Showing posts with label kamukta story. chuai ki kahani. Show all posts
Showing posts with label kamukta story. chuai ki kahani. Show all posts

Tuesday, December 25, 2018

बहन को मजे से चोदा

incest sex यह घटना अब से करीब 4 साल पहले की है. मेरी बहन कपड़ो पर इतना ध्यान नही
देती थी। बहुत बार ऐसे बैठती थी की उसके बोब्स या फिर पेंटी नज़र आते
थे। मै इन्हे देखकर गर्म हो जाता था. कभी-कभार बाथरूम मे जाकर मुठ मार
लेता। अक्सर मै खेल-खेल मे अपनी रूपाली को छू-लेता या फिर उसके दूध पकड
के दबा
देता।
एक बार हमारे घर वाले मामा के यहाँ गये थे. आउट ऑफ स्टेशन. मे और मेरी
बहन नही गये. मैने अपनी हरकते करना शुरू कर दी. बात-बात पर उसके बोब्स पर
हाथ मारना. उसके बोब्स दबा देना। एक दिन रात को मैने एक बहुत हॉट फिल्म
देखी. मे गर्म हो गया। मैने देखा मेरी बहन बेड पर एक टॉप और स्कर्ट पहन
कर सो रही थी. मुझसे रहा नही गया।
मे धीरे से उसके बेड के पास जाकर बैठ गया. उसकी बॉडी को देखता रहा. धीरे
से उसके बोब्स टॉप के उपर से सहलाने लगा। फिर मैने उसकी स्कर्ट की ओर
देखा. मैने उसका स्कर्ट उपर सरका दिया। वाह क्या नज़ारा था. बहन की
गोरे-गोरे पैर. थोड़ी देर उसके पैर को सहलाता रहा. फिर मे तोडा और उपर
गया और सहलाने लगा और फाइनली उसकी वाइट “वी” शेप की वाइट पेंटी दिखी.
मुझसे रहा नही गया और मैने उसके चूत को सहलाया और चूमा. इससे मेरी बहन
जाग गयी।
वो हैरान थी और बोली ” भैया ! यह क्या कर रहे हो? शर्म नही आती अपनी बहन
के साथ ” मे बोला तू लड़की है. मे लड़का हूँ. मुझे मन किया तो मैने छू
लिया ” वो बोली ” नही, यह ग़लत है… मम्मी पापा को पता चलेगा तो क्या
बोलेंगे? तुम मेरे रूम से चले जाओ “. मे चुप-चाप चला गया।
अगले दिन सब कुछ नॉर्मल था. मुझे फिल्म देखने का बड़ा मन कर रहा था. मे
मार्केट गया और वहाँ से एक अच्छी और कुछ सेक्सी फिल्म ले आया। मेरे रूम
मे मेरा अलग टी वी. है। मैने एक सेक्सी फिल्म देखी और दूसरे को आधे मे
छोड़ कर नहाने चला गया. जब मे नहा रहा था तो मेरी बहन बाथरूम के बाहर से
चिल्लाई के उसे स्केल नही मिल रहा। मेने कहा के मे बाहर आ कर देता हूँ.
तो वो रूम मे टीवी पर लगी सेक्सी फिल्म देखने लगी।
उसने ऐसी फिल्म पहले नही देखी थी. मे बाहर आया तो देखा वो फिल्म देख रही
थी. मैने कुछ नही कहा.चुप-चाप हमने फिल्म देखी और अपना लंच किया. फिर
मैने बहन से पूछा ” और एक फिल्म देखनी है ?”. तो उसने कहा हां। मैने पहले
वाली सेक्सी फिल्म लगा दी. हम दोनो बेड पर पेट के बल लेट कर फिल्म देखने
लगे. फिल्म मे बहुत से हॉट सीन थे. उन्हे देख कर रूपाली भी गर्म हो गयी।
देखते -देखते मैने अपना हाथ उसके स्कर्ट के उपर सहलाने लगा. वो बोली ”
नही भैया यह सब नही.” मे बोला ” मे तो सिर्फ़ कपडे के उपर से मजा ले रहा
हूँ. थोरी देर टच करने दो कपडे के उपर से ही प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़.” वो बोली
” ठीक हे पर उपर से ही “.मैने कहा हा-हा और उसके पिछवाड़े को स्कर्ट के
उपर से सहलाने लगा. दबाने लगा।
फिर धीरे से उसके स्कर्ट के अंदर उसकी पेंटी के उपर. वो फिर बोली ” तुमने
कहा था उपर से ही सहलाओगे ” मे बोला ” हा तो पेंटी के कपडे के उपर ही तो
है”।
उसे भी मजा आने लगा था तो चुप-चाप फिल्म देखने लगी. अब मे पेंटी के उपर
से सहला रहा था. फिर मैने उसके अन्दर की तरफ उसकी चूत को भी सहलाने,
दबाने लगा. उसके मूह से कभी-कभी दबी सी आवाज निकलती ” ओह आ मम” । मैने
उसका स्कर्ट पीछे से उठाया और उसके गोरे-गोरे पिछवाड़े को देखने लगा। फिर
पेंटी के उपर से ही किस किया. अब तक उसने आँखे बंद कर ली थी।
मैने उसे सीधा लिटाया और उसके पेंटी के उपर उसके चूत को किस करने लगा. वो
“आ म्म्म ओह भैया आआ” करने लगी. मैने जब देखा की वो गर्म हो गयी है तो
मैने उसके पेंटी के साइड से अंदर हाथ घुसा दिया और उसकी चूत पेंटी के
अंदर सहलाने लगा। वो “अहह म्म्म नहियीई भैया” बोल रही थी। मैने ने उसकी
पेंटी उतार दी. तब वो होश मे आई और बोली ” नही यह सब ठीक नही है भैया.
मम्मी पापा को पता चलेगा तो क्या सोचेंगे?” मैने कहा ” कुछ ग़लत नही है
और उन्हे पता नही चलेगा. बस एक बार रूपाली प्लज़्ज़्ज़”।
मे उसकी चूत को चूमने लगा और उसे पागल कर दिया. उसकी चूत को किस
करते-करते अपने दोनो हाथ उसकी टॉप के अंदर ले जा कर उसकी ब्रा के अंदर
उसकी चुचियाँ यानी दूध ओर बोब्स दबाने लगा। उसे बहुत मजा आने लगा. मैने
ने पूछा ” कैसा लग रहा है? ” उसने कहा ” आह बहुत अच्छा भेया “।
फिर मैने उसके पूरे कपडे उतार कर उसे एक दम नंगा कर दिया. अब मे उसकी
पूरी बॉडी को चूम रहा था, सहला रहा था. मैने उसकी एक चूची मुहं मे लेकर
चूसने लगा तो दूसरे को हाथ से दबा रहा था. और वो मेरा सर के बाल सहला रही
थी।
15 मि. बाद मैने उसकी चूत मे अपना लंड लगाया और प्रेशर दिया. वो चिल्ला
गयी ” नहि..ईई भैया बहुत दर्द हो रहा है. फिर मैने उसकी चूत पर तोडा
वॅसलीन लगा कर फिर से घुसाया अपने लंड को। 3-4 बार ट्राइ करने पर मेरा
पूरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया. तोडा सा खून भी निकला। फिर थोडी देर
बाद उसे मजा आने लगा. वो बोली ” अहहहहह भैया बहुत मज़ा आ रहा
हे..इईईईईईई. जोर से करो “।
हम दोनो पसीना -पसीना हो रहे थे. मुझे लगा की वो झड गयी है . पर मे
कंटिन्यू करता रहा और कुछ देर बाद मुझे लगा की मेरा निकलने वाला है तो
मेने टाइम पर लंड निकाल कर सारा माल उसकी छाती पर और मूह पर डाल दिया। ओर
फिर मे उसके बगल मे लेट गया. ओर फिर वो बेड पर से उठी ओर बाथरूम मे चली
गयी।
उसके बाद तो हम दोनों कभी भी समय मिलता तो हम सेक्स या छेड़छाड़ करे बगेर नही रहते।

Sunday, December 23, 2018

ऑफिस के लड़के ने मेरी इच्छा को पूरा किया

मेरा नाम सुजाता है मैं दिल्ली की रहने वाली हूं, मेरी उम्र 29 वर्ष है। मेरी शादी को एक वर्ष हो चुका है, मेरे पति का नाम राजेश है। मैं आपसे रिश्ते से बिल्कुल भी खुश नहीं हूं क्योंकि मेरे ससुराल वाले मुझ पर दहेज के लिए हमेशा ही दबाव बनाते रहते हैं, वह कहते हैं कि तुम्हारे घर वालों ने हमें कुछ भी नहीं दिया। मैं हमेशा उन्हें कहती हूं कि जितना वह दे सकते थे उन्होंने उससे ज्यादा ही आप लोगों को दिया है परंतु उसके बावजूद भी मेरे ससुराल पक्ष वाले बिल्कुल भी मेरी बात नहीं सुनते और हमेशा ही मुझे कुछ ना कुछ बात पर ताने मरते रहते हैं। पहले मुझे लगा कि मेरे पति का व्यवहार अच्छा होगा। मुझे उनके साथ रहते हुए एक वर्ष हो चुका है तो उसके बाद मुझे पता चला कि मेरे पति का नेचर भी ऐसा ही है लेकिन वह भी दहेज के लालची हैं और वह मुझ पर बहुत दबाव बनाते हैं इसलिए मैं बहुत ज्यादा तनाव में रहती हूं परंतू यह बात मैंने अपने घर पर नहीं बताई क्योंकि मुझे लगा की वह लोग परेशान हो जाएंगे।
मेरी एक छोटी बहन और है उसकी शादी भी अभी होनी है यदि मैंने उन्हें घर पर अपने बारे में बता दिया तो वह परेशान हो जाएंगे। मेरी बहन के लिए भी रिश्ते आने लगे थे इसी वजह से मैंने उन्हें घर में कुछ भी नहीं बताया। मैं तनाव में थी और मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गई थी। मेरे और राजेश के बीच में बिल्कुल भी बातें नही हो रही थी इसी वजह से मैं बहुत परेशान हो गई थी। मुझे कई बार ऐसा लगता था कि मैंने यह शादी कर के बहुत बड़ी गलती की है क्योंकि मेरे ससुराल वालों ने मुझसे सब कुछ झूठ कहा था। मेरे पति किसी बड़ी कंपनी में नौकरी नहीं करते, बल्कि वह एक छोटी सी कंपनी में नौकरी करते हैं और ना ही उनके तनख्वाह इतनी ज्यादा है कि वह घर का खर्चा चला पाए। मेरे पति घर में एकलौते हैं लेकिन उनकी नौकरी अच्छी नहीं है और ना ही मेरे ससुराल पक्ष वाले आर्थिक रूप से इतने सक्षम है कि वह कुछ भी अपने पैसों से खरीद सके इसीलिए वह बार-बार मुझे ही परेशान करते रहते हैं।
मेरे पिताजी बैंक में हैं और मेरी मां भी घर में सिलाई का काम करती हैं इसीलिए मेरे पिताजी से जितना हो सकता था उन्होंने शादी में खुलकर खर्चा किया। किसी भी चीज में उन्होंने कमी नहीं रखी लेकिन उसके बावजूद भी मेरे ससुराल पक्ष वाले बिल्कुल भी खुश नहीं थे और कहने लगे कि तुम्हारे घर वालों ने शादी में हमारी बिल्कुल भी खातिरदारी नहीं की। एक दिन हम लोगों का इतना ज्यादा झगड़ा बढ़ गया कि मैंने उस उस दिन अपने घर पर फोन कर दिया और जब मैंने अपने पिताजी को यह बात बताई तो वह भी बहुत गुस्सा हो गए और मुझे कहने लगे कि तुमने इतने समय से हमें यह सारी बातें क्यों नहीं बताई। मेरे पिताजी को पता है कि मेरा व्यवहार बिल्कुल भी झगड़ालू किस्म का नहीं है, मैंने आज तक कभी भी किसी के साथ झगड़ा नहीं किया।  मैं बहुत ही शांत स्वभाव की हूं इसीलिए मेरे पिताजी ने मुझे कहा कि तुम घर आ जाओ उसके बाद मैं उन लोगों से बात कर लूँगा। मैं उस दिन अपने घर चली गई और उसके बाद राजेश मुझे फोन करते रहे लेकिन मैंने उनका फोन नहीं उठाया। शाम को जब मेरे पिता जी ऑफिस से लौटे तो उन्होंने मुझसे सब कुछ पूछा, मैंने उन्हें बताया कि वह लोग मुझे काफी समय से दहेज के लिए परेशान कर रहे हैं लेकिन मैं आपको बिल्कुल भी बताना नहीं चाहती थी इसीलिए मैंने आपको कभी इसके बारे में जानकारी नहीं दी, लेकिन अब मुझे लगने लगा था कि शायद अब कुछ ज्यादा ही झगड़े होने लगे हैं इस वजह से मैंने आपको फोन किया। जब मैंने अपने पिताजी को यह सारी बात बताई तो उन्होंने गुस्से में मेरे पति को फोन कर दिया और कहने लगे कि तुम लोगों ने हमारे साथ धोखा किया है और मैं तुम्हारी कंप्लेंट अब मैं पुलिस में करूँगा। मेरे पति उनके सामने गिड़गिड़ाने लगे और कहने लगे कि आप मुझसे एक बार मिल लीजिए उसके बाद ही हम लोग इस बारे में बात कर पाएंगे लेकिन मेरे पिताजी उनकी एक भी बात सुनने को तैयार नहीं थे। उसके बाद उन्होंने पुलिस में कंप्लेंट करवा दी। जब पुलिस में कंप्लेंट हुई तो उसके बाद वह लोग भी थाने में आ गए और वहां बैठकर वह मेरे पिता जी से माफी मांगने लगे।
मेरी सास मुझसे कहने लगे कि हमने तो तुमसे कभी भी झगड़ा नहीं किया और ना ही तुम्हें कभी भी किसी प्रकार की तकलीफ दी है लेकिन मैंने उन्हें कहा मैंने तो आपको हमेशा ही अपनी मां की तरीके से माना परंतु आपने कभी भी मुझे अपनी बेटी की तरह नहीं माना और हमेशा ही मुझ पर दहेज के लिए दबाव बनाते हो। मेरे पिताजी ने बिल्कुल भी राजेश की बात नहीं सुनी और उन्होंने पुलिस में कंप्लेंट दर्ज करवा दी। उसके बाद जब पुलिस ने जांच की तो जितना भी हम लोगों ने उन्हें दहेज दिया था वह सब उन्होंने हमें लौटा दिया, उन्होंने अपने रिश्तेदारों से भी पैसे लेकर हमें वह वापस कर दिए। अब मेरा राजेश के साथ कोई भी संबंध नहीं था और ना ही मुझे उससे कोई मतलब था लेकिन मैं अपने घर में बहुत ही परेशान थी, मुझे कई बार लगता था कि अब मेरा क्या होगा। मेरी वजह से कहीं मेरी छोटी बहन पर भी कोई दिक्कत ना आ जाए और कहीं उसके लिए रिश्ते आने बन्द ना हो जाये,  लेकिन मेरे माता-पिता ने कभी भी मुझे इस चीज का एहसास नहीं होने दिया और धीरे-धीरे मैं इन सब चीजों से उभरने लगी। मैं घर पर ही थी तो मैंने सोचा कि मैं कहीं नौकरी कर लेती हूं इसीलिए मैंने एक कंपनी ज्वाइन कर ली। वहां पर मैं अकाउंट का काम संभालने लगी थी। उसी ऑफिस में एक लड़का भी काम करता है, उसका नाम विमल है।
विमल और मेरे बीच में काफी नजदीकियां होने लगी थी और जब उसे मेरे बारे में पता चला कि मेरा डिवोर्स हो चुका है तो वह मुझसे पूछने लगा कि यह सब कैसे हुआ। मैंने उसे बताया कि मेरे ससुराल वाले मुझे दहेज के लिए बहुत परेशान करते थे इसीलिए मैंने डिवोर्स ले लिया और अब मैं अपने घर पर ही रहती हूं। विमल का नेचर बहुत ही अच्छा और शांत है वह ऑफिस में ज्यादा किसी से बात नहीं करता,  वह सिर्फ अपने काम से ही मतलब रखता है। मुझे भी विमल अच्छा लगने लगा था और धीरे-धीरे हम दोनों में नजदीकियां पड़ने लगी। वह भी मुझे एक्सेप्ट करने को तैयार था और उसने मेरे पिताजी से भी इस बारे में बात की। मेरे पिताजी ने भी उसे मना नहीं किया और हम लोगों की रिश्ते की बात आगे बढ़ने लगी लेकिन मैंने विमल से कहा कि मुझे कुछ समय और चाहिए। उसके बाद ही मैं तुमसे शादी का फैसला कर पाऊंगी क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि जो गलती मैंने पहले की है। वह इस बार मैं दोबारा करू। राजेश ने भी मुझ से बहुत कुछ चीजें छुपाई थी इसीलिए मैंने यह मैंने उससे साफ कह दिया और कहा कि पहले मुझे तुम्हारे साथ कुछ वक्त बिताना है, उसके बाद ही मैं तुमसे शादी करूंगी। विमल को भी इससे कोई भी आपत्ति नहीं थी और अब हम दोनों ही साथ में समय बिताने लगे। हम लोग जब भी ऑफिस से फ्री होते तो कुछ समय विमल और मैं साथ में ही कहीं पर बैठ जाया करते थे और काफी देर हम लोग बात करते थे। विमल मुझे हमेशा ही मेरे घर पर छोड़ने आता था और मैं विमल के घर वालों को भी मिल चुकी थी लेकिन उसके घर पर मेरा इतना आना जाना नहीं था। विमल का हमारे घर पर काफी आना जाना था। मेरे माता-पिता विमल को बहुत पसंद करते हैं और वह उसकी बहुत तारीफ करते हैं। वह मुझे कहते हैं कि तुम विमल से जल्दी से जल्दी शादी कर लो क्योंकि वह बहुत ही अच्छा लड़का है और तुम्हें बहुत खुश रखेगा लेकिन मैंने अपने मम्मी पापा से कहा कि मुझे कुछ और समय चाहिए। उसके बाद ही मैं शादी करूंगी। विमल और  मेरे बीच में बहुत ही अच्छा रिलेशन है वह मुझे बहुत अच्छे से समझता है। एक दिन विमल मुझे कहने लगा कि मुझे तुमसे अकेले में बात करनी है क्या तुम मुझसे अकेले में मिल सकती हो। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुमसे अकेले में मिलत हू। उस दिन उसने मुझे अपने घर बुला लिया और जब मैं विमल के घर गई तो वह अपने कमरे में बैठा हुआ था।
उसके घर पर उस दिन कोई भी नहीं था। विमल मेरे साथ ही बैठा हुआ था और हम दोनों साथ मे बैठे हुए थे हम आपस में बात कर रहे थे और बात करते-करते विमल ने मेरी जांघो को सहलाना शुरू कर दिया और उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। जब उसने मुझे अपनी बाहों में लिया तो मुझे भी अंदर से कुछ गर्मी महसूस होने लगी। मैंने भी विमल के होठों को किस करना शुरू कर दिया मैंने उसके होठों को बहुत अच्छे से चूसा जिससे कि उसका पूरा शरीर गर्म हो गया था। उसने अपने लंड को बाहर निकाल दिया जब मैंने उसके 9 इंच मोटे लंड को देखा तो मैंने उसे अपने मुंह में ले लिया और बहुत अच्छे से चूसने लगी। मैंने उसके लंड को अच्छे से सकिंग किया तो उसे बहुत मजा आने लगा और कुछ देर बाद उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। वह मेरे स्तनों को अपने मुंह में ले रहा था तो मेरे अंदर से गर्मी बाहर आती और मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। उसने मेरी योनि को भी काफी देर तक चाटा जब वह मेरी चूत को चाट रहा था तो मेरी योनि से पानी निकलने लगा। जब उसने अपने मोटे लंड को मेरी योनि में डाला तो मुझे बहुत दर्द महसूस हुआ। मैंने अपने दोनों पैरो को चौडा कर लिया विमल मुझे बड़ी तेजी से झटके देने लगा। मैंने काफी समय बाद किसी के साथ सेक्स किया था इसलिए मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और मैं उसका पूरा साथ दे रही थी। मैं अपने मुंह से मादक आवाज निकल रही थी और वह मुझे तेजी से धक्के मार रहा था। उसने मुझे इतने तेज धक्के मारे कि मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ और जब मैं झड़ने वाली थी तो मैंने अपने दोनों पैरों से विमल को जकड़ लिया। जैसे ही उसका वीर्य मेरी योनि में गया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा और हम दोनों एक दूसरे को पकड़कर लेटे गए।

Saturday, December 22, 2018

चुदाई का मौक़ा लंड का चौका

This summary is not available. Please click here to view the post.

Sunday, December 16, 2018

दोस्त की मम्मी को चोदा



अमीश और मेरी दोस्ती को अब छह साल हो गए थे. हम दोनों साथ में टेनिस खेलने जाते थे और वहीं हमारी दोस्ती हुई थी. अमीश के पापा एक बिल्डर थे और वो बहुत ही अय्याश आदमी थे.
अमीश की माँ परिणीता बहुत ही सेक्सी थीं, जिनकी उम्र कुछ 37 साल की होगी. लेकिन वो किसी भी एंगल से तीस के ऊपर नहीं लगती थीं. परिणीता आंटी की गांड बहुत ही सेक्सी थी. मुझे कहीं लगा था कि आंटी मुझ पे लाइन मारती हैं. मैंने भी बहुत बार आंटी की गांड को याद करके मुठ भी मारी थी. आंटी के बूब्स भी वैसे बहुत मस्त थे. लेकिन मुझे उनकी गांड में ज्यादा दिलचस्पी थी. साड़ी पहन कर जब वो चलती थी, तो पीछे से उनकी एकदम गोल गांड देखकर मेरा लंड मुझे बदतमीज बना देता था.
मैं अमीश के घर में अक्सर ही आता जाता रहता था. हम लोग उसके लैपटॉप पर भी कभी कभी ब्लूफिल्म भी देख लेते थे.
एक दिन मुझे कुछ काम था. इसलिए मैं अमीश के घर गया. अमीश मेरे साथ दस मिनट बैठकर बोला कि मैं अनन्या से मिलकर आता हूँ.
अनन्या उसकी गर्लफ्रेंड थी और मुझे पता चल गया था कि वो जरूर उसकी चूत लेने जा रहा था.
मैं अमीश के लैपटॉप पर काले हब्शी वाली चुदाई की फिल्म लगाकर बैठ गया. अमीश ने मेरे सामने परिणीता आंटी को फ़ोन किया कि मैं बाहर जा रहा हूँ. एक घंटे बाद लौटूंगा. लेकिन उसने आंटी को ये नहीं बताया कि उसका दोस्त यानि कि मैं घर पर हूँ.
अमीश के जाने के बाद, मैंने फिल्म देखना चालू किया. फिल्म खत्म हो गयी और मुझे प्यास लगी थी. मैंने देखा कि पानी की बोतल खाली थी. मैंने सोचा कि चलो मैं ही उठकर किचन के फ्रिज से पानी निकाल लाता हूँ.
मैं किचन की तरफ चल दिया.
मैं किचन के पास पहुंचने ही वाला था कि मेरे कान में ‘अहहह.. अहहाह ऊह्ह्ह्ह…’ की आवाज़ आई. बाजू में ही परिणीता आंटी का कमरा था. तो मैं सोचने लगा कि क्या आंटी के रूम से आवाज़ आ रही है?
मैंने खिड़की के एक छेद से झांक कर अन्दर देखा.. मेरे हाथ से बोतल छूटने ही वाली थी. अन्दर परिणीता आंटी अपनी झांटों से भरी चूत फैलाकर बैठी हुई थीं. आंटी की चूत में एक बड़ा डिल्डो अन्दर बाहर हो रहा था. आंटी की चूत के अन्दर डिल्डो पूरा का पूरा अन्दर जाता था और फिर आंटी उसे बाहर निकालकर वापस अन्दर ले रही थीं. आंटी के मुँह से सीत्कारें निकल रही थीं और वो साथ ही साथ अपने बूब्स से भी खेल रही थीं.
ये सब देख कर मेरा लंड मेरी पैन्ट के अन्दर ही खड़ा हो गया. वैसे भी मैंने अभी ब्लूफिल्म देखी थी और मुठ मारने ही वाला था. आंटी को इस हालत में और उनकी फूली हुई चूत देखकर मेरा लंड तो बिल्कुल उत्तेजित हो चुका था.
तभी मैंने देखा कि आंटी ने डिल्डो को चूत से निकाल लिया. अब आंटी की चूत मुझे साफ़ दिखने लगी. आंटी गोरी थीं, लेकिन उनकी चूत का हिस्सा थोड़ा डार्क कलर का था.
मेरे दिमाग में ख्याल आया कि चलो आज पता कर लिया जाए कि आंटी लाइन ही मारती हैं, या सच में इनके मन में कुछ और भी है. मुझे लग रहा था कि अगर आंटी चोदने दें.. तो मजा आ जाएगा. वैसे भी इस वक्त आंटी गर्म थीं. इसलिए उन्हें भी चुदवाने में दिक्कत नहीं होगी.
ये सब सोचने के बाद मेरे दिल में ख्याल आया और मैंने बोतल को जानबूझ कर नीचे फेंक दी. बोतल की आवाज़ सुनने के बाद आंटी खड़ी हो गईं. मैंने देखा कि उन्होंने झट से कपड़े पहने और वो बाहर आ गईं.
बसन्ती रंग की साड़ी में वो कयामत लग रही थीं. उन्होंने मुझे देखा और बोलीं- तुम यहां?
मैं आंटी की आंख से आंख मिलाते हुए और एक हल्की सी नॉटी स्माइल देते हुए कहा कि जी हां.. आंटी.. मैं तो दस मिनट से आपको ही देख रहा था.
आंटी यह सुनकर हैरान सी हो गईं. उन्होंने मुझे रूम में ले जाते हुए बनावटी अंदाज़ कहा- अमीश को कुछ मत बताना, प्लीज.. उसे बहुत बुरा लगेगा.
मैंने कहा- मैं कुछ भी नहीं बताऊंगा. लेकिन मेरा फायदा क्या होगा?
आंटी मेरी बात समझ गईं, प्यार सर मोड़ कर मेरी आंखों में देख कर कहा कि तुमको एक हजार रूपये दूंगी.
मैंने कहा- नहीं आंटी, पैसे लेने की कोई तमन्ना नहीं है जी.. मुझे आपकी चुत और गांड देखनी है.. और आपको मेरे साथ सेक्स करना पड़ेगा.
आंटी पहले तो चौंक गईं.. फिर इतराते हुए बोलीं- किसी ने देख लिया तो?
मैंने कहा- आंटी अंकल तो रात से पहले आते नहीं है. अमीश को मैं देख लूँगा.
आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा और बोलीं- देखो मैं बदनाम नहीं होना चाहती. मैं पहले से ही तेरी अंकल की बेरुखी से हैरान हूँ.
मैंने कहा- आंटी घबराईये मत. आज से आपको सेक्स को लेकर कोई प्रॉब्लम नहीं होगी.
मैंने फट से आंटी के बूब्स पकड़ लिए और उन्हें दबाने लगा. आंटी ने जल्दी में ब्लाउज के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी, जिससे उनके बूब्स मेरे हाथ में मस्त फिसल रहे थे. आंटी मेरी तरफ हैरान सी होकर देख रही थीं. लेकिन, मुझे कुछ भी करके आज आंटी की गांड में लंड देना ही था.
मैंने आंटी के सारे कपड़े एक एक करके उतार दिए और मैं खुद भी नंगा हो गया. आंटी मेरे लंड की तरफ देख रही थीं. मैंने सीधा आंटी के पास जाकर उनके मुँह में अपने लंड को ठेल दिया. आंटी मेरे लंड को चूसने लगीं और मैं उनके मम्मों के साथ खेलने लगा. आंटी को भी अब मेरे टच का मज़ा आने लगा था. क्योंकि वो बड़े प्यार से लंड को चूस रही थीं.
कुछ देर लंड चूसने के बाद मेरी इच्छा आंटी की चूत देखने की हुई. मैंने लंड को आंटी के मुँह से निकाला और आंटी को पलंग पर लिटा दिया. आंटी की झांटों को हटाते हुए, उनकी मस्त गर्म चूत के अन्दर जैसे ही उंगली की; आंटी की सिसकारी निकलने लगी ‘ऊऊउ. अहहह.. अहहह..’
मैंने पूरी की पूरी उंगली चूत के अन्दर कर दी और धीरे से उसे अन्दर बाहर करने लगा. आंटी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और मजे से मेरी उंगली से चुदवाने लगीं.
मैंने एक हाथ से आंटी की चूत में उंगली की और दूसरे हाथ से मैं अपने लंड के सुपाड़े को सहला रहा था. आंटी के बूब्स के निप्पल भी मस्त खड़े हो गए थे. मैंने तभी आंटी की चूत में, एक साथ दो उंगली डाल दीं और जोर जोर से धक्के लगाने लगा.
आंटी की तो जैसे, जान ही निकल रही थी. वो मुझे पकड़ के अपनी तरफ खींच रही थीं. मेरे लंड में अजीब सा कसाव आ गया था और लंड को भी अब चूत चाहिए थी.
मैंने आंटी की चूत से उंगली निकाली और अपने लंड के सुपारे को उनकी चूत के छेद के ऊपर रख दिया. आंटी की ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकल रही थी. मैंने इसे नजरंदाज करते हुए लंड को उनकी चूत के अन्दर घुसा दिया. आंटी की चूत अन्दर से बहुत गर्म थी और मेरी छोटी झांटों के साथ आंटी की लम्बी झांट मिक्स होने लगीं.
इस तरह हेयरी आंटी की चूत बजाते बजाते मैंने उनकी गांड के अन्दर धीरे से उंगली दे दी. आंटी की गांड उनकी चूत से भी ज्यादा गर्म थी. मैंने चूत की चुदाई जारी रखी और उनकी गांड में उंगली करना चालू कर दी.
मैं तभी नीचे झुका और आंटी के बूब्स चूसने लगा. ये सुख आंटी के लिए मस्ती का अहसास हो रहा था. उनकी चूत और गांड और बूब्स को एक साथ खुश किया जा रहा था. आंटी के गाल लाल लाल हो गए थे. मैं उन्हें और भी जोर जोर से चोदने लगा था.
अब यूं लग रहा था, जैसे कि आंटी की गांड मेरे लंड को बुलाने लगी थी. मैंने आंटी को अब उल्टा लिटा दिया और उनकी गांड को दोनों हाथ से फैला दिया.
आंटी की मस्त गांड का छेद मेरे बिल्कुल सामने था. बस उसमें लंड डालने की देरी थी. मैंने लंड के सुपारे को गांड पर रखा. लेकिन आंटी की गांड बहुत सख्त थी. मैंने चूत में उंगली डालकर थोड़ी चिकनी की और लंड के सुपारे पर लगाकर उसको चिकना किया. इस चिकनाहट की मदद से लंड थोड़ा अन्दर घुस गया. अब मैंने एक जोर का झटका लगाया और आंटी की गांड में पूरा लंड दे दिया.
परिणीता आंटी चीख उठीं- आह आहह उम्.. उप्प्प्प.. आहाहह.. आआअह्ह ह्हह ऊऊऊ… ऊईई ईईइ.. मर गई माँआ..
पर उनकी सुनता कौन था. मैंने आंटी के दोनों चूतड़ों को दोनों हाथ से साइड से पकड़ा और मैं थोड़ा ऊपर उठ कर जोर जोर से आंटी की गांड में मेरे लंड के झटके लगाने लगा. आंटी भी अब ‘अबबबबा ऊऊओ..’ करते हुए अपनी गांड हिलाने लगीं. मेरे लंड के ऊपर गांड में अजीब प्रेशर आया हुआ था. मैंने आंटी के पौंद पकड़े और जोर जोर से लंड अन्दर डालने लगा.
तभी मेरे मुँह से एक बड़ी ‘आआआह..’ निकली और मेरे लंड की पिचकारी छूट गयी. आंटी के गांड के अन्दर ही मेरा वीर्य निकल गया.
कुछ देर तक हम ऐसे ही लेटे रहे और बाद में आंटी उठीं और हम दोनों के लिए कॉफ़ी ले आईं.
अमीश को मैंने फ़ोन किया और उसने बताया कि वो बीस मिनट और लेगा.
मैंने कॉफ़ी पीने के बाद अपने लंड को फिर से आंटी के मुँह में डाला और लंड से मुख चोदन करते हुए आंटी के मुँह में ही अपना माल छोड़ दिया.
इस दिन के बाद से तो आंटी की गांड और चूत जैसे मेरी मिलकियत बन गयी. पहले आंटी थोड़ी थोड़ी कतराती थीं, लेकिन अब वो भी सामने से मुझे अकेले में घर बुलाकर मेरे लंड के मजे लूट लेती हैं.
आपके मदमस्त कमेंट्स मेरी इस आंटी की चुदाई की कहानी पर मिलने का इन्तजार रहेगा.
nudeluk@gmail.com

जवानी की पहली चुदाई गर्लफ्रेंड के साथ

मेरा नाम आनन्द है और मैं दिल्ली में रहता हूँ. मैं अन्तर्वासना की कहानियां कई साल से पढ़ता आ रहा हूँ. मैं पहली बार कोई चुदाई की कहानी लिख रहा हूँ. इसलिए लिखने में होने वाली गलतियों को नजरअंदाज कर दीजिएगा. साथ ही मेरी इस सेक्स स्टोरी पे अपने कमेंट्स जरूर दीजिएगा.
मेरी ये कहानी मेरी उस गर्लफ्रेंड के साथ हुई पहली चुदाई के बारे में है … जिसका बदला हुआ नाम माया है. माया का फिगर बहुत ही मादक है. उसकी मदमस्त जवानी किसी भी लंड पानी निकाल देने के लिए काफी है. उसका फिगर 36-32-36 का है. मेरा उससे अफेयर चल रहा था और कई महीनों से उसके हाथों को सहलाना चूमना होता रहता था.
एक दिन जनवरी के महीने के शाम को ऑफिस से आते समय उसकी स्कूटर ख़राब हो गयी. उसको ठीक कराकर घर छोड़ने में रात हो गयी, जिसका धन्यवाद उसने मेरे होंठों पर किस करके दिया. अब उसके साथ मुहब्बत का ये सिलसिला सहलाने के साथ रोज शाम को किस करने पर ही खत्म होने लगा था.
एक दिन मैं उसके घर में उसे कमरे तक चला गया, जहाँ मैंने उसके होंठों को बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया. उसने मुझे काफी मना किया कि रहने दो, घर का कोई सदस्य आ जाएगा. लेकिन मैं तो अपने चुम्मी लेने और मम्मे मसलने के काम में लगा रहा.
थोड़ी देर में उसने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया था. लेकिन तभी उसकी माँ की आवाज आई, जिससे हम दोनों सचेत हो गए. मैं अपने आपको संभाल कर अपने घर आ गया. लेकिन उस रात हम दोनों फ़ोन पर सुबह 4 बजे तक ना जाने क्या क्या बातें कर डालीं.
उस रात को हुई घटना को मैं कभी नहीं भुला सकता हूँ. इसके बाद मैं रोज चुदाई के बारे में सोचने लगा. रह रह कर बातों ही बातों में अपनी शादी शुदा सहेली की चुदाई के पहले दर्द और उसके बाद के मजे बारे में बात करके वो उत्तेजित हो जाती, जिसको वह अपनी उंगलियों से शांत कर लिया करती थी.
हम दोनों ने चुदाई का भरपूर मजा लेने के लिए अपने अपने घरों झूठ बोला और 3 दिनों के लिए खजुराहो का प्लान बनाकर अपने घरों से चल दिए. खजुराहो जाकर वहां के एक होटल में हमने एक अच्छा वातानुकूलित कमरा ले लिया. इस कमरे का बेड कमरे के मुख्य दरवाजे से 12 फीट दूरी पर था. उसके बाथरूम के कमरे के अन्दर की दीवर कांच की थी, जिस पर सुंदर सा पर्दा लगा था.
इस कमरे में अन्दर आते ही अपने हाथ के छोटे हैंडबैग को टेबल में रखा और सर्विस ब्वॉय ने बाकी का सामान हमारे सामने रख दिया और चला गया. उसके जाते ही रूम बंद करके हम दोनों जोंक की भाँति एक दूसरे से ना अलग होने के लिए चिपक गए. हमारा एक दूसरे को बेतहाशा चूमना, अंगों को रगड़ना और दबाना शुरू हो गया. धीरे धीरे हमारे बदन से एक के बाद एक कपड़े अलग होने लगे. लेकिन उसने मुझे अपने अंतिम कपड़े यानि ब्रा और पेंटी को अलग करने से पहले रोक दिया.
जिसका मैंने विरोध किया तो उसने कहा- सफ़र की गन्दगी को साफ कर नहा धोकर तैयार होकर कुछ खा लेते हैं. मैं अब तो 3 दिन के लिए पूर्ण रूप से आपके लिए हूँ. जैसा चाहो वैसा प्यार करो. अन्दर डाल कर करो या ऊपर से रगड़ कर करो या फिर चूम के, दबा के के मजा लो. ये सब मैंने आप पर छोड़ दिया है.
उसकी बात मुझे जम गई और हम दोनों कुछ ही समय में नहा धोकर कमरे से खाने के लिए बाहर निकल गए.
लेकिन बाथरूम के शीशे के परदे को नहीं हटाया, जिससे कि कमरे से बाथरूम में होने वाली गतिविधियों को देखा जा सके.
खैर … अब हम हल्का खाना खाकर कमरे में चुदाई करने के लिए आ गए. पहली चुदाई की कोशिश चादर ओढ़ कर की, जिससे होटल के अन्दर छिपे कैमरे से बच सकें. वह चादर ओढ़ कर लेट गई. ऐसा उसने ही कहा था कि आजकल के होटलों का कोई भरोसा नहीं है. साले हिडन कैमरे से चुदाई रिकॉर्ड करके ब्लैकमेल करते हैं या फिर पोर्न साईट पर अपलोड कर देते हैं.
उसकी बात सुनकर मैंने भी चादर के अन्दर घुसकर सेक्स करना तय कर लिया. चादर के अन्दर घुसते ही उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया. उसके होंठों पर जैसे ही अपने होंठों को रखा तो उसके नाजुक होंठ मुलायम मखमल की तरह लगने लगे. साथ ही उसके मखमल मुलायम जैसे टाईट दूधों को भी कपड़े के ऊपर से दबा कर सहलाने लगा.
उसने मस्ती में अपनी आँखें बंद कर रखी थीं, जिसे मेरे कई बार खोलने के लिए कहने पर भी उसने नहीं खोला.
मैं अपना हाथ को आगे बढ़ाते हुए उसकी छाती को मसलते हुए पेट पर आया और इधर से नीचे की जांघों से होकर उस मखमली नाजुक मुलायम द्वार पर मेरी उंगलियां आ पहुंची. उंगलियों के उस मधुरिम घाट तक पहुंचते ही उसने अपने पैरों को चिपका लिया.
मैंने भी जल्दबाजी नहीं की और धीरे धीरे उसकी छाती को चूमना सहलाना शुरू कर दिया. वह भी उसका मजा लेने लगी और बची हुई शर्म को छोड़ कर उसने अपना विरोध कम कर दिया.
मैं लगातार उसके गालों को, माथे को, आंखों को, गर्दन को, कानों को चूमता और हल्के होंठों से पकड़ के सहलाता रहा. जिससे उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. फिर मैंने धीरे से उसके कुरते को उतार दिया, जिसमें उसने भी मेरा साथ दिया.
अब मेरी आँखों के सामने उसके खरबूजे के समान चूचे एक छोटी से सफेद रंग की ब्रा में बंधे हुए थे. उसके मम्मे मानो मुझसे आजादी की गुहार गा रहे थे. उसकी कसी हुई ब्रा में से किसी पर्वत के सामान उठे हुए चूचों को मैंने जैसे ही आजाद किया. समझो किसी रबर की गेंद की तरह उछल कर उसके मम्मे खुली हवा में फुदकने लगे. लेकिन उन मस्त मम्मों को अभी पूरा सुख मिलना बाकी था.
अगले ही पल दोनों मम्मे मेरे हाथों से होते हुए मेरे होंठों तक पहुंच गए. मैं कभी उसकी दाएं चूचे को चूसता और बांए को दबाता. कभी बांए को चूसता और दांए को दबाने लगता. मम्मों को सुख देने का सिलसिला इसी तरह से चल रहा था. जिसका मजा वो आंखें बंद कर ले रही थी.
मैंने बारी-बारी से उसकी दोनों चूचियों को निचोड़ निचोड़ कर सुर्ख लाल कर दिया.
इसके बाद जब उसकी सलवार को खोलने की बारी आई तो देखा कि उसने अपनी सलवार के नाड़े की गांठ बड़ी जोर से लगा रखी थी. नाड़े को खोलने में बड़ा समय लगा, जिसका मजा वह हंसती हुई आँखें बंद करके ले रही थी.
धीरे-धीरे मैंने गर्दन से नीचे का रुख किया और उसकी गर्दन को चूमते हुए नीचे का रुख किया. उसकी सांसें लगातार तेज होती जा रही थीं. सलवार खोलने से पहले मैंने सलवार के अन्दर हाथ डालकर पेंटी के ऊपर से उसकी चूत को सहलाना शुरू किया. उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, जिसकी वजह से पैंटी भी गीली हो गई थी.
मैं पूरी तरह से उसके ऊपर हावी था … उसकी चूचियां मेरे मुँह में थीं तथा मेरा एक हाथ उसकी चूत के ऊपर था. इस समय वह अपनी जवानी के सबसे हसीन पलों का एहसास कर रही थी. फिर अंत में मैं उसकी सलवार को खोल कर जवानी के रस में भीगी पैंटी को निकाल कर, बिना वस्त्रों के चादर के अन्दर नंगी लेटी उसके भरपूर सौन्दर्य का आनन्द लेने लगा.
फिर मैंने उसकी बंद आँखों को देखते हुए अपने सारे कपड़े उतार कर अपने लंड को उसकी जाँघों से चिपका दिया. अब मैं नारी के नग्न सौन्दर्य का आनन्द लेते हुए उसकी मदमस्त जवानी के रस को भोगने में लग गया था. मैं उसकी चुत पर उंगली फेरकर चूत का मजा ले रहा था और वो भी मेरी उंगली का अपनी चूत पर फिरवाने का मजा लेने लगी थी.
उसकी बालों रहित चिकनी चुत गुलाब की पंखुड़ियों सी दिख रही थी, जिसमें से जवानी का रस टपक रहा था. चादर के नीचे हमारा शरीर इस कदर गर्म हो गया था कि हम दोनों अपने आप पर नियंत्रण खोते जा रहे थे. साथ ही चुदास इतनी अधिक बढ़ चुकी थी कि हम दोनों एक दूसरे के अन्दर सामने के लिए आतुर हो रहे थे.
मैंने उसके होंठों को अपने होंठों की गिरफ़्त में लेकर चूसना शुरू किया और अपना हाथ उसके शरीर पर फिराना शुरू किया. वो भी पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गई और उसकी उंगलियां मेरे बालों में चलना शुरू हो गईं. कभी उसके हाथ मेरी गर्दन को सहलाते, तो कभी पीठ को सहलाते हुए मेरे चूतड़ों तक पहुंच जाते. वह पूरी तरह से संसर्ग के मजे ले रही थी. अपना लंड मैंने उसके हाथ में देने की कोशिश की, लेकिन उसने बंद आँखों से लंड को सिर्फ धीरे धीरे सहलाया. उसका हाथ लंड पर महसूस करते ही मैंने भी उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया. जैसे ही मैंने उसकी चूत में थोड़ी सी उंगली डाली, तो उसकी मादक सिसकारियां निकलने लगीं. मैं हल्के हाथ से उसकी चूत में डूबी उंगलियों से चूत की दीवारों को सहलाने लगा.
कुछ ही देर में वह पूरी तरह से बेकाबू हो गई और बोली- जल्दी डालो … अपने उसको जल्दी डालो … प्लीज मेरी गर्मी को शांत कर दो … मुझे प्यार दो प्लीज … अब मत तड़पाओ मेरी जान.
मैं समझ गया कि इसकी चूत लंड लंड कर रही है. जैसे ही अपना लंड उसकी चुत की फांकों पर रख कर लंड को अन्दर धकेला, तो लंड फिसल कर कभी जाँघों पर कभी नीचे चला जाता. कभी आजू बाजू हो जाता. इससे बचने के लिए मैंने उसके बैग से वैसलीन की डिब्बी निकाली. फिर मैंने उंगली से वैसलीन को उसकी चुत में बड़ी प्यार से लगाया और अपने लंड को भी वैसलीन से चिकना कर लिया. अब मैंने लंड को चुत पर रखकर जैसे ही धक्का लगाया, तो लंड का सुपारा चुत में गायब हो गया और दर्द का रंग एकदम साफ से उसके चेहरे पर झलकने लगा. मैं अपने लंड के सुपारे को चुत में डाले हुए रुक गया और लंड को उसकी चुत से निकालने की सोचने लगा.
मुझे मेरा लंड को उसकी चुत से निकालने का भी मन नहीं कर रहा था लेकिन उसके दर्द को भी देखा नहीं जा रहा था,मैंने उससे कहा- जानेमन, सहन कर लो प्लीज़ … पहली बार चुदाई में दर्द भी होता है.
तो वह बोली- मुझे पता है और मैं सब सहन कर लूँगी, पूरा अन्दर तक डाल दो.
मैंने उसे पूछा- तुम्हें कैसे पता?
तो उसने कहा- मेरी सहेली ने अपनी सुहागरात के बारे में बताया था कि पहली बार की चुदाई में थोड़ी देर दर्द होता है … इसके बाद बहुत मजा आता है. अब तुम्हारा अन्दर घुस ही चुका है, तो चुदने के अलावा और रास्ता ही क्या है.
उसकी यह बात सुनकर मुझे हंसी आ गई. मुझे हंसता देखकर वो भी मुस्कुराने लगी.
उसके मुँह से उसकी सहने की बात सुनकर मेरा हौसला आसमान छूने लगा. फिर मेरे लंड का सुपारा, जो चुत की पुत्तियों में फंसा हुआ था, उसको थोड़ा दबाते हुए जोर लगाया, तो लंड सरकता उसकी चूत से लोहा लेने लगा. अगले झटके में ही लंड चुत की गहराई में उतर गया. उसने अपनी दोनों बांहें मेरे गले में डाली हुई थीं. उसने अपनी आँखें इस कदर बंद की हुई थीं, जिससे साफ़ दिख रहा था कि वो दर्द को भरपूर सहने की कोशिश कर रही थी.
आज लंड के पहले ही झटके पर अपनी चूत की सील टूटने की खुशी से उसके दर्द भरे आंसू निकलने लगे. मैं उसी तरह रुक कर उसको सहलाता और चूमता रहा.
थोड़ी देर में वो बोली- अब करो.
मैं लंड को चुत में धीरे धीरे हिलाने लगा. कुछ समय में वो अपने दर्द को भूलकर चुत चुदाई का मजा बंद आँखों से लेने लगी. उसे मस्त होते देख कर मेरे लंड की गति उसकी चुत में चालू हो गई. एक तो हमारे शरीर की गर्माहट और दूसरी उसकी चूत की गर्माहट से मेरा सारा शरीर और लंड एकदम पिघला जा रहा था.
वह बोली- जानू, ऐसा लग रहा है कि जिंदगी भर चुदती ही रहूँ.
मैंने कहा कि अब जिंदगी भर तुम्हारा मुझ पर हक हो गया है, जब चाहो तब मेरे इस लंड का मजा लेती रहना.
यह सुनकर उसने मुझे माथे पर चूम लिया. मैं पूरे जोश से उसकी चूत चुदाई कर रहा था. उस चुदाई से वह इस कदर मदहोश हो रही थी कि शायद वह दर्द को भूल गई. जब कि इस वक्त वो मेरा पूरा लंड अपनी चूत में समाए हुए थी. हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी बांहों से इस कदर कसा हुआ था कि उसकी चूचियां मेरी छाती में गड़ रही थीं.
करीब 5 मिनट की चुदाई के बाद, वह धीरे-धीरे सिसकारियां लेते हुए कहने लगी- आअह्ह … आअह्ह … जानू बहुत मजा आ रहा है … उम्म्ह… अहह… हय… याह… और जोर से पेलो … ऊऊऊह ओहोहह … और चोदो मेरे राजा … आआह्ह्ह … ऊऊइईई … मरर्रर गयी मेरे बलमा … मुझे अपनी रानी बना लो … मेरी जान … चोदो आह … बहुत मजा आ रहा है … ऑऊईईई ऊईईई माँ … मेरी चूत को फाड़ दो मेरे साजन … बहुत मजा आ रहा है … आआह्ह्ह उऊंहह और तेज़ करो.
उसकी इस तरह की बातें, आवाजें मुझे और तेज चुदाई करने के लिए प्रोत्साहित कर रही थीं. मैं लगातार अपने चुदाई की स्पीड बढ़ा रहा था.
काफी देर की ज़बरदस्त चुदाई के बाद उसका शरीर अकड़ने लगा और मुझे अपने लंड पर उसकी चुत का दबाव महसूस हो रहा था.
तभी वह खुद को ऐंठते हुए बोली- मेरा कुछ निकल रहा है … मेरा शरीर अकड़ रहा है.
मैंने कहा- छम्मक छल्लो, तुम्हारा पानी निकल रहा है. तुम्हें पहली चुदाई का परमानन्द को प्राप्त हो रहा है!
जैसे जैसे उसका स्खलन नजदीक आता गया, वैसे वैसे उसकी पकड़ मुझ पर मजबूत होती चली गई. उसका पानी निकलते ही वह निढाल हो कर ढेर हो गई … लेकिन मैंने चुदाई को बदस्तूर जारी रखा और अपना पानी भी जल्द ही निकालने का प्रयास शुरू कर दिया. कुछ ही देर में मेरा भी पानी निकलने को तैयार हो गया.
मैंने उससे कहा- जानेमन मेरा भी पानी निकलने वाला है … कहाँ निकालूं?
तो उसने कहा- आज मैं सभी प्रकार से सभी सुख लेना चाहती हूँ … इसलिए अन्दर ही निकाल दो मेरी जान.
बस दो तीन ही शॉट के बाद मेरे लंड के गाढ़े वीर्य से उसकी चूत लबालब भर गई. लंड स्खलित होते ही मैं भी थक कर उसके ऊपर गिर गया. वह बड़े ही प्यार से मेरे बालों में उंगलियां फेर रही थी.
थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हटा, तो उसकी चूत से मेरे वीर्य और उसके खून का मिश्रण बहने लगा. उसकी चूत सूज़ कर मोटी हो गई थी.
यह देखकर वह बोली- तुमने यह क्या हाल कर दिया है.
चूत लंड के घमासान युद्ध की गाथा और हम दोनों के रज व वीर्य से सनी चुत अपने कौमार्य के टूटने की दशा दिखा रही थी.
मैंने कहा- जानू मजा के साथ-साथ सजा भी मिलती है.
यह सुनकर वह मुझसे लिपट गई और मुझे किस करने लगी. फिर उसी हालत में हम दोनों सो गए.
शाम को उठकर गर्म पानी से नहाकर होटल से बाहर घूमने के लिए निकल लिए. थोड़ी देर घूम फिर कर वापस होटल में आ गए. खाना आदि खा कर कमरे में पहुंच कर वापिस चुदाई करने लगे. इस बार उसे पहले से ज्यादा मजा आया.
दोस्तो, बताना मेरी पहली चुत की चुदाई की कहानी कैसी लगी. मुझे आप aanand3103@gmail.com पर जरूर लिखें. मुझे आपके मेल्स का इन्तजार रहेगा.

Friday, December 14, 2018

मारिया को खेत में ले जाकर चोदा

हेलो दोस्तों | मेरा नाम निवास है | मेरी उम्र 29 साल है | मै बिहार के पटना शहर में रहता हूँ | मैंने अपनी पढाई पूरी करने के बाद एक अच्छी सी जॉब करने लगा था | लेकिन मै अपने घर में इकलौता लड़का हूँ | और मेरे पापा के पास बहुत सारी जमीन पड़ी हुई है |उनके कई फॉर्म हॉउस है | हमारी जमीन दूर दूर गाँवो में है | इसी लिए जमीन में बुवाई का काम वहां जाकर ही देखना पड़ता है | जब तक पापा ठीक थे तब तक तो मैंने जॉब की लेकिन जैसे ही उनकी तबियत गड़बड़ हो गई मुझे अपनी नौकरी छोडनी पड़ी | अब पापा का सारा काम मुझे संभालना पड़ता है | वैसे तो मुझे खेती के बारे में कुछ भी नही पता था | लेकिन अब मुझे थोडा थोडा पता चलने लगा था | अब मुझे अपने फॉर्म हॉउस पर जाकर अपनी निगरानी में काम करवाना होता है अब मै कुछ अपने बारे में भी बता दूँ | मै एक लम्बा चौड़ा लड़का हूँ | मेरा लंड 6 इंच लम्बा है | वैसे तो मैंने कॉलेज टाइम में बहुत ही लड़कियों को चोदा है | लेकिन जब से मेरी जॉब छूती है मै तो बस चूत के लिए तरस गया हम अब तो बस चूत की ही तलाश थी |
अब कहानी के बारे में बताता हूँ | ये करीब 1 साल पहले की बात है | मेरा एक फॉर्म हॉउस आरा जिले के एक छोटे से गाँव में पड़ता है | मै हमेशा वंहा जाने से कतराता हूँ | क्योकि ये फॉर्म हॉउस बहुत ही अन्दर है | वहां कोई ढंग की फैसिलिटीज़ नही है | तभी पापा का फरमान आया की मै वहां जाकर बुवाई करवाकर आऊँ | इस काम के लिए मुझे करीब 10 दिन वहां रुकना था | मेरा बिलकुल भी मन नही था फिर भी पापा की बात मै टाल नही सकता था | फिर क्या था मैंने अपनी गाड़ी निकाली और चल दिया | वंहा शाम को पहुंचा | मै बहुत थक गया था | वहां का फॉर्म हॉउस एक पति पत्नी देखते थे | जोजफ ही वहां की सारे खेतो का हिसाब रखता था | और उसकी पत्नी मारिया फॉर्म हॉउस की देखभाल करती थी | वो वही फॉर्म हॉउस कर बगल में एक कमरे में रहते थे | जब मै पहुँचा तो दोनों बहुत खूश हुवे | उन्होंने ने मेरे खाने पीने की अच्छी व्यवस्था कर ली थी | मैंने भी खाना खाया और जाकर कमरे में सो गया | अगले दिन सुबह मारिया चाय लेकर मेरे कमरे में आई | उसने एक चूड़ी दार सूट पहन रखा था | जिसमे वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी | वैसे उसका फिगर कुछ खास अच्छा नही था लेकिन फिर भी उसके बड़े बड़े बूब्स तो ऐसे थे | मनो बुला रहे हो कि आओ और पी जाओ मुझे | एक पल उसे ऐसे ही देखने के बाद | मैंने चाय ली और पीने लगा | फिर तैयार होकर खेतो में चला गया | वहां दिन भर काम देखा फिर दोपहर में चला आया | अब वहां टाइम पास का कोई साधन तो था ही नही | मै बोर हो रहा था | तो शाम को ऐसे ही बाहर निकला | मै जोजफ के घर के पास खड़ा था तभी मुझे पानी की आवाज आई | मै समझ गया कि कोई नहा रहा है | तभी पास में एक टूटा सा बाथरूम बना हुआ था | मै पास गया और उसके एक छेद से झाँकने लगा | अंदर जो देखा तो मेरी आँखे फटी की फटी रह गई | मरिया नहा रही थी | वो एकदम नंगे थी | उसका ये रूप तो मेरे टन बदन में आग लगा रहा था | मै थोड़ी देर तक उसके बूब्स और चूत को निहारता रहा | फिर उसके वहां से निकलने से पहले भाग कर अपने कमरे में चला गया | और फिर मुठ मार कर अपनी वासना को शांत किया |
अब शायद मुझे लग रहा था कि मेरी चूत की कमी मारिया पूरी करेगी | मैं तो बस उतावला हो रहा था | अब तो बस मरिया को चोदने का प्लान करने लगा | अब जब भी वो मेरे पास अति मै उसके बूब्स को देखने की कोशिश करता | तो कभी उसे जान बूझ कर टच कर देता था |
ऐसे ही करीब 7 दिन बीत गए | अगले दिन शाम को मैं फॉर्म हॉउस के बाहर टहल रहा था | तभी मरिया आ गई | मैंने अच्छा मौका देखा | मैंने मरिया से कहा चलो आज तुम मुझे अपने पास वाले खेत में ले चलो मै यहाँ बोर हो रहा हूँ | उसने हामी भर दी मै उसके साथ चल दिया | हम जैसे ही खेत में पहुंचे | मरिया कुछ उठाने के लिए झूकी कि उसकी सलवार चर्र से फट गई | वो शरमाने लगी | मैंने सोचा ये अच्छा मौका है इसे चोदने का | मैंने उसको पकड़ लिया और कस के उसके होंठो पर किस करने लगा | मरिया  ने मुझे धक्का दिया और बोली ये क्या कर रहे हैं आप | मैंने कहा देखो मारिया मैं तुम्हे चोदना चाहता हूँ | मेरी इच्छा पूरी कर दो | अगर तुम मेरी इच्छा पूरी करोगी तो मैं तुम्हे बोनस दूंगा वर्ना तुम्हे और तुम्हारे पति को नौकरी से निकल दूंगा | वो मान गई | अब मै उसे फिर से किस करने लगा |अब वो भी मेरे साथ दे रही थी |  अब शायद वो भी चुदने के लिए एकदम तैयार हो गई  थी | मैं उसे खेत के बीचों बीच ले गया | और उसके कपड़े निकलने लगा | उसके बाद मैं उसकी  चूत की तरफ बढ़ गया और वहां पर बड़े ही प्यार से किस करने लगा | मेरी जबान और ऊँगली दोनों को मारिया के चूत में थे वो भी बस मज़े लेने लगी थी | मारिया अह्ह्ह्ह अह्ह्ह आह्ह्हह्ह.. कर रही थी | और बोल रही थी साहब आप तो एक दम अच्छे से चूत चाटते हो मेरे मर्द को तो ये आता ही नही है | मैं और भी जोर से उसकी चूत मे अपनी जबान डाल कर चाटने लगा | चूत को चटवाने की इसलिए उसकी ये बेताबी समझी जा सकती थी |  मैंने उसकी गांड को पकड़ के उसको ऊपर की तरफ उठाया और वो एकदम से झड गई |
5 मिनिट के बाद मैं खड़ा हुआ और मारिया को सीधा जमीन पर ही लिटा दिया और अपनी लोअर नीचे कर ली | उसने झट से उसे पकड़ लिया और उसे हिलाने लगी | फिर उसने मेरे लंड को अपने मुहं में ले लिया और देसी अंदाज़ में चूसने लगी | मैंने अपने लंड को उसके निपल्स के ऊपर घिसा | मेरा लंड भी अब एकदम उबाल मार रहा था |
फिर मैं मारिया  के ऊपर आ गया | मैंने धीरे धीरे कर के अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया और उसको चोदने लगा | पहले पहले मैंने एकदम स्लो स्लो चोदा इस सेक्सी मरिया को | फिर मेरी स्पीड बढ़ गई | वो भी आह्ह्हह्ह्ह्हह्ह… आय्ह्ह्ह…अय्य्य्हह्ह्ह कर के हिल रही थी | और अब मस्त चुदवा रही थी | फिर मेरे लंड का पानी मारिया की चूत में निकल गया | मैंने कुछ देर ऐसे ही लंड को उसकी चूत में रखा | और ऐसे ही लेटा रहा | फिर मै उठा औरअपने लंड को एक बार फिर उसके मुंह में दे दिया | उसने लंड को थोडा चूसा और वो एकदम कडक हो गया | अब वो वो खड़ी हुई और मैं नीचे लेट गया | वो चूत में लंड को ले के ऊपर चढ़ गई | मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स के ऊपर थे और मैं उसको चोद रहा था | वो भी अपनी गांड के धक्के मेरी जांघो के ऊपर दे के मजे से लंड अपनी चूत में ले रही थी | और आआह्ह्ह्ह… उह्ह्ह्ह…. और बोल रही थी साहब और जोर से चोदो मुझे आह्हह.. अआह्ह्ह…कर के मज़े ले रही थी | करीब आधे घंटे तक मैंने उसे कई बार जम के चोदा |
फिर हमने कपड़े पहने और वापस चले आये | इसके बाद मैं जब तक वहां रहा मारिया को रोज़ जम कर चोदा | मैंने उसको बोनस भी दिया और कुछ पैसे अलग से भी दे दिए | अब मैं जब भी वहां जाता हूँ | मेरी तो मौज होती है उसे जम कर चोदता हूँ |

Wednesday, December 12, 2018

सहेली ने मुझे रंडी बनाया



सबसे पहले मैं आप सबको बता देती हूँ कि मेरा नाम सीमा है. मेरी उम्र 40 साल की है. फिगर बड़ा मस्त है.. एकदम सांचे में ढला हुआ, ये 32-36-38 का कटाव लिए हुए है. ख़ास बात ये कि मैं एकदम दूध सी गोरी और मक्खन सी कोमल हूँ. मेरी हाइट 5 फुट 3 इंच है, मैरिड हूँ. मेरे पति का जॉब विदेश में होने के कारण वे मुझसे अलग बाहर ही रहते हैं. मैं यहां अपने बेटे के साथ रहती हूँ.. लेकिन लास्ट ईयर से बेटा पढ़ाई के कारण हॉस्टिल में रहने लगा है, सो अभी मैं अकेली ही रहती हूँ.
अब जब दस साल से पति बाहर हैं, कभी कभार आते हैं तो तो मेरी सेक्स की इच्छा अधूरी ही है और वैसे भी मेरे पति को सेक्स में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं है, मुझे अभी सिर्फ़ साल में 2-3 बार ही सेक्स का सुख मिल पाता है, जिससे मैं बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूँ.
अब चूंकि जब से अकेली रहने लगी हूँ, तब से मेरे मन में सेक्स की इच्छा पूरी करने के लिए किसी और के साथ सम्बन्ध बनाने को लेकर बहुत सोचती हूँ, लेकिन थोड़ा डर भी लगता है, सो हिम्मत नहीं कर पाती हूँ.
मुझे नवरात्रों में डांडिया खेलने का बड़ा शौक है, मैं नवरात्रि में गरबा करने घाघरा चोली पहन कर हमारे काम्प्लेक्स के नज़दीक में, जहां गरबा होता है, वहां चली जाती हूँ
एक दिन वहां मुझे एक मेरे से छोटी उम्र की महिला मिली. उसका नाम रीना था, वो मेरे पास वाले फ्लैट की है. उस लेडी से मेरी दोस्ती हुई. वो भी मेरी तरह शौकीन मिजाज की थी.
अब हम दोनों का नवरात्रि के बाद भी एक दूसरे के घर आना जाना, बात करना शुरू हो गया था. हम दोनों एक सी विचारधारा की थी तो अपनी पर्सनल बातें भी करने लगी थी.
वो मुझे कई बार बोलती थी कि आप इतने साल से बिना सेक्स किए कैसे रहती हो.. मुझे तो मेरा पति रोज एक बार तो चोदता ही है, फिर भी मैं संतुष्ट नहीं हो पाती हूँ, सो मैं दूसरे के पास भी चली जाती हूँ.
इस तरह से उसने मुझे उसके लव अफेयर के बारे में भी बताया और मुझसे पूछा- आपका कोई ब्वॉयफ्रेंड है?
तो मैंने ना बोला.
एक दिन उसने मुझसे बोला- आज सिनेमा देखने का मूड है, चलो सीमा, चलते हैं.
मैं भी बोर हो रही थी, मैंने हां बोल दिया. हम सिनेमा के लिए हमारी सोसायटी से थोड़े दूर ही निकले थे कि एक फ़ौरचूनर कार आई.
उसने मुझसे बोला- चलो सीमा, गाड़ी में बैठो.
मैं तो कुछ समझ ही नहीं पायी. कार में आगे की सीट पर ड्राइवर और एक गन वाला आदमी था.
बीच की सीट में एक उम्रदराज आदमी बैठे थे, समझो करीब 60 साल के ऊपर के रहे होंगे. वो आदमी एकदम हट्टा कट्टा, थोड़ा काला, मुँह में पान चबाए हुए था. वो कुर्ता और लुंगी पहने हुए एक मुस्लिम था. उसकी दाढ़ी भी एकदम सफ़ेद थी.
रीना उसके पास बैठी और मैं रीना के पास बैठ गई. अब हम तीनों फिल्म देखने आ गए, वो रीना के कंधे पे हाथ डालकर बैठा था और जब थोड़ा अंधेरा हो जाता तो वो उसके मम्मों को दबा देता था.. ये सब मैं देखती थी.
फिर आधी फिल्म खत्म हुई, तो हम निकल आए. वो अपनी कार को सिटी से दूर एक फार्महाउस पर ले गए, वहां मुझे एक हॉल में बिठा कर वो दोनों करीब दो घंटे तक एक रूम में जाकर एंजाय करते रहे.. फिर उसने हम दोनों को घर छोड़ा.
मैंने रीना से पूछा तो उसने बताया कि मैंने तुम्हें बोला था ना, मेरा लवर है.
मैंने बोला- इतनी उम्र का?
तो वो बोली- उम्र से क्या होता, वो कितना पैसा मेरे लिए खर्च करता है और जितना सेक्स का मजा देता है, ऐसा तो कोई 25 साल का लड़का भी नहीं देगा.
मैं उसकी बात सुनकर हतप्रभ थी.
ऐसे ही मैं उसके साथ 3-4 बार गई और वो दोनों एंजाय करते थे.
एक दिन रीना मेरे घर आई थी. उसने मुझे बोला- सीमा तुम्हारे लिए एक ऑफर है.. बताऊं?
मैंने बोला- हां, बोला ना?
उसने बोला कि मुझे उन्होंने मतलब उसके लवर ने बोला है कि उनका एक दोस्त हैदराबाद से अगले वीक दो नाइट के लिए आने वाला है, यदि तुम उनको खुश करो तो..!
मैंने तो एकदम मना कर दिया- तुम क्या बोलती हो रीना!
फिर उसने बोला- जल्दी मत करो सीमा.. आराम से सोचना.. फिर बोलना, एकदम से मत बोलो. देखो तुम वैसे भी बिना सेक्स तड़पती हो, ये मैं जानती हूँ. तुम कैसे अपनी रातें काटती होगी, यहां तुम्हें सेक्स का सुख भी मिलेगा और सेफ्टी भी, ऊपर से वो तुम्हें 2 नाइट के लिए 1 लाख रूपया भी देंगे.
मैं उसकी बात सुनकर चुप रही.
फिर उसने अपने फोन से उसके लवर को कॉल किया और बोला- मैंने सीमा से आने को बोला है. लेकिन वो मना करती है.
फोन स्पीकर पर था, तो सामने से उन्होंने बोला- देखो कोई बात नहीं.. ये तो मैंने सोचा कि तुम्हारी सहेली है, इसलिए.. वरना मेरे पास 10 औरतों का बायोडाटा फोटो के साथ है. वो तो मेरे दोस्त को एकदम घरेलू जैसी ही चाहिए थी, सो मैंने बोला, बाकी जैसी उसकी मर्ज़ी, लेकिन जो भी है, मुझे कल बताना. फिर जिसको सिलेक्ट करूँगा, उसके लिए कपड़े वगैरह भी सब बनाना है.
इतनी बात के बाद उसने कॉल कट कर दिया. रीना भी मुझे सोचने का समय देकर चली गई.
उस दिन पूरी रात मुझे नींद नहीं आई. मैं सोचती रही. मेरे मन में सेक्स की तो इच्छा थी ही, रात में सेक्स के बारे में सोचते सोचते मेरी चूत से दो बार पानी निकल गया, पूरी पेंटी गीली हो गई.
सुबह में रीना का मैसेज आया- क्या सोचा?
मैंने बोला- तू पहले घर आ … फिर देखती हूँ.
फिर वो आई, मैंने बोला- रीना मैंने आज तक कभी ऐसा नहीं किया, सो डर लगता है, सोसाइटी में किसी को पता चलेगा तो?
रीना ने बोला- इस सबकी तुम बिल्कुल चिंता मत करो.. मैं हूँ ना.. और वैसे भी तुम्हें मालूम है, मेरे लव का, वो अपने एरिया के कॉरपोरेटर हैं और यहां के डॉन हैं. कोई तुम्हारे सामने आँख उठा कर भी नहीं देख सकेगा, जब कोई जानेगा कि तुम किसके साथ रीलेशन रखती हो, तो वैसे ही चुप हो जाएगा.
मैं चुप हो गई.. तो उसने सीधा फोन लगाया और उनको बोला कि सीमा तैयार हो गई है, अब और किसी को मत बोलना.
मैं तो देखती ही रह गई थी और उसने सीधा हां बोल दिया था. खैर.. मैंने भी मन बनाने को सोचा कि जो होगा देखा जाएगा.
फोन अभी चालू था और स्पीकर पर था.
उधर से उन्होंने बोला- ठीक है तो 3 बजे तुम दोनों बाहर आजो, मैं तुम्हें शॉपिंग के लिए ले जाऊंगा.. अभी 5 दिन बाकी हैं.
हम 3 बजे बाहर गए, उनकी कार आ कर हम दोनों को एक बहुत महंगे टेलर के पास ले गई. जहां कपड़ा भी उनके पास ही था, सिर्फ़ हमें कलर और फेब्रिक पसंद करना था.
मैंने और रीना ने कपड़े पसंद किये. मेरे लिए एक चोली घाघरा का कपड़ा पसंद किया. सिर्फ वो कपड़ा ही 25 हजार का था, उसकी सिलाई 15 हजार थी. फिर हम मॉल गए, उधर हमने 3-4 सैट फैंसी अंडरगारमेंट लिए, मेकअप का सामान वगैरह सब ले लिया. उन्होंने उस दिन मेरे लिए 75 हजार से भी ज़्यादा खर्चा किया.. ये सब तो सिर्फ़ मुझे सजाने के लिए खर्च किया गया था.
रीना मुझे शनिवार की सुबह में ही लेके निकल गई थी. वो बोली थी कि ब्यूटीपार्लर जाना है. जब मैं वहां आ गई तो मेरी बगलों के बाल, मेरी चूत के बाल, लेग वगैरह सब जगह वॅक्स करके एकदम मुझे चिकनी बंदी बना दिया गया.
इसके बाद मुझे वो करीब 4 बजे फार्म हाउस लेकर गई. मैंने देखा पूरे फार्महाउस पे सजावट हो रही थी. इतने आदमी काम कर रहे थे कि मुझे लगा कि कोई जलसा है.
मैंने बोला- इतना क्या है रीना यहां?
उसने बोला- वो जो उनके दोस्त आने वाले है, उनके लिए पार्टी अरेंज की है, ये सब उसी की तैयारी हो रही है. रात में पार्टी होगी, करीबन 150 लोग होंगे. पार्टी में सब मर्द उनके, जो बिजनेस रिलेटेड हैं, वे सब शिरकत करेंगे.
ये देख कर मैं शर्मा रही थी.
उसने बोला- अब चिंता मत करो.. चलो ऊपर चलते हैं. आज का तुम्हारा रूम दिखाती हूँ, जिधर तुमको संतुष्टि मिलेगी.
जब उसने ऊपर जाकर रूम खोला, तो मैं हैरान थी. बाप रे.. मैं देख कर दंग रह गई. पूरा बड़ा हॉल जैसा रूम था, जिसमें 10×10 का एक बेड लगा हुआ था, उस बेड को ताजे फूलों से खूबसूरत तरीके से सजाया जा रहा था. अभी काम चालू था. एक तरफ सोफा था, एक डाइनिंग टेबल भी थी. मैं तो पागल जैसे रह गई थी.
रीना बोली- सीमा, आज तुम्हारी सच में सुहागरात होगी.
यह कह कर वो हंसने लगी. मैं भी थोड़ा मुस्कुरा दी.
मुझे फिर उसने तैयार किया, चोली घाघरा पहनाया. मेरे लिए सोने का नैकलेस, रिंग, कंगन आदि सब लाया गया था. वो सब पहन कर दुल्हन की तरह सज गई.
फिर रीना बोली- देखो अब वो 8 बजे आएँगे, तुम्हें उनका वेलकम करने जाना है ओके.. सिर्फ़ तुम अकेली होगी, तब मैं नहीं आऊंगी. तुमको उन्हें गुलदस्ता देकर गेट से पार्टी में लेकर आना होगा. फिर बारी बारी सब लोग उनको वेलकम करने आएँगे, फिर पार्टी शुरू होगी, तो वो तुम्हें लेकर ऊपर आएँगे.
अब रीना धीरे से बोली- सीमा देखो. वो बहुत पैसे वाले हैं.. हां उम्रदराज हैं.. लेकिन अगर तुम उनको खुश करोगी, तो वो तुम्हें मालामाल कर देंगे.
मैं चुप रही.
फिर उसने बोला कि तुम्हारे बेड पे एक वाइट सिल्क का पेटीकोट रखा है, जब आप दोनों चुदाई शुरू करो, तुम अपने नीचे उसे रख लेना क्योंकि आज तुम्हारी रियल सुहागरात होगी, ब्लीडिंग हुई तो वो बेडशीट खराब ना हो और तुम्हें अपने सुहागरात की निशानी भी तो रखनी है ना.
इतना कह कर मुस्कुरा दी.
सब सैट हो गया था. अब मुझे भी चुदाई का इन्तजार था. ठीक 8 बजे वो आए, मुझे रीना का लवर लेकर गया- चलो सीमा, बॉस आ गए हैं.
मैं गई, उनको गुलदस्ता देकर स्वागत किया. जब मैंने उनको देखा.. बाप रे कम से कम 6.5 फिट की हाईट, बहुत मोटा सा आदमी एकदम काला भुजंग, करीब 65 साल की उम्र दिखती थी.. दाढ़ी एकदम सफ़ेद थी. वो कुर्ता पजामा में था.
जब मैंने गुलदस्ता दिया, उन्होंने जानबूझ कर मेरे हाथ को भी छू लिया था. वे मेरे बदन को पूरा निहार रहे थे. उनका वजन कम से कम 125 किलो का होगा. मैं एकदम घबरा गई थी लेकिन अब मेरे पास कोई रास्ता भी तो नहीं था. वो स्टेज पे मुझे अपने साथ लिए खड़े रहे, जैसे उनकी मैं बीवी होऊं. वो मुझे लेकर खड़े रहे.. बारी बारी सब लोग आकर उनको विश करते थे.
ठीक 9 बजने को आया, सब लोगों का मिलना पूरा हुआ तो रीना के लवर ने बोला कि बॉस अब आप भी ऊपर जाके खाना खाइए, आपकी पसंद का गुजराती भोजन तैयार है.
यह कह कर वो थोड़ा मुस्कुराया.
हम तीनों ऊपर चले गए. नीचे पार्टी चालू थी.
हम रूम में आए, रीना के लवर ने बोला- बॉस प्लीज़ अन्दर जाइए, आज की नाइट के लिए बेस्ट ऑफ लक.. सीमा तुम्हें भी बेस्ट ऑफ लक.
जैसे ही उनके साथ मैं रूम में गई, वो भी अन्दर आ गए और उन्होंने दरवाजा लॉक कर दिया. मैंने देखा कि डायनिंग टेबल पर हर तरह के स्वीट, जूस, फ्रूट आदि सजे थे. एक से एक डिश सजी थीं.. पानी की बॉटल रखी थीं.
उन्होंने मुझसे बोला- सीमा, मुझे मालूम है तुम्हें रात में सिर्फ़ जूस एंड फ्रूट लेने की आदत है.. सो मैंने खाने के लिए सिर्फ़ वो ही तैयार करवाया है, लेकिन आज हमारी पहली मुलाकात है, सो स्वीट तो चलना ही चाहिए. इसलिए थोड़ी स्वीट भी रखी है. चलो बैठो, हम खाना खाते हैं.
हम दोनों बैठ गए, फिर उन्होंने मुझे एक गुलाब जामुन मेरे मुँह में डाला. मैंने आधा खाया और आधा उनके मुँह में डाल कर खिलाया. फिर हम दोनों ने 2-3 तरह के जूस पिए. एक-दूसरे का झूठा खाया. बिल्कुल पति पत्नी जैसी फीलिंग आ रही थी.
अब उन्होंने बोला- बस मेरा हो गया. फिर हम दोनों साथ में जाकर हाथ धोकर आए. उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया. मैं तो सोच नहीं सकती थी कि इस उम्र में एकदम इतना पावर होगा. उन्होंने एक झटके में मुझे उठाया और बेड पे लेकर गए.
मैंने उनको बोला- लाइट ऑफ कीजिए ना.
तो वो बोले- अरे जानेमन.. जिस जिस्म को देखने हम पिछले एक वीक से तड़प रहे थे, बिना लाइट के उस हुस्न को कैसे देखेंगे. जब से तुम्हारी फोटो देखी है, हम तो तुम्हारे दीवाने हो गए थे जान.
उनकी बात सुनकर मैं शर्मा गई.
फिर उन्होंने धीरे से मुझे बांहों में लेकर किस करना शुरू किया. धीरे से मेरी पीठ पर मेरी ब्लाउज में हाथ डालकर ऊपर से सहलाना शुरू किया. जब उनका हाथ मेरे बदन पे पड़ा, लाइफ पे पहली बार मुझे लगा कि कोई मर्द का हाथ है. उनके हाथों का स्पर्श एकदम मजबूत और सख्त था. अब मैंने भी धीरे से उनको बांहों में लेकर क़िस करना शुरू किया. मुझे तो ये सब करते ही एकदम पहली बार पानी छूट गया था.
अब उन्होंने मेरा ब्लाउज खोला और ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मों को दबाने लगे.. चूचियों को सहलाने लगे. अब उन्होंने मेरा घाघरा भी निकाल दिया. मैं सिर्फ़ ब्रा पेंटी में रह गई थी. वो मेरे बदन को सहलाते निहारते रहे और मैं उनके बदन की सख्ती को स्पर्श करती रही.
जैसे ही उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोला, मेरे चूचे एकदम से बाहर उछल आए. वो अपने हाथ से मेरे मम्मों को मसलने लगे. मैंने धीरे से उनके सिर को मेरी एक चूची पे लगाकर एक निप्पल उनके मुँह में डाल दिया. मैं अपने हाथ से अपने चूचे दबाकर उनको चुसवाने लगी.
बारी बारी से वो मेरे दोनों अंगूर चूसते रहे. वे मेरे दोनों चूचुकों को बहुत हार्ड सक कर रहे थे.
मैंने बोला- आह.. धीरे जी.. काटना मत प्लीज़.
उन्होंने मुझे उनके कपड़े निकालने को बोला. मैंने पहले उनका कुर्ता निकाला. जब मैंने उनका पज़ामा देखा, मैं एकदम बेहाल हो गई. उनके पजामे का आगे का भाग इतना उभरा हुआ था कि मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था.
फिर मैंने पजामा निकाला तो अंडरवियर के ऊपर से देखा कि उनका लंड बहुत मोटा था. मेरे मुँह से निकल गया- बापरे इतना मोटा??? मैंने तो लाइफ में पहली बार देखा है.. मैं इसे नहीं ले पाऊंगी.
उन्होंने मुझे बांहों में लेकर बोला- सीमा डरो मत… कुछ नहीं होगा. हां फर्स्ट टाइम थोड़ा दर्द होगा, वो तो वैसे भी तुम्हारी रियल सुहागरात है, तो दर्द तो होगा ही.
यह कह कर वो मुस्कुराने लगे. फिर मैंने उनका अंडरवियर निकाला, एकदम काला कम से कम दस इंच लंबा और मेरी कलाई से भी मोटा लंड था उनका.. बिना स्किन का सुपारा था, एकदम चिकना और काला चुकन्दर जैसा दिख रहा था.
अब धीरे से उन्होंने मुझसे बोला- सीमा तुम इसे मुँह में लो.
मैं धीरे से नीचे जाके उनके पैरों के बीच में बैठ गई और उनका सुपारे पर किस करके धीरे धीरे मुँह में लंड लेना शुरू किया. उस सुपारे से कुछ मस्त कर देने वाली महक आ रही थी. कुछ ही पलों में मुझे लंड चूसना अच्छा लगने लगा. मैंने कम से कम 20 मिनट उनका लंड पूरा चूसा.
अब उनका मूसल सा लंड एकदम हार्ड हो गया था.. मेरी लार से.. और उनके रस से, उनका पूरा लंड चिकना हुआ पड़ा चमक रहा था. इस समय वो मेरी चूत में उंगली डालकर सहला रहे थे, मेरी चूत भी एकदम गीली हो गई थी. मैं एकदम गरम हो गई थी.
फिर उन्होंने मुझसे बोला- अब लेट जाओ सीमा रानी.. मैं लंड अन्दर डालता हूँ.
मैं अपने पैर खोल कर चित हो गई.
फिर वो मेरे ऊपर आकर बोले- सीमा मेरा वजन झेल लोगी ना?
मैंने बोला- हां..
जैसे उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के होल पर रखा, मैंने अपने हाथ से उसे थोड़ा सा अपनी चूत पे घिसते हुए लंड को चुत के होल के ऊपर रखा और उनको धीरे से बोला- हां अब डालो.
उन्होंने लंड को अन्दर डालने की जैसे ही कोशिश की, मेरे मुँह से ज़ोर से चीख निकल गई- बाप रे ईई.. मर गईईई.. कोई बचाओ..
फिर भी उन्होंने एक ज़ोर से झटका मार दिया. मेरी चूत तो जैसे फटी जा रही थी. ऐसा लग रहा था कि आज किसी ने गरम सरिया मेरी चूत में पेल दिया हो.
मैं लगभग बेहोश हो गई थी. फिर वो थोड़ी देर रुके, फिर एक ज़ोर से झटका मारा. मैंने मरी सी आवाज में बोला- अभी कितना गया?
उन्होंने बोला- आधा गया है.. अब एक ही झटके में पूरा घुस जाएगा सीमा.
यह कहते ही उन्होंने एक ज़ोर से झटका दे मारा, मेरी आँख से आँसू निकल गए. उनका पूरा मूसल लंड मेरी चूत के अन्दर चीरता हुआ चला गया.
मैं दर्द से कलप उठी. करीब 5 मिनट वो ऐसे ही पड़े रहे. फिर धीरे धीरे उन्होंने मेरी चूत में लंड को अन्दर बाहर करना शुरू किया. कुछ देर के दर्द के बाद अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था. हां मेरी चूत के अन्दर बहुत जलन हो रही थी, दर्द भी बहुत ज्यादा था, अब खूब मज़ा भी आने लगा था.
वो मेरे ऊपर ही चढ़े हुए मुझे ज़ोर ज़ोर से चोद रहे थे.. साथ में मेरे बूब्स को भी दबा रहे थे. मैं उनकी पीठ सहलाती जा रही थी. मेरे मुँह से मस्त कामुक आवाजें निकल रही थीं- उहह.. अहह..
कुछ देर की मस्त चुदाई से हम दोनों के बदन एकदम पसीने से भीग गए थे. वे मुझे पेलते हुए बोले- सीमा तुम मेरी लाइफ में 22 वीं औरत हो, जिसे मैं चोद रहा हूँ.. लेकिन तुम जैसी इतनी कमाल कोई नहीं देखी.. आह.. क्या मस्त चूत है, साली लंड को छोड़ती ही नहीं है.. एकदम अन्दर पकड़ के रखा है.
उनकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा दी और उनको चूम लिया. उन्होंने मुझे कम से कम 45 मिनट तक चोदा.. इस बीच मैं दो बार झड़ चुकी थी. वे अब भी मुझे चोदने में लगे थे.
वो तभी एकदम तेज हुए और बोले- अब मेरा निकलेगा.. आज पहली बार है सो चूत में ही निकालूँगा.
तभी एक ज़ोर से गरम पिचकारी मेरी चूत में मुझे फील हुई और मेरी चूत पूरी भर गई. वो मेरे ऊपर ही छा गए.
दस मिनट तक लंड को चुत में डालकर पड़े रहे. नीचे मेरी चूत से रस बह रहा था.
फिर वो मेरे ऊपर से उतरे, देखा नीचे मेरे वाइट पेटीकोट पर बहुत खून निकला हुआ था.. उनका वीर्य भी था.
वो खुश होकर बोले- देखो, ये सच्ची सुहागरात हुई.
उन्होंने अपने दोस्त को कॉल किया कि रीना को भेजो, मेरी सीमा उसको ये पेटीकोट, उसकी सुहागरात की निशानी देना चाहती है.
वे मुझे चूमते हुए बोले- जाओ थोड़ा दरवाजा खोलकर तुम ये रीना को देकर आओ.
मैं जरा लंगड़ाते नंगी ही गई, थोड़ा दरवाजा खोला तो बाहर से रीना बोली- बधाई हो सीमा..
उसने मेरे हाथ से पेटीकोट लिया और चली गई. वो जाते हुए बोली- पूरी रात के लिए बेस्ट ऑफ लक.
उस रात उन्होंने मुझे पूरी रात में 5 बार चोदा. मैं सुबह उठ ही नहीं पा रही थी, इतना दर्द हो रहा था.
वैसे ही दूसरे दिन भी उन्होंने मुझे 5 बार चोदा.
इसके बाद मुझे विदाई मिली, बहुत सारे जेवर, रुपए और सबसे बड़ी बात मेरी चूत को संतुष्टि मिली.
आपको मेरी कामुक सेक्स स्टोरी पसंद आई होगी, ऐसी मुझे आशा है. फिर और नयी कहानी लेकर आऊंगी.. बाय.
shahseema38@gmail.com

दोस्त की कुंवारी मौसी को चोदा



अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार. मैं नियमित रूप से अन्तर्वासना का पाठक हूँ. इधर की ढेर सारी कहानियां पढ़ने के बाद सोचा कि मैं भी अपनी जिंदगी की सेक्स लाइफ के रंगीन लम्हे आपसे शेयर करूँ.
यह कहानी मेरे पहले सेक्स की है, जो मैंने पड़ोस के लड़के की मौसी के साथ किया था. मैं पुणे (महाराष्ट्र) से हूँ, मेरी उम्र 20 साल है. अपनी बॉडी की बात करूँ, तो एकदम ठीक ठाक है और मैं 7 इंच लम्बे लंड का मालिक हूँ.
यह कहानी तब की है, जब मैं जवानी की दहलीज पर था. मेरे पड़ोस में एक लड़का रहता था, उससे मेरी अच्छी दोस्ती थी. उसकी मौसी जो 21 साल की थी, जो उसके यहां रह कर पढ़ने के लिए आई थी. पहले तो मेरे दिमाग में उसके लिए कुछ भी गलत विचार नहीं थे.
एक दिन पढ़ाई के कुछ डाउट थे, इसलिए मैं उसके घर गया. दरवाजा खुला था तो मैं सीधा अन्दर चला गया. उसके घर पर कोई नहीं था. मैं उसे ढूंढने लगा तो बेडरूम में घुस गया, दरवाजा थोड़ा खुला था.. तो मैंने अन्दर झाँक कर देखा तो दोस्त की मौसी कपड़े चेंज कर रही थी.
मैं उसके नंगे बदन को देख कर भौंचक्का रह गया. दूध के जैसे उसका गोरा और कटीला बदन.. उसके 32 साइज के चुचे और काले बालों से लिपटी हुई सुंदर सी गोरी चुत.. उसका 32-26-34 के मदमस्त साइज का बदन कहर ढा रहा था. मेरी जवानी तो उसका नंगा बदन देखकर उफान मारने लगी थी. मेरे अन्दर भी हलचल मचने लगी.
तभी उसे आहट हुई कि मैं उसे देख रहा हूँ, तो वो बाहर आने लगी. मैं जल्दी से वहां से निकल गया और पहली बार उसके नाम की मुठ मारी.
वैसे तो मैं रोज उससे मिलता था, पर उस दिन के बाद से मैं उससे पढ़ने के लिए रोज जाने लगा. वो भी मुझे बड़े मन लगा कर पढ़ाती थी.
एक दिन वो कॉलेज से थक कर आई थी, मैं उसके घर गया, तो देखा वो सो रही थी. सोते वक्त वो बहुत ही प्यारी लग रही थी. मैं उसकी बाजू में बैठ गया और उसके चेहरे पे प्यार से हाथ फेरने लगा. तभी उसने करवट ली. उस दिन उसने साड़ी पहनी थी, तो करवट लेते ही उसका पल्लू साइड में हो गया और उसके रसीले चुचे मेरे सामने आ गए.
मैं इसी की फिराक में था, पर डर रहा था कि उठ गई तो मेरी तो लग जायेगी. मैंने डरते डरते उसकी एक चुची पे हाथ रखा. कोई हलचल नहीं देखी तो मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैं चुचियों को मसलने लगा. फिर धीरे से उसके होंठों पे किस किया.. तभी वो जागने लगी थी. मैं संभल गया और मैं वहां से निकल गया.
अब मैं रोज उसके सोने के टाइम पे जाता और रोज उसकी चुचियों को मसलने लगा. ऐसा रोज करके मुझे मजा आने लगा.
एक दिन ऐसे ही मैं उसके घर गया, तो चुचे मसलने के बाद मैंने देखा कि उसका टॉप थोड़ा ऊपर उठा हुआ था. पजामे से पैंटी की स्ट्रिप दिख रही थी. मैंने सोचा आज बुर की दीदार किया जाए. मैंने एक हाथ उसके पजामे में डाल दिया और उसकी बुर पे हाथ से सहलाने लगा था. उसकी बुर गीली थी, ये मुझे थोड़ा सा अजीब सा लगा. मैंने एक उंगली बुर में घुसा दी, तभी वो हल्के स्वर में चीख़ मारते हुए उठकर बैठ गयी. मैं बहुत डर गया और उससे माफी मांगने लगा. मुझे ऐसा घबराया देख कर वो हँसने लगी और मुझे गले से लगाकर बोली- इतने दिनों से मजे ले रहे थे, तब नहीं डरे.. आज क्यों डर रहे हो?
मैं सुनता रह गया, मैंने मन में सोचा कि साली लौंडिया खुद मजे ले रही थी.. तभी इसकी बुर गीली थी.
फिर उसने मेरे होंठों पर होंठों रखे और हम दोनों एक दूसरे को दस मिनट तक चूमते रहे. फिर उसने मेरे कपड़े उतार दिए और मैंने उसकी टॉप उतार दिया. उसकी नंगी रसीली चुचियां मेरे सामने आ गईं. मैंने झट से उसकी एक चुची मुँह में दबा ली और चूसने लगा. वो जोर जोर से मादक सिसकारियां लेने लगी ‘आह ऊंह उम …’
मैं भी पूरी लगन से एक एक करके उसकी दोनों चूचियों को निचोड़ रहा था. आज मुझे ऐसा करने में ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि जब लड़की भी सामने से रेस्पॉन्स दे रही हो, तो ज्यादा मजा आता है.
थोड़ी देर चुची मसलते मसलते एक हाथ बुर पे ले गया और कपड़ों के ऊपर से उसकी कुंवारी बुर को मसलने लगा. वो और भी गर्म हो गयी, उसने अपनी टांगें फैला दीं और बुर की रगड़वाई का पूरा मजा लेने लगी. मैं भी उसकी बुर में उंगली करके उसके दाने से खेलने लगा. उसकी बुर के नन्हे से दाने को अपनी दो उंगलियों के बीच में दबा कर जैसे ही मसला उसकी आह निकल गई और वो एकदम से गरमा गई.
अब उसने भी मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया और हिलाने लगी. उसके हाथों में अपने लंड को महसूस किया तो मुझे मजा आ गया, समझो मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था. फिर उसने मुझे धक्का दिया और मुझे बिस्तर पर लिटा दिया. मैं कुछ समझ पाता कि उसने मेरा लंड मुँह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
पहली बार किसी लड़की ने मेरा लंड मुँह में लिया था, तो ऐसा लग रहा था.. जैसे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी यही है.
कुछ ही देर बाद वो लंड को अपने मुँह से निकाल कर उठी. उसके चेहरे पर चुदास का नशा देखा तो मैं समझ गया. मैंने उसका पजामा पैंटी के साथ निकाल दिया.. और हम दोनों 69 के पोजीशन में आ गए. मैं उसकी बुर चाट रहा था और वो मेरा लंड चूस रही थी.
पहली बार होने के कारण हम दोनों ही एक दूसरे के मुँह में झड़ गए. झड़ने के बाद हम दोनों थोड़ी देर ऐसे ही एक दूसरे के ऊपर पड़े रहे. कुछ पल बाद फिर से चुदास भड़क गई और हम दोनों एक दूसरे को गर्म करने लगे. एक बार फिर से हम हवस का खेल खेलने के लिए तैयार हो गए.
अबकी बार मैं उसके पैरों से ऊपर जांघों को चूमने लगा. वो उत्तेजित होने लगी. फिर ऊपर नाभि को चाटने लगा. ऐसे ही करके उसे मैं तड़पाने लगा. कभी जांघें, तो कभी नाभि और अचानक से उसकी बुर को मुँह में लेकर चूसने लगा, जीभ से बुर को कुरेदने लगा.
अब वो पूरी उत्तेजना में टांगें फैलाए पड़ी थी और जोर जोर से कामुक सिसकारियां ले कर बोल रही थी- जानू और करो..
मैं उसकी बुर में अपनी जीभ को गहराई तक चलाने लगा.
थोड़ी देर बाद वो कहने लगी- अब सहन नहीं हो रहा.. अपना लंड डाल दो अन्दर.. और बुझा दो मेरी प्यास.
उसकी बात सुनकर मैं ऊपर को उठ कर आया और अपना 7 इंच का लंड बुर पे सैट कर दिया. उसकी फांकों में लंड का सुपारा लगाया और लंड को बुर के अन्दर पेलने की कोशिश की. पहली दो बार की कोशिशें व्यर्थ हो गईं, क्योंकि बुर टाइट होने के कारण लंड फिसल रहा था.
अब मैंने थोड़ी क्रीम लंड पर लगायी और फांकों पर लंड रख दिया. उसने भी मेरा लंड पकड़ लिया और बुर के छेद पर जमा दिया. उसने इशारा दिया और मैंने जोर से एक झटका मार दिया. इस तगड़े प्रहार से मेरा लंड उसकी बुर में घुसता चला गया.
वो जोर जोर से चीखने लगी- निकालो बाहर!
वो रोने लगी तो मैंने झट से उसके होंठों को अपने होंठों से दबाया और उसको चूमने लगा. लंड अन्दर ही अपनी जगह बना रहा था. थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद थोड़ा दर्द कम हुआ, तो फिर से एक बार झटका मारा और इस बार पूरा लंड अन्दर डाल दिया. उसकी आंखों से आँसू आने लगे. मैं धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करने लगा. धीरे धीरे वो भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी.
धकापेल चुदाई का मंजर और चुदाई की रंगीन आवाजें कमरे में गूंजने लगीं. करीब 20 मिनट तक जमकर चुदाई के बाद हम दोनों ही झड़ गए. हम एक दूसरे से चिपक कर निढाल होकर पड़े रहे.
फिर थोड़ी देर के बाद जब उठा तो देखा के उसकी बुर खून से सनी हुई थी, वो थोड़ा डर गई. फिर मैंने उसे समझाया कि पहली बार में ऐसा होता है.
उसने मुझे एक प्यार भरा चुम्बन दे दिया और ‘आई लव यू..’ कहा. उसने बताया कि जब उसने मुझे जब पहली बार देखा था, वो तभी से मुझे पसंद करती थी.
उस दिन के बाद हम जब भी मौका मिलता, तब चुदाई कर लेते थे. तीन साल बाद उसकी शादी हो गयी. फिर शादी के बाद भी मैंने उसको बहुत बार चोदा. आज उसको मेरे से एक बच्चा है.
थोड़े दिनों बाद वो दिल्ली में सैटल हो गयी, पर आज भी उसकी याद आती है. उसके जाने के बाद बहुत सी लड़कियों को चोदा. उनकी कहानी किसी और दिन बताऊंगा.
आपको मेरी कहानी पसन्द आयी या नहीं, प्लीज मुझे मेल जरूर करना.
ashumj48@gmail.com