वहाँ से लोटने लगे तो रास्ते मे सुनसान रास्ता पड़ता
है. और थोड़ा सा जंगल भी है शादी भलावला मे थी, आंटी नींद मे थी मैने
गाड़ी रोकी और देखा आंटी सो चुकी है. मैने आंटी को उठाया और जंगल मे
पेड़ो के पास ले जाकर उनके कपड़े उतारे और उनकी नंगी विडियो बना ली
(दोस्तो मे चाहता तो उन्हे चोद भी सकता था पर मेरा लंड औरत को जागते हुये
ही चोदता है और वो भी उसकी मर्ज़ी से) फिर मैने आंटी को ऐसे ही गाड़ी मे
डाला और उनके ऊपर उनके कपड़े डाल दिये और गाड़ी को वही झाड़ियो मे पेड़
से टक्कर मारी और अपने माथे मे थोड़ी चोट भी लगा ली, फिर वहाँ से गाड़ी
निकाली और घर ले आया. सोनू और उसकी बहन आई और आंटी को घर ले गयी वहाँ
मैने बताया की हमारी गाड़ी का ऐक्सीडेन्ट हो गया और मैने कुछ लोगो से मदद
माँगी तो उन्होने मुझे बाँध कर आंटी के साथ रेप किया. सुबह आंटी को होश
आया तो हमने उन्हे सारी बात बताई पर आंटी को यकीन नही हुआ तो मैने कहाँ
आप सो गयी थी और फिर ऐक्सीडेन्ट के कारण बेहोश हो गयी थी.
अगले दिन एक कोरियर मे आंटी की नंगी विडियो उनके पास भेजी और कहाँ अगर
विडियो चाहियें तो 2 लाख रुपये चाहियें, आंटी रोने लगी और वो ये बात
अपने रिशतेदारों को भी नही बता सकती थी ओर 2 लाख केश कहाँ से आते मैने
कहाँ आंटी में आपकी मदद करूँगा और वो विडियो ले आऊँगा.
फिर मैने आंटी को वो विडियो ला के दी जिसमे सोनू मेरी माँ को चोद रहा था,
आंटी ने अकेले में वो विडियो देखी और मुझे फोन किया की ये वो विडियो नही
है तो मैने कहाँ की इसमे सोनू जिसे चोद रहा है वो मेरी माँ है और वो
विडियो मेरे पास है अगर वो भी मुझसे चूदेगी तो में ये विडियो उसे दूँगा,
वो मना करने लगी मैने फोन काट दिया उसने कई बार मिलाया मैने फोन स्विच ऑफ
कर दिया, तब उसने सोनू को बहुत डाटा और कहाँ की उसने ऐसा क्यों किया और
अब क्या होगा। फिर सोनू ने कहा की अब राहुल की बात माननी पड़ेगी.
सोनू अपनी मम्मी को लेकर मेरे घर आया उसकी मम्मी ने मुझे समझाया की सोनू
से ग़लती हो गयी उसे माफ़ कर दो, मैने मना किया तो वो कहँने लगी की इसमे
तेरी मम्मी की भी ग़लती है तो मैने कहाँ मुझे कुछ नही पता मुझे माँ के
बदले माँ को चोदना है. जब में नही माना तो वो गुस्से मे चली गयी, मैने
सोनू को फोन करके कहाँ की वो अपनी माँ को मना ले सोनू ने अपनी माँ को कहा
की माँ केवल एक बार उससे वो विडियो ले लो फिर में सब देख लूँगा, उसकी
माँ तैयार हो गयी. और उसने मुझे फोन किया मैने उससे कहा की आज रात कही
जाने का बहाना बना कर अपनी माँ को मेरे घर छोड़ दे और मेरी माँ के साथ
किसी होटल मे रंगरलीया मना ले.
ऐसा ही हुआ सोनू ठीक 8 बजे उषा को लेकर मेरे घर आ गया और थोड़ी देर बाद
मेरी माँ को लेकर जाने लगा उसकी माँ ने कहाँ की तुम कहाँ जा रहे हो तो
मैने कहाँ की ये लोग होटल मे रात बिताऐगे क्योंकी मेरे रूम मे ज़्यादा
जगह नही है. वो चले गये आंटी एक सादा साड़ी पहन कर आई थी, मैने उन्हे माँ
की लाल साड़ी दी और तैयार होने को कहाँ वो थोड़ा डरी हुई थी और शर्म भी आ
रही थी, मैने उन्हे समझाया और कहाँ की अपनी दूसरी सुहागरात का मजा लो.
फिर वो थोड़ा सही हुई और तैयार होने लगी में इतने में ऊपर चला गया.
में ऊपर बिस्तर डाल के आंटी का इन्तजार कर रहा था. मैने सारा इंतज़ाम कर
रखा था, जैसे की मेरी सुहागरात हो, कन्डोम भी रखा था. में बनियान में था.
उतने में आंटी आई लेकिन आंटी भूल गयी की आज चुदवाना है, में पूरी तैयारी
में था मेरा लंड खड़ा था. सेक्स बडाने के लिए सेक्सी किताब पड़ रहा था,
उतने मे आंटी आई ,बोली क्या पड़ रहे हो, तो में जोश में बोला की आज अपनी
सुहागरात है ना इसलिए सेक्सी किताबे पड़ रहा हूँ. मेरा लंड खड़ा था. आंटी
सिर्फ़ मेंक्सी पहनकर आई थी और अंदर कुछ भी नही था, मेंक्सी मे वो एकदम
सेक्सी दिख रही थी, आंटी मेरे बाजू में आ के लेट गई , मैने हल्के से आंटी
की चूत के ऊपर हाथ फेरा मुझे मज़ा आ रहा था, मैने आंटी की मेंक्सी को
नीचे से उठाया, तो मुझे गोरी टाँगे देखी.
देखते ही मैने चाटना शुरू किया आंटी भी मेंक्सी पूरी निकाल के नंगी हो
गयी, अंदर चड्डी नही थी, में चाट रहा था, चाटते-चाटते में उनकी चूत के
पास गया, क्या मस्त गोरी चूत थी, क्लीन शेव था, मै अपनी उंगली अंदर घुसा
रहा था लेकिन अंदर जा नही पा रही थी, आंटी बोली अभी 10 साल से कुँवारी है
ऐसे नही घुसेगी. मै अपनी टांग आंटी के चूत पर रगड़ने लगा, आंटी के मुहँ
से आआहह की आवाज़ निकल रही थी मस्त 5 मिनिट तक चाट रहा था, बाद मे आंटी
बोली, तड़पाओ मत चोदो मेरे पतिदेव, आज मुझे बहन से बीवी बनाओ, में आंटी
के ऊपर चड़ने लगा, आंटी के बोबे एकदम टाइट थे, मैने एक मुहँ में लिया और
एक को मसलने लगा, आंटी के पूरे बदन में आग लग गयी थी, मेरे को बहुत मज़ा
आ रहा था, बाद में आंटी को मुहँ में फ्रेंच किस किया, 5 मिनिट तक आंटी के
लिप्स चूस रहा था.
बाद में आंटी बोली तेरा लंड चुसवायेगा तो मै जल्दी से नंगा हो गया और
टाइट लंड आंटी के हाथ में दिया, आंटी ने उसे सहलाया फिर मुहँ में लिया
और चूसने लगी, में तो खुशी के मारे उछल रहा था, में आंटी के मुहँ को चोद
रहा था, आंटी बहुत टाइम तक चूस रही थी. में भी आंटी के मुहँ में चोद रहा
था, अचानक मेरा वीर्य गिरने को आया आंटी की गर्दन पकड़ के ज़ोर ज़ोर से
चोदा बाद मे मेरा वीर्य आंटी के मुहँ मे गिर गया.
आंटी उसे पूरा पी गयी. मेरा लंड सिकुड गया. 5 मिनिट के बाद आंटी ने वापस
मेरा लंड चूस के कड़क बनाया और बोली मेरी चूत मे डाल दे और मेरी चूत को
फाड़ दे, मैने आंटी की चूत के नीचे एक तकिया लगाया और में उसके ऊपर चड़
गया लंड को चूत के ऊपर सेट किया और लंड को घुसाने लगा लेकिन आंटी की चूत
टाइट होने के कारण चूत मे लंड नही घुस रहा था.
अभी में आंटी के ऊपर था, चूत में लंड को बराबर सेट करके और जोर जोर से
धक्के दे रहा था आंटी भी मेरा साथ दे रही थी. मुझ से रहा नही गया और मैने
मुहँ मे रखकर एक जोरदार शॉट लगाया वैसे आंटी दर्द के मारे चिल्ला उठीं
मगर मेरे किस और बोबे दबाने से उसे मज़ा आ रहा था, आंटी की चूत फट गई.
में जोर ज़ोर से चोद रहा था. आंटी आआहह आआहह करके तड़प रही थी में पूरे
जोश में था.
में ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा, आंटी भी चूत उठा के साथ दे रही थी,
बटर की वजह से पिच-पिच-पिच की आवाज रूम में गूँज रही थी. बाद में आंटी ने
मुझे कस के पकड़ लिया और बोली जोर ज़ोर से चोद मेरी चूत को भोसड़ा बना दे
बहनचोद, में समझ गया आंटी झड़ने वाली है मै भी जोर ज़ोर से चोदने लगा,
और आंटी की चूत से गरम वीर्य निकल गया. उसके बाद मैने आंटी को खूब चोदा
बाद में मैने आंटी को कहाँ आंटी में झड़ने वाला हूँ, तो आंटी बोली मेरी
चूत मे झड़ ज़ा मैने अपनी रफ्तार बड़ाई और आंटी की चूत में झड़ गया, और
में शांत हो गया और आंटी के ऊपर सो गया, बाद में आंटी को में रोजाना
चोदता और वीर्य चूत में छोड़ देता. आंटी भी आई -पिल खाती थी. इसलिए कोई
परेशानी नही थी. और ऐसे हम दोनों का काम चलता गया.

मेरी वर्षा दीदी-1

desi sex kahani हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम विजय है और मेरी उम्र 24 साल, लम्बाई 5.8 है। में दिखने में ठीक लगता हूँ और में एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ। दोस्तों में भी आप सभी की तरह बहुत समय से सेक्सी कहानियों को पढ़कर मज़े लेता आ रहा हूँ और मुझे सभी सेक्सी कहानियाँ बहुत पसंद आती है। फिर एक बार मैंने मन में विचार बनाया कि में भी अपनी उस सच्ची घटना जो मेरे साथ घटित हुई उसको आप सभी के लिए लिखकर पेश करूं और आज मैंने उसको लिख लिया है और भेज रहा हूँ उम्मीद करता हूँ कि सभी पढ़ने वालों को यह जरुर पसंद आएगी। दोस्तों यह कहानी तब की है जब में अपनी स्कूल की पढ़ाई कर रहा था और मेरे उन दिनों 10th के पेपर पूरे होने के बाद में अपनी मौसी के घर अपनी छुट्टियाँ बिताने के लिए गया था। दोस्तों मेरी मौसी एक गाँव में रहती है और उस गाँव में उनका एक बड़ा सा घर है और जब में वहां पर पहुंचा, तब घर में मेरी मौसी और मौसा जी थे। दोस्तों वैसे मेरी मौसी को दो बेटियाँ है और वो दोनों शादीशुदा है, जिसमे से एक का नाम वर्षा है और दूसरी बेटी का नाम नंदनी है दोनों बेटियों की शादी हो जाने की वजह से अब मेरी मौसी-मौसाजी उसके कोई भी लड़का ना होने की वजह से उस इतने बड़े घर में अलेके ही रहते है।
दोस्तों मेरी वर्षा दीदी की उम्र करीब 27 साल है और नंदनी दीदी की उम्र 24 साल है और मेरे साथ जो घटना घटी वो मेरी वर्षा दीदी के साथ घटी। दोस्तों जब में अपनी मौसी के घर गया था, उस समय मेरी वर्षा दीदी भी वहीं अपनी माँ के घर आई हुई थी। फिर मेरे वहां पर पहुंचते ही वो सभी लोग मुझे देखकर बहुत खुश हुए, क्योंकि पिछले तीन साल से में अपनी स्कूल की छुट्टियों में वहीं पर जाता था। फिर में भी मेरी वर्षा दीदी को वहां पर देखकर बहुत खुश था, क्योंकि वो मुझे उनके घर पहली बार मिली थी और उनके शादी हो जाने के बाद हम दोनों एक दूसरे को बहुत कमी से मिले थे। फिर में अपनी मौसी के घर पहुंचकर मुहं हाथ धोकर उस लंबे सफर की थकान को दूर करके हल्का हो गया और उसके बाद में टीवी देखने लगा था। फिर थोड़ी ही देर के बाद वर्षा दीदी ने मुझे आवाज देकर अपने पास बुला लिया और में हाँ में अभी आ रहा हूँ कहकर तुरंत ही उनके कमरे में चला गया, क्योंकि उनका वो कमरा ऊपर था और फिर उस कमरे में जाते समय मैंने देखा कि मेरी मौसी अपना कुछ सामान एक बेग में जमा रही थी।
अब में मन ही मन में सोचने लगा कि यह क्यों अपना सामान जमा रही है? फिर मैंने अपनी दीदी के पास जाकर उनसे पूछा कि मौसी बेग में सामान क्यों जमा रही है? तब वर्षा दीदी ने मुझे बताया कि वो दोनों एक सप्ताह के लिए यात्रा पर बाहर जा रहे है। दोस्तों माफ करना में अपनी दीदी के बारे में आप सभी को बताना तो भूल ही गया और अब बता देता हूँ। मेरी दीदी थोड़ी लंबी और गोरी है, उसके बूब्स आकार में इतने बड़े नहीं थे, लेकिन उनकी वो गांड बहुत मस्त उभरी हुई थी और उनको एक बेटी भी है और वो शादीशुदा और एक बच्चे की माँ होने के बाद भी किसी कुंवारी लड़की जैसी नजर आती थी। अब में अपनी दीदी के कमरे में जाकर उनकी बेटी के साथ खेलने लगा और वो कुछ देर बाद नीचे चली गयी, फिर वर्षा दीदी ने हम सभी के लिए खाना बनाया और खाना खाने के बाद हम सभी बैठे हुए बातें कर रहे थे। फिर उन सभी ने मेरे घर का हालचल मुझसे पूछा और फिर मौसी ने मुझसे कहा कि में अपनी दीदी के साथ यहीं पर ही रहूँ, क्योंकि जल्दी सुबह ही वो लोग ट्रेन से बाहर जाने वाले है तुम्हे यहाँ आया देखकर हमारी आधी चिंता खत्म हो गई और अब हम आराम से जा सकते है, क्योंकि घर की हमे पीछे से कोई भी चिंता अब नहीं होगी।
फिर हम सभी लोग बातें खत्म करके सोने के लिए चले गये और उसी समय जब में जा रहा था, तभी दीदी ने मुझसे कहा कि में उनके साथ ही कमरे में सो जाऊं। अब मैंने उनको तुरंत हाँ कर दिया और में साथ ऊपर वाले उनके कमरे में सोने चला गया, रात को बहुत देर तक हम दोनों बैठकर इधर उधर की बातें कर रहे थे। फिर मैंने कुछ देर बाद दीदी से उनके पति के बारे पूछा, लेकिन वो मेरे मुहं से अपने पति के बारे में सुनते ही तुरंत ही उदास हो गयी और वो अब बिल्कुल चुप हो गयी जैसे उनको कोई सांप सूंघ गया हो, उनके चेहरे से वो मुझे थोड़ी सी नाराज़ भी लगी। फिर मैंने कहा कि मुझे माफ करे मेरा आपका दिल दुखाने का इरादा बिल्कुल भी नहीं था और अब में पलंग पर लेट गया, लेकिन वो तो अब रोने लगी थी और वो कहने लगी कि उन दोनों पति-पत्नी का झगड़ा हो गया है। अब वो मुझसे कहने लगी कि हमारे बीच यह झगड़ा उनको बेटी होने की वजह से हुआ है, क्योंकि उनके पति और सास को मुझसे एक बेटा चाहिए था, लेकिन पहली बार ही बेटी होने की वजह से हमारे बीच झगड़ा हुआ था और इस वजह से वो अपनी माँ के घर वापस चली आई। अब वो अपनी बात को खत्म करके दोबारा रोने लगी थी, उनको रोता देख मुझे उनके ऊपर दया आ गई।
फिर मैंने उनको पानी लाकर दे दिया और में उनको चुप करवाने लगा था, कुछ देर के बाद हम दोनों सो गये। फिर दूसरे दिन सुबह जब में उठा तब मैंने देखा कि मेरी मौसी और मौसाजी अब तक जा चुके थे और मेरी दीदी उस समय रसोई में काम कर रही थी। फिर कुछ देर बाद हम दोनों ने साथ में बैठकर नाश्ता किया और उसके बाद हम दोनों वापस ऊपर वाले कमरे में चले गये और तभी मुन्नी रोने लगी। अब में उसको चुप करवाने के लिए उसको अपनी गोद में उठाकर उसके साथ खेलने लगा, लेकिन वो चुप ना होकर अब और भी ज़ोर से रोने लगी थी। फिर दीदी ने उसको मेरे पास से अपनी गोद में ले लिया और उन्होंने मुझसे कहा कि मुन्नी को भूख लगी है इसलिए वो इतना रो रही है, उसका दूध पीने का समय हो चुका है, इसलिए उसको अब दूध पिलाना पड़ेगा और तब जाकर ही वो चुप होगी। दोस्तों उस समय मेरी दीदी ने गाउन पहना हुआ था और फिर दीदी ने तुरंत नीचे बैठकर मेरे ही सामने अपने गाउन के ऊपर के दो तीन बटन को खोलकर अपना एक बूब्स उस खुले हिस्से से बाहर निकालकर मुन्नी के मुहं में अपने एक निप्पल को दे दिया।
अब मुन्नी उस निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसने लगी थी और में बस वही सब बड़े ध्यान से देख रहा था, क्योंकि मैंने पहली बार किसी को इतना पास से बच्चे को दूध पिलाते हुए और किसी के गोरे गोल बूब्स को अपनी आँखों से देखा था, इसलिए में बड़ा चकित था। फिर कुछ देर बाद दीदी ने मेरी तरफ अपनी नजर को उठाकर देखा और दीदी ने मुझसे पूछा कि तुम ऐसे क्या घूरकर देख रहे हो? अब में उनके मुहं से यह सवाल सुनकर शरमा गया। फिर तुरंत ही मैंने अपनी नजर को नीचे झुका लिया था और में उनको कहने लगा कि कुछ नहीं और फिर में उस कमरे से बाहर जाने लगा था। फिर दीदी ने उसी समय मुझसे कहा कि तुम यहीं रहो, तुम्हे कहीं नहीं जाना और में उनकी यह बात सुनकर वापस बैठ गया और उस समय मैंने अपनी झुकी नजर से चोरी छिपे देखा कि दीदी ने आज अपने उस गाउन के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी। अब मेरी दीदी के बूब्स को मुन्नी बड़े मज़े से चूस रही थी और कुछ देर दूध पीने के बाद मुन्नी बिल्कुल शांत हो गयी और शायद वो पेट भरने की वजह से चुप थी। फिर दीदी ने मुझसे कहा कि तुम बैठकर कुछ देर इसके साथ खेलो, तब तक में नहा लेती हूँ और फिर वो मुझे अपनी बेटी के पास छोड़कर नहाने चली गयी और में मुन्नी के साथ खेलने मस्ती करने लगा था।
फिर दीदी थोड़ी देर के बाद नहाकर बाथरूम से बाहर आ गई और फिर में बस उन्हे देखता ही रहा गया, क्योंकि दीदी ने उस समय अपने गोरे चिकने बदन पर सिर्फ़ टावल ही लपेटा हुआ था और उनके वो खुले हुए लंबे काले बाल बहुत सुंदर थे वो उस गोरे बदन की सुंदरता को कुछ ज्यादा ही बढ़ा रहे थे, इसलिए मेरी दीदी उस समय क्या मस्त लग रही थी। अब पहली बार अपनी दीदी का वो कामुक द्रश्य उनका आधा नंगा बदन देखकर मेरे अंदर एक झनझनाहट होने लगी थी और में बस उनके गोरे चिकने पैर और जांघो को ही देख रहा था, जिसके वजह से मेरे अंदर की जवानी अंगड़ाई लेने लगी थी। दोस्तों उस द्रश्य को देखकर मेरा मुहं पूरा खुला ही रह गया और वो कब मुझे देखने लगी थी मुझे यह भी पता नहीं रहा, मेरी नजरे अपनी दीदी के बदन को अपनी खा जाने वाली नजरों से देख रही थी, क्योंकि मेरे साथ ऐसा सब पहली बार हो रहा था। फिर दीदी ने मुझे अपने पास बुलाया, तब जाकर मैंने उनकी आँखों में झांककर देखा और में शरमा सा गया और वो मेरी तरफ देखकर हंस रही थी। दोस्तों उसी समय मेरा लंड पूरा तनकर खड़ा हो चुका था और मेरी इच्छा हो रही थी कि में अभी अपनी दीदी की चुदाई कर दूँ और मेरे झटके देते हुए लंड ने मुझे बड़ा मजबूर किया, लेकिन मुझे बड़ा डर भी लग रहा था और इसलिए में चुप ही रहा।

Sunday, December 23, 2018

ऑफिस के लड़के ने मेरी इच्छा को पूरा किया

मेरा नाम सुजाता है मैं दिल्ली की रहने वाली हूं, मेरी उम्र 29 वर्ष है। मेरी शादी को एक वर्ष हो चुका है, मेरे पति का नाम राजेश है। मैं आपसे रिश्ते से बिल्कुल भी खुश नहीं हूं क्योंकि मेरे ससुराल वाले मुझ पर दहेज के लिए हमेशा ही दबाव बनाते रहते हैं, वह कहते हैं कि तुम्हारे घर वालों ने हमें कुछ भी नहीं दिया। मैं हमेशा उन्हें कहती हूं कि जितना वह दे सकते थे उन्होंने उससे ज्यादा ही आप लोगों को दिया है परंतु उसके बावजूद भी मेरे ससुराल पक्ष वाले बिल्कुल भी मेरी बात नहीं सुनते और हमेशा ही मुझे कुछ ना कुछ बात पर ताने मरते रहते हैं। पहले मुझे लगा कि मेरे पति का व्यवहार अच्छा होगा। मुझे उनके साथ रहते हुए एक वर्ष हो चुका है तो उसके बाद मुझे पता चला कि मेरे पति का नेचर भी ऐसा ही है लेकिन वह भी दहेज के लालची हैं और वह मुझ पर बहुत दबाव बनाते हैं इसलिए मैं बहुत ज्यादा तनाव में रहती हूं परंतू यह बात मैंने अपने घर पर नहीं बताई क्योंकि मुझे लगा की वह लोग परेशान हो जाएंगे।
मेरी एक छोटी बहन और है उसकी शादी भी अभी होनी है यदि मैंने उन्हें घर पर अपने बारे में बता दिया तो वह परेशान हो जाएंगे। मेरी बहन के लिए भी रिश्ते आने लगे थे इसी वजह से मैंने उन्हें घर में कुछ भी नहीं बताया। मैं तनाव में थी और मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गई थी। मेरे और राजेश के बीच में बिल्कुल भी बातें नही हो रही थी इसी वजह से मैं बहुत परेशान हो गई थी। मुझे कई बार ऐसा लगता था कि मैंने यह शादी कर के बहुत बड़ी गलती की है क्योंकि मेरे ससुराल वालों ने मुझसे सब कुछ झूठ कहा था। मेरे पति किसी बड़ी कंपनी में नौकरी नहीं करते, बल्कि वह एक छोटी सी कंपनी में नौकरी करते हैं और ना ही उनके तनख्वाह इतनी ज्यादा है कि वह घर का खर्चा चला पाए। मेरे पति घर में एकलौते हैं लेकिन उनकी नौकरी अच्छी नहीं है और ना ही मेरे ससुराल पक्ष वाले आर्थिक रूप से इतने सक्षम है कि वह कुछ भी अपने पैसों से खरीद सके इसीलिए वह बार-बार मुझे ही परेशान करते रहते हैं।
मेरे पिताजी बैंक में हैं और मेरी मां भी घर में सिलाई का काम करती हैं इसीलिए मेरे पिताजी से जितना हो सकता था उन्होंने शादी में खुलकर खर्चा किया। किसी भी चीज में उन्होंने कमी नहीं रखी लेकिन उसके बावजूद भी मेरे ससुराल पक्ष वाले बिल्कुल भी खुश नहीं थे और कहने लगे कि तुम्हारे घर वालों ने शादी में हमारी बिल्कुल भी खातिरदारी नहीं की। एक दिन हम लोगों का इतना ज्यादा झगड़ा बढ़ गया कि मैंने उस उस दिन अपने घर पर फोन कर दिया और जब मैंने अपने पिताजी को यह बात बताई तो वह भी बहुत गुस्सा हो गए और मुझे कहने लगे कि तुमने इतने समय से हमें यह सारी बातें क्यों नहीं बताई। मेरे पिताजी को पता है कि मेरा व्यवहार बिल्कुल भी झगड़ालू किस्म का नहीं है, मैंने आज तक कभी भी किसी के साथ झगड़ा नहीं किया।  मैं बहुत ही शांत स्वभाव की हूं इसीलिए मेरे पिताजी ने मुझे कहा कि तुम घर आ जाओ उसके बाद मैं उन लोगों से बात कर लूँगा। मैं उस दिन अपने घर चली गई और उसके बाद राजेश मुझे फोन करते रहे लेकिन मैंने उनका फोन नहीं उठाया। शाम को जब मेरे पिता जी ऑफिस से लौटे तो उन्होंने मुझसे सब कुछ पूछा, मैंने उन्हें बताया कि वह लोग मुझे काफी समय से दहेज के लिए परेशान कर रहे हैं लेकिन मैं आपको बिल्कुल भी बताना नहीं चाहती थी इसीलिए मैंने आपको कभी इसके बारे में जानकारी नहीं दी, लेकिन अब मुझे लगने लगा था कि शायद अब कुछ ज्यादा ही झगड़े होने लगे हैं इस वजह से मैंने आपको फोन किया। जब मैंने अपने पिताजी को यह सारी बात बताई तो उन्होंने गुस्से में मेरे पति को फोन कर दिया और कहने लगे कि तुम लोगों ने हमारे साथ धोखा किया है और मैं तुम्हारी कंप्लेंट अब मैं पुलिस में करूँगा। मेरे पति उनके सामने गिड़गिड़ाने लगे और कहने लगे कि आप मुझसे एक बार मिल लीजिए उसके बाद ही हम लोग इस बारे में बात कर पाएंगे लेकिन मेरे पिताजी उनकी एक भी बात सुनने को तैयार नहीं थे। उसके बाद उन्होंने पुलिस में कंप्लेंट करवा दी। जब पुलिस में कंप्लेंट हुई तो उसके बाद वह लोग भी थाने में आ गए और वहां बैठकर वह मेरे पिता जी से माफी मांगने लगे।
मेरी सास मुझसे कहने लगे कि हमने तो तुमसे कभी भी झगड़ा नहीं किया और ना ही तुम्हें कभी भी किसी प्रकार की तकलीफ दी है लेकिन मैंने उन्हें कहा मैंने तो आपको हमेशा ही अपनी मां की तरीके से माना परंतु आपने कभी भी मुझे अपनी बेटी की तरह नहीं माना और हमेशा ही मुझ पर दहेज के लिए दबाव बनाते हो। मेरे पिताजी ने बिल्कुल भी राजेश की बात नहीं सुनी और उन्होंने पुलिस में कंप्लेंट दर्ज करवा दी। उसके बाद जब पुलिस ने जांच की तो जितना भी हम लोगों ने उन्हें दहेज दिया था वह सब उन्होंने हमें लौटा दिया, उन्होंने अपने रिश्तेदारों से भी पैसे लेकर हमें वह वापस कर दिए। अब मेरा राजेश के साथ कोई भी संबंध नहीं था और ना ही मुझे उससे कोई मतलब था लेकिन मैं अपने घर में बहुत ही परेशान थी, मुझे कई बार लगता था कि अब मेरा क्या होगा। मेरी वजह से कहीं मेरी छोटी बहन पर भी कोई दिक्कत ना आ जाए और कहीं उसके लिए रिश्ते आने बन्द ना हो जाये,  लेकिन मेरे माता-पिता ने कभी भी मुझे इस चीज का एहसास नहीं होने दिया और धीरे-धीरे मैं इन सब चीजों से उभरने लगी। मैं घर पर ही थी तो मैंने सोचा कि मैं कहीं नौकरी कर लेती हूं इसीलिए मैंने एक कंपनी ज्वाइन कर ली। वहां पर मैं अकाउंट का काम संभालने लगी थी। उसी ऑफिस में एक लड़का भी काम करता है, उसका नाम विमल है।
विमल और मेरे बीच में काफी नजदीकियां होने लगी थी और जब उसे मेरे बारे में पता चला कि मेरा डिवोर्स हो चुका है तो वह मुझसे पूछने लगा कि यह सब कैसे हुआ। मैंने उसे बताया कि मेरे ससुराल वाले मुझे दहेज के लिए बहुत परेशान करते थे इसीलिए मैंने डिवोर्स ले लिया और अब मैं अपने घर पर ही रहती हूं। विमल का नेचर बहुत ही अच्छा और शांत है वह ऑफिस में ज्यादा किसी से बात नहीं करता,  वह सिर्फ अपने काम से ही मतलब रखता है। मुझे भी विमल अच्छा लगने लगा था और धीरे-धीरे हम दोनों में नजदीकियां पड़ने लगी। वह भी मुझे एक्सेप्ट करने को तैयार था और उसने मेरे पिताजी से भी इस बारे में बात की। मेरे पिताजी ने भी उसे मना नहीं किया और हम लोगों की रिश्ते की बात आगे बढ़ने लगी लेकिन मैंने विमल से कहा कि मुझे कुछ समय और चाहिए। उसके बाद ही मैं तुमसे शादी का फैसला कर पाऊंगी क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि जो गलती मैंने पहले की है। वह इस बार मैं दोबारा करू। राजेश ने भी मुझ से बहुत कुछ चीजें छुपाई थी इसीलिए मैंने यह मैंने उससे साफ कह दिया और कहा कि पहले मुझे तुम्हारे साथ कुछ वक्त बिताना है, उसके बाद ही मैं तुमसे शादी करूंगी। विमल को भी इससे कोई भी आपत्ति नहीं थी और अब हम दोनों ही साथ में समय बिताने लगे। हम लोग जब भी ऑफिस से फ्री होते तो कुछ समय विमल और मैं साथ में ही कहीं पर बैठ जाया करते थे और काफी देर हम लोग बात करते थे। विमल मुझे हमेशा ही मेरे घर पर छोड़ने आता था और मैं विमल के घर वालों को भी मिल चुकी थी लेकिन उसके घर पर मेरा इतना आना जाना नहीं था। विमल का हमारे घर पर काफी आना जाना था। मेरे माता-पिता विमल को बहुत पसंद करते हैं और वह उसकी बहुत तारीफ करते हैं। वह मुझे कहते हैं कि तुम विमल से जल्दी से जल्दी शादी कर लो क्योंकि वह बहुत ही अच्छा लड़का है और तुम्हें बहुत खुश रखेगा लेकिन मैंने अपने मम्मी पापा से कहा कि मुझे कुछ और समय चाहिए। उसके बाद ही मैं शादी करूंगी। विमल और  मेरे बीच में बहुत ही अच्छा रिलेशन है वह मुझे बहुत अच्छे से समझता है। एक दिन विमल मुझे कहने लगा कि मुझे तुमसे अकेले में बात करनी है क्या तुम मुझसे अकेले में मिल सकती हो। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुमसे अकेले में मिलत हू। उस दिन उसने मुझे अपने घर बुला लिया और जब मैं विमल के घर गई तो वह अपने कमरे में बैठा हुआ था।
उसके घर पर उस दिन कोई भी नहीं था। विमल मेरे साथ ही बैठा हुआ था और हम दोनों साथ मे बैठे हुए थे हम आपस में बात कर रहे थे और बात करते-करते विमल ने मेरी जांघो को सहलाना शुरू कर दिया और उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। जब उसने मुझे अपनी बाहों में लिया तो मुझे भी अंदर से कुछ गर्मी महसूस होने लगी। मैंने भी विमल के होठों को किस करना शुरू कर दिया मैंने उसके होठों को बहुत अच्छे से चूसा जिससे कि उसका पूरा शरीर गर्म हो गया था। उसने अपने लंड को बाहर निकाल दिया जब मैंने उसके 9 इंच मोटे लंड को देखा तो मैंने उसे अपने मुंह में ले लिया और बहुत अच्छे से चूसने लगी। मैंने उसके लंड को अच्छे से सकिंग किया तो उसे बहुत मजा आने लगा और कुछ देर बाद उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। वह मेरे स्तनों को अपने मुंह में ले रहा था तो मेरे अंदर से गर्मी बाहर आती और मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। उसने मेरी योनि को भी काफी देर तक चाटा जब वह मेरी चूत को चाट रहा था तो मेरी योनि से पानी निकलने लगा। जब उसने अपने मोटे लंड को मेरी योनि में डाला तो मुझे बहुत दर्द महसूस हुआ। मैंने अपने दोनों पैरो को चौडा कर लिया विमल मुझे बड़ी तेजी से झटके देने लगा। मैंने काफी समय बाद किसी के साथ सेक्स किया था इसलिए मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और मैं उसका पूरा साथ दे रही थी। मैं अपने मुंह से मादक आवाज निकल रही थी और वह मुझे तेजी से धक्के मार रहा था। उसने मुझे इतने तेज धक्के मारे कि मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ और जब मैं झड़ने वाली थी तो मैंने अपने दोनों पैरों से विमल को जकड़ लिया। जैसे ही उसका वीर्य मेरी योनि में गया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा और हम दोनों एक दूसरे को पकड़कर लेटे गए।

पड़ोस की लड़की का डर

मेरा नाम राहुल है मैं जयपुर का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 27 वर्ष है। मैं अपने पिताजी के साथ ही उनकी दुकान पर काम करता हूं, मुझे उनके साथ काम करते हुए दो वर्ष हो चुके हैं। मैंने जब से अपनी पढ़ाई पूरी की है उसके बाद से मैं उन्हीं के साथ काम कर रहा हूं। मेरे पिताजी की बहुत ही पुरानी दुकान है और उस पर वह काफी समय से काम कर रहे हैं। मेरी मां घर का काम संभालती हैं और मेरी छोटी बहन अभी स्कूल में ही पढ़ रही हैं। मैं अब अपनी दुकान का काम अच्छे से संभालने लगा था इसलिए मेरे पिताजी कई बार काम से बाहर भी चले जाते थे और मैं दुकान पर काम देखा करता था। मुझे भी अब काफी लोग पहचाने लगे थे क्योंकि मुझे काम करते हुए काफी समय हो चुका था। बीच बीच में मैं अपने दोस्तों को भी फोन कर लिया करता था और उनसे उनके हाल-चाल पूछ लेता था। जब कभी मेरे दोस्तों का मुझे फोन आता तो वह कहते कि तुम तो बहुत ही व्यस्त रहने लगे हो और तुम्हारे पास बिल्कुल भी समय नहीं है।
मैंने उन्हें कहा कि अब मैं दुकान पर ही रहता हूं इसलिए मुझे समय नहीं मिल पाता। सुबह मैं घर से निकल जाता हूं और शाम को ही मेरा घर लौटना होता है। मेरे कॉलेज में जितने भी लड़के थे वह सब नौकरी कर रहे हैं और जब कभी वह मुझे मिलते हैं तो मुझे बहुत खुशी होती है। मैं जिस कॉलोनी में रहता हूं उस कॉलोनी में ही मेरे सामने वाले घर में एक लड़की रहती है, उसका नाम सुमन है। सुमन अक्सर हमारी दुकान में आती है और वह हमसे ही सामान लेकर जाती है। सुमन बिहार की रहने वाली है और वह जयपुर में किसी सरकारी विभाग में काम करती है। मैं जब भी सुमन को देखता हूं तो मुझे उसे देख कर बहुत अच्छा लगता है। उसका रंग सांवला सा है लेकिन वह दिखने में बहुत ही सुंदर है। वह जब भी हमारी दुकान में आती तो मैं उसे देखकर बहुत खुश होता था और वह भी मुझसे मिलकर बहुत खुश होती थी। मैं कई बार उसके साथ मजाक भी कर देता था लेकिन उसे कभी भी बुरा नहीं लगता था।
जब कभी उसे कुछ सामान मंगवाना होता था तो वह मुझे ही फोन कर देती थी और कहती थी की तुम अपनी दुकान से मुझे सामान भिजवा दिया करो एक बार मैं रात को घर देरी से आया और जब मैं घर पहुंचा तो मैंने देखा कोई व्यक्ति हमारी कॉलोनी में इधर-उधर घूम रहा है, मुझे उस पर शक हुआ और जब मैं अपने घर में गया तो वह हमारे पड़ोस में ही रहने वाली आंटी के दरवाजे से झांक रहा था। मैंने देखा कि वह उनके दरवाजे की कुंडी को तोड़ रहा है, मैंने रात को जैसे ही उन आंटी को आवाज मारी तो वह वहां से भाग गया। जब वह भाग रहा था तो उसे लोगों ने पकड़ लिया और उसके बाद हमारी कॉलोनी के लोगों ने उससे पूछा कि तुम कहां से आये हो, वह सबको हाथ जोड़ने लगा और मेरे पिताजी ने कहा कि इसे पुलिस के हवाले कर दो, उन्होंने पुलिस स्टेशन में फोन कर दिया। जब पुलिस आई तो वह उसे अपने साथ ले गई। उसके बाद उन्होंने मुझे धन्यवाद कहा और कहा कि यदि तुम समय पर मुझे आवाज नहीं लगाते तो शायद वह व्यक्ति हमारे घर पर चोरी कर लेता क्योंकि वह आंटी भी घर पर अकेली रहती हैं इसीलिए वह बहुत डर गई थी। हमारे कॉलोनी के सब लोग बाहर इकट्ठा हो गए और आपस में बात करने लगे। सुमन भी बाहर ही थी। सब लोग आपस में बातें कर रहे थे और उसके बाद सब लोग अपने अपने घरों में चले गए। सुमन ने मुझे कहा कि तुमने बहुत ही अच्छा काम किया है यदि तुम समय पर आंटी को नहीं बताते तो शायद उनके घर पर चोरी हो जाती। उस दिन मैंने सुमन से भी काफी बात की है। रात भी काफी हो चुकी थी और मुझे सुबह अपने काम पर भी जाना था इसीलिए मैं अपने घर चला गया। जब मैं सोया तो सुबह मेरी नींद नहीं खुली और मैं लेट से उठा लेकिन मैं जल्दी से तैयार होकर अपनी दुकान में चला गया। मेरे पिताजी दुकान में ही बैठे हुए थे, वह कहने लगे आज तुम देरी से उठे, मैंने उन्हें कहा कि आज मेरी आंख नहीं खुली इस वजह से मुझे उठने में देरी हो गई। उन्होंने कहा कोई बात नहीं, उसके बाद मैं उनके साथ दुकान पर ही बैठा रहा। मैं उनके साथ दुकान पर काम करने लगा और कुछ देर बाद मेरे पिताजी कहने लगे कि मैं किसी काम के सिलसिले में बाहर जा रहा हूं, तुम काम संभाल लो, मुझे आने में लेट हो जाएगी। मैंने उन्हें कहा ठीक है आप चले जाइए, मैं दुकान पर काम संभाल लेता हूं।
उसके बाद मेरे पिताजी दुकान से चले गये और मैं दुकान पर ही बैठा हुआ था। उस दिन जब मैं घर लौटा तो मुझे सुमन दिखी और वह भी मुझसे बात करने लगी। हम लोग बैठकर काफी बातें कर रहे थे। हमारे कॉलोनी के बाहर पर ही एक बैठने की सीट है हम उस पर ही बैठे हुए थे और वह मुझसे काफी बात कर रही थी। मुझे भी सुमन से बात करके अच्छा लगा और वह मुझे कहने लगी कि कल की बात से मैं बहुत डर गई हूं। वह कहने लगी कि मैं भी अकेली ही रहती हूं इसलिए मुझे भी बहुत डर लगता है। मैंने उससे कहा कि डरने की कोई बात नहीं है क्योंकि यह घटना हमारी कॉलोनी में पहली बार ही हुई थी और सुमन को भी हमारे कॉलोनी में रहते हुए काफी समय हो चुका है। मैंने उसे कहा कि तुम्हें डरने की आवश्यकता नहीं है, हमारी कॉलोनी में आज तक कभी भी इस प्रकार की घटना नहीं हुई, यह पहली बार ही हुआ है। उस दिन हम लोग काफी देर तक बैठे रहे, उसके बाद मैं अपने घर चला गया। जब मैं घर गया तो मेरी मां ने मेरे लिए खाना बनाया हुआ था। मैंने हाथ मुंह धो कर खाना खाया और उसके बाद मैं अपने कमरे में चला गया। मैं कुछ देर अपने कमरे में बैठा हुआ था। उसके बाद मैं छत में चला गया क्योंकि उस दिन गर्मी बहुत हो रही थी इसलिए मैं छत में ही टहलने लगा।
जब मैं छत में टहल रहा था तो मैंने सुमन की खिड़की पर देखा तो वह भी अंदर अपने रूम में कुछ काम कर रही थी और कुछ देर बाद वह छत पर आ गई। जब वह छत पर आई तो मैंने उसे फोन कर दिया, वह भी मुझसे फोन पर बात करने लगी। मुझे सुमन से फोन पर बात करते हुए अच्छा लग रहा था और मैं उससे काफी देर तक बात कर रहा था। मैंने सुमन से पहली बार ही इतनी फोन पर बात की थी और उसे भी मुझसे फोन पर बात करना अच्छा लगने लगा क्योंकि उसे बहुत डर लग रहा था। वह मुझसे बार-बार इस बात का जिक्र कर रही थी कि मुझे कल से बहुत ज्यादा डर लग रहा है। मैंने उसे कहा कि तुम बिल्कुल भी उसकी चिंता मत करो, तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है। मैंने उस दिन उसके घर के बारे में भी पूछ लिया। उसने मुझे बताया कि उसके पिताजी स्कूल में अध्यापक हैं और उसके भैया किसी प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। हम दोनों फोन पर बात कर रहे थे और बात करते करते हम दोनों एक दूसरे से अश्लील बातें करने लगे और मेरा भी मन बहुत खराब होने लगा। मैंने सुमन से कहा कि मैं तुम्हारे घर पर आ रहा हूं। वह कहने लगी ठीक है मैं अपने घर का दरवाजा खोल देती हूं और तुम अंदर आ जाना। उसके कमरे मे जाने के लिए एक छोटा सा गेट था इसलिए उसके मकान मालिक को कुछ भी पता नहीं चला और मैं उस गेट के रास्ते उसके कमरे में चला गया। जब मैं सुमन के कमरे में गया तो वह मुझे कहने लगी तुम तो बहुत ही जल्दी मेरे कमरे में आ गए। मैंने सुमन को किस करना शुरू कर दिया और किस करके मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया उसका शरीर मेरी बाहों में था और मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया उसके स्तन बड़े थे मुझे उसे दबाने में मजा आ रहा था। मैंने जब उसकी गांड को दबाया तो उसे अच्छा लगने लगा और मैंने उसे नंगा कर दिया। जब मैने उसे नंगा किया तो मुझे उसका बदन देखकर अच्छा लगा। उसने मेरे लंड को मेरे लोअर से बाहर निकालते हुए अपने मुंह में ले लिया वह मेरे लंड को बहुत अच्छे से अपने मुंह में ले रही थी मुझे भी अच्छा महसूस होने लगा।
मैंने उसे उठाते हुए उसके बिस्तर पर पटक दिया और उसके स्तनों को चूसने लगा मुझे उसके स्तनों को चूसने में बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने उसके पूरे शरीर का रसपान किया उसके बाद मैंने उसकी योनि पर जैसे ही जीभ लगाई तो उसकी योनि बड़ी ही चिकनी और मुलायम थी उसकी योनि से पानी बाहर आने लगा था वह भी पूरे मूड में आ गई। जैसे ही मैंने उसकी योनि में अपने लंड को डाला तो वह चिल्लाने लगी और अपने पैर को चौड़ा करने लगी मैंने भी उसे बड़ी तेजी से चोदाना शुरू कर दिया। वह मुंह से मादक आवाज निकल रही थी वह कह रही थी तुम्हारा बहुत ही ज्यादा मोटा है मुझे तुम्हारा लंड अपनी योनि में लेने में बहुत मजा आ रहा है। मुझे नहीं पता था कि सुमन की योनि से खून निकल जाएगा जब मैंने उसकी चूत को देखा तो उससे खून निकल रहा था। मैंने उसे बड़ी तेज झटके मारे उन झटको के बीच में मेरा वीर्य गिरने वाला था मैंने अपने लंड को सुमन के चूचो पर गिरा दिया उसने अपने चूचो को साफ किया और उसके बाद मैंने उसे घोड़ी बना दिया। जैसे ही मेरा लंड सुमन की योनि में गया तो वह चिल्लाने लगी और उसे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा। मैंने भी उसे बड़ी तेजी से झटके देना शुरू कर दिया और उसका शरीर भी पूरी तरीके से गर्म हो चुका था। वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और कह रही थी तुम बड़े ही अच्छे से मुझे धक्के मार रहे हो मुझे बहुत मजा आ रहा है। लेकिन उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर निकलने लगी जब मेरा वीर्य उसकी योनि में गिरा तो उसे बहुत अच्छा महसूस होने लगा मैं उसी के ऊपर लेट कर सो गया।