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Sunday, December 23, 2018

मेरी कुंवारी बुर की ठुकाई की चाहत



मेरे प्यार प्यारे दोस्तो, और सहेलियों, कैसे हैं आप सब?
मैं उम्मीद कर रही हूँ कि इस ठंड में लड़कों को चूत और लड़कियों को लण्ड खूब मिल रहे होंगें। सर्दियों के मौसम में अगर चूत को लण्ड और लण्ड को चूत मिल जाए तो मज़ा ही आ जाता है। मेरा तो बहुत मन करता है गर्म-गर्म लण्ड लेने का। और बात जब सर्दियों की हो तो उसका मज़ा दोगुना हो जाता है।
मैं अपनी पहली कहानी लेकर आप सबके सामने आई हूँ कि कैसे मैंने पहली बार एक लण्ड को पटाया और वो जल्दी ही पट भी गया. चूँकि यह मेरी पहली कहानी है तो अगर कोई गलती हो जाए तो आप लोगों से कहना चाहूँगी कि नज़रअंदाज़ कर दें। अब मैं आपको अपनी पहली ठुकाई की कहानी बताती हूँ।
सबसे पहले मैं अपना परिचय दे दूं। मेरा नाम रश्मि शर्मा (काल्पनिक) है, मैं यू. पी. की निवासी हूँ। मेरे वक्ष का साइज़ 34, कमर 30 और गांड 36 की है। नैन-नक्श से हुस्न की मल्लिका हूँ मैं। मेरे स्तन गोल-मटोल हैं और निप्पल भूरे रंग के हैं। मेरी इस पहली कहानी में मैं बताऊंगी कि मैने अपनी सील कैसे तुड़वाई।
मैं अंतर्वासना की नियमित पाठिका हूँ. इस मजेदार साइट की ज्यादातर कहानी मैंने पढ़ी हैं उन कहानियों को पढ़कर मेरी भी चूत लण्ड निगलने को कुलबुला उठती थी। मेरा भी मन करता था कोई मेरी चूत चूसे, मेरे दूध दबा कर निचोड़ डाले, मेरी चूत में खीरे जैसा लण्ड डाल कर फाड़ डाले।
बहुत बार ट्राई किया कि किसी लण्ड को फंसाऊं लेकिन अभी तक मैं अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाई थी। फिर एक दिन वो मौका आ ही गया जब मुझे अपने लिए एक लण्ड मिल गया। जो मेरी चूत का उद्घाटन करने के लिए जल्दी ही तैयार भी हो गया।
बात बीते कुछ दिन पहले की है जब मैं कॉलेज जाती थी। नवंबर का ही महीना था, मैं अपने परिवार के साथ एक कार्यक्रम में शामिल होने दूसरे शहर गयी थी। वहाँ जाकर थोड़ा आराम करने के बाद में ग्राउंड में टहल रही थी कि मेरी नज़र एक लड़के पर पड़ी. वो मेरी तरफ देख कर मुस्कराया तो बदले में मैं भी मुस्करा दी।
शाम को सब लोग खाना खा रहे थे तभी वह लड़का भी हमारे पास आ गया और फिर ताऊ की बेटी ने हम सबका परिचय उससे कराया। मुझे वह बहुत ही स्मार्ट लगा। हम दोनों चुपके से एक दूसरे को ही देख रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे से इशारे में ऊपर अकेले में आने का न्यौता भी दे डाला। खाने के बाद मैं सबसे नज़रें छिपा कर ऊपर पहुंची तो देखा कि वो मेरा इंतज़ार कर रहा था।
हम दोनों में सामान्य बातें होने लगीं.
कुछ देर में मुझे ठंड लगने लगी और मेरे चेहरे पर ठिठुरन देखकर उसने मुझसे पूछ लिया- ठंड तो नहीं लग रही है?
मैंने कह दिया- ज्यादा तो नहीं लग रही, मगर हल्की-हल्की लग रही है।
मेरे यह कहने पर उसने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा- दिखाओ, कितनी लग रही है।
मेरा हाथ पकड़कर उसने मेरे हाथ को अपने हाथ में लिया और प्यार से सहलाने लगा। मुझे अच्छा लगने लगा। मैं मंद-मंद मुस्कुरा रही रही थी। वो भी समझ गया कि मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं ऐसा करवाने में। उसने मुझे अपने थोड़ा और पास आने के लिए कहा तो मैं सरक उसके और पास चली गई। उसने मुझे दोनों बांहों में भरते हुए कहा- अब तो नहीं लग रही ना?
मैंने कहा- नहीं।
फिर धीरे-धीरे उसने मेरे कंधे को सहलाना शुरू कर दिया और मुझे अब उसकी छुअन में अधिक आनन्द आने लगा। मैंने आंखें बंद कर लीं और उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और अपने होंठ सीधे मेरे होंठों पर रख दिए। मैं भी यही चाह रही थी।
उसके होंठ चूसने का अब मेरा भी मन करने लगा तो हम दोनों के होंठ आपस में तेज-तेज चलते हुए जैसे कुश्ती लड़ने लगे और उसका हाथ मेरे स्तनों को दबाने लगा, मैं गर्म होने लगी.
बहुत देर तक उसके होंठों को चूसने के बाद मेरा दिल भी कर रहा था कि मैं उसके लण्ड पर हाथ रख दूँ. मैंने उसके लण्ड पर हाथ रख दिया और वो उसकी पैंट में उछलने लगा. मेरी कामुकता और ज्यादा बढ़ती जा रही थी. हम पागलों की तरह एक दूसरे को चूसते ही जा रहे थे. वो मेरे स्तनों को मसल रहा था और मैं उसके लण्ड को सहलाने का मज़ा ले रही थी।
वो मेरे स्तनों को दबाते-दबाते दूसरा हाथ मेरी चूत पर ऊपर से फिराने लगा. मेरी चूत भी पानी छोड़ने लगी. मेरे मुँह से सिसकारी निकलने लगी. डीजे की तेज़ आवाज़ में मेरी सिसकारी दब कर रह जाती।
मैं भी उसके लण्ड को हाथ में पकड़ने की कोशिश करते हुए सहलाती जा रही थी जिससे उसका लण्ड अपने पूरे आकार में तनकर बिल्कुल रॉड जैसा सख्त हो गया था और उसका काफी मोटा भी था।
जब उससे रहा न गया तो उसने अपना लण्ड बाहर निकाला और मेरे हाथ में पकड़ा दिया और मैं उसके कड़क लण्ड पर हाथ फिराने लगी, उसे अपनी तरफ़ खींचने लगी।
हम दोनों ने चारों ओर देखा पर कोई जगह ढंग की नहीं मिली जहां पर हम आराम से एक दूसरे की प्यास बुझा सकें। हमारे पास समय और जगह दोनों की ही कमी थी। फिर उसने मुझे वहीं दीवार के सहारे लगाकर मेरा लहंगा ऊपर कर दिया।
वो नीचे बैठकर मेरी चूत को चाटने लगा। मैंने लहंगा उसके सिर पर डाल दिया और उसको ढक लिया। उसने मेरी एक टाँग अपने हाथ से उठा रखी थी और अपनी जीभ मेरी चूत पर फिरा रहा था। वो मेरी पानी छोड़ रही चूत का रस पीने लगा, अपनी जीभ मेरी चूत में घुसेड़ने लगा। मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि उसके सिर को पकड़कर अपनी चूत में घुसा लेना चाहती थी। उसने मुझे बिल्कुल पागल कर दिया था।
जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने अपनी जीभ चूत से निकाल ली और मैंने लंहगा हटा दिया। वो मेरी तरफ कामुक नज़रों से देख रहा था। मैं तड़प रही थी. मेरी तड़प देखकर उसे अच्छा लग रहा था. वो फिर से खड़ा हो गया और मेरी चूत चाटने के बाद जो रस उसके होंठों पर लगा हुआ था, उसी रस के साथ उसने मेरे होंठों को फिर से चूसना शुरू कर दिया। मैं और ज्यादा कामुक हो गई।
फिर उसने साथ ही मेरे स्तनों को फिर से दबाना शुरू कर दिया। बड़ा खिलाड़ी लग रहा था वो कमीना! उत्तेजित होकर मैंने उसके लण्ड को और तेजी से मसलना शुरू कर दिया। अब वो भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था और उसने मुझे अपनी टाँगों के पास बैठा लिया। उसका मोटा खीरे जैसे लण्ड मेरी नाक की सीध में फनफना रहा था।
उसने अपना लण्ड मेरे होंठों पर फिराना शुरू कर दिया। मेरे गालों पर भी फिराया और माथे पर भी लगाया। मैं भी उसकी क्रिया का मज़ा ले रही थी। वो समझ गया था कि मैं लण्ड के लिए कितने दिनों से तड़प रही थी।
उसके लण्ड से निकल रहा चिपचिपा पदार्थ मैं अपनी जीभ से चाट जाती थी। उसका स्वाद मैंने पहली बार चखा था कि लड़कों के लण्ड से जो पानी निकलता है वो कैसा लगता है। नमकीन सा पानी बूंद-बूंद करके बाहर आ रहा था।
अब मैंने उसके लण्ड के टोपे को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया, वो सिसकारी लेने लगा। उसने अपना टोपा चटवाने में बहुत मज़ा आ रहा था। मैं भी उसके लण्ड के टोपे को लॉलीपोप की तरह चाट रही थी। जब मैंने देखा कि वो बहुत तड़प रहा है तो फिर मैंने बिना कहे ही उसका लिंग अपने मुँह में ले लिया और मजे़ लेकर चूसने लगी। वो मेरे मुंह में अपने लण्ड को अंदर-बाहर करने लगा। उसका मोटा लण्ड लेकर मेरा मुंह भर गया था लेकिन मुझे उसका लिंग चूसने में बहुत ही मजा आ रहा था।
मेरी चुदने की इच्छा भी बस अब पूरी होने ही वाली थी। काफी देर तक चुसाई के बाद मैंने अपनी चूत में लण्ड डालने के लिए उससे खुद ही कह दिया।
वो भी बस इंतज़ार में ही था कि कब चूत में घुसाने को बोलूंगी मैं… जब उसने अपना मोटा लौड़ा मेरी चूत में घुसाया तो पहले तो मुझे काफी दर्द हुआ लेकिन उसका लण्ड इतना मस्त था कि वो दर्द भी बर्दाश्त किया जा सकता था।
और जिसे चुदने की चुल्ल हो उसे दर्द में भी मज़ा आता है।
उसके मोटे खीरे जैसे लण्ड ने मेरी सील तोड़ दी जिसके टूटने से मेरी चूत से खून आने लगा। फिर भी मैं दर्द को सहन करती रही, बहुत मज़ा आने लगा था उससे चुदते हुए। वो मेरी चूत में पिस्टन की तरह धक्के मारे जा रहा था, कुछ देर में मेरा सारा दर्द गायब हो गया और अब इतना आनन्द आ रहा था कि उससे चुदती ही रहूं और वो मुझे ऐसे ही सारी रात चोदता रहे।
कभी उसके धक्के तेज़ होने लगते तो कभी धीरे-धीरे प्यार से चोदने लगता। बहुत मज़ा दे रहा था मुझे। मेरी सारी तमन्ना पूरी कर रहा था वो!
मेरी चूत अपनी चुदाई करवाते-करवाते जब तृप्त होने लगी तो मेरी चूत से एक कामरस का सैलाब बाहर आ गया। उसके बाद भी वो नहीं रूका और लगभग 2-3 मिनट बाद उसने एकदम से अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया और बाहर आते ही उसके लण्ड से गाढ़े दूध जैसी पिचकारियाँ छूटने लगीं। उसने सारा वीर्य वहीं ज़मीन पर गिरा दिया।
उसके बाद रुमाल से उसने मेरी चूत और अपने औज़ार को साफ किया। वो काफी थका-थका सा लग रहा था और मेरी चुदने की ख्वाहिश पूरी होने के बाद मैं भी अब वहां ज्यादा देर रुकना नहीं चाहती थी। इसलिए हम दोनों नज़र बचाकर नीचे आ गए।
लेकिन बाद में मुझे पता चला कि हमारे इस चुदाई के खेल को कोई और भी देख रहा था। कोई दूसरा लड़का था लेकिन उसने अभी तक किसी को कुछ नहीं बताया था। नीचे आकर मैं एक जगह पर बैठ गयी क्योंकि दर्द के कारण मुझे चलने में दिक्कत हो रही थी। लेकिन उस मोटे लंड से चुदने के बाद मैं अंदर ही अंदर खुश भी हो रही थी।
हम लोग फिर सुबह अपने घर आ गए और घर आकर मैंने आराम किया। मन में बहुत खुशी थी क्योंकि वह मेरी पहली चुदाई थी जिसने मुझे बहुत आनन्द दिया और उसके बाद मैं दूसरे शिकार की तलाश में जुट गई। क्योंकि एक बार चुदकर जो सुख मुझे मिला था वो सुख मैं बार-बार अनुभव करना चाह रही थी। मुझे पहली चुदाई में दर्द तो बहुत हुआ लेकिन मोटा लण्ड लेने की मेरी तमन्ना भी पूरी हो गई जिसमें मुझे बहुत मज़ा आया।
मैं अपनी उस पहली ठुकाई को बहुत याद करती हूँ। और जल्दी ही किसी नए लण्ड को फंसाऊंगी और आपके लिए एक नया किस्सा लेकर आऊंगी। तब तक आप मुझे बताएँ कि आपको मेरी यह पहली चुदाई की कहानी कैसी लगी. आप मेल पर अपनी राय देकर जरूर बताएँ और यदि मेरी पहली कहानी में कोई गलती हो गई हो तो मुझे माफ करें। नीचे दी गई मेल आई-डी पर मैं आपके मैसेज का इंतज़ार करूंगी।
rsharmafemale@gmail.com

Wednesday, December 12, 2018

टीचर भाभी के साथ पहली चुदाई

इस इंडियन सेक्स कहानी के सभी पात्र और घटनाएँ काल्पनिक हैं, इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है। यदि किसी जीवित या मृत व्यक्ति या घटना से इसकी समानता होती है, तो उसे मात्र एक संयोग समझा जाये।
आपका परिचय अपनी कहानी के कुछ पात्रों से करवाता हूँ।
मेरे घर में 5 सदस्य हैं। पापा रमेश 42 वर्ष, मम्मी सुनीता 40 वर्ष, सबसे बड़ा भाई अमित 22 वर्ष, उनसे छोटी बहन नेहा 20 वर्ष, और सबसे छोटा मैं हूँ सुनीत 18 वर्ष।
मेरे पापा एफ सी आई विभाग में क्लर्क हैं, मम्मी हाउसवाइफ हैं, अमित भैया, नेहा दीदी कॉलेज में पढ़ते हैं और मैं 12वीं कक्षा में पढ़ता हूँ। हम दिल्ली में एक तीन मंज़िल की बिल्डिंग में रहते हैं। सबसे नीचे वाले फ्लोर पर दो दुकानें हैं, एक ब्यूटी पार्लर की और दूसरी मेडिकल स्टोर की और बाकी जगह में पार्किंग है।
फर्स्ट फ्लोर पर एक परिवार रहता है उसमें 4 सदस्य हैं अंकल (43 वर्ष टीचर) आंटी (38 वर्ष टीचर) और उनकी दो बेटियाँ कनिष्का (21 वर्ष) और साक्षी (18 वर्ष), दोनों कॉलेज में पढ़ती हैं। फर्स्ट फ्लोर की दूसरी साइड अभी खाली है।
दूसरे फ्लोर पर आमने-सामने दो फैमिली रहती हैं, राइट साइड पर जो भैया-भाभी रहते हैं, उनकी शादी को 4 वर्ष हो गए हैं, उनकी एक बेटी है 1 वर्ष की, मनीष भैया 26 वर्ष, बैंक में क्लर्क हैं और किरण भाभी (24 वर्ष) हाउसवाइफ हैं।
लेफ्ट साइड पर भी एक फैमिली भैया-भाभी रहते हैं उनकी शादी को 3 वर्ष हो गए हैं पवन भैया (28 वर्ष) सॉफ्टवेयर कम्पनी में हैं और रीना भाभी (25 वर्ष) हाउसवाइफ हैं।
सबसे ऊपर तीसरे फ्लोर पर हम रहते हैं, एक साइड पर मम्मी-पापा रहते हैं और दूसरी साइड पर हम तीनों के रूम हैं।
अब मैं कहानी पर आता हूँ। पढ़ाई में मैं ठीक-ठाक हूँ, स्पोर्ट्स में अच्छा हूँ। स्कूल में पढ़ाई के अलावा हम काफी कुछ सीखते हैं। तो कहानी की शुरुआत होती है क्लास के चैप्टर ‘मानव जनन कैसे करता है?’ से!
टीचर ने हमें कहा- तुम्हें सब पता है और ये चैप्टर जरूरी नहीं है.
ऐसे कहकर मतलब इसे टाल दिया और कहा- खुद ही पढ़ लेना।
अब मेरी उत्सुकता हुई इसके बारे में और अधिक जानने की!
यकीन मानो दोस्तो … इससे पहले मेरी कोई रूचि नहीं थी इस विषय को लेकर। मेरे दोस्त जो इस बारे में पहले से ही जानते थे, उनसे सुना था और अब तक मैं इन बातों पे ज्यादा ध्यान नहीं देता था लेकिन अब ये सब जानने की मेरी थोड़ी इच्छा हुई।
रीना भाभी मुझे पढ़ाती हैं, कभी-कभी किरण भाभी भी मुझे पढ़ाती थी लेकिन अब वो सिर्फ नेहा दीदी को पढ़ाती हैं क्यूंकि वो बड़ी कक्षा में है।
मेरी सभी से अच्छी बनती है। मेरी नेहा दीदी से बहुत अच्छी बनती है, हम भाई बहन से ज्यादा अच्छे दोस्त हैं। रीना भाभी और मैं बहुत क्लोज़ हैं बेस्ट फ्रैंड्स की तरह। खूब हंसी मजाक और सारी बात एक दूसरे से शेयर करते हैं। रीना भाभी दिखने में बहुत सुन्दर हैं, भाभी घर पर थोड़े खुले सलवार कमीज पहनती हैं। अक्सर भाभी मेरी पीठ पर अपने बूब्स दबा देती हैं, कभी कभी मुझे अपनी बाँहों में कसकर पकड़ लेती हैं, अब तक मेरे दिल या दिमाग में भाभी या किसी और को लेकर कोई अलग बात नहीं थी। मैं खेल कूद में मस्त रहने वाला था उस दिन तक, जब तक वो (जनन वाला) चैप्टर नहीं आया था।
अगले सप्ताह से स्कूल में रिविज़न शुरू हो गया.
इधर घर पर रीना भाभी ने मम्मी को बताया कि पवन कुछ दिनों के लिए गाँव जा रहे हैं और मैं यहीं रहूंगी, मुझे अकेले डर लगता है। अगर सुनीत रात को मेरे पास रुक जाये तो उसकी पढ़ाई हो जाएगी और मुझे कंपनी मिल जाएगी।
मम्मी ने कहा- रीना, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है… लेकिन तुम जानती हो सुनीत बहुत शरारती है।
भाभी बोली- कोई बात नहीं आंटी, वो इतना भी शरारती नहीं है और मैं उसे पढ़ाती भी तो हूँ।
मैं स्कूल से आया और खाना खाकर वीडियो गेम खेलने लगा. तभी मम्मी आयी और बताया कि आज सुबह पवन भैया कुछ दिनों के लिए गाँव गए हैं तो कुछ दिन नीचे रीना भाभी के पास सो जाना।
मैंने कहा- भाभी सिर्फ पढ़ने को बोलती रहेगी।
तो मम्मी बोली- मैंने उसको बोल दिया है कि ज्यादा पढ़ाई करने को न बोले तुझे!
“अब ठीक है!” मैंने सोचा कि बहुत अच्छा मौका है अब तो भाभी से सब कुछ पूछ लूँगा।
तो मैंने हाँ कर दी।
शाम को साढ़े 8 बजे मैं भाभी के पास अपनी किताबें लेकर पहुँच गया.
भाभी बर्तन धो रही थी, मुझे देखते ही बोली- क्या बात है … तू तो बिना कहे ही किताबें लेकर आ गया?
मैंने कहा- हाँ भाभी, मैंने सोचा आप बोलो, इससे अच्छा है खुद ही ले चलूँ।
फिर बर्तन धोकर भाभी आई और मुझसे बोली- चल बता … मैथ पढ़ेगा या सोशल स्टडीज़?
मैंने कहा- भाभी आज टी.वी. देखते हैं, कल पढ़ेंगे!
वो बोली- नहीं, तू किताब कॉपी निकाल, मैं अभी आती हूँ।
भाभी बाथरूम की तरफ जाने लगी. तभी एक छिपकली भाभी की तरफ गिर पड़ी। भाभी चिल्लाती हुई कमरे की तरफ भागी, मैं भी आवाज सुनकर भाभी की तरफ भागा. तभी भाभी मुझसे टकराई और हम दोनों नीचे गिर पड़े.
जब हम टकराये तो अनजाने में भाभी के बूब्स मुझसे दब गए थे, मुझे बहुत अच्छा लगा.
अब भाभी बोली- छिपकली … छिपकली …
मैंने कहा- क्या भाभी? डरा दिया बिना फालतू में!
फिर मैं उठा और भाभी को भी उठाया।
फिर कुछ देर बाद भाभी मुझे पढ़ाने लगी। कुछ देर बाद हम लेट गए सोने के लिए भाभी बेड पर और मैं पलंग पर।
मुझे उस रात काफी देर से नींद आयी, मैं भाभी के बारे मैं सोचता रहा, ऐसा पहली बार नहीं हुआ था कि भाभी के बूब्स मुझसे टकराये हों लेकिन आज पहली बार मैं वही सोचे जा रहा था। दिल में अजीब सी हलचल थी।
अगले दिन स्कूल में भी मेरा मन नहीं लग रहा था, मैं बस भाभी के बारे में ही सोचता रहा.
दूसरी शाम भाभी मुझे पढ़ाने लगी, काफी देर तक एक सवाल समझाने के बाद भी मुझे समझ नहीं आ रहा था, तो भाभी गुस्से में बोली- तेरा ध्यान कहाँ है?
मैंने कहा- कहीं नहीं!
वो बोली- मुझे बता जो भी बात है?
मैंने कहा- ऐसी कोई बात नहीं है, आज मन नहीं कर रहा पढ़ने का!
वो बोली- अच्छा कोई बात नहीं, टी.वी. देखते हैं.
मैं कुछ नहीं बोला तो वो बोली- तेरा ध्यान कहाँ है, कुछ हुआ है क्या, मुझे नहीं बताएगा?
मैंने कहा- भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है आप टी.वी. चलाओ ना।
फिर हम दोनों टी.वी. देखने लगे.
कॉमेडी शो चल रहा था, भाभी हँस रही थी लेकिन मेरा दिमाग तो वही सब सोच रहा था। भाभी यह बात नोटिस कर रही थी और बोली- तू मुझे नहीं बतायेगा तो मैं तेरी मदद कैसे करूंगी।
भाभी ने टी.वी. बंद कर दिया, फिर मेरे दोनों हाथ अपने हाथों में लेकर बोली- बता क्या बात है?
मैंने हाथ हटाते हुए कहा- कुछ नहीं भाभी!
वो बोली- अच्छा ठीक है, मत बता, वैसे भी मैं तेरी लगती कौन हूँ बस बोलने के लिए बेस्ट फ्रेंड हूँ।
मैंने कहा- नहीं भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है.
वो बोली- गर्लफ्रेंड से लड़ाई हो गई?
मैंने कहा- नहीं भाभी, आप भी ना!
वो रूठे स्वर में बोली- मुझसे बात मत करियो!
फिर मैंने कहा- अच्छा वादा करो कि आप गुस्सा नहीं करोगी और मुझे सब सच-सच बताओगी।
वो बोली- चल ठीक है वादा, मैं गुस्सा नहीं करूंगी और सब सच-सच बताऊँगी पूछ क्या पूछना है?
मैंने कहा- मुझे वो… मुझे वो… सब बताओ शुरू से, शुरू से सब कुछ बताओ।
वो बोली- क्या बताऊँ?
मैंने कहा- वो पीरियड, सेक्स के बारे में।
भाभी मना करने लगी लेकिन मैं जिद करने लगा, मैंने कहा- आपने वादा किया है.
तो वो बोली- ठीक है, लेकिन तू ये बात किसी को नहीं बताना, तुझे मेरी कसम।
मैंने कहा- आपकी कसम … किसी को नहीं बताऊँगा।
फिर भाभी ने मुझे सब बताया कि सेक्स कैसे होता है, पीरियड के बारे में और बच्चा कैसे पैदा होता है।
ये बातें सुनकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया, मैंने कहा- मैं बाथरूम होकर आता हूँ।
मैं वापस आया तो भाभी बोली- इतनी देर हिलाने लग गया था क्या?
मैंने कहा- क्या मतलब भाभी?
वो बोली- अब इतना भोला भी मत बन, जैसे कुछ जानता ही ना हो।
मैंने कहा- भाभी, मैं सच में नहीं समझा।
भाभी बोली- अच्छा ज्यादा ड्रामे मत कर, मैं तुझे कल से देख रही हूँ, तू मेरे बूब्स घूर रहा है और कल शाम को छत पे मेरी ब्रा-पैंटी को भी छूकर देख रहा था।
मैंने कहा- सॉरी भाभी, वो स्कूल में बच्चे गन्दी बातें करते हैं लण्ड, चूत चुदाई तो मैंने सोचा कि …!
फिर मैं चुप हो गया।
भाभी जोर-जोर से हँसने लगी और बोली- अच्छा बता और कौन सी बात करते हो तुम स्कूल में?
फिर मैंने सब कुछ बताया।
वो बोली- अच्छा यह बता कि मैं तुझे कैसी लगती हूँ?
मैंने कहा- आप बहुत अच्छी हो!
इतना सुनकर भाभी ने मेरे होंठों पे चुम्बन किया, फिर बोली- तू किसी को बताएगा तो नहीं?
मैंने कहा- बिल्कुल भी नहीं भाभी!
फिर मैंने कहा- भाभी, आप बहुत सुन्दर हो.
वो बोली- तू क्या कम स्मार्ट है!
इतना कहकर भाभी ने मेरे होंठों पर एक और चुम्मा किया और फिर भाभी ने मेरी टीशर्ट उतार दी और पजामा उतारने का इशारा किया, तो मैंने पजामा भी उतार दिया।
इतने में भाभी ने भी अपनी कमीज उतार दी थी, अब वो ब्रा और सलवार में मेरे सामने खड़ी थी।
मैंने कहा- सो हॉट भाभी … ये आपके बूब्स तो बहुत मस्त हैं, मैं छूकर देखूँ?
वो बोली- बुद्धू … यह भी कोई पूछने की बात है।
मैंने भाभी के बूब्स दबाये और होंठों पर चुम्बन किया तो भाभी बोली- सुनीत … तू तो बड़े अच्छे से चुम्बन करना सीख गया है।
फिर मैंने भाभी के बूब्स दबाये ब्रा के ऊपर से … और सलवार के अंदर हाथ डाल कर भाभी की चूत को सहलाया. भाभी ने मेरे लण्ड को कच्छे के ऊपर से रगड़ना शुरू कर दिया।
फिर भाभी ने मेरे लण्ड को कच्छे से बाहर निकाला और मेरी मुठ मारना शुरू कर दिया.
थोड़ी देर में मैं झड़ गया तो भाभी पूछने लगी- सुनीत मजा आया?
मैंने कहा- हाँ भाभी, बहुत मजा आया।
अब भाभी ने अपनी सलवार उतार दी और वे बेड पे लेट गई। मैं पहली बार किसी लेडी को ऐसे देख रहा था, लाल ब्रा-पैंटी में भाभी बहुत सुन्दर लग रही थी। मैंने भाभी की पैंटी उतारी और लण्ड को उनकी चूत में घुसाने लगा लेकिन वो अंदर नहीं गया.
भाभी ने अपनी चूत पे थोड़ा थूक लगाया, मैंने भी उनको देखके अपने लण्ड पे थूक लगाया और भाभी की चूत में धीरे से घुसाया तो आधा अंदर लण्ड गया.
अब भाभी बोली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… यार … और जोर से झटका मार ना!
मैंने फिर एक और झटका मारकर अपना लण्ड भाभी की चूत में घुसा दिया.
फिर मैं धीरे-धीरे झटके मारता गया, भाभी ‘हाँ हाँ… जोर से… जोर से…’ बोलती रही, मैं झटके मारता गया. 5-6 मिनट बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने कहा- भाभी, फिर आने वाला है.
वो झट से बोली- बाहर निकाल!
फिर उन्होंने अपने हाथ से मेरी मुठ मारी और मैं फिर झड़ गया.
भाभी ने अपनी पैंटी से मेरा सारा वीर्य साफ़ किया और पूछने लगी- मजा आया ना?
मैंने हाँ मैं सर हिलाया.
फिर भाभी बोली- अब सो जा!
फिर हम दोनों उसकी हालत में ही सो गए।
रात को मेरी आँख खुली तो भाभी जाग रही थी और मुझे बड़े प्यार से देख रही थी।
मैंने पूछा- क्या हुआ भाभी?
वो बोली- तू बहुत प्यारा लग रहा है इसलिए तुझे देख रही हूँ।
मैंने भाभी को किस किया और हमने फिर चुदाई की और सो गए।
इस तरह मेरी पहली चुदाई खत्म हुई और चुदाई की सिलसिला शुरू हुआ।
आप अपने कमेंट लिखकर मुझे बताइये आपको मेरी इंडियन सेक्स कहानी कैसी लगी. आप मुझे ई-मेल भी कर सकते हैं।
kabirchauhanveer@gmail.com

पहली बार चुदाई मौसी के साथ



दोस्तो, मेरा नाम तेजस्व है. ये मेरी पहली और रियल सेक्स स्टोरी है. आपको कैसी लगी, पढ़ने के बाद ज़रूर बताना.
मैं बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा था. मैं दिखने में भी अच्छा था और मेरा रंग भी गोरा था, इसलिए कई लड़कियां मेरी फ्रेंड थीं. लेकिन उस समय मैं सेक्स के बारे में नहीं जानता था.
वक्त के साथ धीरे-धीरे मैं बड़ा होता गया. जब मैं जवान हुआ तो सेक्स की इच्छा भी मन में होने लगी. स्कूल में दोस्तों से सेक्स की बातें भी सुनता था. दोस्त अपनी सेक्स स्टोरी बताते थे … लेकिन मुझे ये बातें थोड़ी अच्छी लगती तो थोड़ी बुरी भी, क्योंकि घर में यही बताया जाता था कि इस तरह की बातें करना गंदी बात होता है. लेकिन संगत और कमउम्र का असर होने लगा था.
इस समय तक मेरा क्लास की लड़कियों को देखने का नज़रिया भी बदल गया था. अब जब भी किसी लड़की को देखता तो मेरी नज़र उसके मम्मों पर ही टिक जाती थीं और मन में सेक्स करने की इच्छा होने लगती थी. लेकिन किसी से कह नहीं पाता था.
बात उन दिनों की है, जब मैं 11 2वीं क्लास में था. मैं उस समय एकदम जवान पट्ठा हो गया था. वो सर्दियों के दिन थे. उस दिन जब मैं स्कूल से लौट कर घर आया तो पता चला कि मेरी दूर के रिश्ते की मौसी आई हुई हैं. वो मेरी हम उम्र ही थीं. मैंने उन्हें देखा तो बस देखता ही रह गया.
क्या बला की माल थीं. उनका गोरा रंग, पतला शरीर, मस्त मम्मे, उठी हुई गांड आह … दिल खुश हो गया.
मम्मी ने मेरे और मौसी के लिए खाना लगा दिया था. हम दोनों खाना खाते- हुए बातें कर रहे थे. बात ही बात में ही पता चला कि वो 12वीं क्लास में हैं.
मौसी इतनी खूबसूरत थीं कि बस मैं उनसे प्यार कर बैठा. लेकिन मैं कहने से डर रहा था कि कहीं वो बुरा ना मान जाए.
रात हुई … पापा अलग कमरे में सो गए. एक बेड पर मैं सो गया, बगल की खाट पर मेरी माँ और मौसी लेट गईं. हम अपनी-अपनी रज़ाई में दुबके हुए थे. मुझे नींद नहीं आ रही थी. मैं अपनी मौसी से प्यार का इज़हार करना चाह रहा था लेकिन डर रहा था.
फिर हिम्मत जुटा कर मैंने उनके हाथ पर अपना हाथ रखा, उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मुझमें थोड़ी हिम्मत आ गई. मैंने उनका हाथ थोड़ा सा दबाया … इस पर उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मैंने उनका हाथ धीरे-धीरे सहलाना शुरू कर दिया … पर मौसी ने कोई रिएक्शन नहीं किया. मैं समझ गया कि वो भी कुछ चाहती हैं.
मैंने धीरे से उसके कान में ‘आई लव यू …’ कहा तो उन्होंने मेरा मुँह दबा दिया. मौसी को डर था कि कहीं बगल में लेटी मम्मी सुन ना लें. मैं समझ गया. मैंने उनका हाथ धीरे से अपनी रजाई के अन्दर कर लिया लिया और उनकी उंगलियों को चाटने लगा. जब मुझे लगा कि अब मम्मी सो गई हैं तो मैंने मौसी के मम्मों पर हाथ रख दिया और दबाने लगा.
मौसी के चूचे बहुत ही मस्त थे. मैं पहली बार किसी लड़की के मम्मों को छू रहा था. मेरा लंड पूरा टाइट हो गया था. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. लेकिन मौसी सेक्स करने को अभी राज़ी नहीं थीं … शायद उन्हें कुछ डर था. अब तक हम दोनों एक-दूसरे के बारे में बहुत कम जानते थे.
अगले दिन रविवार था … इसलिए हमने एक-दूसरे से बहुत सारी बातें की. मौसी अब मुझसे बहुत खुल गई थीं.
रात हुई … सब सोने लगे लेकिन आज ना तो मेरी आँखों में नींद थी, ना ही मौसी की. कुछ देर बाद मैंने उन्हें अपनी रज़ाई में बुला लिया. डर हम दोनों को लग रहा था कि कहीं मम्मी जाग ना जाएं. ये मेरी जिंदगी में पहली बार हो रहा था. जब मैं किसी जवान लड़की के साथ एक ही बिस्तर पर लेटा था.
मैंने धीरे-धीरे उनके हाथों को सहलाना शुरू किया, वे मुझसे चिपक गईं. मैंने अपने होंठ उनके कोमल और गुलाबी होंठों पर रख दिए. मैं फिल्मों में चूमा-चाटी के सीन कई बार देख चुका था. सो थोड़ा आइडिया था. मेरा मन कर रहा था कि हम एक-दूसरे को यूं ही बांहों में जकड़े हुए पड़े रहें.
मैं मौसी के गुलाबी होंठों को बहुत देर तक चूसता रहा. कुछ देर बाद मौसी ने मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी. कभी मैं उनकी जीभ को चूसता, तो कभी वो मेरे होंठ चाटती रहीं. उस समय हम दोनों जन्नत की सैर कर रहे थे.
यह मेरा पहला चुम्बन था तो बहुत नया लग रहा था. मैं मौसी के साथ जिंदगी भर यूं ही किस करते रहना चाहता था.
फिर धीरे से मैंने अपना हाथ उनके चूचे पर रख दिया. मौसी के चूचे मीडियम साइज़ के थे.
धीरे-धीरे हम अपने होश खोते जा रहे थे. हम दोनों की साँसें गर्म और तेज हो रही थीं. मेरा लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आना चाह रहा था. मैं अपने हाथ धीरे से उनके पेट पर ले गया और उनकी नाभि में गुदगुदी करने लगा तो वो उछल पड़ीं. मैंने जैसे ही अपना हाथ और नीचे ले जाना चाहा, तो उन्होंने मुझे रोक दिया. मैं समझ गया कि मौसी अभी ऊपर ही मज़ा लेना चाहती हैं.
मैंने उनकी ब्रा को खोल दिया और उनके मम्मों को आज़ाद कर दिया. मैं पहली बार चूचियों को देख रहा रहा था, सो मैं तो ऊपर वाले की इस नियामत को देखता ही रह गया.
मौसी के दोनों मस्त उभार देख कर मुझे नशा सा चढ़ रहा था. मैं उन दोनों उभारों के ऊपर टंके हुए सबसे मस्त मूंगफली के दाने के बराबर गुलाबी रंग की घुंडियों को मसलने लगा. अगले ही पल मैं तो उन पर लगभग टूट ही पड़ा और निप्पलों को चाटते हुए मींजने लगा. मैं अपने जीवन में पहली बार किसी लड़की के दूध दबा रहा था सो मुझे होश ही नहीं रहा कि इसमें दर्द भी हो सकता है, मैं बहुत तेज दबाने लगा तो मौसी दर्द से कराहने लगीं.
फिर मैं बस मौसी के दूध हौले से सहलाने लगा. धीरे-धीरे मैंने अपनी जीभ से उनका पूरा पेट चाटा चूमा. वो पूरी तरह मदहोश हो चुकी थीं और मुझसे बेल की तरह लिपट गई थीं.
मैंने इसी बीच उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया तो वो शर्माने लगीं. मैं उन्हें किस करने लगा और रात के अंधेरे में ही उनकी चड्डी भी उतार दी. चड्डी के उतरते ही वो अपनी बुर ढकने लगीं.
मैंने समय ना गंवाते हुए अपने सारे कपड़े उतार दिए और उनसे चिपक गया. जैसे ही मैंने लंड को उनके शरीर को छुलाया, वो तो एकदम से पागल हो गईं. उनकी साँसें गर्म और तेज हो गईं.
मैंने नीचे को होकर अपने होंठ उनकी बुर पर रखा … तो दोस्तों की सारी बातें याद आने लगीं. मौसी की बुर जैसी भट्टी की तरह गर्म हो गई थी. मुझे बुर के छेद का अंदाज़ा नहीं था इसलिए मौसी ने अपने हाथ से मुझे अपनी बुर का रास्ता दिखाते हुए मेरी उंगली अपनी बुर के छेद में लगा दी.
मैं बुर के स्पर्श से दंग रह गया. मौसी की बुर फूल से भी कोमल थी. उनकी बुर पानी से पूरी तरह गीली हो चुकी थी. मैं समझ गया था कि मौसी चुदाई के लिए तैयार हैं.
मैंने सबसे पहले अपनी एक उंगली को उनकी बुर में डाली और अन्दर-बाहर करने लगा. कुछ देर बाद उन्होंने खुद मेरा लंड अपनी बुर के छेद पर रखवा लिया. मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनकी बुर पर लंड से हल्का दबाव बनाया तो लंड फिसल गया. मैंने फिर ट्राइ किया तो लंड हल्का सा अन्दर घुस गया. लंड के अन्दर घुसते ही वो छटपटा उठीं और मुझसे अलग होने की कोशिश करने लगीं. मैंने उन्हें जोर से पकड़ किया और एक धक्का दे मारा. वो बहुत जोर से चीखने को हुईं … लेकिन उनकी आवाज़ बाहर ना आ सकी.
मैं मौसी के होंठों पर अपने होंठ लगाए हुए था. अब मैं उनकी चुदाई किए जा रहा था. उनके हाथ के नाख़ून मेरी पीठ में गड़ रहे थे. मौसी मेरे लंड के कारण छटपटा रही थीं और उनकी कुंवारी बुर से खून बह रहा था … वो दर्द से तड़फ रही थीं.
कुछ देर बाद जब उनका दर्द कुछ कर कम हुआ तो मैंने एक जोरदार झटका मारते हुए अपना पूरा लंड मौसी की बुर में उतार दिया. वो एक बार फिर पागलों की तरह तड़फने लगीं, लेकिन चीख बाहर ना आ सकी. मुझे पता था कि उनको बहुत दर्द हो रहा है … लेकिन मैं मौका हाथ से खोना नहीं चाहता था.
मैं मौसी को लगातार किस किए जा रहा था और उनकी चूचियों को सहला रहा था. कुछ देर बाद जब मौसी का दर्द कम हुआ तो मैं मस्ती से धक्के लगाने लगा. अब वो भी गांड उठा कर मेरा साथ दे रही थीं. कुछ समय बाद मौसी मुझसे बहुत जोर से चिपक गईं और अकड़ कर ढीली हो गईं.
मुझे उनकी बुर से निकलता गर्म पानी उनके झड़ने का अहसास करा रहा था. कुछ देर मैं उन्हें चोदता रहा. तभी मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे अन्दर से कोई लावा फटने वाला है. मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी … कुछ ही धक्कों के बाद मैंने अपना सारा पानी उनकी बुर में गिरा दिया … और उनसे चिपक कर लेट गया.
दो जवान दिलों का मेल हो गया था. वो मेरी बांहों में पिघलती रहीं.
मैं आज अपनी सारी हसरतों को पूरी करना चाह रहा था. अभी हम दोनों टीन एज वाले थे, सो दिलों में खूब जोश था. कुछ देर बाद हम दोनों ने फिर से सेक्स किया.
सुबह होने से पहले वो फिर मम्मी की रज़ाई में घुस गईं.
मौसी के संग चुदाई की कहानी आगे भी है … आपके इस सेक्स स्टोरी पर मेल मिलने के बाद मैं उसे भी लिखूँगा.
मेरी पहली चुदाई की कहानी कैसी लगी ज़रूर बताएं.
tejasvsamrat11@gmail.com

मेरी पहली चुदाई चाचा की लड़की के साथ

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ऑफिस की मैडम की गोद भरी

सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार … मेरा नाम केशव है और मैं नवाबों के शहर लखनऊ से हूँ. मैं एक कंपनी में इंजीनियर हूँ और लम्बा चौड़ा लड़का हूँ. मेरा लंड 7 इंच का है और मोटा है.
बात आज से एक साल पहले की है. बात शुरू होती है हमारे ऑफिस की एक भाभी से जिनकी शादी 3-4 साल पहले ही हुई थी, वो मेरे ऑफिस में ही काम करती थी. सारे लड़के उनको देखकर अपना लंड मसलते थे. भई मसलें भी क्यों न … ऊपर क्या तबियत से उनको बनाया था! पूरे जिस्म में कहीं पर भी ज्यादा मांस नहीं था … पर जहाँ होना चाहिए था वहाँ भरपूर था यानि कि उनकी गांड और दूध एकदम मस्त थे, उनको देख कर किसी मुर्दे का भी लंड खड़ा हो जाये!
परन्तु वे ज्यादा किसी से बात नहीं करती थी. मैं उसको रोज़ गुड मॉर्निंग विश किया करता था … वो भी उसका हंस कर जवाब देती थी. वो औरत थी और वो हर मर्द की निगाह पहचान जाती थी पर मैं उसको कभी भी ऐसे नहीं देखता था कि उसको कुछ गलत सन्देश जाये उसके पति भी इंजीनियर थे और वो कुवैत में थे. उसके कोई बच्चा नहीं था और उसको उसके पति की कमी खलती थी यह बात उसकी बातों से और उसके चेहरे से मालूम पड़ती थी.
एक बार अक्टूबर 2016 में मेरा एक्सीडेंट हो गया इस वजह से मैं 3-4 दिन ऑफिस नहीं जा पाया. अचानक एक दिन दोपहर को मेरे पास फ़ोन आया और उसने मेरा हाल पूछा. मुझे पहचानने में जरा भी समय नहीं लगा कि ये तो ऑफिस में मैडम है.
फिर मैंने बताया- मैं ठीक हूँ और कुछ दिन लगेंगे मुझे अभी सही होने में!
फिर हमारी सामान्य बात होने लगी. एक दिन उसने ऐसे ही बातों बातों में पूछा- आपकी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?
मैंने कहा- नहीं मैडम!
तो उन्होंने पूछा- क्यों?
मैंने कहा- कोई आप जैसी मिली ही नहीं तो क्या करता?
वो उसके बाद कुछ देर कुछ नहीं बोली, फिर वो बाय बोल कर ऑफलाइन हो गयी.
अब उनका ऑफिस में बात करने का देखने का तरीका बदल गया था. एक बार उन्होंने कहा- आज मेरे हस्बैंड आये हुए हैं और घर पर शादी की सालगिरह की पार्टी है, आप आइयेगा.
मैंने कहा- ठीक है!
और मैं शाम को उनके यहाँ पंहुचा.
कुछ ख़ास लोग ही आये हुए थे उस शाम को … पर मुझे लगा उसके पति को देख कर कि इन दोनों के बीच में सब कुछ ठीक नहीं है क्यूंकि उसका पति बार बार उसको आंख दिखाता या हल्का फुल्का डांट देता था.
मैंने ड्रिंक ली और ऑफ़िस के कुछ लोगों से बात करने लगा. इतने में देखा कि वो भाभी (मैडम) रेलिंग पर खड़ी थी और उनकी आँखों में आंसू थे. मैंने उनसे रोने की वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि मेरे पति मुझे ख़ुश नहीं रखते हैं और ना खुद रहते हैं. और मुझे ही बांझ का ताना मारते हैं. आज तो उन्होंने कह दिया मुझे बच्चा चाहिए जैसे भी हो तुम जानो! अब तुम ही बताओ केशव, मैं क्या करूँ?
तब मैंने कहा- अगर आप बुरा न मानें तो मैं एक बात कहूं?
तो वो बोली- आजकल मुझे कुछ बुरा नहीं लगता है बताओ?
मैंने कहा- देखिये, अगर मैं आपकी मदद करूँ तो आप बदले में मुझे क्या देंगी?
तो बोली- तू जो कहेगा, मैं दे दूंगी. बता मैं कैसे अपने पति के बच्चे की माँ बनूँ?
तब मैंने कहा- आप मेरे बच्चे की माँ बन सकती हो!
मैडम इतना सुन कर वो मुझपर चिल्ला पड़ी और कहने लगी- चले जाओ यहाँ से तुरंत!
मैं जानता था कि आज नहीं तो कल … ये जरूर मुझे फ़ोन करेगी और तीन दिन बाद मेरे पास फ़ोन आया- केशव, उस रात के लिए माफ़ कर दो … मैं तुमसे ऑफिस के बाहर बात करना चाहती हूँ. मैंने हां कर दी.
फिर हम एक मॉल में मिले जहाँ उसने पूछा- कैसे क्या होगा … और किसी को पता नहीं लगे! मैंने अपने हस्बैंड से बात कर ली है.
तब मैंने उनसे कहा- आप एक हफ्ते की छुट्टी ले लो और हम रूम पर ही प्यार करेंगे. आप बिल्कुल चिंता न करें, मैं किसी को नहीं बताऊंगा.
तो वो खुश हो गयी.
मैंने अपने दोस्त की मदद से उसका रूम ले लिया और मैडम को वहां का पता मैसेज कर दिया. कुछ ही समय में मैडम कार से आ गयी.
यह क्या … वो एक बैग लायी थी और उन्होंने घर पर बताया था कि ऑफिस के काम से बाहर जा रही हैं.
जैसे ही वो अंदर आयी, मैंने उनको गोद में उठा लिया. वो बोली- रुको केशव, दरवाज़ा तो बंद कर लो! अब 5-6 दिन मैं तुम्हारी ही हूँ, दिन और रात अब सब तुम्हारे हैं.
मैं सोच भी नहीं सकता था कि जिसको देखकर पूरा स्टाफ अपना लण्ड मसलता है वो हुस्न परी आज मेरे सामने खुद चुदने आयी है.
खैर फिर मैंने दरवाज़ा बंद किया. वो बाथरूम में चेंज करने के लिए गयी और वापस आयी तो मैं उसको देखता रह गया, काली मैक्सी में वो हुस्न की अप्सरा लग रही थी. मैक्सी भी पारदर्शी अन्दर से दूध के पर्वत खुद बाहर निकालने को बेताब थे.
मैंने उसको पीछे घूमने को कहा. ऑफ़िस में जिस गांड को देखकर लोग मुट्ठियाँ मारते थे, वो आज मेरे सामने थी. मैंने उसको उठा के बेड पर गिरा दिया और उसके कमल की पंखुरी के जैसे होंठ चूसने लगा.
इसके बाद मैंने उसकी मैक्सी के बटन खोल मैक्सी उतारी, फिर उसकी ब्रा को उतार दिया उसके सफ़ेद पत्थर के जैसे गोरे दूध और उसके हल्के गुलाबी निप्पल मैंने मुँह में दबा लिए. मेरे जोर से चूसने पर वो चिल्ला उठी- यार आराम से करो ना … मैं तुम्हारे पास ही हूँ पूरे एक हफ्ते के लिए …
इसके बाद मैंने उसकी पैंटी को ऊपर से सूँघा तो मादक खुशबू का अहसास हुआ. फिर मैं उसकी पैंटी उतार कर दी. उसकी चूत पर एक बाल नहीं था, उसकी चूत मक्खन सी चिकनी थी. वो अपनी चुत चुदाई की पूरी तैयारी कर के आई थी. मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर फिरायी तो वो उछल पड़ी, तड़प उठी. मैं उसकी चूत की दरार में जीभ फिराने लगा और वो अपने चूतड़ हिला हिला कर, अपनी जांघें लहरा लहरा कर मचल रही थी.
फिर कुछ देर बाद उसने मेरे लंड को चड्डी की कैद से आजाद करते हुए हाथ में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मैं तो एक दम जन्नत में था और कुछ मिनट बाद मैं उसके मुँह में ही झड़ गया.
अब मैंने देर न करते हुए उसकी कमर के नीचे तकिया रखा और अपने ढीले लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा. पांच सात मिनट में ही मेरा लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया मैडम की चूत की घाटी का अन्वेषण करने के लिए.
मैंने लंड छुट के छेद पर टिका कर एक धक्का लगाया और लंड पूरा मैडम की चूत के अंदर…
मैडम कराह उठी- उम्म्ह… अहह… हय… याह…
और फिर धकापेल चुदाई का सिलसिला शुरू हो गया. मैंने चूत में लण्ड डाले डाले खुद की कमर को उसके पेट के ऊपर करके पूरा 360 डिग्री पर घुमाया. उसको इतना अच्छा लगा कि उसने अपने नाखून मेरी पीठ पर चुभा दिये और चूत की चटनी का प्रोग्राम चल पड़ा.
और हम लोगों ने 6 दिन तक दारु और चोदने के अलावा और कोई काम नहीं किया. यह सिलसिला सातवें दिन रुका जब मैडम अपना सामान लेकर वापिस अपने घर चली गयी यह आस लेकर कि शायद इतनी ज्यादा चुदाई से वो जरूर गर्भ धारण कर लेगी.
एक महीने बाद मैडम से ही मुझे सूचना मिली की कि वो गर्भवती है. मैडम बहुत खुश थी और मेरी खुशी का भी पारावार नहीं था. मेरी कोशिश सफल हो गयी थी.
उसके बाद से बस हम लोग ऑफ़िस में एकदम नॉर्मल रहते थे और कभी कभी बाहर चुदाई के साथी थे. समय अनुसार मैडम ने बालक को जन्म दिया लेकिन उससे पहले ही वो जॉब छोड़ चुकी थी. लेकिन हम दोनों अब भी आपस में सम्पर्क में हैं. अब वो दिल्ली में रहती है और कभी कभी मुलाकात हो जाती है.
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सहेली ने मुझे रंडी बनाया



सबसे पहले मैं आप सबको बता देती हूँ कि मेरा नाम सीमा है. मेरी उम्र 40 साल की है. फिगर बड़ा मस्त है.. एकदम सांचे में ढला हुआ, ये 32-36-38 का कटाव लिए हुए है. ख़ास बात ये कि मैं एकदम दूध सी गोरी और मक्खन सी कोमल हूँ. मेरी हाइट 5 फुट 3 इंच है, मैरिड हूँ. मेरे पति का जॉब विदेश में होने के कारण वे मुझसे अलग बाहर ही रहते हैं. मैं यहां अपने बेटे के साथ रहती हूँ.. लेकिन लास्ट ईयर से बेटा पढ़ाई के कारण हॉस्टिल में रहने लगा है, सो अभी मैं अकेली ही रहती हूँ.
अब जब दस साल से पति बाहर हैं, कभी कभार आते हैं तो तो मेरी सेक्स की इच्छा अधूरी ही है और वैसे भी मेरे पति को सेक्स में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं है, मुझे अभी सिर्फ़ साल में 2-3 बार ही सेक्स का सुख मिल पाता है, जिससे मैं बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूँ.
अब चूंकि जब से अकेली रहने लगी हूँ, तब से मेरे मन में सेक्स की इच्छा पूरी करने के लिए किसी और के साथ सम्बन्ध बनाने को लेकर बहुत सोचती हूँ, लेकिन थोड़ा डर भी लगता है, सो हिम्मत नहीं कर पाती हूँ.
मुझे नवरात्रों में डांडिया खेलने का बड़ा शौक है, मैं नवरात्रि में गरबा करने घाघरा चोली पहन कर हमारे काम्प्लेक्स के नज़दीक में, जहां गरबा होता है, वहां चली जाती हूँ
एक दिन वहां मुझे एक मेरे से छोटी उम्र की महिला मिली. उसका नाम रीना था, वो मेरे पास वाले फ्लैट की है. उस लेडी से मेरी दोस्ती हुई. वो भी मेरी तरह शौकीन मिजाज की थी.
अब हम दोनों का नवरात्रि के बाद भी एक दूसरे के घर आना जाना, बात करना शुरू हो गया था. हम दोनों एक सी विचारधारा की थी तो अपनी पर्सनल बातें भी करने लगी थी.
वो मुझे कई बार बोलती थी कि आप इतने साल से बिना सेक्स किए कैसे रहती हो.. मुझे तो मेरा पति रोज एक बार तो चोदता ही है, फिर भी मैं संतुष्ट नहीं हो पाती हूँ, सो मैं दूसरे के पास भी चली जाती हूँ.
इस तरह से उसने मुझे उसके लव अफेयर के बारे में भी बताया और मुझसे पूछा- आपका कोई ब्वॉयफ्रेंड है?
तो मैंने ना बोला.
एक दिन उसने मुझसे बोला- आज सिनेमा देखने का मूड है, चलो सीमा, चलते हैं.
मैं भी बोर हो रही थी, मैंने हां बोल दिया. हम सिनेमा के लिए हमारी सोसायटी से थोड़े दूर ही निकले थे कि एक फ़ौरचूनर कार आई.
उसने मुझसे बोला- चलो सीमा, गाड़ी में बैठो.
मैं तो कुछ समझ ही नहीं पायी. कार में आगे की सीट पर ड्राइवर और एक गन वाला आदमी था.
बीच की सीट में एक उम्रदराज आदमी बैठे थे, समझो करीब 60 साल के ऊपर के रहे होंगे. वो आदमी एकदम हट्टा कट्टा, थोड़ा काला, मुँह में पान चबाए हुए था. वो कुर्ता और लुंगी पहने हुए एक मुस्लिम था. उसकी दाढ़ी भी एकदम सफ़ेद थी.
रीना उसके पास बैठी और मैं रीना के पास बैठ गई. अब हम तीनों फिल्म देखने आ गए, वो रीना के कंधे पे हाथ डालकर बैठा था और जब थोड़ा अंधेरा हो जाता तो वो उसके मम्मों को दबा देता था.. ये सब मैं देखती थी.
फिर आधी फिल्म खत्म हुई, तो हम निकल आए. वो अपनी कार को सिटी से दूर एक फार्महाउस पर ले गए, वहां मुझे एक हॉल में बिठा कर वो दोनों करीब दो घंटे तक एक रूम में जाकर एंजाय करते रहे.. फिर उसने हम दोनों को घर छोड़ा.
मैंने रीना से पूछा तो उसने बताया कि मैंने तुम्हें बोला था ना, मेरा लवर है.
मैंने बोला- इतनी उम्र का?
तो वो बोली- उम्र से क्या होता, वो कितना पैसा मेरे लिए खर्च करता है और जितना सेक्स का मजा देता है, ऐसा तो कोई 25 साल का लड़का भी नहीं देगा.
मैं उसकी बात सुनकर हतप्रभ थी.
ऐसे ही मैं उसके साथ 3-4 बार गई और वो दोनों एंजाय करते थे.
एक दिन रीना मेरे घर आई थी. उसने मुझे बोला- सीमा तुम्हारे लिए एक ऑफर है.. बताऊं?
मैंने बोला- हां, बोला ना?
उसने बोला कि मुझे उन्होंने मतलब उसके लवर ने बोला है कि उनका एक दोस्त हैदराबाद से अगले वीक दो नाइट के लिए आने वाला है, यदि तुम उनको खुश करो तो..!
मैंने तो एकदम मना कर दिया- तुम क्या बोलती हो रीना!
फिर उसने बोला- जल्दी मत करो सीमा.. आराम से सोचना.. फिर बोलना, एकदम से मत बोलो. देखो तुम वैसे भी बिना सेक्स तड़पती हो, ये मैं जानती हूँ. तुम कैसे अपनी रातें काटती होगी, यहां तुम्हें सेक्स का सुख भी मिलेगा और सेफ्टी भी, ऊपर से वो तुम्हें 2 नाइट के लिए 1 लाख रूपया भी देंगे.
मैं उसकी बात सुनकर चुप रही.
फिर उसने अपने फोन से उसके लवर को कॉल किया और बोला- मैंने सीमा से आने को बोला है. लेकिन वो मना करती है.
फोन स्पीकर पर था, तो सामने से उन्होंने बोला- देखो कोई बात नहीं.. ये तो मैंने सोचा कि तुम्हारी सहेली है, इसलिए.. वरना मेरे पास 10 औरतों का बायोडाटा फोटो के साथ है. वो तो मेरे दोस्त को एकदम घरेलू जैसी ही चाहिए थी, सो मैंने बोला, बाकी जैसी उसकी मर्ज़ी, लेकिन जो भी है, मुझे कल बताना. फिर जिसको सिलेक्ट करूँगा, उसके लिए कपड़े वगैरह भी सब बनाना है.
इतनी बात के बाद उसने कॉल कट कर दिया. रीना भी मुझे सोचने का समय देकर चली गई.
उस दिन पूरी रात मुझे नींद नहीं आई. मैं सोचती रही. मेरे मन में सेक्स की तो इच्छा थी ही, रात में सेक्स के बारे में सोचते सोचते मेरी चूत से दो बार पानी निकल गया, पूरी पेंटी गीली हो गई.
सुबह में रीना का मैसेज आया- क्या सोचा?
मैंने बोला- तू पहले घर आ … फिर देखती हूँ.
फिर वो आई, मैंने बोला- रीना मैंने आज तक कभी ऐसा नहीं किया, सो डर लगता है, सोसाइटी में किसी को पता चलेगा तो?
रीना ने बोला- इस सबकी तुम बिल्कुल चिंता मत करो.. मैं हूँ ना.. और वैसे भी तुम्हें मालूम है, मेरे लव का, वो अपने एरिया के कॉरपोरेटर हैं और यहां के डॉन हैं. कोई तुम्हारे सामने आँख उठा कर भी नहीं देख सकेगा, जब कोई जानेगा कि तुम किसके साथ रीलेशन रखती हो, तो वैसे ही चुप हो जाएगा.
मैं चुप हो गई.. तो उसने सीधा फोन लगाया और उनको बोला कि सीमा तैयार हो गई है, अब और किसी को मत बोलना.
मैं तो देखती ही रह गई थी और उसने सीधा हां बोल दिया था. खैर.. मैंने भी मन बनाने को सोचा कि जो होगा देखा जाएगा.
फोन अभी चालू था और स्पीकर पर था.
उधर से उन्होंने बोला- ठीक है तो 3 बजे तुम दोनों बाहर आजो, मैं तुम्हें शॉपिंग के लिए ले जाऊंगा.. अभी 5 दिन बाकी हैं.
हम 3 बजे बाहर गए, उनकी कार आ कर हम दोनों को एक बहुत महंगे टेलर के पास ले गई. जहां कपड़ा भी उनके पास ही था, सिर्फ़ हमें कलर और फेब्रिक पसंद करना था.
मैंने और रीना ने कपड़े पसंद किये. मेरे लिए एक चोली घाघरा का कपड़ा पसंद किया. सिर्फ वो कपड़ा ही 25 हजार का था, उसकी सिलाई 15 हजार थी. फिर हम मॉल गए, उधर हमने 3-4 सैट फैंसी अंडरगारमेंट लिए, मेकअप का सामान वगैरह सब ले लिया. उन्होंने उस दिन मेरे लिए 75 हजार से भी ज़्यादा खर्चा किया.. ये सब तो सिर्फ़ मुझे सजाने के लिए खर्च किया गया था.
रीना मुझे शनिवार की सुबह में ही लेके निकल गई थी. वो बोली थी कि ब्यूटीपार्लर जाना है. जब मैं वहां आ गई तो मेरी बगलों के बाल, मेरी चूत के बाल, लेग वगैरह सब जगह वॅक्स करके एकदम मुझे चिकनी बंदी बना दिया गया.
इसके बाद मुझे वो करीब 4 बजे फार्म हाउस लेकर गई. मैंने देखा पूरे फार्महाउस पे सजावट हो रही थी. इतने आदमी काम कर रहे थे कि मुझे लगा कि कोई जलसा है.
मैंने बोला- इतना क्या है रीना यहां?
उसने बोला- वो जो उनके दोस्त आने वाले है, उनके लिए पार्टी अरेंज की है, ये सब उसी की तैयारी हो रही है. रात में पार्टी होगी, करीबन 150 लोग होंगे. पार्टी में सब मर्द उनके, जो बिजनेस रिलेटेड हैं, वे सब शिरकत करेंगे.
ये देख कर मैं शर्मा रही थी.
उसने बोला- अब चिंता मत करो.. चलो ऊपर चलते हैं. आज का तुम्हारा रूम दिखाती हूँ, जिधर तुमको संतुष्टि मिलेगी.
जब उसने ऊपर जाकर रूम खोला, तो मैं हैरान थी. बाप रे.. मैं देख कर दंग रह गई. पूरा बड़ा हॉल जैसा रूम था, जिसमें 10×10 का एक बेड लगा हुआ था, उस बेड को ताजे फूलों से खूबसूरत तरीके से सजाया जा रहा था. अभी काम चालू था. एक तरफ सोफा था, एक डाइनिंग टेबल भी थी. मैं तो पागल जैसे रह गई थी.
रीना बोली- सीमा, आज तुम्हारी सच में सुहागरात होगी.
यह कह कर वो हंसने लगी. मैं भी थोड़ा मुस्कुरा दी.
मुझे फिर उसने तैयार किया, चोली घाघरा पहनाया. मेरे लिए सोने का नैकलेस, रिंग, कंगन आदि सब लाया गया था. वो सब पहन कर दुल्हन की तरह सज गई.
फिर रीना बोली- देखो अब वो 8 बजे आएँगे, तुम्हें उनका वेलकम करने जाना है ओके.. सिर्फ़ तुम अकेली होगी, तब मैं नहीं आऊंगी. तुमको उन्हें गुलदस्ता देकर गेट से पार्टी में लेकर आना होगा. फिर बारी बारी सब लोग उनको वेलकम करने आएँगे, फिर पार्टी शुरू होगी, तो वो तुम्हें लेकर ऊपर आएँगे.
अब रीना धीरे से बोली- सीमा देखो. वो बहुत पैसे वाले हैं.. हां उम्रदराज हैं.. लेकिन अगर तुम उनको खुश करोगी, तो वो तुम्हें मालामाल कर देंगे.
मैं चुप रही.
फिर उसने बोला कि तुम्हारे बेड पे एक वाइट सिल्क का पेटीकोट रखा है, जब आप दोनों चुदाई शुरू करो, तुम अपने नीचे उसे रख लेना क्योंकि आज तुम्हारी रियल सुहागरात होगी, ब्लीडिंग हुई तो वो बेडशीट खराब ना हो और तुम्हें अपने सुहागरात की निशानी भी तो रखनी है ना.
इतना कह कर मुस्कुरा दी.
सब सैट हो गया था. अब मुझे भी चुदाई का इन्तजार था. ठीक 8 बजे वो आए, मुझे रीना का लवर लेकर गया- चलो सीमा, बॉस आ गए हैं.
मैं गई, उनको गुलदस्ता देकर स्वागत किया. जब मैंने उनको देखा.. बाप रे कम से कम 6.5 फिट की हाईट, बहुत मोटा सा आदमी एकदम काला भुजंग, करीब 65 साल की उम्र दिखती थी.. दाढ़ी एकदम सफ़ेद थी. वो कुर्ता पजामा में था.
जब मैंने गुलदस्ता दिया, उन्होंने जानबूझ कर मेरे हाथ को भी छू लिया था. वे मेरे बदन को पूरा निहार रहे थे. उनका वजन कम से कम 125 किलो का होगा. मैं एकदम घबरा गई थी लेकिन अब मेरे पास कोई रास्ता भी तो नहीं था. वो स्टेज पे मुझे अपने साथ लिए खड़े रहे, जैसे उनकी मैं बीवी होऊं. वो मुझे लेकर खड़े रहे.. बारी बारी सब लोग आकर उनको विश करते थे.
ठीक 9 बजने को आया, सब लोगों का मिलना पूरा हुआ तो रीना के लवर ने बोला कि बॉस अब आप भी ऊपर जाके खाना खाइए, आपकी पसंद का गुजराती भोजन तैयार है.
यह कह कर वो थोड़ा मुस्कुराया.
हम तीनों ऊपर चले गए. नीचे पार्टी चालू थी.
हम रूम में आए, रीना के लवर ने बोला- बॉस प्लीज़ अन्दर जाइए, आज की नाइट के लिए बेस्ट ऑफ लक.. सीमा तुम्हें भी बेस्ट ऑफ लक.
जैसे ही उनके साथ मैं रूम में गई, वो भी अन्दर आ गए और उन्होंने दरवाजा लॉक कर दिया. मैंने देखा कि डायनिंग टेबल पर हर तरह के स्वीट, जूस, फ्रूट आदि सजे थे. एक से एक डिश सजी थीं.. पानी की बॉटल रखी थीं.
उन्होंने मुझसे बोला- सीमा, मुझे मालूम है तुम्हें रात में सिर्फ़ जूस एंड फ्रूट लेने की आदत है.. सो मैंने खाने के लिए सिर्फ़ वो ही तैयार करवाया है, लेकिन आज हमारी पहली मुलाकात है, सो स्वीट तो चलना ही चाहिए. इसलिए थोड़ी स्वीट भी रखी है. चलो बैठो, हम खाना खाते हैं.
हम दोनों बैठ गए, फिर उन्होंने मुझे एक गुलाब जामुन मेरे मुँह में डाला. मैंने आधा खाया और आधा उनके मुँह में डाल कर खिलाया. फिर हम दोनों ने 2-3 तरह के जूस पिए. एक-दूसरे का झूठा खाया. बिल्कुल पति पत्नी जैसी फीलिंग आ रही थी.
अब उन्होंने बोला- बस मेरा हो गया. फिर हम दोनों साथ में जाकर हाथ धोकर आए. उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया. मैं तो सोच नहीं सकती थी कि इस उम्र में एकदम इतना पावर होगा. उन्होंने एक झटके में मुझे उठाया और बेड पे लेकर गए.
मैंने उनको बोला- लाइट ऑफ कीजिए ना.
तो वो बोले- अरे जानेमन.. जिस जिस्म को देखने हम पिछले एक वीक से तड़प रहे थे, बिना लाइट के उस हुस्न को कैसे देखेंगे. जब से तुम्हारी फोटो देखी है, हम तो तुम्हारे दीवाने हो गए थे जान.
उनकी बात सुनकर मैं शर्मा गई.
फिर उन्होंने धीरे से मुझे बांहों में लेकर किस करना शुरू किया. धीरे से मेरी पीठ पर मेरी ब्लाउज में हाथ डालकर ऊपर से सहलाना शुरू किया. जब उनका हाथ मेरे बदन पे पड़ा, लाइफ पे पहली बार मुझे लगा कि कोई मर्द का हाथ है. उनके हाथों का स्पर्श एकदम मजबूत और सख्त था. अब मैंने भी धीरे से उनको बांहों में लेकर क़िस करना शुरू किया. मुझे तो ये सब करते ही एकदम पहली बार पानी छूट गया था.
अब उन्होंने मेरा ब्लाउज खोला और ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मों को दबाने लगे.. चूचियों को सहलाने लगे. अब उन्होंने मेरा घाघरा भी निकाल दिया. मैं सिर्फ़ ब्रा पेंटी में रह गई थी. वो मेरे बदन को सहलाते निहारते रहे और मैं उनके बदन की सख्ती को स्पर्श करती रही.
जैसे ही उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोला, मेरे चूचे एकदम से बाहर उछल आए. वो अपने हाथ से मेरे मम्मों को मसलने लगे. मैंने धीरे से उनके सिर को मेरी एक चूची पे लगाकर एक निप्पल उनके मुँह में डाल दिया. मैं अपने हाथ से अपने चूचे दबाकर उनको चुसवाने लगी.
बारी बारी से वो मेरे दोनों अंगूर चूसते रहे. वे मेरे दोनों चूचुकों को बहुत हार्ड सक कर रहे थे.
मैंने बोला- आह.. धीरे जी.. काटना मत प्लीज़.
उन्होंने मुझे उनके कपड़े निकालने को बोला. मैंने पहले उनका कुर्ता निकाला. जब मैंने उनका पज़ामा देखा, मैं एकदम बेहाल हो गई. उनके पजामे का आगे का भाग इतना उभरा हुआ था कि मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था.
फिर मैंने पजामा निकाला तो अंडरवियर के ऊपर से देखा कि उनका लंड बहुत मोटा था. मेरे मुँह से निकल गया- बापरे इतना मोटा??? मैंने तो लाइफ में पहली बार देखा है.. मैं इसे नहीं ले पाऊंगी.
उन्होंने मुझे बांहों में लेकर बोला- सीमा डरो मत… कुछ नहीं होगा. हां फर्स्ट टाइम थोड़ा दर्द होगा, वो तो वैसे भी तुम्हारी रियल सुहागरात है, तो दर्द तो होगा ही.
यह कह कर वो मुस्कुराने लगे. फिर मैंने उनका अंडरवियर निकाला, एकदम काला कम से कम दस इंच लंबा और मेरी कलाई से भी मोटा लंड था उनका.. बिना स्किन का सुपारा था, एकदम चिकना और काला चुकन्दर जैसा दिख रहा था.
अब धीरे से उन्होंने मुझसे बोला- सीमा तुम इसे मुँह में लो.
मैं धीरे से नीचे जाके उनके पैरों के बीच में बैठ गई और उनका सुपारे पर किस करके धीरे धीरे मुँह में लंड लेना शुरू किया. उस सुपारे से कुछ मस्त कर देने वाली महक आ रही थी. कुछ ही पलों में मुझे लंड चूसना अच्छा लगने लगा. मैंने कम से कम 20 मिनट उनका लंड पूरा चूसा.
अब उनका मूसल सा लंड एकदम हार्ड हो गया था.. मेरी लार से.. और उनके रस से, उनका पूरा लंड चिकना हुआ पड़ा चमक रहा था. इस समय वो मेरी चूत में उंगली डालकर सहला रहे थे, मेरी चूत भी एकदम गीली हो गई थी. मैं एकदम गरम हो गई थी.
फिर उन्होंने मुझसे बोला- अब लेट जाओ सीमा रानी.. मैं लंड अन्दर डालता हूँ.
मैं अपने पैर खोल कर चित हो गई.
फिर वो मेरे ऊपर आकर बोले- सीमा मेरा वजन झेल लोगी ना?
मैंने बोला- हां..
जैसे उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के होल पर रखा, मैंने अपने हाथ से उसे थोड़ा सा अपनी चूत पे घिसते हुए लंड को चुत के होल के ऊपर रखा और उनको धीरे से बोला- हां अब डालो.
उन्होंने लंड को अन्दर डालने की जैसे ही कोशिश की, मेरे मुँह से ज़ोर से चीख निकल गई- बाप रे ईई.. मर गईईई.. कोई बचाओ..
फिर भी उन्होंने एक ज़ोर से झटका मार दिया. मेरी चूत तो जैसे फटी जा रही थी. ऐसा लग रहा था कि आज किसी ने गरम सरिया मेरी चूत में पेल दिया हो.
मैं लगभग बेहोश हो गई थी. फिर वो थोड़ी देर रुके, फिर एक ज़ोर से झटका मारा. मैंने मरी सी आवाज में बोला- अभी कितना गया?
उन्होंने बोला- आधा गया है.. अब एक ही झटके में पूरा घुस जाएगा सीमा.
यह कहते ही उन्होंने एक ज़ोर से झटका दे मारा, मेरी आँख से आँसू निकल गए. उनका पूरा मूसल लंड मेरी चूत के अन्दर चीरता हुआ चला गया.
मैं दर्द से कलप उठी. करीब 5 मिनट वो ऐसे ही पड़े रहे. फिर धीरे धीरे उन्होंने मेरी चूत में लंड को अन्दर बाहर करना शुरू किया. कुछ देर के दर्द के बाद अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था. हां मेरी चूत के अन्दर बहुत जलन हो रही थी, दर्द भी बहुत ज्यादा था, अब खूब मज़ा भी आने लगा था.
वो मेरे ऊपर ही चढ़े हुए मुझे ज़ोर ज़ोर से चोद रहे थे.. साथ में मेरे बूब्स को भी दबा रहे थे. मैं उनकी पीठ सहलाती जा रही थी. मेरे मुँह से मस्त कामुक आवाजें निकल रही थीं- उहह.. अहह..
कुछ देर की मस्त चुदाई से हम दोनों के बदन एकदम पसीने से भीग गए थे. वे मुझे पेलते हुए बोले- सीमा तुम मेरी लाइफ में 22 वीं औरत हो, जिसे मैं चोद रहा हूँ.. लेकिन तुम जैसी इतनी कमाल कोई नहीं देखी.. आह.. क्या मस्त चूत है, साली लंड को छोड़ती ही नहीं है.. एकदम अन्दर पकड़ के रखा है.
उनकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा दी और उनको चूम लिया. उन्होंने मुझे कम से कम 45 मिनट तक चोदा.. इस बीच मैं दो बार झड़ चुकी थी. वे अब भी मुझे चोदने में लगे थे.
वो तभी एकदम तेज हुए और बोले- अब मेरा निकलेगा.. आज पहली बार है सो चूत में ही निकालूँगा.
तभी एक ज़ोर से गरम पिचकारी मेरी चूत में मुझे फील हुई और मेरी चूत पूरी भर गई. वो मेरे ऊपर ही छा गए.
दस मिनट तक लंड को चुत में डालकर पड़े रहे. नीचे मेरी चूत से रस बह रहा था.
फिर वो मेरे ऊपर से उतरे, देखा नीचे मेरे वाइट पेटीकोट पर बहुत खून निकला हुआ था.. उनका वीर्य भी था.
वो खुश होकर बोले- देखो, ये सच्ची सुहागरात हुई.
उन्होंने अपने दोस्त को कॉल किया कि रीना को भेजो, मेरी सीमा उसको ये पेटीकोट, उसकी सुहागरात की निशानी देना चाहती है.
वे मुझे चूमते हुए बोले- जाओ थोड़ा दरवाजा खोलकर तुम ये रीना को देकर आओ.
मैं जरा लंगड़ाते नंगी ही गई, थोड़ा दरवाजा खोला तो बाहर से रीना बोली- बधाई हो सीमा..
उसने मेरे हाथ से पेटीकोट लिया और चली गई. वो जाते हुए बोली- पूरी रात के लिए बेस्ट ऑफ लक.
उस रात उन्होंने मुझे पूरी रात में 5 बार चोदा. मैं सुबह उठ ही नहीं पा रही थी, इतना दर्द हो रहा था.
वैसे ही दूसरे दिन भी उन्होंने मुझे 5 बार चोदा.
इसके बाद मुझे विदाई मिली, बहुत सारे जेवर, रुपए और सबसे बड़ी बात मेरी चूत को संतुष्टि मिली.
आपको मेरी कामुक सेक्स स्टोरी पसंद आई होगी, ऐसी मुझे आशा है. फिर और नयी कहानी लेकर आऊंगी.. बाय.
shahseema38@gmail.com

दोस्त की कुंवारी मौसी को चोदा



अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार. मैं नियमित रूप से अन्तर्वासना का पाठक हूँ. इधर की ढेर सारी कहानियां पढ़ने के बाद सोचा कि मैं भी अपनी जिंदगी की सेक्स लाइफ के रंगीन लम्हे आपसे शेयर करूँ.
यह कहानी मेरे पहले सेक्स की है, जो मैंने पड़ोस के लड़के की मौसी के साथ किया था. मैं पुणे (महाराष्ट्र) से हूँ, मेरी उम्र 20 साल है. अपनी बॉडी की बात करूँ, तो एकदम ठीक ठाक है और मैं 7 इंच लम्बे लंड का मालिक हूँ.
यह कहानी तब की है, जब मैं जवानी की दहलीज पर था. मेरे पड़ोस में एक लड़का रहता था, उससे मेरी अच्छी दोस्ती थी. उसकी मौसी जो 21 साल की थी, जो उसके यहां रह कर पढ़ने के लिए आई थी. पहले तो मेरे दिमाग में उसके लिए कुछ भी गलत विचार नहीं थे.
एक दिन पढ़ाई के कुछ डाउट थे, इसलिए मैं उसके घर गया. दरवाजा खुला था तो मैं सीधा अन्दर चला गया. उसके घर पर कोई नहीं था. मैं उसे ढूंढने लगा तो बेडरूम में घुस गया, दरवाजा थोड़ा खुला था.. तो मैंने अन्दर झाँक कर देखा तो दोस्त की मौसी कपड़े चेंज कर रही थी.
मैं उसके नंगे बदन को देख कर भौंचक्का रह गया. दूध के जैसे उसका गोरा और कटीला बदन.. उसके 32 साइज के चुचे और काले बालों से लिपटी हुई सुंदर सी गोरी चुत.. उसका 32-26-34 के मदमस्त साइज का बदन कहर ढा रहा था. मेरी जवानी तो उसका नंगा बदन देखकर उफान मारने लगी थी. मेरे अन्दर भी हलचल मचने लगी.
तभी उसे आहट हुई कि मैं उसे देख रहा हूँ, तो वो बाहर आने लगी. मैं जल्दी से वहां से निकल गया और पहली बार उसके नाम की मुठ मारी.
वैसे तो मैं रोज उससे मिलता था, पर उस दिन के बाद से मैं उससे पढ़ने के लिए रोज जाने लगा. वो भी मुझे बड़े मन लगा कर पढ़ाती थी.
एक दिन वो कॉलेज से थक कर आई थी, मैं उसके घर गया, तो देखा वो सो रही थी. सोते वक्त वो बहुत ही प्यारी लग रही थी. मैं उसकी बाजू में बैठ गया और उसके चेहरे पे प्यार से हाथ फेरने लगा. तभी उसने करवट ली. उस दिन उसने साड़ी पहनी थी, तो करवट लेते ही उसका पल्लू साइड में हो गया और उसके रसीले चुचे मेरे सामने आ गए.
मैं इसी की फिराक में था, पर डर रहा था कि उठ गई तो मेरी तो लग जायेगी. मैंने डरते डरते उसकी एक चुची पे हाथ रखा. कोई हलचल नहीं देखी तो मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैं चुचियों को मसलने लगा. फिर धीरे से उसके होंठों पे किस किया.. तभी वो जागने लगी थी. मैं संभल गया और मैं वहां से निकल गया.
अब मैं रोज उसके सोने के टाइम पे जाता और रोज उसकी चुचियों को मसलने लगा. ऐसा रोज करके मुझे मजा आने लगा.
एक दिन ऐसे ही मैं उसके घर गया, तो चुचे मसलने के बाद मैंने देखा कि उसका टॉप थोड़ा ऊपर उठा हुआ था. पजामे से पैंटी की स्ट्रिप दिख रही थी. मैंने सोचा आज बुर की दीदार किया जाए. मैंने एक हाथ उसके पजामे में डाल दिया और उसकी बुर पे हाथ से सहलाने लगा था. उसकी बुर गीली थी, ये मुझे थोड़ा सा अजीब सा लगा. मैंने एक उंगली बुर में घुसा दी, तभी वो हल्के स्वर में चीख़ मारते हुए उठकर बैठ गयी. मैं बहुत डर गया और उससे माफी मांगने लगा. मुझे ऐसा घबराया देख कर वो हँसने लगी और मुझे गले से लगाकर बोली- इतने दिनों से मजे ले रहे थे, तब नहीं डरे.. आज क्यों डर रहे हो?
मैं सुनता रह गया, मैंने मन में सोचा कि साली लौंडिया खुद मजे ले रही थी.. तभी इसकी बुर गीली थी.
फिर उसने मेरे होंठों पर होंठों रखे और हम दोनों एक दूसरे को दस मिनट तक चूमते रहे. फिर उसने मेरे कपड़े उतार दिए और मैंने उसकी टॉप उतार दिया. उसकी नंगी रसीली चुचियां मेरे सामने आ गईं. मैंने झट से उसकी एक चुची मुँह में दबा ली और चूसने लगा. वो जोर जोर से मादक सिसकारियां लेने लगी ‘आह ऊंह उम …’
मैं भी पूरी लगन से एक एक करके उसकी दोनों चूचियों को निचोड़ रहा था. आज मुझे ऐसा करने में ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि जब लड़की भी सामने से रेस्पॉन्स दे रही हो, तो ज्यादा मजा आता है.
थोड़ी देर चुची मसलते मसलते एक हाथ बुर पे ले गया और कपड़ों के ऊपर से उसकी कुंवारी बुर को मसलने लगा. वो और भी गर्म हो गयी, उसने अपनी टांगें फैला दीं और बुर की रगड़वाई का पूरा मजा लेने लगी. मैं भी उसकी बुर में उंगली करके उसके दाने से खेलने लगा. उसकी बुर के नन्हे से दाने को अपनी दो उंगलियों के बीच में दबा कर जैसे ही मसला उसकी आह निकल गई और वो एकदम से गरमा गई.
अब उसने भी मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया और हिलाने लगी. उसके हाथों में अपने लंड को महसूस किया तो मुझे मजा आ गया, समझो मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था. फिर उसने मुझे धक्का दिया और मुझे बिस्तर पर लिटा दिया. मैं कुछ समझ पाता कि उसने मेरा लंड मुँह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
पहली बार किसी लड़की ने मेरा लंड मुँह में लिया था, तो ऐसा लग रहा था.. जैसे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी यही है.
कुछ ही देर बाद वो लंड को अपने मुँह से निकाल कर उठी. उसके चेहरे पर चुदास का नशा देखा तो मैं समझ गया. मैंने उसका पजामा पैंटी के साथ निकाल दिया.. और हम दोनों 69 के पोजीशन में आ गए. मैं उसकी बुर चाट रहा था और वो मेरा लंड चूस रही थी.
पहली बार होने के कारण हम दोनों ही एक दूसरे के मुँह में झड़ गए. झड़ने के बाद हम दोनों थोड़ी देर ऐसे ही एक दूसरे के ऊपर पड़े रहे. कुछ पल बाद फिर से चुदास भड़क गई और हम दोनों एक दूसरे को गर्म करने लगे. एक बार फिर से हम हवस का खेल खेलने के लिए तैयार हो गए.
अबकी बार मैं उसके पैरों से ऊपर जांघों को चूमने लगा. वो उत्तेजित होने लगी. फिर ऊपर नाभि को चाटने लगा. ऐसे ही करके उसे मैं तड़पाने लगा. कभी जांघें, तो कभी नाभि और अचानक से उसकी बुर को मुँह में लेकर चूसने लगा, जीभ से बुर को कुरेदने लगा.
अब वो पूरी उत्तेजना में टांगें फैलाए पड़ी थी और जोर जोर से कामुक सिसकारियां ले कर बोल रही थी- जानू और करो..
मैं उसकी बुर में अपनी जीभ को गहराई तक चलाने लगा.
थोड़ी देर बाद वो कहने लगी- अब सहन नहीं हो रहा.. अपना लंड डाल दो अन्दर.. और बुझा दो मेरी प्यास.
उसकी बात सुनकर मैं ऊपर को उठ कर आया और अपना 7 इंच का लंड बुर पे सैट कर दिया. उसकी फांकों में लंड का सुपारा लगाया और लंड को बुर के अन्दर पेलने की कोशिश की. पहली दो बार की कोशिशें व्यर्थ हो गईं, क्योंकि बुर टाइट होने के कारण लंड फिसल रहा था.
अब मैंने थोड़ी क्रीम लंड पर लगायी और फांकों पर लंड रख दिया. उसने भी मेरा लंड पकड़ लिया और बुर के छेद पर जमा दिया. उसने इशारा दिया और मैंने जोर से एक झटका मार दिया. इस तगड़े प्रहार से मेरा लंड उसकी बुर में घुसता चला गया.
वो जोर जोर से चीखने लगी- निकालो बाहर!
वो रोने लगी तो मैंने झट से उसके होंठों को अपने होंठों से दबाया और उसको चूमने लगा. लंड अन्दर ही अपनी जगह बना रहा था. थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद थोड़ा दर्द कम हुआ, तो फिर से एक बार झटका मारा और इस बार पूरा लंड अन्दर डाल दिया. उसकी आंखों से आँसू आने लगे. मैं धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करने लगा. धीरे धीरे वो भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी.
धकापेल चुदाई का मंजर और चुदाई की रंगीन आवाजें कमरे में गूंजने लगीं. करीब 20 मिनट तक जमकर चुदाई के बाद हम दोनों ही झड़ गए. हम एक दूसरे से चिपक कर निढाल होकर पड़े रहे.
फिर थोड़ी देर के बाद जब उठा तो देखा के उसकी बुर खून से सनी हुई थी, वो थोड़ा डर गई. फिर मैंने उसे समझाया कि पहली बार में ऐसा होता है.
उसने मुझे एक प्यार भरा चुम्बन दे दिया और ‘आई लव यू..’ कहा. उसने बताया कि जब उसने मुझे जब पहली बार देखा था, वो तभी से मुझे पसंद करती थी.
उस दिन के बाद हम जब भी मौका मिलता, तब चुदाई कर लेते थे. तीन साल बाद उसकी शादी हो गयी. फिर शादी के बाद भी मैंने उसको बहुत बार चोदा. आज उसको मेरे से एक बच्चा है.
थोड़े दिनों बाद वो दिल्ली में सैटल हो गयी, पर आज भी उसकी याद आती है. उसके जाने के बाद बहुत सी लड़कियों को चोदा. उनकी कहानी किसी और दिन बताऊंगा.
आपको मेरी कहानी पसन्द आयी या नहीं, प्लीज मुझे मेल जरूर करना.
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