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Sunday, December 23, 2018

दोस्त की बहन की टाइट चूत

hindi sex stories मेरा नाम संजय है मैं फरीदाबाद का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 30 वर्ष है। मैं अपने पिताजी के साथ ही काम संभालता हूं। मैंने अपने पिताजी का बिजनेस काफी समय पहले से ही करना शुरू कर दिया था और उनके साथ ही मैं काफी समय से काम कर रहा हूं इसीलिए अब मैं काफी हद तक काम सीख चुका हूं। उनकी बाजार में कॉस्मेटिक सामान की दुकान है और हमारी काफी बड़ी दुकान है। उसमें हम लोग महिलाओं के कपड़े भी रखते हैं और हमारी दुकान बहुत अच्छे से चल रही है। हमारी दुकान पर कई महिलाएं भी आती हैं जो हमसे कपड़े लेकर जाती हैं। हम लोग महिलाओं का सारा सामान अपनी दुकान पर रखते हैं और कॉस्मेटिक्स का भी हमारे पास समान होता है। मेरे पिताजी भी मेरी बहन के लिए रिश्ता ढूंढ रहे थे और वह मुझसे कहने लगे कि तुम्हारी बहन के लिए एक रिश्ता आया है। उन्होंने मुझे उस लड़के के बारे में जानकारी दी और कहा कि लड़का बहुत ही अच्छे घर से है, एक बार हम लोग मीना से इस बारे में बात कर लेंगे। मेरी और मेरी बहन की बहुत अच्छी बातचीत है, हम दोनों की आपस में बहुत ज्यादा बनती है इसीलिए मैंने जब मीना से इस बारे में बात की तो मीना कहने लगी कि यदि पिता जी मेरी शादी की बात कर रहे हैं तो मैं भी शादी के लिए तैयार हूं। वह शादी के लिए तैयार थी।
मैंने इस बारे में अपने पिता जी से भी बात की तो वह कहने लगे कि हम लोग मीना की शादी जल्दी ही करवा देंगे मीना मुझसे दो साल छोटी है।  उसके लिये रिश्ता भी बहुत अच्छा था इसलिए पिताजी ने मीना की सगाई करवादी। उसके बाद शादी की भी तैयारियां होने लगी, मैंने भी अपने सारे दोस्तों को अपनी बहन की शादी में बुलाया था, मैं अपने दोस्तों से काफी समय बाद मिला था इसलिए उनसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा। जब मैं उनसे मिला तो वह लोग मुझे कह रहे थे कि तुम तो अपने काम में ही बिजी हो और हमसे मिलते भी नहीं हो, मैंने उन्हें कहा कि मुझे बिल्कुल भी वक्त नहीं मिल पाता इसलिए मैं किसी से भी नहीं मिल पाता हूं। मेरे सारे दोस्त कुछ ना कुछ काम कर रहे हैं कोई अपना ही काम कर रहा है और कोई जॉब कर रहा है। उनमें से कइयों की शादी हो चुकी है।
मेरा बचपन का दोस्त राकेश भी मेरे घर पर आया हुआ था और वह कह रहा था कि तुम अब मुझसे भी फोन पर बात नहीं करते हो, ना ही मुझ से मिलते हो। मैंने उसे कहा कि पिताजी के साथ ही काम पर रहता हूं इस वजह से ज्यादा वक्त नहीं मिल पाता। राकेश और मेरी दोस्ती बहुत पुरानी है इसलिए उसके सारे घर वाले मुझे पहचानते हैं और मेरे घर पर भी उसका आना जाना रहता है। राकेश मुझे कहने लगा मेरे घर वालों ने भी मेरे लिए लड़की पसंद की है और तुम्हें मेरी सगाई में आना है। मैंने उसे कहा कि ठीक है मैं तुम्हारी सगाई मैं आऊंगा। मेरी बहन की शादी भी बड़े धूमधाम से हुई और मैं भी अपने दोस्तों के साथ समय बिता पाया था। मेरी बहन की भी शादी हो चुकी थी। मेरी बहन की शादी के कुछ समय बाद राकेश का मुझे फोन आया और कहने लगा कि मेरी सगाई कुछ दिनों बाद है, तुम्हें मेरे घर पर आना है और जब मैं राकेश की सगाई में गया तो मैं उसके घर वालों से भी मिला। उसके घर में उसके माता पिता है, उसके पिताजी सरकारी विभाग में नौकरी करते हैं और उसकी मां घर संभालती है। उसकी बहन का नाम कोमल है और वह कॉलेज में पढ़ती है। कोमल का व्यवहार भी बहुत अच्छा है और वह भी बात करने में बहुत ही अच्छी है। जब मैं राकेश की सगाई में गया तो राकेश मुझे मिला और कहने लगा तुमने बहुत अच्छा किया जो तुम मेरी सगाई में आ गए, मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था। जब राकेश की सगाई हो गई तो उसके बाद मैं अपने काम पर लगा था और मेरी उस बीच में राकेश से बात होती रहती थी। कुछ समय बाद ही राकेश की शादी थी इसलिए राकेश ने मुझे फोन किया और कहा कि मुझे शादी की तैयारी करनी है तो मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता पड़ेगी। मैंने उसे कहा कि ठीक है तुम्हे जब भी मेरी मदद की आवश्यकता हो तो तुम मुझे बता देना। मैं उसकी पत्नी से भी मिल चुका था इसलिए उसकी पत्नी को जो भी सामान चाहिए था वह हमारी दुकान से ही ले गई लेकिन राकेश को मैंने अपने एक दोस्त की शॉप से सामान दिलवाया और उसे बहुत अच्छा लगा क्योंकि मैंने उसे बहुत अच्छे दामों पर वह सामान दिलवा दिया था।
राकेश की शादी के सिलसिले में मैं कुछ दिन उसके घर पर ही रहा और जब मैं उसके घर पर था तो हम लोगों ने काफी काम किया। मेरे और दोस्त भी राकेश के घर पर ही थे और उस बहाने हम लोगों का मिलना भी हो गया। राकेश की शादी की तैयारियां बहुत अच्छे से हम लोगों ने करी और जब उसकी शादी थी तो उसके सारे रिश्तेदार आए हुए थे। सब लोग बहुत ही मस्ती कर रहे थे, उस बीच कोमल और मैं भी साथ में ही बैठे हुए थे। मैं कोमल से पूछ रहा था कि तुम्हारा कॉलेज कैसा चल रहा है, कोमल मुझे कहने लगी कि मेरा कॉलेज बहुत अच्छा चल रहा है। मैंने उसे पूछा कि तुम आगे क्या करने वाली हो, वह कहने लगी कि मैं आगे फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करूंगी। कोमल मुझसे बहुत अच्छे से बात करती है, मैं कोमल के साथ फ्रेंड तरीके से बात करता हूं इसीलिए मुझे कोमल के साथ बात करना भी अच्छा लगता है। कोमल मुझसे पूछने लगी कि आपकी बहन की भी शादी हो चुकी है, मैंने उसे कहा कि हां मेरी बहन की शादी हो चुकी है, राकेश भी मेरी बहन की शादी में आया था। कोमल उसे कहने लगी हां भैया ने मुझे उस बारे में बताया था। कोमल मुझसे पूछने लगी कि आप कब शादी करने वाले हैं, मैंने उसे कहा कि मैं अभी कुछ समय बाद शादी करूंगा, मेरे पिताजी मेरे लिए लड़की देख रहे हैं लेकिन मुझे अभी तक कोई लड़की पसंद नहीं आई इसलिए मैंने अभी तक शादी नहीं की।
मैं सोच रहा हूं कि मैं शादी कर लूं। कोमल कहने लगी चिंता मत कीजिये आपकी भी शादी हो जाएगी। मैंने उसे कहा लेकिन मुझे अभी तक कोई अच्छी लड़की नहीं मिली है, कोमल मुझसे पूछने लगी कि आप किस प्रकार की लड़की ढूंढ रहे हैं। मैंने उसे कहा कि मैं पहले कुछ समय लड़की के साथ समय बताना चाहता हूं ताकि मैं उसे समझ पाऊ। कोमल मुझे कहने लगी कि मेरी भी कुछ सहेलियां है यदि आप मुझे कह दो मैं उनसे आप के लिए बात करती हूं। मुझे कोमल अब अपनी सहेलियों की फोटो दिखा रही थी और मैं उसके साथ ही बैठा हुआ था। मुझे उससे बात करना बहुत अच्छा लग रहा था मुझे पता ही नहीं चला कि कब समय बीत गया,  सब लोग अपना एंजॉयमेंट कर रहे थे। राकेश भी अपने सारे रिश्तेदारों से मिल रहा था इसलिए वह बिजी था। मैं कमल के साथ ही बैठा हुआ था,  मैंने कोमल से कहा ठीक है यदि तुम्हारी कोई अच्छी दोस्त हो तो तुम मुझे उसकी फोटो भेज देना। कोमल मुझे कहने लगी ठीक है मैं आपको अपनी फ्रेंड की फोटो भेज दूंगी। कोमल ने मुझसे मेरा नंबर ले लिया और मैंने कोमल का नंबर सेव कर लिया। कोमल ने मुझे कुछ लड़कियों की फोटो भी भेजी और हम दोनों ही साथ में बैठकर बात कर रहे थे।मैं कोमल के साथ ही बैठा हुआ था हम दोनों बात कर रहे थे। वह मेरा फोन देखने लगी है और जब उसने मेरा फोन देखा तो मेरे फोन के अंदर पोर्न मूवी थी और उस में बहुत ही गंदी तस्वीरें थी। वह मुझे कहने लगी कि क्या आप इस प्रकार की मूवी देखते हैं मैंने उसे कहा कि हां मुझे ऐसे मूवी देखने का बहुत शौक है उसे भी शायद मुझसे अपनी चूत माराने का मन था इसलिए वह मुझसे यह सब चीजें पूछ रही थी। वह मुझे कहने लगी कि हम दोनों कहीं अलग जाकर बैठते हैं वह मुझे अपने कमरे में ले गई और उसने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। मैं और कोमल अब एक ही कमरे में कोमल ने मेरी पैंट से मेरे लंड को बाहर निकाला तो वह उसे अपने हाथों से हिलाने लगी और बड़ी देर तक वह मेरे लंड को हिलाती रही। उसके बाद उसने अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को ले लिया और चूसने लगी।
मुझे बहुत मजा आ रहा था जब वह मेरे लंड को सकिंग कर रही थी। उसके बाद उसने जब अपने कपड़े खोले तो मुझे बड़ा अच्छा लगता उसका यौवन देख कर मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। मैंने भी उसे बिस्तर पर लेटा दिया और उसके स्तनों क चूसने लगा। मैंने उसके स्तनों को बहुत अच्छे से चूसा जिससे कि उसके स्तनों से दूध बाहर निकलने लगा था। मैंने उसे अपने नीचे लेटा दिया और उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए उसकी चिकनी और मुलायम योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर गया तो वह चिल्लाने लगी और मुझे बहुत मजा आने लगा। मैं उसे बड़ी तेज तेज धक्के मार रहा था वह पूरे मूड में आ रही थी और अपने मुंह से सिसकिया ले रही थी। उसकी योनि बहुत ज्यादा टाइट थी और मैं उसे इतनी तेज झटके मारता की उसकी योनि से खून बाहर की तरफ निकलने लगा था और मेरा लंड भी पूरी तरीके से छिल चुका था लेकिन मैंने उसे धक्के मारना जारी रखा। वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर रही थी मैं भी उसे बड़ी तेजी से चोद रहा था। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया और उसे बड़ी तीव्र गति से धक्के दिए जिससे कि उसका पूरा शरीर गर्म होने लगा वह चिल्लाने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा था। काफी समय तक मैंने ऐसा ही किया जब वह झड़ गई तो उसके कुछ देर बाद ही मेरा वीर्य भी उसकी योनि के अंदर गिर गया अब शांत हो चुकी थी। वह मुझे कहने लगी आपने आज मेरी इच्छा पूरी कर दी मुझे बहुत अच्छा लगा मुझे आपसे अपनी चूत मरवाने का मन पहले से ही था।

अठरह बरस की शोला जवानी



सभी अन्तर्वासना की सेक्स स्टोरी पढ़ने वालों को मेरा प्रणाम. इस वक़्त मेरी उम्र 24 साल की है … मैं शादीशुदा हूँ. मैं 5 फुट 4 इंच लंबी यौवन से मालामाल एक खूबसूरत औरत हूँ. मैं बहुत सालों से अन्तर्वासना के साथ जुड़ी हूँ …. और इसमें प्रकाशित होने वाली हर कहानी का पूरा लुत्फ उठाती हूँ.
मेरे पति का स्पेयर पार्ट्स का और साथ प्रोपेर्टी डीलिंग का काम है. मैं भी अपना पार्लर चलाती हूँ. मैंने सोचा क्यों न अपनी ज़िंदगी के कुछ हसीन पलों को आपके सामने लाऊं.
यह स्कूल के समय की ही घटना है. उस वक्त मुझपे जवानी समय से पहले ही चढ़ने लगी थी. उसका एक बड़ा कारण था मेरी संगत. स्कूल से ही उन लड़कियों के साथ मेरी दोस्ती थी, जो मुझसे बड़े घर से थीं.
अक्सर स्कूल में वो अपने आशिकों के ज़रिए गंदी मैगज़ीन लातीं और देखती रहतीं. जब मैं बारहवीं में थी, तब बोर्ड की क्लास थी. अपनी सहेली पिंकी के घर हम तीनों सहेलियां में पिंकी और रिचा पढ़ाई के लिए एक रात रुकीं. वो दोनों उन दिनों अपने आशिकों के साथ चुदाई का सुख भोग चुकी थीं. मैं घर वालों के डर से लड़कों के चक्कर में पड़ने से डरती थी. हालांकि बहुत लड़के मुझ पर लट्टू थे और मेरी शोला बन चुकी जवानी के रस को निचोड़ना चाहते थे. मैं अपने घर बाथरूम में अक्सर अपनी नंगी जवानी देख, अपने स्तनों को दबाती सहलाती रोंएदार चूत के गुलाबी होंठों को छेड़ लेती. अपनी उंगली साबुन से चिकनी करके अपनी चूत में हल्के हाथ से डालने की कोशिश करती औऱ दाने को रगड़ कर मजा ले लेती.
उस रात जब पिंकी के घरवाले सो गए, तो उसने दरवाज़ा बंद करके बुक से एक सीडी निकाली. उसे सीडी प्लेयर में लगा कर चलाया. वो सीडी एक ब्लूफिल्म की थी. मैं पहली बार ब्लू फिल्म देख रही थी. मैं नज़र गड़ाए उसको ही देख रही थी. बड़े बड़े लंड और नंगी गोरियां बेशर्म होकर अपनी जवानी का लुत्फ उठा लंड चूस रही थीं.
तभी रिचा ने मुझे बांहों में भर लिया, पिंकी ने अपना टॉप उतार फेंका. हम तीनों एक दूसरे से लिपट गईं. उन दोनों ने मेरे कपड़े उतार दिए और पिंकी ने मेरे स्तन चूसने लगी. रिचा मेरी कुंवारी चूत को चूमने लगी. जब मैंने उनकी चूत देखी तो उनकी फांकें थोड़ी खुल चुकी थीं.
पिंकी बोली- कनिका, तेरी फिगर तो बहुत ज़बरदस्त है.
मैं- कैसे?
उसने मुझसे कहा- तेरी जवानी तो शोला बन चुकी है. तुम यौवन का पौधा बन चुकी हो, तुझे भी अब माली की ज़रूरत है … जो तेरे इस पौधे को पानी दे. इससे तेरे पौधे का फल और रसीला हो जाएगा.
मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था.
उसने मुझसे कहा- हम इसी लिए इकठ्ठी हुई हैं ताकि तुझे जवानी के असली सुख और असली मज़े को दिखा सकें.
उसने मुझे एक पत्र दिया. ये एक प्रेम पत्र था. उसने बताया कि यह पत्र +2 के लड़के देवेंद्र ने तेरे लिए लिखा है.
मैंने उसको देखा तो उस पत्र में उसने प्रेम का इज़हार किया था और अपना फोन नंबर लिखा था. मैं देवेंद्र को जानती थी, वो अक्सर मुझे देखा करता था.
उस रात हम तीनों ने एक दूसरे को खूब चूसा. अगले दिन जब वहां से स्कूल गई तो देवेंद्र रास्ते में खड़ा मिला. आज मैंने भी उसको ठीक से देखा. वो बहुत हैंडसम लड़का था. आज मैं उसको देख मुस्कुरा निकल गई. एक खाली पीरियड में मैं, पिंकी और रिचा ग्राउंड के कोने में बैठी थीं, तभी देवेंद्र भी आ गया.
वो दोनों साइड में चली गईं, तो देवेंद्र बोला- फिर क्या सोचा आपने?
मैंने पूछा- किसके बारे में?
वो बोला- मेरे प्यार के बारे में!
उसने मेरे हाथ पे अपना हाथ रख दिया और बोला- आई लव यू!
मैंने कहा- हाथ हटाओ … कोई देख लेगा.
वो बोला- तो जवाब दे दे … मैं जाऊं.
मेरे मुँह से निकल गया- आई लव यू टू.
वो मुस्करा कर बोला- आज कॉल करना.
मुझे भी अन्दर तक सनसनी दौड़ गई थी. जिन्दगी में किसी लड़के से प्यार का इजहार हुआ था.
शाम को घर में कोई नहीं था, मौका देख कर मैंने उसको फ़ोन किया और ऐसे हम रोज़ बात करने लगे.
एक दिन उसने मुझसे कहा- कल स्कूल मत जाना और पिंकी के साथ आ जाना. मुझसे रहा नहीं जाता कनु!
इधर मेरी शोला बन चुकी जवानी में भी आग लगी पड़ी थी, दिल चाहता था कि देवेंद्र मेरी इस आग को ठंडी कर दे. पिंकी का आशिक और देवेंद्र आपस में दोस्त थे. मैंने पिंकी को फोन किया तो वो बोली- हां मुझे मालूम, हमें कहाँ चलना है.
मैं पूछा- बता तो दे ना … क्या होगा?
पिंकी बोली- उधर चल कर सब मालूम हो जाएगा, बस तू अपने नीचे के सब बाल वगैरह साफ कर लेना, पहली बार आशिक से मिलोगी.
मैं समझ गई कि माली पौधे में पानी देगा. उसी रात को ही क्रीम से मैंने अपनी सील पैक चूत को चिकनी किया और अगले दिन स्कूल ड्रेस में ही स्कूल निकली.
पिंकी ने मुझसे कहा था कि मोड़ वाले साइबर कैफे के पास खड़ी मिलना.
पिंकी मुझे वहीं मिली और उसके साथ चलने लगी. आगे बाजार में एक एस्टीम गाड़ी खड़ी थी. पिंकी के साथ उसमें बैठ गई. थोड़ा आगे चलकर बाजार से निकल उसके आशिक ने गाड़ी रोक दी और पिंकी उतर कर आगे की सीट पर चली गई और देवेंद्र पीछे की सीट पर मेरे साथ आ गया.
उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे गाल पर चूमते हुए बोला- थैंक्स मेरा प्यार कबूल करने के लिए!
गाड़ी चलती गई देवेंद्र ने मेरे गले में बांहें डाल दी और मेरे होंठ चूसने लगा. तभी शीशे से विकी को झाँकते देख मैं शर्मा गई. देवेंद्र ने हाथ मेरी कमीज में घुसा मेरी चूची को दबाया, मस्ती में मैंने आंखें बंद कर लीं और देवेंद्र खुलकर मेरे जिस्म से खेलने लगा. उसने मेरा हाथ पकड़ अपने खड़े लंड पर अचानक से रख दिया. तब मैंने एकदम से आंखें खोलीं … बड़ा कड़क लंड था … बहुत बड़ा लग रहा था.
खैर मैंने तो पहली बार लंड पकड़ा था, तब यह नहीं पता था कि हर मर्द का अलग साइज़ होता है. तभी गाड़ी रुकी. खुले खेतों में एक अकेली हवेली सी बनी थी. बाहर कुछ भैंसें बंधी हुई थीं.
विकी बोला- लो आ गए.
हम चारों उतर गए. आगे चले तो उधर दो कमरे थे.
विकी बोला- चलो भाई … अब अपने रास्ते.
हम दोनों एक कमरे में आ गए. कमरे की एक दीवार के साथ नीचे बिस्तर लगा था. मुझे बांहों में भरते हुए देवेंद्र उसपे लेट गया और मुझे नीचे लिटा दिया. अब देवेंद्र मेरे ऊपर आ गया था. पहली बार अपनी जवानी को किसी मर्द की बांहों में डाला था. दीन दुनिया भूल हम एक दूसरे को पागलों की तरह चूम रहे थे.
देवेंद्र ने अपनी शर्ट उतारी और फिर मेरी कमीज उतार दी. काले रंग की ब्रा में दूध से सफेद मेरे कोरे चूचे खुले में देख देवेंद्र पागल हो गया. उसने एक पल में मेरी ब्रा खोली और मेरे चूचों को आज़ाद कर दिया. देवेन्द्र ने मेरे छोटे छोटे निप्पलों को मुँह में भर कर चूसा तो मैं मदहोश, पागल सी होने लगी और मैंने उसके लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया.
उसने पैंट भी उतार दी. मैंने देखा कि उसका लंड उसके अंडरवियर को फाड़ने पर उतारू था. जब उसने अंडरवियर भी उतारा तो पहली बार हक़ीक़त में लंड सामने देख घबरा गई. उसका तना हुआ सांवला लंड था.
“कनु मेरी जान, यह तुम्हारा है … इससे खेलो, चूमो, चाटो सहलाओ.”
यह कह कर उसने मेरे मुँह में लंड डाल दिया. पहली बार था, इसलिए उसने खुद अलग अलग तरीकों से मुझसे लंड चुसवाया. मुझसे अपने टट्टे भी चुसवाये.
फिर उसने मेरी टांगें फैला बीच में बैठ अपने होंठ मेरी नर्म कुँवारी गुलाबी चूत पर टिका दिए औऱ चूत चूसने लगा. जब उसने मेरी चूत में जीभ घुसा कर घुमाई, तो मैंने उसके बालों में हाथ फेरते हुए उसके सर को चूत पर दबा लिया. बस कुछ ही पलों में मैं अपने चूतड़ उठा उठा चूत चटवा रही थी. फिर उसने मेरी कच्ची और यौवन से भरी जवानी को लूटने का अगला कदम उठाते हुए मेरी टांगें उठाईं और लंड चूत पर टिका दिया.
मेरा बदन थोड़ा कांप सा उठा. रिचा ने एक बार बताया था कि जब चूत पहली बार फटती है, तो बहुत दर्द होता है.
देवेंद्र ने तरीके से मेरे होंठों को होंठों में भर कर, थूक से गीला करके लंड को झटका दिया. मेरी सांसें मानो रुक गईं … दिल किया कि चीख मारूँ, पर वो खेला हुआ खिलाड़ी था. उसने मुझे जकड़ते हुए एक औऱ झटका मारा औऱ मेरी चूत फट गई. कुछ खून की धार से निकल गई.
पर कहते हैं ना … जंग कोई भी हो … खून खराबा तो होता ही है.
कुछ देर दर्द से मुझे मजा आने लगा और खुद चूतड़ उठा उठा चुदने की इच्छा जाहिर करने लगी. उसको भी मालूम पड़ गया और उसने ज़ोर जोर से मुझे पेला.
चुदाई क्या चीज़ है … आज मुझे पता चला. उसने झटके पे झटके लगाकर मुझे चोदा. कुछ ही देर में मैं झड़ने लगी औऱ मेरे फूटे लावे से उसका लंड भी छूटने लगा.
वो पल ऐसा था, जो कभी नहीं भूल सकती … हालांकि इसके बाद कई तगड़े लंड झेल चुकी हूँ.
उस दिन उसने मुझे दो बार पेला और मेरी अठरह साल की नाज़ुक क़ातिल जवानी में ही मुझे कली से फूल बना दिया.
यह थी मेरी पहली चुदाई. अगली बार अपनी चूत में घुसे दूसरे लंड के बारे लेकर आऊंगी. तब तक नमस्ते.
अपने लंड का ख्याल रखना … मुठ बाद में मारना, पहले मेरी चुदाई की कहानी पर दो शब्द लिख कर मुझे मेल जरूर कर देना.
बाय
kanikamishra9019@gmail.com

देसी प्यासी भाभी की चुदाई खेत में

यह मेरी पहली कहानी है अपनी चचेरी प्यासी भाभी की चुदाई की … मेरे जीवन में हुई यह एक सच्ची घटना है.
दोस्तो, मेरा नाम दिव्येश मिश्रा है और मैं जामनगर गुजरात का रहने वाला हूँ. मैं अपने मम्मी पापा के साथ रहता हूं. मेरे चाचा चाची और उनके बेटे, मतलब मेरा भाई और भाभी हमारे पुश्तैनी गांव में रहते हैं. वहां हमारा खेत है, जिसकी देखभाल वे ही करते हैं.
उन दिनों की बात है.. जब मैं 12वीं में पढ़ता था. मेरे चाचा के लड़के की शादी करीब 2 साल पहले हुई थी. भाभी का नाम रंजू है.. जो दिखने में गांव की देसी गर्ल लगती हैं, पर हैं बहुत सुंदर और सेक्सी. उनके बूब्स बहुत बड़े बड़े हैं. भाभी की फिगर साइज़ 36-30-34 की होगी.
मैं छुट्टियों में अपने गांव चाचा के घर गया था. वहां खेत में काम करने चाचा चाची और भैया जाते थे और भाभी घर पर रहती थीं. मेरे मन में भाभी के लिए थोड़े खराब विचार आने लगे थे. तब मैं भाभी को तिरछी नजर से घूरता रहता था. वो जब काम करतीं तो मैं उनके सामने खड़ा हो जाता और वो झुकतीं, तब मैं उनके हिलते हुए मम्मों को देखता रहता था और उनके सामने ही अपने लौड़े को सहलाने लगता था. भाभी ये सब देख कर बस मुस्कुरा देती थीं.
एक दिन भैया और चाचा को किसी काम से बाहर जाना पड़ा. चाची की भी तबियत खराब हो गई थी, तो वो भी खेत में नहीं गईं और घर पर आराम करने के लिए लेट गईं. चाची ने भाभी को बोला- तुम और दिव्येश खेत में जाकर बैलों को पानी पिला कर चारा आदि डाल आओ.
मैं और भाभी खेत में चले गए. वहां पर कुएं से पानी खींचना था, तो भाभी पानी खींच रही थीं और मैं बैलों को पिला रहा था. तभी भाभी का पैर फिसला और वो गिर गईं. मैं दौड़ के भाभी के पास गया देखा तो भाभी पानी में गिरी हुई थीं और उनकी साड़ी का पल्लू नीचे आ गया था, जिससे उनके बड़े बड़े बूब्स बहुत अच्छे से दिख रहे थे.
मैंने भाभी को संभाला और हाथ से पकड़ के खड़ा किया. भाभी को कमर में मोच आ गई थी, जिससे उन्हें चलने में दिक्कत हो रही थी. मैंने देखा कि पास में एक झोपड़ी थी, वहां पर भाभी को ले जाकर खटिया पर भाभी को बैठा दिया. मैंने भाभी को पानी पिलाया और फिर उनको डॉक्टर के पास जाने को बोला, तो भाभी ने मना कर दिया.
भाभी ने बोला- पास में एक झाड़ है, उसके पत्ते ले आओ, उनके रस से मालिश करूँगी, तो ठीक हो जाएगा.
मैंने उस झाड़ के कुछ पत्ते तोड़े और उनका रस निकाल कर दिया, जिसे भाभी अपने हाथों से कमर पर मालिश करने लगीं.
पर दर्द के चलते भाभी से मालिश नहीं हो पा रही थी. इधर मैं भाभी के गोरे बदन को घूर रहा था.
तभी भाभी बोली- दिव्येश, तुम मेरी थोड़ी मदद कर दो.
मैंने बोला- हां भाभी बोलो.. क्या करूँ?
भाभी ने अपनी कमर पर मालिश करने को बोला और भाभी खटिया पर उल्टा लेट गईं. मैं धीरे धीरे भाभी की कमर पर मालिश करने लगा. भाभी को आराम हो रहा था और मुझसे रहा नहीं जाता था. मैं भाभी की कमर से ऊपर तक मालिश करते करते भाभी के मम्मों को टच कर लेता था. धीरे धीरे भाभी को मजा आने लगा और उनको नींद सी आ गई.. या उन्होंने यूं ही अपनी आंखें बंद कर लीं.
मैंने आवाज दी, तो उनका कोई उत्तर नहीं आया. मैंने देखा कि भाभी सो गई हैं. तो इस बात का फायदा उठाते हुए मैंने धीरे से भाभी की साड़ी को ऊपर करके उनके पैरों के बीच देखने की कोशिश की. मैंने हिम्मत की और भाभी की साड़ी ऊपर करके देखा तो भाभी ने अन्दर कुछ नहीं पहना था और उनकी चूत एकदम क्लीन शेव थी.
भाभी की गोरी और सफाचट चूत देखते ही मेरा तो लंड खड़ा हो गया.
तभी भाभी को कुछ महसूस हुआ और वो हिलने लगीं तो मैंने झट से उनकी साड़ी ठीक कर दी.
भाभी उठ गईं और मुझे देखकर बोलीं- दिव्येश मैं कुछ थक भी गई हूं, सो आराम कर लेती हूँ.. मुझे नींद आ रही है और थोड़ी देर सो जाती हूँ.
मैंने लंड सहलाया और उनकी चूचियों की तरफ देखते हुए बोला- हां सो जाओ भाभी.
भाभी भी अपने होंठों पर एक कातिलाना मुस्कान लाती हुई बोली- आओ तुम भी मेरे पास में सो जाओ, तुम भी थोड़ी देर आराम कर लो.
मैं कुछ कुछ समझ तो गया था, सो मैं जल्दी से उनके बगल में ही लेट गया. चूंकि खटिया सिर्फ एक ही थी और दो जनों के लेटने से हम दोनों चिपके हुए ही लेटे थे. भाभी के बदन की आग और मेरी वासना के चलते मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था. मेरा लंड तन के मोटा हो गया था. जो भाभी के पीछे घुसने की कोशिश कर रहा था. भाभी की गांड बहुत बड़ी थी.
थोड़ी देर बाद मैंने देखा भाभी सो रही हैं, तो मैंने धीरे से भाभी की साड़ी ऊपर करके उनकी गांड के ऊपर हाथ फेरने लगा और अपने खड़े लंड को बाहर निकाल कर उनकी गांड पर टच करने लगा. इससे भाभी हिलीं और थोड़ा और पीछे होकर मुझसे चिपक कर सो गईं.
अब मैं समझ गया कि भाभी सेक्स की प्यासी हैं, सोने का नाटक कर रही हैं और उन्हें मुझसे चुदवाना है.
मैंने देर ना करते हुए अपने हाथ को भाभी की चूत पर लगा दिया और हल्के से उनकी चूत को सहलाने लगा. मैंने महसूस किया कि भाभी की चूत गीली हो गई थी और उनकी सांसें तेज हो गई थीं. मैंने पीछे से भाभी के मम्मों को पकड़ा और जोर जोर से दबाने लगा. भाभी भी मजे ले रही थीं, पर सोने का नाटक भी कर रही थीं.
थोड़ी देर बाद ऐसे ही सोते हुए भाभी चित होकर अपने पैर फैलाकर सो गईं, जिससे समझ गया कि भाभी को अब चूत में खुजली हो रही है और चुदवाना है. मैंने अपने एक हाथ से भाभी की टांग को जरा और फैलाया और साड़ी ऊपर करके उनकी चूत को खोल दिया. जब भाभी की आंखें नहीं खुलीं तो मैं उन पर चढ़ गया और उनको चुम्मी करने लगा और धीरे से उनकी चुत को चाटने लगा. भाभी भी सोने का नाटक करते हुए अपनी चूत उठाकर मेरे मुँह पर हिलाने लगी और अपनी चूत से पानी छोड़ने लगीं.
अब मैं भाभी के पैरों के बीच में आ गया. उनके ऊपर चढ़कर उनकी चूत पर अपना लंड सैट किया और उनको कसके अपनी बांहों में जकड़ कर उनके होंठों पर अपने होंठ रख कर उन्हें किस करने लगा. भाभी अभी भी सोने का नाटक कर रही थीं, लेकिन मुझे किस करने में पूरा सहयोग कर रही थीं. फिर मैंने भाभी की चूत की फांकों में अपने लंड का सुपारा ऊपर नीचे किया, तो भाभी ने अपनी चुत को मेरे लंड के लिए खोल दी. मैंने जोर से एक झटका मारा और मेरा 8 इंच का 3 इंच मोटा लंड उनकी चूत फाड़ते हुए अन्दर घुस गया, जिससे उनकी चीख़ निकलने को हुई. पर भाभी की चीख मेरे मुँह में ही दब कर रह गई, क्योंकि मेरे होंठों का ढक्कन उनके मुँह पर जमा हुआ था. मोटे लंड के एकदम से घुसने के कारण भाभी की आंखें खुल गई थीं और वे दर्द से तड़प रही थीं.
उनके दर्द से ऐसा लग रहा था कि पहली बार इतना मोटा लंड अन्दर गया था. भाभी खुद को मुझसे छुड़ाने के लिए उछल रही थीं. पर मैंने उनको कसके जकड़ रखा था. साथ ही भाभी की चूत में अपने लंड के लम्बे लम्बे धक्के मारता हुआ उन्हें चोदे जा रहा था.
थोड़ी देर बाद उनकी चुत में लंड की सैटिंग हो गई और भाभी को आराम मिलने लगा. अब मैंने होंठ हटा दिए.
भाभी गहरी सांस लेती हुई धीरे से बोली- मार ही डाला यार तूने तो … फाड़ दी मेरी चूत तूने … बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने भाभी को किस करते हुए अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर जोर से उन्हें चोदने लगा. अब भाभी को भी मजा आ रहा था और वो भी अपनी गांड उछाल उछाल कर चुदवा रही थीं. ऐसे ही भाभी को चोदते हुए मैंने अपना सारा माल भाभी की चूत में ही उतार दिया और ऐसे ही उनके ऊपर पड़ा रहा.
कुछ देर बाद भाभी ने किस करके मुझे साइड में किया और खुद खड़ी हो गईं. भाभी ने अपने कपड़े ठीक किए. मैं उनको देखे जा रहा था. भाभी मेरे सामने शरमा रही थीं. वे कुछ बोले बिना झोपड़ी के बाहर चली गईं.
मैंने बाहर जाकर देखा तो भाभी ठीक से चल नहीं पा रही थीं. फिर धीरे धीरे हम घर आ गए और खाना खाके सब सो गए. सुबह देखा तो भाभी को बुखार चढ़ गया था और भैया उनको डॉक्टर के पास ले जा रहे थे. भाभी अभी भी मुझे देख कर शरमा रही थीं.
फिर मैं अपने घर जामनगर आ गया.
थोड़े दिनों बाद मुझे भाभी का फोन आया और थोड़ी देर बात करने के बाद उन्होंने बताया कि खेत में अपने जो शरारत की थी, उसी के कारण अब मैं माँ बनने वाली हूँ.
मैंने भाभी को बधाई दी, तो शरमा कर उन्होंने फोन काट दिया. अभी भाभी को उस दिन की निशानी के रूप में एक लड़का है. अब जब भी मैं गांव जाता हूं तो भाभी बहुत चुदवाती हैं.
यह है मेरी प्यासी भाभी की सच्ची कहानी, आपको कैसी लगी.. आपकी राय मेरा ईमेल आईडी divyeshmishra2018@gmail.com पर जरूर भेजें.

Sunday, December 16, 2018

विदेश मे देसी जुगाड के जलवे

antarvasna, hindi sex story दोस्तों, कैसे हैं आप लोग?  मेरा नाम मनोज है, मैं जयपुर का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 30 वर्ष है। मैं स्कूल में क्लर्क हूं। मेरे पिताजी भी अभी कुछ वक्त पहले ही रिटायर हुए हैं। जब वह रिटायर हुए थे तो उस वक्त हम लोगों ने घूमने का प्लान बनाया था। मेरे चाचा दुबई में रहते हैं। उन्होंने कहा था कि कुछ दिनों के लिए तुम लोग दुबई आ जाओ। हम लोगों ने घूमने का सारा प्लान बना लिया था और लगभग सारी तैयारियां हो चुकी थी। मैंने फ्लाइट की टिकट भी बुक करवा दी थी लेकिन जिस वक्त हम लोग जाने वाले थे उससे कुछ दिन पहले ही मेरी मां की तबीयत बिगड़ गई। जब मेरी मम्मी की तबीयत खराब हुई तो हम लोगो को उन्हें अस्पताल लेकर जाना पड़ा। जब हम उन्हें अस्पताल ले गए तो डॉक्टरों ने कहा कि अभी आप इन्हें कुछ दिन बेड रेस्ट पर ही रखिए यदि आप लोग इन्हें कहीं ट्रैवल कराएंगे तो शायद हो सकता है कि इनकी तबीयत खराब हो जाए। हम लोग जिस दिन जाने वाले थे उस दिन अचानक से उनके पेट में तकलीफ होने लगी और उनका बदन भी पूरा दुखने लगा। उस वक्त हमारा घूमने का प्लान कैंसिल करना पड़ा।
मेरे चाचा ने जब हमें फोन किया तो वह कहने लगे क्या तुम लोग यहां नहीं आ रहे हो? मैंने उन्हें बताया कि मम्मी की तबीयत खराब हो चुकी है इसलिए हम लोगों का आना संभव नहीं है। वह कहने लगे चलो कोई बात नहीं तुम लोग कुछ समय बाद आ जाना। मैंने चाचा से कहा अब देखते हैं कब हमारा आना होता है। उनसे मेरी ज्यादा बात नहीं हो पाई। मैंने भी कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी क्योंकि घर में मैं एकलौता हूं इसलिए मुझे ही उनकी देखभाल करनी पड़ रही थी। मेरे पापा की भी तबीयत ठीक नहीं रहती इस वजह से मुझे ही मम्मी की देखभाल करनी पड़ी। उसके कुछ दिनों बाद ही मेरी मम्मी की तबीयत ठीक हो गई। जब मेरी मम्मी की तबीयत थोड़ा ठीक होने लगी तो वह कहने लगे कि मेरी वजह से तुम लोगों का घूमने का प्रोग्राम कैंसिल हो गया। मैंने अपनी मम्मी से कहा कि आपके बिना हम लोग वैसे भी कहां घूमते। मैंने उन्हें कहा आप ज्यादा बात ना करें आप कुछ दिन और आराम करिए। जब आप पूरी तरीके से ठीक हो जाएंगे तो तब हम लोग फिर घूमने चलेंगे। अब वह खुद ही जैसे पूरी तरीके से ठीक होने लगी थी और उसके बाद हम लोगों का घूमने का प्लान भी दोबारा बन गया। मैंने सोचा कहीं इस बार हमारा प्लान कैंसिल ना हो जाए इसलिए पहले ही डॉक्टर को दिखा दिया जाए। मैंने अपनी मम्मी का बॉडी चेकअप करवा दिया और डॉक्टरों ने कहा कि यह पूरी तरीके से स्वस्थ हैं।
हम लोग जब फ्लाइट में जा रहे थे तो उस वक्त मेरी मुलाकात सूरज से हुई। जब मेरी मुलाकात सूरज से हुई तो उससे मेरी अच्छी दोस्ती हो गई। वह लोग घूमने के लिए जा रहे थे। मैंने उनसे पूछा आप लोग कितने दिन के लिए वहां रुकने वाले हैं? वह कहने लगे हम लोग एक हफ्ता वहां रुकेंगे और उसके बाद हम लोग लौट आएंगे। वह मुझसे पूछने लगे हैं आप लोग कितने दिन तक वहां रहने वाले हैं? मैंने कहा अभी तो मैंने आने की फ्लाइट नहीं की है वहां जाकर ही पता चलेगा कि कितने दिन हम लोग रुक पाएंगे। जैसे ही हमारी फ्लाइट दुबई में लैंड हुई तो एयरपोर्ट पर मेरे चाचा हमें लेने के लिए आए हुए थे। मेरे चाचा ने सबसे पहले मेरी मम्मी से पूछा कि भाभी आप की तबीयत कैसी है? मम्मी कहने लगी। अब तो पहले से बेहतर है। पिछली बार तो ना जाने क्या हो गया हम लोग आए ही नहीं पाए। चाचा कहने लगे कोई बात नहीं चलो आप इस बार तो कम से कम आ ही गए। हम लोग वहां से उनके घर पर गए। जब हम लोग उनके घर पर गए तो मेरी चाची हमारा बेसब्री से इंतजार कर रही थी। चाची ने जैसे ही मेरी मम्मी को दिखा तो उन्होंने मेरे मम्मी को गले लगा लिया और वह दोनों आपस में बातें करने लगी। मेरे पापा कहने लगे कि तुम औरतों की बातें कभी खत्म ही नहीं होती। पता नहीं कितनी बातें हैं। सारी बातें आज ही करने वाली हो। मेरे पापा और चाचा बैठे हुए थे लेकिन वह लोग सिर्फ काम की बातें कर रहे थे। मैं अकेला बैठा हुआ था। मैंने अपने चाचा से पूछा कि चीनू कहां है? चीनू मेरे चाचा के लड़के का नाम है और वह बड़ा ही बदमाश है। उसकी उम्र 20 वर्ष है। मेरे चाचा कहने लगे चीनू अभी बाहर अपने दोस्तों के साथ गया होगा। बस कुछ देर बाद लौटता ही होगा।
मैं उसका इंतजार करने लगा और जैसे ही वह आया तो मैंने उसे कहा अरे भाई तुम कहां थे? मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा था। वह मुझे देखते ही कहने लगा भैया आप कब आये? मैंने उससे कहा कि तुम चाचा से ही पूछ लो कि हम लोग कब आए। चाचा कहने लगे कि उन्हें आए हुए तो काफी वक्त हो चुका है। उसके बाद हम लोग सब साथ मे बैठ कर बात कर रहे थे। चीनू मुझे अपने रूम में लेकर गया और कहने लगा भैया आपने अच्छा किया कि आप यहां आ गए मैं तो कब से पापा को कह रहा था कि भैया लोगों को यहां आने के लिए कहिए। आप लोगों ने बहुत अच्छा किया कि आप यहां आ गए। मैंने चीनू से पूछा आज कल क्या चल रहा है। वह कहने लगा बस भैया ऐसे ही समय कट रहा है। मैंने उसे कहा अपना मोबाइल तो दिखाओ। उसने अपना मोबाइल दिखाया तो उसमें एक से एक लड़कियों की तस्वीर थी। मैंने कहा यह सब कौन है तो वह कहने लगा मेरे दोस्त है। मैंने उससे कहा नहीं यह तुम्हारी दोस्त नहीं हो सकती यह कुछ और ही लग रही हैं। उसने मुझे सच कहा और कहने लगा यह सब जुगाड है। मैंने कहा तो हमें भी फिर विदेश की जुगाड़ का मजा दिलवा दो। वह कहने लगा मैं आपको एक गजब के माल के पास ले जाता हूं। उसका बदन देखकर आप अपने आपको नहीं रोक पाएंगे।


मैंने कहा ठीक है वह मुझे अपने साथ उसके पास लेकर गया। मैंने जब उसे देखा तो उस माल को देखकर मेरा मूड खराब हो गया। मैंने उससे पूछा तुम्हारा क्या नाम है? वह कहने लगी मैं गुजरात की रहने वाली हूं मेरा नाम  आंचल है। मेरा लंड उसे देखकर खड़ा होने लगा। वह मुझे अपने बेडरूम में ले कर चली गई चीनू बाहर बैठकर इंतजार कर रहा था। जब हम दोनो बेडरूम में गए तो उसने अपने कपड़े उतार दिए। उसकी लंबाई 5 फुट 8 इंच के करीब थी उसके फिगर को देख कर मेरा लंड मेरे कच्छे को फाडते हुए बाहर की तरफ को आने लगा। मैंने उसे कसकर अपनी बाहों में ले लिया और उसके पूरे बदन का रसपान करना शुरू कर दिया। मेरे लंड से धीरे धीरे पानी बाहर टपक रहा था लेकिन मुझे उसके बदन का रसपान करने में बहुत मजा आता। मैंने काफी देर तक उसके बदन का रसपान किया। जब उसने मेरे लंड को सकिंग करना शुरू किया तो वह अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को ले रही थी और अच्छे से सकिंग कर रही थी उसने काफी देर तक ऐसा ही किया। जब मेरी इच्छा भर गई तो मैंने भी उसके दोनों पैरों को खोलते हुए उसकी चिकनी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर चला गया। उसकी योनि बड़ी टाइट थी मैं मन ही मन सोचने लगा चीनू ने मुझे बड़ा अच्छा माल दिलवाया है। मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर रही थी। जब मेरी इच्छा भर गई तो मैंने उसे घोड़ी बना दिया। जब मैंने उसकी बड़ी गांड को अपने हाथों से पकड़ा तो मुझे बहुत मजा आया और मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह मुझे कहने लगी आपका लंड बड़ा मजेदार है। मैंने उसे कहा तुम बड़ी ही टाइट माल हो तुम्हारी जैसी माल को चोदने में मुझे बहुत मजा आ रहा है। यह कहते हुए मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था और उसकी आवाज चीनू के कान तक जा रही थी। चीनू मुझे कहने लगा भैया आप आराम से करिए बाहर आवाज सुनाई दे रही है। मैं उसे और भी तेज झटके मारने लगा। जैसे ही मेरा गरमा गरम वीर्य उसकी योनि के अंदर गया तो मुझे बहुत मजा आ गया। उसकी चूत का आनंद मैंने उस दिन विदेश में लिया मैं जब बाहर आया तो चीनू बाहर बैठकर हंस रहा था वह अपनी बत्तीसी मुझे दिखा रहा था। वह कहने लगा भैया आप बड़े हरामी हो। मैंने उसे कहा तुमसे तो कम ही हरामी हूं। यह कहने के बाद हम दोनों वहां से घर लौट आए।

Wednesday, December 12, 2018

पहली बार चुदाई मौसी के साथ



दोस्तो, मेरा नाम तेजस्व है. ये मेरी पहली और रियल सेक्स स्टोरी है. आपको कैसी लगी, पढ़ने के बाद ज़रूर बताना.
मैं बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा था. मैं दिखने में भी अच्छा था और मेरा रंग भी गोरा था, इसलिए कई लड़कियां मेरी फ्रेंड थीं. लेकिन उस समय मैं सेक्स के बारे में नहीं जानता था.
वक्त के साथ धीरे-धीरे मैं बड़ा होता गया. जब मैं जवान हुआ तो सेक्स की इच्छा भी मन में होने लगी. स्कूल में दोस्तों से सेक्स की बातें भी सुनता था. दोस्त अपनी सेक्स स्टोरी बताते थे … लेकिन मुझे ये बातें थोड़ी अच्छी लगती तो थोड़ी बुरी भी, क्योंकि घर में यही बताया जाता था कि इस तरह की बातें करना गंदी बात होता है. लेकिन संगत और कमउम्र का असर होने लगा था.
इस समय तक मेरा क्लास की लड़कियों को देखने का नज़रिया भी बदल गया था. अब जब भी किसी लड़की को देखता तो मेरी नज़र उसके मम्मों पर ही टिक जाती थीं और मन में सेक्स करने की इच्छा होने लगती थी. लेकिन किसी से कह नहीं पाता था.
बात उन दिनों की है, जब मैं 11 2वीं क्लास में था. मैं उस समय एकदम जवान पट्ठा हो गया था. वो सर्दियों के दिन थे. उस दिन जब मैं स्कूल से लौट कर घर आया तो पता चला कि मेरी दूर के रिश्ते की मौसी आई हुई हैं. वो मेरी हम उम्र ही थीं. मैंने उन्हें देखा तो बस देखता ही रह गया.
क्या बला की माल थीं. उनका गोरा रंग, पतला शरीर, मस्त मम्मे, उठी हुई गांड आह … दिल खुश हो गया.
मम्मी ने मेरे और मौसी के लिए खाना लगा दिया था. हम दोनों खाना खाते- हुए बातें कर रहे थे. बात ही बात में ही पता चला कि वो 12वीं क्लास में हैं.
मौसी इतनी खूबसूरत थीं कि बस मैं उनसे प्यार कर बैठा. लेकिन मैं कहने से डर रहा था कि कहीं वो बुरा ना मान जाए.
रात हुई … पापा अलग कमरे में सो गए. एक बेड पर मैं सो गया, बगल की खाट पर मेरी माँ और मौसी लेट गईं. हम अपनी-अपनी रज़ाई में दुबके हुए थे. मुझे नींद नहीं आ रही थी. मैं अपनी मौसी से प्यार का इज़हार करना चाह रहा था लेकिन डर रहा था.
फिर हिम्मत जुटा कर मैंने उनके हाथ पर अपना हाथ रखा, उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मुझमें थोड़ी हिम्मत आ गई. मैंने उनका हाथ थोड़ा सा दबाया … इस पर उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मैंने उनका हाथ धीरे-धीरे सहलाना शुरू कर दिया … पर मौसी ने कोई रिएक्शन नहीं किया. मैं समझ गया कि वो भी कुछ चाहती हैं.
मैंने धीरे से उसके कान में ‘आई लव यू …’ कहा तो उन्होंने मेरा मुँह दबा दिया. मौसी को डर था कि कहीं बगल में लेटी मम्मी सुन ना लें. मैं समझ गया. मैंने उनका हाथ धीरे से अपनी रजाई के अन्दर कर लिया लिया और उनकी उंगलियों को चाटने लगा. जब मुझे लगा कि अब मम्मी सो गई हैं तो मैंने मौसी के मम्मों पर हाथ रख दिया और दबाने लगा.
मौसी के चूचे बहुत ही मस्त थे. मैं पहली बार किसी लड़की के मम्मों को छू रहा था. मेरा लंड पूरा टाइट हो गया था. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. लेकिन मौसी सेक्स करने को अभी राज़ी नहीं थीं … शायद उन्हें कुछ डर था. अब तक हम दोनों एक-दूसरे के बारे में बहुत कम जानते थे.
अगले दिन रविवार था … इसलिए हमने एक-दूसरे से बहुत सारी बातें की. मौसी अब मुझसे बहुत खुल गई थीं.
रात हुई … सब सोने लगे लेकिन आज ना तो मेरी आँखों में नींद थी, ना ही मौसी की. कुछ देर बाद मैंने उन्हें अपनी रज़ाई में बुला लिया. डर हम दोनों को लग रहा था कि कहीं मम्मी जाग ना जाएं. ये मेरी जिंदगी में पहली बार हो रहा था. जब मैं किसी जवान लड़की के साथ एक ही बिस्तर पर लेटा था.
मैंने धीरे-धीरे उनके हाथों को सहलाना शुरू किया, वे मुझसे चिपक गईं. मैंने अपने होंठ उनके कोमल और गुलाबी होंठों पर रख दिए. मैं फिल्मों में चूमा-चाटी के सीन कई बार देख चुका था. सो थोड़ा आइडिया था. मेरा मन कर रहा था कि हम एक-दूसरे को यूं ही बांहों में जकड़े हुए पड़े रहें.
मैं मौसी के गुलाबी होंठों को बहुत देर तक चूसता रहा. कुछ देर बाद मौसी ने मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी. कभी मैं उनकी जीभ को चूसता, तो कभी वो मेरे होंठ चाटती रहीं. उस समय हम दोनों जन्नत की सैर कर रहे थे.
यह मेरा पहला चुम्बन था तो बहुत नया लग रहा था. मैं मौसी के साथ जिंदगी भर यूं ही किस करते रहना चाहता था.
फिर धीरे से मैंने अपना हाथ उनके चूचे पर रख दिया. मौसी के चूचे मीडियम साइज़ के थे.
धीरे-धीरे हम अपने होश खोते जा रहे थे. हम दोनों की साँसें गर्म और तेज हो रही थीं. मेरा लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आना चाह रहा था. मैं अपने हाथ धीरे से उनके पेट पर ले गया और उनकी नाभि में गुदगुदी करने लगा तो वो उछल पड़ीं. मैंने जैसे ही अपना हाथ और नीचे ले जाना चाहा, तो उन्होंने मुझे रोक दिया. मैं समझ गया कि मौसी अभी ऊपर ही मज़ा लेना चाहती हैं.
मैंने उनकी ब्रा को खोल दिया और उनके मम्मों को आज़ाद कर दिया. मैं पहली बार चूचियों को देख रहा रहा था, सो मैं तो ऊपर वाले की इस नियामत को देखता ही रह गया.
मौसी के दोनों मस्त उभार देख कर मुझे नशा सा चढ़ रहा था. मैं उन दोनों उभारों के ऊपर टंके हुए सबसे मस्त मूंगफली के दाने के बराबर गुलाबी रंग की घुंडियों को मसलने लगा. अगले ही पल मैं तो उन पर लगभग टूट ही पड़ा और निप्पलों को चाटते हुए मींजने लगा. मैं अपने जीवन में पहली बार किसी लड़की के दूध दबा रहा था सो मुझे होश ही नहीं रहा कि इसमें दर्द भी हो सकता है, मैं बहुत तेज दबाने लगा तो मौसी दर्द से कराहने लगीं.
फिर मैं बस मौसी के दूध हौले से सहलाने लगा. धीरे-धीरे मैंने अपनी जीभ से उनका पूरा पेट चाटा चूमा. वो पूरी तरह मदहोश हो चुकी थीं और मुझसे बेल की तरह लिपट गई थीं.
मैंने इसी बीच उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया तो वो शर्माने लगीं. मैं उन्हें किस करने लगा और रात के अंधेरे में ही उनकी चड्डी भी उतार दी. चड्डी के उतरते ही वो अपनी बुर ढकने लगीं.
मैंने समय ना गंवाते हुए अपने सारे कपड़े उतार दिए और उनसे चिपक गया. जैसे ही मैंने लंड को उनके शरीर को छुलाया, वो तो एकदम से पागल हो गईं. उनकी साँसें गर्म और तेज हो गईं.
मैंने नीचे को होकर अपने होंठ उनकी बुर पर रखा … तो दोस्तों की सारी बातें याद आने लगीं. मौसी की बुर जैसी भट्टी की तरह गर्म हो गई थी. मुझे बुर के छेद का अंदाज़ा नहीं था इसलिए मौसी ने अपने हाथ से मुझे अपनी बुर का रास्ता दिखाते हुए मेरी उंगली अपनी बुर के छेद में लगा दी.
मैं बुर के स्पर्श से दंग रह गया. मौसी की बुर फूल से भी कोमल थी. उनकी बुर पानी से पूरी तरह गीली हो चुकी थी. मैं समझ गया था कि मौसी चुदाई के लिए तैयार हैं.
मैंने सबसे पहले अपनी एक उंगली को उनकी बुर में डाली और अन्दर-बाहर करने लगा. कुछ देर बाद उन्होंने खुद मेरा लंड अपनी बुर के छेद पर रखवा लिया. मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनकी बुर पर लंड से हल्का दबाव बनाया तो लंड फिसल गया. मैंने फिर ट्राइ किया तो लंड हल्का सा अन्दर घुस गया. लंड के अन्दर घुसते ही वो छटपटा उठीं और मुझसे अलग होने की कोशिश करने लगीं. मैंने उन्हें जोर से पकड़ किया और एक धक्का दे मारा. वो बहुत जोर से चीखने को हुईं … लेकिन उनकी आवाज़ बाहर ना आ सकी.
मैं मौसी के होंठों पर अपने होंठ लगाए हुए था. अब मैं उनकी चुदाई किए जा रहा था. उनके हाथ के नाख़ून मेरी पीठ में गड़ रहे थे. मौसी मेरे लंड के कारण छटपटा रही थीं और उनकी कुंवारी बुर से खून बह रहा था … वो दर्द से तड़फ रही थीं.
कुछ देर बाद जब उनका दर्द कुछ कर कम हुआ तो मैंने एक जोरदार झटका मारते हुए अपना पूरा लंड मौसी की बुर में उतार दिया. वो एक बार फिर पागलों की तरह तड़फने लगीं, लेकिन चीख बाहर ना आ सकी. मुझे पता था कि उनको बहुत दर्द हो रहा है … लेकिन मैं मौका हाथ से खोना नहीं चाहता था.
मैं मौसी को लगातार किस किए जा रहा था और उनकी चूचियों को सहला रहा था. कुछ देर बाद जब मौसी का दर्द कम हुआ तो मैं मस्ती से धक्के लगाने लगा. अब वो भी गांड उठा कर मेरा साथ दे रही थीं. कुछ समय बाद मौसी मुझसे बहुत जोर से चिपक गईं और अकड़ कर ढीली हो गईं.
मुझे उनकी बुर से निकलता गर्म पानी उनके झड़ने का अहसास करा रहा था. कुछ देर मैं उन्हें चोदता रहा. तभी मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे अन्दर से कोई लावा फटने वाला है. मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी … कुछ ही धक्कों के बाद मैंने अपना सारा पानी उनकी बुर में गिरा दिया … और उनसे चिपक कर लेट गया.
दो जवान दिलों का मेल हो गया था. वो मेरी बांहों में पिघलती रहीं.
मैं आज अपनी सारी हसरतों को पूरी करना चाह रहा था. अभी हम दोनों टीन एज वाले थे, सो दिलों में खूब जोश था. कुछ देर बाद हम दोनों ने फिर से सेक्स किया.
सुबह होने से पहले वो फिर मम्मी की रज़ाई में घुस गईं.
मौसी के संग चुदाई की कहानी आगे भी है … आपके इस सेक्स स्टोरी पर मेल मिलने के बाद मैं उसे भी लिखूँगा.
मेरी पहली चुदाई की कहानी कैसी लगी ज़रूर बताएं.
tejasvsamrat11@gmail.com

दोस्त की कुंवारी मौसी को चोदा



अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार. मैं नियमित रूप से अन्तर्वासना का पाठक हूँ. इधर की ढेर सारी कहानियां पढ़ने के बाद सोचा कि मैं भी अपनी जिंदगी की सेक्स लाइफ के रंगीन लम्हे आपसे शेयर करूँ.
यह कहानी मेरे पहले सेक्स की है, जो मैंने पड़ोस के लड़के की मौसी के साथ किया था. मैं पुणे (महाराष्ट्र) से हूँ, मेरी उम्र 20 साल है. अपनी बॉडी की बात करूँ, तो एकदम ठीक ठाक है और मैं 7 इंच लम्बे लंड का मालिक हूँ.
यह कहानी तब की है, जब मैं जवानी की दहलीज पर था. मेरे पड़ोस में एक लड़का रहता था, उससे मेरी अच्छी दोस्ती थी. उसकी मौसी जो 21 साल की थी, जो उसके यहां रह कर पढ़ने के लिए आई थी. पहले तो मेरे दिमाग में उसके लिए कुछ भी गलत विचार नहीं थे.
एक दिन पढ़ाई के कुछ डाउट थे, इसलिए मैं उसके घर गया. दरवाजा खुला था तो मैं सीधा अन्दर चला गया. उसके घर पर कोई नहीं था. मैं उसे ढूंढने लगा तो बेडरूम में घुस गया, दरवाजा थोड़ा खुला था.. तो मैंने अन्दर झाँक कर देखा तो दोस्त की मौसी कपड़े चेंज कर रही थी.
मैं उसके नंगे बदन को देख कर भौंचक्का रह गया. दूध के जैसे उसका गोरा और कटीला बदन.. उसके 32 साइज के चुचे और काले बालों से लिपटी हुई सुंदर सी गोरी चुत.. उसका 32-26-34 के मदमस्त साइज का बदन कहर ढा रहा था. मेरी जवानी तो उसका नंगा बदन देखकर उफान मारने लगी थी. मेरे अन्दर भी हलचल मचने लगी.
तभी उसे आहट हुई कि मैं उसे देख रहा हूँ, तो वो बाहर आने लगी. मैं जल्दी से वहां से निकल गया और पहली बार उसके नाम की मुठ मारी.
वैसे तो मैं रोज उससे मिलता था, पर उस दिन के बाद से मैं उससे पढ़ने के लिए रोज जाने लगा. वो भी मुझे बड़े मन लगा कर पढ़ाती थी.
एक दिन वो कॉलेज से थक कर आई थी, मैं उसके घर गया, तो देखा वो सो रही थी. सोते वक्त वो बहुत ही प्यारी लग रही थी. मैं उसकी बाजू में बैठ गया और उसके चेहरे पे प्यार से हाथ फेरने लगा. तभी उसने करवट ली. उस दिन उसने साड़ी पहनी थी, तो करवट लेते ही उसका पल्लू साइड में हो गया और उसके रसीले चुचे मेरे सामने आ गए.
मैं इसी की फिराक में था, पर डर रहा था कि उठ गई तो मेरी तो लग जायेगी. मैंने डरते डरते उसकी एक चुची पे हाथ रखा. कोई हलचल नहीं देखी तो मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैं चुचियों को मसलने लगा. फिर धीरे से उसके होंठों पे किस किया.. तभी वो जागने लगी थी. मैं संभल गया और मैं वहां से निकल गया.
अब मैं रोज उसके सोने के टाइम पे जाता और रोज उसकी चुचियों को मसलने लगा. ऐसा रोज करके मुझे मजा आने लगा.
एक दिन ऐसे ही मैं उसके घर गया, तो चुचे मसलने के बाद मैंने देखा कि उसका टॉप थोड़ा ऊपर उठा हुआ था. पजामे से पैंटी की स्ट्रिप दिख रही थी. मैंने सोचा आज बुर की दीदार किया जाए. मैंने एक हाथ उसके पजामे में डाल दिया और उसकी बुर पे हाथ से सहलाने लगा था. उसकी बुर गीली थी, ये मुझे थोड़ा सा अजीब सा लगा. मैंने एक उंगली बुर में घुसा दी, तभी वो हल्के स्वर में चीख़ मारते हुए उठकर बैठ गयी. मैं बहुत डर गया और उससे माफी मांगने लगा. मुझे ऐसा घबराया देख कर वो हँसने लगी और मुझे गले से लगाकर बोली- इतने दिनों से मजे ले रहे थे, तब नहीं डरे.. आज क्यों डर रहे हो?
मैं सुनता रह गया, मैंने मन में सोचा कि साली लौंडिया खुद मजे ले रही थी.. तभी इसकी बुर गीली थी.
फिर उसने मेरे होंठों पर होंठों रखे और हम दोनों एक दूसरे को दस मिनट तक चूमते रहे. फिर उसने मेरे कपड़े उतार दिए और मैंने उसकी टॉप उतार दिया. उसकी नंगी रसीली चुचियां मेरे सामने आ गईं. मैंने झट से उसकी एक चुची मुँह में दबा ली और चूसने लगा. वो जोर जोर से मादक सिसकारियां लेने लगी ‘आह ऊंह उम …’
मैं भी पूरी लगन से एक एक करके उसकी दोनों चूचियों को निचोड़ रहा था. आज मुझे ऐसा करने में ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि जब लड़की भी सामने से रेस्पॉन्स दे रही हो, तो ज्यादा मजा आता है.
थोड़ी देर चुची मसलते मसलते एक हाथ बुर पे ले गया और कपड़ों के ऊपर से उसकी कुंवारी बुर को मसलने लगा. वो और भी गर्म हो गयी, उसने अपनी टांगें फैला दीं और बुर की रगड़वाई का पूरा मजा लेने लगी. मैं भी उसकी बुर में उंगली करके उसके दाने से खेलने लगा. उसकी बुर के नन्हे से दाने को अपनी दो उंगलियों के बीच में दबा कर जैसे ही मसला उसकी आह निकल गई और वो एकदम से गरमा गई.
अब उसने भी मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया और हिलाने लगी. उसके हाथों में अपने लंड को महसूस किया तो मुझे मजा आ गया, समझो मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था. फिर उसने मुझे धक्का दिया और मुझे बिस्तर पर लिटा दिया. मैं कुछ समझ पाता कि उसने मेरा लंड मुँह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
पहली बार किसी लड़की ने मेरा लंड मुँह में लिया था, तो ऐसा लग रहा था.. जैसे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी यही है.
कुछ ही देर बाद वो लंड को अपने मुँह से निकाल कर उठी. उसके चेहरे पर चुदास का नशा देखा तो मैं समझ गया. मैंने उसका पजामा पैंटी के साथ निकाल दिया.. और हम दोनों 69 के पोजीशन में आ गए. मैं उसकी बुर चाट रहा था और वो मेरा लंड चूस रही थी.
पहली बार होने के कारण हम दोनों ही एक दूसरे के मुँह में झड़ गए. झड़ने के बाद हम दोनों थोड़ी देर ऐसे ही एक दूसरे के ऊपर पड़े रहे. कुछ पल बाद फिर से चुदास भड़क गई और हम दोनों एक दूसरे को गर्म करने लगे. एक बार फिर से हम हवस का खेल खेलने के लिए तैयार हो गए.
अबकी बार मैं उसके पैरों से ऊपर जांघों को चूमने लगा. वो उत्तेजित होने लगी. फिर ऊपर नाभि को चाटने लगा. ऐसे ही करके उसे मैं तड़पाने लगा. कभी जांघें, तो कभी नाभि और अचानक से उसकी बुर को मुँह में लेकर चूसने लगा, जीभ से बुर को कुरेदने लगा.
अब वो पूरी उत्तेजना में टांगें फैलाए पड़ी थी और जोर जोर से कामुक सिसकारियां ले कर बोल रही थी- जानू और करो..
मैं उसकी बुर में अपनी जीभ को गहराई तक चलाने लगा.
थोड़ी देर बाद वो कहने लगी- अब सहन नहीं हो रहा.. अपना लंड डाल दो अन्दर.. और बुझा दो मेरी प्यास.
उसकी बात सुनकर मैं ऊपर को उठ कर आया और अपना 7 इंच का लंड बुर पे सैट कर दिया. उसकी फांकों में लंड का सुपारा लगाया और लंड को बुर के अन्दर पेलने की कोशिश की. पहली दो बार की कोशिशें व्यर्थ हो गईं, क्योंकि बुर टाइट होने के कारण लंड फिसल रहा था.
अब मैंने थोड़ी क्रीम लंड पर लगायी और फांकों पर लंड रख दिया. उसने भी मेरा लंड पकड़ लिया और बुर के छेद पर जमा दिया. उसने इशारा दिया और मैंने जोर से एक झटका मार दिया. इस तगड़े प्रहार से मेरा लंड उसकी बुर में घुसता चला गया.
वो जोर जोर से चीखने लगी- निकालो बाहर!
वो रोने लगी तो मैंने झट से उसके होंठों को अपने होंठों से दबाया और उसको चूमने लगा. लंड अन्दर ही अपनी जगह बना रहा था. थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद थोड़ा दर्द कम हुआ, तो फिर से एक बार झटका मारा और इस बार पूरा लंड अन्दर डाल दिया. उसकी आंखों से आँसू आने लगे. मैं धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करने लगा. धीरे धीरे वो भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी.
धकापेल चुदाई का मंजर और चुदाई की रंगीन आवाजें कमरे में गूंजने लगीं. करीब 20 मिनट तक जमकर चुदाई के बाद हम दोनों ही झड़ गए. हम एक दूसरे से चिपक कर निढाल होकर पड़े रहे.
फिर थोड़ी देर के बाद जब उठा तो देखा के उसकी बुर खून से सनी हुई थी, वो थोड़ा डर गई. फिर मैंने उसे समझाया कि पहली बार में ऐसा होता है.
उसने मुझे एक प्यार भरा चुम्बन दे दिया और ‘आई लव यू..’ कहा. उसने बताया कि जब उसने मुझे जब पहली बार देखा था, वो तभी से मुझे पसंद करती थी.
उस दिन के बाद हम जब भी मौका मिलता, तब चुदाई कर लेते थे. तीन साल बाद उसकी शादी हो गयी. फिर शादी के बाद भी मैंने उसको बहुत बार चोदा. आज उसको मेरे से एक बच्चा है.
थोड़े दिनों बाद वो दिल्ली में सैटल हो गयी, पर आज भी उसकी याद आती है. उसके जाने के बाद बहुत सी लड़कियों को चोदा. उनकी कहानी किसी और दिन बताऊंगा.
आपको मेरी कहानी पसन्द आयी या नहीं, प्लीज मुझे मेल जरूर करना.
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बुआ जी के लड़के के लण्ड की भूख

मेरे प्यारे मित्रो, मुझे आपके बहुत से मेल मिले हैं, मैं सबका रिप्‍लाई तो नहीं कर सकी, जिनको रिप्‍लाई नहीं किया उनसे माफ़ी चाहती हूं। दोस्तो, मुझे मेरी कहानी पर अपने विचार मेल जरूर करना ताकि मैं आपसे मेरे जीवन की घटनाओं को बांट सकूँ।
आपका ज्यादा टाइम न लेकर सीधे कहानी पर चलते हैं।
मैं अपने भाई रोहण के साथ दो महीने रही और हमने एक दिन भी ऐसा नहीं गंवाया जिस दिन हमने चुदाई न की हो।
पता नहीं सेक्स में ऐसी क्या बात है कि 2 महीने में मेरे शरीर में निखार आने लगा।
दो महीने बाद मैं घर आ गयी और मैंने हिमाचल में एक कॉलेज में एड्मिशन ले लिया। उसी कॉलेज में ही मेरी बुआ जी का लड़का संजय पढ़ता था। मेरा कॉलेज मेरी बुआ जी के घर से 50 किलोमीटर दूर था। लेकिन न उनको पता था और न ही मुझे पता था के हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं, वो भी हॉस्टल में रहता था और मैंने भी हॉस्टल ले लिया।
जब मैं हॉस्टल में गयी तब मुझे नवप्रीत नाम की लड़की के साथ कमरा मिल गया। एक-दो दिन में ही हमारी अच्‍छी दोस्ती हो गयी। हम सब बातें शेयर करने लगी।
मैंने कभी मेरे भाई के साथ सम्बन्धों के बारे में उसे नहीं बताया।
एक दिन मैं जब अकेली क्लास से हॉस्टल जा रही थी तो मेरी मुलाकात मेरी बुआ के लड़के संजय से हो गयी। वो मुझे देखकर अचम्भित हो गए और मुझसे बोले- मोनिका तुम यहाँ?
मैंने संजय भैया को बताया- भैया, मैं यहीं पढ़ती हूं.
फिर उनसे पूछा- और आप यहाँ कैसे?
तब उन्होंने भी बताया कि मैं भी यहीं पढ़ता हूं।
तब एक दूसरे से हमने बहुत सी बातें की।
भाई दिखने में बहुत ही स्मार्ट था। अक्सर हम जब भी मिलते तो मुस्कुरा देते।
एक दिन नवप्रीत ने हमें एक साथ देख लिया। तब मेरी रूममेट हॉस्टल में जाकर मुझसे बोली- यार, जीजू तो स्मार्ट हैं।
मैं एकदम से हैरान हो गयी और पूछा- कौन जीजू? किसकी बात कर रही है तू?
उसने कहा- आज तू कॉलेज में जिस से बातें कर रही थी … वही जीजू और कौन?
मैंने पता नहीं क्यों नवप्रीत को कुछ भी नहीं बताया कि वो मेरा बॉयफ्रेंड नहीं मेरी बुआ का बेटा, मेरा भाई है।
अगले दिन मैं जब संजय भैया से मिली तो उनको बताया कि मेरी रूममेट नवप्रीत ये कह रही थी।
वो हंसने लगे।
इतने में नवप्रीत भी आ गयी और बोली- लगे रहो … लगे रहो।
उसे देख कर हम हंस दिये।
पता नहीं क्यों, संजय ने भी उसे नहीं बताया कि हम भाई बहन हैं।
एक महीना ही हुआ था कि संजय ने मुझे कॉल किया और पूछने लगे- मोनिका, आज मूवी देखने चलोगी? मैं अकेला हूं।
मैंने ‘हां; कर दी और नवप्रीत को भी साथ ले चलने को पूछा।
तब उन्होंने कहा- जैसा तुमको ठीक लगे।
तो मैंने कहा कि हम दोनों ही चलेंगे, नवप्रीत को रहने देते हैं.
मैं तैयार हो गयी मैंने उस दिन ब्लू जीन्स और स्काई शर्ट पहनी, और पैरों में जूती डाली ही थी कि तभी संजय का कॉल आ गया। जब मैं हॉस्टल से बाहर आई तो देखा संजय मेरा इंतजार कर रहा था। मैं जाकर उसके साथ बाइक पैर बैठ गयी, और सिनेमा पहुंच गए।
जब मूवी शुरू हुई तो संजय ने मेरी सीट के पीछे हाथ रख लिया और धीरे धीरे मेरे कन्धे पर हाथ रख दिया। मुझे अजीब सा लगा परन्तु मैंने कुछ नही कहा. फिर उन्होंने अपना हाथ हटा लिया पर मेरे पैर पर रखकर सहलाने लगे।
मैंने मना नहीं किया क्योंकि मुझे भी अपने बदन पर उनके हाथ की सरसराहट अच्‍छी लग रही थी।
इंटरवल तक यही चलता रहा और इंटरवल के बाद उन्होंने मेरे बूब्स पर हाथ रखकर धीरे से मेरे कान में कहा- मोनिका, अगर तुमको अच्‍छा नहीं लगा तो बता दो, मैं कुछ भी नहीं करूँगा।
मैंने कुछ नहीं कहा तो वो समझ गए कि इसमें मेरी भी मौन सहमति है और भैया मेरी चुचियों को दबाने लगे।
मैं गर्म होने लगी थी, 10 मिनट बाद मैंने उनका हाथ हटा दिया तो उन्होंने पूछा- क्या हुआ?
असल में तो मैं नहीं चाहती थी कि भिया मुझे गर्म करके यूं ही छोड़ दें तो मैंने बहना बना कर उनके कान में कहा- भैया कोई देख लेगा, तो अच्‍छा नहीं लगेगा।
मूवी खत्म होते ही मैं उनसे नजर नहीं मिला पा रही थी और चुपके से उनके पीछे बाइक पर बैठ गयी।
वहां से भैया मुझे एक पार्क में चले गए। वहां बैठकर संजय ने मुझसे कहा- देख मोनिका, मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। इसलिए मैं तुमको यहां ले आया था और मैं तुमसे प्यार करता हूं। प्लीज मना मत करना।
मुझे भी अब लण्ड की जरूरत थी तो मैंने भी कहा- ठीक है!
और मेरी हां सुनते ही उन्होंने मुझे गाल पर किस कर दिया।
मैंने कहा- यहां नहीं भैया, यहाँ कोई देख लेगा!
और हम वापिस हॉस्टल चले गए।
अब हम रोज फ़ोन पर सेक्सी बातें करते और मैं हर रोज सुबह बाथरूम में जाकर नंगी होकर संजय भाई को वीडियो कॉल करके नहाती, उन्हें अपना बदन दिखाती।
एक दिन संजय ने कहा- चलो, कल मेरे घर चलें। कल मां सोनाक्षी (बुआ की लड़की) के साथ तुम्‍हारे घर जा रही है।
तो मैंने हां कर दी।
अगले दिन दोपहर में जब हम दोनों उनके घर पहुंचे तो बुआ भी जा चुकी थी।
मैं बहुत रोमांचित थी क्योंकि आज मुझे एक नया लण्ड जो मिलने वाला था।
घर जाकर मैंने संजय और मेरे लिए चाय बनाई और संजय से पूछा- बाथरूम कहां है? मुझे कपड़े बदलने हैं।
तब संजय भी मौके का फायदा उठाते हुए बोले- बाथरूम की क्‍या जरूरत है, लाओ मैं तुम्‍हारे कपड़े चेंज कर देता हूं।
और भैया ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे होंठों को चूमने लगे।
मुझे बहुत अच्‍छा लग रहा था और मैं भी संजय का साथ देने लगी। संजय ने धीरे से मेरी चूचियों पर हाथ रख दिया और दबाने लगा। मेरे निप्‍पल तन गए। मेरा मन कर रहा था कि एकदम से भाई का लण्ड पकड़ लूं। लेकिन ऐसा करती तो उनको गलत लगता।
उन्होंने धीरे धीरे मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और शर्ट को निकाल दिया, और मेरी पीठ पर हाथ फिराने लगे। कभी कभी जोर से अपनी बाँहों में भर लेते तो मेरी चुचियां उनके चोड़े सीने से दब जाती। मुझे बहुत मजा आ रहा था।
फिर भाई ने मेरी ब्रा खोल दी मेरी बड़ी बड़ी चूचियां कूद कर उसके सामने आ गयी थी। संजय मुझे उठा कर अपने बैडरूम में ले गये और बेड पर लिटा दिया. फिर अपनी शर्ट उतारकर मेरे ऊपर लेटकर मेरे होंठों को चूमने लगे। मुझे बहुत मजा आ रहा था.
तभी संजय ने उठकर मेरी जीन्स उतार दी, मैं सिर्फ ब्लैक पैंटी में उनके सामने बेड पर लेटी थी। मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो अब मैंने भी संजय को पैंट उतारने के लिए बोला।
उन्होंने भी अपनी पैंट उतार दी।
उनके पैंट उतारते ही मैंने उनका अंडरवियर नीचे खींच दिया।
मैं संजय का लण्ड देखकर हैरान रह गयी; 8 या 9 इंच लम्बा और 3 इंच से भी मोटा … मेरी आँखों में चमक आ गयी। मुझे भी चुदाई करवाये हुए बहुत दिन हो गए थे, मैं भैया के लण्ड को देख रही थी तभी संजय ने कहा- सिर्फ देखोगी या इसे पकड़ोगी भी?
इतना सुनते ही मैंने उनका लण्‍ड हाथ में पकड़ लिया। भाई का लण्ड एकदम कठोर और गर्म था।
संजय ने कहा- मोनिका, चूसोगी क्या?
मुझे और क्या चाहिए था … इतना कहते ही मैंने उनके लण्ड पर अपने होंठ रख दिए। लेकिन लण्ड मेरे मुंह में नहीं जा रहा था।
कुछ देर बाद संजय ने कहा- मोनिका यार अब पैंटी तो उतार दो।
मैंने खड़ी होकर उनको ही मेरी पैंटी उतारने का आफर दिया।
उन्होंने आगे बढ़ कर मेरी पैंटी उतारी और मेरी चूत पर मुंह रख दिया और मेरी चूत को चूसने लगे. मुझे बहुत आनन्द आ रहा था। कभी जीभ को अंदर डाल देते तो कभी मेरी क्लिट को मसल देते। अपने हाथों को मेरे कूल्हों पर ले जाकर सहलाते तो कभी कभी हल्के हल्के थप्‍पड़ से मारते जिससे मेरे कूल्हे लाल हो गए।
अब मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पा रही थी और उनसे मुझे चोदने की रिक्वेस्ट करने लगी और बेड पर लेट गयी। भैया मेरे ऊपर आ गए और बूब्स को चूसने लगे, फिर नाभि को चूमा और चूत पर लण्ड को फिराने लगे.
मुझसे रहा नहीं गया और उनका लण्ड पकड़कर चूत पर लगा दिया और अपने कूल्हों को ऊपर की तरफ धकेल दिया जिससे उनका लण्ड का थोड़ा सा हिस्‍सा चूत में चला गया।
तभी उन्‍होंने अचानक से मेरी चूत में लण्ड को पूरा डाल दिया। मुझे थोड़ा दर्द हुआ तो मैंने भैया को कुछ देर रुकने को बोला तो भाई रुक गए और मुझे किस करने लगे. जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने अपने कूल्हों को हिलाया और भाई को अपनी बांहों में भरकर ऊपर नीचे होने लगी।
भाई ने भी सब समझकर मेरी चूत को चोदना चालू कर दिया. मैं चिल्लाने लगी ‘आअहह… हह्ह्ह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम्मम्म… आअहह… ‘
और वो तेज़ी से धक्के मारते रहे।
मैं पहले भी एक भाई के लण्‍ड से चुद चुकी थी लेकिन इस बुआ के बेटे के चोदने के तरीके से मैं बिल्कुल मदहोश हो गयी थी और इतनी अच्छी चुदाई मेरी आज तक मेरे भाई ने भी नहीं की थी। उसका जोश इतना ज़्यादा था कि वो मुझे आधे घंटे से भी ज़्यादा समय से वो मुझे अलग-अलग स्टाइल में लेकर चोदता रहा। कभी घोड़ी बनाकर तो कभी मुझे अपने लण्ड पर बैठने को बोलते।
मैं 3 बार झड़ चुकी थी।
आधा घण्टा तक चुदाई चली और तब हम दोनों एकसाथ झड़ गए। मुझे बहुत अच्‍छा लगा संजय से चुदवाकर … मेरी तो जैसे तृप्ति हो गई।
तभी भाई बोला- मोनिका, तुम्हारी गांड मुझे बहुत पसंद है!
और मेरे ऊपर से उतर कर साइड में लेट गए.
कुछ देर बाद हम दोनों ने शावर लिया और नंगे ही बेड पर आकर लेट गए। पता नहीं कब हमें नींद आ गयी।
जब मेरी नींद खुली तो शाम के 8 बज चुके थे। मैंने संजय को उठाया, हमें भूख भी लगी थी तो मैं खाना बनाने के लिए जाने वाली थी और जब कपड़े पहनने लगी तो भाई ने कहा- मोनिका, कल शाम तक कोई कपड़ा नहीं पहनना।
मुझे अजीब लगा।
खैर मैंने खाना बनाया और डाइनिंग टेबल पर लगा दिया और संजय को बुला लिया- भैया, आ जाओ, खाना तैयार है, खा लो!
संजय भाई नंगे ही आये, मैंने देखा तो संजय का लण्ड खड़ा था।
वो कुर्सी पर बैठ गए और मुझे अपने पास बुलाकर अपने लण्ड पर बैठा लिया और खाना खाने लगे। बीच बीच में भाई मेरी चूचियों को दबा देते थे।
खाना खाकर हम फिर से बिस्तर पर चुदाई की दुनिया में खो गए।
अगले दिन और रात को भी हमने बहुत बार चुदाई की और दिन रात हम दोनों नंगे रहे।
मेरी आगे की स्टोरी आप पर निर्भर है। स्टोरी मेरी हो या मेरी सिस्टर की ये आपको बताना है।
तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी ये कहानी

मम्मी पापा की चुदाई देख सिस्टर के साथ सेक्स किया

दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है. मुझसे यदि कोई भूल हो जाए तो अपना समझ कर माफ कर देना. मेरा नाम साहिल है, मैं गुजरात से हूं.
यह कहानी मेरी ओर मेरी बहन के बीच की है. मेरी बहन मुझसे सवा साल छोटी है. वैसे तो ये कहानी बहुत पहले से ही शुरू हो चुकी थी जब मम्मी और पापा की चुदाई देख कर मेरा चुदाई करने का मन होने लगता था. उसी वजह से मैं वो सब अपनी बहन पर आजमाता था जैसे कि मैं उसकी गांड में उंगली कर देता था या कभी उसकी चुचियों को दबा देता था … वगैरह वगैरह.
बाद में जब मैं 20 साल का हुआ, तब एक रात को मैंने देखा कि मेरे पापा मम्मी की गांड मार रहे थे और मम्मी ‘आह्ह … ओह … उचए … उम्मम … ओहह …’ कर रही थीं. उस दिन मेरा मन खराब हो गया. उस वक्त रोज की तरह मेरे साथ मेरी छोटी बहन बगल में ही सो रही थी.
मैंने उसे देखा, वो सलवार कमीज़ में थी और मेरी तरफ गांड करके सोई हुई थी. जब मैंने उसकी गांड देखी, तब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी गांड पर अपना हाथ रख दिया. वो कुछ न बोली. शायद वो गहरी नींद में सो रही थी. इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैंने उसके करीब जाकर उसकी गांड को अपने लंड के साथ टच कर दिया व एक हाथ उसके मम्मों पर रख दिया.
इतने में ही उसने करवट ली. मैं डर के मारे पीछे को हो गया और सोने का नाटक करने लगा.
कुछ देर बाद कोई हलचल न होने के बाद मैंने फिर से अपना लौड़ा उसके पीछे चिपका दिया. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था, इसलिए मैंने बहन की सलवार का नाड़ा खोलने के लिए हाथ बढ़ाया और नाड़ा मिलते ही खोल दिया. फिर उसकी सलवार को नीचे कर दिया. उसने लाल रंग की पैन्टी पहनी थी. उसकी बड़ी गांड देख कर मेरा लंड तन कर पूरा 7″ का हो चुका था.
फिर मैंने उसको सीधा लिटा दिया और उसकी पैन्टी भी नीचे को कर दी. अब मैंने उसकी चूत को देखा और देखता ही रह गया. मेरी बहन की चूत एकदम गोरी चूत थी. उसकी चूत पर अभी कुछ बाल निकलने ही शुरू हुए थे. उसकी चूत की झांटें छोटे छोटे ब्राउन से रेशमी बाल जैसे थे. फिर मैंने उसकी चूत के पास होकर चूत की एक चुम्मी ली और चूत चूसने लगा. तभी उसने करवट ली, जिससे मैं डर गया और उसके कपड़े ठीक कर दिए.
फिर मैंने बाथरूम में जा कर मुठ मार कर खुद को शांत किया और सो गया.
अगले दिन सुबह जब मैं उठा, तो मेरी बहन कुछ काम कर रही थी और मम्मी नाश्ता बना रही थीं. मुझे उठा हुआ देखकर बहन ने गुड मॉर्निंग कहा और कहा कि मम्मी ने चाय बना दी है, आप पी लो.
मैं चाय पीते हुए अपनी बहन की गांड देख रहा था. थोड़ी देर बाद वो कमरे में झाड़ू लगाने आई. वो झुक कर झाड़ू लगा रही, जिससे उसके गहरे गले वाले कुरते में से उसके हिलते हुए मम्मे दिख रहे थे. मैं अपना लंड सहलाता हुआ उसके बड़े बड़े मम्मों को देख रहा था.
उसने मुझे लंड सहलाते हुए देखा तो शायद वो ये जान चुकी थी कि मैं क्या घूर रहा हूं. इसलिए उसने पूछा- क्या देख रहे हो भैया?
मैं हड़बड़ा कर बोला- कुछ नहीं … बस ऐसे ही ये ये … कुछ नहीं!
बस ये बोल कर मैं वहां से चला गया.
फिर जब रात को जब मैं घर आया, तो उस वक्त करीब रात के 11:30 बज गए थे. पापा के रूम में से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ की आवाज आ रही थी. मैंने की-होल में से झाँक कर देखा तो मेरी मम्मी, पापा के ऊपर चढ़ी हुई थीं और पापा नीचे से लंड पेल रहे थे. मम्मी उछल उछल कर चुदवा रही थीं. मैं उनकी चुदाई देख कर गर्म हो गया और अपना लंड सहलाने लगा. कुछ देर में ही वो दोनों झड़ गए और मम्मी यूं ही निढाल होकर पापा के ऊपर गिर गईं.
बाद में पापा ने कहा कि आज मैं तुम्हें डॉगी स्टाइल में चोदूंगा. मम्मी ‘जी हुजूर …’ कहते हुए डॉगी के पोज में खड़ी हो गईं.
वैसे मैं आप सभी को बता दूं कि मेरी मम्मी की उम्र इस वक्त अभी 51 साल की होंगी और उनका फिगर 38-36-42 का होगा. वे एकदम सफेद दूध जैसी हैं.
उनकी चुदाई देखने के बाद मैं अपने कमरे में पहुंचा. मेरी बहन सो चुकी थी. मैंने दरवाजा बंद किया और मेरी बहन की गांड के ऊपर एक हाथ रख कर सहलाने लगा. बाद में मैंने उसकी सलवार नीचे कर दी और उसकी येलो कलर की पैन्टी भी सरका दी. फिर मैंने उसको सीधा करके एक उंगली उसकी चूत में डाल दी, वो एकदम से जाग गई.
मैंने उसके मुँह पे हाथ रख दिया ताकि वो चिल्ला न सके. मैंने उससे कहा कि मेरी बात सुनो, प्लीज चिल्लाना मत … पहले मेरी पूरी बात सुन लो.
उसने हां में जवाब देते हुए सिर हिलाया तो मैंने अपना हाथ हटा दिया.
मैं चुप रहा तो वो समझ गई कि मैंने सिर्फ उसको न चिल्लाने के लिए यूं ही कहा था कि मेरी बात सुन लो.
उसने अपने कपड़े ठीक से पहने और मुझसे बोली कि तुम्हें शर्म नहीं आती अपनी बहन के साथ ऐसा करते हुए?
मैंने कहा- सॉरी मुझे माफ़ कर दो … अब से ऐसा कुछ नहीं होगा सॉरी.
उसने ओके कहा और वो सोने लगी. लेकिन मैं कहां मानने वाला था. मैं उसके साथ सट कर सोने लगा. मैंने उसे अपने से चिपका कर कर सोने लगा. वो मुझे खुद से दूर करने लगी.
उसने कहा- तुम ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- क्या अब मैं अपनी बहन के साथ सो भी नहीं सकता?
उसे मुझ पर दया आ गई और वो बोली- हां सो जाओ … लेकिन और कुछ मत करना … वरना पापा को बता दूँगी.
मैंने हां कहा और हम सोने लगे.
कुछ देर बाद मुझसे चिपक कर सो गई, तो मेरे लंड ने फिर से मुँह उठाना शुरू कर दिया. मैंने उसके चूचे दबाने के शुरू कर दिए. क्या मस्त बूब्स थे मेरी बहन के … एकदम कड़क छोटे छोटे.
कुछ देर यूं ही उसके मम्मे दबाने के बाद मैंने अपनी जीभ उसके निप्पल पर रख दी. शायद वो जाग चुकी थी, पर उसने की कुछ कहा नहीं. इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई. फिर मैंने उसकी कमीज़ को उतार दिया और ब्रा भी निकाल दी.
तभी मेरी बहन ने अपनी आंखें खोलीं और शरारती मुस्कान देते हुए बोली- तुम नहीं मानने वाले ना.
मैंने हंसते हुए ना में सिर हिला दिया और उसे किस करने लगा.
अब वो भी मेरा साथ देने लगी. क्या मस्त रसीले होंठ थे उसके … एकदम नर्म पिंक से … फूले हुए मोटे मोटे रसभरे होंठ थे.
करीब 5 मिनट के बाद हम दोनों की चुदास जाग गई … तो मैंने उसकी सलवार उतार दी और पैन्टी भी निकाल दी.
क्या लंड उठा देने वाला फिगर था उसका … मैं तो बस देखता ही रह गया. उसका फिगर 28-24-26 का था … वो एकदम स्लिम थी. उसके कपड़े उतारने के बाद मैंने उसको फिर से बेड पर लिटा दिया और उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया. बस पांच मिनट में ही वो झड़ गई.
मैं उसकी चूत को चाटना चालू रखा, तो वो जल्द ही फिर से गर्म हो गई.
इसके बाद मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत पर सैट किया और धक्का दे दिया लेकिन मेरा लंड फिसल गया. यह मेरा पहला अनुभव था. अब मैंने अपने लंड पर थोड़ा थूक लगाया और अपने हाथ से लंड पकड़ कर बहन की चूत के होल पर सैट करके आहिस्ता आहिस्ता दबाया. अभी मेरे लंड का सिर्फ टोपा ही अन्दर गया था कि मेरी बहन कसमसाने लगी. तभी मैंने एक जोर का धक्का दे मारा और मेरा दो इंच लंड चुत के अन्दर घुस गया. उसकी वजह से मेरी बहन की चीख निकल गई. मैंने जल्दी ही मेरे होंठ उसके होंठ पर रख दिए और उसे किस करने लगा ताकि उसकी आवाज बाहर न निकल पाए. कुछ पल बाद उसकी आवाज भी दब गई थी और दर्द भी कम होने लगा था.
कुछ देर रुकने के बाद मैंने फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. पहले आधा, बाद में पूरे का पूरा लौड़ा उसकी चूत में घुस चुका था.
अब वो भी गांड उठाते हुए मेरा साथ दे रही थी. पन्द्रह मिनट की धकापेल चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था, तो मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसके मुँह में देने लगा … लेकिन उसने लंड मुँह में लेने से मना कर दिया और बाथरूम में चली गई. मैंने हाथ से हिला कर अपना काम पूरा किया और उसके पीछे बाथरूम में आ गया. वो फव्वारे के नीचे नंगी नहा रही थी. मैंने पीछे से उसको पकड़ लिया और उसकी गांड में लौड़ा दबाने लगा. उसने अपनी एक टांग कमोड पर रखी और अपने हाथ से मेरा लंड अपनी चूत पर सैट कर लिया. फिर हम दोनों सेक्स करने लगे. बीस मिनट तक चुदाई करने के बाद हम दोनों झड़ गए.
अब हम दोनों ही काफी थक चुके थे इसलिए कमरे में आ गए और बेड पर नंगे ही एक दूसरे से चिपक कर सो गए.
इसके बाद हम दोनों मम्मी पापा की चुदाई देखते और गर्म होकर उनके जैसे ही चुदाई के आसनों का मजा लेते.