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Tuesday, December 25, 2018

मेरी दोस्त की कज़न की चूत

hot ladki
हेल्लो दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है। आशा करता हूँ आप सबको यह कहानी पसन्द आएगी। मेरा नाम रोबिन है। मै साउथ दिल्ली के एक पोर्श कोलोनी मे रहता हूँ। मेरी हाइट 5″11 है और मै रोज़ जिम जाता हूँ। मेरे लन्ड की लम्बाई 7″ है और चौडाई 2.5″ है।
यह कहानी मेरी और मेरी दोस्त की कज़न की है जिसका नाम स्नेहा है। यह बात आज से एक साल पहले की है। मेरे साथ ओफ़िस मे एक लडकी काम करती थी जिससे मेरी रोज़ बात होती थी और जल्द ही हम अच्छे दोस्त बन गए।
मगर उसका पहले से ही एक बोय्फ़्रेन्ड था तो मेरी उसके साथ दाल नही गली।फ़िर कुछ टाइम बाद उसकी एक कज़न उसके यहाँ रहने आई जिससे उस्ने मुझे भी मिलवाया। और जब मैने उसे पहली बार देखा तो बस देखता ही रह गया। वो मेरी फ़्रेन्ड से हर मामले मे बडिया थी।
34 के बूब्स और 36 की गान्ड जिसे मै बस देखता ही रह गया। इतने मे मेरी फ़्रेन्ड ने मुझसे बोला नम्बर ले लेना जिस दिन मेरे बिना मिलने आओगे उस दिन आराम से घूरते रहना। जिसके बाद मैने बोला की नही मै तो बस यही सोच रहा था कि इतनी सुन्दर तेरी कज़न कैसे हो सकती है।
उस दिन के बाद उस्ने मुझे एक-दो बार फ़िर अपनी कज़न से मिलवाया जिसके बाद हमने भी एक-दूसरे का नम्बर ले लिया और फ़िर मेरी उससे फोन और मैसेज पे बाते शुरू हो गई। ऐसे ही कुछ दिन बीत गए फ़िर एक दिन मैने और उसने मिलने का प्लान बनाया और हम सफ़दजन्ग टोम्ब मे मिले। फ़िर कुछ देर इधर उधर की बात करने के बाद मैने उसे आई रेयली लाइक यू एन्ड आई लव यू बोल दिया।
उसका अजीब फ़ेस रिएक्शन देख के एक बार को तो मुझे लगा की कही उसे बुरा तो नही लगा लेकिन फ़िर जब उस्ने भी स्माइल करते हुए आइ लव यू टु बोला तो मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा फ़िर जल्दी से हम दोनो एक दुसरे के गले लग गए और फ़िर जैसे ही उसके 34 के बूब्स मेरी छाती पे गडने लगे तो मुझसे सब्र नही हुआ और मैने अपने हौन्ट उसके हौन्टो पे रख दिए और वो भी शायद इसी के इन्तज़ार मे थी।
फ़िर मैने धीरे से अपना एक हाथ उसके बूब्स पे रख दिया पहले तो उसने मेरा हाथ हटा दिया लेकिन जब मैने दोबारा अपना हाथ रखा तो इस बार उसने कुछ नही बोला। तो फ़िर मैने अपने दोनो हाथ उसके बूब्स पे रख दिये और आराम-आराम से दबाने लगा। मन तो कर रहा था कि बस अभी पकड के चोद दू लेकिन वहा पे इससे ज़्यादा कुछ नही हो सकता था।
फ़िर कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा कभी सफ़दरजग टोम्ब तो कभी अनसल प्लाज़ा मौल के पीछे वाले पार्क मे और फ़िर वो दिन भी आ ही गया जब मैने उसकी जमके चुदाई की। एक दिन हमने मेरे दोस्त के फ़्लैट पे मिलने का प्रोग्राम बनाया।
उस दिन मैने उसे मैटरो स्टेशन से पिक किया और अपने दोस्त के फ़्लैट पे ले गया। रास्ते मे मैने उसके लिये वोडका और खाने का सामान भी ले लिया था।
फ़िर जैसे ही हम उसके फ़्लैट पे पहुचे तो वो अपने फ़्लैट से निकल गया क्युकि मैने उसे पहले ही बोल दिया था कि तू मूवी देखने निकल जाइयो। फ़िर उसके जाते ही मैने वोडका के दो लार्ज पैग बनाए और दो-दो पैग मारने के बाद मै उसके बगल मे जाके बैठ गया और अपने हौन्ट उसके हौन्टो पे रख दिये और वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी।
दस मिनट की चूसा-चासी के बाद मैने उसकी शर्ट उतार दी और ब्रा को उपर करके उसका एक बूब्स अपने मुह मे ले लिया जिससे उसके मुह से कुछ आवाज़े निकलने लगी। उसके बाद मैने एक-एक करके उसके दोनो बूब्स चूसे। फ़िर मैने उसकी ज़ीन्स भी उतार दी और उसकी चूत को पैन्टि के उपर से ही चूसने लगा जिससे उसकी सिसकारिया बडने लगी।
फ़िर मैने उसकी पैन्टि भी उतार दी और खुद भी पूरा नन्गा हो गया मैने फ़िर से उसकी चूत पे अपना मूह रख दिया और वो मेरा मूह अपनी चूत पे दबाने लगी और ज़ोर-ज़ोर से सिसकारने लगी। 5-6 मिनट की चुसाई मे उसने अपना रस छोड दिया जिसे मैने उसकी चूत और गान्ड पे फ़ैला दिया।
उसके बाद मैने अपना लन्ड उसके हाथ मे दे दिया और आगे पीछे करने को बोला और वो बडे मज़े से मेरे लन्ड को आगे पीछे करने लगी। फ़िर जब मैने उसे मूह मे लेने के लिए बोला तो पहले तो वो मना करने लगी फ़िर मेरे ज़ोर देने पे वो राज़ी हो गयी उसने सुपाडे तक ही मूह मे लिया और आगे पीछे करने लगी लेकिन ये उसका फ़र्स्ट टाइम था इसलिए वो सही से नही कर पा रही थी फ़िर मैने अपना लन्ड उसके मूह से निकाल के उसकी चूत पे रख दिया और घिसने लगा जिससे वो तडपने लगी और बोलने लगी कि अब नही रहा जाता प्लीज़ जल्दी से अन्दर डाल दो।
फ़िर मैने एक झटका मारा तो मेरा लन्ड फ़िसल गया उसकी चूत कुछ ज़्यादा ही टाइट थी फ़िर मैने पहले जाके तेल उठाया जिसे मैने अपने लन्ड और उसकी चूत पे अच्छे से लगाया। फ़िर मैने दोबारा अपना लन्ड उसकी चूत पे रखा और एक ज़ोर से झटका मारा और मेरा सुपाडा उसकी चूत मे घुस गया और उसके मूह से चीख निकली जिसे मैने अपना मूह रख के दबा दी।
फ़िर 3-4 मिनट रुक के जब वो कुछ शान्त हुई तो मैने सान्स खीच के फ़िर से एक झटका मारा और मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत मे चला गया और उसकी तो जैसे हालत ही खराब हो गई उसकी आन्खो से आन्सू बहने लगे फ़िर कुछ मिनट तक मै वैसे ही उसे चूसता रहा और उसके बूब्स दबाता रहा।
फ़िर जब उसका दर्द कम हो गया तो मै आराम-आराम से अपना लन्ड अन्दर बाहर करने लगा और फ़िर जब उसे भी मज़े आने लगे तो वो भी नीचे से कमर हिलाने लगी जिसके बाद मैने भी अपनी स्पीड बडा दी और कुछ ही देर मे जब मेरा निकलने को हुआ तो मैने अपना सारा माल उसकी चूत मे ही छोड दिया और उसका माल भी मेरे साथ ही निकल गया।
फ़िर मैने जल्दी से बेड शीट चेन्ज़ करके वाशिन्ग मशीन मे डाल दी क्योकि उसपर उसकी चूत से निकला खून लग गया था| इसके बाद मैने दो बार और उसकी चूत मारी। तो दोस्तो ये थी मेरी और स्नेहा की पहली चुदाई की दास्ता। उम्मीद करता हू आपको मेरी कहानी पसन्द आयी होगी

Sunday, December 16, 2018

मामी की जवानी के मजे लिए

मेरा नाम संजय है और मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से आता हूं। मेरी उम्र 26 वर्ष हो चुकी है। हमारे यहां पर नौकरियां नहीं है इस वजह से मैंने अपने मामा को फोन किया और कहा कि मुझे वह शहर में ही नौकरी लगा दें। उन्होंने मुझे कहा कि तुम एक काम करो, तुम मेरे पास आ जाओ मैं तुम्हें नौकरी लगा दूंगा। वैसे भी हम लोग घर पर अकेले हैं। मेरे मामा का नाम धीरेंद्र है और वह जयपुर में रहते हैं। उनकी पत्नी का नाम मीना है और वह भी बहुत अच्छे हैं। उनके दोनों बच्चे सरकारी नौकरी हैं। इस वजह से वह घर पर नहीं रहते हैं और वह घर पर अकेली हैं। मैंने अपने पिताजी से बात करी तो वह कहने लगे कि तुम शहर ही चले जाओ। क्योंकि वहां पर तुम अच्छी नौकरी भी मिल जाएगी और तुम अपने हिसाब से काम भी कर पाओगे।
मैंने भी पूरा फैसला कर लिया था और मैं जयपुर चला गया। जब मैं जयपुर गया तो मेरे मामा मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए और वह मेरे घर के हाल चाल पूछने लगे। मैंने उन्हें बताया कि घर पर तो सब ठीक है पर मेरी स्थिति कुछ ठीक नहीं चल रही। क्योंकि मुझे अपने यहां पर कोई भी काम नहीं मिल पा रहा है। मेरे मामा ने कहा तुम उसकी चिंता मत करो, मेरी काफी जान पहचान है। मैं तुम्हारी कहीं ना कहीं नौकरी लगवा ही दूंगा। तुम उसके लिए बेफिक्र रहो और मेरी मामी भी बहुत ज्यादा अच्छी है। उन्होंने भी मुझे कहा कि तुम्हें किसी भी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है। तुम सिर्फ अपना ध्यान रखो  अब मैं अपने मामा लोगों के साथ ही रहने लगा लेकिन कहीं ना कहीं मुझे उनके साथ रहना अच्छा नहीं लग रहा था। क्योंकि मैं सोच रहा था जब मेरी नौकरी लग जाएगी तो मैं अलग रहने लगूंगा।

मेरे मामा ने मेरे लिए नौकरी ढूंढ ली। मैं वहां पर नौकरी करने जाने लगा। उन्होंने मेरे लिए एक ऑफिस में बात की थी वहां पर मैं काम करने लगा। मुझे वहां पर काम करते हुए अब कुछ समय होने लगा था। मैंने एक दिन अपने मामा से कहा कि अब मैं अपने लिए कहीं अलग घर देख लेता हूं। आप लोगों को मेरी वजह से तकलीफ होती होगी। वह मुझ पर बहुत गुस्सा हो गए और कहने लगे कि तुम्हें कहीं भी जाने की आवश्यकता नहीं है। हम दोनों तो घर में अकेले ही हैं। यदि तुम कहीं और रहोगे तो हमें अच्छा थोड़ी लगेगा। उन्होंने मुझे इस बात के लिए साफ इनकार कर दिया और कहा कि तुम्हें बिल्कुल भी अलग नहीं रहना है। मेरे मामा बहुत ही अच्छे हैं और वह मेरा बहुत ही ध्यान रखते हैं। मुझे ऐसा लगता है कि जैसे वह मुझे अपने बच्चे की तरह रखते हैं। अब मैं अपने काम पर जाने लगा और वह जब अपने ऑफिस से वापस आ जाते तो हम लोग साथ में समय बिताते थे। एक दिन जब मामा जी ऑफिस से लौट रहे थे तो उनकी बाइक में किसी ने टक्कर मार दी और वह वहीं गिर पड़े। जिस वजह से उन्हें थोड़ा चोट आई थी  अब हमें उन्हें हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। वह हॉस्पिटल में एडमिट है क्योंकि उन पर काफी ज्यादा चोट आई थी और वह घायल भी हो गए थे।
वह कुछ दिनों तक हॉस्पिटल में ही रहने वाले थे और मैं घर पर ही सारा काम देखा करता था। मुझे उनकी बहुत ही चिंता होती थी क्योंकि हॉस्पिटल में मेरी मामी उनके साथ ही रहती थी और डॉक्टर ने उन्हें आराम करने के लिए भी कह दिया था। कुछ दिन बाद वह सही होने लगे तो डॉक्टर ने उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया और अब हम उन्हें घर पर ले आए। मैंने उनका बहुत ध्यान रखा। जिससे वह मुझे कहने लगे कि तुमने मेरा बहुत ही ज्यादा ध्यान रखा है। मैं तुमसे बहुत ही खुश हूं और मुझे बहुत ही अच्छा लगा कि जब तुमने मेरा इस तरीके से ध्यान रखा लेकिन मैं कहीं ना कहीं इस बात से दुखी था कि उन्हें बहुत ज्यादा चोट आई थी और जिसकी वजह से वह काफी समय तक अपने ऑफिस नहीं जा सकते थे। क्योंकि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी और वह ऑफिस नहीं जा सकते थे। अब मैं ही ऑफिस जाया करता था और जब मैं वापस आता हूं तो मेरी मामी मेरे लिए खाना बना कर रखती थी। क्योंकि ऑफिस से आते वक्त मुझे बहुत देर हो जाती थी। ऑफिस में मेरे अब दोस्त बनने लगे थे। जिनके साथ में उठने बैठने लगा था क्योंकि वह लोग जयपुर के ही रहने वाले थे। जैसे-जैसे मेरी दोस्ती जयपुर में ज्यादा बढ़ती गई तो अब मैं उनके साथ ही शराब पी लिया करता था। पहले मुझे शराब की लत नहीं थी परंतु अब मुझे शराब की आदत होने लगी थी। जब भी मैं ऑफिस से वापस लौटता था तो मैं हमेशा ही शराब पीकर घर लौटता था लेकिन इस बात की भनक कभी मेरे मामा को नहीं लगी और ना ही मेरी मामी को इस बात की जानकारी थी। क्योंकि मैं जब भी घर लौटता हूं तो उनके साथ बहुत ही अच्छे से बर्ताव करता था और वह बहुत ही खुश रहते थे। क्योंकि मैं उनके हर काम कर दिया करता था। घर में जितनी भी चीजें या सामान लानी होती थी तो मैं वह सब अपनी छुट्टी के दिन ले आता था। मैं उनसे अलग रहने की भी बात नहीं कर सकता था। क्योंकि मैंने उनसे जब पहले इस बारे में चर्चा की थी तो उन्हें बहुत ही ज्यादा बुरा लगा था।
मैं अलग रहने की सोच तो रहा था क्योंकि अब मेरे दोस्त और मैं साथ मे पार्टी कर लिया करते थे। इस वजह से मैं सोचता था कि कहीं पर मैं अलग से घर ले लूँ। जिससे कि हम लोग वहीं पर पार्टी कर लिया करेंगे और मुझे अपनी लाइफ जीने में भी अच्छा लगेगा। ऑफिस में ही मेरी एक गर्लफ्रेंड बन गई थी। जिससे कि मैं फोन पर काफी देर बातें किया करता था और वह भी मुझसे बहुत देर तक फोन पर बातें किया करती थी। कई बार मेरी मामी ने मुझे फोन पर बातें करते हुए देख लिया था। परंतु फिर भी वह मुझे कुछ नहीं कहती थी और उन्होंने शायद इस बारे में मेरे मामा से भी कहा था। मेरे मामा मुझे कहते रहते की यदि तुम्हें कोई लड़की पसंद हो तो तुम मुझे बता देना। मैंने कहा नहीं, ऐसी कोई भी बात नहीं है। मुझे कोई भी लड़की पसंद नहीं है। मैं सिर्फ अपने ऑफिस से ही मतलब रखता हूं और अपने ऑफिस से सीधा घर आ जाता हूं।


मैं अपनी गर्लफ्रेंड से फोन में बात कर रहा था और मैं मुट्ठ मार रहा था। तभी मेरी मामी मेरे कमरे में आ गई और उन्होंने मुझे देख लिया। अब वह मेरे पास आई और उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया। मैं अभी भी अपनी गर्लफ्रेंड से फोन पर बात कर रहा था और वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसे जा रही थी। उन्होंने इतने अच्छे से मेरे लंड को चूसा कि मेरा वीर्य गिरने वाला था और जैसे ही मेरा वीर्य गिरा तो उन्होंने मेरे लंड को  बाहर निकालते हुए अपने कपड़े खोल दिया। वह दोबारा से मेरे लंड को हिलाने लगी अब मैंने अपना फोन काट दिया और उनकी योनि के अंदर अपना लंड डाल दिया। मैंने जब उनकी बड़ी-बड़ी चूतडो को अपने हाथ में पकड़ा तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था क्योंकि उनमें अब भी बहुत जवानी बची हुई थी। जैसे ही मैंने अपने लंड को उनकी योनि में डाला तो वह कहने लगी कि तुमने मेरी इच्छाओं को पूरा कर दिया है। इतने वर्षों से तुम्हारे मामा मेरी इच्छा पूरी नहीं कर पा रहे थे और तुमने तो मेरी इच्छाओं को अच्छे से पूरा कर दिया है। अब मैं उन्हें ऐसे ही चोदे जा रहा था और वह मेरा पूरा साथ दे रही थी। वह अपनी चूतडे मुझसे मिलाए जा रही थी। मैं भी उन्हें बड़ी तेजी से धक्के दिया जा रहा था मुझे इतना मजा आ रहा था उन्हें धक्के मारने में की मेरा शरीर पूरा गर्म हो चुका था और उनके चूतड़ों से भी आग निकलने लगी थी। मैं उनके चूत की गर्मी को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। फिर भी मैं उन्हें धक्के मारे जा रहा था पर एक समय बाद  मेरा वीर्य गिरने वाला था और वह उनकी चूत के अंदर ही गिर गया। जब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो मुझे बहुत ही मजा आया और वह मुझे कहने लगी कि अब तुम मेरी चूत हमेशा ही मारा करो। क्योंकि तुम्हारे मामा की बस की बात नहीं है इसलिए तुम ही मेरी इच्छाओं को पूरा किया करोगे। यदि तुम ऐसा नहीं करोगे तो मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड के बारे में तुम्हारे मामा को बता दूंगी अब मुझे उनकी चूत मारनी ही पड़ती है।

Wednesday, December 12, 2018

सहेली ने मुझे रंडी बनाया



सबसे पहले मैं आप सबको बता देती हूँ कि मेरा नाम सीमा है. मेरी उम्र 40 साल की है. फिगर बड़ा मस्त है.. एकदम सांचे में ढला हुआ, ये 32-36-38 का कटाव लिए हुए है. ख़ास बात ये कि मैं एकदम दूध सी गोरी और मक्खन सी कोमल हूँ. मेरी हाइट 5 फुट 3 इंच है, मैरिड हूँ. मेरे पति का जॉब विदेश में होने के कारण वे मुझसे अलग बाहर ही रहते हैं. मैं यहां अपने बेटे के साथ रहती हूँ.. लेकिन लास्ट ईयर से बेटा पढ़ाई के कारण हॉस्टिल में रहने लगा है, सो अभी मैं अकेली ही रहती हूँ.
अब जब दस साल से पति बाहर हैं, कभी कभार आते हैं तो तो मेरी सेक्स की इच्छा अधूरी ही है और वैसे भी मेरे पति को सेक्स में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं है, मुझे अभी सिर्फ़ साल में 2-3 बार ही सेक्स का सुख मिल पाता है, जिससे मैं बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूँ.
अब चूंकि जब से अकेली रहने लगी हूँ, तब से मेरे मन में सेक्स की इच्छा पूरी करने के लिए किसी और के साथ सम्बन्ध बनाने को लेकर बहुत सोचती हूँ, लेकिन थोड़ा डर भी लगता है, सो हिम्मत नहीं कर पाती हूँ.
मुझे नवरात्रों में डांडिया खेलने का बड़ा शौक है, मैं नवरात्रि में गरबा करने घाघरा चोली पहन कर हमारे काम्प्लेक्स के नज़दीक में, जहां गरबा होता है, वहां चली जाती हूँ
एक दिन वहां मुझे एक मेरे से छोटी उम्र की महिला मिली. उसका नाम रीना था, वो मेरे पास वाले फ्लैट की है. उस लेडी से मेरी दोस्ती हुई. वो भी मेरी तरह शौकीन मिजाज की थी.
अब हम दोनों का नवरात्रि के बाद भी एक दूसरे के घर आना जाना, बात करना शुरू हो गया था. हम दोनों एक सी विचारधारा की थी तो अपनी पर्सनल बातें भी करने लगी थी.
वो मुझे कई बार बोलती थी कि आप इतने साल से बिना सेक्स किए कैसे रहती हो.. मुझे तो मेरा पति रोज एक बार तो चोदता ही है, फिर भी मैं संतुष्ट नहीं हो पाती हूँ, सो मैं दूसरे के पास भी चली जाती हूँ.
इस तरह से उसने मुझे उसके लव अफेयर के बारे में भी बताया और मुझसे पूछा- आपका कोई ब्वॉयफ्रेंड है?
तो मैंने ना बोला.
एक दिन उसने मुझसे बोला- आज सिनेमा देखने का मूड है, चलो सीमा, चलते हैं.
मैं भी बोर हो रही थी, मैंने हां बोल दिया. हम सिनेमा के लिए हमारी सोसायटी से थोड़े दूर ही निकले थे कि एक फ़ौरचूनर कार आई.
उसने मुझसे बोला- चलो सीमा, गाड़ी में बैठो.
मैं तो कुछ समझ ही नहीं पायी. कार में आगे की सीट पर ड्राइवर और एक गन वाला आदमी था.
बीच की सीट में एक उम्रदराज आदमी बैठे थे, समझो करीब 60 साल के ऊपर के रहे होंगे. वो आदमी एकदम हट्टा कट्टा, थोड़ा काला, मुँह में पान चबाए हुए था. वो कुर्ता और लुंगी पहने हुए एक मुस्लिम था. उसकी दाढ़ी भी एकदम सफ़ेद थी.
रीना उसके पास बैठी और मैं रीना के पास बैठ गई. अब हम तीनों फिल्म देखने आ गए, वो रीना के कंधे पे हाथ डालकर बैठा था और जब थोड़ा अंधेरा हो जाता तो वो उसके मम्मों को दबा देता था.. ये सब मैं देखती थी.
फिर आधी फिल्म खत्म हुई, तो हम निकल आए. वो अपनी कार को सिटी से दूर एक फार्महाउस पर ले गए, वहां मुझे एक हॉल में बिठा कर वो दोनों करीब दो घंटे तक एक रूम में जाकर एंजाय करते रहे.. फिर उसने हम दोनों को घर छोड़ा.
मैंने रीना से पूछा तो उसने बताया कि मैंने तुम्हें बोला था ना, मेरा लवर है.
मैंने बोला- इतनी उम्र का?
तो वो बोली- उम्र से क्या होता, वो कितना पैसा मेरे लिए खर्च करता है और जितना सेक्स का मजा देता है, ऐसा तो कोई 25 साल का लड़का भी नहीं देगा.
मैं उसकी बात सुनकर हतप्रभ थी.
ऐसे ही मैं उसके साथ 3-4 बार गई और वो दोनों एंजाय करते थे.
एक दिन रीना मेरे घर आई थी. उसने मुझे बोला- सीमा तुम्हारे लिए एक ऑफर है.. बताऊं?
मैंने बोला- हां, बोला ना?
उसने बोला कि मुझे उन्होंने मतलब उसके लवर ने बोला है कि उनका एक दोस्त हैदराबाद से अगले वीक दो नाइट के लिए आने वाला है, यदि तुम उनको खुश करो तो..!
मैंने तो एकदम मना कर दिया- तुम क्या बोलती हो रीना!
फिर उसने बोला- जल्दी मत करो सीमा.. आराम से सोचना.. फिर बोलना, एकदम से मत बोलो. देखो तुम वैसे भी बिना सेक्स तड़पती हो, ये मैं जानती हूँ. तुम कैसे अपनी रातें काटती होगी, यहां तुम्हें सेक्स का सुख भी मिलेगा और सेफ्टी भी, ऊपर से वो तुम्हें 2 नाइट के लिए 1 लाख रूपया भी देंगे.
मैं उसकी बात सुनकर चुप रही.
फिर उसने अपने फोन से उसके लवर को कॉल किया और बोला- मैंने सीमा से आने को बोला है. लेकिन वो मना करती है.
फोन स्पीकर पर था, तो सामने से उन्होंने बोला- देखो कोई बात नहीं.. ये तो मैंने सोचा कि तुम्हारी सहेली है, इसलिए.. वरना मेरे पास 10 औरतों का बायोडाटा फोटो के साथ है. वो तो मेरे दोस्त को एकदम घरेलू जैसी ही चाहिए थी, सो मैंने बोला, बाकी जैसी उसकी मर्ज़ी, लेकिन जो भी है, मुझे कल बताना. फिर जिसको सिलेक्ट करूँगा, उसके लिए कपड़े वगैरह भी सब बनाना है.
इतनी बात के बाद उसने कॉल कट कर दिया. रीना भी मुझे सोचने का समय देकर चली गई.
उस दिन पूरी रात मुझे नींद नहीं आई. मैं सोचती रही. मेरे मन में सेक्स की तो इच्छा थी ही, रात में सेक्स के बारे में सोचते सोचते मेरी चूत से दो बार पानी निकल गया, पूरी पेंटी गीली हो गई.
सुबह में रीना का मैसेज आया- क्या सोचा?
मैंने बोला- तू पहले घर आ … फिर देखती हूँ.
फिर वो आई, मैंने बोला- रीना मैंने आज तक कभी ऐसा नहीं किया, सो डर लगता है, सोसाइटी में किसी को पता चलेगा तो?
रीना ने बोला- इस सबकी तुम बिल्कुल चिंता मत करो.. मैं हूँ ना.. और वैसे भी तुम्हें मालूम है, मेरे लव का, वो अपने एरिया के कॉरपोरेटर हैं और यहां के डॉन हैं. कोई तुम्हारे सामने आँख उठा कर भी नहीं देख सकेगा, जब कोई जानेगा कि तुम किसके साथ रीलेशन रखती हो, तो वैसे ही चुप हो जाएगा.
मैं चुप हो गई.. तो उसने सीधा फोन लगाया और उनको बोला कि सीमा तैयार हो गई है, अब और किसी को मत बोलना.
मैं तो देखती ही रह गई थी और उसने सीधा हां बोल दिया था. खैर.. मैंने भी मन बनाने को सोचा कि जो होगा देखा जाएगा.
फोन अभी चालू था और स्पीकर पर था.
उधर से उन्होंने बोला- ठीक है तो 3 बजे तुम दोनों बाहर आजो, मैं तुम्हें शॉपिंग के लिए ले जाऊंगा.. अभी 5 दिन बाकी हैं.
हम 3 बजे बाहर गए, उनकी कार आ कर हम दोनों को एक बहुत महंगे टेलर के पास ले गई. जहां कपड़ा भी उनके पास ही था, सिर्फ़ हमें कलर और फेब्रिक पसंद करना था.
मैंने और रीना ने कपड़े पसंद किये. मेरे लिए एक चोली घाघरा का कपड़ा पसंद किया. सिर्फ वो कपड़ा ही 25 हजार का था, उसकी सिलाई 15 हजार थी. फिर हम मॉल गए, उधर हमने 3-4 सैट फैंसी अंडरगारमेंट लिए, मेकअप का सामान वगैरह सब ले लिया. उन्होंने उस दिन मेरे लिए 75 हजार से भी ज़्यादा खर्चा किया.. ये सब तो सिर्फ़ मुझे सजाने के लिए खर्च किया गया था.
रीना मुझे शनिवार की सुबह में ही लेके निकल गई थी. वो बोली थी कि ब्यूटीपार्लर जाना है. जब मैं वहां आ गई तो मेरी बगलों के बाल, मेरी चूत के बाल, लेग वगैरह सब जगह वॅक्स करके एकदम मुझे चिकनी बंदी बना दिया गया.
इसके बाद मुझे वो करीब 4 बजे फार्म हाउस लेकर गई. मैंने देखा पूरे फार्महाउस पे सजावट हो रही थी. इतने आदमी काम कर रहे थे कि मुझे लगा कि कोई जलसा है.
मैंने बोला- इतना क्या है रीना यहां?
उसने बोला- वो जो उनके दोस्त आने वाले है, उनके लिए पार्टी अरेंज की है, ये सब उसी की तैयारी हो रही है. रात में पार्टी होगी, करीबन 150 लोग होंगे. पार्टी में सब मर्द उनके, जो बिजनेस रिलेटेड हैं, वे सब शिरकत करेंगे.
ये देख कर मैं शर्मा रही थी.
उसने बोला- अब चिंता मत करो.. चलो ऊपर चलते हैं. आज का तुम्हारा रूम दिखाती हूँ, जिधर तुमको संतुष्टि मिलेगी.
जब उसने ऊपर जाकर रूम खोला, तो मैं हैरान थी. बाप रे.. मैं देख कर दंग रह गई. पूरा बड़ा हॉल जैसा रूम था, जिसमें 10×10 का एक बेड लगा हुआ था, उस बेड को ताजे फूलों से खूबसूरत तरीके से सजाया जा रहा था. अभी काम चालू था. एक तरफ सोफा था, एक डाइनिंग टेबल भी थी. मैं तो पागल जैसे रह गई थी.
रीना बोली- सीमा, आज तुम्हारी सच में सुहागरात होगी.
यह कह कर वो हंसने लगी. मैं भी थोड़ा मुस्कुरा दी.
मुझे फिर उसने तैयार किया, चोली घाघरा पहनाया. मेरे लिए सोने का नैकलेस, रिंग, कंगन आदि सब लाया गया था. वो सब पहन कर दुल्हन की तरह सज गई.
फिर रीना बोली- देखो अब वो 8 बजे आएँगे, तुम्हें उनका वेलकम करने जाना है ओके.. सिर्फ़ तुम अकेली होगी, तब मैं नहीं आऊंगी. तुमको उन्हें गुलदस्ता देकर गेट से पार्टी में लेकर आना होगा. फिर बारी बारी सब लोग उनको वेलकम करने आएँगे, फिर पार्टी शुरू होगी, तो वो तुम्हें लेकर ऊपर आएँगे.
अब रीना धीरे से बोली- सीमा देखो. वो बहुत पैसे वाले हैं.. हां उम्रदराज हैं.. लेकिन अगर तुम उनको खुश करोगी, तो वो तुम्हें मालामाल कर देंगे.
मैं चुप रही.
फिर उसने बोला कि तुम्हारे बेड पे एक वाइट सिल्क का पेटीकोट रखा है, जब आप दोनों चुदाई शुरू करो, तुम अपने नीचे उसे रख लेना क्योंकि आज तुम्हारी रियल सुहागरात होगी, ब्लीडिंग हुई तो वो बेडशीट खराब ना हो और तुम्हें अपने सुहागरात की निशानी भी तो रखनी है ना.
इतना कह कर मुस्कुरा दी.
सब सैट हो गया था. अब मुझे भी चुदाई का इन्तजार था. ठीक 8 बजे वो आए, मुझे रीना का लवर लेकर गया- चलो सीमा, बॉस आ गए हैं.
मैं गई, उनको गुलदस्ता देकर स्वागत किया. जब मैंने उनको देखा.. बाप रे कम से कम 6.5 फिट की हाईट, बहुत मोटा सा आदमी एकदम काला भुजंग, करीब 65 साल की उम्र दिखती थी.. दाढ़ी एकदम सफ़ेद थी. वो कुर्ता पजामा में था.
जब मैंने गुलदस्ता दिया, उन्होंने जानबूझ कर मेरे हाथ को भी छू लिया था. वे मेरे बदन को पूरा निहार रहे थे. उनका वजन कम से कम 125 किलो का होगा. मैं एकदम घबरा गई थी लेकिन अब मेरे पास कोई रास्ता भी तो नहीं था. वो स्टेज पे मुझे अपने साथ लिए खड़े रहे, जैसे उनकी मैं बीवी होऊं. वो मुझे लेकर खड़े रहे.. बारी बारी सब लोग आकर उनको विश करते थे.
ठीक 9 बजने को आया, सब लोगों का मिलना पूरा हुआ तो रीना के लवर ने बोला कि बॉस अब आप भी ऊपर जाके खाना खाइए, आपकी पसंद का गुजराती भोजन तैयार है.
यह कह कर वो थोड़ा मुस्कुराया.
हम तीनों ऊपर चले गए. नीचे पार्टी चालू थी.
हम रूम में आए, रीना के लवर ने बोला- बॉस प्लीज़ अन्दर जाइए, आज की नाइट के लिए बेस्ट ऑफ लक.. सीमा तुम्हें भी बेस्ट ऑफ लक.
जैसे ही उनके साथ मैं रूम में गई, वो भी अन्दर आ गए और उन्होंने दरवाजा लॉक कर दिया. मैंने देखा कि डायनिंग टेबल पर हर तरह के स्वीट, जूस, फ्रूट आदि सजे थे. एक से एक डिश सजी थीं.. पानी की बॉटल रखी थीं.
उन्होंने मुझसे बोला- सीमा, मुझे मालूम है तुम्हें रात में सिर्फ़ जूस एंड फ्रूट लेने की आदत है.. सो मैंने खाने के लिए सिर्फ़ वो ही तैयार करवाया है, लेकिन आज हमारी पहली मुलाकात है, सो स्वीट तो चलना ही चाहिए. इसलिए थोड़ी स्वीट भी रखी है. चलो बैठो, हम खाना खाते हैं.
हम दोनों बैठ गए, फिर उन्होंने मुझे एक गुलाब जामुन मेरे मुँह में डाला. मैंने आधा खाया और आधा उनके मुँह में डाल कर खिलाया. फिर हम दोनों ने 2-3 तरह के जूस पिए. एक-दूसरे का झूठा खाया. बिल्कुल पति पत्नी जैसी फीलिंग आ रही थी.
अब उन्होंने बोला- बस मेरा हो गया. फिर हम दोनों साथ में जाकर हाथ धोकर आए. उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया. मैं तो सोच नहीं सकती थी कि इस उम्र में एकदम इतना पावर होगा. उन्होंने एक झटके में मुझे उठाया और बेड पे लेकर गए.
मैंने उनको बोला- लाइट ऑफ कीजिए ना.
तो वो बोले- अरे जानेमन.. जिस जिस्म को देखने हम पिछले एक वीक से तड़प रहे थे, बिना लाइट के उस हुस्न को कैसे देखेंगे. जब से तुम्हारी फोटो देखी है, हम तो तुम्हारे दीवाने हो गए थे जान.
उनकी बात सुनकर मैं शर्मा गई.
फिर उन्होंने धीरे से मुझे बांहों में लेकर किस करना शुरू किया. धीरे से मेरी पीठ पर मेरी ब्लाउज में हाथ डालकर ऊपर से सहलाना शुरू किया. जब उनका हाथ मेरे बदन पे पड़ा, लाइफ पे पहली बार मुझे लगा कि कोई मर्द का हाथ है. उनके हाथों का स्पर्श एकदम मजबूत और सख्त था. अब मैंने भी धीरे से उनको बांहों में लेकर क़िस करना शुरू किया. मुझे तो ये सब करते ही एकदम पहली बार पानी छूट गया था.
अब उन्होंने मेरा ब्लाउज खोला और ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मों को दबाने लगे.. चूचियों को सहलाने लगे. अब उन्होंने मेरा घाघरा भी निकाल दिया. मैं सिर्फ़ ब्रा पेंटी में रह गई थी. वो मेरे बदन को सहलाते निहारते रहे और मैं उनके बदन की सख्ती को स्पर्श करती रही.
जैसे ही उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोला, मेरे चूचे एकदम से बाहर उछल आए. वो अपने हाथ से मेरे मम्मों को मसलने लगे. मैंने धीरे से उनके सिर को मेरी एक चूची पे लगाकर एक निप्पल उनके मुँह में डाल दिया. मैं अपने हाथ से अपने चूचे दबाकर उनको चुसवाने लगी.
बारी बारी से वो मेरे दोनों अंगूर चूसते रहे. वे मेरे दोनों चूचुकों को बहुत हार्ड सक कर रहे थे.
मैंने बोला- आह.. धीरे जी.. काटना मत प्लीज़.
उन्होंने मुझे उनके कपड़े निकालने को बोला. मैंने पहले उनका कुर्ता निकाला. जब मैंने उनका पज़ामा देखा, मैं एकदम बेहाल हो गई. उनके पजामे का आगे का भाग इतना उभरा हुआ था कि मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था.
फिर मैंने पजामा निकाला तो अंडरवियर के ऊपर से देखा कि उनका लंड बहुत मोटा था. मेरे मुँह से निकल गया- बापरे इतना मोटा??? मैंने तो लाइफ में पहली बार देखा है.. मैं इसे नहीं ले पाऊंगी.
उन्होंने मुझे बांहों में लेकर बोला- सीमा डरो मत… कुछ नहीं होगा. हां फर्स्ट टाइम थोड़ा दर्द होगा, वो तो वैसे भी तुम्हारी रियल सुहागरात है, तो दर्द तो होगा ही.
यह कह कर वो मुस्कुराने लगे. फिर मैंने उनका अंडरवियर निकाला, एकदम काला कम से कम दस इंच लंबा और मेरी कलाई से भी मोटा लंड था उनका.. बिना स्किन का सुपारा था, एकदम चिकना और काला चुकन्दर जैसा दिख रहा था.
अब धीरे से उन्होंने मुझसे बोला- सीमा तुम इसे मुँह में लो.
मैं धीरे से नीचे जाके उनके पैरों के बीच में बैठ गई और उनका सुपारे पर किस करके धीरे धीरे मुँह में लंड लेना शुरू किया. उस सुपारे से कुछ मस्त कर देने वाली महक आ रही थी. कुछ ही पलों में मुझे लंड चूसना अच्छा लगने लगा. मैंने कम से कम 20 मिनट उनका लंड पूरा चूसा.
अब उनका मूसल सा लंड एकदम हार्ड हो गया था.. मेरी लार से.. और उनके रस से, उनका पूरा लंड चिकना हुआ पड़ा चमक रहा था. इस समय वो मेरी चूत में उंगली डालकर सहला रहे थे, मेरी चूत भी एकदम गीली हो गई थी. मैं एकदम गरम हो गई थी.
फिर उन्होंने मुझसे बोला- अब लेट जाओ सीमा रानी.. मैं लंड अन्दर डालता हूँ.
मैं अपने पैर खोल कर चित हो गई.
फिर वो मेरे ऊपर आकर बोले- सीमा मेरा वजन झेल लोगी ना?
मैंने बोला- हां..
जैसे उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के होल पर रखा, मैंने अपने हाथ से उसे थोड़ा सा अपनी चूत पे घिसते हुए लंड को चुत के होल के ऊपर रखा और उनको धीरे से बोला- हां अब डालो.
उन्होंने लंड को अन्दर डालने की जैसे ही कोशिश की, मेरे मुँह से ज़ोर से चीख निकल गई- बाप रे ईई.. मर गईईई.. कोई बचाओ..
फिर भी उन्होंने एक ज़ोर से झटका मार दिया. मेरी चूत तो जैसे फटी जा रही थी. ऐसा लग रहा था कि आज किसी ने गरम सरिया मेरी चूत में पेल दिया हो.
मैं लगभग बेहोश हो गई थी. फिर वो थोड़ी देर रुके, फिर एक ज़ोर से झटका मारा. मैंने मरी सी आवाज में बोला- अभी कितना गया?
उन्होंने बोला- आधा गया है.. अब एक ही झटके में पूरा घुस जाएगा सीमा.
यह कहते ही उन्होंने एक ज़ोर से झटका दे मारा, मेरी आँख से आँसू निकल गए. उनका पूरा मूसल लंड मेरी चूत के अन्दर चीरता हुआ चला गया.
मैं दर्द से कलप उठी. करीब 5 मिनट वो ऐसे ही पड़े रहे. फिर धीरे धीरे उन्होंने मेरी चूत में लंड को अन्दर बाहर करना शुरू किया. कुछ देर के दर्द के बाद अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था. हां मेरी चूत के अन्दर बहुत जलन हो रही थी, दर्द भी बहुत ज्यादा था, अब खूब मज़ा भी आने लगा था.
वो मेरे ऊपर ही चढ़े हुए मुझे ज़ोर ज़ोर से चोद रहे थे.. साथ में मेरे बूब्स को भी दबा रहे थे. मैं उनकी पीठ सहलाती जा रही थी. मेरे मुँह से मस्त कामुक आवाजें निकल रही थीं- उहह.. अहह..
कुछ देर की मस्त चुदाई से हम दोनों के बदन एकदम पसीने से भीग गए थे. वे मुझे पेलते हुए बोले- सीमा तुम मेरी लाइफ में 22 वीं औरत हो, जिसे मैं चोद रहा हूँ.. लेकिन तुम जैसी इतनी कमाल कोई नहीं देखी.. आह.. क्या मस्त चूत है, साली लंड को छोड़ती ही नहीं है.. एकदम अन्दर पकड़ के रखा है.
उनकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा दी और उनको चूम लिया. उन्होंने मुझे कम से कम 45 मिनट तक चोदा.. इस बीच मैं दो बार झड़ चुकी थी. वे अब भी मुझे चोदने में लगे थे.
वो तभी एकदम तेज हुए और बोले- अब मेरा निकलेगा.. आज पहली बार है सो चूत में ही निकालूँगा.
तभी एक ज़ोर से गरम पिचकारी मेरी चूत में मुझे फील हुई और मेरी चूत पूरी भर गई. वो मेरे ऊपर ही छा गए.
दस मिनट तक लंड को चुत में डालकर पड़े रहे. नीचे मेरी चूत से रस बह रहा था.
फिर वो मेरे ऊपर से उतरे, देखा नीचे मेरे वाइट पेटीकोट पर बहुत खून निकला हुआ था.. उनका वीर्य भी था.
वो खुश होकर बोले- देखो, ये सच्ची सुहागरात हुई.
उन्होंने अपने दोस्त को कॉल किया कि रीना को भेजो, मेरी सीमा उसको ये पेटीकोट, उसकी सुहागरात की निशानी देना चाहती है.
वे मुझे चूमते हुए बोले- जाओ थोड़ा दरवाजा खोलकर तुम ये रीना को देकर आओ.
मैं जरा लंगड़ाते नंगी ही गई, थोड़ा दरवाजा खोला तो बाहर से रीना बोली- बधाई हो सीमा..
उसने मेरे हाथ से पेटीकोट लिया और चली गई. वो जाते हुए बोली- पूरी रात के लिए बेस्ट ऑफ लक.
उस रात उन्होंने मुझे पूरी रात में 5 बार चोदा. मैं सुबह उठ ही नहीं पा रही थी, इतना दर्द हो रहा था.
वैसे ही दूसरे दिन भी उन्होंने मुझे 5 बार चोदा.
इसके बाद मुझे विदाई मिली, बहुत सारे जेवर, रुपए और सबसे बड़ी बात मेरी चूत को संतुष्टि मिली.
आपको मेरी कामुक सेक्स स्टोरी पसंद आई होगी, ऐसी मुझे आशा है. फिर और नयी कहानी लेकर आऊंगी.. बाय.
shahseema38@gmail.com

दोस्त की कुंवारी मौसी को चोदा



अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार. मैं नियमित रूप से अन्तर्वासना का पाठक हूँ. इधर की ढेर सारी कहानियां पढ़ने के बाद सोचा कि मैं भी अपनी जिंदगी की सेक्स लाइफ के रंगीन लम्हे आपसे शेयर करूँ.
यह कहानी मेरे पहले सेक्स की है, जो मैंने पड़ोस के लड़के की मौसी के साथ किया था. मैं पुणे (महाराष्ट्र) से हूँ, मेरी उम्र 20 साल है. अपनी बॉडी की बात करूँ, तो एकदम ठीक ठाक है और मैं 7 इंच लम्बे लंड का मालिक हूँ.
यह कहानी तब की है, जब मैं जवानी की दहलीज पर था. मेरे पड़ोस में एक लड़का रहता था, उससे मेरी अच्छी दोस्ती थी. उसकी मौसी जो 21 साल की थी, जो उसके यहां रह कर पढ़ने के लिए आई थी. पहले तो मेरे दिमाग में उसके लिए कुछ भी गलत विचार नहीं थे.
एक दिन पढ़ाई के कुछ डाउट थे, इसलिए मैं उसके घर गया. दरवाजा खुला था तो मैं सीधा अन्दर चला गया. उसके घर पर कोई नहीं था. मैं उसे ढूंढने लगा तो बेडरूम में घुस गया, दरवाजा थोड़ा खुला था.. तो मैंने अन्दर झाँक कर देखा तो दोस्त की मौसी कपड़े चेंज कर रही थी.
मैं उसके नंगे बदन को देख कर भौंचक्का रह गया. दूध के जैसे उसका गोरा और कटीला बदन.. उसके 32 साइज के चुचे और काले बालों से लिपटी हुई सुंदर सी गोरी चुत.. उसका 32-26-34 के मदमस्त साइज का बदन कहर ढा रहा था. मेरी जवानी तो उसका नंगा बदन देखकर उफान मारने लगी थी. मेरे अन्दर भी हलचल मचने लगी.
तभी उसे आहट हुई कि मैं उसे देख रहा हूँ, तो वो बाहर आने लगी. मैं जल्दी से वहां से निकल गया और पहली बार उसके नाम की मुठ मारी.
वैसे तो मैं रोज उससे मिलता था, पर उस दिन के बाद से मैं उससे पढ़ने के लिए रोज जाने लगा. वो भी मुझे बड़े मन लगा कर पढ़ाती थी.
एक दिन वो कॉलेज से थक कर आई थी, मैं उसके घर गया, तो देखा वो सो रही थी. सोते वक्त वो बहुत ही प्यारी लग रही थी. मैं उसकी बाजू में बैठ गया और उसके चेहरे पे प्यार से हाथ फेरने लगा. तभी उसने करवट ली. उस दिन उसने साड़ी पहनी थी, तो करवट लेते ही उसका पल्लू साइड में हो गया और उसके रसीले चुचे मेरे सामने आ गए.
मैं इसी की फिराक में था, पर डर रहा था कि उठ गई तो मेरी तो लग जायेगी. मैंने डरते डरते उसकी एक चुची पे हाथ रखा. कोई हलचल नहीं देखी तो मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैं चुचियों को मसलने लगा. फिर धीरे से उसके होंठों पे किस किया.. तभी वो जागने लगी थी. मैं संभल गया और मैं वहां से निकल गया.
अब मैं रोज उसके सोने के टाइम पे जाता और रोज उसकी चुचियों को मसलने लगा. ऐसा रोज करके मुझे मजा आने लगा.
एक दिन ऐसे ही मैं उसके घर गया, तो चुचे मसलने के बाद मैंने देखा कि उसका टॉप थोड़ा ऊपर उठा हुआ था. पजामे से पैंटी की स्ट्रिप दिख रही थी. मैंने सोचा आज बुर की दीदार किया जाए. मैंने एक हाथ उसके पजामे में डाल दिया और उसकी बुर पे हाथ से सहलाने लगा था. उसकी बुर गीली थी, ये मुझे थोड़ा सा अजीब सा लगा. मैंने एक उंगली बुर में घुसा दी, तभी वो हल्के स्वर में चीख़ मारते हुए उठकर बैठ गयी. मैं बहुत डर गया और उससे माफी मांगने लगा. मुझे ऐसा घबराया देख कर वो हँसने लगी और मुझे गले से लगाकर बोली- इतने दिनों से मजे ले रहे थे, तब नहीं डरे.. आज क्यों डर रहे हो?
मैं सुनता रह गया, मैंने मन में सोचा कि साली लौंडिया खुद मजे ले रही थी.. तभी इसकी बुर गीली थी.
फिर उसने मेरे होंठों पर होंठों रखे और हम दोनों एक दूसरे को दस मिनट तक चूमते रहे. फिर उसने मेरे कपड़े उतार दिए और मैंने उसकी टॉप उतार दिया. उसकी नंगी रसीली चुचियां मेरे सामने आ गईं. मैंने झट से उसकी एक चुची मुँह में दबा ली और चूसने लगा. वो जोर जोर से मादक सिसकारियां लेने लगी ‘आह ऊंह उम …’
मैं भी पूरी लगन से एक एक करके उसकी दोनों चूचियों को निचोड़ रहा था. आज मुझे ऐसा करने में ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि जब लड़की भी सामने से रेस्पॉन्स दे रही हो, तो ज्यादा मजा आता है.
थोड़ी देर चुची मसलते मसलते एक हाथ बुर पे ले गया और कपड़ों के ऊपर से उसकी कुंवारी बुर को मसलने लगा. वो और भी गर्म हो गयी, उसने अपनी टांगें फैला दीं और बुर की रगड़वाई का पूरा मजा लेने लगी. मैं भी उसकी बुर में उंगली करके उसके दाने से खेलने लगा. उसकी बुर के नन्हे से दाने को अपनी दो उंगलियों के बीच में दबा कर जैसे ही मसला उसकी आह निकल गई और वो एकदम से गरमा गई.
अब उसने भी मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया और हिलाने लगी. उसके हाथों में अपने लंड को महसूस किया तो मुझे मजा आ गया, समझो मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था. फिर उसने मुझे धक्का दिया और मुझे बिस्तर पर लिटा दिया. मैं कुछ समझ पाता कि उसने मेरा लंड मुँह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
पहली बार किसी लड़की ने मेरा लंड मुँह में लिया था, तो ऐसा लग रहा था.. जैसे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी यही है.
कुछ ही देर बाद वो लंड को अपने मुँह से निकाल कर उठी. उसके चेहरे पर चुदास का नशा देखा तो मैं समझ गया. मैंने उसका पजामा पैंटी के साथ निकाल दिया.. और हम दोनों 69 के पोजीशन में आ गए. मैं उसकी बुर चाट रहा था और वो मेरा लंड चूस रही थी.
पहली बार होने के कारण हम दोनों ही एक दूसरे के मुँह में झड़ गए. झड़ने के बाद हम दोनों थोड़ी देर ऐसे ही एक दूसरे के ऊपर पड़े रहे. कुछ पल बाद फिर से चुदास भड़क गई और हम दोनों एक दूसरे को गर्म करने लगे. एक बार फिर से हम हवस का खेल खेलने के लिए तैयार हो गए.
अबकी बार मैं उसके पैरों से ऊपर जांघों को चूमने लगा. वो उत्तेजित होने लगी. फिर ऊपर नाभि को चाटने लगा. ऐसे ही करके उसे मैं तड़पाने लगा. कभी जांघें, तो कभी नाभि और अचानक से उसकी बुर को मुँह में लेकर चूसने लगा, जीभ से बुर को कुरेदने लगा.
अब वो पूरी उत्तेजना में टांगें फैलाए पड़ी थी और जोर जोर से कामुक सिसकारियां ले कर बोल रही थी- जानू और करो..
मैं उसकी बुर में अपनी जीभ को गहराई तक चलाने लगा.
थोड़ी देर बाद वो कहने लगी- अब सहन नहीं हो रहा.. अपना लंड डाल दो अन्दर.. और बुझा दो मेरी प्यास.
उसकी बात सुनकर मैं ऊपर को उठ कर आया और अपना 7 इंच का लंड बुर पे सैट कर दिया. उसकी फांकों में लंड का सुपारा लगाया और लंड को बुर के अन्दर पेलने की कोशिश की. पहली दो बार की कोशिशें व्यर्थ हो गईं, क्योंकि बुर टाइट होने के कारण लंड फिसल रहा था.
अब मैंने थोड़ी क्रीम लंड पर लगायी और फांकों पर लंड रख दिया. उसने भी मेरा लंड पकड़ लिया और बुर के छेद पर जमा दिया. उसने इशारा दिया और मैंने जोर से एक झटका मार दिया. इस तगड़े प्रहार से मेरा लंड उसकी बुर में घुसता चला गया.
वो जोर जोर से चीखने लगी- निकालो बाहर!
वो रोने लगी तो मैंने झट से उसके होंठों को अपने होंठों से दबाया और उसको चूमने लगा. लंड अन्दर ही अपनी जगह बना रहा था. थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद थोड़ा दर्द कम हुआ, तो फिर से एक बार झटका मारा और इस बार पूरा लंड अन्दर डाल दिया. उसकी आंखों से आँसू आने लगे. मैं धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करने लगा. धीरे धीरे वो भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी.
धकापेल चुदाई का मंजर और चुदाई की रंगीन आवाजें कमरे में गूंजने लगीं. करीब 20 मिनट तक जमकर चुदाई के बाद हम दोनों ही झड़ गए. हम एक दूसरे से चिपक कर निढाल होकर पड़े रहे.
फिर थोड़ी देर के बाद जब उठा तो देखा के उसकी बुर खून से सनी हुई थी, वो थोड़ा डर गई. फिर मैंने उसे समझाया कि पहली बार में ऐसा होता है.
उसने मुझे एक प्यार भरा चुम्बन दे दिया और ‘आई लव यू..’ कहा. उसने बताया कि जब उसने मुझे जब पहली बार देखा था, वो तभी से मुझे पसंद करती थी.
उस दिन के बाद हम जब भी मौका मिलता, तब चुदाई कर लेते थे. तीन साल बाद उसकी शादी हो गयी. फिर शादी के बाद भी मैंने उसको बहुत बार चोदा. आज उसको मेरे से एक बच्चा है.
थोड़े दिनों बाद वो दिल्ली में सैटल हो गयी, पर आज भी उसकी याद आती है. उसके जाने के बाद बहुत सी लड़कियों को चोदा. उनकी कहानी किसी और दिन बताऊंगा.
आपको मेरी कहानी पसन्द आयी या नहीं, प्लीज मुझे मेल जरूर करना.
ashumj48@gmail.com

बुआ जी के लड़के के लण्ड की भूख

मेरे प्यारे मित्रो, मुझे आपके बहुत से मेल मिले हैं, मैं सबका रिप्‍लाई तो नहीं कर सकी, जिनको रिप्‍लाई नहीं किया उनसे माफ़ी चाहती हूं। दोस्तो, मुझे मेरी कहानी पर अपने विचार मेल जरूर करना ताकि मैं आपसे मेरे जीवन की घटनाओं को बांट सकूँ।
आपका ज्यादा टाइम न लेकर सीधे कहानी पर चलते हैं।
मैं अपने भाई रोहण के साथ दो महीने रही और हमने एक दिन भी ऐसा नहीं गंवाया जिस दिन हमने चुदाई न की हो।
पता नहीं सेक्स में ऐसी क्या बात है कि 2 महीने में मेरे शरीर में निखार आने लगा।
दो महीने बाद मैं घर आ गयी और मैंने हिमाचल में एक कॉलेज में एड्मिशन ले लिया। उसी कॉलेज में ही मेरी बुआ जी का लड़का संजय पढ़ता था। मेरा कॉलेज मेरी बुआ जी के घर से 50 किलोमीटर दूर था। लेकिन न उनको पता था और न ही मुझे पता था के हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं, वो भी हॉस्टल में रहता था और मैंने भी हॉस्टल ले लिया।
जब मैं हॉस्टल में गयी तब मुझे नवप्रीत नाम की लड़की के साथ कमरा मिल गया। एक-दो दिन में ही हमारी अच्‍छी दोस्ती हो गयी। हम सब बातें शेयर करने लगी।
मैंने कभी मेरे भाई के साथ सम्बन्धों के बारे में उसे नहीं बताया।
एक दिन मैं जब अकेली क्लास से हॉस्टल जा रही थी तो मेरी मुलाकात मेरी बुआ के लड़के संजय से हो गयी। वो मुझे देखकर अचम्भित हो गए और मुझसे बोले- मोनिका तुम यहाँ?
मैंने संजय भैया को बताया- भैया, मैं यहीं पढ़ती हूं.
फिर उनसे पूछा- और आप यहाँ कैसे?
तब उन्होंने भी बताया कि मैं भी यहीं पढ़ता हूं।
तब एक दूसरे से हमने बहुत सी बातें की।
भाई दिखने में बहुत ही स्मार्ट था। अक्सर हम जब भी मिलते तो मुस्कुरा देते।
एक दिन नवप्रीत ने हमें एक साथ देख लिया। तब मेरी रूममेट हॉस्टल में जाकर मुझसे बोली- यार, जीजू तो स्मार्ट हैं।
मैं एकदम से हैरान हो गयी और पूछा- कौन जीजू? किसकी बात कर रही है तू?
उसने कहा- आज तू कॉलेज में जिस से बातें कर रही थी … वही जीजू और कौन?
मैंने पता नहीं क्यों नवप्रीत को कुछ भी नहीं बताया कि वो मेरा बॉयफ्रेंड नहीं मेरी बुआ का बेटा, मेरा भाई है।
अगले दिन मैं जब संजय भैया से मिली तो उनको बताया कि मेरी रूममेट नवप्रीत ये कह रही थी।
वो हंसने लगे।
इतने में नवप्रीत भी आ गयी और बोली- लगे रहो … लगे रहो।
उसे देख कर हम हंस दिये।
पता नहीं क्यों, संजय ने भी उसे नहीं बताया कि हम भाई बहन हैं।
एक महीना ही हुआ था कि संजय ने मुझे कॉल किया और पूछने लगे- मोनिका, आज मूवी देखने चलोगी? मैं अकेला हूं।
मैंने ‘हां; कर दी और नवप्रीत को भी साथ ले चलने को पूछा।
तब उन्होंने कहा- जैसा तुमको ठीक लगे।
तो मैंने कहा कि हम दोनों ही चलेंगे, नवप्रीत को रहने देते हैं.
मैं तैयार हो गयी मैंने उस दिन ब्लू जीन्स और स्काई शर्ट पहनी, और पैरों में जूती डाली ही थी कि तभी संजय का कॉल आ गया। जब मैं हॉस्टल से बाहर आई तो देखा संजय मेरा इंतजार कर रहा था। मैं जाकर उसके साथ बाइक पैर बैठ गयी, और सिनेमा पहुंच गए।
जब मूवी शुरू हुई तो संजय ने मेरी सीट के पीछे हाथ रख लिया और धीरे धीरे मेरे कन्धे पर हाथ रख दिया। मुझे अजीब सा लगा परन्तु मैंने कुछ नही कहा. फिर उन्होंने अपना हाथ हटा लिया पर मेरे पैर पर रखकर सहलाने लगे।
मैंने मना नहीं किया क्योंकि मुझे भी अपने बदन पर उनके हाथ की सरसराहट अच्‍छी लग रही थी।
इंटरवल तक यही चलता रहा और इंटरवल के बाद उन्होंने मेरे बूब्स पर हाथ रखकर धीरे से मेरे कान में कहा- मोनिका, अगर तुमको अच्‍छा नहीं लगा तो बता दो, मैं कुछ भी नहीं करूँगा।
मैंने कुछ नहीं कहा तो वो समझ गए कि इसमें मेरी भी मौन सहमति है और भैया मेरी चुचियों को दबाने लगे।
मैं गर्म होने लगी थी, 10 मिनट बाद मैंने उनका हाथ हटा दिया तो उन्होंने पूछा- क्या हुआ?
असल में तो मैं नहीं चाहती थी कि भिया मुझे गर्म करके यूं ही छोड़ दें तो मैंने बहना बना कर उनके कान में कहा- भैया कोई देख लेगा, तो अच्‍छा नहीं लगेगा।
मूवी खत्म होते ही मैं उनसे नजर नहीं मिला पा रही थी और चुपके से उनके पीछे बाइक पर बैठ गयी।
वहां से भैया मुझे एक पार्क में चले गए। वहां बैठकर संजय ने मुझसे कहा- देख मोनिका, मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। इसलिए मैं तुमको यहां ले आया था और मैं तुमसे प्यार करता हूं। प्लीज मना मत करना।
मुझे भी अब लण्ड की जरूरत थी तो मैंने भी कहा- ठीक है!
और मेरी हां सुनते ही उन्होंने मुझे गाल पर किस कर दिया।
मैंने कहा- यहां नहीं भैया, यहाँ कोई देख लेगा!
और हम वापिस हॉस्टल चले गए।
अब हम रोज फ़ोन पर सेक्सी बातें करते और मैं हर रोज सुबह बाथरूम में जाकर नंगी होकर संजय भाई को वीडियो कॉल करके नहाती, उन्हें अपना बदन दिखाती।
एक दिन संजय ने कहा- चलो, कल मेरे घर चलें। कल मां सोनाक्षी (बुआ की लड़की) के साथ तुम्‍हारे घर जा रही है।
तो मैंने हां कर दी।
अगले दिन दोपहर में जब हम दोनों उनके घर पहुंचे तो बुआ भी जा चुकी थी।
मैं बहुत रोमांचित थी क्योंकि आज मुझे एक नया लण्ड जो मिलने वाला था।
घर जाकर मैंने संजय और मेरे लिए चाय बनाई और संजय से पूछा- बाथरूम कहां है? मुझे कपड़े बदलने हैं।
तब संजय भी मौके का फायदा उठाते हुए बोले- बाथरूम की क्‍या जरूरत है, लाओ मैं तुम्‍हारे कपड़े चेंज कर देता हूं।
और भैया ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे होंठों को चूमने लगे।
मुझे बहुत अच्‍छा लग रहा था और मैं भी संजय का साथ देने लगी। संजय ने धीरे से मेरी चूचियों पर हाथ रख दिया और दबाने लगा। मेरे निप्‍पल तन गए। मेरा मन कर रहा था कि एकदम से भाई का लण्ड पकड़ लूं। लेकिन ऐसा करती तो उनको गलत लगता।
उन्होंने धीरे धीरे मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और शर्ट को निकाल दिया, और मेरी पीठ पर हाथ फिराने लगे। कभी कभी जोर से अपनी बाँहों में भर लेते तो मेरी चुचियां उनके चोड़े सीने से दब जाती। मुझे बहुत मजा आ रहा था।
फिर भाई ने मेरी ब्रा खोल दी मेरी बड़ी बड़ी चूचियां कूद कर उसके सामने आ गयी थी। संजय मुझे उठा कर अपने बैडरूम में ले गये और बेड पर लिटा दिया. फिर अपनी शर्ट उतारकर मेरे ऊपर लेटकर मेरे होंठों को चूमने लगे। मुझे बहुत मजा आ रहा था.
तभी संजय ने उठकर मेरी जीन्स उतार दी, मैं सिर्फ ब्लैक पैंटी में उनके सामने बेड पर लेटी थी। मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो अब मैंने भी संजय को पैंट उतारने के लिए बोला।
उन्होंने भी अपनी पैंट उतार दी।
उनके पैंट उतारते ही मैंने उनका अंडरवियर नीचे खींच दिया।
मैं संजय का लण्ड देखकर हैरान रह गयी; 8 या 9 इंच लम्बा और 3 इंच से भी मोटा … मेरी आँखों में चमक आ गयी। मुझे भी चुदाई करवाये हुए बहुत दिन हो गए थे, मैं भैया के लण्ड को देख रही थी तभी संजय ने कहा- सिर्फ देखोगी या इसे पकड़ोगी भी?
इतना सुनते ही मैंने उनका लण्‍ड हाथ में पकड़ लिया। भाई का लण्ड एकदम कठोर और गर्म था।
संजय ने कहा- मोनिका, चूसोगी क्या?
मुझे और क्या चाहिए था … इतना कहते ही मैंने उनके लण्ड पर अपने होंठ रख दिए। लेकिन लण्ड मेरे मुंह में नहीं जा रहा था।
कुछ देर बाद संजय ने कहा- मोनिका यार अब पैंटी तो उतार दो।
मैंने खड़ी होकर उनको ही मेरी पैंटी उतारने का आफर दिया।
उन्होंने आगे बढ़ कर मेरी पैंटी उतारी और मेरी चूत पर मुंह रख दिया और मेरी चूत को चूसने लगे. मुझे बहुत आनन्द आ रहा था। कभी जीभ को अंदर डाल देते तो कभी मेरी क्लिट को मसल देते। अपने हाथों को मेरे कूल्हों पर ले जाकर सहलाते तो कभी कभी हल्के हल्के थप्‍पड़ से मारते जिससे मेरे कूल्हे लाल हो गए।
अब मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पा रही थी और उनसे मुझे चोदने की रिक्वेस्ट करने लगी और बेड पर लेट गयी। भैया मेरे ऊपर आ गए और बूब्स को चूसने लगे, फिर नाभि को चूमा और चूत पर लण्ड को फिराने लगे.
मुझसे रहा नहीं गया और उनका लण्ड पकड़कर चूत पर लगा दिया और अपने कूल्हों को ऊपर की तरफ धकेल दिया जिससे उनका लण्ड का थोड़ा सा हिस्‍सा चूत में चला गया।
तभी उन्‍होंने अचानक से मेरी चूत में लण्ड को पूरा डाल दिया। मुझे थोड़ा दर्द हुआ तो मैंने भैया को कुछ देर रुकने को बोला तो भाई रुक गए और मुझे किस करने लगे. जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने अपने कूल्हों को हिलाया और भाई को अपनी बांहों में भरकर ऊपर नीचे होने लगी।
भाई ने भी सब समझकर मेरी चूत को चोदना चालू कर दिया. मैं चिल्लाने लगी ‘आअहह… हह्ह्ह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम्मम्म… आअहह… ‘
और वो तेज़ी से धक्के मारते रहे।
मैं पहले भी एक भाई के लण्‍ड से चुद चुकी थी लेकिन इस बुआ के बेटे के चोदने के तरीके से मैं बिल्कुल मदहोश हो गयी थी और इतनी अच्छी चुदाई मेरी आज तक मेरे भाई ने भी नहीं की थी। उसका जोश इतना ज़्यादा था कि वो मुझे आधे घंटे से भी ज़्यादा समय से वो मुझे अलग-अलग स्टाइल में लेकर चोदता रहा। कभी घोड़ी बनाकर तो कभी मुझे अपने लण्ड पर बैठने को बोलते।
मैं 3 बार झड़ चुकी थी।
आधा घण्टा तक चुदाई चली और तब हम दोनों एकसाथ झड़ गए। मुझे बहुत अच्‍छा लगा संजय से चुदवाकर … मेरी तो जैसे तृप्ति हो गई।
तभी भाई बोला- मोनिका, तुम्हारी गांड मुझे बहुत पसंद है!
और मेरे ऊपर से उतर कर साइड में लेट गए.
कुछ देर बाद हम दोनों ने शावर लिया और नंगे ही बेड पर आकर लेट गए। पता नहीं कब हमें नींद आ गयी।
जब मेरी नींद खुली तो शाम के 8 बज चुके थे। मैंने संजय को उठाया, हमें भूख भी लगी थी तो मैं खाना बनाने के लिए जाने वाली थी और जब कपड़े पहनने लगी तो भाई ने कहा- मोनिका, कल शाम तक कोई कपड़ा नहीं पहनना।
मुझे अजीब लगा।
खैर मैंने खाना बनाया और डाइनिंग टेबल पर लगा दिया और संजय को बुला लिया- भैया, आ जाओ, खाना तैयार है, खा लो!
संजय भाई नंगे ही आये, मैंने देखा तो संजय का लण्ड खड़ा था।
वो कुर्सी पर बैठ गए और मुझे अपने पास बुलाकर अपने लण्ड पर बैठा लिया और खाना खाने लगे। बीच बीच में भाई मेरी चूचियों को दबा देते थे।
खाना खाकर हम फिर से बिस्तर पर चुदाई की दुनिया में खो गए।
अगले दिन और रात को भी हमने बहुत बार चुदाई की और दिन रात हम दोनों नंगे रहे।
मेरी आगे की स्टोरी आप पर निर्भर है। स्टोरी मेरी हो या मेरी सिस्टर की ये आपको बताना है।
तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी ये कहानी