Showing posts with label antavasava. Show all posts
Showing posts with label antavasava. Show all posts

Sunday, December 23, 2018

पत्नी और साली को एक साथ चोदा

मेरा नाम गौरव है मैं पटना का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 30 वर्ष है और मेरी शादी को एक वर्ष हुआ है। मेरी पत्नी का नाम संगीता है और हम दोनों के बीच में बहुत प्रेम है। यह शादी हमारे घर वालों की मर्जी से हुई है। जब मैंने पहली बार संगीता को देखा तो उसके बाद से ही मैं संगीता से बात करने लगा था। मैंने संगीता का नंबर भी उसकी बहन से लिया, उसकी बहन का नाम काजल है और वह अभी कॉलेज में पढ़ रही है। मैं जहां जॉब करता हूं उसके पास ही काजल का भी कॉलेज है इसलिए मैंने उससे ही संगीता का नंबर लिया था और जब हम दोनों की बातें होने लगी तो काजल भी मुझसे बात किया करती थी। संगीता और मेरे बीच में बहुत ही ज्यादा प्रेम है। शादी के बाद से मेरा उसके साथ कभी भी कोई झगड़ा नहीं हुआ क्योंकि मेरे पास इतना समय नही है और ना ही उसके पास समय हो पाता है। वह घर के काम में ही लगी रहती है और एक बार संगीता ने मुझे कहा कि आज तुम मुझे बाजार लेकर चलना, हमने काफी वक्त से अपने लिए कुछ नया नहीं लिया था इसलिए वह चाहती थी कि मैं उसके साथ बाजार जाऊं।
मैंने उसे कहा ठीक है मैं ऑफिस से जल्दी आ जाऊंगा और उसके बाद हम लोग चल पड़ेंगे। उस दिन जब मैं ऑफिस गया तो मुझे ऑफिस से आने में बहुत लेट हो गई और हम लोग उस दिन बाजार नहीं जा पाए। संगीता उस दिन मुझसे बहुत गुस्सा हो गई और मैंने उसे कहा कि मुझे ऑफिस में काम था इस वजह से मैं समय पर नहीं आ पाया लेकिन संगीता कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी,  वह मुझसे बहुत गुस्सा हुई। मुझे यह बात बहुत बुरी लगी क्योंकि संगीता कभी भी मेरे साथ इस प्रकार से गुस्सा नहीं हुई थी। वह काफी दिनों तक मुझसे गुस्सा रही, वह मुझसे बिल्कुल भी बात नहीं कर रही थी। एक दिन वह गुस्से में ही अपने मायके चली गई और जब वह अपने मायके गई तो मैंने संगीता को फोन किया लेकिन उसने मेरा फोन नहीं उठाया। उसके बाद मैंने काजल को फोन किया लेकिन काजल भी मेरा फोन नहीं उठा रही थी। मैं भी अपने काम में व्यस्त था इसलिए मैं संगीता के घर नहीं जा पाया लेकिन मैंने उस दिन अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली और उसके बाद मैं अपने ससुराल चला गया।
जब मैं अपने ससुराल गया तो संगीता मुझसे बहुत गुस्सा थी, मैंने उससे बात करने की कोशिश की लेकिन वह मुझसे बात नहीं कर रही थी। मैंने उसे कहा यह तो बहुत ही छोटी सी बात है यदि तुम इतनी छोटी-छोटी बातों को अपने दिल पर लेती रहोगी तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा। कुछ देर बाद काजल आ गई और काजल को मैंने सारी बात बताई तो काजल कहने लगी कि जब आप दोनों के बीच में इतना अच्छा प्रेम है तो आप लोग आपस में झगड़ा क्यों करते हो। मैंने उसे सारी जानकारी दी तो उसके बाद उसने अपनी बहन को ही कहा कि तुम्हें इस प्रकार से नहीं करना चाहिए था। उसके बाद संगीता मुझसे बात करने लगी थी और कुछ देर बाद उसकी मां भी आ गई। मेरे ससुर का देहांत काफी समय पहले ही हो चुका था, मेरी सास ने ही संगीता और काजल को पाल पोस कर बड़ा किया है। जब वह आई तो वह मुझसे पूछने लगी कि क्या तुमने संगीता के साथ झगड़ा किया था, मैंने उनसे कहा कि आप इस बारे में संगीता से ही पूछ लीजिए। जब उन्होंने संगीता से पूछा तो संगीता ने कहा कि अब हम दोनों बात करने लगे हैं, मेरे सास कहने लगी कि चलो इस बहाने आप हमारे घर पर तो आए, नहीं तो आप कभी भी हमारे घर पर नहीं आते। मैंने उन्हें कहा कि मुझे बिल्कुल भी वक्त नहीं मिल पाता इसीलिए मैं आपके घर नहीं आ पाता। अब हम लोग साथ में बैठकर बातें कर रहे थे और काजल भी हमारे साथ ही बैठी हुई थी। कुछ देर बाद मेरी सासू अपने कमरे में चली गई और वह आराम करने लगी। मैं भी काफी समय बाद अपने ससुराल आया था इसलिए मैं भी यही सोच कर आया था कि मै वहीं रुकूँगा। मैंने काजल से पूछा कि क्या तुमने कोई लड़का पसंद नहीं किया, वह कहने लगी हां मैंने एक लड़का पसंद किया है और हम दोनों शादी करने वाले हैं। मैंने उससे पूछा कि क्या तुमने इस बारे में अपनी मां से बात की, वह कहने लगी कि नहीं मैंने इस बारे में अपनी मां से बात नहीं की। मैंने जब काजल से कहा कि तुम मुझे अपने बॉयफ्रेंड से कब मिला रही हो तो वह कहने लगी कि मैं आपको जल्दी ही अपने बॉयफ्रेंड से मिलवा दूंगी।
हम तीनो ही साथ में बैठे हुए थे। संगीता और मैं बातें कर रहे थे संगीता को भी अब अपनी गलती का एहसास हो गया था। वह मेरे साथ बैठ कर मुझे कह रही थी कि मुझे भी आपकी बात पर गुस्सा नहीं होना चाहिए था। मैंने संगीता को समझाया और कहा कि यदि तुम इस प्रकार से छोटी-छोटी बातों को अपने दिल पर लेती रहोगी तो इससे हम दोनों के रिलेशन में ही दिक्कते पैदा होंगे। अब वह इस बात को समझ चुकी थी और मुझे कहने लगी कि मैं आज से कभी भी आपके साथ इस प्रकार से झगड़ा नहीं करूंगी। मैंने भी संगीता को गले लगा लिया और कहा कि मैं भी तुमसे यही उम्मीद करता हूं कि तुम कभी भी मुझसे झगड़ा ना करो। यह बात संगीता को भी बहुत अच्छे से पता है कि मैं उसे बहुत ज्यादा प्यार करता हूं और मुझे भी मालूम है कि संगीता भी मेरे बिना बिल्कुल नहीं रह सकती। काजल मुझे कहने लगी कि चलो अब आप दोनों में बात हो चुकी है तो आज आप मुझे अपनी तरफ से एक छोटी सी ट्रिट देंगे, मैंने उसे कहा ठीक है। वह मुझे कहने लगी कि हमारे घर के पास में ही एक बहुत अच्छा रेस्टोरेंट खुला है, वहां पर काफी भीड़ भी रहती हैं हम लोग शाम के वक्त वहीं पर चलेंगे।
मैंने काजल से कहा ठीक है हम लोग शाम को पैदल ही वहां चलेंगे। वह कहने लगी ठीक है वैसे भी वह ज्यादा दूर नहीं है इसलिए हम लोग वहां पैदल ही चलेंगे। अब हम लोग बैठ कर बात कर रहे थे। कुछ देर मैंने आराम भी किया उसके बाद हम लोग शाम को रेस्टोरेंट में चले गए। जब मैं उस रेस्ट्रोरेंट में गया तो वहां का माहौल काफी अच्छा था। वहां धीमी धीमी आवाज में गाने चल रहे थे और उस रेस्टोरेंट में काफी भीड़ भी थी। हम लोग साथ में ही बैठे हुए थे। संगीता और मैं आपस में बात कर रहे थे, काजल मुझसे पूछने लगी कि आप लोगों की शादी को एक वर्ष हो चुका है और इस एक वर्ष में आप लोगों को एक दूसरे के साथ रहना कैसा लगा। मैंने उसे कहा कि मैं तो संगीता के बिना एक पल भी नहीं रह सकता, उसके बाद संगीता ने भी कहा कि मैं भी गौरव के बिना नहीं रह सकती। काजल मुझे कहने लगी कि आप दोनों के बीच में बहुत प्यार है। उसके बाद हम लोगों ने मैनू कार्ड से ऑर्डर किया और हम लोगों ने वहां पर काफी अच्छा समय बिताया। उसके बाद हम लोग घर वापस आ गए। जब हम लोग घर वापस आए तो हम लोग साथ में ही बैठकर बात कर रहे थे फिर मैंने संगीता से कहा कि मैं रूम में आराम कर रहा हूं। उसके बाद मैं रूम में चला गया और कुछ देर मैं अपने मोबाइल में ही लगा रहा। मैं मोबाइल में अपनी शादी की तस्वीरें देख रहा था, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं अपनी पुरानी यादों को ताजा कर रहा था। काजल और संगीता भी दूसरे रूम में बैठे हुए थे और वह दोनों ही बात कर रहे थे। मुझे उनकी आवाज साफ-साफ सुनाई दे रही थी। मैं जब दूसरे कमरे में गया तो वह दोनों ही नंगी लेटी हुई थी और एक दूसरे की चूत में उंगली डाल रही थी। मैंने जब यह देखा तो मेरा मूड खराब हो गया और जब उन्होंने मुझे देखा तो वह दोनों ही अपने कपड़े पहनने की कोशिश करने लगी लेकिन मैंने भी अपने लंड को बाहर निकाल लिया। काजल मेरे लंड को चूसने लगी और मैंने संगीता से पूछा कि तुम दोनों यह क्या कर रहे हो वह कहने लगी हम दोनों को एक दूसरे की चूत मे उंगली डालने में बड़ा मजा आता है। काजल अब भी मेरे लंड को सकिंग कर रही थी और बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी। उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और मैंने भी थोड़ी देर बाद काजल की योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया।
जब मैं उसको चोद रहा  था तो उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और वह चिल्ला रही थी। वह मेरा पूरा साथ दे रही थी और अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर रही थी। उसकी योनि बहुत ज्यादा टाइट थी इसलिए मुझे उसे चोदने में बहुत मजा आ रहा था और मैं उसे झटके देने पर लगा हुआ था। काजल कहने लगी आप तो बड़े ही  अच्छे से मुझे चोद रहे हो मेरा बॉयफ्रेंड तो मुझे बिल्कुल भी अच्छे से नहीं चोदता। मुझे इतना मजा आने लगा की मेरा वीर्य जल्दी गिर गया। मैने उसके बाद संगीत की गांड को कुछ देर चाटते हुए जैसे ही मैंने अपने लंड को संगीता की गांड के अंदर डाला तो वह चिल्लाने लगी। मैं उसे बड़ी तेज गति से झटके दिए जा रहा था उसकी गांड से खून आने लगा था वह कहने लगी कि तुमने तो मेरी गांड से खून निकाल कर रख दिया है। मैंने उसे कहा कि मुझे तुम्हारी गांड मारने में बहुत मजा आ रहा है यदि मैंने तुम्हारी गांड पहले ही मार दी होती तो शायद तुम मुझसे झगड़ा नहीं करती। वह कहने लगी आज के बाद तुम मेरी गांड मारना क्योंकि मुझे भी अपनी गांड मरवाने में बहुत मजा आ रहा है। काजल अपनी चूत के अंदर उंगली डाल रही थी उसे भी मजा आ रहा था। मैं संगीता को बहुत अच्छे से झटके दिए जा रहा था जैसे कि मेरा माल उसकी  गांड में गिर गया तो संगीता ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और अच्छे से चूसने लगी। जब वह नीचे बैठकर मेरे लंड को चूस रही थी तो उसकी गांड से सारा वीर्य बाहर की तरफ टपक रहा था। कुछ देर बाद काजल उसकी गांड चाटने लगी और उसने सारे माल को अच्छे से चाटा।

बॉयफ्रेंड ने मेरी सील तोड़ डाली

मेरा नाम राधिका है मैं कॉलेज में पढ़ती हूं, मेरा यह कॉलेज का पहला वर्ष है। मैं जब कॉलेज में आई तो मुझे पहले बहुत ही अजीब लग रहा था क्योंकि हमारे स्कूल में सब लोग यूनिफॉर्म में आते थे और कॉलेज में किसी भी प्रकार की कोई यूनिफॉर्म नहीं थी। हमारे कॉलेज में सब लोग बड़े ही फैशनेबल है और इसीलिए हमारे कॉलेज में सब लोग बहुत बन ठन कर आते हैं। हमारे कॉलेज के लड़के भी बहुत परेशान करते हैं और सब लड़के लड़कियों पर ही चांस मारते हैं। मैं जब कॉलेज में गयी तो मुझ पर भी कुछ लड़के बहुत लाइन मार रहे थे लेकिन मैंने उनकी तरफ देखा भी नहीं क्योंकि मैं सिर्फ अपनी पढ़ाई करना चाहती हूं,  इस वजह से मैंने उनके साथ ज्यादा बात नहीं की। वह लड़के मुझे अच्छे नहीं लगे। मैं अपनी क्लास में पढ़ने में भी अच्छी हूं और सब टीचर मेरी बहुत तारीफ करते हैं इसलिए मुझे लगता है कि मुझे अपनी पढ़ाई पर ही ध्यान देना चाहिए।
मेरे माता-पिता भी मेरी पढ़ाई को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं, वह हमेशा ही मुझसे पूछते हैं कि तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है, मेरे पिताजी स्कूल में क्लर्क हैं और मेरी माता घर का काम संभालती हैं इसीलिए मुझे कई बार ऐसा लगता है कि मुझे अपने जीवन में कुछ अच्छा करना चाहिए। उसके बाद मैं अपने घर वालों का सहारा बनना चाहती हूं। मेरा भाई अभी छोटा है और वह स्कूल में पढ़ रहा है, मेरे भाई की उम्र 15 वर्ष है। वह बहुत शरारती है उसके बावजूद भी मेरे माता-पिता उसे कभी कुछ नहीं कहते, मेरी मां उसको बहुत ही सपोर्ट करती है और कहती है कि अभी उसकी उम्र कम है इसलिए उसे अभी कुछ मत कहो। वह मुझे भी बहुत परेशान करता है और जब भी मैं घर पर होती हूं तो वह मुझे कुछ ज्यादा ही परेशान करता है, जिस वजह से मैं कई बार उस पर गुस्सा भी हो जाती हूं लेकिन उसके बाद मुझे लगता है कि मुझे अपने भाई पर गुस्सा नहीं होना चाहिए और मैं ही उससे बात कर लेती हूं।
मेरे पिताजी जब भी मेरे साथ अकेले में बैठे होते हैं तो वह मुझे हमेशा ही समझाते हैं वह कहते हैं कि तुम अपनी पढ़ाई अच्छे से करो ताकि तुम अपने जीवन में सफलता पा सको। मैं अपने पिताजी को हमेशा ही कहती हूं कि आप मुझ पर पूरा भरोसा रखिए मैं आपके भरोसे को बिल्कुल भी नहीं तोड़ूंगी। वह हमेशा ही मुझे याद दिलाते रहते हैं कि हम लोगों ने कितनी कठिनाइयों से निकल कर तुम्हें अच्छे स्कूल में पढ़ाया है क्योंकि हमारे समाज में लड़कियों को बिल्कुल भी पढाया नहीं जाता, उसके बावजूद भी मैंने तुम्हें पढ़ाने की सोची। मुझे सब लोग मना कर रहे थे उसके बावजूद भी मैंने तुम्हें कॉलेज में पढ़ाया। मैंने अपने पिताजी से कहा कि मुझे यह बात अच्छे से मालूम है कि आपको सब लोग इतना मना कर रहे थे, उसके बावजूद भी आपने मुझे कॉलेज में दाखिला दिलवाया और इसीलिए मैं आपकी हमेशा इज्जत करती हूं क्योंकि आपने मुझ में और मेरे भाई में कभी भी किसी प्रकार का अंतर नहीं किया,  आपने हम दोनों की जरूरतों को एक समान समझा और हमेशा ही आपने हम दोनों की जरूरतों को पूरा किया। मेरे पिताजी का नेचर जिस प्रकार का है वह बड़े ही अच्छे से और बड़ी शालीनता से समझाते हैं इसीलिए मुझे उनका नेचर बहुत अच्छा लगता है। मेरी मम्मी भी उनकी बहुत तारीफ करती हैं और कहती हैं कि तुम्हारे पिताजी का व्यवहार सब लोगों के साथ एक समान है इसीलिए सब लोग उनकी बड़ी इज्जत करते हैं और हमेशा ही उनसे सलाह मशवरा लेते हैं। मैं हमेशा की तरह ही कॉलेज से आती जाती रहती थी। हमारा कॉलेज बहुत बड़ा है इसलिए हमारे कॉलेज में काफी बच्चे हैं लेकिन मैं सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती थी इसलिए मुझे ज्यादा किसी के साथ बात करना अच्छा नहीं लगता था। हमारे क्लास के कुछ ही बच्चों से मैं बात करती थी क्योंकि बाकी बच्चे तो सिर्फ हमारे कॉलेज में घूमने के लिए आते थे, उन्हें पढ़ाई से कुछ भी लेना-देना नहीं था। एक दिन हम कॉलेज के ग्राउंड में बैठे हुए थे और मेरे पास की सीट में एक लड़का बैठा हुआ था। वह अकेले ही बैठा था, मुझे काफी अजीब लग रहा था जब वह अकेला बैठा हुआ था,  वह अपनी किताब खोल कर बैठा हुआ था। मुझे पहले लगा कि शायद वह किसी का इंतजार कर रहा है लेकिन वह बैठा हुआ था और अपनी किताब पढ़ने पर लगा हुआ था।
मैं काफी देर से उसे देख रही थी परंतु वह सिर्फ अपनी किताब में ध्यान से दे रहा था और मुझे भी काफी देर हो चुकी थी इसलिए मैंने सोचा कि मैं उस लड़के से बात करती हूं। मैं अब उस लड़के के पास चली गई और मैंने उससे पूछा कि क्या तुम यहां बैठकर किसी का इंतजार कर रहे हो, वह कहने लगा कि नहीं मैं किसी का भी इंतजार नहीं कर रहा हूं मैं पढ़ाई कर रहा हूं। मैंने उसे अपना इंट्रोडक्शन दिया और कहा कि यह मेरा कॉलेज का पहला वर्ष है। उसने भी मुझे अपना इंट्रोडक्शन दिया और अपना नाम बताया, उसका नाम संतोष है, वह कहने लगा कि मैं बी कॉम का छात्र हूं और यह मेरा आखिरी वर्ष है। मैंने उससे पूछा कि क्या तुम्हें किताब पढ़ना अच्छा लगता है। वह कहने लगा हां मुझे किताबें पढ़ने का बहुत शौक है और मैं हमेशा ही कुछ ना कुछ नई चीजें पढ़ना चाहता हूं, जिससे कि मेरा ज्ञान बड़े। मैं संतोष के साथ काफी देर तक बैठी हुई थी और मैं जितनी देर भी उसके साथ बैठी हुई थी। मुझे उसके साथ बात करना अच्छा लग रहा था। मैंने संतोष को भी बताया कि मुझे भी किताब पढ़ने का बहुत शौक है और मैं भी खाली समय में किताब पढ़ लिया करती हूं। संतोष और मेरी पहली मुलाकात बहुत अच्छी रही और मुझे बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगा कि मैं पहली बार संतोष से मिल रही हूं।
हम दोनों ही काफी अच्छे से बात कर रहे थे और काफी देर तक हम लोग साथ में बैठे रहे। मैंने संतोष से कहा कि अब मैं चलती हूं, फिर कभी तुमसे मिलूंगी। जब मैं जा रही थी तो संतोष ने मुझे आवाज लगाई और रोक लिया, उसने कहा कि क्या तुम मुझे अपना नंबर दे सकती हो, मैंने संतोष को आप अपना नंबर दे दिया उसके बाद मैं वहां से चली गई। मैं हमेशा की तरह ही कॉलेज जाती और उसके बाद अपने घर निकल जाती। कभी कबार संतोष मुझे मिल जाया करता था तो हम दोनों साथ में बैठकर समय बिता लेते। संतोष और मैं बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे लेकिन शायद यह दोस्ती अब किसी और तरफ मुड गई थी और मुझे संतोष से बात करना भी अच्छा लगने लगा था। वह भी मुझसे बात किए बिना बिल्कुल भी नहीं रह सकता था इसीलिए वह मुझे हमेशा फोन कर दिया करता था। जब भी हम लोग साथ में होते तो कभी कबार हम लोग कॉलेज से घूमने के लिए भी चले जाते थे। एक दिन संतोष ने मुझे कहा कि हम लोग कहीं बाहर घूमने चलते हैं, मैंने उसे कहा कि मैं ज्यादा समय तक तुम्हारे साथ नहीं रुक पाऊंगी, वह कहने लगा कि हम लोगों को आने में देर हो जाएगी इसीलिए तुम अपने घर पर यह बात बता दो।  मैंने उस दिन अपने जीवन में पहली बार अपने घर वालों को झूठ बोला और कहा कि मैं आज अपनी सहेली के घर पर ही रुकने वाली हूं इसलिए मुझे आने में देर हो जाएगी और उस दिन मैं कॉलेज भी नहीं गई। संतोष और मैं उस दिन सुबह ही घूमने के लिए निकल पड़े। हम लोगों ने उस दिन एक साथ काफी समय बिताया।  मुझे संतोष के साथ समय बिताना अच्छा लग रहा था और संतोष भी मेरे साथ समय बिता कर बहुत खुश था। वह कहने लगा कि हम लोग किसी होटल में चलते हैं मुझे पहले तो घबराहट हो रही थी लेकिन जब उसने मुझे कहा कि तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं तुम्हारे साथ हूं तो वह मुझे एक होटल में ले गया। जब हम दोनों उस होटल में गए तो मुझे थोड़ा डर लग रहा था लेकिन उसने रूम ले लिया। उसके बाद हम लोग होटल के कमरे में चले गए जब संतोष ने होटल में कमरा लिया तो हम दोनों अंदर चले गए और कुछ देर तक हम दोनों बैठे रहे।
अब हम दोनों ही एक साथ बैठे हुए थे कुछ समय बाद संतोष ने मुझे नंगा कर दिया और मेरी योनि को चाटने लगा। सतोष मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मेरी योनि को चाटने लगा मुझे बड़ा मजा आ रहा था जिस प्रकार से संतोष मेरी योनि को चाट रहा था। मैं उसे कहने लगी कि तुम बहुत ही अच्छी तरीके से मेरी योनि को चाट रहे हो मुझे बहुत ही मजा आ रहा है काफी समय तक उसने ऐसा ही किया। मेरी योनि पूरी गीली हो चुकी थी तो उसने अपने लंड को धीरे धीरे मेरी योनि के अंदर डाल दिया और जैसे ही उसका मोटा लंड मेरी योनि में घुसा तो मुझे बहुत तेज दर्द होने लगा मैं चिल्लाने लगी लेकिन उसने भी मुझे कसकर पकड़ा हुआ था। वह मुझे बड़ी तीव्र गति से धक्के देने पर लग गया मैंने उसे कहा कि मुझसे तुम्हारे मोटे लंड को बिल्कुल भी नहीं झेला जा रहा है लेकिन वह ऐसे ही मुझे बड़ी तीव्र गति से झटके दे रहा था मेरी योनि से भी बहुत तेज खून निकल रहा था। उसने मेरे स्तनों को अपने मुंह में लिया और मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेते ही चूसने लगा वह बड़े अच्छे से मेरे स्तनों का रसपान कर रहा था मैं बहुत खुश थी। उसने मुझे 10 मिनट तक चोदा उसका वीर्य मेरी योनि के अंदर ही गिर गया। उसका वीर्य मेरी योनि में गिरा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ और बहुत मजा आया। हम दोनो ने रात भर सेक्स किया और अगले दिन मेरी चूत में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। संतोष का भी लंड बुरी तरीके से छिल चुका था मैंने उसे कहा कि मुझे तो बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है मैं अच्छे से चल भी नहीं पा रही हूं। वह कहने लगा कोई बात नहीं यह दर्द ठीक हो जाएगा हम दोनों अपने घर चले गए। जब मैं अपने घर गई तो मैंने संतोष को फोन कर दिया उसके बाद संतोष और मैं फोन सेक्स करने लगे। जब भी वह मेरी चूत मारता है तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है।

भाई का लंड देख के नियत बिगड़ी

मेरा नाम आंचल है मैं 24 वर्षीय मुंबई की रहने वाली हूं। मेरे ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी हो चुकी है और अब मैं एक कॉल सेंटर में काम करती हूं। मैं सुबह के वक्त ही घर से निकल जाती हूं और शाम को ही घर लौटती हूं लेकिन कभी-कभार मेरी नाइट शिफ्ट भी होती है इसीलिए मुझे कभी नाइट में भी अपने कॉल सेंटर जाना पड़ता है और सुबह के वक्त ही मैं घर लौटती हूं। मेरे घर पर मेरे माता-पिता और मेरा छोटा भाई है। मेरा छोटा भाई बारहवीं में पढ़ता है और वह बहुत ही शरारती है, उसका नाम गौरव है। वह हमेशा ही कुछ ना कुछ शरारत करता रहता है जिस वजह से मेरे माता-पिता को भी शर्मिंदा होना पड़ता है। कई बार मेरे माता-पिता उसकी वजह से हमारी कॉलोनी में बहुत शर्मिंदा होना पड़ता लेकिन उसके बावजूद भी वह बिल्कुल भी सुधरने को तैयार नहीं है।
उसके स्कूल से भी हमेशा ही शिकायतें आती है और उसके प्रिंसिपल हमेशा ही हमारे घर पर नोटिस भेज देते हैं वह कहते हैं कि गौरव बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं करता और स्कूल में बच्चों के साथ झगड़ा करता रहता है, जिस वजह से मेरे पिताजी भी बहुत परेशान हो चुके हैं और मेरी मां भी बहुत परेशान है। हम सब लोगों ने उसे बहुत बार समझाया परंतु उसके बावजूद भी वह बिल्कुल भी समझने को तैयार नहीं है। मुझे कभी भी कोई आवश्यकता होती तो मैं गौरव को कह देती, वह मेरा काम जरुर करता है। उसके बदले में मैं उसे उसके जेब खर्चे के लिए पैसे भी दे दिया करती हूं। मेरे पिताजी एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और मेरी मां भी घर में छोटा मोटा काम कर के कुछ पैसे कमा लेती है। मैं भी अब काम करने लगी हूं तो इसलिए थोड़े बहुत पैसे मैं भी घर पर दे दिया करती हूं। कभी मैं अपने ऑफिस से आते वक्त कुछ ना कुछ सामान कर ले आती हूं। मेरी सहेलियां भी कई बार हमारे घर पर आते हैं और जिस दिन मेरी छुट्टी होती है उस दिन मेरे कॉलेज की सहेलियां मेरे घर पर आ जाती हैं क्योंकि वह लोग भी अब जॉब करने लगे हैं इस वजह से हमारी मुलाकात कम हो पाती है लेकिन हम लोगो का फोन पर हमेशा ही संपर्क रहता हैं। मैं अपने कॉलेज के समय से ही बहुत ज्यादा एक्टिव हूं इसीलिए मैं अपने काम में कभी भी बिल्कुल भी ढिलाई नहीं करती।
मेरे पिताजी और मेरी मां मेरी बहुत तारीफ करते हैं और जब वह मेरी तारीफ करते हैं तो उस वक्त मेरा भाई मुझसे बहुत झगड़ता है और कहता है कि तुम लोग आंचल दीदी की कुछ ज्यादा ही तारीफ करते हो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता जब आप उसकी इतनी तारीफ करते हो। मेरे पिताजी मेरे छोटे भाई पर हमेशा ही गुस्सा रहते हैं और वह कहते हैं कि तुम तो बिल्कुल भी तारीफ के काबिल नहीं हो, तुमने हर जगह हमारी नाक कटवा रखी है और हर जगह तुम हमें शर्मिंदा करवाते हो। गौरव कहने लगा कि मैं हमेशा ही कोशिश करता हूं कि आप तक मेरी शिकायतें ना पहुंचे और ना ही मैं इस प्रकार का कुछ काम करू कि आप मेरे काम से गुस्सा हो, उसके बावजूद भी ना चाहते हुए कुछ ना कुछ ऐसे काम हो ही जाते हैं जिससे कि आप मुझ पर गुस्सा हो जाते हो और आपको वह बात पता चल जाती है तो मुझे भी बहुत बुरा लगता है। मेरे पिताजी कहने लगे कि तुम अब बड़े हो रहे हो और तुम्हें भी अब अपनी जिम्मेदारियों को समझ लेना चाहिए क्योंकि इसके बाद तुम भी कॉलेज में चले जाओगे, कॉलेज में तुम्हें नए नए बच्चे मिलेंगे और उनके साथ तुम यदि इस प्रकार का व्यवहार रखोगे तो तुमसे कोई भी बात नहीं करेगा और ना ही तुम उनके बीच में रहोंगे। गौरव कहने लगा कि आप सही बात कह रहे हैं, मैंने भी कई बार कोशिश की लेकिन उसके बावजूद भी हमेशा ही कुछ ना कुछ गलत हो जाता है जिस वजह से आप लोगों को मेरी वजह से शर्मिंदा होना पड़ता है। मेरे ऑफिस में ही है एक लड़का है जो मुझे बहुत पसंद है लेकिन वह हमसे सीनियर है, उसका नाम अमित है। मैं हमेशा ही अमित को ध्यान से देखा करती हूं और जब भी हमारी ट्रेनिंग होती है तो वह हमें बहुत अच्छे से समझाता है लेकिन अमित मेरी तरफ कभी भी नहीं देखता,  मुझे लगता है कि शायद उसकी कोई गर्लफ्रेंड है इसीलिए वह मेरी तरफ नहीं देखता।
मैंने एक दिन अमित से इस बारे में बात की तो वह कहने लगा कि मेरी कोई भी गर्लफ्रेंड नहीं है और मैं सिंगल हूं, मैं गर्लफ्रेंड बनाने में बिल्कुल भी बिलीव नहीं करता और मैं अपनी जिंदगी में सिंगल ही रहना ही पसंद करता हूं। अमित बहुत ही खुले विचारों का लड़का है और अपने काम के बलबूते पर ही उसका प्रमोशन हुआ है। वह अपने काम से बहुत खुश रहता है जो भी काम उसे दिया जाता है वह बखूबी उसे निभाता है और ऑफिस में जितने भी हमारे सीनियर है वह सब अमित की बहुत तारीफ करते हैं। वह लोग कहते हैं कि अमित जिस प्रकार से काम करता है उस प्रकार से हमारे पूरे ऑफिस में कोई काम नहीं करता क्योंकि अमित को जो भी टारगेट दे दिया जाता है वह उसे आसानी से पूरा कर लेता है।  मैं जब भी अमित को देखती हूं तो मुझे बहुत खुशी होती है लेकिन मेरी अमित के साथ ज्यादा बातचीत भी नहीं है। मेरी कुछ दिनों के लिए ऑफिस में नाइट शिफ्ट लग गई और मैं रात के वक्त ऑफिस आती थी और सुबह मैं घर जाती थी। हमारे कॉल सेंटर से हमें गाड़ियां लेने को आती थी और सुबह भी हमें हमारे घर पर छोड़ देती थी इसलिए मुझे कोई भी समस्या नहीं होती थी लेकिन जब मैं सुबह घर पहुंचती तो मुझे बहुत ज्यादा नींद आती,  मैं सुबह घर जाते ही सो जाती थी। रात को मैं घर से निकलती तो मेरे घर वाले हमेशा ही मुझे कहते कि तुम अपना ध्यान रखना क्योंकि रात का वक्त सही नहीं है।
मैं उन्हें कहती कि हमारे ऑफिस से हमें गाड़ियां लेने आती हैं इसलिए आपको चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है लेकिन उसके बावजूद भी मेरे माता-पिता मेरी बहुत चिंता करते हैं। वह कहते कि तुम अपना ध्यान रखना और जब ऑफिस पहुंच जाओ तो हमें फोन कर देना, इसीलिए मैं जब भी ऑफिस पहुंचती हूं तो सबसे पहले मैं अपने मम्मी पापा को फोन कर देती हूं, उसके बाद ही मैं कुछ काम शुरू करती हूं। एक दिन मैं सुबह काम से लौटी तो मैं घर आकर सो गई। मुझे कुछ ज्यादा ही गहरी नींद आ गई, मुझे पता भी नहीं चला कि कब दोपहर हो गई और जब मैं दोपहर को उठी तो मेरी मम्मी मुझे कहने लगी कि तुम आज बहुत देर में उठ रही हो, मैंने उन्हें कहा कि हां आज मुझे कुछ ज्यादा ही नींद आ गई थी इसलिए मेरी आंख नहीं खुल पाई। मैंने दोपहर का अलार्म भी लगाया था लेकिन मुझे वह सुनाई नहीं दिया। मैं कुछ देर अपनी मम्मी के साथ ही बैठी रही, उसके बाद उन्होंने मेरे लिए चाय बनाई और कहा कि क्या तुम लंच करने वाली हो, मैंने कहा हां मैं लंच करूंगी लेकिन मैं पहले फ्रेश हो लेती हूं। मैं फ्रेश होने के लिए गई तो गौरव अपने कमरे में बैठा हुआ था और मैंने उसे देखा। जब मैं गौरव के कमरे में गई तो मैंने देखा कि वह हस्तमैथुन कर रहा है उसने अपने लैपटॉप पर पॉर्न मूवी लगाई हुई है। मैंने उसे देखा तो मैंने कहा कि तुम यह क्या कर रहे हो वह कहने लगा कुछ भी तो नहीं कर रहा जैसे ही उसका वीर्य गिरा तो वह शांत हो गया। मैं उसके पास जाकर बैठ गई उसका पूरा लंड मुरझा चुका था। मैंने गौरव को समझाया और कहने लगी यह अच्छी बात नहीं है यदि तुम इस प्रकार से अपने वीर्य को गिराते रहोगे तो तुम्हारे अंदर कमजोरी आ जाएगी तुम अपने माल का सही इस्तेमाल करो। वह मुझे कहने लगा कि मैं इस माल का सही इस्तेमाल कहां करूं। मैंने उसके लंड को अपने हाथ में लिया तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा जब उसका लंड पूरा खड़ा हो गया तो उसका लंड बहुत ही बड़ा हो गया था। मैंने उसे तुरंत अपने मुंह के अंदर ले लिया और अच्छे से चूसने लगी। मैंने उसके लंड को चूस कर उसका पानी निकाल दिया वह कहने लगा मुझे तुम्हारे मुंह मे लंड डलकर मजा आ रहा है।
गौरव ने कहा आप भी अपने कपड़े खोलो और मुझे अपनी चूत दिखाओ। मैंने अपनी चूत को उसे दिखाया तो वह कहने लगा कि आपकी चूत तो बिल्कुल ही ब्लू फिल्म की हीरोइन जैसी है आपकी चत मे तो एक भी बाल नहीं है। मैं पूरे मूड में थी और उसने जैसे ही मेरी चूत पर उंगली लगाई तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरी योनि को चाटने लगा। मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था जब वह मेरी योनि का रसपान करने लगा उसने काफी देर तक मेरी चूत चाटी। उसके बाद जब उसने अपने लंड को मेरी योनि के अंदर डाला तो मुझे बहुत दर्द महसूस होगा और मेरी योनि से खून भी निकलने लगा। वह मुझे बड़ी तेजी से झटके देने पर लगा हुआ था मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया और उसका लंड मैं अपनी योनि के अंदर तक लेने लगी। उसे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा मुझे बड़ी तेज झटके मार रहा था। उसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया जैसे ही उसका लंड मेरी योनि में गया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था उसने मेरी बड़ी-बड़ी चूतडो को कसकर पकड़ लिया। उसका लंड जब मेरी चूत के अंदर जा रहा था तो मैं चिल्लाने लगी और वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्के देने लगा। मुझे भी अच्छा लगने लगा मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी इसलिए मैं भी अपनी चूतडो को गौरव से मिलाने लगी लेकिन हम दोनों ही एक दूसरे की गर्मी को ज्यादा देर तक नहीं झेल पाया जैसे ही गौरव का माल मेरी योनि के अंदर गया तो मैं समझ गई कि अब उसका वीर्य मेरी योनि में गिर चुका है। मैंने अपनी योनि से उसके लंड को बाहर निकाला तो वह मुझे कहने लगा कि आपने तो आज मेरा सपना ही पूरा कर दिया आपकी कमसिन चूत के मैंने मजे लिए मुझे बहुत ही खुशी हुई।

Saturday, December 22, 2018

शादी का मंडप और चुदाई

दोस्तो, मैं सविता सिंह …
आपने मेरी सेक्स कहानी
शादी में चूत चुदवा कर आई मैं
पढ़ी रहे हैं कि कैसे राजस्थान के एक गाँव में मैं अपने पति के साथ गई और वहाँ मैंने एक बिल्कुल ही अंजान आदमी से एक नहीं कई बार सेक्स किया और बार बार सेक्स किया।
मेरा सबसे यादगार सेक्स तब हुआ जब एक तरफ मंडप में लड़की फेरे ले रही थी, और दूसरी तरफ मैं अपनी चुदाई करवा रही थी, उसी गैर मर्द शेर सिंह से।
कैसे? लीजिये पढ़िये:
अगले दिन शादी थी, तो सब तरफ चहल पहल ज़्यादा थी। सुबह से न मेरे पति, न शेर सिंह कोई भी नहीं दिखा। मैं पहले तो सुबह तैयार हुई, मगर दोपहर तक शेर सिंह का कोई पता नहीं। अब उसकी बीवी वहीं थी, मगर उससे भी नहीं पूछ सकती थी।
लोग आए और उन्होंने दोपहर के बाद मंडप भी सजा दिया। शाम के 5 बज गए थे, वैसे तो फेरे रात के 1 बजे के बाद थे, मगर फिर भी घर में औरतों ने शोर मचा रखा था।
मैं एक तरफ बैठी सब देख रही थी, सुन रही थी और जल भुन रही थी कि साला मेरा कोई इंतजाम ही नहीं हो रहा।
इंतज़ार करते करते जब मैं थक गई तो मैं और चंदा दोनों कमरे में बैठी थी, तभी उसकी ब्यूटीशियन आ गई, जिसने चंदा को तैयार करना था, उसने चंदा को तैयार किया तो साथ में मुझे भी मेकअप करके सजा दिया।
मगर दिक्कत यह हुई कि मुझे बहुत से औरतों ने ये कॉम्प्लिमेंट दिया कि मैं दुल्हन से भी ज़्यादा सुंदर लग रही हूँ। मेरे आसपास से जो भी मर्द गुज़रे, उनकी आँखों में भी मेरे रूप के लिए मूक प्रशंसा थी, कुछ एक आँखों में तो मैंने कामुकता भी महसूस करी, जैसे कह रहे हों ‘आज अगर ये मिल जाए तो साली की फाड़ कर रख दूँ।’
मेरे पति जब मुझसे मिले तो उन्होंने भी कहा- आज तो बहुत गजब ढा रही हो, लगता है आज सुहागरात मनानी ही पड़ेगी।
उनका मतलब साफ था कि बहुत जल्द वो मुझसे सेक्स करेंगे.
मगर क्या मैं भी उनसे सेक्स करने को उतावली थी?
मेरा जवाब था, बिल्कुल भी नहीं!
मैं तो शेर सिंह को खोज रही थी, वो मिल जाए और अपने खुरदुरे लंड से मेरी काम पिपासा बुझाये।
कुछ देर बाद वो भी दिख गया, सफ़ेद शेरवानी, और चकाचक सफ़ेद कुर्ता पाजामा, सर सुर्ख पगड़ी, लंबा सा लंड आगे को छोड़ा हुआ। अपने कद काठी और बड़ी बड़ी मूँछों के कारण वो पूरा कोई रजवाड़े का मालिक लग रहा था।
जब उसने मुझे देखा तो इशारे से एक तरफ बुलाया। मैं गई तो बोला- सविता जी, लगता है आप मेरा तलाक करवा कर ही दम लोगी।
मैं उसका आशय समझ तो गई, पर अंजान बन कर बोली- क्यों क्या हुआ, आपकी पत्नी को हमारा पता चल गया क्या?
वो हंस कर बोला- अरे नहीं, आप आज इतनी सुंदर लग रही हैं कि दिल करता है, अपनी पत्नी को तलाक दे कर आपसे ही शादी कर लूँ।
मैंने कहा- तो देर किस बात की है, शादी का मंडप तो सजा ही हुआ है, कर लेते हैं शादी!
वो मेरी आँखों में गहरा झांक कर बोला- क्या तुम छोड़ सकती हो अपने पति को?
बेशक ये मेरे लिए मुश्किल था, मगर मैं झूठ ही कह दिया- हाँ, छोड़ दूँगी।
उसके चेहरे पर जैसे खुशी, परेशानी और ना जाने क्या क्या भाव उभरे।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोला- आपने धर्म संकट में डाल दिया। सच में सविता जी, मैं आपसे बहुत प्यार करने लगा हूँ, अब आपके बिना नहीं रह सकता। चलो देखता हूँ, अगर मेरा जुगाड़ फिट बैठा तो मैं अपनी पत्नी को छोड़ दूँगा।
मैं उसके विचार सुन कर थोड़ा विचलित हुई- अरे अरे, शेर सिंह जी, इतनी जल्दी क्या है, अभी देखते हैं, हमारा रिश्ता और कितना आगे बढ़ता है, उसके बाद सोच लेंगे। आप भी यही हैं, मैं भी यहीं हूँ।
वो परेशान हो कर बोला- क्या खाक यहीं हो, आपके पति ने परसों वापिस जाने का प्रोग्राम फिक्स कर लिया, मेरे सामने अपने ताऊजी से बात कर रहा था। परसों आप चली जाओगी, फिर क्या बात होगी हमारी?
मैंने कहा- पर अभी तो परसों जाना है न, परसों तक तो हम अपने इस प्यार भरे रिश्ते का मज़ा ले सकते हैं।
वो बोला- तो ठीक है, आप भी आज दुल्हन बनी हैं, मैं भी आज पूरा सजधज कर आया हूँ, तो आज हम सबके होते हुये प्यार करेंगे।
मैंने कहा- वो कैसे?
वो बोला- बता दूँगा, बस मेरे इशारे का इंतज़ार करना।
उसके बाद हम सब शादी में मसरूफ़ हो गए, मैं चंदा के साथ उसकी बेस्ट फ्रेंड का रोल निभा रही थी, मगर हर कोई दुल्हन को छोड़ मुझे ही घूर रहा था, क्या औरत क्या मर्द, क्या बच्चा क्या बूढ़ा। रात के 12 बज कर 50 मिनट का फेरों का टाईम था। घूमते फिरते, नाचते गाते, खाते पीते, बड़ी मुश्किल से शुभ समय आया। जब दूल्हा दुल्हन विवाह मंडप में बैठ गए और पंडित ने मंत्र- उच्चारण शुरू कर दिया तो शेर सिंह ने मुझे इशारा किया। मैं भी चुपके से उठ कर चल दी।
वो मुझे अपने पीछे पीछे सीढ़ियाँ चढ़ा कर घर की बिल्कुल ऊपर वाली छत पर ले गया। वहाँ से नीचे सारा विवाह मंडप, सभी लोग दिख रहे थे।
ऊपर ले जा कर शेर सिंह बोला- अब पंडित के मंत्रोउच्चार के साथ हम भी फेरे लेंगे।
मैंने कहा- तो क्या हम चोरी से शादी करेंगे, घर वालों की मर्ज़ी के खिलाफ?
वो बोला- हाँ, और जब सही वक़्त आएगे, तो सबके सामने भी शादी करेंगे।
मैंने कहा- शेर सिंह जी, आप तो सच में मेरे दीवाने हो गए हो।
उसने मुझे बांहों में कस लिया और बोला- सविता जी, आप नहीं जानती कि मैं आपसे कितना प्यार करता हूँ, अगर जान भी देनी पड़ी आपके लिए तो दे दूँगा।
बेशक मेरे मन में शेर सिंह के लिए ऐसी कोई प्रेम प्यार की भावना नहीं थी क्योंकि मैं तो सिर्फ उसके सेक्स के रिश्ते तक ही खुद को सीमित रखा था। मगर वही था जो इस रिश्ते को चूत की गहराई से दिल की गहराई तक ले गया था।
और वैसे यहाँ ऊपर छत पर भी हमें किसने देखना था, तो जैसे जैसे नीचे पंडित मंत्र पढ़ पढ़ कर चंदा की शादी करवाता रहा, वैसे वैसे ही मैंने और शेर सिंह ने पूरे सात फेरे लिए, उसने अपनी तरफ से लाया हुआ मंगलसूत्र भी मेरे गले में डाला, मेरी मांग में सिंदूर भी भरा।
एक तरह से देखा जाए तो मैं उसकी पत्नी हो चुकी थी।
फेरों के बाद और कोई रस्म हमने नहीं की, जबकि नीचे मंडप में बहुत सी रस्में चल रही थी। मैंने भी नीचे झुक कर शेर सिंह के पाँव छूये, उसने मुझे उठा कर अपने सीने से लगा लिया।
कितनी देर वो मुझे अपने सीने से चिपकाए खड़ा रहा।
मैंने ही कुछ देर बाद उससे पूछा- क्या हुआ जी?
वो बोला- कुछ नहीं, बस अपनी किस्मत को देख रहा था कि कितनी सुंदर पत्नी मिली है मुझको!
मैंने अपना चेहरा उठा कर उसकी ओर देखा तो उसने मेरे होंटों को चूम लिया। एक, दो, तीन, चार और फिर तो उसने जैसे झड़ी ही लगा दी चुंबनों की।
मैं भी खुश थी, मैं भी चुंबनों में उसका साथ देने लगी।
चूमते चूमते मेरे तो बदन में हलचल होने लगी और मैंने महसूस किया कि शेर सिंह का पाजामा भी टाईट होने लगा था। मैंने ही हाथ आगे बढ़ाया और पाजामे में ही उसका लंड पकड़ लिया।
उसने मेरी आँखों में देखा और पूछा- चाहिए?
मैंने हाँ में सर हिलाया।
उसने मेरे लहंगे के ऊपर से ही मेरे दोनों चूतड़ सहलाए और मुझे घुमा दिया, मेरा चेहरा पंडाल की तरफ कर दिया। मैंने छतरी के बने हुये दो खंबों का सहारा लिया तो शेर सिंह ने पीछे से मेरे सारा घागरा उठा कर मेरी कमर पे रख दिया। मैं थोड़ा सा और आगे को झुक गई ताकि मेरी गांड और शेर सिंह की तरफ हो जाए, और मैं अपनी टाँगें भी खोल कर खड़ी हो गई।
शेर सिंह ने अपना पायजामे का नाड़ा खोला, और अपना पाजामा और चड्डी नीचे को सरका दी, अपने लंड पर हल्का सा थूक लगाया और पीछे से मेरी चूत में धकेल दिया। मोटा खुरदुरा सा टोपा मेरी चूत में थोड़ा अटक कर घुसा, मुझे हल्की से तकलीफ हुई, मगर फिर भी अच्छा लगा।
ऊपर से मैं पूरी शादी को देख रही थी, मैंने देखा मेरे पति भी वहीं घूम रहे हैं, एक दो औरतों से जैसे उन्होंने मेरे बारे में पूछा, मैंने ऊपर से चिल्ला कर कहा- अजी मैं यहाँ हूँ, ऊपर!
मगर शादी के शोर शराबे में चौथी मंज़िल की आवाज़ नीचे कहाँ सुनती।
शेर सिंह मुझे चोदता रहा और मैं ऊपर से यूं ही अपनी मज़ाक में अपने पति को और बाकी सबको शादी में घूमते फिरते देखती रही। मेरे लिए शादी नहीं, सेक्स महत्त्वपूर्ण था, और शेर सिंह नहीं उसका लंड महत्त्वपूर्ण था।
शेर सिंह मुझे बड़े अच्छे से चोदा और अपना माल मेरी चूत के अंदर ही गिराया। जब वो झड़ गया तो हम चुपचाप नीचे उतर आए।
मगर रास्ते में मैंने शेर सिंह को कह दिया- अभी एक बार से मेरा मन नहीं भरा है, मुझे ये सब फिर से चाहिए.
मैंने कहा तो शेर सिंह बोला- चिंता मत करो मेरी जान, आज सारी रात मैं तुम्हारे साथ हूँ, जितनी बार कहोगी, मैं उतनी बार तुम्हें संतुष्ट करूंगा।
अभी मैं एक बार और सेक्स करना चाहती थी, मगर शेर सिंह नहीं माना तो मैं मजबूरन उसके साथ नीचे आ गई। उसके बाद मैं अपने पति से मिली, तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया- अरे कहाँ चली गई थी मेरी जान, मैं तो बहुत मिस कर रहा था तुम्हें!
उन्होंने मुझे गले से लगा कर मुझे कसा, तो शेर सिंह के वीर्य मेरी चूत से चू कर मेरे घुटनों तक जाता मुझे महसूस हुआ। मैंने भी उन्हें थोड़ा कस कर आलिंगन किया और बोली- अरे क्या बताऊँ, मुझे तो चंदा के काम से फुर्सत नहीं मिल रही, कभी ये करो, कभी वो करो।
मेरे पति बोले- तो यार फ्री कब होगी, मेरा दिल कर रहा है, तुम्हें किसी अकेली जगह लेजा कर खूब प्यार करूँ।
मैंने कहा- रुको एक मिनट मैं आती हूँ।
अपने पति को छोड़ कर मैं सीधी बाथरूम में गई, पहले मैंने अपनी चूत को अच्छे से पानी से धोया और फिर कपड़े से सुखाया। शेर सिंह के पहनाया मंगल सूत्र उतार कर बाथरूम में ही रख दिया। और फिर से फ्रेश होकर बाहर आई।
मैंने अपने पति का हाथ पकड़ा और उन्हें वहीं ऊपर शिखर पर ले गई। वहाँ जाकर मैंने उनको गले से लगा लिया। सबके बीच, सबसे दूर ऐसी जगह देख कर मेरे पति बहुत खुश हुये- अरे वाह, क्या जगह ढूँढी है, यहाँ तो हम सबको देख सकते हैं पर हमे कोई नहीं देख सकता।
मगर मैंने बात करने की बजाए अपना घागरा ऊपर उठाया, और फिर से उसी जगह उसी पोज में आ गई, मेरे पति ने मेरी हालत देखी, तो बोले- लगता है, तुम्हें भी बड़ी इच्छा हो रही थी सेक्स की?
और उन्होंने भी अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया।
कोई 5 मिनट की चुदाई चली, मगर इस चुदाई में वो मज़ा नहीं था जो शेर सिंह की चुदाई में था। पति को भी सेक्स किए काफी दिन हो गए थे, तो बस 5 मिनट में ही वो अपनी सारी गर्मी मेरी चूत में ही निकाल गए।
मुझे बेशक इस सेक्स से कोई मज़ा नहीं आया, मगर हाँ, मेरी चूत की खुजली को थोड़ा आराम आया।
उसके बाद हम दोनों नीचे आ गए।
करीब सुबह चार बजे मुझे शेर सिंह फिर से वहीं ऊपर ले गया, और इस बार उसने करीब 35 मिनट लगातार मुझे नीचे लेटा कर मुझे चोदा। क्या मस्त और क्या खूब चुदाई की मेरी। मेरा 4 बार पानी गिरा, मगर वो फिर भी डटा रहा।
करीब 35 मिनट बाद जब वो थक कर झड़ा तो मेरी चूत को पूरा भर दिया उसने अपने माल से। मैं नीचे लेटी पसीने पसीने हो रही थी, उसकी तो हालत ही बहुत बिगड़ गई थी, पगड़ी उतार दी, कपड़े उतार दिये, सांस तेज़, दिल की धड़कन तेज़।
झड़ने के बाद वो तो जैसे गिर ही गया।
मैं उठी और अपने आप को ठीक करके वापिस नीचे आ गई। उसके बाद मैं चंदा की विदाई में शामिल हो गई। फिर करीब 6 बजे अपने कमरे में सोने चली गई।
दोपहर के 12 बजे मेरे पति ने मुझे जगाया, मेरा सारा बदन जैसे टूट रहा था। उसके बाद चाय पीकर फ्रेश हो कर मैं फिर से तैयार हो कर परिवार में घुलमिल गई।
अगले दिन शेर सिंह नहीं मिला. जिस दिन हम वापिस आने वाले थे, वो मिला, अकेले में लेजा कर मुझसे बोला- आज आ जा रही हैं?
मैंने कहा- हाँ, जाना तो पड़ेगा।
वो बोला- फिर मिलोगी?
मैंने कहा- अब मिले बिना रहा भी न जाएगा।
वो बोला- ठीक है, कभी मौका लगा तो मैं भी मिलने आऊँगा आपसे।
फिर मुझे अपने गले से लगाया और कहा- आज जाने से पहले एक आखिरी बार!
कहते हुये उसने अपनी पैन्ट खोली, मुझे लगा शायद फिर से सेक्स करेगा, मैंने कहा- नहीं शेर सिंह जी, इतना टाईम नहीं है मेरे पास!
वो बोला- अरे नहीं, चोदना नहीं है, सिर्फ थोड़ा सा चूस जाओ।
मैंने नीचे बैठ कर 1 मिनट उसका लंड चूसा। उसका काला, नाड़ीदार, खुरदुरा सा लंड फिर से खड़ा हो गया। मेरा दिल तो किया के उसका लंड चूसती ही रहूँ और आखरी बार फिर से एक बार इस से चुदवा कर जाऊँ, मगर ये संभव नहीं था।
मैं उठी और खुद ही एक बार शेर सिंह के होंठो को चूमा और दौड़ कर बाहर आ गई। शेर सिंह मेरे पीछे नहीं आया।
मैं अपने घर पहुंची, उसके बाद फिर से वही रूटीन ज़िंदगी। रात को पति से सेक्स, दिन में चाचाजी से सेक्स। मगर शेर सिंह शेर सिंह था, उसके जैसे मज़ा, और कोई नहीं दे सका मुझे।
savsingh775@gmail.com

Sunday, December 16, 2018

विदेश मे देसी जुगाड के जलवे

antarvasna, hindi sex story दोस्तों, कैसे हैं आप लोग?  मेरा नाम मनोज है, मैं जयपुर का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 30 वर्ष है। मैं स्कूल में क्लर्क हूं। मेरे पिताजी भी अभी कुछ वक्त पहले ही रिटायर हुए हैं। जब वह रिटायर हुए थे तो उस वक्त हम लोगों ने घूमने का प्लान बनाया था। मेरे चाचा दुबई में रहते हैं। उन्होंने कहा था कि कुछ दिनों के लिए तुम लोग दुबई आ जाओ। हम लोगों ने घूमने का सारा प्लान बना लिया था और लगभग सारी तैयारियां हो चुकी थी। मैंने फ्लाइट की टिकट भी बुक करवा दी थी लेकिन जिस वक्त हम लोग जाने वाले थे उससे कुछ दिन पहले ही मेरी मां की तबीयत बिगड़ गई। जब मेरी मम्मी की तबीयत खराब हुई तो हम लोगो को उन्हें अस्पताल लेकर जाना पड़ा। जब हम उन्हें अस्पताल ले गए तो डॉक्टरों ने कहा कि अभी आप इन्हें कुछ दिन बेड रेस्ट पर ही रखिए यदि आप लोग इन्हें कहीं ट्रैवल कराएंगे तो शायद हो सकता है कि इनकी तबीयत खराब हो जाए। हम लोग जिस दिन जाने वाले थे उस दिन अचानक से उनके पेट में तकलीफ होने लगी और उनका बदन भी पूरा दुखने लगा। उस वक्त हमारा घूमने का प्लान कैंसिल करना पड़ा।
मेरे चाचा ने जब हमें फोन किया तो वह कहने लगे क्या तुम लोग यहां नहीं आ रहे हो? मैंने उन्हें बताया कि मम्मी की तबीयत खराब हो चुकी है इसलिए हम लोगों का आना संभव नहीं है। वह कहने लगे चलो कोई बात नहीं तुम लोग कुछ समय बाद आ जाना। मैंने चाचा से कहा अब देखते हैं कब हमारा आना होता है। उनसे मेरी ज्यादा बात नहीं हो पाई। मैंने भी कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी क्योंकि घर में मैं एकलौता हूं इसलिए मुझे ही उनकी देखभाल करनी पड़ रही थी। मेरे पापा की भी तबीयत ठीक नहीं रहती इस वजह से मुझे ही मम्मी की देखभाल करनी पड़ी। उसके कुछ दिनों बाद ही मेरी मम्मी की तबीयत ठीक हो गई। जब मेरी मम्मी की तबीयत थोड़ा ठीक होने लगी तो वह कहने लगे कि मेरी वजह से तुम लोगों का घूमने का प्रोग्राम कैंसिल हो गया। मैंने अपनी मम्मी से कहा कि आपके बिना हम लोग वैसे भी कहां घूमते। मैंने उन्हें कहा आप ज्यादा बात ना करें आप कुछ दिन और आराम करिए। जब आप पूरी तरीके से ठीक हो जाएंगे तो तब हम लोग फिर घूमने चलेंगे। अब वह खुद ही जैसे पूरी तरीके से ठीक होने लगी थी और उसके बाद हम लोगों का घूमने का प्लान भी दोबारा बन गया। मैंने सोचा कहीं इस बार हमारा प्लान कैंसिल ना हो जाए इसलिए पहले ही डॉक्टर को दिखा दिया जाए। मैंने अपनी मम्मी का बॉडी चेकअप करवा दिया और डॉक्टरों ने कहा कि यह पूरी तरीके से स्वस्थ हैं।
हम लोग जब फ्लाइट में जा रहे थे तो उस वक्त मेरी मुलाकात सूरज से हुई। जब मेरी मुलाकात सूरज से हुई तो उससे मेरी अच्छी दोस्ती हो गई। वह लोग घूमने के लिए जा रहे थे। मैंने उनसे पूछा आप लोग कितने दिन के लिए वहां रुकने वाले हैं? वह कहने लगे हम लोग एक हफ्ता वहां रुकेंगे और उसके बाद हम लोग लौट आएंगे। वह मुझसे पूछने लगे हैं आप लोग कितने दिन तक वहां रहने वाले हैं? मैंने कहा अभी तो मैंने आने की फ्लाइट नहीं की है वहां जाकर ही पता चलेगा कि कितने दिन हम लोग रुक पाएंगे। जैसे ही हमारी फ्लाइट दुबई में लैंड हुई तो एयरपोर्ट पर मेरे चाचा हमें लेने के लिए आए हुए थे। मेरे चाचा ने सबसे पहले मेरी मम्मी से पूछा कि भाभी आप की तबीयत कैसी है? मम्मी कहने लगी। अब तो पहले से बेहतर है। पिछली बार तो ना जाने क्या हो गया हम लोग आए ही नहीं पाए। चाचा कहने लगे कोई बात नहीं चलो आप इस बार तो कम से कम आ ही गए। हम लोग वहां से उनके घर पर गए। जब हम लोग उनके घर पर गए तो मेरी चाची हमारा बेसब्री से इंतजार कर रही थी। चाची ने जैसे ही मेरी मम्मी को दिखा तो उन्होंने मेरे मम्मी को गले लगा लिया और वह दोनों आपस में बातें करने लगी। मेरे पापा कहने लगे कि तुम औरतों की बातें कभी खत्म ही नहीं होती। पता नहीं कितनी बातें हैं। सारी बातें आज ही करने वाली हो। मेरे पापा और चाचा बैठे हुए थे लेकिन वह लोग सिर्फ काम की बातें कर रहे थे। मैं अकेला बैठा हुआ था। मैंने अपने चाचा से पूछा कि चीनू कहां है? चीनू मेरे चाचा के लड़के का नाम है और वह बड़ा ही बदमाश है। उसकी उम्र 20 वर्ष है। मेरे चाचा कहने लगे चीनू अभी बाहर अपने दोस्तों के साथ गया होगा। बस कुछ देर बाद लौटता ही होगा।
मैं उसका इंतजार करने लगा और जैसे ही वह आया तो मैंने उसे कहा अरे भाई तुम कहां थे? मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा था। वह मुझे देखते ही कहने लगा भैया आप कब आये? मैंने उससे कहा कि तुम चाचा से ही पूछ लो कि हम लोग कब आए। चाचा कहने लगे कि उन्हें आए हुए तो काफी वक्त हो चुका है। उसके बाद हम लोग सब साथ मे बैठ कर बात कर रहे थे। चीनू मुझे अपने रूम में लेकर गया और कहने लगा भैया आपने अच्छा किया कि आप यहां आ गए मैं तो कब से पापा को कह रहा था कि भैया लोगों को यहां आने के लिए कहिए। आप लोगों ने बहुत अच्छा किया कि आप यहां आ गए। मैंने चीनू से पूछा आज कल क्या चल रहा है। वह कहने लगा बस भैया ऐसे ही समय कट रहा है। मैंने उसे कहा अपना मोबाइल तो दिखाओ। उसने अपना मोबाइल दिखाया तो उसमें एक से एक लड़कियों की तस्वीर थी। मैंने कहा यह सब कौन है तो वह कहने लगा मेरे दोस्त है। मैंने उससे कहा नहीं यह तुम्हारी दोस्त नहीं हो सकती यह कुछ और ही लग रही हैं। उसने मुझे सच कहा और कहने लगा यह सब जुगाड है। मैंने कहा तो हमें भी फिर विदेश की जुगाड़ का मजा दिलवा दो। वह कहने लगा मैं आपको एक गजब के माल के पास ले जाता हूं। उसका बदन देखकर आप अपने आपको नहीं रोक पाएंगे।


मैंने कहा ठीक है वह मुझे अपने साथ उसके पास लेकर गया। मैंने जब उसे देखा तो उस माल को देखकर मेरा मूड खराब हो गया। मैंने उससे पूछा तुम्हारा क्या नाम है? वह कहने लगी मैं गुजरात की रहने वाली हूं मेरा नाम  आंचल है। मेरा लंड उसे देखकर खड़ा होने लगा। वह मुझे अपने बेडरूम में ले कर चली गई चीनू बाहर बैठकर इंतजार कर रहा था। जब हम दोनो बेडरूम में गए तो उसने अपने कपड़े उतार दिए। उसकी लंबाई 5 फुट 8 इंच के करीब थी उसके फिगर को देख कर मेरा लंड मेरे कच्छे को फाडते हुए बाहर की तरफ को आने लगा। मैंने उसे कसकर अपनी बाहों में ले लिया और उसके पूरे बदन का रसपान करना शुरू कर दिया। मेरे लंड से धीरे धीरे पानी बाहर टपक रहा था लेकिन मुझे उसके बदन का रसपान करने में बहुत मजा आता। मैंने काफी देर तक उसके बदन का रसपान किया। जब उसने मेरे लंड को सकिंग करना शुरू किया तो वह अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को ले रही थी और अच्छे से सकिंग कर रही थी उसने काफी देर तक ऐसा ही किया। जब मेरी इच्छा भर गई तो मैंने भी उसके दोनों पैरों को खोलते हुए उसकी चिकनी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर चला गया। उसकी योनि बड़ी टाइट थी मैं मन ही मन सोचने लगा चीनू ने मुझे बड़ा अच्छा माल दिलवाया है। मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर रही थी। जब मेरी इच्छा भर गई तो मैंने उसे घोड़ी बना दिया। जब मैंने उसकी बड़ी गांड को अपने हाथों से पकड़ा तो मुझे बहुत मजा आया और मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह मुझे कहने लगी आपका लंड बड़ा मजेदार है। मैंने उसे कहा तुम बड़ी ही टाइट माल हो तुम्हारी जैसी माल को चोदने में मुझे बहुत मजा आ रहा है। यह कहते हुए मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था और उसकी आवाज चीनू के कान तक जा रही थी। चीनू मुझे कहने लगा भैया आप आराम से करिए बाहर आवाज सुनाई दे रही है। मैं उसे और भी तेज झटके मारने लगा। जैसे ही मेरा गरमा गरम वीर्य उसकी योनि के अंदर गया तो मुझे बहुत मजा आ गया। उसकी चूत का आनंद मैंने उस दिन विदेश में लिया मैं जब बाहर आया तो चीनू बाहर बैठकर हंस रहा था वह अपनी बत्तीसी मुझे दिखा रहा था। वह कहने लगा भैया आप बड़े हरामी हो। मैंने उसे कहा तुमसे तो कम ही हरामी हूं। यह कहने के बाद हम दोनों वहां से घर लौट आए।

Wednesday, December 12, 2018

मम्मी पापा की चुदाई देख सिस्टर के साथ सेक्स किया

दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है. मुझसे यदि कोई भूल हो जाए तो अपना समझ कर माफ कर देना. मेरा नाम साहिल है, मैं गुजरात से हूं.
यह कहानी मेरी ओर मेरी बहन के बीच की है. मेरी बहन मुझसे सवा साल छोटी है. वैसे तो ये कहानी बहुत पहले से ही शुरू हो चुकी थी जब मम्मी और पापा की चुदाई देख कर मेरा चुदाई करने का मन होने लगता था. उसी वजह से मैं वो सब अपनी बहन पर आजमाता था जैसे कि मैं उसकी गांड में उंगली कर देता था या कभी उसकी चुचियों को दबा देता था … वगैरह वगैरह.
बाद में जब मैं 20 साल का हुआ, तब एक रात को मैंने देखा कि मेरे पापा मम्मी की गांड मार रहे थे और मम्मी ‘आह्ह … ओह … उचए … उम्मम … ओहह …’ कर रही थीं. उस दिन मेरा मन खराब हो गया. उस वक्त रोज की तरह मेरे साथ मेरी छोटी बहन बगल में ही सो रही थी.
मैंने उसे देखा, वो सलवार कमीज़ में थी और मेरी तरफ गांड करके सोई हुई थी. जब मैंने उसकी गांड देखी, तब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी गांड पर अपना हाथ रख दिया. वो कुछ न बोली. शायद वो गहरी नींद में सो रही थी. इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैंने उसके करीब जाकर उसकी गांड को अपने लंड के साथ टच कर दिया व एक हाथ उसके मम्मों पर रख दिया.
इतने में ही उसने करवट ली. मैं डर के मारे पीछे को हो गया और सोने का नाटक करने लगा.
कुछ देर बाद कोई हलचल न होने के बाद मैंने फिर से अपना लौड़ा उसके पीछे चिपका दिया. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था, इसलिए मैंने बहन की सलवार का नाड़ा खोलने के लिए हाथ बढ़ाया और नाड़ा मिलते ही खोल दिया. फिर उसकी सलवार को नीचे कर दिया. उसने लाल रंग की पैन्टी पहनी थी. उसकी बड़ी गांड देख कर मेरा लंड तन कर पूरा 7″ का हो चुका था.
फिर मैंने उसको सीधा लिटा दिया और उसकी पैन्टी भी नीचे को कर दी. अब मैंने उसकी चूत को देखा और देखता ही रह गया. मेरी बहन की चूत एकदम गोरी चूत थी. उसकी चूत पर अभी कुछ बाल निकलने ही शुरू हुए थे. उसकी चूत की झांटें छोटे छोटे ब्राउन से रेशमी बाल जैसे थे. फिर मैंने उसकी चूत के पास होकर चूत की एक चुम्मी ली और चूत चूसने लगा. तभी उसने करवट ली, जिससे मैं डर गया और उसके कपड़े ठीक कर दिए.
फिर मैंने बाथरूम में जा कर मुठ मार कर खुद को शांत किया और सो गया.
अगले दिन सुबह जब मैं उठा, तो मेरी बहन कुछ काम कर रही थी और मम्मी नाश्ता बना रही थीं. मुझे उठा हुआ देखकर बहन ने गुड मॉर्निंग कहा और कहा कि मम्मी ने चाय बना दी है, आप पी लो.
मैं चाय पीते हुए अपनी बहन की गांड देख रहा था. थोड़ी देर बाद वो कमरे में झाड़ू लगाने आई. वो झुक कर झाड़ू लगा रही, जिससे उसके गहरे गले वाले कुरते में से उसके हिलते हुए मम्मे दिख रहे थे. मैं अपना लंड सहलाता हुआ उसके बड़े बड़े मम्मों को देख रहा था.
उसने मुझे लंड सहलाते हुए देखा तो शायद वो ये जान चुकी थी कि मैं क्या घूर रहा हूं. इसलिए उसने पूछा- क्या देख रहे हो भैया?
मैं हड़बड़ा कर बोला- कुछ नहीं … बस ऐसे ही ये ये … कुछ नहीं!
बस ये बोल कर मैं वहां से चला गया.
फिर जब रात को जब मैं घर आया, तो उस वक्त करीब रात के 11:30 बज गए थे. पापा के रूम में से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ की आवाज आ रही थी. मैंने की-होल में से झाँक कर देखा तो मेरी मम्मी, पापा के ऊपर चढ़ी हुई थीं और पापा नीचे से लंड पेल रहे थे. मम्मी उछल उछल कर चुदवा रही थीं. मैं उनकी चुदाई देख कर गर्म हो गया और अपना लंड सहलाने लगा. कुछ देर में ही वो दोनों झड़ गए और मम्मी यूं ही निढाल होकर पापा के ऊपर गिर गईं.
बाद में पापा ने कहा कि आज मैं तुम्हें डॉगी स्टाइल में चोदूंगा. मम्मी ‘जी हुजूर …’ कहते हुए डॉगी के पोज में खड़ी हो गईं.
वैसे मैं आप सभी को बता दूं कि मेरी मम्मी की उम्र इस वक्त अभी 51 साल की होंगी और उनका फिगर 38-36-42 का होगा. वे एकदम सफेद दूध जैसी हैं.
उनकी चुदाई देखने के बाद मैं अपने कमरे में पहुंचा. मेरी बहन सो चुकी थी. मैंने दरवाजा बंद किया और मेरी बहन की गांड के ऊपर एक हाथ रख कर सहलाने लगा. बाद में मैंने उसकी सलवार नीचे कर दी और उसकी येलो कलर की पैन्टी भी सरका दी. फिर मैंने उसको सीधा करके एक उंगली उसकी चूत में डाल दी, वो एकदम से जाग गई.
मैंने उसके मुँह पे हाथ रख दिया ताकि वो चिल्ला न सके. मैंने उससे कहा कि मेरी बात सुनो, प्लीज चिल्लाना मत … पहले मेरी पूरी बात सुन लो.
उसने हां में जवाब देते हुए सिर हिलाया तो मैंने अपना हाथ हटा दिया.
मैं चुप रहा तो वो समझ गई कि मैंने सिर्फ उसको न चिल्लाने के लिए यूं ही कहा था कि मेरी बात सुन लो.
उसने अपने कपड़े ठीक से पहने और मुझसे बोली कि तुम्हें शर्म नहीं आती अपनी बहन के साथ ऐसा करते हुए?
मैंने कहा- सॉरी मुझे माफ़ कर दो … अब से ऐसा कुछ नहीं होगा सॉरी.
उसने ओके कहा और वो सोने लगी. लेकिन मैं कहां मानने वाला था. मैं उसके साथ सट कर सोने लगा. मैंने उसे अपने से चिपका कर कर सोने लगा. वो मुझे खुद से दूर करने लगी.
उसने कहा- तुम ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- क्या अब मैं अपनी बहन के साथ सो भी नहीं सकता?
उसे मुझ पर दया आ गई और वो बोली- हां सो जाओ … लेकिन और कुछ मत करना … वरना पापा को बता दूँगी.
मैंने हां कहा और हम सोने लगे.
कुछ देर बाद मुझसे चिपक कर सो गई, तो मेरे लंड ने फिर से मुँह उठाना शुरू कर दिया. मैंने उसके चूचे दबाने के शुरू कर दिए. क्या मस्त बूब्स थे मेरी बहन के … एकदम कड़क छोटे छोटे.
कुछ देर यूं ही उसके मम्मे दबाने के बाद मैंने अपनी जीभ उसके निप्पल पर रख दी. शायद वो जाग चुकी थी, पर उसने की कुछ कहा नहीं. इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई. फिर मैंने उसकी कमीज़ को उतार दिया और ब्रा भी निकाल दी.
तभी मेरी बहन ने अपनी आंखें खोलीं और शरारती मुस्कान देते हुए बोली- तुम नहीं मानने वाले ना.
मैंने हंसते हुए ना में सिर हिला दिया और उसे किस करने लगा.
अब वो भी मेरा साथ देने लगी. क्या मस्त रसीले होंठ थे उसके … एकदम नर्म पिंक से … फूले हुए मोटे मोटे रसभरे होंठ थे.
करीब 5 मिनट के बाद हम दोनों की चुदास जाग गई … तो मैंने उसकी सलवार उतार दी और पैन्टी भी निकाल दी.
क्या लंड उठा देने वाला फिगर था उसका … मैं तो बस देखता ही रह गया. उसका फिगर 28-24-26 का था … वो एकदम स्लिम थी. उसके कपड़े उतारने के बाद मैंने उसको फिर से बेड पर लिटा दिया और उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया. बस पांच मिनट में ही वो झड़ गई.
मैं उसकी चूत को चाटना चालू रखा, तो वो जल्द ही फिर से गर्म हो गई.
इसके बाद मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत पर सैट किया और धक्का दे दिया लेकिन मेरा लंड फिसल गया. यह मेरा पहला अनुभव था. अब मैंने अपने लंड पर थोड़ा थूक लगाया और अपने हाथ से लंड पकड़ कर बहन की चूत के होल पर सैट करके आहिस्ता आहिस्ता दबाया. अभी मेरे लंड का सिर्फ टोपा ही अन्दर गया था कि मेरी बहन कसमसाने लगी. तभी मैंने एक जोर का धक्का दे मारा और मेरा दो इंच लंड चुत के अन्दर घुस गया. उसकी वजह से मेरी बहन की चीख निकल गई. मैंने जल्दी ही मेरे होंठ उसके होंठ पर रख दिए और उसे किस करने लगा ताकि उसकी आवाज बाहर न निकल पाए. कुछ पल बाद उसकी आवाज भी दब गई थी और दर्द भी कम होने लगा था.
कुछ देर रुकने के बाद मैंने फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. पहले आधा, बाद में पूरे का पूरा लौड़ा उसकी चूत में घुस चुका था.
अब वो भी गांड उठाते हुए मेरा साथ दे रही थी. पन्द्रह मिनट की धकापेल चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था, तो मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसके मुँह में देने लगा … लेकिन उसने लंड मुँह में लेने से मना कर दिया और बाथरूम में चली गई. मैंने हाथ से हिला कर अपना काम पूरा किया और उसके पीछे बाथरूम में आ गया. वो फव्वारे के नीचे नंगी नहा रही थी. मैंने पीछे से उसको पकड़ लिया और उसकी गांड में लौड़ा दबाने लगा. उसने अपनी एक टांग कमोड पर रखी और अपने हाथ से मेरा लंड अपनी चूत पर सैट कर लिया. फिर हम दोनों सेक्स करने लगे. बीस मिनट तक चुदाई करने के बाद हम दोनों झड़ गए.
अब हम दोनों ही काफी थक चुके थे इसलिए कमरे में आ गए और बेड पर नंगे ही एक दूसरे से चिपक कर सो गए.
इसके बाद हम दोनों मम्मी पापा की चुदाई देखते और गर्म होकर उनके जैसे ही चुदाई के आसनों का मजा लेते.

मेरी छोटी बहन की चुत की तड़फ

हाय फ्रेंड्स.. मेरा नाम बिक्की अरोड़ा है. मैं पंजाब के पटियाला का रहने वाला हूँ. मैं अन्तर्वासना पर बहुत सारी सेक्स स्टोरी पढ़ चुका हूँ और आज भी नियमित रूप से सेक्स कहानी पढ़ने के लिए सबसे पहले अन्तर्वासना साईट को ही खोलता हूँ. इधर की रंगीन कहानी पढ़ कर आज मेरे मन में एक विचार आया कि क्यों न मैं भी आप सभी अपनी आंखों देखी घटना आप सब को बताऊं.
चूंकि हर चीज़ शेयर करने का एक प्लॅटफॉर्म होता है और जब कोई साईट पर आपकी गोपनीयता बनी रहने की उम्मीद होती है, तो मुझे क्या, किसी को भी अपनी बात खुल कर रखने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए. आज इसी विचार को लेकर मुझे हिम्मत मिली और मैं अपना अनुभव आप सबके साथ शेयर कर रहा हूँ.
यह घटना मेरी छोटी बहन के साथ की है जो अभी पढ़ रही है. यह बात उन दिनों की है जब हमारा पूरा परिवार अपने मामा के घर रहने घूमने गया था. वैसे तो मैं अपनी बहन के बारे में कोई निगेटिव बात दिमाग़ में नहीं लाता था, पर एक घटना ने मुझको झकझोर के रख दिया. यह घटना मेरी आंखों के सामने हुई, पर मैं कुछ ना कर सका बल्कि उसी बहाव में खुद बह गया.
मेरी बहन, जिसका नाम पल्लवी है, को मैं अक्सर देखता था कि वो जब भी सोती थी, तो वो कमरा बंद करके अकेले ही सोती थी. मेरे मन में कुछ कुछ संदेह सा होता था.. क्योंकि वो उम्र के जिस दौर से गुजर रही थी, वो मैं पार कर चुका था.. इसलिए मुझे इस बात का गहरा अनुभव था.
जब हम सभी मामाजी के घर पर थे. तो एक दिन की बात थी, मैं मामा जी के घर की छत पर टहल रहा था. तभी बगल के घर की खिड़की से एक लड़का दिखा. उसका नाम करण था, वो किसी को फ्लाइयिंग किस दे रहा था. मैं कुछ समझ नहीं पाया.
मैंने जब छत से नीचे आके देखा तो वो मेरी बहन के कमरे की ओर देख कर किस कर रहा था. मेरी बहन रूम बंद करके अन्दर थी. मैं फिर से छत पर आ गया.. और उसको छुप कर देखने लगा.
कुछ देर बाद करण ऐसे ही सेक्स करने का इशारा कर रहा था.
मैंने सोचा कि इन लोगों की हरकतों को रंगे हाथ पकड़ा जाए. मैं उस समय तो करण को कुछ नहीं बोल सकता था, क्योंकि इससे मेरी बहन का इज़्ज़त खराब होने का डर था. लेकिन मैं अब उन दोनों पर चुपके से ध्यान रखने लगा. करण मेरे मामाजी के घर भी आता था. मैं इस बात को लेकर उसके साथ कुछ कर भी नहीं सकता था.
मेरी बहन मुझसे छोटी थी और जब तक मैं उसे रंगे हाथ नहीं पकड़ता, तब तक मैं उसको भी कुछ नहीं बोल सकता था. सो मैंने अब उन दोनों पर नजर रखना शुरू कर दिया.
एक दिन मेरी बहन पल्लवी नहा कर आई और कमरे में कपड़े चेंज कर रही थी. तो करण फिर से उसको कुछ इस तरह का इशारा कर रहा था जैसे वो किसी चीज को लाइक कर रहा हो.
मुझको लगा कि अन्दर कमरे में बहुत कुछ गड़बड़ चल रही है. इसी वजह से मुझे ये भी लगने लगा कि करण रात में मेरी सिस्टर के कमरे में आता है.
एक दिन मैंने अपना फोन में हिडन कैमरा ऑन करके उसके कमरे की खूंटी में टांग कर चार्जिंग पिन को लगा दिया. ताकि इस तरह से उसको शक ना हो.
जब मैंने सुबह फोन निकाला तो जो वीडियो उसमें शूट हुआ था, उसको देख करके मैं दंग रह गया. मैं सोच भी नहीं सकता था कि मेरी बहना पल्लवी, जिसको इतने अच्छे संस्कार मिले हों, वो ये सब काम भी कर सकती है.
मुझे उस वीडियो में चल रही क्लिप को देख कर कई दिनों तक ये चिंता बनी रही थी.
दरअसल करण जिस तरह से उसके मुँह में अपना लंड डाले हुए चुसवा रहा था … वो ऐसा लग रहा था मानो पल्लवी कोई पॉर्न स्टार हो. दूसरे सीन में वो लंड चुसवाता हुआ पल्लवी की गांड पर तेज तेज थप्पड़ भी बरसा रहा था, जिससे पल्लवी के चूतड़ एकदम लाल हो गए थे.
मैं ये सब याद कर कर के पागल हो गया. मुझे पल्लवी को लंड चूसते देख कर ये ध्यान ही नहीं रहा था कि यह लड़की मेरी सगी बहन है, हम दोनों एक ही माँ के जाये हैं. नतीजा यह हुआ कि अंत में मैं भी पल्लवी को चोदने का प्रयास करने में जुट गया. मैंने सोचना चालू किया कि ये सब उसके साथ कैसे करूँ.
मैं एक दिन दोपहर में उसके कमरे में गया और अपने मोबाइल में फीड उस लंड चुसाई वाले वीडियो को, उसके रूम के टीवी में कनेक्ट करके प्ले कर दिया.
मेरी भगिनी ने सेक्स वीडियो को देखा तो वो घबरा गई और उसके पास कुछ बोलने कहने को कोई शब्द ही नहीं थे.
अब मुझे मेरी सेक्सी बहन को कुछ बोलने की आवश्यकता ही रह गई नहीं थी. वो मेरे करीब आकर रोने लगी- भैया.. आप किसी को मत बोलना.. आप जो चाहो कर लो, पर इस बात को किसी से मत बोलना.
मेरा गुस्सा उफान पर था. मैंने बहन की गांड पर 5-6 झापड़ जड़ दिए और उसको बोला- अब तू रंडी बन गई है.. तू मुझे भाई मत बोल.
उस दिन तो मैं वहां से चला गया.
दो दिन तक जब भी मेरा मन होता, मैं उस वीडियो को देखने लगता. तीसरे दिन मैंने उससे कहा कि रात में तुम मेरे कमरे में आ जाना.
रात हुई, सब लोग खाना खाकर सोने चले गए. मैं भी अपने कमरे में आ गया. मैंने कमरे के दरवाजे को खुला छोड़ दिया था. करीब 11:30 बजे वो मेरे कमरे में आई और सिसक सिसक के रोने लगी.
मैंने कहा- जो हुआ सो हुआ.. अब चुप हो जाओ.. जब तुमको चुदाई ही करवाना था तो मुझको बोल देती.
इतना कहते हुए मैंने एक ब्लू मूवी चालू कर दी. मैंने टीवी का वॉल्यूम म्यूट कर दिया था. जैसे जैसे ब्लू मूवी की चुदाई आगे बढ़ने लगी, मेरी बहन की कामुकता जागती गई. मैंने उसे देखा तो वो नंगी होने लगी और अपना रंग दिखाने लगी. में लेटा हुआ सब देख रहा था.
वो मेरे करीब आई और चिपकने लगी. मैंने उसको दूर हटाया तो वो मुझको उत्तेजित करने के लिए अपने कपड़े खोलने लगी.
मैं जीवन में पहली बार अपनी बहन की चूचियों को देख रहा था. क्या मस्त चूचियां थीं … एकदम से तनी हुई. मुझे तो पता भी नहीं था कि उसके चूचियों के निप्पल डार्क ब्राउन रंग के हो गए हैं. नीचे देखा तो उसकी चूत में झांटें भी आ गई थीं.
अगले दस मिनट में मेरे सामने एक 18 साल की लड़की पूरी तरह नंगी खड़ी थी. उसका साइज़ तो नहीं बता सकता, पर हां जब वो पीछे घूमी, तो उसकी उठी हुई गांड देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.
अब मैं सोचने लगा कि इसलिए ही करण इसकी गांड पर थप्पड़ बरसा रहा था.
अब उसकी गांड पर थप्पड़ बरसाने की बारी मेरी थी. मैं उसको अपनी गोद में लेकर उसकी गांड को मसलने लगा. उसके मम्मों को मसलने लगा. मैं भूल चुका था कि वो मेरी छोटी बहन है. मैं उसके साथ रंडी जैसे व्यवहार करने लगा.
पहले मैं 20 मिनट तक उसके चूचों को मसलता रहा. जब वो गर्म हो चुकी तो उसने मुझे खड़ा किया और खुद नीचे बैठ कर मेरा पैन्ट खोल कर मेरे लौड़े को, जो 6 इंच से कुछ ज़्यादा ही होगा, उसको निकाल लिया.
मैंने उसको इशारा किया तो वो मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी. मैं उसके माथे को पकड़ के उसके मुँह में अपना लंड पेल रहा था. वाह क्या चूसना सीख गई थी एकदम रंडी जैसे लंड चूस रही थी.
इस वक्त उसके चूचे मेरे हाथों में दबे थे. उसके कसे लेकिन मुलायम मम्मों, जैसे गुब्बारों में पानी भरा हो, का क्या कहना. फिर मैंने उसको घोड़ी बना दिया. पीछे आकर उसकी चुत को चूमना शुरू किया.
उसकी चुत से पानी की धार आ रही थी. मैं उसकी चुत को मस्ती से चूस रहा था.
दस मिनट उसकी चुत को चूसने के बाद मैंने अपनी छोटी बहन की चुत में अपना लंड लगाया और एक ही झटके में पूरा लंड घुसा दिया. उम्म्ह… अहह… हय… याह… उसकी चुत बहुत ही टाइट थी. वो इससे पहले एक दो बार ही चुदी थी. मैं उसकी चुत को करीब 15 मिनट तक चोदता रहा.
वो मेरे लंड की मोटाई को झेल नहीं पा रही थी, जिससे वो हल्के स्वर में चिल्लाए जा रही थी- आह … भैया छोड़ दो … मुझे दर्द हो रहा है … आपका बहुत बड़ा है.
जब भी वो चिल्लाती, मैं उसके मुँह को दबा कर अपनी स्पीड और तेज कर देता था. कुछ देर बाद वो झड़ गई. मगर मैं अभी गरम था. तो मैंने उसकी चुत को चोदने के बाद उसकी गांड मारने का सोचा.
मैंने उसको बेड के किनारे पर घोड़ी बना कर दिया और मैं नीचे खड़ा हो गया. जैसे ही मैंने उसकी गांड में अपना लंड लगाया, वो समझ गई. वो उठ कर बैठ गई और मेरे पैर पकड़ते हुए बोली- भैया, प्लीज़ गांड मत मारो.. बहुत दर्द होता है.. और आपका तो बहुत बड़ा है.
मैंने उसके चूचों को दबाते हुए कहा- रंडी साली.. जब करण तेरी गांड मार रहा था.. तो दर्द नहीं कर रहा था.
वो चुप रह गई.
फिर मैंने उसको घोड़ी बना कर उसकी गांड में लंड पेलना शुरू किया.
अगर अन्तर्वासना के पाठकों को मेरी छोटी बहन की गांड देखना हो तो वे उसे वीडियो पर देख सकते हैं.
उसकी मस्त गांड देख कर आपलोगों को भी उसकी गांड में लंड पेलने का मन करने लगेगा.
अब मैं उसकी गांड को लंड पेल कर बेरहमी से चोद रहा था. वो चिल्ला रही थी, लेकिन मैं बिना परवाह किए, उसकी गांड को चोदे जा रहा था.
थोड़ी देर में मैं झड़ने लगा.. मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके मुँह में पेलने लगा. कुछ देर बाद मैंने सारा माल उसके मुँह में ही निकाल दिया और मैंने उसकी नाक को दबाए रखा क्योंकि मैं चाहता था कि वो मेरे लंड के माल को उगल ना दे. जब उसने मेरे लंड का पूरा पानी पी लिया, तभी मैंने लंड को बाहर निकाला.
अब जब भी मेरा सेक्स करने का मन होता है तो मैं अपनी बहन को चोद लेता हूँ. अब वो रोती भी नहीं है, मजे से पूरी गांड उठा कर गांड और चूत मरवाती है.
आप लोग मेल करके बताएं कि आपको मेरी बहन की गांड चूत चुदाई स्टोरी कैसी लगी. यह मेरा पहली कहानी थी.


Wednesday, November 1, 2017

चुदाई की आग दोनों तरफ लगी थी


Real xxx Story: Chudai Ki Aag Dono Taraf Lagi Thi

आप सभी पाठकों को मेरा नमस्कार!
मेरा नाम सैम चौहान है, मैं चंडीगढ़ में रहता हूँ. यह मेरा पहला अनुभव है कि मैं अपनी जीवन की रीयल xxx कहानी लेकर इस साइट के मध्यम से आप सब के सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ.
मैं साँवले रंग का हूँ, बॉडी स्लिम और कद मध्यम है, जिम जाने की वजह से शरीर ठीक लगता है. कभी मैं इतना शर्मीला था कि स्कूल टाइम में लड़कियों के छूने से ही रोने लग जाता था पर टाइम ने मुझे भी बदल दिया. अब तो आलम यह है कि लड़कियाँ आँखों को देखकर ही अंदाज़ा लगा लेती हैं कि मेरी नज़र कहाँ पर है और तब तक नहीं हटती जब तक लड़की का पूरा फिगर नाप ना लूँ.
वैसे भगवान ने भी चूत और लंड जैसी अनमोल और मस्त चीज़ बनाई है, पर कई लोग चूत की कद्र ही नहीं करते हैं.
पर कहते हैं ना कि चुदाई की आग लगी हो तो चूत अपने लिए लंड का इंतज़ाम खुद ही कर लेती है और ये सब बहुत ही आसान है आज के वक्त में एक चूत के लिए. सिर्फ़ दिक्कत अगर होती है भी तो सिर्फ़ प्राइवेसी और सेक्यूरिटी को लेकर ही होती है वरना कोई परेशानी नहीं होती.
खैर अपने जीवन की पहली चुदाई के बारे में मैं आगे ज़रूर लिखूंगा और विस्तार से लिखूंगा पर अभी अपनी एक खास भाभी और मेरे बीच हुई चुदाई के बारे में मैं आप सबको बताना चाहता हूँ.
बात उस समय की है जब मैं एक प्राइवेट जॉब करता था एक ब्रांडेड शोरूम में जहाँ पर कॉसमेटिक के चाहे लॉरेल, लैक्मे, पॉंड्स, हर तरह का ब्रांड था.
मैंने अपनी छवि हर जगह साफ सुथरी रखी है अब तक कोई मुझे देख कर यह नहीं कह सकता कि मैंने इस तरह की हरकत कभी की भी होगी.
मैं एक पी.जी. था और वहाँ पड़ोस में बहुत सी आंटी और भाभियाँ थी, मेरे काम का सभी को पता था जिसकी वजह से औरतें मुझसे कभी ना कभी कुछ ना कुछ सामान मँगवाती रहती थी, तो हर किसी से बात होती रहती थी और हर कोई मुझे सीधा सा लड़का समझती थी. पर किसी भाभी को छेड़ने या चोदने के बारे में सोचने से इसलिए भी एक डर मन में होता था कि अगर पड़ोस में शोर मच गया तब तो सैम तू तो गया फिर तो जो तेरी गांड कुटाई होगी वो अलग और जो बेइज्जती होगी वो अलग!
इसलिए यार, माल को दूर से देखो और अपने हाथ का इस्तेमाल करो, मैं इसी सिद्धान्त पर टिका रहा.
पर हमारे पड़ोस में एक भाभी थी बबिता, वो बिहार की थी और उसके परिवार में उसकी दो साल की लड़की और उसका पति और ससुर रहते थे. उसका पति अरोमा में शेफ था कन्फेक्शनरी में था. चलो ये तो इस भाभी की परिवार की डीटेल हो गई. वो भाभी 25 साल की थी पर जो इसमें असली बात थी कि वो भाभी बिल्कुल स्लिम थी. उसके फिगर में अगर सबसे मस्त चीज़ थी तो वो उसके बूब्स थे करीब 36 साइज़ था और उसकी गांड बिल्कुल गोल मस्त लगती थी, उसे देखकर ही लंड सलामी देने लग जाता था. उसके बूब्स की बात तो पड़ोस में सभी आंटी करती थी क्योंकि ये बातें एक आध बार मैंने सुनी थी.
वैसे उसके घर वालों से मेरी अच्छी बात हुआ करती थी और उसके पति से भी अच्छी बनती थी.
मुझे अच्छे से याद है एक दिन वो मौका आ गया जिस दिन की मैं तलाश किया करता था कि खुद ऐसा मौका मेरे हाथ लगे जो मेरे लिए सेफ हो और इज्जत भी बनी रहे.
एक दिन अपने बरामदे में अपनी चारपाई पर लेटा हुआ था और उसी पर 2 आंटी भी बैठी थी और मुझसे कुछ बातें कर रही थी. इतने में बबिता भाभी भी आ गई और चारपाई पर बैठने ही लगी थी कि मैंने थोड़ी सी हिम्मत कर के अपना पैर वहाँ रख दिया जहाँ वो बैठने वाली थी और हुआ भी वही कि वो पैर के ऊपर ही बैठ गई.. भगवान का शुक्र ये रहा ही उसने कुछ कहा नहीं नहीं ही उस पैर के ऊपर से उठी.
बस गांड भी फट रही थी और रही सही हिम्मत करके मैंने अपने पैर का अंगूठा और उंगलियाँ हिलानी शुरू कर दी और उसकी चूत की गर्मी पैर पर महसूस कर रहा था. पर बबिता ना ही हिली, ना ही वहाँ से उठी और मैं अपने पैर का अंगूठा चलाता रहा और उसकी चूत को महसूस करने की कोशिश करता रहा.
इतने में बबिता मेरे तरफ देख कर बोली- अच्छा सैम, मेरे लिए भी एक लिपस्टिक ला देना, पैसे मैं अभी दे देती हूँ.
उसके बोलने से एकदम मैं डर तो गया था क्योंकि मैं तो उसकी चूत को अपने अंगूठे से ढूँढने में लगा हुआ था. मैंने थोड़ा नॉर्मल होते हुए जवाब दिया- ठीक है जी, मैं ला दूँगा!
सभी बात करने लगी- सैम, तेरे काम करने का थोड़ा हम लोगों को भी बेनेफिट हो जाता है, डिस्काउंट जो मिल जाता है.
मैंने सभी का धन्यवाद स्वीकार किया और कहा- यह क्या बड़ी बात है, अब पड़ोसी होने के नाते इतना तो कर सकता हूँ.
सभी आंटी खड़ी हो गई और जाने लगी तो बबिता भी उनसे पहले खड़ी हो गई और मैंने अपना पैर पीछे कर लिया. बबिता घर में से पैसे ले कर आई और मुझे दे कर बोली- ला देना!
मैंने पैसे लिए और बोला- जो चाहिए मैं दे दूँगा आपको!
अगले दिन मैं लिपस्टिक ले आया और उसे देकर उसके पैसे भी वापिस कर दिए उसने पूछा- ये पैसे वापिस क्यों?
तो मैंने जवाब दिया- मुझे ये स्कीम में मिल गई तो इसके पैसे कैसे ले सकता हूँ.
भाभी ने स्माइल दी और मुझे थैंक यू बोल कर मुझे पैसे लेने पर ज़ोर देने लगी.
मैंने भी मौका ना गँवाते हुए कहा- चलिए आप कभी मेरे काम आ जाना, सिंपल!
और हंस दिया.
बस अब तो कभी नल पर पानी भरते हुए तो कभी आमने सामने से आते जाते उसे टक्कर मार देना, कभी उसे छू लेना तो कभी उसके बूब्स पर किसी ना किसी बहाने से हाथ लगा देना, ऐसी हरकतें करने लगा.
और बस इस मौके की तलाश में था कि इसे अब किसी भी हालत में इसकी चूत के पानी से ही अपने लंड को हरा करूँगा. और कब तक अपने लंड के अरमानों पर पानी डालता रहूँगा इसलिए अब तो रात को अपने कमरे के बजाए बाहर सोने लगा था.
वो दिन भी इतना करीब होगा उम्मीद नहीं थी.
रात को मैं अपने बिस्तर पर लेटा ही था, अब तो नींद भी आँखों में आती नहीं थी और बस इस इंतज़ार में रहता था कि
चूत का दरिया हमें भी अब तो नसीब हो,
बहुत दिन हुए सूखे रेगिस्तान को,
किश्ती बना कर लंड की
हमें भी आता है तैराना बखूबी..
अब तो तेरे चूत के पानी से
मेरा ये लंड आबाद हो…
खैर वही हुआ जिसका इतने दिन से इंतज़ार था मुझे, बबिता भाभी करीब 11 बजे अपने कमरे से निकली और नल पर पानी लेने के लिए आई और पानी भर कर मुझे वहीं दूर से खड़ी हो कर मेरी तरफ़ देखने लगी पर मैं इतनी दूरी से अंधेरे की वजह से उसे साफ दिखाई नहीं दिया कि मैं जाग रहा हूँ या सो गया.
उसने पानी लिया और अपने कमरे में चली गई.
अब तो जैसे खड़े लंड पर किसी ने डंडा मार दिया, वो हाल था. यार जब पानी ही लेना था तो मुझे क्यों देख रही थी?
साली औरत का भी पता नहीं होता कि चाहती क्या है?
इतने में वो फिर से कमरे से बाहर आई और जैसे मैंने चादर से चेहरा ढक लिया, सिर्फ़ आँखों से चादर हटी हुई, ऐसे पड़ा रहा.
वो मेरे धीरे धीरे मेरी चारपाई के नज़दीक आ गई और मैंने अपनी आँखें बंद कर ली.
इतने में बबिता भाभी बोली- सैम हेलो सैम, सो गया क्या?
मैं बिल्कुल शांत पड़ा रहा.
फिर उसने मेरे मुँह से चादर हटा कर मेरे मुँह पर अपना हाथ फेरा और फिर मुझे बुलाने लगी, बोलने लगी- सैम, क्या बात इतनी जल्दी तो कभी नहीं सोता था? आज कैसे सो गया!
इतना बोल कर जाने के लिए मुड़ी ही थी कि मैंने मौके को देखते ही उसका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया.
एकदम इस तरह से उसके हाथ खींचने से वो सम्भल नहीं पाई और मेरे ऊपर ही गिर गई.
अब तो वही था कि अंधे को क्या चाहिए दो आँखें… और मेरे लंड को चूत… जो शायद मुझे मिलने वाली थी पर अब भी एक तरफ इतनी हिम्मत तो कर दी थी पर खुले में इतनी रात को
एक भाभी मेरे ऊपर गिरी हुई और मैंने उसे पकड़ा हुआ था, अगर कोई देख ले तो शायद उस औरत को तो कोई बाद में पूछता सबसे पहले मेरी पिटाई करता और बात पड़ोस की होने की वजह से पिटाई भी ज़्यादा ही होती.
मेरे दोस्त, पर चूत मारनी है तो इतना रिस्क लेना ही पड़ेगा, यही सोच कर मैं बस उसे पकड़े हुए था.
वो बोली- क्या बात, तू तो सो गया था? फिर जाग कैसे गया?
मैंने भी बोल दिया- क्या करूं, जब तक तू सामने होती है आँखों में नींद आती ही नहीं. जब तू पानी भर रही थी तब से देख रहा हूँ कि मुझे वहाँ से मेरी तरफ ही देख रही थी, क्या बात है? कुछ गुम हो गया है क्या?
‘अच्छा तो अब आप से सीधा तू पर? क्या बात है सैम?’ उसने पूछा मुझसे और मैंने बस उसकी लबों पर उंगली रखते हुए चुप होने के लिए इशारा किया और बस उसके होंठों को अपने होंठों में भर लिया.
अब मेरा हाथ सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी गर्दन पर था एक तरह से वो आज़ाद थी और मेरे ऊपर गिरी होने की वजह से कभी भी जा सकती थी पर वो तो जैसे चाहती ही वही थी.
मैं करीब एक मिनट तक उसके होंठों को चूसता रहा और उसकी तरफ से भी कोई आपत्ति नहीं थी, कभी उसके मुँह के अंदर अपनी जीभ डाल देता तो कभी उसकी जीभ चूसने लग जाता!
इतने में उसने मुझे अपने से छुड़ाया और एकदम से हाँफती हुई बोली- सांस भी लेने देगा कमीने?
और ये सुनकर तो मेरे चेहरे पर स्माइल आ गई और वो भी हंस पड़ी और बोलने लगी- मुझे तो पता था कि तू मुझ पर लाइन मार रहा है, जनाब में आज हिम्मत हुई?
मैंने भी सीधा सा जवाब दिया- अगर लाइन टेढ़ी हो जाती तो मेरी गांड फाड़ देता ये मोहल्ला और उसको फाड़ने में सबसे आगे तुम ही होती भाभी!
कहानी जारी रहेगी.
इतना कह कर हम दोनों हंसने लगे और फिर से मैंने उसे अपने से चिपका लिया और उसके बूब्स पकड़ लिए और बोल उठा- भाभी, आपके मोम्मे तो सभी आंटियों में फेमस हैं और इतने दिन से इसे सिर्फ़ देखकर ही काम चला रहा था.
वो बोली- बड़ा पता है तुझे हम औरतों की बात का?
‘बस भाभी सुन ही लेता हूँ आप लोगों की बातें भी कभी कभी जब आप लोग मेरे बरामदे में बैठी एक दूसरी से बात करती हो तो आप सबको लगता है कि मैं सो रहा हूँ पर मैं आप सब की बात सुनता हूँ उस वक़्त!’
भाभी बोली- हम्म… पूरी नज़र रखता है सब पर और हम सब तुझे तो इतना शरीफ समझी थी कि शायद ही ऐसा कोई हो.
मैं बोला- क्या भाभी, चूत और लंड जब जवान हो जाए तो कोई शरीफ नहीं रहता.
उस वक़्त तो मैं इतना खुल गया था कि भाभी से ऐसी xxx बात खुलेआम करने लगा और वो मेरी तरफ देखे जा रही थी.
फिर तो बस सीधा उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत में उंगली लगा दी तब उस का ध्यान टूटा और वो उछल पड़ी- क्या कर रहे हो? कोई आ जाएगा. तेरे साथ मैं भी बदनाम हो गई तो?
‘ह्म्म, ये भी है चलो फिर थोड़ा सा नाम कमा लें?’
वो बोली- क्या मतलब?
‘तुम्हारी चूत की गरमी को महसूस करके!’
इतना सुनते ही उसने मुझे चूम लिया और कहने लगी- अगर कोई आ गया फिर?
मैंने कहा- आएगा कैसे? तेरा पति तो जॉब पर है नाइट शिफ्ट पर और कोई है नहीं जो इस वक्त जाग जाए तो और कौन आएगा?
‘ओके, पर यहाँ नहीं!’ वो बोली.
बस फिर क्या था, मैं उठा और उसे कहा- चारपाई पकड़ और किचन में चल!
और फिर हम दोनों चारपाई किचन में ले गये. चूँकि किचन मेरे कमरे में ना होकर बाहर बरामदे की तरफ है तो हम दोनों किचन में बिना लाइट जलाए चले गये. अंधेरा इतना था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था बस अंदर जाकर दरवाजा बंद किया और बस दोनों ने एक दूसरे को चूमना शुरू कर दिया, होंठों में होंठ… कभी वो मेरी ज़ुबान को चूसती तो कभी मैं!
करीब करीब उसका दम घुटने लगा क्योंकि मैं तो उसके होंठों को छोड़ ही नहीं रहा था, चूसे जा रहा था.
उसने किसी तरह मुझे अलग किया और बोलने लगी- आराम से करो, साँस तो लेने दो!
‘ओके मेरी जान, सॉरी अब ऐसा नहीं करूँगा.’ और मैंने लाइट जला ली क्योंकि इससे पहले जितनी बार लड़की चोदी है रोशनी में ही चोदी. अंधेरे में मुझे चोदने का मज़ा नहीं आता.
पर उसने लाइट बंद करवा दी, बोलने लगी- लाइट देखकर कोई ना कोई इधर आ जाएगा, लाइट बंद रहने दे.
मैंने तो अंधेरे में ही सारे कपड़े निकाल दिए, सिर्फ़ उसकी ब्रा और पेटिकोट ही बचा था, और फिर तो बस जैसे कोई साँप चंदन के पेड़ से लिपट जाता है, बिल्कुल वैसे ही लिपट गया और हम दोनों की चूमाचाटी शुरू हो गई, मैंने अपना लंड चूसने के लिए बोला तो उसने बिना कुछ बोले सीधा मेरा लंड टटोला, मुँह में भर लिया और चूसने लग गई. फिर तो बस उसके गर्म गर्म मुँह को एक चूत की तरह चोदने में लग गया. पर जल्दी ही अपना लंड निकाल कर उसकी चूत को ढूँढने लग गया कि अगर इसके मुँह में ही लगा रहा तो इसी में मेरा माल निकल जाएगा और फिर दुबारा मौक़ा कब लगेगा.
जैसे ही अपना लंड मैंने उसकी चूत पर लगाया, उसने पैर खोल दिए और मेरे लंड के लिए रास्ता दे दिया ताकि बिना देर किए अपना लंड उसकी गर्म भट्टी जैसी चूत में पेल दूं.
थोड़ा मज़ा लेने के लिए मैं अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लग गया और वो अपना पैर इधर उधर करने लगी. जब उस लगा कि मैं लंड उसकी चूत में नहीं डाल रहा हूँ और बस उसके साथ खेल रहा हूँ, तब वो बोली- सैम, बस ज़्यादा मत खेल, डाल जल्दी से, पेल दे जल्दी! देख कितनी गीली हो गई है.
उसने मेरा लंड पकड़ लिया और खुद अपनी चूत ऊपर कर के उसमें लंड को डालने के लिए करने लगी. बस जैसे मुझे लगा कि लंड उसकी चूत पर उसने फिट सा किया, मैंने उसी वक्त एक ज़ोर का झटका मारा.
उस झटके के लिए शायद वो तैयार नहीं थी और उसकी हल्की सी चीख निकलते निकलते रह गई, मैं रुक गया, मैंने पूछा- क्या हुआ?
बता दूँ कि मेरा लंड करीब 3 इंच मोटा है, 6 इंच लम्बा है और शायद लंड की मोटाई की वजह से ही उसकी चीख निकल गई थी. ऐसा नहीं था कि उसकी चूत बिल्कुल टाइट थी या कुंवारी थी.
वो बोली- मोटा है तेरा हथियार!
चलो, यह जानकर इसके मुँह से अच्छा लगा.
फिर ज्यादा देर न करते हुए मैंने थोड़ा और ज़ोर लगा कर लंड को बिल्कुल अंदर तक फिट कर दिया और वो बस अपने मुझे ज़ोर से पकड़े हुए थी जैसे कि उसे दर्द हुआ हो. पर चूत का दर्द कब पलक झपकते मज़े में बदल जाता है, ये तो हर वो चूत वाली आंटी या भाभी जानती ही है जो लंड के अच्छे से मजे ले चुकी हैं. लंड के अंदर तक चले जाने पर फिर रुकने का या कोई बात करने का किस के पास वक़्त होता है यार फिर तो सिर्फ एक ही बात निकलती है:
दिल से दुआ और लंड से तेरी चूत जो मिले…
फिर तो जान मेरी सिर्फ एक ही आवाज़ सुनने को मिले…
चर्र चर्र चर्र… मेरी चारपाई बोले और
चूत तेरी मेरे लंड पर अपना रस इस कदर उड़ेले,
लिपट कर मुझसे तू मेरे लंड पर खेले
छप छप छप की आवाज़ से आजा तेरी चूत की हर अंगड़ाई को तोड़े!
उस वक़्त कोई आवाज़ नहीं थी सिर्फ मेरी चारपाई के चर्र चर्र और मेरे लंड के उसकी चूत पर बजती मेरी थाप के अलावा अगर इसके बीच कोई आवाज़ थी तो उसकी मीठी मीठी सिसकारने की आवाज़ जो ये बताने के लिए काफी थी कि जितनी गर्मी से मेरा लंड उसकी चूत में पिघलने से सख्त पे सख्त होता चला जा रहा था उतना ही वो भी मेरे लंड के झटकों को अंदर तक महसूस करके बहुत खुश थी.
उस अँधेरे में अगर मैं कुछ मिस कर रहा था तो उसके चेहरे के भाव जिसे न तो वो देख पा रही थी न ही मैं!
उसके हाथ मेरी पीठ पर इस तरह मुझको दबोचे हुए थे कि बस मुझे पूरा का पूरा वो अपने अंदर खींच लेना चाहती हो और मैं भी उसके कंधों को पकड़ कर धक्कों पर धक्के लगा रहा था. कभी लंड की स्पीड को कम कर देता तो कभी एकदम तेज़ जिससे उसके और मेरे चुदाई की एक्साईटमेन्ट ख़त्म न हो और बढ़ जाये.
उसे भी ये चीज़ पसंद आ रही थी इसीलिए वो अपनी टांगों को बिल्कुल मेरी पीठ पर घेर कर खुद को और मेरे लंड पर दबाने लगी. हम दोनों पसीने में पूरी तरह भीग चुके थे और किसी भी वक़्त मेरा माल निकल सकता था और जिस तरह से वो मुझे अपने अंदर खींच रही थी और उसकी चूत को अपनी टांगों को टाइट कर रही थी, उसकी चूत भी किसी भी वक़्त अपने लावे को फेंक सकती थी.
मैंने कहा- बबिता, मेरा माल निकलने वाला है.
और उसने मुझे और ज़ोर से पकड़ लिया, मेरे लंड की स्पीड बहुत तेज़ हो चुकी थी और उसकी टांगों को उसके चेहरे तक मोड़ चुका था मैं!
चूत चोदने के चक्कर में मैं यह भूल गया था कि उसे दर्द भी हो सकता है और मैंने उसकी चूत में ही अपना माल छोड़ दिया और कुछ ही पल में हम दोनों शांत हो गए.
उस वक़्त की शांति से ऐसा लग रहा था जैसे कोई तूफान सा थम गया हो.
उसकी सांसें और मेरी सांसें बहुत तेज़ थी और फिर थोड़ी देर मैंने पूछा- कैसा लगा भाभी?
उसने मुझे अपने होंठों से चिपका लिया और चूमने लगी. शायद वो इस तरह से मुझे शुक्रिया कहना चाहती थी पर मैंने पूछा- तुम्हारा कब निकला?
कहने लगी- तुझसे बस थोड़ी सी पहले मेरा हो चुका था, तेरा नहीं हुआ था इसलिए लेती रही लंड को अंदर… पर सच बोलूँ तो मजा आया बहुत और मेरे कान के पास आकर मुझे ‘आई लव यू’ बोला और कहने लगी- आज असली मजा मिला है. इनके पिता की वजह से टाइम ही नहीं मिलता और न ही अब इतना ये मुझ पर ध्यान देते हैं पर एक लम्बे वक़्त के बाद ऐसा मजा मिल पाया.
‘अच्छा ये बता कि मैं कैसी लगी तुझे? और सच बोलना मुझसे सैम.’
मैंने जवाब दिया- मेरे लंड पेलने के अंदाज़ से तो तुम्हें जवाब मिल जाना चाहिए था. क्या अब भी जवाब की जरूरत है? अगर है तो बोलो?
इतना सुनते ही वो मेरे सीने से चिपक गई और कुछ देर बाद हम दोनों किचन से बाहर आ गए.
दोस्तो, इसके बाद कई बार जैसे मौका मिलता हम दोनों चारपाई को किचन में ले जाते और अपनी चुदाई की आग को ठंडी करते, मजे करते!
भाभी तो थी और गर्लफ्रेंड भी, तो स्वाद भी मौके मौके पर चेंज होता रहता था.
मेरी रीयल xxx कहानी में अगर कोई कमी रह गई तो प्लीज मुझे बताईयेगा क्यूंकि मैं कोई प्रोफेशनल राईटर नहीं हूँ.
अपने जवाब आप लोग मुझे इस पर मेल कर सकते हैं.