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Tuesday, December 25, 2018

मेरी दोस्त की कज़न की चूत

hot ladki
हेल्लो दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है। आशा करता हूँ आप सबको यह कहानी पसन्द आएगी। मेरा नाम रोबिन है। मै साउथ दिल्ली के एक पोर्श कोलोनी मे रहता हूँ। मेरी हाइट 5″11 है और मै रोज़ जिम जाता हूँ। मेरे लन्ड की लम्बाई 7″ है और चौडाई 2.5″ है।
यह कहानी मेरी और मेरी दोस्त की कज़न की है जिसका नाम स्नेहा है। यह बात आज से एक साल पहले की है। मेरे साथ ओफ़िस मे एक लडकी काम करती थी जिससे मेरी रोज़ बात होती थी और जल्द ही हम अच्छे दोस्त बन गए।
मगर उसका पहले से ही एक बोय्फ़्रेन्ड था तो मेरी उसके साथ दाल नही गली।फ़िर कुछ टाइम बाद उसकी एक कज़न उसके यहाँ रहने आई जिससे उस्ने मुझे भी मिलवाया। और जब मैने उसे पहली बार देखा तो बस देखता ही रह गया। वो मेरी फ़्रेन्ड से हर मामले मे बडिया थी।
34 के बूब्स और 36 की गान्ड जिसे मै बस देखता ही रह गया। इतने मे मेरी फ़्रेन्ड ने मुझसे बोला नम्बर ले लेना जिस दिन मेरे बिना मिलने आओगे उस दिन आराम से घूरते रहना। जिसके बाद मैने बोला की नही मै तो बस यही सोच रहा था कि इतनी सुन्दर तेरी कज़न कैसे हो सकती है।
उस दिन के बाद उस्ने मुझे एक-दो बार फ़िर अपनी कज़न से मिलवाया जिसके बाद हमने भी एक-दूसरे का नम्बर ले लिया और फ़िर मेरी उससे फोन और मैसेज पे बाते शुरू हो गई। ऐसे ही कुछ दिन बीत गए फ़िर एक दिन मैने और उसने मिलने का प्लान बनाया और हम सफ़दजन्ग टोम्ब मे मिले। फ़िर कुछ देर इधर उधर की बात करने के बाद मैने उसे आई रेयली लाइक यू एन्ड आई लव यू बोल दिया।
उसका अजीब फ़ेस रिएक्शन देख के एक बार को तो मुझे लगा की कही उसे बुरा तो नही लगा लेकिन फ़िर जब उस्ने भी स्माइल करते हुए आइ लव यू टु बोला तो मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा फ़िर जल्दी से हम दोनो एक दुसरे के गले लग गए और फ़िर जैसे ही उसके 34 के बूब्स मेरी छाती पे गडने लगे तो मुझसे सब्र नही हुआ और मैने अपने हौन्ट उसके हौन्टो पे रख दिए और वो भी शायद इसी के इन्तज़ार मे थी।
फ़िर मैने धीरे से अपना एक हाथ उसके बूब्स पे रख दिया पहले तो उसने मेरा हाथ हटा दिया लेकिन जब मैने दोबारा अपना हाथ रखा तो इस बार उसने कुछ नही बोला। तो फ़िर मैने अपने दोनो हाथ उसके बूब्स पे रख दिये और आराम-आराम से दबाने लगा। मन तो कर रहा था कि बस अभी पकड के चोद दू लेकिन वहा पे इससे ज़्यादा कुछ नही हो सकता था।
फ़िर कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा कभी सफ़दरजग टोम्ब तो कभी अनसल प्लाज़ा मौल के पीछे वाले पार्क मे और फ़िर वो दिन भी आ ही गया जब मैने उसकी जमके चुदाई की। एक दिन हमने मेरे दोस्त के फ़्लैट पे मिलने का प्रोग्राम बनाया।
उस दिन मैने उसे मैटरो स्टेशन से पिक किया और अपने दोस्त के फ़्लैट पे ले गया। रास्ते मे मैने उसके लिये वोडका और खाने का सामान भी ले लिया था।
फ़िर जैसे ही हम उसके फ़्लैट पे पहुचे तो वो अपने फ़्लैट से निकल गया क्युकि मैने उसे पहले ही बोल दिया था कि तू मूवी देखने निकल जाइयो। फ़िर उसके जाते ही मैने वोडका के दो लार्ज पैग बनाए और दो-दो पैग मारने के बाद मै उसके बगल मे जाके बैठ गया और अपने हौन्ट उसके हौन्टो पे रख दिये और वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी।
दस मिनट की चूसा-चासी के बाद मैने उसकी शर्ट उतार दी और ब्रा को उपर करके उसका एक बूब्स अपने मुह मे ले लिया जिससे उसके मुह से कुछ आवाज़े निकलने लगी। उसके बाद मैने एक-एक करके उसके दोनो बूब्स चूसे। फ़िर मैने उसकी ज़ीन्स भी उतार दी और उसकी चूत को पैन्टि के उपर से ही चूसने लगा जिससे उसकी सिसकारिया बडने लगी।
फ़िर मैने उसकी पैन्टि भी उतार दी और खुद भी पूरा नन्गा हो गया मैने फ़िर से उसकी चूत पे अपना मूह रख दिया और वो मेरा मूह अपनी चूत पे दबाने लगी और ज़ोर-ज़ोर से सिसकारने लगी। 5-6 मिनट की चुसाई मे उसने अपना रस छोड दिया जिसे मैने उसकी चूत और गान्ड पे फ़ैला दिया।
उसके बाद मैने अपना लन्ड उसके हाथ मे दे दिया और आगे पीछे करने को बोला और वो बडे मज़े से मेरे लन्ड को आगे पीछे करने लगी। फ़िर जब मैने उसे मूह मे लेने के लिए बोला तो पहले तो वो मना करने लगी फ़िर मेरे ज़ोर देने पे वो राज़ी हो गयी उसने सुपाडे तक ही मूह मे लिया और आगे पीछे करने लगी लेकिन ये उसका फ़र्स्ट टाइम था इसलिए वो सही से नही कर पा रही थी फ़िर मैने अपना लन्ड उसके मूह से निकाल के उसकी चूत पे रख दिया और घिसने लगा जिससे वो तडपने लगी और बोलने लगी कि अब नही रहा जाता प्लीज़ जल्दी से अन्दर डाल दो।
फ़िर मैने एक झटका मारा तो मेरा लन्ड फ़िसल गया उसकी चूत कुछ ज़्यादा ही टाइट थी फ़िर मैने पहले जाके तेल उठाया जिसे मैने अपने लन्ड और उसकी चूत पे अच्छे से लगाया। फ़िर मैने दोबारा अपना लन्ड उसकी चूत पे रखा और एक ज़ोर से झटका मारा और मेरा सुपाडा उसकी चूत मे घुस गया और उसके मूह से चीख निकली जिसे मैने अपना मूह रख के दबा दी।
फ़िर 3-4 मिनट रुक के जब वो कुछ शान्त हुई तो मैने सान्स खीच के फ़िर से एक झटका मारा और मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत मे चला गया और उसकी तो जैसे हालत ही खराब हो गई उसकी आन्खो से आन्सू बहने लगे फ़िर कुछ मिनट तक मै वैसे ही उसे चूसता रहा और उसके बूब्स दबाता रहा।
फ़िर जब उसका दर्द कम हो गया तो मै आराम-आराम से अपना लन्ड अन्दर बाहर करने लगा और फ़िर जब उसे भी मज़े आने लगे तो वो भी नीचे से कमर हिलाने लगी जिसके बाद मैने भी अपनी स्पीड बडा दी और कुछ ही देर मे जब मेरा निकलने को हुआ तो मैने अपना सारा माल उसकी चूत मे ही छोड दिया और उसका माल भी मेरे साथ ही निकल गया।
फ़िर मैने जल्दी से बेड शीट चेन्ज़ करके वाशिन्ग मशीन मे डाल दी क्योकि उसपर उसकी चूत से निकला खून लग गया था| इसके बाद मैने दो बार और उसकी चूत मारी। तो दोस्तो ये थी मेरी और स्नेहा की पहली चुदाई की दास्ता। उम्मीद करता हू आपको मेरी कहानी पसन्द आयी होगी

Sunday, December 23, 2018

दोस्त की बहन की टाइट चूत

hindi sex stories मेरा नाम संजय है मैं फरीदाबाद का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 30 वर्ष है। मैं अपने पिताजी के साथ ही काम संभालता हूं। मैंने अपने पिताजी का बिजनेस काफी समय पहले से ही करना शुरू कर दिया था और उनके साथ ही मैं काफी समय से काम कर रहा हूं इसीलिए अब मैं काफी हद तक काम सीख चुका हूं। उनकी बाजार में कॉस्मेटिक सामान की दुकान है और हमारी काफी बड़ी दुकान है। उसमें हम लोग महिलाओं के कपड़े भी रखते हैं और हमारी दुकान बहुत अच्छे से चल रही है। हमारी दुकान पर कई महिलाएं भी आती हैं जो हमसे कपड़े लेकर जाती हैं। हम लोग महिलाओं का सारा सामान अपनी दुकान पर रखते हैं और कॉस्मेटिक्स का भी हमारे पास समान होता है। मेरे पिताजी भी मेरी बहन के लिए रिश्ता ढूंढ रहे थे और वह मुझसे कहने लगे कि तुम्हारी बहन के लिए एक रिश्ता आया है। उन्होंने मुझे उस लड़के के बारे में जानकारी दी और कहा कि लड़का बहुत ही अच्छे घर से है, एक बार हम लोग मीना से इस बारे में बात कर लेंगे। मेरी और मेरी बहन की बहुत अच्छी बातचीत है, हम दोनों की आपस में बहुत ज्यादा बनती है इसीलिए मैंने जब मीना से इस बारे में बात की तो मीना कहने लगी कि यदि पिता जी मेरी शादी की बात कर रहे हैं तो मैं भी शादी के लिए तैयार हूं। वह शादी के लिए तैयार थी।
मैंने इस बारे में अपने पिता जी से भी बात की तो वह कहने लगे कि हम लोग मीना की शादी जल्दी ही करवा देंगे मीना मुझसे दो साल छोटी है।  उसके लिये रिश्ता भी बहुत अच्छा था इसलिए पिताजी ने मीना की सगाई करवादी। उसके बाद शादी की भी तैयारियां होने लगी, मैंने भी अपने सारे दोस्तों को अपनी बहन की शादी में बुलाया था, मैं अपने दोस्तों से काफी समय बाद मिला था इसलिए उनसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा। जब मैं उनसे मिला तो वह लोग मुझे कह रहे थे कि तुम तो अपने काम में ही बिजी हो और हमसे मिलते भी नहीं हो, मैंने उन्हें कहा कि मुझे बिल्कुल भी वक्त नहीं मिल पाता इसलिए मैं किसी से भी नहीं मिल पाता हूं। मेरे सारे दोस्त कुछ ना कुछ काम कर रहे हैं कोई अपना ही काम कर रहा है और कोई जॉब कर रहा है। उनमें से कइयों की शादी हो चुकी है।
मेरा बचपन का दोस्त राकेश भी मेरे घर पर आया हुआ था और वह कह रहा था कि तुम अब मुझसे भी फोन पर बात नहीं करते हो, ना ही मुझ से मिलते हो। मैंने उसे कहा कि पिताजी के साथ ही काम पर रहता हूं इस वजह से ज्यादा वक्त नहीं मिल पाता। राकेश और मेरी दोस्ती बहुत पुरानी है इसलिए उसके सारे घर वाले मुझे पहचानते हैं और मेरे घर पर भी उसका आना जाना रहता है। राकेश मुझे कहने लगा मेरे घर वालों ने भी मेरे लिए लड़की पसंद की है और तुम्हें मेरी सगाई में आना है। मैंने उसे कहा कि ठीक है मैं तुम्हारी सगाई मैं आऊंगा। मेरी बहन की शादी भी बड़े धूमधाम से हुई और मैं भी अपने दोस्तों के साथ समय बिता पाया था। मेरी बहन की भी शादी हो चुकी थी। मेरी बहन की शादी के कुछ समय बाद राकेश का मुझे फोन आया और कहने लगा कि मेरी सगाई कुछ दिनों बाद है, तुम्हें मेरे घर पर आना है और जब मैं राकेश की सगाई में गया तो मैं उसके घर वालों से भी मिला। उसके घर में उसके माता पिता है, उसके पिताजी सरकारी विभाग में नौकरी करते हैं और उसकी मां घर संभालती है। उसकी बहन का नाम कोमल है और वह कॉलेज में पढ़ती है। कोमल का व्यवहार भी बहुत अच्छा है और वह भी बात करने में बहुत ही अच्छी है। जब मैं राकेश की सगाई में गया तो राकेश मुझे मिला और कहने लगा तुमने बहुत अच्छा किया जो तुम मेरी सगाई में आ गए, मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था। जब राकेश की सगाई हो गई तो उसके बाद मैं अपने काम पर लगा था और मेरी उस बीच में राकेश से बात होती रहती थी। कुछ समय बाद ही राकेश की शादी थी इसलिए राकेश ने मुझे फोन किया और कहा कि मुझे शादी की तैयारी करनी है तो मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता पड़ेगी। मैंने उसे कहा कि ठीक है तुम्हे जब भी मेरी मदद की आवश्यकता हो तो तुम मुझे बता देना। मैं उसकी पत्नी से भी मिल चुका था इसलिए उसकी पत्नी को जो भी सामान चाहिए था वह हमारी दुकान से ही ले गई लेकिन राकेश को मैंने अपने एक दोस्त की शॉप से सामान दिलवाया और उसे बहुत अच्छा लगा क्योंकि मैंने उसे बहुत अच्छे दामों पर वह सामान दिलवा दिया था।
राकेश की शादी के सिलसिले में मैं कुछ दिन उसके घर पर ही रहा और जब मैं उसके घर पर था तो हम लोगों ने काफी काम किया। मेरे और दोस्त भी राकेश के घर पर ही थे और उस बहाने हम लोगों का मिलना भी हो गया। राकेश की शादी की तैयारियां बहुत अच्छे से हम लोगों ने करी और जब उसकी शादी थी तो उसके सारे रिश्तेदार आए हुए थे। सब लोग बहुत ही मस्ती कर रहे थे, उस बीच कोमल और मैं भी साथ में ही बैठे हुए थे। मैं कोमल से पूछ रहा था कि तुम्हारा कॉलेज कैसा चल रहा है, कोमल मुझे कहने लगी कि मेरा कॉलेज बहुत अच्छा चल रहा है। मैंने उसे पूछा कि तुम आगे क्या करने वाली हो, वह कहने लगी कि मैं आगे फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करूंगी। कोमल मुझसे बहुत अच्छे से बात करती है, मैं कोमल के साथ फ्रेंड तरीके से बात करता हूं इसीलिए मुझे कोमल के साथ बात करना भी अच्छा लगता है। कोमल मुझसे पूछने लगी कि आपकी बहन की भी शादी हो चुकी है, मैंने उसे कहा कि हां मेरी बहन की शादी हो चुकी है, राकेश भी मेरी बहन की शादी में आया था। कोमल उसे कहने लगी हां भैया ने मुझे उस बारे में बताया था। कोमल मुझसे पूछने लगी कि आप कब शादी करने वाले हैं, मैंने उसे कहा कि मैं अभी कुछ समय बाद शादी करूंगा, मेरे पिताजी मेरे लिए लड़की देख रहे हैं लेकिन मुझे अभी तक कोई लड़की पसंद नहीं आई इसलिए मैंने अभी तक शादी नहीं की।
मैं सोच रहा हूं कि मैं शादी कर लूं। कोमल कहने लगी चिंता मत कीजिये आपकी भी शादी हो जाएगी। मैंने उसे कहा लेकिन मुझे अभी तक कोई अच्छी लड़की नहीं मिली है, कोमल मुझसे पूछने लगी कि आप किस प्रकार की लड़की ढूंढ रहे हैं। मैंने उसे कहा कि मैं पहले कुछ समय लड़की के साथ समय बताना चाहता हूं ताकि मैं उसे समझ पाऊ। कोमल मुझे कहने लगी कि मेरी भी कुछ सहेलियां है यदि आप मुझे कह दो मैं उनसे आप के लिए बात करती हूं। मुझे कोमल अब अपनी सहेलियों की फोटो दिखा रही थी और मैं उसके साथ ही बैठा हुआ था। मुझे उससे बात करना बहुत अच्छा लग रहा था मुझे पता ही नहीं चला कि कब समय बीत गया,  सब लोग अपना एंजॉयमेंट कर रहे थे। राकेश भी अपने सारे रिश्तेदारों से मिल रहा था इसलिए वह बिजी था। मैं कमल के साथ ही बैठा हुआ था,  मैंने कोमल से कहा ठीक है यदि तुम्हारी कोई अच्छी दोस्त हो तो तुम मुझे उसकी फोटो भेज देना। कोमल मुझे कहने लगी ठीक है मैं आपको अपनी फ्रेंड की फोटो भेज दूंगी। कोमल ने मुझसे मेरा नंबर ले लिया और मैंने कोमल का नंबर सेव कर लिया। कोमल ने मुझे कुछ लड़कियों की फोटो भी भेजी और हम दोनों ही साथ में बैठकर बात कर रहे थे।मैं कोमल के साथ ही बैठा हुआ था हम दोनों बात कर रहे थे। वह मेरा फोन देखने लगी है और जब उसने मेरा फोन देखा तो मेरे फोन के अंदर पोर्न मूवी थी और उस में बहुत ही गंदी तस्वीरें थी। वह मुझे कहने लगी कि क्या आप इस प्रकार की मूवी देखते हैं मैंने उसे कहा कि हां मुझे ऐसे मूवी देखने का बहुत शौक है उसे भी शायद मुझसे अपनी चूत माराने का मन था इसलिए वह मुझसे यह सब चीजें पूछ रही थी। वह मुझे कहने लगी कि हम दोनों कहीं अलग जाकर बैठते हैं वह मुझे अपने कमरे में ले गई और उसने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। मैं और कोमल अब एक ही कमरे में कोमल ने मेरी पैंट से मेरे लंड को बाहर निकाला तो वह उसे अपने हाथों से हिलाने लगी और बड़ी देर तक वह मेरे लंड को हिलाती रही। उसके बाद उसने अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को ले लिया और चूसने लगी।
मुझे बहुत मजा आ रहा था जब वह मेरे लंड को सकिंग कर रही थी। उसके बाद उसने जब अपने कपड़े खोले तो मुझे बड़ा अच्छा लगता उसका यौवन देख कर मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। मैंने भी उसे बिस्तर पर लेटा दिया और उसके स्तनों क चूसने लगा। मैंने उसके स्तनों को बहुत अच्छे से चूसा जिससे कि उसके स्तनों से दूध बाहर निकलने लगा था। मैंने उसे अपने नीचे लेटा दिया और उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए उसकी चिकनी और मुलायम योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर गया तो वह चिल्लाने लगी और मुझे बहुत मजा आने लगा। मैं उसे बड़ी तेज तेज धक्के मार रहा था वह पूरे मूड में आ रही थी और अपने मुंह से सिसकिया ले रही थी। उसकी योनि बहुत ज्यादा टाइट थी और मैं उसे इतनी तेज झटके मारता की उसकी योनि से खून बाहर की तरफ निकलने लगा था और मेरा लंड भी पूरी तरीके से छिल चुका था लेकिन मैंने उसे धक्के मारना जारी रखा। वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर रही थी मैं भी उसे बड़ी तेजी से चोद रहा था। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया और उसे बड़ी तीव्र गति से धक्के दिए जिससे कि उसका पूरा शरीर गर्म होने लगा वह चिल्लाने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा था। काफी समय तक मैंने ऐसा ही किया जब वह झड़ गई तो उसके कुछ देर बाद ही मेरा वीर्य भी उसकी योनि के अंदर गिर गया अब शांत हो चुकी थी। वह मुझे कहने लगी आपने आज मेरी इच्छा पूरी कर दी मुझे बहुत अच्छा लगा मुझे आपसे अपनी चूत मरवाने का मन पहले से ही था।

Wednesday, December 19, 2018

पाँच लौड़ों से चुद गई जंगल में



दोस्तो, मेरा नाम रानी है और मैं एक शादीशुदा महिला हूँ. मेरी उम्र 27 साल की है. मेरी शादी को 3 बरस हो चुके हैं. मेरे पति एक पुलिस ऑफिसर हैं और वह बहुत ही हट्टे-कट्टे मर्द हैं. साथ ही मेरे पति बहुत ही हैंडसम भी हैं और उनका लंड का साईज भी आम औसत लंड से बड़ा, पूरे सात इंच का है. उस लम्बे मोटे लंड से मेरी चुत की खुजली शांत होती है, पर मेरा मन और तन शादी के बाद बहुत ही कामुक हो चुका है. मेरे पति और में हफ्ते में 5-6 बार सेक्स करते हैं. वो मुझे बिस्तर में हर तरह से खुश रखते हैं.
मेरे घर में सास, ससुर, मेरे पति और मैं रहती हूँ. मैं जहां रहती हूँ, वहां से 7-8 किलोमीटर दूर एक जंगल है. अगर हमें पड़ोस के शहर जाना हो तो उसी जंगल के हाईवे वाले रोड से जाना पड़ता है.
एक बार मेरे पति ड्यूटी खत्म करके घर आये और उन्होंने कहा- मेरी ड्यूटी 3 महीनों के लिए पड़ोस के शहर में लग गई है. मेरा उधर जाना जरूरी हो गया है.
यह सुन कर मैं नाराज हो गई.
मेरे पति ने मेरी ओर देखकर कहा- मेरी जान 3 महीने की ही तो बात है. तुम सिर्फ 3 महीने तक सब्र रखो क्योंकि सब्र का फल मीठा होता है.
यह सुन कर मैंने सोचा कि कोई बात नहीं, किसी तरह 3 महीने तक मैं कन्ट्रोल कर ही लूँगी.
उस रात हम दोनों ने बहुत बार चुदाई की. इसी चुदाई के चक्कर में सुबह हो गई और मेरे पति अपनी ड्यूटी पर चले गए. अब घर में सिर्फ मैं और मेरे सास, ससुर ही रह गए थे.
मेरी चुत की आग दिन पर दिन बढ़ने लगी. जब रात को मेरे सास, ससुर सो जाते थे, तब मैं रसोई में जाकर कोई भी लंड के आकार की चीज, जैसे केला या ककड़ी को अपनी चुत में डाल लेती थी, उसी से मेरी चुत की आग थोड़ी देर के लिए शांत हो जाती थी, पर मेरी चुत को तो बड़े लंड की आदत पड़ी थी. थोड़े ही टाइम के बाद मेरी चुत की आग फिर से भड़क उठती थी, फिर भी मैं किसी तरह कन्ट्रोल कर लेती थी.
एक महीने तक ऐसा ही चला. एक महीने के बाद मेरे सास, ससुर को कुछ रिश्तेदारों के साथ तीर्थ यात्रा पर जाना था. उन्होंने मुझे भी साथ चलने को कहा, पर घर में कोई ना होने के कारण मैं जा ना सकी. मेरे सास, ससुर सुबह होते ही यात्रा पर निकल गए. अब मैं घर में अकेली बची थी. इधर मेरी चुत की आग दिनों दिन भड़कती जा रही थी.
तभी मुझे एक आईडिया आया कि मैं पड़ोस के शहर जाकर अपने पति से अपनी चुत की आग को शांत करवा आऊं. मैंने बहुत सोचा और तय किया कि यह ही सही रहेगा.
उस दिन मैंने घर का सारा काम खत्म किया और शाम के करीब 7 बजे जाने की तैयारी कर ली. मैंने अपने कपड़े पहन लिए थे, पर अन्दर मैंने ब्रा नहीं पहनी थी. फिर पति के लिए थोड़ा खाने का सामान लेकर अपनी कार में बैठ गई. कार चलाते हुए मैं यही सोच रही थी कि कब मैं अपने पति से मिलूं और कब मैं उनके लंड को अपनी चूत में लेकर चुदाई करवा लूँ.
करीब 10-12 किलोमीटर दूर जंगल का हाईवे लग गया. थोड़ी देर चलने के बाद मेरी कार में से कुछ आवाज आने लगी और मेरी कार का टायर भी पंचर हो गया. मैंने अपनी कार हाईवे के साईड पर लगा दी. अब मैं सुनसान सड़क पर अकेली थी और मुझे बहुत ज्यादा डर लगने लगा. मेरा मोबाइल भी डिस्चार्ज पड़ा था, जिससे मैं अपने पति से बात भी नहीं कर पा रही थी. मैं थोड़ी देर कार में ही बैठी रही और इन्तजार करने लगी कि कोई ट्रक या बस दिखे, तो उसमें बैठ कर चली जाऊं.. पर वहां काफी देर तक पर कोई भी वाहन नहीं आया.
अब तक करीब दो घंटे हो गए थे. मौसम में ठंड भी बढ़ने लगी थी. तभी मैंने जंगल की तरफ ध्यान से देखा कि वहां कुछ दूरी पर कोई आग जल रही थी. मैंने सोचा कि वहां पर कोई होगा, तो मेरी मदद करेगा. पर मुझे डर भी लग रहा था.
थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत जुटाई और वहां जाने का फैसला कर लिया. मैं पहले वहां जाकर एक पेड़ के पीछे छिप गई.. फिर मैंने वहां देखा कि वहां पर 5 लोग थे और आग जलाकर कुछ खाना आदि खा रहे थे.
उसी साईट पर लकड़ियों का ढेर लगा था उसके पीछे शायद उन लोगों का ट्रक था. साथ ही वहां पर एक झोपड़ी भी थी.
मैंने उन लोगों को ध्यान से देखा, वे सभी काफी हट्टे कट्टे और काले रंग के थे. उन्होंने लुंगी पहनी हुई थी. लुंगी से उनके लंड के उभार साफ दिख रहे थे. उनके मोटे लंड देख कर मेरी चुत की आग भड़क उठी और मैंने सोचा कि इन्हीं लोगों से चुदाई करवा लेती हूँ.
फिर मैं उन लोगों के पास चली गई. वे सभी 5 मुझे देखने लगे. उनमें से एक बंदे ने कहा- मेमसाब आप कौन है और इस जंगल में क्या कर रही हैं?
मैंने कहा- मैं इस जंगल के हाईवे रोड से जा रही थी, तो मेरी कार खराब हो गई और मुझे आज पड़ोस के शहर में जाना है. आप लोग मेरी कुछ मदद करो तो मेरे लिए अच्छा होगा.
उनमें से एक बंदे कहा कि इतनी रात में तो कोई मिस्त्री भी नहीं मिलेगा और इस समय तो कोई बस या गाड़ी भी नहीं मिलेगी. आप ऐसा कीजिये कि आज रात तक यहीं पर ठहर जाइए, सुबह होते ही आप बस में बैठ कर चली जाना.
मेरे पास उनकी बात मानने के अलावा कोई चारा भी नहीं था. मैंने हां कह दिया.
एक बंदे ने मुझे लकड़ी के बड़े से लट्ठे पर बैठने के लिए कहा. मैं उसपर बैठ गई और सबसे बातचीत करने लगी. बातचीत करते हुए मुझे मालूम चला कि वे लोग जंगल से लकड़ियां काटकर शहर में बेचते थे, उसी से उनका गुजारा चलता था.
उन्होंने मेरे बारे में पूछा तो मैंने कहा कि मेरे पति पुलिस ऑफिसर हैं. मैं उन्हीं से मिलने पड़ोस के शहर में जा रही थी.
ऐसे ही मैंने उन लोगों से काफी देर तक बात की. उनमें से दो बंदे उठ कर अपनी झोपड़ी में चले गए. उधर सिर्फ तीन बंदे रह गए थे और मैं थी. तभी मेरी नजर एक बंदे पर पड़ी, वह मेरे तने हुए मम्मों को बड़ी लालसा से देख रहा था.
उसको देख कर मेरा ध्यान उसके लंड की तरफ गया. उसका लंड काफी बड़ा था जोकि मुझे उसकी लुंगी के उभार से ही साफ़ दिख रहा था. उसके लंड को देखकर थोड़ी ही देर में मेरी चुत में आग लग गई. ऐसा दस मिनट तक चला. मैं अपने मम्मों को अपने हाथ से सहलाते हुए खुजाने का नाटक करने लगी और साथ ही उसके हिलते हुए लंड को देखने लगी.
थोड़ी देर में वह मेरे बाजू में आकर बैठ गया और मेरी तरफ घूरने लगा. मैं उसे देख कर थोड़ी हंस पड़ी. तभी उसने अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया, मैंने कुछ नहीं कहा. वो धीरे-धीरे मेरी जांघों को सहलाने लगा. थोड़ी देर में मैं भी गर्म हो गई और मैंने अपने पैर थोड़े खोल दिए. उसने मेरी चुत को हाथ लगया और ऊपर से ही चूत सहलाने लगा. थोड़ी देर बाद उसने मेरी पैंट के अन्दर हाथ डाल दिया और चुत में उंगली करने लगा.
वहां देख कर बाकी के वहां बैठे दो बंदे भी मेरे पास आकर बैठ गए और मेरे मम्मों को दबाने लगे. अब मैं बहुत ज्यादा गर्म होने लगी. तभी एक बंदे मेरे होंठों पर जोर जोर से किस करने लगा. थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे खड़ी किया और मेरे सारे कपड़े उतार डाले. अब मैं उन लोगों के सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी.
तभी एक बंदे ने झोपड़ी में जाकर उन दो बंदों को भी बता दिया और वो उनको बुलाकर बाहर ले आया.
मैं उनके सामने बैठ कर अपनी चुत को सहला रही थी. उन पांचों बंदों ने मुझे देख कर अपनी लुंगी आदि खोल दिए और लंड सहलाते हुए मुठ मारने लगे. उनके खड़े लंड देख कर मेरे मुँह में पानी आने लगा. सब मेरे पास को आ गए और मैं उन सबका एक-एक करके धीरे धीरे लौड़ा चूसने लगी.
उनमें से एक बंदे ने मुझे अपनी गोद में उठाया और झोपड़ी में लेकर गया. उनकी झोपड़ी में एक खाट थी. उस खाट पर उसने मुझे सीधा लिटा दिया. मैंने लेटते ही अपनी टांगें खोल दीं. अब तक झोपड़ी में वे सब आ चुके थे. उनमें से एक बंदा अपना मुँह मेरी चुत में रख कर मेरी चुत को अपनी जीभ से चाटने लगा. सभी बारी-बारी से मेरी चुत को, मम्मों को और गालों को चूमने चाटने लगे.
थोड़ी देर बाद एक बंदे ने अपना लंड मेरी चुत पर रखा और जोर से धक्का दे दिया. मेरे मुँह आआईई ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ जोर से आवाज निकली. तभी एक बंदे ने अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया. मुझे अपनी चूत में बहुत दर्द हो रहा था. करीब 5 मिनट के बाद मुझे मज़ा आने लगा और मेरी आग बढ़ गई. उसने मुझे हचक कर चोदा और बिना झड़े अपने लंड बाहर निकाल लिया. उसके हटते ही दूसरा मेरी चूत में लंड डाल कर मुझे चोदने लगा. इस तरह से सब बारी-बारी से मेरी चुत को चोदने लगे.
एक बंदे ने मुझे उठा लिया और मैं उसके ऊपर आ गई. उसने मेरी चुत में अपना लंड डाल दिया. मैं उसके लंड पर उछलने लगी. तभी एक और बंदा मेरे ऊपर चढ़ गया. उसने मेरी गांड में अपना लंड डाल दिया. मैं उन दोनों बंदों के बीच में सैंडविच बनकर चुद रही थी. मुझे ऐसा आनन्द पहले कभी नहीं आया था. सबने बारी बारी से मेरे मुँह में और मेरी चुत में अपना लंड दिया.
ऐसी मेरी चुदाई 2 घंटे तक चली और मैं भी झड़ गई. मैं थक कर चूर हो गई थी. मैं खाट पर लेटी रही और सब ने मेरे मुँह में अपना लंड देकर अपना रस मुझे पिला दिया. मैंने 5 लोगों के लंड का रस पी लिया. इसी तरह उस रात मुझे तीन बार बारी बारी से सबने चोदा. सुबह हो गई थी.
फिर एक बंदा पड़ोस के शहर में जाकर एक मैकेनिक को बुलाकर लाया. उसने मेरी कार ठीक की और वह चला गया.
मैं जाने को तैयार होने लगी. तो उनमें से एक बंदे ने मुझसे कहा कि मेम साहब आपको कभी भी चुदाई का मन करे तो हमें बुला लेना.. हम सब आपकी चूत की आग को ठंडा कर देंगे.
उसने अपना नंबर मुझे दिया और वे सभी लोग अपने ट्रक में बैठकर चले गए.
मैं भी वहां से निकल गई और वापिस अपने गाँव आ गयी. पति के पास जाकर भी मैं क्या करती, मैं तो उनसे चुदाने ही जा रही थी, मेरा काम पहले ही हो गया और ज्यादा मजेदार तरीके से!
दोस्तो, मेरी सामूहिक चुदाई कहानी आपको कैसी लगी, मुझे मेरी ईमेल आईडी पर बताना. अगली बार ऐसे ही कहानी लेकर हाजिर रहूंगी.
sonvanrane967@gmail.com

Sunday, December 16, 2018

मामी की जवानी के मजे लिए

मेरा नाम संजय है और मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से आता हूं। मेरी उम्र 26 वर्ष हो चुकी है। हमारे यहां पर नौकरियां नहीं है इस वजह से मैंने अपने मामा को फोन किया और कहा कि मुझे वह शहर में ही नौकरी लगा दें। उन्होंने मुझे कहा कि तुम एक काम करो, तुम मेरे पास आ जाओ मैं तुम्हें नौकरी लगा दूंगा। वैसे भी हम लोग घर पर अकेले हैं। मेरे मामा का नाम धीरेंद्र है और वह जयपुर में रहते हैं। उनकी पत्नी का नाम मीना है और वह भी बहुत अच्छे हैं। उनके दोनों बच्चे सरकारी नौकरी हैं। इस वजह से वह घर पर नहीं रहते हैं और वह घर पर अकेली हैं। मैंने अपने पिताजी से बात करी तो वह कहने लगे कि तुम शहर ही चले जाओ। क्योंकि वहां पर तुम अच्छी नौकरी भी मिल जाएगी और तुम अपने हिसाब से काम भी कर पाओगे।
मैंने भी पूरा फैसला कर लिया था और मैं जयपुर चला गया। जब मैं जयपुर गया तो मेरे मामा मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए और वह मेरे घर के हाल चाल पूछने लगे। मैंने उन्हें बताया कि घर पर तो सब ठीक है पर मेरी स्थिति कुछ ठीक नहीं चल रही। क्योंकि मुझे अपने यहां पर कोई भी काम नहीं मिल पा रहा है। मेरे मामा ने कहा तुम उसकी चिंता मत करो, मेरी काफी जान पहचान है। मैं तुम्हारी कहीं ना कहीं नौकरी लगवा ही दूंगा। तुम उसके लिए बेफिक्र रहो और मेरी मामी भी बहुत ज्यादा अच्छी है। उन्होंने भी मुझे कहा कि तुम्हें किसी भी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है। तुम सिर्फ अपना ध्यान रखो  अब मैं अपने मामा लोगों के साथ ही रहने लगा लेकिन कहीं ना कहीं मुझे उनके साथ रहना अच्छा नहीं लग रहा था। क्योंकि मैं सोच रहा था जब मेरी नौकरी लग जाएगी तो मैं अलग रहने लगूंगा।

मेरे मामा ने मेरे लिए नौकरी ढूंढ ली। मैं वहां पर नौकरी करने जाने लगा। उन्होंने मेरे लिए एक ऑफिस में बात की थी वहां पर मैं काम करने लगा। मुझे वहां पर काम करते हुए अब कुछ समय होने लगा था। मैंने एक दिन अपने मामा से कहा कि अब मैं अपने लिए कहीं अलग घर देख लेता हूं। आप लोगों को मेरी वजह से तकलीफ होती होगी। वह मुझ पर बहुत गुस्सा हो गए और कहने लगे कि तुम्हें कहीं भी जाने की आवश्यकता नहीं है। हम दोनों तो घर में अकेले ही हैं। यदि तुम कहीं और रहोगे तो हमें अच्छा थोड़ी लगेगा। उन्होंने मुझे इस बात के लिए साफ इनकार कर दिया और कहा कि तुम्हें बिल्कुल भी अलग नहीं रहना है। मेरे मामा बहुत ही अच्छे हैं और वह मेरा बहुत ही ध्यान रखते हैं। मुझे ऐसा लगता है कि जैसे वह मुझे अपने बच्चे की तरह रखते हैं। अब मैं अपने काम पर जाने लगा और वह जब अपने ऑफिस से वापस आ जाते तो हम लोग साथ में समय बिताते थे। एक दिन जब मामा जी ऑफिस से लौट रहे थे तो उनकी बाइक में किसी ने टक्कर मार दी और वह वहीं गिर पड़े। जिस वजह से उन्हें थोड़ा चोट आई थी  अब हमें उन्हें हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। वह हॉस्पिटल में एडमिट है क्योंकि उन पर काफी ज्यादा चोट आई थी और वह घायल भी हो गए थे।
वह कुछ दिनों तक हॉस्पिटल में ही रहने वाले थे और मैं घर पर ही सारा काम देखा करता था। मुझे उनकी बहुत ही चिंता होती थी क्योंकि हॉस्पिटल में मेरी मामी उनके साथ ही रहती थी और डॉक्टर ने उन्हें आराम करने के लिए भी कह दिया था। कुछ दिन बाद वह सही होने लगे तो डॉक्टर ने उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया और अब हम उन्हें घर पर ले आए। मैंने उनका बहुत ध्यान रखा। जिससे वह मुझे कहने लगे कि तुमने मेरा बहुत ही ज्यादा ध्यान रखा है। मैं तुमसे बहुत ही खुश हूं और मुझे बहुत ही अच्छा लगा कि जब तुमने मेरा इस तरीके से ध्यान रखा लेकिन मैं कहीं ना कहीं इस बात से दुखी था कि उन्हें बहुत ज्यादा चोट आई थी और जिसकी वजह से वह काफी समय तक अपने ऑफिस नहीं जा सकते थे। क्योंकि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी और वह ऑफिस नहीं जा सकते थे। अब मैं ही ऑफिस जाया करता था और जब मैं वापस आता हूं तो मेरी मामी मेरे लिए खाना बना कर रखती थी। क्योंकि ऑफिस से आते वक्त मुझे बहुत देर हो जाती थी। ऑफिस में मेरे अब दोस्त बनने लगे थे। जिनके साथ में उठने बैठने लगा था क्योंकि वह लोग जयपुर के ही रहने वाले थे। जैसे-जैसे मेरी दोस्ती जयपुर में ज्यादा बढ़ती गई तो अब मैं उनके साथ ही शराब पी लिया करता था। पहले मुझे शराब की लत नहीं थी परंतु अब मुझे शराब की आदत होने लगी थी। जब भी मैं ऑफिस से वापस लौटता था तो मैं हमेशा ही शराब पीकर घर लौटता था लेकिन इस बात की भनक कभी मेरे मामा को नहीं लगी और ना ही मेरी मामी को इस बात की जानकारी थी। क्योंकि मैं जब भी घर लौटता हूं तो उनके साथ बहुत ही अच्छे से बर्ताव करता था और वह बहुत ही खुश रहते थे। क्योंकि मैं उनके हर काम कर दिया करता था। घर में जितनी भी चीजें या सामान लानी होती थी तो मैं वह सब अपनी छुट्टी के दिन ले आता था। मैं उनसे अलग रहने की भी बात नहीं कर सकता था। क्योंकि मैंने उनसे जब पहले इस बारे में चर्चा की थी तो उन्हें बहुत ही ज्यादा बुरा लगा था।
मैं अलग रहने की सोच तो रहा था क्योंकि अब मेरे दोस्त और मैं साथ मे पार्टी कर लिया करते थे। इस वजह से मैं सोचता था कि कहीं पर मैं अलग से घर ले लूँ। जिससे कि हम लोग वहीं पर पार्टी कर लिया करेंगे और मुझे अपनी लाइफ जीने में भी अच्छा लगेगा। ऑफिस में ही मेरी एक गर्लफ्रेंड बन गई थी। जिससे कि मैं फोन पर काफी देर बातें किया करता था और वह भी मुझसे बहुत देर तक फोन पर बातें किया करती थी। कई बार मेरी मामी ने मुझे फोन पर बातें करते हुए देख लिया था। परंतु फिर भी वह मुझे कुछ नहीं कहती थी और उन्होंने शायद इस बारे में मेरे मामा से भी कहा था। मेरे मामा मुझे कहते रहते की यदि तुम्हें कोई लड़की पसंद हो तो तुम मुझे बता देना। मैंने कहा नहीं, ऐसी कोई भी बात नहीं है। मुझे कोई भी लड़की पसंद नहीं है। मैं सिर्फ अपने ऑफिस से ही मतलब रखता हूं और अपने ऑफिस से सीधा घर आ जाता हूं।


मैं अपनी गर्लफ्रेंड से फोन में बात कर रहा था और मैं मुट्ठ मार रहा था। तभी मेरी मामी मेरे कमरे में आ गई और उन्होंने मुझे देख लिया। अब वह मेरे पास आई और उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया। मैं अभी भी अपनी गर्लफ्रेंड से फोन पर बात कर रहा था और वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसे जा रही थी। उन्होंने इतने अच्छे से मेरे लंड को चूसा कि मेरा वीर्य गिरने वाला था और जैसे ही मेरा वीर्य गिरा तो उन्होंने मेरे लंड को  बाहर निकालते हुए अपने कपड़े खोल दिया। वह दोबारा से मेरे लंड को हिलाने लगी अब मैंने अपना फोन काट दिया और उनकी योनि के अंदर अपना लंड डाल दिया। मैंने जब उनकी बड़ी-बड़ी चूतडो को अपने हाथ में पकड़ा तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था क्योंकि उनमें अब भी बहुत जवानी बची हुई थी। जैसे ही मैंने अपने लंड को उनकी योनि में डाला तो वह कहने लगी कि तुमने मेरी इच्छाओं को पूरा कर दिया है। इतने वर्षों से तुम्हारे मामा मेरी इच्छा पूरी नहीं कर पा रहे थे और तुमने तो मेरी इच्छाओं को अच्छे से पूरा कर दिया है। अब मैं उन्हें ऐसे ही चोदे जा रहा था और वह मेरा पूरा साथ दे रही थी। वह अपनी चूतडे मुझसे मिलाए जा रही थी। मैं भी उन्हें बड़ी तेजी से धक्के दिया जा रहा था मुझे इतना मजा आ रहा था उन्हें धक्के मारने में की मेरा शरीर पूरा गर्म हो चुका था और उनके चूतड़ों से भी आग निकलने लगी थी। मैं उनके चूत की गर्मी को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। फिर भी मैं उन्हें धक्के मारे जा रहा था पर एक समय बाद  मेरा वीर्य गिरने वाला था और वह उनकी चूत के अंदर ही गिर गया। जब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो मुझे बहुत ही मजा आया और वह मुझे कहने लगी कि अब तुम मेरी चूत हमेशा ही मारा करो। क्योंकि तुम्हारे मामा की बस की बात नहीं है इसलिए तुम ही मेरी इच्छाओं को पूरा किया करोगे। यदि तुम ऐसा नहीं करोगे तो मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड के बारे में तुम्हारे मामा को बता दूंगी अब मुझे उनकी चूत मारनी ही पड़ती है।

जब मैं चुदी पहली बार

मेरा नाम राकेश है और मैं एक बड़ा कारोबारी हूं। मैं दिल्ली का रहने वाला हूं और मेरी उम्र 35 वर्ष है। मुझे काम करते हुए काफी वर्ष हो चुके हैं। पहले मैं नौकरी किया करता था लेकिन बाद में मैंने हिम्मत करते हुए अपना काम खोल लिया और जब मैंने अपना काम खोला तो फिर बाद में मुझे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। परंतु उसके बाद जैसे कैसे मैंने अपने काम को संभाल लिया और अब मेरा काम बहुत ही अच्छे से चल रहा है। मैं अपने काम से बहुत खुश भी हूं। क्योंकि मुझे अब बहुत अच्छा मुनाफा भी होने लगा है और मेरे घर वाले भी इस बात से बहुत खुश हैं। जब मेरी शादी हुई तो उस समय मेरी स्थिति कुछ ठीक नहीं थी। परंतु फिर भी मैंने शादी कर ली। क्योंकि मेरे पिताजी मुझे जिद कर रहे थे और कह रहे थे कि मैं शादी कर लूं। उनकी जिद की वजह से मैंने शादी कर ली लेकिन जब मैंने शादी की तो मैंने अपनी पत्नी को सब कुछ बता दिया। तो उसने मेरे साथ बहुत ही एडजेस्ट किया लेकिन धीरे-धीरे जब मेरा वक़्त अच्छा होता गया और मैं अच्छे पैसे कमाने लगा तो अब वह बहुत ही खुश थी और मुझे कहती कि शुरुआत में आपने कितनी दिक्कतें झेली थी। परंतु अब आपका बिजनेस बहुत ही अच्छा चल पड़ा है और मैं भी बहुत खुश हूं।
मैं अपने कारोबार के सिलसिले में अक्सर इधर उधर जाता रहता हूं और इस बार भी मैं अपने कारोबार के सिलसिले में जयपुर जा रहा था। मैंने सोचा कि मेरा एक पुराना दोस्त है तो मैं उससे जयपुर में मिल लेता हूं। जब मैंने उसे फोन किया तो वह बहुत ही खुश हुआ और कहने लगा कि तुमने इतने वर्षों बाद मुझे फोन कैसे कर लिया। मैंने उसे कहा कि तुम तो मुझे कभी फोन करने वाले नहीं हो। तो मैंने सोचा आज मैं ही तुम्हें फोन कर देता हूं। इस वजह से मैंने तुम्हें फोन किया। जब मैंने उसे बताया कि मैं जयपुर आ रहा हूं तो वह बहुत खुश हुआ और कहने लगा कि तुम मेरे घर पर ही रुकने वाले हो। मैं उसे मना नही कर पाया और मैं उसके घर चला गया। जब मैं उसके घर गया तो वह मुझसे मिलकर बहुत ही खुश हुआ और कहने लगा तुम इतने वर्षों बाद मुझे मिले हो। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। अब हम दोनों बैठकर बातें कर रहे थे। तभी संतोष की पत्नी आ गई और संतोष ने मुझे उससे इंट्रोडक्शन करवाया। उसका नाम सुरभि है। अब हम तीनों बैठकर बातें कर रहे थे तो संतोष हमारी कुछ पुरानी यादें ताजा कर रहा था और मुझे भी बहुत खुशी हो रही थी। बातें करते-करते अब हमारे काम की बात आ गई। संतोष ने मुझे पूछा कि तुम्हारा कारोबार कैसा चल रहा है।

मैंने उसे बताया कि मेरा कारोबार तो बहुत ही बढ़िया चल रहा है। शुरुआत में तो बहुत ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। परंतु अब काम अच्छा चल पड़ा है और जब मैंने संतोष से इस बारे में पूछा तो वह कहने लगा कि मेरी स्थिति तो कुछ ठीक नहीं चल रही। मैं नौकरी से बहुत ज्यादा परेशान हो गया हूं और मुझे अब लगने लगा है कि मैं अपना ही कोई छोटा मोटा कारोबार शुरू कर लू लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा कि मुझे क्या काम शुरू करना चाहिए। मैंने उसे कहा, मैं तुम्हारी तुम्हारा कारोबार खोलने में मदद कर सकता हूं। वह यह बात सुनकर बहुत खुश हो गया और कहने लगा कि लेकिन मुझे उसके लिए इन्वेस्टमेंट डालनी पड़ेगी और वह मेरे पास नहीं है। मैंने उसे कहा तुम उसकी चिंता मत करो। मैं तुम्हें सेटअप लगा कर दे दूंगा। उसके बाद तुम अपने काम को चला लेना। अब वह बहुत खुश हुआ और उसकी पत्नी भी बहुत खुश थी लेकिन मैंने उसे कहा कि तुम्हें उसके लिए दिल्ली आना पड़ेगा और दिल्ली से ही काम करना पड़ेगा। वह कहने लगा ठीक है मैं अपनी नौकरी से कुछ दिनों बाद रिजाइन दे दूंगा और दिल्ली आ जाऊंगा। सुरभि यहां रह लेगी। मैं अपना काम कर के जयपुर से वापस अपने घर लौट गया और कुछ दिनों बाद संतोष का फोन आया और कहने लगा कि मैं दिल्ली आना चाहता हूं। तुम मुझे बताओ मुझे कब आना है। मैंने उसे कहा कि तुम 5 दिन बाद आ जाना। क्योंकि मैं अभी कुछ काम के सिलसिले में बाहर जा रहा हूं और दो-तीन दिन बाद मैं लौट आऊंगा। अब संतोष भी मेरे साथ दिल्ली आ गया और वह मेरे साथ ही काम करने लगा। मैंने उसे एक सेटअप लगा कर दे दिया और उसके बाद वह काम करने लगा। मैंने उसे रहने के लिए अपना एक फ्लैट दे दिया था और वह वहीं पर रह रहा था। धीरे-धीरे संतोष का काम भी अच्छा चलने लगा और वह मुझसे कहने लगा कि तुम्हारी बदौलत अब मेरा काम भी अच्छा चलने लगा है। मैं बहुत खुश हूं और मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है।
अब संतोष भी बहुत खुश था और मैं भी उससे बहुत खुश था। एक बार मुझे काम के सिलसिले में जयपुर जाना था तो मैंने इस बारे में संतोष से जिक्र किया। वह कहने लगा तुम मेरे घर पर ही चले जाना और मेरी पत्नी से भी मिल लेना। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हारे घर पर चला जाऊंगा और सुरभि से भी मिल लूंगा। अब मैं जयपुर चला गया जब मैं जयपुर गया तो सुरभि मुझे देखकर बहुत खुश हुई और मुझसे संतोष के बारे में पूछने लगी। मैंने उसे कहा कि वह बहुत अच्छा है और बहुत ही अच्छे से काम कर रहा है वह इस  बात से बहुत ही ज्यादा खुश थी। मैंने सुरभि से कहा कि मैं फ्रेश हो लेता हूं उसके बाद मैं थोड़ी देर आराम करता हूं। जब मैं बाथरुम में गया तो मैंने सुरभि की लाल रंग की पैंटी दिखी जिससे कि मेरा मन खराब हो गया मैं उसे सुघने लगा। जब मैं बाहर आया तो मुझे सुरभि को देखकर बहुत ही ज्यादा उत्तेजना आने लगी और मैं उसकी गांड को देखने लगा मै उसके बड़े बड़े स्तनों को देख रहा था। जब सुरभि मेरे पास बैठी हुई थी तो मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके होठों को अपने होठों में ले लिया। मैं उसे बहुत ही अच्छे से किस करने लगा अब उसके होंठों से खून भी निकल रहा था। वह भी पूरी उत्तेजना में आ गई और मैंने तुरंत अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह में डाल दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को उसके मुंह के अंदर डाला तो वह बहुत ज्यादा खुश हो गई। मै अपने लंड को अंदर बाहर करती जा रही थी मुझे भी बहुत मजा आ रहा था।
थोड़ी देर बाद मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए तो मैंने देखा उसने पिंक कलर की पैंटी पहनी हुई है और वह उसमें बहुत ही सेक्सी लग रही थी। मैंने उसकी पैंटी को खोलते हुए उसकी चूत मे हाथ लगाना शुरु किया उसकी चूत मे हल्के हल्के बाल थे। मैंने उसकी चूत के अंदर जैसे ही उंगली डाली तो उसकी चूत से पानी निकलने लगा और वह बहुत ही उत्तेजित होने लगी। थोड़ी देर में मैंने भी उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी योनि में घुसेड़ा तो उसके मुंह से चीख निकल पड़ी और वह बहुत ज्यादा मूड में आ गई। अब मैं उसे ऐसे ही बड़ी तीव्रता से चोदने लगा। उसे बहुत ही मजा आ रहा था जब मैं उसे चोदे जा रहा था मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया और उसे चोदता रहा। थोड़ी देर में मैंने उसके स्तनों को भी अपने मुंह में लेकर उनका रसपान करना शुरू कर दिया उनसे दूध निकल रहा था मैंने वह सब अपने मुंह में लेकर निकाल लिया। मैं अब उसके होठों को किस करते हुए बहुत ही ज्यादा मस्त हो रहा था। मैं उसे बड़ी तीव्रता से धक्के दिए जा रहा था उसका बदन भी पूरा लाल होने लगा और मुझे उसका बदन देखकर बहुत ही मजा आ रहा था। लेकिन मुझसे उसकी चूत की गर्मी नहीं झेली जा रही थी। फिर भी मैं उसे चोदने पर लगा हुआ था और बड़ी तेज धक्के दिए जा रहा था। मैंने उसे इतनी तीव्रता से चोदना शुरू किया कि उसका पूरा शरीर और भी गरम हो गया। वह पसीना-पसीना हो गई अब वह इतना ज्यादा पसीना हो चुकी थी कि मुझसे भी बिल्कुल नहीं रहा गया। मैंने तुरंत ही अपने वीर्य को उसकी योनि में डाल दिया जैसे ही मैंने अपने वीर्य को उसकी योनि में डाला तो वह बहुत ज्यादा खुश हुई। वह कहने लगी आपने तो संतोष की कमी को पूरा कर दिया है मुझे बहुत ही अच्छा लगा जब आप ने मुझे चोदा। जब भी मैं जयपुर जाता हूं तो सुरभि की चूत जरूर मारता क्योंकि उसकी चूत बहुत ज्यादा टाइट है और मुझे उसे चोदने में एक अलग ही अनुभूति होती है।

Wednesday, December 12, 2018

पहली बार चुदाई मौसी के साथ



दोस्तो, मेरा नाम तेजस्व है. ये मेरी पहली और रियल सेक्स स्टोरी है. आपको कैसी लगी, पढ़ने के बाद ज़रूर बताना.
मैं बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा था. मैं दिखने में भी अच्छा था और मेरा रंग भी गोरा था, इसलिए कई लड़कियां मेरी फ्रेंड थीं. लेकिन उस समय मैं सेक्स के बारे में नहीं जानता था.
वक्त के साथ धीरे-धीरे मैं बड़ा होता गया. जब मैं जवान हुआ तो सेक्स की इच्छा भी मन में होने लगी. स्कूल में दोस्तों से सेक्स की बातें भी सुनता था. दोस्त अपनी सेक्स स्टोरी बताते थे … लेकिन मुझे ये बातें थोड़ी अच्छी लगती तो थोड़ी बुरी भी, क्योंकि घर में यही बताया जाता था कि इस तरह की बातें करना गंदी बात होता है. लेकिन संगत और कमउम्र का असर होने लगा था.
इस समय तक मेरा क्लास की लड़कियों को देखने का नज़रिया भी बदल गया था. अब जब भी किसी लड़की को देखता तो मेरी नज़र उसके मम्मों पर ही टिक जाती थीं और मन में सेक्स करने की इच्छा होने लगती थी. लेकिन किसी से कह नहीं पाता था.
बात उन दिनों की है, जब मैं 11 2वीं क्लास में था. मैं उस समय एकदम जवान पट्ठा हो गया था. वो सर्दियों के दिन थे. उस दिन जब मैं स्कूल से लौट कर घर आया तो पता चला कि मेरी दूर के रिश्ते की मौसी आई हुई हैं. वो मेरी हम उम्र ही थीं. मैंने उन्हें देखा तो बस देखता ही रह गया.
क्या बला की माल थीं. उनका गोरा रंग, पतला शरीर, मस्त मम्मे, उठी हुई गांड आह … दिल खुश हो गया.
मम्मी ने मेरे और मौसी के लिए खाना लगा दिया था. हम दोनों खाना खाते- हुए बातें कर रहे थे. बात ही बात में ही पता चला कि वो 12वीं क्लास में हैं.
मौसी इतनी खूबसूरत थीं कि बस मैं उनसे प्यार कर बैठा. लेकिन मैं कहने से डर रहा था कि कहीं वो बुरा ना मान जाए.
रात हुई … पापा अलग कमरे में सो गए. एक बेड पर मैं सो गया, बगल की खाट पर मेरी माँ और मौसी लेट गईं. हम अपनी-अपनी रज़ाई में दुबके हुए थे. मुझे नींद नहीं आ रही थी. मैं अपनी मौसी से प्यार का इज़हार करना चाह रहा था लेकिन डर रहा था.
फिर हिम्मत जुटा कर मैंने उनके हाथ पर अपना हाथ रखा, उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मुझमें थोड़ी हिम्मत आ गई. मैंने उनका हाथ थोड़ा सा दबाया … इस पर उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मैंने उनका हाथ धीरे-धीरे सहलाना शुरू कर दिया … पर मौसी ने कोई रिएक्शन नहीं किया. मैं समझ गया कि वो भी कुछ चाहती हैं.
मैंने धीरे से उसके कान में ‘आई लव यू …’ कहा तो उन्होंने मेरा मुँह दबा दिया. मौसी को डर था कि कहीं बगल में लेटी मम्मी सुन ना लें. मैं समझ गया. मैंने उनका हाथ धीरे से अपनी रजाई के अन्दर कर लिया लिया और उनकी उंगलियों को चाटने लगा. जब मुझे लगा कि अब मम्मी सो गई हैं तो मैंने मौसी के मम्मों पर हाथ रख दिया और दबाने लगा.
मौसी के चूचे बहुत ही मस्त थे. मैं पहली बार किसी लड़की के मम्मों को छू रहा था. मेरा लंड पूरा टाइट हो गया था. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. लेकिन मौसी सेक्स करने को अभी राज़ी नहीं थीं … शायद उन्हें कुछ डर था. अब तक हम दोनों एक-दूसरे के बारे में बहुत कम जानते थे.
अगले दिन रविवार था … इसलिए हमने एक-दूसरे से बहुत सारी बातें की. मौसी अब मुझसे बहुत खुल गई थीं.
रात हुई … सब सोने लगे लेकिन आज ना तो मेरी आँखों में नींद थी, ना ही मौसी की. कुछ देर बाद मैंने उन्हें अपनी रज़ाई में बुला लिया. डर हम दोनों को लग रहा था कि कहीं मम्मी जाग ना जाएं. ये मेरी जिंदगी में पहली बार हो रहा था. जब मैं किसी जवान लड़की के साथ एक ही बिस्तर पर लेटा था.
मैंने धीरे-धीरे उनके हाथों को सहलाना शुरू किया, वे मुझसे चिपक गईं. मैंने अपने होंठ उनके कोमल और गुलाबी होंठों पर रख दिए. मैं फिल्मों में चूमा-चाटी के सीन कई बार देख चुका था. सो थोड़ा आइडिया था. मेरा मन कर रहा था कि हम एक-दूसरे को यूं ही बांहों में जकड़े हुए पड़े रहें.
मैं मौसी के गुलाबी होंठों को बहुत देर तक चूसता रहा. कुछ देर बाद मौसी ने मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी. कभी मैं उनकी जीभ को चूसता, तो कभी वो मेरे होंठ चाटती रहीं. उस समय हम दोनों जन्नत की सैर कर रहे थे.
यह मेरा पहला चुम्बन था तो बहुत नया लग रहा था. मैं मौसी के साथ जिंदगी भर यूं ही किस करते रहना चाहता था.
फिर धीरे से मैंने अपना हाथ उनके चूचे पर रख दिया. मौसी के चूचे मीडियम साइज़ के थे.
धीरे-धीरे हम अपने होश खोते जा रहे थे. हम दोनों की साँसें गर्म और तेज हो रही थीं. मेरा लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आना चाह रहा था. मैं अपने हाथ धीरे से उनके पेट पर ले गया और उनकी नाभि में गुदगुदी करने लगा तो वो उछल पड़ीं. मैंने जैसे ही अपना हाथ और नीचे ले जाना चाहा, तो उन्होंने मुझे रोक दिया. मैं समझ गया कि मौसी अभी ऊपर ही मज़ा लेना चाहती हैं.
मैंने उनकी ब्रा को खोल दिया और उनके मम्मों को आज़ाद कर दिया. मैं पहली बार चूचियों को देख रहा रहा था, सो मैं तो ऊपर वाले की इस नियामत को देखता ही रह गया.
मौसी के दोनों मस्त उभार देख कर मुझे नशा सा चढ़ रहा था. मैं उन दोनों उभारों के ऊपर टंके हुए सबसे मस्त मूंगफली के दाने के बराबर गुलाबी रंग की घुंडियों को मसलने लगा. अगले ही पल मैं तो उन पर लगभग टूट ही पड़ा और निप्पलों को चाटते हुए मींजने लगा. मैं अपने जीवन में पहली बार किसी लड़की के दूध दबा रहा था सो मुझे होश ही नहीं रहा कि इसमें दर्द भी हो सकता है, मैं बहुत तेज दबाने लगा तो मौसी दर्द से कराहने लगीं.
फिर मैं बस मौसी के दूध हौले से सहलाने लगा. धीरे-धीरे मैंने अपनी जीभ से उनका पूरा पेट चाटा चूमा. वो पूरी तरह मदहोश हो चुकी थीं और मुझसे बेल की तरह लिपट गई थीं.
मैंने इसी बीच उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया तो वो शर्माने लगीं. मैं उन्हें किस करने लगा और रात के अंधेरे में ही उनकी चड्डी भी उतार दी. चड्डी के उतरते ही वो अपनी बुर ढकने लगीं.
मैंने समय ना गंवाते हुए अपने सारे कपड़े उतार दिए और उनसे चिपक गया. जैसे ही मैंने लंड को उनके शरीर को छुलाया, वो तो एकदम से पागल हो गईं. उनकी साँसें गर्म और तेज हो गईं.
मैंने नीचे को होकर अपने होंठ उनकी बुर पर रखा … तो दोस्तों की सारी बातें याद आने लगीं. मौसी की बुर जैसी भट्टी की तरह गर्म हो गई थी. मुझे बुर के छेद का अंदाज़ा नहीं था इसलिए मौसी ने अपने हाथ से मुझे अपनी बुर का रास्ता दिखाते हुए मेरी उंगली अपनी बुर के छेद में लगा दी.
मैं बुर के स्पर्श से दंग रह गया. मौसी की बुर फूल से भी कोमल थी. उनकी बुर पानी से पूरी तरह गीली हो चुकी थी. मैं समझ गया था कि मौसी चुदाई के लिए तैयार हैं.
मैंने सबसे पहले अपनी एक उंगली को उनकी बुर में डाली और अन्दर-बाहर करने लगा. कुछ देर बाद उन्होंने खुद मेरा लंड अपनी बुर के छेद पर रखवा लिया. मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनकी बुर पर लंड से हल्का दबाव बनाया तो लंड फिसल गया. मैंने फिर ट्राइ किया तो लंड हल्का सा अन्दर घुस गया. लंड के अन्दर घुसते ही वो छटपटा उठीं और मुझसे अलग होने की कोशिश करने लगीं. मैंने उन्हें जोर से पकड़ किया और एक धक्का दे मारा. वो बहुत जोर से चीखने को हुईं … लेकिन उनकी आवाज़ बाहर ना आ सकी.
मैं मौसी के होंठों पर अपने होंठ लगाए हुए था. अब मैं उनकी चुदाई किए जा रहा था. उनके हाथ के नाख़ून मेरी पीठ में गड़ रहे थे. मौसी मेरे लंड के कारण छटपटा रही थीं और उनकी कुंवारी बुर से खून बह रहा था … वो दर्द से तड़फ रही थीं.
कुछ देर बाद जब उनका दर्द कुछ कर कम हुआ तो मैंने एक जोरदार झटका मारते हुए अपना पूरा लंड मौसी की बुर में उतार दिया. वो एक बार फिर पागलों की तरह तड़फने लगीं, लेकिन चीख बाहर ना आ सकी. मुझे पता था कि उनको बहुत दर्द हो रहा है … लेकिन मैं मौका हाथ से खोना नहीं चाहता था.
मैं मौसी को लगातार किस किए जा रहा था और उनकी चूचियों को सहला रहा था. कुछ देर बाद जब मौसी का दर्द कम हुआ तो मैं मस्ती से धक्के लगाने लगा. अब वो भी गांड उठा कर मेरा साथ दे रही थीं. कुछ समय बाद मौसी मुझसे बहुत जोर से चिपक गईं और अकड़ कर ढीली हो गईं.
मुझे उनकी बुर से निकलता गर्म पानी उनके झड़ने का अहसास करा रहा था. कुछ देर मैं उन्हें चोदता रहा. तभी मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे अन्दर से कोई लावा फटने वाला है. मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी … कुछ ही धक्कों के बाद मैंने अपना सारा पानी उनकी बुर में गिरा दिया … और उनसे चिपक कर लेट गया.
दो जवान दिलों का मेल हो गया था. वो मेरी बांहों में पिघलती रहीं.
मैं आज अपनी सारी हसरतों को पूरी करना चाह रहा था. अभी हम दोनों टीन एज वाले थे, सो दिलों में खूब जोश था. कुछ देर बाद हम दोनों ने फिर से सेक्स किया.
सुबह होने से पहले वो फिर मम्मी की रज़ाई में घुस गईं.
मौसी के संग चुदाई की कहानी आगे भी है … आपके इस सेक्स स्टोरी पर मेल मिलने के बाद मैं उसे भी लिखूँगा.
मेरी पहली चुदाई की कहानी कैसी लगी ज़रूर बताएं.
tejasvsamrat11@gmail.com