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Sunday, December 23, 2018

सोनिया की गांड के परखच्चे



मेरा नाम राकेश है मैं मेरठ का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 30 वर्ष है। मैं जिस कंपनी में नौकरी करता था वहां से मेरी जॉब छूट गई और उसके बाद मैं काफी समय तक खाली बैठा रहा, मैंने सोचा कि मैं कुछ अपना ही काम शुरू कर लेता हूं। जब मैंने अपना काम शुरू किया तो कुछ समय तक तो मेरा काम अच्छा चला इसीलिए मैंने सोचा कि क्यों ना अब मैं ब्याज में पैसे ले लूं और अपने काम को और बड़ा करूं इसीलिए मैंने ब्याज में पैसे ले लिए, उसके बाद मैंने अपने काम को और भी बढ़ा लिया। जब मैंने अपने काम को बड़ा किया तो उसके बाद मेरा काम काफी अच्छा चलने लगा, मैं अपने काम से बहुत खुश था इसलिए मैंने एक प्रॉपर्टी ले ली।  उस प्रॉपर्टी के लिए मैंने बैंक से लोन ले लिया था और मैं अब बैंक की किस्त भरने लगा था। मैं समय पर बैंक की क़िस्त दे दिया करता, जिससे की मेरा लोन भी अच्छे से चल रहा था।
उसी बीच मेरी जिंदगी में एक लड़की ने दस्तक दी और मुझे उससे प्यार हो गया, उसका नाम सोनिया था। सोनिया और मैं करीब आने लगे, मुझे पता ही नहीं चला कि कब वह मुझसे इतना प्रेम करने लगी और मैं भी उसे बहुत ज्यादा प्रेम करने लगा था, मैं उस पर आंख बंद कर भरोसा कर लेता था। एक दिन वह मुझे कहने लगी कि मुझे कुछ पैसों की आवश्यकता है, मैंने उसे कहा कि ठीक है तुम मुझसे पैसे ले लेना। मैंने उसे कुछ पैसे दे दिए, वह कॉलेज में पढ़ती थी, मैंने जब उसे पैसे दिए तो वह बहुत खुश हुई और उसने मुझे गले लगा लिया, उसके बाद कई बार वह मुझसे पैसे की डिमांड करने लगी, मैं उसे हमेशा ही पैसे दे दिया करता और उस पर आंख बंद करके भरोसा करता था। मैं उसे अपने घर भी लेकर आया और मैंने अपने माता पिता से भी सोनिया को मिलाया, मेरे माता-पिता को सोनिया बहुत ही पसंद थी लेकिन मुझे उसके बारे में पता नहीं था कि वह सिर्फ मुझसे पैसे लूट रही है, उसने कई लड़कों से ऐसे ही पैसे लूटे हैं।
उसने मेरी आंखों पर अपने प्यार का जाल बिछा दिया था, मैं उस पर बिल्कुल भी शक नहीं कर पाया। मुझे लगा कि सोनिया भी मेरे लिए पूरी तरीके से समर्पित है इसीलिए मैंने भी उसकी हर बात को मानना शुरू कर दिया और सोनिया भी मेरी हर बात को मानती थी। मुझे उसने कभी भी ऐसा शक नहीं होने दिया कि वह मुझसे प्रेम नहीं करती लेकिन मुझे नहीं पता था कि उसके दिल में मेरे लिए बिल्कुल भी प्यार नहीं है और ना ही वह मुझसे प्यार करती है। एक दिन मैंने उसे एक लड़के के साथ देख लिया था, उसके बाद मैंने उससे पूछा लेकिन उसने मुझे कुछ भी नहीं बताया, वह कहने लगी कि वह मेरा भाई है। मैंने उसे कहा कि यदि वह तुम्हारा हमारा भाई है तो  तुमने मुझे उससे कभी मिलाया क्यों नही,  वह कहने लगी कि वह मेरा दूर का भाई है और उस दिन वह मुझे मिल गया था तो इसीलिए मैंने उससे बात कर ली। उस दिन मुझे सोनिया पर शक हो गया था और मैं सोचने लगा कि यदि कभी सोनिया ने मुझे धोखा दे दिया तो मैं तो पूरी तरीके से बर्बाद हो जाऊंगा लेकिन तब तक उसने मुझे अपने जाल में फंसा लिया। मुझे उसने उस लड़के से मिलवाया तो वह लड़का भी कहने लगा कि सोनिया मेरी बहन है और हम दोनों दूर के रिश्तेदार हैं, मुझे भी उस दिन सोनिया पर पूरा यकीन हो गया और मैंने उस पर शक करना छोड़ दिया लेकिन मैं उस दिन बहुत गलत था, मुझे नहीं पता था कि वह मेरे साथ बहुत बड़ा गेम खेल रही है। एक दिन वह मेरे पास आई और कहने लगी कि मेरे पिताजी की बहुत ज्यादा तबीयत खराब है और वह बहुत ही सीरियस हो चुके हैं, मैं सोनिया से वैसे भी अंधा प्यार करता था तो मैंने उसे कहा कि उन्हें क्या हो गया है, वह कहने लगी कि उन्हें कैंसर हो गया है और वह बहुत सीरियस हो चुके हैं, डॉक्टरों ने कहां है कि यदि उनका जल्दी से ऑपरेशन नहीं हुआ तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। जब यह बात सोनिया ने मुझसे कहीं तो मैंने सोनिया से कहा कि क्या तुमने उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवा दिया है, वह कहने लगी हां वह हॉस्पिटल में ही है और हमारे पास कुछ पैसे कम पड़ गए यदि तुम मेरी मदद कर दो तो मैं तुम्हें वह पैसे कुछ दिनों बाद ही लौटा दूंगी।
मैं सोनिया के प्यार में पागल था तो मैंने उसे पैसे दे दिए, मैंने जब सोनिया को पैसे दिए तो वह कहने लगी कि तुमने आज साबित कर दिया कि तुम मुझसे कितना ज्यादा प्यार करते हो। उसके बाद वह हो चली गई और मैं दुकान में बैठा हुआ था, मैंने सोनिया को फोन किया तो वह कहने लगी कि मैं अस्पताल में ही हूं और तुम्हें कुछ समय बाद मैं फोन करती हूं। मैंने जब सोनिया को फोन किया तो मुझे पता चला कि वह किसी और का नंबर है और सोनिया ने वह नंबर लिया हुआ था। मैंने जब उस व्यक्ति से पूछा तो वह कहने लगा कि सोनिया ने मुझे भी धोखा दिया है, मेरी और सोनिया की शादी हो चुकी थी लेकिन उसके बाद वह किसी और के साथ भाग गई। जब मुझे यह बात पता चली तो मैं उस व्यक्ति से मिला, वह व्यक्ति बहुत फूट फूट कर रो रहा था और कह रहा था कि क्या तुम्हें भी उसने बेवकूफ बना दिया, मैंने उसे कहा कि हां वह कह रही थी कि मेरे पिताजी की तबीयत खराब है, मुझे कुछ पैसों की आवश्यकता है तो मैंने उसे कुछ पैसे दे दिए थे लेकिन उसके बाद से ना तो सोनिया का फोन लग रहा है और ना ही उसका कुछ पता है।
मुझे भी अब पूरा शक हो चुका था कि सोनिया ने मुझे चूना लगा दिया है और अब वह कभी भी मेरे पास वापस नहीं आने वाली है। मैं जब अपनी दुकान पर गया तो मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ और मुझे लगा कि शायद अब मैं इस हादसे से नहीं भरने वाला हूं क्योंकि मैंने पहले ही बहुत सारे पैसे बाजार से प्याज में लिए हुए थे और मैं वैसे ही कर्जे में चल रहा था और ऊपर से मैंने सोनिया को पैसे भी दे दिए थे। मेरे पास कुछ भी पैसे नहीं बचे थे इसलिए मैंने सोचा कि मैं शायद अब यह पैसे नहीं चुका पाऊंगा।  जितनी भी मेरे पास शेविंग थी, मैंने वह सब निकाल कर लोगों को लौटा दिए, जितना मुझसे हो सकता था मैंने उतने पैसे सबको लौटा दिए, उसके बावजूद भी काफी पैसे कम पड़ रहे थे लेकिन मैंने उन लोगों से समय मांग लिया और जब उन्हें मेरे बारे में जानकारी हुई तो उन लोगों ने मुझे समय दे दिया। मुझे लगा कि शायद अब मैं मेरठ में ना रहूं तो ही अच्छा रहेगा इसीलिए मैं सोचने लगा की मैं किसी और शहर जाकर बस जाता हूं।
मैं बहुत ज्यादा टूट चुका था और अब मैं बिल्कुल भी अपने बारे में नहीं सोच रहा था इसीलिए मैं बहुत शराब पीने लगा, मुझे लगा कि शायद अब मेरा जीवन बर्बाद हो चुका है लेकिन मुझे उस वक्त मेरे एक दोस्त ने बहुत ही सपोर्ट किया, उसने कहा कि तुम मेरे साथ चंडीगढ़ चलो, मैं उसके साथ चंडीगढ़ चला गया और मैं चंडीगढ़ में कुछ दिन काम करने लगा तो मैंने थोड़े बहुत पैसे लोगों के लौटा दिए थे। मैं बहुत ज्यादा ही दुखी था लेकिन मैं अपना काम भी अच्छे से कर पा रहा था। एक दिन मुझे एक व्यक्ति मिला वह कहने लगा कि क्या तुम जिगोलो सर्विस में काम करोगे उसके बदले तुम्हें बहुत अच्छे पैसे मिल जाया करेंगे। मैंने उसे कहा ठीक है मैं जिगोलो सर्विस में काम करने के लिए तैयार हूं। उस व्यक्ति ने मुझे एक महिला के पास भेजा और जब मैं उस महिला के पास गया तो मैंने देखा कि वह तो सोनिया है। मेरा पूरा दिमाग खराब हो गया और मैंने उसे कस कर पकड़ लिया। वह भागने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैंने उसकी सलवार को खोलते हुए उसकी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया। मेरा लंड जैसे ही सोनिया की गांड में घुसा तो वह चिल्लाने लगी। मैंने उसे बड़ी तेज तेज धक्के देने शुरू किए और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
वह भी बहुत खुश हो रही थी और कह रही थी मुझे बहुत मजा आ रहा है। मैंने उसे कहा कि तुम्हारी वजह से मेरी गांड फट गई है और मैं लोगों को मुंह दिखाने के लायक भी नहीं रहा। वह कहने लगी मैं तुम्हारे पैसे तुम्हें लौटा दूंगी तुम उसकी चिंता मत करो। मैं अब उसकी चूतडो को पकड़कर उसे धक्के दे रहा था वह बहुत चिल्ला रही थी। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था जब मैं उसे धक्के दे रहा था। मैं उसकी गांड की गर्मी को ज्यादा समय तक नहीं झेल पाया और उसकी गांड के अंदर मेरा माल गिर गया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मेरे अंदर का गुस्सा अभी तक शांत नहीं हुआ था मैंने अपने लंड को हिलाते हुए दोबारा से सोनिया की गांड के अंदर डाल दिया। जब मेरा लंड सोनिया की गांड में घुसा तो मुझे बहुत मजा आने लगा मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के देने लगा। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा है जिस प्रकार से तुम मुझे झटके दे रहे हो। मैंने सोनिया से कहा कि तुमने भी मेरी गांड फाड़ी है आज मैं तुम्हारी गांड के  परखच्चे उड़ा कर रख दूंगा। मैंने अब उसे बड़ी तेज तेज धक्के मारे उसकी गांड से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर आने लगी थी लेकिन मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था। मैं सोनिया को बड़ी तेजी से पेल रहा था जैसे ही मेरा माल दोबारा से सोनिया की गांड में घुसा तो मैंने अपने लंड को सोनिया की गांड से बाहर निकालते हुए सोनिया को अपनी बाहों में ले लिया। वह मुझे कहने लगी मैं तुम्हें तुम्हारे पैसे भी लौटा दूंगी। मैंने उसे कहा कि तुम मेरे पैसे मुझे अभी लौटा दो। उसने अपनी अलमारी से पैसे निकाले और उसके बाद मैंने उसे वह पैसे लिए। जितने समय तक वह चंडीगढ़ में थी मैंने उसकी गांड मारी। उसने मुझसे कहा कि मुझे अपनी गांड मरवाने में बहुत मजा आता है ना जाने उसने कितने लोगों के लंड अपनी गांड में लिए होंगे।

अठरह बरस की शोला जवानी



सभी अन्तर्वासना की सेक्स स्टोरी पढ़ने वालों को मेरा प्रणाम. इस वक़्त मेरी उम्र 24 साल की है … मैं शादीशुदा हूँ. मैं 5 फुट 4 इंच लंबी यौवन से मालामाल एक खूबसूरत औरत हूँ. मैं बहुत सालों से अन्तर्वासना के साथ जुड़ी हूँ …. और इसमें प्रकाशित होने वाली हर कहानी का पूरा लुत्फ उठाती हूँ.
मेरे पति का स्पेयर पार्ट्स का और साथ प्रोपेर्टी डीलिंग का काम है. मैं भी अपना पार्लर चलाती हूँ. मैंने सोचा क्यों न अपनी ज़िंदगी के कुछ हसीन पलों को आपके सामने लाऊं.
यह स्कूल के समय की ही घटना है. उस वक्त मुझपे जवानी समय से पहले ही चढ़ने लगी थी. उसका एक बड़ा कारण था मेरी संगत. स्कूल से ही उन लड़कियों के साथ मेरी दोस्ती थी, जो मुझसे बड़े घर से थीं.
अक्सर स्कूल में वो अपने आशिकों के ज़रिए गंदी मैगज़ीन लातीं और देखती रहतीं. जब मैं बारहवीं में थी, तब बोर्ड की क्लास थी. अपनी सहेली पिंकी के घर हम तीनों सहेलियां में पिंकी और रिचा पढ़ाई के लिए एक रात रुकीं. वो दोनों उन दिनों अपने आशिकों के साथ चुदाई का सुख भोग चुकी थीं. मैं घर वालों के डर से लड़कों के चक्कर में पड़ने से डरती थी. हालांकि बहुत लड़के मुझ पर लट्टू थे और मेरी शोला बन चुकी जवानी के रस को निचोड़ना चाहते थे. मैं अपने घर बाथरूम में अक्सर अपनी नंगी जवानी देख, अपने स्तनों को दबाती सहलाती रोंएदार चूत के गुलाबी होंठों को छेड़ लेती. अपनी उंगली साबुन से चिकनी करके अपनी चूत में हल्के हाथ से डालने की कोशिश करती औऱ दाने को रगड़ कर मजा ले लेती.
उस रात जब पिंकी के घरवाले सो गए, तो उसने दरवाज़ा बंद करके बुक से एक सीडी निकाली. उसे सीडी प्लेयर में लगा कर चलाया. वो सीडी एक ब्लूफिल्म की थी. मैं पहली बार ब्लू फिल्म देख रही थी. मैं नज़र गड़ाए उसको ही देख रही थी. बड़े बड़े लंड और नंगी गोरियां बेशर्म होकर अपनी जवानी का लुत्फ उठा लंड चूस रही थीं.
तभी रिचा ने मुझे बांहों में भर लिया, पिंकी ने अपना टॉप उतार फेंका. हम तीनों एक दूसरे से लिपट गईं. उन दोनों ने मेरे कपड़े उतार दिए और पिंकी ने मेरे स्तन चूसने लगी. रिचा मेरी कुंवारी चूत को चूमने लगी. जब मैंने उनकी चूत देखी तो उनकी फांकें थोड़ी खुल चुकी थीं.
पिंकी बोली- कनिका, तेरी फिगर तो बहुत ज़बरदस्त है.
मैं- कैसे?
उसने मुझसे कहा- तेरी जवानी तो शोला बन चुकी है. तुम यौवन का पौधा बन चुकी हो, तुझे भी अब माली की ज़रूरत है … जो तेरे इस पौधे को पानी दे. इससे तेरे पौधे का फल और रसीला हो जाएगा.
मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था.
उसने मुझसे कहा- हम इसी लिए इकठ्ठी हुई हैं ताकि तुझे जवानी के असली सुख और असली मज़े को दिखा सकें.
उसने मुझे एक पत्र दिया. ये एक प्रेम पत्र था. उसने बताया कि यह पत्र +2 के लड़के देवेंद्र ने तेरे लिए लिखा है.
मैंने उसको देखा तो उस पत्र में उसने प्रेम का इज़हार किया था और अपना फोन नंबर लिखा था. मैं देवेंद्र को जानती थी, वो अक्सर मुझे देखा करता था.
उस रात हम तीनों ने एक दूसरे को खूब चूसा. अगले दिन जब वहां से स्कूल गई तो देवेंद्र रास्ते में खड़ा मिला. आज मैंने भी उसको ठीक से देखा. वो बहुत हैंडसम लड़का था. आज मैं उसको देख मुस्कुरा निकल गई. एक खाली पीरियड में मैं, पिंकी और रिचा ग्राउंड के कोने में बैठी थीं, तभी देवेंद्र भी आ गया.
वो दोनों साइड में चली गईं, तो देवेंद्र बोला- फिर क्या सोचा आपने?
मैंने पूछा- किसके बारे में?
वो बोला- मेरे प्यार के बारे में!
उसने मेरे हाथ पे अपना हाथ रख दिया और बोला- आई लव यू!
मैंने कहा- हाथ हटाओ … कोई देख लेगा.
वो बोला- तो जवाब दे दे … मैं जाऊं.
मेरे मुँह से निकल गया- आई लव यू टू.
वो मुस्करा कर बोला- आज कॉल करना.
मुझे भी अन्दर तक सनसनी दौड़ गई थी. जिन्दगी में किसी लड़के से प्यार का इजहार हुआ था.
शाम को घर में कोई नहीं था, मौका देख कर मैंने उसको फ़ोन किया और ऐसे हम रोज़ बात करने लगे.
एक दिन उसने मुझसे कहा- कल स्कूल मत जाना और पिंकी के साथ आ जाना. मुझसे रहा नहीं जाता कनु!
इधर मेरी शोला बन चुकी जवानी में भी आग लगी पड़ी थी, दिल चाहता था कि देवेंद्र मेरी इस आग को ठंडी कर दे. पिंकी का आशिक और देवेंद्र आपस में दोस्त थे. मैंने पिंकी को फोन किया तो वो बोली- हां मुझे मालूम, हमें कहाँ चलना है.
मैं पूछा- बता तो दे ना … क्या होगा?
पिंकी बोली- उधर चल कर सब मालूम हो जाएगा, बस तू अपने नीचे के सब बाल वगैरह साफ कर लेना, पहली बार आशिक से मिलोगी.
मैं समझ गई कि माली पौधे में पानी देगा. उसी रात को ही क्रीम से मैंने अपनी सील पैक चूत को चिकनी किया और अगले दिन स्कूल ड्रेस में ही स्कूल निकली.
पिंकी ने मुझसे कहा था कि मोड़ वाले साइबर कैफे के पास खड़ी मिलना.
पिंकी मुझे वहीं मिली और उसके साथ चलने लगी. आगे बाजार में एक एस्टीम गाड़ी खड़ी थी. पिंकी के साथ उसमें बैठ गई. थोड़ा आगे चलकर बाजार से निकल उसके आशिक ने गाड़ी रोक दी और पिंकी उतर कर आगे की सीट पर चली गई और देवेंद्र पीछे की सीट पर मेरे साथ आ गया.
उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे गाल पर चूमते हुए बोला- थैंक्स मेरा प्यार कबूल करने के लिए!
गाड़ी चलती गई देवेंद्र ने मेरे गले में बांहें डाल दी और मेरे होंठ चूसने लगा. तभी शीशे से विकी को झाँकते देख मैं शर्मा गई. देवेंद्र ने हाथ मेरी कमीज में घुसा मेरी चूची को दबाया, मस्ती में मैंने आंखें बंद कर लीं और देवेंद्र खुलकर मेरे जिस्म से खेलने लगा. उसने मेरा हाथ पकड़ अपने खड़े लंड पर अचानक से रख दिया. तब मैंने एकदम से आंखें खोलीं … बड़ा कड़क लंड था … बहुत बड़ा लग रहा था.
खैर मैंने तो पहली बार लंड पकड़ा था, तब यह नहीं पता था कि हर मर्द का अलग साइज़ होता है. तभी गाड़ी रुकी. खुले खेतों में एक अकेली हवेली सी बनी थी. बाहर कुछ भैंसें बंधी हुई थीं.
विकी बोला- लो आ गए.
हम चारों उतर गए. आगे चले तो उधर दो कमरे थे.
विकी बोला- चलो भाई … अब अपने रास्ते.
हम दोनों एक कमरे में आ गए. कमरे की एक दीवार के साथ नीचे बिस्तर लगा था. मुझे बांहों में भरते हुए देवेंद्र उसपे लेट गया और मुझे नीचे लिटा दिया. अब देवेंद्र मेरे ऊपर आ गया था. पहली बार अपनी जवानी को किसी मर्द की बांहों में डाला था. दीन दुनिया भूल हम एक दूसरे को पागलों की तरह चूम रहे थे.
देवेंद्र ने अपनी शर्ट उतारी और फिर मेरी कमीज उतार दी. काले रंग की ब्रा में दूध से सफेद मेरे कोरे चूचे खुले में देख देवेंद्र पागल हो गया. उसने एक पल में मेरी ब्रा खोली और मेरे चूचों को आज़ाद कर दिया. देवेन्द्र ने मेरे छोटे छोटे निप्पलों को मुँह में भर कर चूसा तो मैं मदहोश, पागल सी होने लगी और मैंने उसके लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया.
उसने पैंट भी उतार दी. मैंने देखा कि उसका लंड उसके अंडरवियर को फाड़ने पर उतारू था. जब उसने अंडरवियर भी उतारा तो पहली बार हक़ीक़त में लंड सामने देख घबरा गई. उसका तना हुआ सांवला लंड था.
“कनु मेरी जान, यह तुम्हारा है … इससे खेलो, चूमो, चाटो सहलाओ.”
यह कह कर उसने मेरे मुँह में लंड डाल दिया. पहली बार था, इसलिए उसने खुद अलग अलग तरीकों से मुझसे लंड चुसवाया. मुझसे अपने टट्टे भी चुसवाये.
फिर उसने मेरी टांगें फैला बीच में बैठ अपने होंठ मेरी नर्म कुँवारी गुलाबी चूत पर टिका दिए औऱ चूत चूसने लगा. जब उसने मेरी चूत में जीभ घुसा कर घुमाई, तो मैंने उसके बालों में हाथ फेरते हुए उसके सर को चूत पर दबा लिया. बस कुछ ही पलों में मैं अपने चूतड़ उठा उठा चूत चटवा रही थी. फिर उसने मेरी कच्ची और यौवन से भरी जवानी को लूटने का अगला कदम उठाते हुए मेरी टांगें उठाईं और लंड चूत पर टिका दिया.
मेरा बदन थोड़ा कांप सा उठा. रिचा ने एक बार बताया था कि जब चूत पहली बार फटती है, तो बहुत दर्द होता है.
देवेंद्र ने तरीके से मेरे होंठों को होंठों में भर कर, थूक से गीला करके लंड को झटका दिया. मेरी सांसें मानो रुक गईं … दिल किया कि चीख मारूँ, पर वो खेला हुआ खिलाड़ी था. उसने मुझे जकड़ते हुए एक औऱ झटका मारा औऱ मेरी चूत फट गई. कुछ खून की धार से निकल गई.
पर कहते हैं ना … जंग कोई भी हो … खून खराबा तो होता ही है.
कुछ देर दर्द से मुझे मजा आने लगा और खुद चूतड़ उठा उठा चुदने की इच्छा जाहिर करने लगी. उसको भी मालूम पड़ गया और उसने ज़ोर जोर से मुझे पेला.
चुदाई क्या चीज़ है … आज मुझे पता चला. उसने झटके पे झटके लगाकर मुझे चोदा. कुछ ही देर में मैं झड़ने लगी औऱ मेरे फूटे लावे से उसका लंड भी छूटने लगा.
वो पल ऐसा था, जो कभी नहीं भूल सकती … हालांकि इसके बाद कई तगड़े लंड झेल चुकी हूँ.
उस दिन उसने मुझे दो बार पेला और मेरी अठरह साल की नाज़ुक क़ातिल जवानी में ही मुझे कली से फूल बना दिया.
यह थी मेरी पहली चुदाई. अगली बार अपनी चूत में घुसे दूसरे लंड के बारे लेकर आऊंगी. तब तक नमस्ते.
अपने लंड का ख्याल रखना … मुठ बाद में मारना, पहले मेरी चुदाई की कहानी पर दो शब्द लिख कर मुझे मेल जरूर कर देना.
बाय
kanikamishra9019@gmail.com

पन्द्रह दिन बाद मनाई दुल्हन संग सुहागरात

कहानी पढ़ने वाले सभी दोस्तों को सोलापुर से कुमार का नमस्कार. मेरी कहानियां आपको पसंद आई होंगी, ऐसा मानकर और एक नई कहानी लेकर आपके सामने पेश हो रहा हूँ.
दोस्तो, मेरी बीवी पूजा मुझे बहुत पसंद करती है. उसका कहना है कि मैं दिखने में स्मार्ट हूँ. मेरे होंठ तो उसे बहुत पसंद हैं. वो हमेशा मुझसे कहती है कि तुम अपने होंठ मुझे दे दो और मेरे होंठ तुम ले लो.
इसलिये वो मेरे होंठ हमेशा चूसती रहती है.
हम दोनों को अलग अलग पोज में चुदाई करना बहुत पसंद है. हम दोनों कहीं भी, कभी भी चुदाई कर लेते हैं. मैं आज आपको बताऊंगा कि हमारी सुहागरात कैसी रही, हमने सुहागरात कैसे मनाई. क्योंकि हर दुल्हे और दुल्हन की सुहागरात कभी न भूलने वाली यादगार रात होती है.
हमारी शादी हुई थी तो पहले के पन्द्रह दिन चूमाचाटी में, पकड़ा पकड़ी में ही चले गए थे. मेरी दुल्हन पूजा ने मुझे चोदने नहीं दिया.. क्योंकि उसे चुदाई में होने वाले दर्द के बाद मिलने वाले सुख के बारे में कुछ मालूम ही नहीं था. मैं अपना लंड चुत में डालने की कोशिश करता तो उसको चुत में दर्द होता था.. जिस वजह से वो मुझे मना कर रही थी. लेकिन मुझे तो चोदना था, तो मैंने ठान ली कि आज जरूर चोदूँगा. रात को वो कमरे में आ गई. वो आते ही मेरे गले लग गई, मैं उसके होंठ अपने होंठों में लेकर चूसने लगा.
हम दोनों बेड पर आ गए. मैंने उससे कहा कि आज मैं तेरी चुत जरूर चोदूँगा.
शायद उसको भी चुदवाना तो था लेकिन वही सुहागरात की पहली चुदाई के दर्द का डर उसको रोक देता था.. और मैं अपनी पूजा को मना कर ही चोदना चाहता था.
आज मैंने उससे कहा तो उसने कहा- आज तुम अपना लंड मेरी चुत में धीरे से अन्दर डालना.. मेरी चुत नई है.. कहीं फट न जाए.
मैं उसको बाँहों में लेकर उसके होंठ चूसने लगा. उसका ब्लाउज निकाल कर मम्मों को धीरे धीरे मसलने लगा. उसके निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा. वो भी गर्म हो गई. मैंने एक हाथ से पूजा की साड़ी और पेटीकोट कमर के ऊपर तक उठा दिया. उसकी चुत पर अपना हाथ फेरने लगा. दाएं हाथ की एक उंगली को पूजा की चुत में डाला तो चुत पूरी गीली हो गई थी. मुझे मालूम था चुत को और ज्यादा गीला करना पड़ेगा.
मैंने उसके होंठ चूसते चूसते अपने एक हाथ की उंगली पर अपना थूक लेकर चुत की दरार में लगा दिया और चुत को ज्यादा गीला कर दिया. फिर अपने लंड पर भी थूक लगाकर लंड को भी चिकना कर दिया. फिर मैं उसके ऊपर दोनों पैरों के बीच आ गया. अपनी बीवी के बगल में नीचे अपना एक हाथ टिकाकर दूसरे हाथ से अपना लंड उसकी चुत की दरार में लगा दिया और हल्का सा दबाव डाला. अब मेरे लंड का सुपारा उसकी चुत में फंस गया था.
फिर मैंने अपने दोनों हाथों को पूजा के दोनों मम्मों के बाजू रखकर अपने शरीर का भार हाथों पर ले लिया. इसके बाद हौले हौले मैं लंड को चुत में दबाने लगा. लगभग एक इंच से ज्यादा लंड पूजा के चुत में घुस गया था. पूजा को दर्द हो रहा था. पूजा ने अपने हाथों से मेरे हाथ पकड़ रखे थे. उसको दर्द होना आरम्भ हो गया था. मैंने थोड़ा झुक कर पूजा के होंठ अपने होंठों में लेकर उसका मुँह बंद कर दिया.. ताकि ये चिल्ला न सके. फिर मैंने अपना लंड चुत में तीन चार बार अन्दर बाहर कर दिया, पूजा अपनी आंखें बंद करके दर्द सहने की कोशिश कर रही थी.
मैंने अपने दोनों हाथ बीवी की गर्दन के नीचे डालकर उसे पकड़ लिया. फिर मैंने एक जोरदार झटका मारकर अपना सात इंच का लंड बीवी की चुत में पुरा घुसा दिया.
पूजा दर्द से छटपटाने लगी, मुझे अपने ऊपर से धकेलने लगी. लेकिन उसके होंठ मैंने अपने होंठों से बंद करके रखा था, इसलिये उसके चिल्लाने की आवाज मुँह में ही दब गई. मैंने अपना लंड चुत से कुछ मिनट तक बाहर निकलने ही नहीं दिया.
कुछ देर बाद मेरी पूजा शांत हो गई. मैंने अपने होंठ अलग किए. जब मैंने पूजा के चेहरे पर नजर डाली तो देखा कि उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे. लेकिन मेरी प्यारी बीवी के होंठों पर हल्की सी दर्द मिश्रित मुस्कान थी. उसने मुझे चूमा तो मैं समझ गया कि ये ठीक है.
बस फिर क्या था.. मैंने कसकर उसे बाँहों में लेकर उसके होंठ चूसने लगा. अब वो भी मेरे होंठ चूसकर मेरा साथ देने लगी. मेरा लंड चुत में ही धंसा पड़ा था. मेरी प्यारी बीवी पूजा सब भूलकर मुझे चूम रही थी. मैंने मेरा लंड थोड़ा सा बाहर निकाल कर फिर से चुत में घुसा दिया.
अब मेरी बीवी को लंड का चुत में अन्दर बाहर होना अच्छा लग रहा था. मेरा लंड अब चुत में आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था. पूजा की चुत ने पानी छोड़ दिया था. हम दोनों चुदाई में तल्लीन हो गए. बहुत देर से चुदाई कर रहे थे, तो मेरी भी वीर्य की धार छूटने वाली थी. मैंने चोदने की रफ्तार बढ़ा दी.. और मेरा सफेद, गाढ़ा वीर्य अपनी प्यारी बीवी की चुत में डाल दिया.
फिर मैं निढाल होकर बीवी को बाँहों में लेकर उसके ऊपर ही सो गया. चुदाई के बाद मेरा लंड चुत से बाहर निकालकर देखा, तो लंड पर थोड़ा सा खून लगा हुआ था. बीवी की चुत से भी हल्का सा खून बाहर आ रहा था.
मित्रो, हमारी शादी को 19 साल हो गए है लेकिन सुहागरात से लेकर आज तक हमारी चुदाई जारी है. चुदाई की मिठास हम दोनों में अभी भी है. मेरी प्यारी बीवी मुझे चोदने के लिये कभी मना नहीं करती, क्योंकि उसे मालूम है, मैं जब भी उसको चोदता हूँ, तो उसे और उसकी चुत को बहुत खुश करता हूँ.
मेरी सुहागरात पर मेरी दुल्हन की चुदाई की कहानी आपको पसंद आयी होगी. आपको मुझे मेल करके जरूर बताना.
kadrain6@gmail.com

Wednesday, December 19, 2018

पाँच लौड़ों से चुद गई जंगल में



दोस्तो, मेरा नाम रानी है और मैं एक शादीशुदा महिला हूँ. मेरी उम्र 27 साल की है. मेरी शादी को 3 बरस हो चुके हैं. मेरे पति एक पुलिस ऑफिसर हैं और वह बहुत ही हट्टे-कट्टे मर्द हैं. साथ ही मेरे पति बहुत ही हैंडसम भी हैं और उनका लंड का साईज भी आम औसत लंड से बड़ा, पूरे सात इंच का है. उस लम्बे मोटे लंड से मेरी चुत की खुजली शांत होती है, पर मेरा मन और तन शादी के बाद बहुत ही कामुक हो चुका है. मेरे पति और में हफ्ते में 5-6 बार सेक्स करते हैं. वो मुझे बिस्तर में हर तरह से खुश रखते हैं.
मेरे घर में सास, ससुर, मेरे पति और मैं रहती हूँ. मैं जहां रहती हूँ, वहां से 7-8 किलोमीटर दूर एक जंगल है. अगर हमें पड़ोस के शहर जाना हो तो उसी जंगल के हाईवे वाले रोड से जाना पड़ता है.
एक बार मेरे पति ड्यूटी खत्म करके घर आये और उन्होंने कहा- मेरी ड्यूटी 3 महीनों के लिए पड़ोस के शहर में लग गई है. मेरा उधर जाना जरूरी हो गया है.
यह सुन कर मैं नाराज हो गई.
मेरे पति ने मेरी ओर देखकर कहा- मेरी जान 3 महीने की ही तो बात है. तुम सिर्फ 3 महीने तक सब्र रखो क्योंकि सब्र का फल मीठा होता है.
यह सुन कर मैंने सोचा कि कोई बात नहीं, किसी तरह 3 महीने तक मैं कन्ट्रोल कर ही लूँगी.
उस रात हम दोनों ने बहुत बार चुदाई की. इसी चुदाई के चक्कर में सुबह हो गई और मेरे पति अपनी ड्यूटी पर चले गए. अब घर में सिर्फ मैं और मेरे सास, ससुर ही रह गए थे.
मेरी चुत की आग दिन पर दिन बढ़ने लगी. जब रात को मेरे सास, ससुर सो जाते थे, तब मैं रसोई में जाकर कोई भी लंड के आकार की चीज, जैसे केला या ककड़ी को अपनी चुत में डाल लेती थी, उसी से मेरी चुत की आग थोड़ी देर के लिए शांत हो जाती थी, पर मेरी चुत को तो बड़े लंड की आदत पड़ी थी. थोड़े ही टाइम के बाद मेरी चुत की आग फिर से भड़क उठती थी, फिर भी मैं किसी तरह कन्ट्रोल कर लेती थी.
एक महीने तक ऐसा ही चला. एक महीने के बाद मेरे सास, ससुर को कुछ रिश्तेदारों के साथ तीर्थ यात्रा पर जाना था. उन्होंने मुझे भी साथ चलने को कहा, पर घर में कोई ना होने के कारण मैं जा ना सकी. मेरे सास, ससुर सुबह होते ही यात्रा पर निकल गए. अब मैं घर में अकेली बची थी. इधर मेरी चुत की आग दिनों दिन भड़कती जा रही थी.
तभी मुझे एक आईडिया आया कि मैं पड़ोस के शहर जाकर अपने पति से अपनी चुत की आग को शांत करवा आऊं. मैंने बहुत सोचा और तय किया कि यह ही सही रहेगा.
उस दिन मैंने घर का सारा काम खत्म किया और शाम के करीब 7 बजे जाने की तैयारी कर ली. मैंने अपने कपड़े पहन लिए थे, पर अन्दर मैंने ब्रा नहीं पहनी थी. फिर पति के लिए थोड़ा खाने का सामान लेकर अपनी कार में बैठ गई. कार चलाते हुए मैं यही सोच रही थी कि कब मैं अपने पति से मिलूं और कब मैं उनके लंड को अपनी चूत में लेकर चुदाई करवा लूँ.
करीब 10-12 किलोमीटर दूर जंगल का हाईवे लग गया. थोड़ी देर चलने के बाद मेरी कार में से कुछ आवाज आने लगी और मेरी कार का टायर भी पंचर हो गया. मैंने अपनी कार हाईवे के साईड पर लगा दी. अब मैं सुनसान सड़क पर अकेली थी और मुझे बहुत ज्यादा डर लगने लगा. मेरा मोबाइल भी डिस्चार्ज पड़ा था, जिससे मैं अपने पति से बात भी नहीं कर पा रही थी. मैं थोड़ी देर कार में ही बैठी रही और इन्तजार करने लगी कि कोई ट्रक या बस दिखे, तो उसमें बैठ कर चली जाऊं.. पर वहां काफी देर तक पर कोई भी वाहन नहीं आया.
अब तक करीब दो घंटे हो गए थे. मौसम में ठंड भी बढ़ने लगी थी. तभी मैंने जंगल की तरफ ध्यान से देखा कि वहां कुछ दूरी पर कोई आग जल रही थी. मैंने सोचा कि वहां पर कोई होगा, तो मेरी मदद करेगा. पर मुझे डर भी लग रहा था.
थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत जुटाई और वहां जाने का फैसला कर लिया. मैं पहले वहां जाकर एक पेड़ के पीछे छिप गई.. फिर मैंने वहां देखा कि वहां पर 5 लोग थे और आग जलाकर कुछ खाना आदि खा रहे थे.
उसी साईट पर लकड़ियों का ढेर लगा था उसके पीछे शायद उन लोगों का ट्रक था. साथ ही वहां पर एक झोपड़ी भी थी.
मैंने उन लोगों को ध्यान से देखा, वे सभी काफी हट्टे कट्टे और काले रंग के थे. उन्होंने लुंगी पहनी हुई थी. लुंगी से उनके लंड के उभार साफ दिख रहे थे. उनके मोटे लंड देख कर मेरी चुत की आग भड़क उठी और मैंने सोचा कि इन्हीं लोगों से चुदाई करवा लेती हूँ.
फिर मैं उन लोगों के पास चली गई. वे सभी 5 मुझे देखने लगे. उनमें से एक बंदे ने कहा- मेमसाब आप कौन है और इस जंगल में क्या कर रही हैं?
मैंने कहा- मैं इस जंगल के हाईवे रोड से जा रही थी, तो मेरी कार खराब हो गई और मुझे आज पड़ोस के शहर में जाना है. आप लोग मेरी कुछ मदद करो तो मेरे लिए अच्छा होगा.
उनमें से एक बंदे कहा कि इतनी रात में तो कोई मिस्त्री भी नहीं मिलेगा और इस समय तो कोई बस या गाड़ी भी नहीं मिलेगी. आप ऐसा कीजिये कि आज रात तक यहीं पर ठहर जाइए, सुबह होते ही आप बस में बैठ कर चली जाना.
मेरे पास उनकी बात मानने के अलावा कोई चारा भी नहीं था. मैंने हां कह दिया.
एक बंदे ने मुझे लकड़ी के बड़े से लट्ठे पर बैठने के लिए कहा. मैं उसपर बैठ गई और सबसे बातचीत करने लगी. बातचीत करते हुए मुझे मालूम चला कि वे लोग जंगल से लकड़ियां काटकर शहर में बेचते थे, उसी से उनका गुजारा चलता था.
उन्होंने मेरे बारे में पूछा तो मैंने कहा कि मेरे पति पुलिस ऑफिसर हैं. मैं उन्हीं से मिलने पड़ोस के शहर में जा रही थी.
ऐसे ही मैंने उन लोगों से काफी देर तक बात की. उनमें से दो बंदे उठ कर अपनी झोपड़ी में चले गए. उधर सिर्फ तीन बंदे रह गए थे और मैं थी. तभी मेरी नजर एक बंदे पर पड़ी, वह मेरे तने हुए मम्मों को बड़ी लालसा से देख रहा था.
उसको देख कर मेरा ध्यान उसके लंड की तरफ गया. उसका लंड काफी बड़ा था जोकि मुझे उसकी लुंगी के उभार से ही साफ़ दिख रहा था. उसके लंड को देखकर थोड़ी ही देर में मेरी चुत में आग लग गई. ऐसा दस मिनट तक चला. मैं अपने मम्मों को अपने हाथ से सहलाते हुए खुजाने का नाटक करने लगी और साथ ही उसके हिलते हुए लंड को देखने लगी.
थोड़ी देर में वह मेरे बाजू में आकर बैठ गया और मेरी तरफ घूरने लगा. मैं उसे देख कर थोड़ी हंस पड़ी. तभी उसने अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया, मैंने कुछ नहीं कहा. वो धीरे-धीरे मेरी जांघों को सहलाने लगा. थोड़ी देर में मैं भी गर्म हो गई और मैंने अपने पैर थोड़े खोल दिए. उसने मेरी चुत को हाथ लगया और ऊपर से ही चूत सहलाने लगा. थोड़ी देर बाद उसने मेरी पैंट के अन्दर हाथ डाल दिया और चुत में उंगली करने लगा.
वहां देख कर बाकी के वहां बैठे दो बंदे भी मेरे पास आकर बैठ गए और मेरे मम्मों को दबाने लगे. अब मैं बहुत ज्यादा गर्म होने लगी. तभी एक बंदे मेरे होंठों पर जोर जोर से किस करने लगा. थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे खड़ी किया और मेरे सारे कपड़े उतार डाले. अब मैं उन लोगों के सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी.
तभी एक बंदे ने झोपड़ी में जाकर उन दो बंदों को भी बता दिया और वो उनको बुलाकर बाहर ले आया.
मैं उनके सामने बैठ कर अपनी चुत को सहला रही थी. उन पांचों बंदों ने मुझे देख कर अपनी लुंगी आदि खोल दिए और लंड सहलाते हुए मुठ मारने लगे. उनके खड़े लंड देख कर मेरे मुँह में पानी आने लगा. सब मेरे पास को आ गए और मैं उन सबका एक-एक करके धीरे धीरे लौड़ा चूसने लगी.
उनमें से एक बंदे ने मुझे अपनी गोद में उठाया और झोपड़ी में लेकर गया. उनकी झोपड़ी में एक खाट थी. उस खाट पर उसने मुझे सीधा लिटा दिया. मैंने लेटते ही अपनी टांगें खोल दीं. अब तक झोपड़ी में वे सब आ चुके थे. उनमें से एक बंदा अपना मुँह मेरी चुत में रख कर मेरी चुत को अपनी जीभ से चाटने लगा. सभी बारी-बारी से मेरी चुत को, मम्मों को और गालों को चूमने चाटने लगे.
थोड़ी देर बाद एक बंदे ने अपना लंड मेरी चुत पर रखा और जोर से धक्का दे दिया. मेरे मुँह आआईई ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ जोर से आवाज निकली. तभी एक बंदे ने अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया. मुझे अपनी चूत में बहुत दर्द हो रहा था. करीब 5 मिनट के बाद मुझे मज़ा आने लगा और मेरी आग बढ़ गई. उसने मुझे हचक कर चोदा और बिना झड़े अपने लंड बाहर निकाल लिया. उसके हटते ही दूसरा मेरी चूत में लंड डाल कर मुझे चोदने लगा. इस तरह से सब बारी-बारी से मेरी चुत को चोदने लगे.
एक बंदे ने मुझे उठा लिया और मैं उसके ऊपर आ गई. उसने मेरी चुत में अपना लंड डाल दिया. मैं उसके लंड पर उछलने लगी. तभी एक और बंदा मेरे ऊपर चढ़ गया. उसने मेरी गांड में अपना लंड डाल दिया. मैं उन दोनों बंदों के बीच में सैंडविच बनकर चुद रही थी. मुझे ऐसा आनन्द पहले कभी नहीं आया था. सबने बारी बारी से मेरे मुँह में और मेरी चुत में अपना लंड दिया.
ऐसी मेरी चुदाई 2 घंटे तक चली और मैं भी झड़ गई. मैं थक कर चूर हो गई थी. मैं खाट पर लेटी रही और सब ने मेरे मुँह में अपना लंड देकर अपना रस मुझे पिला दिया. मैंने 5 लोगों के लंड का रस पी लिया. इसी तरह उस रात मुझे तीन बार बारी बारी से सबने चोदा. सुबह हो गई थी.
फिर एक बंदा पड़ोस के शहर में जाकर एक मैकेनिक को बुलाकर लाया. उसने मेरी कार ठीक की और वह चला गया.
मैं जाने को तैयार होने लगी. तो उनमें से एक बंदे ने मुझसे कहा कि मेम साहब आपको कभी भी चुदाई का मन करे तो हमें बुला लेना.. हम सब आपकी चूत की आग को ठंडा कर देंगे.
उसने अपना नंबर मुझे दिया और वे सभी लोग अपने ट्रक में बैठकर चले गए.
मैं भी वहां से निकल गई और वापिस अपने गाँव आ गयी. पति के पास जाकर भी मैं क्या करती, मैं तो उनसे चुदाने ही जा रही थी, मेरा काम पहले ही हो गया और ज्यादा मजेदार तरीके से!
दोस्तो, मेरी सामूहिक चुदाई कहानी आपको कैसी लगी, मुझे मेरी ईमेल आईडी पर बताना. अगली बार ऐसे ही कहानी लेकर हाजिर रहूंगी.
sonvanrane967@gmail.com

Sunday, December 16, 2018

दोस्त की मम्मी को चोदा



अमीश और मेरी दोस्ती को अब छह साल हो गए थे. हम दोनों साथ में टेनिस खेलने जाते थे और वहीं हमारी दोस्ती हुई थी. अमीश के पापा एक बिल्डर थे और वो बहुत ही अय्याश आदमी थे.
अमीश की माँ परिणीता बहुत ही सेक्सी थीं, जिनकी उम्र कुछ 37 साल की होगी. लेकिन वो किसी भी एंगल से तीस के ऊपर नहीं लगती थीं. परिणीता आंटी की गांड बहुत ही सेक्सी थी. मुझे कहीं लगा था कि आंटी मुझ पे लाइन मारती हैं. मैंने भी बहुत बार आंटी की गांड को याद करके मुठ भी मारी थी. आंटी के बूब्स भी वैसे बहुत मस्त थे. लेकिन मुझे उनकी गांड में ज्यादा दिलचस्पी थी. साड़ी पहन कर जब वो चलती थी, तो पीछे से उनकी एकदम गोल गांड देखकर मेरा लंड मुझे बदतमीज बना देता था.
मैं अमीश के घर में अक्सर ही आता जाता रहता था. हम लोग उसके लैपटॉप पर भी कभी कभी ब्लूफिल्म भी देख लेते थे.
एक दिन मुझे कुछ काम था. इसलिए मैं अमीश के घर गया. अमीश मेरे साथ दस मिनट बैठकर बोला कि मैं अनन्या से मिलकर आता हूँ.
अनन्या उसकी गर्लफ्रेंड थी और मुझे पता चल गया था कि वो जरूर उसकी चूत लेने जा रहा था.
मैं अमीश के लैपटॉप पर काले हब्शी वाली चुदाई की फिल्म लगाकर बैठ गया. अमीश ने मेरे सामने परिणीता आंटी को फ़ोन किया कि मैं बाहर जा रहा हूँ. एक घंटे बाद लौटूंगा. लेकिन उसने आंटी को ये नहीं बताया कि उसका दोस्त यानि कि मैं घर पर हूँ.
अमीश के जाने के बाद, मैंने फिल्म देखना चालू किया. फिल्म खत्म हो गयी और मुझे प्यास लगी थी. मैंने देखा कि पानी की बोतल खाली थी. मैंने सोचा कि चलो मैं ही उठकर किचन के फ्रिज से पानी निकाल लाता हूँ.
मैं किचन की तरफ चल दिया.
मैं किचन के पास पहुंचने ही वाला था कि मेरे कान में ‘अहहह.. अहहाह ऊह्ह्ह्ह…’ की आवाज़ आई. बाजू में ही परिणीता आंटी का कमरा था. तो मैं सोचने लगा कि क्या आंटी के रूम से आवाज़ आ रही है?
मैंने खिड़की के एक छेद से झांक कर अन्दर देखा.. मेरे हाथ से बोतल छूटने ही वाली थी. अन्दर परिणीता आंटी अपनी झांटों से भरी चूत फैलाकर बैठी हुई थीं. आंटी की चूत में एक बड़ा डिल्डो अन्दर बाहर हो रहा था. आंटी की चूत के अन्दर डिल्डो पूरा का पूरा अन्दर जाता था और फिर आंटी उसे बाहर निकालकर वापस अन्दर ले रही थीं. आंटी के मुँह से सीत्कारें निकल रही थीं और वो साथ ही साथ अपने बूब्स से भी खेल रही थीं.
ये सब देख कर मेरा लंड मेरी पैन्ट के अन्दर ही खड़ा हो गया. वैसे भी मैंने अभी ब्लूफिल्म देखी थी और मुठ मारने ही वाला था. आंटी को इस हालत में और उनकी फूली हुई चूत देखकर मेरा लंड तो बिल्कुल उत्तेजित हो चुका था.
तभी मैंने देखा कि आंटी ने डिल्डो को चूत से निकाल लिया. अब आंटी की चूत मुझे साफ़ दिखने लगी. आंटी गोरी थीं, लेकिन उनकी चूत का हिस्सा थोड़ा डार्क कलर का था.
मेरे दिमाग में ख्याल आया कि चलो आज पता कर लिया जाए कि आंटी लाइन ही मारती हैं, या सच में इनके मन में कुछ और भी है. मुझे लग रहा था कि अगर आंटी चोदने दें.. तो मजा आ जाएगा. वैसे भी इस वक्त आंटी गर्म थीं. इसलिए उन्हें भी चुदवाने में दिक्कत नहीं होगी.
ये सब सोचने के बाद मेरे दिल में ख्याल आया और मैंने बोतल को जानबूझ कर नीचे फेंक दी. बोतल की आवाज़ सुनने के बाद आंटी खड़ी हो गईं. मैंने देखा कि उन्होंने झट से कपड़े पहने और वो बाहर आ गईं.
बसन्ती रंग की साड़ी में वो कयामत लग रही थीं. उन्होंने मुझे देखा और बोलीं- तुम यहां?
मैं आंटी की आंख से आंख मिलाते हुए और एक हल्की सी नॉटी स्माइल देते हुए कहा कि जी हां.. आंटी.. मैं तो दस मिनट से आपको ही देख रहा था.
आंटी यह सुनकर हैरान सी हो गईं. उन्होंने मुझे रूम में ले जाते हुए बनावटी अंदाज़ कहा- अमीश को कुछ मत बताना, प्लीज.. उसे बहुत बुरा लगेगा.
मैंने कहा- मैं कुछ भी नहीं बताऊंगा. लेकिन मेरा फायदा क्या होगा?
आंटी मेरी बात समझ गईं, प्यार सर मोड़ कर मेरी आंखों में देख कर कहा कि तुमको एक हजार रूपये दूंगी.
मैंने कहा- नहीं आंटी, पैसे लेने की कोई तमन्ना नहीं है जी.. मुझे आपकी चुत और गांड देखनी है.. और आपको मेरे साथ सेक्स करना पड़ेगा.
आंटी पहले तो चौंक गईं.. फिर इतराते हुए बोलीं- किसी ने देख लिया तो?
मैंने कहा- आंटी अंकल तो रात से पहले आते नहीं है. अमीश को मैं देख लूँगा.
आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा और बोलीं- देखो मैं बदनाम नहीं होना चाहती. मैं पहले से ही तेरी अंकल की बेरुखी से हैरान हूँ.
मैंने कहा- आंटी घबराईये मत. आज से आपको सेक्स को लेकर कोई प्रॉब्लम नहीं होगी.
मैंने फट से आंटी के बूब्स पकड़ लिए और उन्हें दबाने लगा. आंटी ने जल्दी में ब्लाउज के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी, जिससे उनके बूब्स मेरे हाथ में मस्त फिसल रहे थे. आंटी मेरी तरफ हैरान सी होकर देख रही थीं. लेकिन, मुझे कुछ भी करके आज आंटी की गांड में लंड देना ही था.
मैंने आंटी के सारे कपड़े एक एक करके उतार दिए और मैं खुद भी नंगा हो गया. आंटी मेरे लंड की तरफ देख रही थीं. मैंने सीधा आंटी के पास जाकर उनके मुँह में अपने लंड को ठेल दिया. आंटी मेरे लंड को चूसने लगीं और मैं उनके मम्मों के साथ खेलने लगा. आंटी को भी अब मेरे टच का मज़ा आने लगा था. क्योंकि वो बड़े प्यार से लंड को चूस रही थीं.
कुछ देर लंड चूसने के बाद मेरी इच्छा आंटी की चूत देखने की हुई. मैंने लंड को आंटी के मुँह से निकाला और आंटी को पलंग पर लिटा दिया. आंटी की झांटों को हटाते हुए, उनकी मस्त गर्म चूत के अन्दर जैसे ही उंगली की; आंटी की सिसकारी निकलने लगी ‘ऊऊउ. अहहह.. अहहह..’
मैंने पूरी की पूरी उंगली चूत के अन्दर कर दी और धीरे से उसे अन्दर बाहर करने लगा. आंटी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और मजे से मेरी उंगली से चुदवाने लगीं.
मैंने एक हाथ से आंटी की चूत में उंगली की और दूसरे हाथ से मैं अपने लंड के सुपाड़े को सहला रहा था. आंटी के बूब्स के निप्पल भी मस्त खड़े हो गए थे. मैंने तभी आंटी की चूत में, एक साथ दो उंगली डाल दीं और जोर जोर से धक्के लगाने लगा.
आंटी की तो जैसे, जान ही निकल रही थी. वो मुझे पकड़ के अपनी तरफ खींच रही थीं. मेरे लंड में अजीब सा कसाव आ गया था और लंड को भी अब चूत चाहिए थी.
मैंने आंटी की चूत से उंगली निकाली और अपने लंड के सुपारे को उनकी चूत के छेद के ऊपर रख दिया. आंटी की ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकल रही थी. मैंने इसे नजरंदाज करते हुए लंड को उनकी चूत के अन्दर घुसा दिया. आंटी की चूत अन्दर से बहुत गर्म थी और मेरी छोटी झांटों के साथ आंटी की लम्बी झांट मिक्स होने लगीं.
इस तरह हेयरी आंटी की चूत बजाते बजाते मैंने उनकी गांड के अन्दर धीरे से उंगली दे दी. आंटी की गांड उनकी चूत से भी ज्यादा गर्म थी. मैंने चूत की चुदाई जारी रखी और उनकी गांड में उंगली करना चालू कर दी.
मैं तभी नीचे झुका और आंटी के बूब्स चूसने लगा. ये सुख आंटी के लिए मस्ती का अहसास हो रहा था. उनकी चूत और गांड और बूब्स को एक साथ खुश किया जा रहा था. आंटी के गाल लाल लाल हो गए थे. मैं उन्हें और भी जोर जोर से चोदने लगा था.
अब यूं लग रहा था, जैसे कि आंटी की गांड मेरे लंड को बुलाने लगी थी. मैंने आंटी को अब उल्टा लिटा दिया और उनकी गांड को दोनों हाथ से फैला दिया.
आंटी की मस्त गांड का छेद मेरे बिल्कुल सामने था. बस उसमें लंड डालने की देरी थी. मैंने लंड के सुपारे को गांड पर रखा. लेकिन आंटी की गांड बहुत सख्त थी. मैंने चूत में उंगली डालकर थोड़ी चिकनी की और लंड के सुपारे पर लगाकर उसको चिकना किया. इस चिकनाहट की मदद से लंड थोड़ा अन्दर घुस गया. अब मैंने एक जोर का झटका लगाया और आंटी की गांड में पूरा लंड दे दिया.
परिणीता आंटी चीख उठीं- आह आहह उम्.. उप्प्प्प.. आहाहह.. आआअह्ह ह्हह ऊऊऊ… ऊईई ईईइ.. मर गई माँआ..
पर उनकी सुनता कौन था. मैंने आंटी के दोनों चूतड़ों को दोनों हाथ से साइड से पकड़ा और मैं थोड़ा ऊपर उठ कर जोर जोर से आंटी की गांड में मेरे लंड के झटके लगाने लगा. आंटी भी अब ‘अबबबबा ऊऊओ..’ करते हुए अपनी गांड हिलाने लगीं. मेरे लंड के ऊपर गांड में अजीब प्रेशर आया हुआ था. मैंने आंटी के पौंद पकड़े और जोर जोर से लंड अन्दर डालने लगा.
तभी मेरे मुँह से एक बड़ी ‘आआआह..’ निकली और मेरे लंड की पिचकारी छूट गयी. आंटी के गांड के अन्दर ही मेरा वीर्य निकल गया.
कुछ देर तक हम ऐसे ही लेटे रहे और बाद में आंटी उठीं और हम दोनों के लिए कॉफ़ी ले आईं.
अमीश को मैंने फ़ोन किया और उसने बताया कि वो बीस मिनट और लेगा.
मैंने कॉफ़ी पीने के बाद अपने लंड को फिर से आंटी के मुँह में डाला और लंड से मुख चोदन करते हुए आंटी के मुँह में ही अपना माल छोड़ दिया.
इस दिन के बाद से तो आंटी की गांड और चूत जैसे मेरी मिलकियत बन गयी. पहले आंटी थोड़ी थोड़ी कतराती थीं, लेकिन अब वो भी सामने से मुझे अकेले में घर बुलाकर मेरे लंड के मजे लूट लेती हैं.
आपके मदमस्त कमेंट्स मेरी इस आंटी की चुदाई की कहानी पर मिलने का इन्तजार रहेगा.
nudeluk@gmail.com

Thursday, December 13, 2018

उसे मेरे लंड का चस्का लग गया

मेरा नाम सिद्धार्थ है मैं पटना का रहने वाला हूं। मैंने पटना से ही अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की है। मेरे पिता मजदूरी का काम करते हैं और उन्होंने मजदूरी करते हुए ही मुझे पढ़ाया। उन्होंने कभी भी मुझ पर किसी चीज के लिए दबाव नहीं डाला और कहा कि बेटा जब तक मैं जीवित हूं और जब तक मैं सक्षम हूं तब तक तुम अच्छे से पढ़ो ताकि तुम एक बड़े आदमी बन सको। उनका सिर्फ यही सपना है और मैं उस सपने को पूरा करना चाहता हूं। मेरे कॉलेज की पढ़ाई पूरी हो चुकी है और मैं बहुत परेशान रहने लगा क्योंकि मैंने कई जगह अच्छी नौकरी के लिए ट्राई किया परंतु वहां मेरा कहीं भी नहीं हुआ इसीलिए मैं थक हारकर घर पर ही बैठा रहता हूं। मेरे पिताजी मेरा बहुत ही साथ देते और कहते कि बेटा तुम बहुत ही हिम्मतवाले हो तुम कहीं अच्छी नौकरी लग जाओगे। तुम बिल्कुल निश्चिंत रहो। मेरी मां भी मेरा बहुत साथ देती है।
मेरे घर में सिर्फ मेरे पिताजी ही कमाने वाले थे इसलिए मैं सोचता कि यदि मैं भी दो पैसा कमा लूंगा तो उनकी मदद कर पाऊंगा इसी के चलते मैं हमेशा ही इंटरेस्ट देने लगा लेकिन जहां पर भी मेरा होता वहां पर मुझे बहुत कम तनख्वाह मिलती। मैं सोचने लगा कि मेरे पिताजी ने इतनी मेहनत की है और इसी के चलते एक दिन मैंने अपने दोस्त को फोन किया। मेरा दोस्त दिल्ली में नौकरी करता है वह एक अच्छी नौकरी पर है। उसे उसके दूर के रिश्तेदार ने नौकरी पर लगाया था। उसका नाम अमन है। मैंने अमन को फोन किया और अमन को कहा कि अरे भाई कोई नौकरी बताओ जिसमें कि मैं दो पैसे कमा सकूं। वह मुझे कहने लगा कि कुछ समय बाद हमारी कंपनी में वैकेंसी आने वाली है तुम यहां पर ट्राई करो तो तुम्हें अच्छा सैलरी पैकेज मिल जाएगा। मैंने उसे कहा कि जैसे ही तुम्हारी कंपनी में वैकेंसी आती है तो तुम मुझे जरूर बताना। वह कहने लगा मैं तुम्हें जरूर बताऊंगा। अब मैं थोड़ा निश्चिंत हो चुका था। मैं उससे बात कर के अपने आप को काफी हल्का महसूस करने लगा। एक दिन मुझे अमन का फोन आया और वह कहने लगा कि तुम दो दिन बाद दिल्ली पहुंच जाओ। मैंने उसे कहा ठीक है मैं दिल्ली पहुंच जाऊंगा। मैंने जल्दी से अपना सामान बांधा और मैं दिल्ली चला गया।मैं जब दिल्ली गया तो मैंने अमन की कंपनी में इंटरव्यू दिया। वहां पर मेरा सिलेक्शन हो गया। जब मेरा सिलेक्शन हुआ तो मुझे एक अच्छी तनख्वाह भी मिलने लगी थी और कुछ दिनों तक तो मेरी ट्रेनिंग चली लेकिन जब मेरी ट्रेनिंग पूरी हो गई तो उसके बाद मैंने काम करना शुरू कर दिया। मैं अपने काम में थोड़ा मन लगाने लगा था। अमन मुझे कहने लगा तुम बहुत ही मेहनती हो तुम्हें यह नौकरी तो मिलनी ही थी मैं तो सिर्फ एक जरिया बना और मैंने तुम्हें बताया। मैं अमन का हमेशा ही शुक्रगुजार हूं कि उसने मुझे एक अच्छी नौकरी लगाया। अब मैं भी अमन के साथ ही रहने लगा था। हम दोनों साथ में ही रहते थे। पहले अमन अपने उन्ही रिश्तेदार के पास रहता था जिन्होंने उसे नौकरी लगवाया था। मैं अमन के साथ बहुत ही खुश था क्योंकि वह एक बहुत ही अच्छा लड़का है और अमन बहुत ही समझदार भी है। अमन ने मेरी हर जगह मदद की। एक बार मुझे पैसों की आवश्यकता पड़ गई और मेरे पास पैसे कम पड़ रहे थे। मेरे पिताजी की तबीयत खराब हो गई थी। फिर अमन ने हीं मुझे पैसे दिए थे और कहा तुम घर चले जाओ। जब मैं घर गया तो मैंने अपने पिताजी का इलाज एक अच्छा अस्पताल में करवाया। वह जब थोड़ा ठीक होने लगे तो मैं वापस दिल्ली लौट आया। मैंने उन्हें उसके बाद कह दिया कि अब आप काम ना करें तो अच्छा रहेगा। मैं भी अब कमाने लगा हूं। उन्होंने उसके बाद काम करना छोड़ दिया और मैं ही घर में पैसे भिजवा दिया करता था। मैंने धीरे-धीरे अमन को उसके पैसे लौटा दिए। अमन से मेरा अच्छा रिलेशन बना हुआ था इसलिए अमन और मेरी दोस्ती भी धीरे-धीरे मजबूत होती चली गई। हालांकि पहले हम दोनों के बीच गहरी दोस्ती नहीं थी लेकिन जब से हम दोनों साथ रहने लगे तो हम दोनों के बीच अब बिल्कुल गहरी दोस्ती हो गई। अमन को भी जब भी मेरी जरूरत होती तो मैं हमेशा उसके लिए खड़ा रहता।
एक बार अमन को हमारे ऑफिस में एक लड़की पसंद आ गई अमन मुझे कहने लगा यार मुझे वह लड़की बहुत पसंद है। उसका नाम राधिका है। राधिका दिखने में बहुत ही सुंदर है और उसकी सुंदरता का तो पूरा ऑफिस दीवाना है लेकिन वह अमन पर बिल्कुल भी डोरे नहीं डालती। उसके मेरे साथ बहुत अच्छे संबंध है और मुझे कई बार ऐसा लगता कि कहीं राधिका का दिल मुझ पर तो नहीं आ गया और कहीं इस वजह से अमन मुझसे नाराज ना हो जाए इसीलिए मैं राधिका से थोड़ी दूरी बनाने लगा लेकिन वह हमेशा ही मुझ पर फ़िदा रहती और मुझसे ही बात करती। मैं दुविधा में फंस चुका था।  मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं अमन को क्या जवाब दूंगा इसलिए मैं राधिका से दूरी बनाने लगा परन्तु वह हमेशा मेरे फोन पर फोन कर दिया करती। अमन को भी इस बात का आभास होने लगा था और वह मुझसे अच्छे से बात नहीं कर रहा था। मैंने अमन से कहा मैं नहीं चाहता कि मैं तुमसे राधिका की वजह से झगड़ा करूं या उसकी वजह से हम दोनों के रिश्ते में खटास पैदा हो। मैंने उस दिन अमन को बहुत समझाया। अमन भी मेरी बात को समझ गया और वह कहने लगा कि तुम मेरे अच्छे दोस्त हो और मैं तुम पर भरोसा करता हूं। एक लड़की की वजह से मैं तुम्हारे साथ दोस्ती नहीं तोड़ सकता।
अब मैं पूरी तरीके से निश्चिंत हो चुका था और मुझे अब कोई भी डर नहीं था लेकिन ना जाने राधिका के दिल में ऐसा क्या चल रहा था वह मुझे देख कर बहुत ज्यादा लट्टू हो गई। वह मुझे कहने लगी आज मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता है तुम मेरे साथ मेरे घर चलो मुझे लगा शायद उसे मेरी किसी मदद की जरूरत है। मैं उसके घर चला गया। जब मैं उसके घर पर गया तो वहां पर कोई भी नहीं था मैं यह देख कर बड़ा ही शॉक्ड हो गया। मैंने उसे पूछा तुम्हें क्या मदद चाहिए? जब मैंने उसे पूछा तो उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और कहने लगी मैं तुमसे प्यार करती हूं और तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। उसने जब मेरे होठों को किस करना शुरू किया तो मेरे अंदर से भी आग निकलने लगी। मैंने जैसे ही उसके बड़े बड़े स्तनों को दबाना शुरू किया तो मेरा लंड भी खड़ा हो गया। मै उसके मुंह में डालने के लिए उतारू हो गया। वह मेरे लंड को जैसे ही अपने मुंह के अंदर ले रही थी तो जैसे काफी दिनों से वह भूखी बैठी हो उसने मेरे लंड का रसपान बहुत अच्छे से किया मुझे भी बहुत मजा आया। जब हम दोनों ही पूरी तरीके से मूड में हो गई तो मैंने राधिका के कपड़े उतार दिए। मैंने उसके कपड़े उतारे तो उसका बदन देखकर मेरा लंड 1 इंच बड़ा हो गया। जैसे ही मैंने राधिका की योनि पर अपनी जीभ को लगाया तो वह मचलने लगी और कुछ देर बाद वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई की उसने मेरे लंड को पकडते हुए अपनी योनि पर सटा दिया। मैंने उसकी चूत पर अपने मोटे लंड को लगाया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने उसकी योनि के अंदर लंड को प्रवेश करवा दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो उसके खून की धार बाहर की तरफ निकल पडी। मुझे उम्मीद नहीं हो रहा था कि वह सील पैक माल है लेकिन उसकी योनि एकदम सील पैक थी। मैंने उसके दोनों पैरों को चौडा किया मैंने उसे तेज गति से चोदना शुरु किया। मैं बहुत जोश मे हो गया और वह भी बहुत मूड में हो गई। हम दोनों एक दूसरे का साथ अच्छे से देने लगे। मैंने जब उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा तो उसकी चूत से तरल पदार्थ ज्यादा अधिक निकलने लगा। उसने मुझे कहा तुम ऐसे ही धक्के देते रहो मुझे बहुत मजा आ रहा है यह उसका पहला ही अनुभव था। इससे पहले उसने कई लोगों के लंड अपने मुंह में लिए थे लेकिन उसने अपनी चूत में लंड नहीं लिया था यह बात उसने ही मुझे बताई। यह सुनकर तो मेरे अंदर और भी जोश बढ़ने लगा। मैने उसे और भी तेज झटके देना शुरू किए जब मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर गया तो हम दोनों एक दूसरे को पकड़ कर बैठ गए। मुझे उसे चोदने में बहुत मजा आया। वह मुझे कहने लगी मैं तुम्हें बहुत चाहती हूं। मैंने उसे कहा लेकिन अमन तुमसे प्यार करता है। मैंने अमन और उसके बीच में रिलेशन बना दिया है लेकिन वह मेरे लंड को लेना पसंद करती है। हम दोनों चोरी छुपे मिलते हैं और एक दूसरे के साथ सेक्स करते हैं।

Wednesday, December 12, 2018

टीचर भाभी के साथ पहली चुदाई

इस इंडियन सेक्स कहानी के सभी पात्र और घटनाएँ काल्पनिक हैं, इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है। यदि किसी जीवित या मृत व्यक्ति या घटना से इसकी समानता होती है, तो उसे मात्र एक संयोग समझा जाये।
आपका परिचय अपनी कहानी के कुछ पात्रों से करवाता हूँ।
मेरे घर में 5 सदस्य हैं। पापा रमेश 42 वर्ष, मम्मी सुनीता 40 वर्ष, सबसे बड़ा भाई अमित 22 वर्ष, उनसे छोटी बहन नेहा 20 वर्ष, और सबसे छोटा मैं हूँ सुनीत 18 वर्ष।
मेरे पापा एफ सी आई विभाग में क्लर्क हैं, मम्मी हाउसवाइफ हैं, अमित भैया, नेहा दीदी कॉलेज में पढ़ते हैं और मैं 12वीं कक्षा में पढ़ता हूँ। हम दिल्ली में एक तीन मंज़िल की बिल्डिंग में रहते हैं। सबसे नीचे वाले फ्लोर पर दो दुकानें हैं, एक ब्यूटी पार्लर की और दूसरी मेडिकल स्टोर की और बाकी जगह में पार्किंग है।
फर्स्ट फ्लोर पर एक परिवार रहता है उसमें 4 सदस्य हैं अंकल (43 वर्ष टीचर) आंटी (38 वर्ष टीचर) और उनकी दो बेटियाँ कनिष्का (21 वर्ष) और साक्षी (18 वर्ष), दोनों कॉलेज में पढ़ती हैं। फर्स्ट फ्लोर की दूसरी साइड अभी खाली है।
दूसरे फ्लोर पर आमने-सामने दो फैमिली रहती हैं, राइट साइड पर जो भैया-भाभी रहते हैं, उनकी शादी को 4 वर्ष हो गए हैं, उनकी एक बेटी है 1 वर्ष की, मनीष भैया 26 वर्ष, बैंक में क्लर्क हैं और किरण भाभी (24 वर्ष) हाउसवाइफ हैं।
लेफ्ट साइड पर भी एक फैमिली भैया-भाभी रहते हैं उनकी शादी को 3 वर्ष हो गए हैं पवन भैया (28 वर्ष) सॉफ्टवेयर कम्पनी में हैं और रीना भाभी (25 वर्ष) हाउसवाइफ हैं।
सबसे ऊपर तीसरे फ्लोर पर हम रहते हैं, एक साइड पर मम्मी-पापा रहते हैं और दूसरी साइड पर हम तीनों के रूम हैं।
अब मैं कहानी पर आता हूँ। पढ़ाई में मैं ठीक-ठाक हूँ, स्पोर्ट्स में अच्छा हूँ। स्कूल में पढ़ाई के अलावा हम काफी कुछ सीखते हैं। तो कहानी की शुरुआत होती है क्लास के चैप्टर ‘मानव जनन कैसे करता है?’ से!
टीचर ने हमें कहा- तुम्हें सब पता है और ये चैप्टर जरूरी नहीं है.
ऐसे कहकर मतलब इसे टाल दिया और कहा- खुद ही पढ़ लेना।
अब मेरी उत्सुकता हुई इसके बारे में और अधिक जानने की!
यकीन मानो दोस्तो … इससे पहले मेरी कोई रूचि नहीं थी इस विषय को लेकर। मेरे दोस्त जो इस बारे में पहले से ही जानते थे, उनसे सुना था और अब तक मैं इन बातों पे ज्यादा ध्यान नहीं देता था लेकिन अब ये सब जानने की मेरी थोड़ी इच्छा हुई।
रीना भाभी मुझे पढ़ाती हैं, कभी-कभी किरण भाभी भी मुझे पढ़ाती थी लेकिन अब वो सिर्फ नेहा दीदी को पढ़ाती हैं क्यूंकि वो बड़ी कक्षा में है।
मेरी सभी से अच्छी बनती है। मेरी नेहा दीदी से बहुत अच्छी बनती है, हम भाई बहन से ज्यादा अच्छे दोस्त हैं। रीना भाभी और मैं बहुत क्लोज़ हैं बेस्ट फ्रैंड्स की तरह। खूब हंसी मजाक और सारी बात एक दूसरे से शेयर करते हैं। रीना भाभी दिखने में बहुत सुन्दर हैं, भाभी घर पर थोड़े खुले सलवार कमीज पहनती हैं। अक्सर भाभी मेरी पीठ पर अपने बूब्स दबा देती हैं, कभी कभी मुझे अपनी बाँहों में कसकर पकड़ लेती हैं, अब तक मेरे दिल या दिमाग में भाभी या किसी और को लेकर कोई अलग बात नहीं थी। मैं खेल कूद में मस्त रहने वाला था उस दिन तक, जब तक वो (जनन वाला) चैप्टर नहीं आया था।
अगले सप्ताह से स्कूल में रिविज़न शुरू हो गया.
इधर घर पर रीना भाभी ने मम्मी को बताया कि पवन कुछ दिनों के लिए गाँव जा रहे हैं और मैं यहीं रहूंगी, मुझे अकेले डर लगता है। अगर सुनीत रात को मेरे पास रुक जाये तो उसकी पढ़ाई हो जाएगी और मुझे कंपनी मिल जाएगी।
मम्मी ने कहा- रीना, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है… लेकिन तुम जानती हो सुनीत बहुत शरारती है।
भाभी बोली- कोई बात नहीं आंटी, वो इतना भी शरारती नहीं है और मैं उसे पढ़ाती भी तो हूँ।
मैं स्कूल से आया और खाना खाकर वीडियो गेम खेलने लगा. तभी मम्मी आयी और बताया कि आज सुबह पवन भैया कुछ दिनों के लिए गाँव गए हैं तो कुछ दिन नीचे रीना भाभी के पास सो जाना।
मैंने कहा- भाभी सिर्फ पढ़ने को बोलती रहेगी।
तो मम्मी बोली- मैंने उसको बोल दिया है कि ज्यादा पढ़ाई करने को न बोले तुझे!
“अब ठीक है!” मैंने सोचा कि बहुत अच्छा मौका है अब तो भाभी से सब कुछ पूछ लूँगा।
तो मैंने हाँ कर दी।
शाम को साढ़े 8 बजे मैं भाभी के पास अपनी किताबें लेकर पहुँच गया.
भाभी बर्तन धो रही थी, मुझे देखते ही बोली- क्या बात है … तू तो बिना कहे ही किताबें लेकर आ गया?
मैंने कहा- हाँ भाभी, मैंने सोचा आप बोलो, इससे अच्छा है खुद ही ले चलूँ।
फिर बर्तन धोकर भाभी आई और मुझसे बोली- चल बता … मैथ पढ़ेगा या सोशल स्टडीज़?
मैंने कहा- भाभी आज टी.वी. देखते हैं, कल पढ़ेंगे!
वो बोली- नहीं, तू किताब कॉपी निकाल, मैं अभी आती हूँ।
भाभी बाथरूम की तरफ जाने लगी. तभी एक छिपकली भाभी की तरफ गिर पड़ी। भाभी चिल्लाती हुई कमरे की तरफ भागी, मैं भी आवाज सुनकर भाभी की तरफ भागा. तभी भाभी मुझसे टकराई और हम दोनों नीचे गिर पड़े.
जब हम टकराये तो अनजाने में भाभी के बूब्स मुझसे दब गए थे, मुझे बहुत अच्छा लगा.
अब भाभी बोली- छिपकली … छिपकली …
मैंने कहा- क्या भाभी? डरा दिया बिना फालतू में!
फिर मैं उठा और भाभी को भी उठाया।
फिर कुछ देर बाद भाभी मुझे पढ़ाने लगी। कुछ देर बाद हम लेट गए सोने के लिए भाभी बेड पर और मैं पलंग पर।
मुझे उस रात काफी देर से नींद आयी, मैं भाभी के बारे मैं सोचता रहा, ऐसा पहली बार नहीं हुआ था कि भाभी के बूब्स मुझसे टकराये हों लेकिन आज पहली बार मैं वही सोचे जा रहा था। दिल में अजीब सी हलचल थी।
अगले दिन स्कूल में भी मेरा मन नहीं लग रहा था, मैं बस भाभी के बारे में ही सोचता रहा.
दूसरी शाम भाभी मुझे पढ़ाने लगी, काफी देर तक एक सवाल समझाने के बाद भी मुझे समझ नहीं आ रहा था, तो भाभी गुस्से में बोली- तेरा ध्यान कहाँ है?
मैंने कहा- कहीं नहीं!
वो बोली- मुझे बता जो भी बात है?
मैंने कहा- ऐसी कोई बात नहीं है, आज मन नहीं कर रहा पढ़ने का!
वो बोली- अच्छा कोई बात नहीं, टी.वी. देखते हैं.
मैं कुछ नहीं बोला तो वो बोली- तेरा ध्यान कहाँ है, कुछ हुआ है क्या, मुझे नहीं बताएगा?
मैंने कहा- भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है आप टी.वी. चलाओ ना।
फिर हम दोनों टी.वी. देखने लगे.
कॉमेडी शो चल रहा था, भाभी हँस रही थी लेकिन मेरा दिमाग तो वही सब सोच रहा था। भाभी यह बात नोटिस कर रही थी और बोली- तू मुझे नहीं बतायेगा तो मैं तेरी मदद कैसे करूंगी।
भाभी ने टी.वी. बंद कर दिया, फिर मेरे दोनों हाथ अपने हाथों में लेकर बोली- बता क्या बात है?
मैंने हाथ हटाते हुए कहा- कुछ नहीं भाभी!
वो बोली- अच्छा ठीक है, मत बता, वैसे भी मैं तेरी लगती कौन हूँ बस बोलने के लिए बेस्ट फ्रेंड हूँ।
मैंने कहा- नहीं भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है.
वो बोली- गर्लफ्रेंड से लड़ाई हो गई?
मैंने कहा- नहीं भाभी, आप भी ना!
वो रूठे स्वर में बोली- मुझसे बात मत करियो!
फिर मैंने कहा- अच्छा वादा करो कि आप गुस्सा नहीं करोगी और मुझे सब सच-सच बताओगी।
वो बोली- चल ठीक है वादा, मैं गुस्सा नहीं करूंगी और सब सच-सच बताऊँगी पूछ क्या पूछना है?
मैंने कहा- मुझे वो… मुझे वो… सब बताओ शुरू से, शुरू से सब कुछ बताओ।
वो बोली- क्या बताऊँ?
मैंने कहा- वो पीरियड, सेक्स के बारे में।
भाभी मना करने लगी लेकिन मैं जिद करने लगा, मैंने कहा- आपने वादा किया है.
तो वो बोली- ठीक है, लेकिन तू ये बात किसी को नहीं बताना, तुझे मेरी कसम।
मैंने कहा- आपकी कसम … किसी को नहीं बताऊँगा।
फिर भाभी ने मुझे सब बताया कि सेक्स कैसे होता है, पीरियड के बारे में और बच्चा कैसे पैदा होता है।
ये बातें सुनकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया, मैंने कहा- मैं बाथरूम होकर आता हूँ।
मैं वापस आया तो भाभी बोली- इतनी देर हिलाने लग गया था क्या?
मैंने कहा- क्या मतलब भाभी?
वो बोली- अब इतना भोला भी मत बन, जैसे कुछ जानता ही ना हो।
मैंने कहा- भाभी, मैं सच में नहीं समझा।
भाभी बोली- अच्छा ज्यादा ड्रामे मत कर, मैं तुझे कल से देख रही हूँ, तू मेरे बूब्स घूर रहा है और कल शाम को छत पे मेरी ब्रा-पैंटी को भी छूकर देख रहा था।
मैंने कहा- सॉरी भाभी, वो स्कूल में बच्चे गन्दी बातें करते हैं लण्ड, चूत चुदाई तो मैंने सोचा कि …!
फिर मैं चुप हो गया।
भाभी जोर-जोर से हँसने लगी और बोली- अच्छा बता और कौन सी बात करते हो तुम स्कूल में?
फिर मैंने सब कुछ बताया।
वो बोली- अच्छा यह बता कि मैं तुझे कैसी लगती हूँ?
मैंने कहा- आप बहुत अच्छी हो!
इतना सुनकर भाभी ने मेरे होंठों पे चुम्बन किया, फिर बोली- तू किसी को बताएगा तो नहीं?
मैंने कहा- बिल्कुल भी नहीं भाभी!
फिर मैंने कहा- भाभी, आप बहुत सुन्दर हो.
वो बोली- तू क्या कम स्मार्ट है!
इतना कहकर भाभी ने मेरे होंठों पर एक और चुम्मा किया और फिर भाभी ने मेरी टीशर्ट उतार दी और पजामा उतारने का इशारा किया, तो मैंने पजामा भी उतार दिया।
इतने में भाभी ने भी अपनी कमीज उतार दी थी, अब वो ब्रा और सलवार में मेरे सामने खड़ी थी।
मैंने कहा- सो हॉट भाभी … ये आपके बूब्स तो बहुत मस्त हैं, मैं छूकर देखूँ?
वो बोली- बुद्धू … यह भी कोई पूछने की बात है।
मैंने भाभी के बूब्स दबाये और होंठों पर चुम्बन किया तो भाभी बोली- सुनीत … तू तो बड़े अच्छे से चुम्बन करना सीख गया है।
फिर मैंने भाभी के बूब्स दबाये ब्रा के ऊपर से … और सलवार के अंदर हाथ डाल कर भाभी की चूत को सहलाया. भाभी ने मेरे लण्ड को कच्छे के ऊपर से रगड़ना शुरू कर दिया।
फिर भाभी ने मेरे लण्ड को कच्छे से बाहर निकाला और मेरी मुठ मारना शुरू कर दिया.
थोड़ी देर में मैं झड़ गया तो भाभी पूछने लगी- सुनीत मजा आया?
मैंने कहा- हाँ भाभी, बहुत मजा आया।
अब भाभी ने अपनी सलवार उतार दी और वे बेड पे लेट गई। मैं पहली बार किसी लेडी को ऐसे देख रहा था, लाल ब्रा-पैंटी में भाभी बहुत सुन्दर लग रही थी। मैंने भाभी की पैंटी उतारी और लण्ड को उनकी चूत में घुसाने लगा लेकिन वो अंदर नहीं गया.
भाभी ने अपनी चूत पे थोड़ा थूक लगाया, मैंने भी उनको देखके अपने लण्ड पे थूक लगाया और भाभी की चूत में धीरे से घुसाया तो आधा अंदर लण्ड गया.
अब भाभी बोली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… यार … और जोर से झटका मार ना!
मैंने फिर एक और झटका मारकर अपना लण्ड भाभी की चूत में घुसा दिया.
फिर मैं धीरे-धीरे झटके मारता गया, भाभी ‘हाँ हाँ… जोर से… जोर से…’ बोलती रही, मैं झटके मारता गया. 5-6 मिनट बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने कहा- भाभी, फिर आने वाला है.
वो झट से बोली- बाहर निकाल!
फिर उन्होंने अपने हाथ से मेरी मुठ मारी और मैं फिर झड़ गया.
भाभी ने अपनी पैंटी से मेरा सारा वीर्य साफ़ किया और पूछने लगी- मजा आया ना?
मैंने हाँ मैं सर हिलाया.
फिर भाभी बोली- अब सो जा!
फिर हम दोनों उसकी हालत में ही सो गए।
रात को मेरी आँख खुली तो भाभी जाग रही थी और मुझे बड़े प्यार से देख रही थी।
मैंने पूछा- क्या हुआ भाभी?
वो बोली- तू बहुत प्यारा लग रहा है इसलिए तुझे देख रही हूँ।
मैंने भाभी को किस किया और हमने फिर चुदाई की और सो गए।
इस तरह मेरी पहली चुदाई खत्म हुई और चुदाई की सिलसिला शुरू हुआ।
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मेरी पहली चुदाई चाचा की लड़की के साथ

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क्लासमेट को प्रोपोज करके चोदा

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