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Tuesday, December 25, 2018

बहन को मजे से चोदा

incest sex यह घटना अब से करीब 4 साल पहले की है. मेरी बहन कपड़ो पर इतना ध्यान नही
देती थी। बहुत बार ऐसे बैठती थी की उसके बोब्स या फिर पेंटी नज़र आते
थे। मै इन्हे देखकर गर्म हो जाता था. कभी-कभार बाथरूम मे जाकर मुठ मार
लेता। अक्सर मै खेल-खेल मे अपनी रूपाली को छू-लेता या फिर उसके दूध पकड
के दबा
देता।
एक बार हमारे घर वाले मामा के यहाँ गये थे. आउट ऑफ स्टेशन. मे और मेरी
बहन नही गये. मैने अपनी हरकते करना शुरू कर दी. बात-बात पर उसके बोब्स पर
हाथ मारना. उसके बोब्स दबा देना। एक दिन रात को मैने एक बहुत हॉट फिल्म
देखी. मे गर्म हो गया। मैने देखा मेरी बहन बेड पर एक टॉप और स्कर्ट पहन
कर सो रही थी. मुझसे रहा नही गया।
मे धीरे से उसके बेड के पास जाकर बैठ गया. उसकी बॉडी को देखता रहा. धीरे
से उसके बोब्स टॉप के उपर से सहलाने लगा। फिर मैने उसकी स्कर्ट की ओर
देखा. मैने उसका स्कर्ट उपर सरका दिया। वाह क्या नज़ारा था. बहन की
गोरे-गोरे पैर. थोड़ी देर उसके पैर को सहलाता रहा. फिर मे तोडा और उपर
गया और सहलाने लगा और फाइनली उसकी वाइट “वी” शेप की वाइट पेंटी दिखी.
मुझसे रहा नही गया और मैने उसके चूत को सहलाया और चूमा. इससे मेरी बहन
जाग गयी।
वो हैरान थी और बोली ” भैया ! यह क्या कर रहे हो? शर्म नही आती अपनी बहन
के साथ ” मे बोला तू लड़की है. मे लड़का हूँ. मुझे मन किया तो मैने छू
लिया ” वो बोली ” नही, यह ग़लत है… मम्मी पापा को पता चलेगा तो क्या
बोलेंगे? तुम मेरे रूम से चले जाओ “. मे चुप-चाप चला गया।
अगले दिन सब कुछ नॉर्मल था. मुझे फिल्म देखने का बड़ा मन कर रहा था. मे
मार्केट गया और वहाँ से एक अच्छी और कुछ सेक्सी फिल्म ले आया। मेरे रूम
मे मेरा अलग टी वी. है। मैने एक सेक्सी फिल्म देखी और दूसरे को आधे मे
छोड़ कर नहाने चला गया. जब मे नहा रहा था तो मेरी बहन बाथरूम के बाहर से
चिल्लाई के उसे स्केल नही मिल रहा। मेने कहा के मे बाहर आ कर देता हूँ.
तो वो रूम मे टीवी पर लगी सेक्सी फिल्म देखने लगी।
उसने ऐसी फिल्म पहले नही देखी थी. मे बाहर आया तो देखा वो फिल्म देख रही
थी. मैने कुछ नही कहा.चुप-चाप हमने फिल्म देखी और अपना लंच किया. फिर
मैने बहन से पूछा ” और एक फिल्म देखनी है ?”. तो उसने कहा हां। मैने पहले
वाली सेक्सी फिल्म लगा दी. हम दोनो बेड पर पेट के बल लेट कर फिल्म देखने
लगे. फिल्म मे बहुत से हॉट सीन थे. उन्हे देख कर रूपाली भी गर्म हो गयी।
देखते -देखते मैने अपना हाथ उसके स्कर्ट के उपर सहलाने लगा. वो बोली ”
नही भैया यह सब नही.” मे बोला ” मे तो सिर्फ़ कपडे के उपर से मजा ले रहा
हूँ. थोरी देर टच करने दो कपडे के उपर से ही प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़.” वो बोली
” ठीक हे पर उपर से ही “.मैने कहा हा-हा और उसके पिछवाड़े को स्कर्ट के
उपर से सहलाने लगा. दबाने लगा।
फिर धीरे से उसके स्कर्ट के अंदर उसकी पेंटी के उपर. वो फिर बोली ” तुमने
कहा था उपर से ही सहलाओगे ” मे बोला ” हा तो पेंटी के कपडे के उपर ही तो
है”।
उसे भी मजा आने लगा था तो चुप-चाप फिल्म देखने लगी. अब मे पेंटी के उपर
से सहला रहा था. फिर मैने उसके अन्दर की तरफ उसकी चूत को भी सहलाने,
दबाने लगा. उसके मूह से कभी-कभी दबी सी आवाज निकलती ” ओह आ मम” । मैने
उसका स्कर्ट पीछे से उठाया और उसके गोरे-गोरे पिछवाड़े को देखने लगा। फिर
पेंटी के उपर से ही किस किया. अब तक उसने आँखे बंद कर ली थी।
मैने उसे सीधा लिटाया और उसके पेंटी के उपर उसके चूत को किस करने लगा. वो
“आ म्म्म ओह भैया आआ” करने लगी. मैने जब देखा की वो गर्म हो गयी है तो
मैने उसके पेंटी के साइड से अंदर हाथ घुसा दिया और उसकी चूत पेंटी के
अंदर सहलाने लगा। वो “अहह म्म्म नहियीई भैया” बोल रही थी। मैने ने उसकी
पेंटी उतार दी. तब वो होश मे आई और बोली ” नही यह सब ठीक नही है भैया.
मम्मी पापा को पता चलेगा तो क्या सोचेंगे?” मैने कहा ” कुछ ग़लत नही है
और उन्हे पता नही चलेगा. बस एक बार रूपाली प्लज़्ज़्ज़”।
मे उसकी चूत को चूमने लगा और उसे पागल कर दिया. उसकी चूत को किस
करते-करते अपने दोनो हाथ उसकी टॉप के अंदर ले जा कर उसकी ब्रा के अंदर
उसकी चुचियाँ यानी दूध ओर बोब्स दबाने लगा। उसे बहुत मजा आने लगा. मैने
ने पूछा ” कैसा लग रहा है? ” उसने कहा ” आह बहुत अच्छा भेया “।
फिर मैने उसके पूरे कपडे उतार कर उसे एक दम नंगा कर दिया. अब मे उसकी
पूरी बॉडी को चूम रहा था, सहला रहा था. मैने उसकी एक चूची मुहं मे लेकर
चूसने लगा तो दूसरे को हाथ से दबा रहा था. और वो मेरा सर के बाल सहला रही
थी।
15 मि. बाद मैने उसकी चूत मे अपना लंड लगाया और प्रेशर दिया. वो चिल्ला
गयी ” नहि..ईई भैया बहुत दर्द हो रहा है. फिर मैने उसकी चूत पर तोडा
वॅसलीन लगा कर फिर से घुसाया अपने लंड को। 3-4 बार ट्राइ करने पर मेरा
पूरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया. तोडा सा खून भी निकला। फिर थोडी देर
बाद उसे मजा आने लगा. वो बोली ” अहहहहह भैया बहुत मज़ा आ रहा
हे..इईईईईईई. जोर से करो “।
हम दोनो पसीना -पसीना हो रहे थे. मुझे लगा की वो झड गयी है . पर मे
कंटिन्यू करता रहा और कुछ देर बाद मुझे लगा की मेरा निकलने वाला है तो
मेने टाइम पर लंड निकाल कर सारा माल उसकी छाती पर और मूह पर डाल दिया। ओर
फिर मे उसके बगल मे लेट गया. ओर फिर वो बेड पर से उठी ओर बाथरूम मे चली
गयी।
उसके बाद तो हम दोनों कभी भी समय मिलता तो हम सेक्स या छेड़छाड़ करे बगेर नही रहते।

Sunday, December 23, 2018

पहली बार चुदाई मौसी के साथ



दोस्तो, मेरा नाम तेजस्व है. ये मेरी पहली और रियल सेक्स स्टोरी है. आपको कैसी लगी, पढ़ने के बाद ज़रूर बताना.
मैं बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा था. मैं दिखने में भी अच्छा था और मेरा रंग भी गोरा था, इसलिए कई लड़कियां मेरी फ्रेंड थीं. लेकिन उस समय मैं सेक्स के बारे में नहीं जानता था.
वक्त के साथ धीरे-धीरे मैं बड़ा होता गया. जब मैं जवान हुआ तो सेक्स की इच्छा भी मन में होने लगी. स्कूल में दोस्तों से सेक्स की बातें भी सुनता था. दोस्त अपनी सेक्स स्टोरी बताते थे … लेकिन मुझे ये बातें थोड़ी अच्छी लगती तो थोड़ी बुरी भी, क्योंकि घर में यही बताया जाता था कि इस तरह की बातें करना गंदी बात होता है. लेकिन संगत और कमउम्र का असर होने लगा था.
इस समय तक मेरा क्लास की लड़कियों को देखने का नज़रिया भी बदल गया था. अब जब भी किसी लड़की को देखता तो मेरी नज़र उसके मम्मों पर ही टिक जाती थीं और मन में सेक्स करने की इच्छा होने लगती थी. लेकिन किसी से कह नहीं पाता था.
बात उन दिनों की है, जब मैं 11 2वीं क्लास में था. मैं उस समय एकदम जवान पट्ठा हो गया था. वो सर्दियों के दिन थे. उस दिन जब मैं स्कूल से लौट कर घर आया तो पता चला कि मेरी दूर के रिश्ते की मौसी आई हुई हैं. वो मेरी हम उम्र ही थीं. मैंने उन्हें देखा तो बस देखता ही रह गया.
क्या बला की माल थीं. उनका गोरा रंग, पतला शरीर, मस्त मम्मे, उठी हुई गांड आह … दिल खुश हो गया.
मम्मी ने मेरे और मौसी के लिए खाना लगा दिया था. हम दोनों खाना खाते- हुए बातें कर रहे थे. बात ही बात में ही पता चला कि वो 12वीं क्लास में हैं.
मौसी इतनी खूबसूरत थीं कि बस मैं उनसे प्यार कर बैठा. लेकिन मैं कहने से डर रहा था कि कहीं वो बुरा ना मान जाए.
रात हुई … पापा अलग कमरे में सो गए. एक बेड पर मैं सो गया, बगल की खाट पर मेरी माँ और मौसी लेट गईं. हम अपनी-अपनी रज़ाई में दुबके हुए थे. मुझे नींद नहीं आ रही थी. मैं अपनी मौसी से प्यार का इज़हार करना चाह रहा था लेकिन डर रहा था.
फिर हिम्मत जुटा कर मैंने उनके हाथ पर अपना हाथ रखा, उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मुझमें थोड़ी हिम्मत आ गई. मैंने उनका हाथ थोड़ा सा दबाया … इस पर उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मैंने उनका हाथ धीरे-धीरे सहलाना शुरू कर दिया … पर मौसी ने कोई रिएक्शन नहीं किया. मैं समझ गया कि वो भी कुछ चाहती हैं.
मैंने धीरे से उसके कान में ‘आई लव यू …’ कहा तो उन्होंने मेरा मुँह दबा दिया. मौसी को डर था कि कहीं बगल में लेटी मम्मी सुन ना लें. मैं समझ गया. मैंने उनका हाथ धीरे से अपनी रजाई के अन्दर कर लिया लिया और उनकी उंगलियों को चाटने लगा. जब मुझे लगा कि अब मम्मी सो गई हैं तो मैंने मौसी के मम्मों पर हाथ रख दिया और दबाने लगा.
मौसी के चूचे बहुत ही मस्त थे. मैं पहली बार किसी लड़की के मम्मों को छू रहा था. मेरा लंड पूरा टाइट हो गया था. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. लेकिन मौसी सेक्स करने को अभी राज़ी नहीं थीं … शायद उन्हें कुछ डर था. अब तक हम दोनों एक-दूसरे के बारे में बहुत कम जानते थे.
अगले दिन रविवार था … इसलिए हमने एक-दूसरे से बहुत सारी बातें की. मौसी अब मुझसे बहुत खुल गई थीं.
रात हुई … सब सोने लगे लेकिन आज ना तो मेरी आँखों में नींद थी, ना ही मौसी की. कुछ देर बाद मैंने उन्हें अपनी रज़ाई में बुला लिया. डर हम दोनों को लग रहा था कि कहीं मम्मी जाग ना जाएं. ये मेरी जिंदगी में पहली बार हो रहा था. जब मैं किसी जवान लड़की के साथ एक ही बिस्तर पर लेटा था.
मैंने धीरे-धीरे उनके हाथों को सहलाना शुरू किया, वे मुझसे चिपक गईं. मैंने अपने होंठ उनके कोमल और गुलाबी होंठों पर रख दिए. मैं फिल्मों में चूमा-चाटी के सीन कई बार देख चुका था. सो थोड़ा आइडिया था. मेरा मन कर रहा था कि हम एक-दूसरे को यूं ही बांहों में जकड़े हुए पड़े रहें.
मैं मौसी के गुलाबी होंठों को बहुत देर तक चूसता रहा. कुछ देर बाद मौसी ने मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी. कभी मैं उनकी जीभ को चूसता, तो कभी वो मेरे होंठ चाटती रहीं. उस समय हम दोनों जन्नत की सैर कर रहे थे.
यह मेरा पहला चुम्बन था तो बहुत नया लग रहा था. मैं मौसी के साथ जिंदगी भर यूं ही किस करते रहना चाहता था.
फिर धीरे से मैंने अपना हाथ उनके चूचे पर रख दिया. मौसी के चूचे मीडियम साइज़ के थे.
धीरे-धीरे हम अपने होश खोते जा रहे थे. हम दोनों की साँसें गर्म और तेज हो रही थीं. मेरा लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आना चाह रहा था. मैं अपने हाथ धीरे से उनके पेट पर ले गया और उनकी नाभि में गुदगुदी करने लगा तो वो उछल पड़ीं. मैंने जैसे ही अपना हाथ और नीचे ले जाना चाहा, तो उन्होंने मुझे रोक दिया. मैं समझ गया कि मौसी अभी ऊपर ही मज़ा लेना चाहती हैं.
मैंने उनकी ब्रा को खोल दिया और उनके मम्मों को आज़ाद कर दिया. मैं पहली बार चूचियों को देख रहा रहा था, सो मैं तो ऊपर वाले की इस नियामत को देखता ही रह गया.
मौसी के दोनों मस्त उभार देख कर मुझे नशा सा चढ़ रहा था. मैं उन दोनों उभारों के ऊपर टंके हुए सबसे मस्त मूंगफली के दाने के बराबर गुलाबी रंग की घुंडियों को मसलने लगा. अगले ही पल मैं तो उन पर लगभग टूट ही पड़ा और निप्पलों को चाटते हुए मींजने लगा. मैं अपने जीवन में पहली बार किसी लड़की के दूध दबा रहा था सो मुझे होश ही नहीं रहा कि इसमें दर्द भी हो सकता है, मैं बहुत तेज दबाने लगा तो मौसी दर्द से कराहने लगीं.
फिर मैं बस मौसी के दूध हौले से सहलाने लगा. धीरे-धीरे मैंने अपनी जीभ से उनका पूरा पेट चाटा चूमा. वो पूरी तरह मदहोश हो चुकी थीं और मुझसे बेल की तरह लिपट गई थीं.
मैंने इसी बीच उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया तो वो शर्माने लगीं. मैं उन्हें किस करने लगा और रात के अंधेरे में ही उनकी चड्डी भी उतार दी. चड्डी के उतरते ही वो अपनी बुर ढकने लगीं.
मैंने समय ना गंवाते हुए अपने सारे कपड़े उतार दिए और उनसे चिपक गया. जैसे ही मैंने लंड को उनके शरीर को छुलाया, वो तो एकदम से पागल हो गईं. उनकी साँसें गर्म और तेज हो गईं.
मैंने नीचे को होकर अपने होंठ उनकी बुर पर रखा … तो दोस्तों की सारी बातें याद आने लगीं. मौसी की बुर जैसी भट्टी की तरह गर्म हो गई थी. मुझे बुर के छेद का अंदाज़ा नहीं था इसलिए मौसी ने अपने हाथ से मुझे अपनी बुर का रास्ता दिखाते हुए मेरी उंगली अपनी बुर के छेद में लगा दी.
मैं बुर के स्पर्श से दंग रह गया. मौसी की बुर फूल से भी कोमल थी. उनकी बुर पानी से पूरी तरह गीली हो चुकी थी. मैं समझ गया था कि मौसी चुदाई के लिए तैयार हैं.
मैंने सबसे पहले अपनी एक उंगली को उनकी बुर में डाली और अन्दर-बाहर करने लगा. कुछ देर बाद उन्होंने खुद मेरा लंड अपनी बुर के छेद पर रखवा लिया. मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनकी बुर पर लंड से हल्का दबाव बनाया तो लंड फिसल गया. मैंने फिर ट्राइ किया तो लंड हल्का सा अन्दर घुस गया. लंड के अन्दर घुसते ही वो छटपटा उठीं और मुझसे अलग होने की कोशिश करने लगीं. मैंने उन्हें जोर से पकड़ किया और एक धक्का दे मारा. वो बहुत जोर से चीखने को हुईं … लेकिन उनकी आवाज़ बाहर ना आ सकी.
मैं मौसी के होंठों पर अपने होंठ लगाए हुए था. अब मैं उनकी चुदाई किए जा रहा था. उनके हाथ के नाख़ून मेरी पीठ में गड़ रहे थे. मौसी मेरे लंड के कारण छटपटा रही थीं और उनकी कुंवारी बुर से खून बह रहा था … वो दर्द से तड़फ रही थीं.
कुछ देर बाद जब उनका दर्द कुछ कर कम हुआ तो मैंने एक जोरदार झटका मारते हुए अपना पूरा लंड मौसी की बुर में उतार दिया. वो एक बार फिर पागलों की तरह तड़फने लगीं, लेकिन चीख बाहर ना आ सकी. मुझे पता था कि उनको बहुत दर्द हो रहा है … लेकिन मैं मौका हाथ से खोना नहीं चाहता था.
मैं मौसी को लगातार किस किए जा रहा था और उनकी चूचियों को सहला रहा था. कुछ देर बाद जब मौसी का दर्द कम हुआ तो मैं मस्ती से धक्के लगाने लगा. अब वो भी गांड उठा कर मेरा साथ दे रही थीं. कुछ समय बाद मौसी मुझसे बहुत जोर से चिपक गईं और अकड़ कर ढीली हो गईं.
मुझे उनकी बुर से निकलता गर्म पानी उनके झड़ने का अहसास करा रहा था. कुछ देर मैं उन्हें चोदता रहा. तभी मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे अन्दर से कोई लावा फटने वाला है. मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी … कुछ ही धक्कों के बाद मैंने अपना सारा पानी उनकी बुर में गिरा दिया … और उनसे चिपक कर लेट गया.
दो जवान दिलों का मेल हो गया था. वो मेरी बांहों में पिघलती रहीं.
मैं आज अपनी सारी हसरतों को पूरी करना चाह रहा था. अभी हम दोनों टीन एज वाले थे, सो दिलों में खूब जोश था. कुछ देर बाद हम दोनों ने फिर से सेक्स किया.
सुबह होने से पहले वो फिर मम्मी की रज़ाई में घुस गईं.
मौसी के संग चुदाई की कहानी आगे भी है … आपके इस सेक्स स्टोरी पर मेल मिलने के बाद मैं उसे भी लिखूँगा.
मेरी पहली चुदाई की कहानी कैसी लगी ज़रूर बताएं.
tejasvsamrat11@gmail.com

मक्के के खेत में चचेरी बहन की पहली चुदाई



मेरा नाम किशोर है, मैं यू.पी. के एक छोटे से गाँव में रहता हूँ। बात सन् 2006 की है, मैं उस वक्त ग्यारहवीं कक्षा पास करके बारहवीं में आया था। मैं एक सीधा-सादा, शर्मीला लड़का हुआ करता था, पर पढ़ने में बहुत तेज़। आज से आठ-नौ साल पहले गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूल 1 जुलाई को खुलते थे, पर गाँव के स्कूलों की कक्षाओं में अगस्त-सितम्बर से पहले रौनक नहीं होती थी।
गाँव में मेरा घर लगभग बीच में ही है। हमारे घर के ठीक पीछे एक घर है, जिसकी छत हमारी छत से मिली हुई है। उस घर में मेरे एक दूर के ताऊ जी रहते थे। उनकी एक इकलौती लड़की थी सीमा। वो लड़की हमारी बिरादरी में सबसे सुन्दर मानी जाती थी। बात सच भी थी। हालाँकि मैं लड़कियों के साईज़ नहीं नापता, पर कह सकता हूँ कि वो एक ऐसी लड़की थी, जिसे देखते ही आपके जैसे लोग, उसे अपने नीचे होने का सपना देखने लगें। गोल चेहरा, बड़ी आँखें, सुर्ख़ लाल होंठ, गुलाबी गाल और गोरा बदन, सभी के होश फाख़्ते करने वाले थे।
अगस्त का महीना था, सावन पूरा झूम रहा था, बारिशों का दौर शुरु हो गया था, पर गर्मी जस की तस थी। बिजली की सुविधाएँ गाँव में आज भी न के बराबर हैं, तब की तो बात ही क्या करें। इसलिए गर्मी से बचने के लिए हम छत पर ही बिछौना करके सोते थे। ताऊ जी की छत कच्ची थी और हमारी पक्की, इसलिए उनके घर के सदस्य हमारी छत पर ही सोते थे।
सामान्यतः मैं सीमा को दीदी कहकर बुलाता था क्योंकि वो मुझसे चार साल बड़ी थी। हम दोनों को अंताक्षरी खेलने का बहुत शौक था। जब भी मौका मिलता हम खेलने लग जाते।
एक दिन शाम को हल्की सी बारिश हो गई, जिसके कारण मेरे परिवार के लोग नीचे आँगन में ही सो गए, पर मैं ज़िद करके ऊपर छत पर ही चला गया। वहाँ ताई जी और सीमा पहले से लेटी थीं।
सीमा ने मेरा बिछौना अपने पास ही करवाया और फिर हम अंताक्षरी खेलने लगे। हालाँकि गाँवों में (खासकर हमारे गाँव में) लड़का-लड़की के ज्यादा पास रहने को शक की नज़र से देखा जाता है, पर हम पर शक ना करने के दो कारण थे। पहला यह कि सीमा मेरी चचेरी बहन थी दूसरा यह कि वो मुझसे 4 साल बड़ी थी और 23 साल की थी। और फिर हम दोनों ही बहुत समझदार माने जाते थे, इसलिए हम पर शक शायद ही कोई करता।
अंताक्षरी ज्यादा देर नहीं चली, लगभग आधे घण्टे में ही सीमा को नींद आ गई और वह सो गई। पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। हालाँकि मेरे मन में कोई गंदगी नहीं थी पर फिर भी मन अशान्त था। दरअसल कहीं पढ़ा था कि जब जाड़ों के बाद गर्मियाँ और गर्मियों के बाद बरसात शुरू हो यानि होली के आसपास और सावन के दिनों में मनुष्य में प्रेम और काम भावनाओं का कुछ ज्यादा ही विस्तार होता है, शायद इसी कारण अशान्त था।
खैर थोड़ी देर में मैं भी सो गया।
थोड़ी देर ही हुई होगी कि ताई जी ने खर्राटे लेना शुरु कर दिया जिससे मेरी आँख खुल गईं। आँख खुलते ही मैंने पाया कि सीमा का एक हाथ मेरे सीने पर रखा था और एक टाँग मुड़कर मेरी टाँगों पर रखी थी। उसकी जाँघ मेरे शिश्न पर दबाब डाल रही थी, मतलब वो मेरी ओर करवट लेकर लेटी थी। उसकी साँसें मेरी गर्दन पर महसूस हो रहीं थीं।
सीमा के हाथ, जाँघ और साँसों के स्पर्श का अहसास होते ही मेरे शरीर में मानो एक अद्भुत ऊर्जा की एक बड़ी सी लहर दौड़ गई। मेरे लण्ड को सिर्फ 3 सैकेण्ड लगी होंगी खड़े होने में। मैं केवल एक कच्छे में था। मेरा लण्ड खड़ा होने के बाद कच्छे और सीमा की हल्की सी सलवार में से भी उसकी मलाई सी मुलायम जांघ को महसूस कर रहा था। पहले तो मैं ताई जी को उनके खर्राटों की वजह से जगाना चाहता था, पर सीमा के उस अद्भुत कामुक स्पर्श ने मुझे ऐसा करने से रोक दिया।
लण्ड इतना ज़ोर लगा रहा था मानो किसी भी क्षण कच्छे और सलवार को फाड़ता हुआ सीमा की जाँघ में छेद कर देगा। शरीर में इतनी बेचैनी हो गई थी कि लगता था कि फटने वाला हूँ। मैं पड़ा-पड़ा अपने यौवन के उस प्रथम नारी स्पर्श का आनन्द ले रहा था।
तभी सीमा हल्की सी अंगड़ाई लेते हुए मेरी तरफ और ज्यादा खिसकी। इससे उसके होंठ मेरी गर्दन पर छू गए, और मेरा लण्ड उसकी चूत के पास पहुँच गया। इस घटना ने मेरे अन्दर और भी अधिक उत्तेजना भर दी। इस प्रकार का अहसास मुझे पहली बार हो रहा था।
जब उत्तेजना ज्यादा बढ़ गई तो मैंने हिम्मत करके उसकी ओर करवट ली और अपना हाथ उसकी बगल में डाल दिया। उसके उरोजों को छूने की हिम्मत अभी नहीं आयी थी। उसकी ओर करवट लेने पर मेरा लण्ड उसके पेट पर टक्कर मारने लगा। सीमा ने सलवार कमीज पहनी थी, उसकी कमीज थोड़ी ऊपर उठी थी। इसी कारण मेरे लण्ड और उसके पेट के बीच बस मेरे कच्छे की परत थी।
मेरी इस पहल से सीमा हरकत में आई और मेरी कमर पर हाथ रखकर मुझे अपनी ओर खींचने लगी। अब मुझे पता चल गया कि वह भी जाग रही है, मगर हमने एक-दूसरे से कुछ बोला नहीं। जब उससे मैं एक हाथ से नहीं खिंचा तो उसने अपना दूसरा हाथ मेरी नीचे वाली बगल में डालकर मुझे दोनों हाथों से अपनी ओर खींचा। मौका पाकर मैंने भी उसकी नीचे वाली बगल में हाथ डालकर उसे अपने में समेटने की कोशिश करने लगा।
लगभग दस मिनट हमने एक दूसरे को कसकर भींचा। उस आलिंगन से ऐसा मज़ा आ रहा था जैसे… उफ़ बयां नहीं कर सकता। अब तक दोस्तों से सुना था कि लड़की को चोदने में बहुत मज़ा आता है मगर मुझे तो आज बस सीमा को कसकर गले लगाने में ही इतना मज़ा आ रहा था कि लग रहा था जन्नत में हूँ।
हमने धीरे-धीरे एक दूसरे को रगड़ना शुरु कर दिया। इस रगड़ ने मेरे अन्दर इतनी ऊर्जा भर दी कि एक-एक नस में खून की बाढ़ आ रही थी। हम लिपटे-लिपटे एक दूसरे को खूब ज़ोर से रगड़ रहे थे। मेरा लण्ड उसकी चूत से बस थोड़ा ही ऊपर रगड़ रहा था। उसके बिना ब्रा वाले उरोजों की घुण्डियों को मैं उसकी पतली सी कमीज के ऊपर से महसूस कर सकता था।
कुछ देर बाद सीमा ने मुझको खुद से थोड़ा दूर किया और एक हाथ से कच्छे के ऊपर से मेरे लण्ड को टटोलने लगी। उसका हाथ लगते ही मेरा लण्ड इतना व्याकुल हो गया जैसे मेरे शरीर को छोड़ उसके हाथों में चिपकना चाहता हो।
मैं भी सही अवसर भाँपते हुए अपने एक हाथ से उसकी कमीज़ के बटन खोलने लगा। उसके स्तन थोड़ी देर में ही मैंने नंगे कर दिए और एक हाथ से ही उन्हें सहलाना शुरु कर दिया। मैंने जैसे ही उसकी चूचियों पर हाथ रखा वो सिहर उठी। इधर मुझे भी ऐसा लगा जैसे हाथों ने पहली बार कोई इतनी अनमोल चीज छुई हो।
व्याकुल होकर सीमा ने मेरा लण्ड कच्छे से बाहर निकाला और उसे हल्के से सहलाने लगी। फिर सलवार के ऊपर से ही अपनी चूत पर रखकर मुझसे लिपटने लगी। पर मैंने उसे रोका और अपना बनियान उतार दिया, उधर सीमा ने भी अपनी बटन खुली कमीज़ उतार दी। चूँकि सीमा ने मेरा कच्छा नीचे कर दिया, जिसे मैंने पैरों से उतार दिया, अब मैं तो पूरा नंगा था और सीमा ऊपर से नंगी थी पर नीचे सलवार थी।
ताई जी अभी भी भयानक खर्राटे ले रहीं थीं, उनके खर्राटे हम भाई बहन को संतुष्ट कर रहे थे कि अभी कोई खतरा नहीं है। अब फिर से हम एक दूसरे से लिपट गए और एक दूसरे को अपने अंदर समेटने की कोशिश करने लगे। मैं अपने लण्ड को उसकी सलवार के ऊपर से ही रगड़ रहा था, और वो भी इसमे मेरा साथ दे रही थी।
इसी दौरान पश्चिम से चमक के साथ बादल उठना शुरू हो गया, हल्की-हल्की शीतल बयार चलने लगी, जिसने हमारी कामुकता को और बढ़ा दिया था। उस सुहाने मौसम में हम लिपटे हुए अपनी जवानी के रस का सम्पूर्ण आनन्द ले रहे थे। तभी सीमा ने मेरे गाल पर एक चुम्मा लिया। यह मेरे लिए एक और नया अहसास था। कमाल की बात थी कि पिछले एक घण्टे में मुझे जितने नए अनुभव हुए थे, पहले कभी इतने अनुभव एक साथ न हुए थे।
उसके चुम्मे के बाद मैंने भी उत्तर में एक बड़ा सा चुम्मा लिया।
इस बार न जाने क्यों उसकी हँसी छूट गई, जैसे ही वो हँसी मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये और उन्हें चूसने लगा। पहले तो उसने अपने होंठ बहुत कसकर आपस में भींचे रखे, पर थोड़ी देर बाद उसने अपने होंठ खोल दिए, और फिर वो मेरे और मैं उसके होंठों का कामुक रस पीने लगे।
फिर धीरे-धीरे मैं उसके नाड़े की ओर बढ़ा। मैंने उसका नाड़ा खोल दिया और धीरे से अपना हाथ उसकी चूत की ओर बढ़ाने लगा। वो शायद बहुत उत्तेजना में थी, इसीलिए उसने कोई विरोध नहीं किया। मैं उसकी चूत को सहलाने लगा, जो उसके रस से बिल्कुल भीग रही थी।
अभी तक कोई भी रस मैंने जबान से चखा था, आज पहली बार पता चला कि एक रस ऐसा भी है जो हाथों से भी चखा जा सकता है, जो कि बहुत नशीला भी होता है।
अब सीमा ने मेरे कान में धीरे से कहा- अंदर घुसायेगा?
मैंने हाँ में उत्तर दिया।
फिर बोली- बहुत धीरे से घुसाना, मम्मी पास में ही है.
मैंने स्वीकृति में हाँ बोला।
फिर हम कामुक मिलन के लिए तैयार हो ही रहे थे कि अचानक बहुत तेज़ हवा चलने लगी। आँधी आ गई, हल्की-हल्की बूँदें भी थीं। इससे पहले कि ताई जी जाग जायें, हम होश में आए और एक दूसरे से अलग हो गए और फिर जल्दी-जल्दी कपड़े पहने।
तभी बारिश तेज़ हो गई। वो अपने घर चली गई और मैं अपने घर। पर हम दोनों की प्यास अधूरी रह गई।
बारिश पूरी रात पड़ी और उस बारिश की रात में मेरी बेचैनी इतनी बढ़ी रही कि नींद नहीं आई। सुबह के समय थोड़ा बहुत सोया होऊँगा।
सुबह-सुबह पिता जी ने जगाया और कहा कि आज तुझे मक्का रखवानी है। दरअसल हमारे एक खेत में मक्का उगी हुई है। वह खेत गाँव से बाहर ट्यूबवेल पर है।
मैंने पिता जी से कहा- मेरे बस की नहीं है मक्का रखवानी, मुझे डर लगता है वहाँ।
तो पिता जी बोले- अरे डरने की कौन सी बात है, सीमा भी तो रखवाती है अपनी मक्का वहाँ। सीमा का खेत भी बिल्कुल हमारे खेत से मिलकर है।
इतना सुनते ही मैं फट से तैयार हो गया खेत पर जाने के लिए, और जैसे ही मैंने बाहर जाकर देखा तो सीमा हमारे दरवाज़े पर खड़ी थी, वो मुझे बुलाने आई थी।
मुझे देखते ही वो शर्मा गई और आँखें नीचे झुका लीं। उसका चेहरा शर्म से लाल हो रहा था और वो मुझसे नज़र नहीं मिला पा रही थी। मैं भी उससे नज़र नहीं मिला पा रहा था, मगर हमारे हाव-भाव बता रहे थे कि हम दोनों ही अपनी अधूरी प्यास को बुझाने के लिए बेचैन थे।
मैंने पिता जी से कहा- सीमा मुझे बुलाने आई है, मैं जाकर खेत में मक्का रखवा देता हूँ।
पिता जी ने कहा- ठीक है, मगर टाँड पर मक्का रखते समय ध्यान रखना कि कहीं चोट न लग जाए।
गाँव से बाहर निकलते ही खेत शुरू हो जाते थे, हम दोनों खेत पर पहुँच गए।
सीमा ने कहा- मैं अपने खेत से मक्का उठाकर लाती हूँ और तुम अपने खेत से ले आओ.
हम दोनों अपने-अपने खेतों से मक्का उठाकर लाने लगे और खेत की कोठरी में लाकर इकट्ठा करने लगे। जब सारा मक्का इकट्ठा हो गया तो उसको टाँड पर भी रखना था। मैंने सीमा से कहा कि वो नीचे से मक्का उठाकर मुझे उठाकर पकड़ाती रहे और मैं उसे ऊपर टाँड पर रख दूँगा।
सीमा ने गले में जो चुन्नी डाली हुई थी उसे कमर पर बाँध लिया और नीचे झुकते हुए मुझे मक्का की टोकरी भर कर पकड़ाने लगी। जब वो नीचे झुकती तो उसकी कमीज़ के अंदर लरज़ते उसके स्तनों की झलक भी मुझे मिल जाती जिसने बरसात की पहली रात की कामुकता को फिर से जगाना शुरू कर दिया।
दो तीन-बार कमीज़ में लटकते उसके स्तनों को देखकर मेरे लण्ड ने अपना आकार लेना शुरू कर दिया और वो मेरे पजामे में खड़ा होकर उछलने लगा।
मेरी कामुकता बढ़ती ही जा रही थी इसलिए जब सीमा मक्के की टोकरी उठाकर ऊपर उठती हुई मेरी टाँगों को देखती तो मैं अपने लण्ड में जोश का एक झटका उसे दिखा देता।
वो मेरे लण्ड की हरकत देख रही थी, मगर देखकर नज़रें झुका लेती थी। टोकरी उठाते-उठाते उसके गोरे गाल लाल हो चुके थे और इधर मेरे लण्ड का बुरा हाल हो रहा था। मन कर रहा था उसकी कमीज़ उतार कर उसके चूचों पर टूट पड़ूँ।
मैंने सोचा ये ऐसे ही शर्माती रही तो काम नहीं बनेगा। जब वो अगली टोकरी उठाकर देने लगी तो मैंने मक्का पर पैर फिसला दिया और गिरने का नाटक करते हुए जान-बूझ कर उसके बदन को लपक लिया। मेरे शरीर और मक्के की टोकरी दोनों का भार वो संभाल नहीं सकी और टोकरी उसके हाथ से छूट कर गिरने के साथ हम दोनों भी नीचे पड़ी मक्का पर गिर गए।
मैं उसके ऊपर था और वो मेरे नीचे। उसने मेरी आँखों में देखा और मैंने उसकी।
वो मुस्कुरा दी और मुझे सिग्नल मिल गया। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके रसीले अधरों का रसपान करने लगा। वो भी मेरी कमर पर हाथ लपेट कर मेरा साथ देने लगी। मेरा लण्ड तो पहले से ही तना हुआ था। मगर उसके लबों को चूसते हुए वो उसकी चूत में जाने के लिए ऐसे तड़प रहा था जैसे कोई प्यासा बिना पानी के मरने ही वाला हो।
सीमा ने मेरी हालत देखी और अपना एक हाथ मेरी कमर से हटाकर नीचे मेरे लण्ड पर ले जाकर उसे पजामे के ऊपर से ही सहलाने लगी। मेरी उत्तेजना अब मेरे काबू के बाहर हो गयी और मैंने उसके कमीज को उतरवाकर उसके स्तनों को नंगा करवा दिया। सफेद, कोमल, मखमली, मलाई जैसे श्वेत उसके उरेज़ और उनके बीच में तन चुके उसके निप्पल जैसे ही मैंने नज़रों के सामने देखे, मैं उन पर टूट पड़ा। मैं उसके स्तनों को इतनी ज़ोर से चूसने लगा कि उसकी चीख निकल गई।
मगर मेरी उत्तेजना मेरे वश में कहाँ थी, मैंने उसके स्तनों को चूसते हुए उसकी सलवार का नाड़ा खोलना शुरू कर दिया। नाड़ा खुलते ही उसकी चूत को अपनी हथेली से रगड़ने लगा और उसकी टाँगें स्वत: ही फैलने लगीं। मैंने उसकी सलवार को निकाल कर उसको बिल्कुल नंगी कर दिया और साथ ही अपना कुर्ता और पजामा भी निकाल दिया। मेरे कच्छे में तने मेरे लण्ड ने अपना कामरस छोड़-छोड़कर उस पर एक बड़ा सा धब्बा बना दिया था।
मैं नंगी पड़ी अपनी बहन सीमा पर लेट कर उसके होंठों को फिर से चूसने लगा और मेरे कच्छे में तना हुआ मेरा लण्ड उसकी जांघों के बीच में टकराने लगा। सीमा ने अपनी दोनों टांगें ऊपर उठाकर मेरी कमर पर रख लीं और मेरी नंगी कमर को सहलाते हुए मेरे होंठों को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। उसके मखमली कोमल स्तनों को दबाए मेरी छाती से नीचे हाथ ले जाते हुए मैंने अपना कच्छा भी निकाल कर नीचे कर दिया और अपने लण्ड को उसकी चूत के मुंह पर सेट कर दिया।
मेरे लण्ड ने जैसे ही बहन की चूत के होंठों को छूआ तो मैं आनन्द के असीम सागर में गोते लगाने लगा। अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत में अंदर धकेल दिया। वो मुझसे लिपट गई और मेरी गर्दन को चूमने लगी।
मैंने उसको कस कर अपनी बाहों के आगोश में लिया और उसकी चूत में लण्ड को डालकर अंदर-बाहर करना शुरू किया।
आह… आज समझ में आया कि नारी के तन में ऐसी क्या काबिलियत होती है तो जो मर्द को उसका गुलाम बना देती है।
मेरे आनन्द का अनुभव, जो उस समय मुझे मिल रहा था वो मैं बता नहीं सकता। मैंने उसके अधरों को चूसते हुए उसकी चुदाई शुरू कर दी। हम दोनों काम के रस को भोगने लगे।
पहली बार था तो मैं ज्यादा देर टिक नहीं पाया और मैंने 3-4 मिनट के अंदर ही संयम खोकर उसकी चूत में अपने लण्ड से वीर्य की हर एक बूंद निचोड़ कर उसके नंगे कोमल बदन पर गिर गया। वो मेरे गालों को चूमती रही, मुझे प्यार करती रही।
उसके ऊपर से उठने का अब भी मन नहीं कर रहा था मगर डर था कि कहीं कोई देख न ले इसलिए हमने उठकर अपने कपड़े पहन लिए। उसके बाद मक्का को टाँड पर लगाकर घर आ गए।
अब जब भी हमें मौका मिलता हम दोनों एक-दूसरे की प्यास बुझाने लगे।
नीचे लिखी मेल आई-डी पर इस कहानी के बारे में अपनी राय देना न भूलें।
singh.rak55@gmail.com

मेरी कुंवारी बुर की ठुकाई की चाहत



मेरे प्यार प्यारे दोस्तो, और सहेलियों, कैसे हैं आप सब?
मैं उम्मीद कर रही हूँ कि इस ठंड में लड़कों को चूत और लड़कियों को लण्ड खूब मिल रहे होंगें। सर्दियों के मौसम में अगर चूत को लण्ड और लण्ड को चूत मिल जाए तो मज़ा ही आ जाता है। मेरा तो बहुत मन करता है गर्म-गर्म लण्ड लेने का। और बात जब सर्दियों की हो तो उसका मज़ा दोगुना हो जाता है।
मैं अपनी पहली कहानी लेकर आप सबके सामने आई हूँ कि कैसे मैंने पहली बार एक लण्ड को पटाया और वो जल्दी ही पट भी गया. चूँकि यह मेरी पहली कहानी है तो अगर कोई गलती हो जाए तो आप लोगों से कहना चाहूँगी कि नज़रअंदाज़ कर दें। अब मैं आपको अपनी पहली ठुकाई की कहानी बताती हूँ।
सबसे पहले मैं अपना परिचय दे दूं। मेरा नाम रश्मि शर्मा (काल्पनिक) है, मैं यू. पी. की निवासी हूँ। मेरे वक्ष का साइज़ 34, कमर 30 और गांड 36 की है। नैन-नक्श से हुस्न की मल्लिका हूँ मैं। मेरे स्तन गोल-मटोल हैं और निप्पल भूरे रंग के हैं। मेरी इस पहली कहानी में मैं बताऊंगी कि मैने अपनी सील कैसे तुड़वाई।
मैं अंतर्वासना की नियमित पाठिका हूँ. इस मजेदार साइट की ज्यादातर कहानी मैंने पढ़ी हैं उन कहानियों को पढ़कर मेरी भी चूत लण्ड निगलने को कुलबुला उठती थी। मेरा भी मन करता था कोई मेरी चूत चूसे, मेरे दूध दबा कर निचोड़ डाले, मेरी चूत में खीरे जैसा लण्ड डाल कर फाड़ डाले।
बहुत बार ट्राई किया कि किसी लण्ड को फंसाऊं लेकिन अभी तक मैं अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाई थी। फिर एक दिन वो मौका आ ही गया जब मुझे अपने लिए एक लण्ड मिल गया। जो मेरी चूत का उद्घाटन करने के लिए जल्दी ही तैयार भी हो गया।
बात बीते कुछ दिन पहले की है जब मैं कॉलेज जाती थी। नवंबर का ही महीना था, मैं अपने परिवार के साथ एक कार्यक्रम में शामिल होने दूसरे शहर गयी थी। वहाँ जाकर थोड़ा आराम करने के बाद में ग्राउंड में टहल रही थी कि मेरी नज़र एक लड़के पर पड़ी. वो मेरी तरफ देख कर मुस्कराया तो बदले में मैं भी मुस्करा दी।
शाम को सब लोग खाना खा रहे थे तभी वह लड़का भी हमारे पास आ गया और फिर ताऊ की बेटी ने हम सबका परिचय उससे कराया। मुझे वह बहुत ही स्मार्ट लगा। हम दोनों चुपके से एक दूसरे को ही देख रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे से इशारे में ऊपर अकेले में आने का न्यौता भी दे डाला। खाने के बाद मैं सबसे नज़रें छिपा कर ऊपर पहुंची तो देखा कि वो मेरा इंतज़ार कर रहा था।
हम दोनों में सामान्य बातें होने लगीं.
कुछ देर में मुझे ठंड लगने लगी और मेरे चेहरे पर ठिठुरन देखकर उसने मुझसे पूछ लिया- ठंड तो नहीं लग रही है?
मैंने कह दिया- ज्यादा तो नहीं लग रही, मगर हल्की-हल्की लग रही है।
मेरे यह कहने पर उसने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा- दिखाओ, कितनी लग रही है।
मेरा हाथ पकड़कर उसने मेरे हाथ को अपने हाथ में लिया और प्यार से सहलाने लगा। मुझे अच्छा लगने लगा। मैं मंद-मंद मुस्कुरा रही रही थी। वो भी समझ गया कि मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं ऐसा करवाने में। उसने मुझे अपने थोड़ा और पास आने के लिए कहा तो मैं सरक उसके और पास चली गई। उसने मुझे दोनों बांहों में भरते हुए कहा- अब तो नहीं लग रही ना?
मैंने कहा- नहीं।
फिर धीरे-धीरे उसने मेरे कंधे को सहलाना शुरू कर दिया और मुझे अब उसकी छुअन में अधिक आनन्द आने लगा। मैंने आंखें बंद कर लीं और उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और अपने होंठ सीधे मेरे होंठों पर रख दिए। मैं भी यही चाह रही थी।
उसके होंठ चूसने का अब मेरा भी मन करने लगा तो हम दोनों के होंठ आपस में तेज-तेज चलते हुए जैसे कुश्ती लड़ने लगे और उसका हाथ मेरे स्तनों को दबाने लगा, मैं गर्म होने लगी.
बहुत देर तक उसके होंठों को चूसने के बाद मेरा दिल भी कर रहा था कि मैं उसके लण्ड पर हाथ रख दूँ. मैंने उसके लण्ड पर हाथ रख दिया और वो उसकी पैंट में उछलने लगा. मेरी कामुकता और ज्यादा बढ़ती जा रही थी. हम पागलों की तरह एक दूसरे को चूसते ही जा रहे थे. वो मेरे स्तनों को मसल रहा था और मैं उसके लण्ड को सहलाने का मज़ा ले रही थी।
वो मेरे स्तनों को दबाते-दबाते दूसरा हाथ मेरी चूत पर ऊपर से फिराने लगा. मेरी चूत भी पानी छोड़ने लगी. मेरे मुँह से सिसकारी निकलने लगी. डीजे की तेज़ आवाज़ में मेरी सिसकारी दब कर रह जाती।
मैं भी उसके लण्ड को हाथ में पकड़ने की कोशिश करते हुए सहलाती जा रही थी जिससे उसका लण्ड अपने पूरे आकार में तनकर बिल्कुल रॉड जैसा सख्त हो गया था और उसका काफी मोटा भी था।
जब उससे रहा न गया तो उसने अपना लण्ड बाहर निकाला और मेरे हाथ में पकड़ा दिया और मैं उसके कड़क लण्ड पर हाथ फिराने लगी, उसे अपनी तरफ़ खींचने लगी।
हम दोनों ने चारों ओर देखा पर कोई जगह ढंग की नहीं मिली जहां पर हम आराम से एक दूसरे की प्यास बुझा सकें। हमारे पास समय और जगह दोनों की ही कमी थी। फिर उसने मुझे वहीं दीवार के सहारे लगाकर मेरा लहंगा ऊपर कर दिया।
वो नीचे बैठकर मेरी चूत को चाटने लगा। मैंने लहंगा उसके सिर पर डाल दिया और उसको ढक लिया। उसने मेरी एक टाँग अपने हाथ से उठा रखी थी और अपनी जीभ मेरी चूत पर फिरा रहा था। वो मेरी पानी छोड़ रही चूत का रस पीने लगा, अपनी जीभ मेरी चूत में घुसेड़ने लगा। मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि उसके सिर को पकड़कर अपनी चूत में घुसा लेना चाहती थी। उसने मुझे बिल्कुल पागल कर दिया था।
जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने अपनी जीभ चूत से निकाल ली और मैंने लंहगा हटा दिया। वो मेरी तरफ कामुक नज़रों से देख रहा था। मैं तड़प रही थी. मेरी तड़प देखकर उसे अच्छा लग रहा था. वो फिर से खड़ा हो गया और मेरी चूत चाटने के बाद जो रस उसके होंठों पर लगा हुआ था, उसी रस के साथ उसने मेरे होंठों को फिर से चूसना शुरू कर दिया। मैं और ज्यादा कामुक हो गई।
फिर उसने साथ ही मेरे स्तनों को फिर से दबाना शुरू कर दिया। बड़ा खिलाड़ी लग रहा था वो कमीना! उत्तेजित होकर मैंने उसके लण्ड को और तेजी से मसलना शुरू कर दिया। अब वो भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था और उसने मुझे अपनी टाँगों के पास बैठा लिया। उसका मोटा खीरे जैसे लण्ड मेरी नाक की सीध में फनफना रहा था।
उसने अपना लण्ड मेरे होंठों पर फिराना शुरू कर दिया। मेरे गालों पर भी फिराया और माथे पर भी लगाया। मैं भी उसकी क्रिया का मज़ा ले रही थी। वो समझ गया था कि मैं लण्ड के लिए कितने दिनों से तड़प रही थी।
उसके लण्ड से निकल रहा चिपचिपा पदार्थ मैं अपनी जीभ से चाट जाती थी। उसका स्वाद मैंने पहली बार चखा था कि लड़कों के लण्ड से जो पानी निकलता है वो कैसा लगता है। नमकीन सा पानी बूंद-बूंद करके बाहर आ रहा था।
अब मैंने उसके लण्ड के टोपे को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया, वो सिसकारी लेने लगा। उसने अपना टोपा चटवाने में बहुत मज़ा आ रहा था। मैं भी उसके लण्ड के टोपे को लॉलीपोप की तरह चाट रही थी। जब मैंने देखा कि वो बहुत तड़प रहा है तो फिर मैंने बिना कहे ही उसका लिंग अपने मुँह में ले लिया और मजे़ लेकर चूसने लगी। वो मेरे मुंह में अपने लण्ड को अंदर-बाहर करने लगा। उसका मोटा लण्ड लेकर मेरा मुंह भर गया था लेकिन मुझे उसका लिंग चूसने में बहुत ही मजा आ रहा था।
मेरी चुदने की इच्छा भी बस अब पूरी होने ही वाली थी। काफी देर तक चुसाई के बाद मैंने अपनी चूत में लण्ड डालने के लिए उससे खुद ही कह दिया।
वो भी बस इंतज़ार में ही था कि कब चूत में घुसाने को बोलूंगी मैं… जब उसने अपना मोटा लौड़ा मेरी चूत में घुसाया तो पहले तो मुझे काफी दर्द हुआ लेकिन उसका लण्ड इतना मस्त था कि वो दर्द भी बर्दाश्त किया जा सकता था।
और जिसे चुदने की चुल्ल हो उसे दर्द में भी मज़ा आता है।
उसके मोटे खीरे जैसे लण्ड ने मेरी सील तोड़ दी जिसके टूटने से मेरी चूत से खून आने लगा। फिर भी मैं दर्द को सहन करती रही, बहुत मज़ा आने लगा था उससे चुदते हुए। वो मेरी चूत में पिस्टन की तरह धक्के मारे जा रहा था, कुछ देर में मेरा सारा दर्द गायब हो गया और अब इतना आनन्द आ रहा था कि उससे चुदती ही रहूं और वो मुझे ऐसे ही सारी रात चोदता रहे।
कभी उसके धक्के तेज़ होने लगते तो कभी धीरे-धीरे प्यार से चोदने लगता। बहुत मज़ा दे रहा था मुझे। मेरी सारी तमन्ना पूरी कर रहा था वो!
मेरी चूत अपनी चुदाई करवाते-करवाते जब तृप्त होने लगी तो मेरी चूत से एक कामरस का सैलाब बाहर आ गया। उसके बाद भी वो नहीं रूका और लगभग 2-3 मिनट बाद उसने एकदम से अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया और बाहर आते ही उसके लण्ड से गाढ़े दूध जैसी पिचकारियाँ छूटने लगीं। उसने सारा वीर्य वहीं ज़मीन पर गिरा दिया।
उसके बाद रुमाल से उसने मेरी चूत और अपने औज़ार को साफ किया। वो काफी थका-थका सा लग रहा था और मेरी चुदने की ख्वाहिश पूरी होने के बाद मैं भी अब वहां ज्यादा देर रुकना नहीं चाहती थी। इसलिए हम दोनों नज़र बचाकर नीचे आ गए।
लेकिन बाद में मुझे पता चला कि हमारे इस चुदाई के खेल को कोई और भी देख रहा था। कोई दूसरा लड़का था लेकिन उसने अभी तक किसी को कुछ नहीं बताया था। नीचे आकर मैं एक जगह पर बैठ गयी क्योंकि दर्द के कारण मुझे चलने में दिक्कत हो रही थी। लेकिन उस मोटे लंड से चुदने के बाद मैं अंदर ही अंदर खुश भी हो रही थी।
हम लोग फिर सुबह अपने घर आ गए और घर आकर मैंने आराम किया। मन में बहुत खुशी थी क्योंकि वह मेरी पहली चुदाई थी जिसने मुझे बहुत आनन्द दिया और उसके बाद मैं दूसरे शिकार की तलाश में जुट गई। क्योंकि एक बार चुदकर जो सुख मुझे मिला था वो सुख मैं बार-बार अनुभव करना चाह रही थी। मुझे पहली चुदाई में दर्द तो बहुत हुआ लेकिन मोटा लण्ड लेने की मेरी तमन्ना भी पूरी हो गई जिसमें मुझे बहुत मज़ा आया।
मैं अपनी उस पहली ठुकाई को बहुत याद करती हूँ। और जल्दी ही किसी नए लण्ड को फंसाऊंगी और आपके लिए एक नया किस्सा लेकर आऊंगी। तब तक आप मुझे बताएँ कि आपको मेरी यह पहली चुदाई की कहानी कैसी लगी. आप मेल पर अपनी राय देकर जरूर बताएँ और यदि मेरी पहली कहानी में कोई गलती हो गई हो तो मुझे माफ करें। नीचे दी गई मेल आई-डी पर मैं आपके मैसेज का इंतज़ार करूंगी।
rsharmafemale@gmail.com

Wednesday, December 19, 2018

मेरी छोटी बहन की चुत की तड़फ



हाय फ्रेंड्स.. मेरा नाम बिक्की अरोड़ा है. मैं पंजाब के पटियाला का रहने वाला हूँ. मैं अन्तर्वासना पर बहुत सारी सेक्स स्टोरी पढ़ चुका हूँ और आज भी नियमित रूप से सेक्स कहानी पढ़ने के लिए सबसे पहले अन्तर्वासना साईट को ही खोलता हूँ. इधर की रंगीन कहानी पढ़ कर आज मेरे मन में एक विचार आया कि क्यों न मैं भी आप सभी अपनी आंखों देखी घटना आप सब को बताऊं.
चूंकि हर चीज़ शेयर करने का एक प्लॅटफॉर्म होता है और जब कोई साईट पर आपकी गोपनीयता बनी रहने की उम्मीद होती है, तो मुझे क्या, किसी को भी अपनी बात खुल कर रखने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए. आज इसी विचार को लेकर मुझे हिम्मत मिली और मैं अपना अनुभव आप सबके साथ शेयर कर रहा हूँ.
यह घटना मेरी छोटी बहन के साथ की है जो अभी पढ़ रही है. यह बात उन दिनों की है जब हमारा पूरा परिवार अपने मामा के घर रहने घूमने गया था. वैसे तो मैं अपनी बहन के बारे में कोई निगेटिव बात दिमाग़ में नहीं लाता था, पर एक घटना ने मुझको झकझोर के रख दिया. यह घटना मेरी आंखों के सामने हुई, पर मैं कुछ ना कर सका बल्कि उसी बहाव में खुद बह गया.
मेरी बहन, जिसका नाम पल्लवी है, को मैं अक्सर देखता था कि वो जब भी सोती थी, तो वो कमरा बंद करके अकेले ही सोती थी. मेरे मन में कुछ कुछ संदेह सा होता था.. क्योंकि वो उम्र के जिस दौर से गुजर रही थी, वो मैं पार कर चुका था.. इसलिए मुझे इस बात का गहरा अनुभव था.
जब हम सभी मामाजी के घर पर थे. तो एक दिन की बात थी, मैं मामा जी के घर की छत पर टहल रहा था. तभी बगल के घर की खिड़की से एक लड़का दिखा. उसका नाम करण था, वो किसी को फ्लाइयिंग किस दे रहा था. मैं कुछ समझ नहीं पाया.
मैंने जब छत से नीचे आके देखा तो वो मेरी बहन के कमरे की ओर देख कर किस कर रहा था. मेरी बहन रूम बंद करके अन्दर थी. मैं फिर से छत पर आ गया.. और उसको छुप कर देखने लगा.
कुछ देर बाद करण ऐसे ही सेक्स करने का इशारा कर रहा था.
मैंने सोचा कि इन लोगों की हरकतों को रंगे हाथ पकड़ा जाए. मैं उस समय तो करण को कुछ नहीं बोल सकता था, क्योंकि इससे मेरी बहन का इज़्ज़त खराब होने का डर था. लेकिन मैं अब उन दोनों पर चुपके से ध्यान रखने लगा. करण मेरे मामाजी के घर भी आता था. मैं इस बात को लेकर उसके साथ कुछ कर भी नहीं सकता था.
मेरी बहन मुझसे छोटी थी और जब तक मैं उसे रंगे हाथ नहीं पकड़ता, तब तक मैं उसको भी कुछ नहीं बोल सकता था. सो मैंने अब उन दोनों पर नजर रखना शुरू कर दिया.
एक दिन मेरी बहन पल्लवी नहा कर आई और कमरे में कपड़े चेंज कर रही थी. तो करण फिर से उसको कुछ इस तरह का इशारा कर रहा था जैसे वो किसी चीज को लाइक कर रहा हो.
मुझको लगा कि अन्दर कमरे में बहुत कुछ गड़बड़ चल रही है. इसी वजह से मुझे ये भी लगने लगा कि करण रात में मेरी सिस्टर के कमरे में आता है.
एक दिन मैंने अपना फोन में हिडन कैमरा ऑन करके उसके कमरे की खूंटी में टांग कर चार्जिंग पिन को लगा दिया. ताकि इस तरह से उसको शक ना हो.
जब मैंने सुबह फोन निकाला तो जो वीडियो उसमें शूट हुआ था, उसको देख करके मैं दंग रह गया. मैं सोच भी नहीं सकता था कि मेरी बहना पल्लवी, जिसको इतने अच्छे संस्कार मिले हों, वो ये सब काम भी कर सकती है.
मुझे उस वीडियो में चल रही क्लिप को देख कर कई दिनों तक ये चिंता बनी रही थी.
दरअसल करण जिस तरह से उसके मुँह में अपना लंड डाले हुए चुसवा रहा था … वो ऐसा लग रहा था मानो पल्लवी कोई पॉर्न स्टार हो. दूसरे सीन में वो लंड चुसवाता हुआ पल्लवी की गांड पर तेज तेज थप्पड़ भी बरसा रहा था, जिससे पल्लवी के चूतड़ एकदम लाल हो गए थे.
मैं ये सब याद कर कर के पागल हो गया. मुझे पल्लवी को लंड चूसते देख कर ये ध्यान ही नहीं रहा था कि यह लड़की मेरी सगी बहन है, हम दोनों एक ही माँ के जाये हैं. नतीजा यह हुआ कि अंत में मैं भी पल्लवी को चोदने का प्रयास करने में जुट गया. मैंने सोचना चालू किया कि ये सब उसके साथ कैसे करूँ.
मैं एक दिन दोपहर में उसके कमरे में गया और अपने मोबाइल में फीड उस लंड चुसाई वाले वीडियो को, उसके रूम के टीवी में कनेक्ट करके प्ले कर दिया.
मेरी भगिनी ने सेक्स वीडियो को देखा तो वो घबरा गई और उसके पास कुछ बोलने कहने को कोई शब्द ही नहीं थे.
अब मुझे मेरी सेक्सी बहन को कुछ बोलने की आवश्यकता ही रह गई नहीं थी. वो मेरे करीब आकर रोने लगी- भैया.. आप किसी को मत बोलना.. आप जो चाहो कर लो, पर इस बात को किसी से मत बोलना.
मेरा गुस्सा उफान पर था. मैंने बहन की गांड पर 5-6 झापड़ जड़ दिए और उसको बोला- अब तू रंडी बन गई है.. तू मुझे भाई मत बोल.
उस दिन तो मैं वहां से चला गया.
दो दिन तक जब भी मेरा मन होता, मैं उस वीडियो को देखने लगता. तीसरे दिन मैंने उससे कहा कि रात में तुम मेरे कमरे में आ जाना.
रात हुई, सब लोग खाना खाकर सोने चले गए. मैं भी अपने कमरे में आ गया. मैंने कमरे के दरवाजे को खुला छोड़ दिया था. करीब 11:30 बजे वो मेरे कमरे में आई और सिसक सिसक के रोने लगी.
मैंने कहा- जो हुआ सो हुआ.. अब चुप हो जाओ.. जब तुमको चुदाई ही करवाना था तो मुझको बोल देती.
इतना कहते हुए मैंने एक ब्लू मूवी चालू कर दी. मैंने टीवी का वॉल्यूम म्यूट कर दिया था. जैसे जैसे ब्लू मूवी की चुदाई आगे बढ़ने लगी, मेरी बहन की कामुकता जागती गई. मैंने उसे देखा तो वो नंगी होने लगी और अपना रंग दिखाने लगी. में लेटा हुआ सब देख रहा था.
वो मेरे करीब आई और चिपकने लगी. मैंने उसको दूर हटाया तो वो मुझको उत्तेजित करने के लिए अपने कपड़े खोलने लगी.
मैं जीवन में पहली बार अपनी बहन की चूचियों को देख रहा था. क्या मस्त चूचियां थीं … एकदम से तनी हुई. मुझे तो पता भी नहीं था कि उसके चूचियों के निप्पल डार्क ब्राउन रंग के हो गए हैं. नीचे देखा तो उसकी चूत में झांटें भी आ गई थीं.
अगले दस मिनट में मेरे सामने एक 18 साल की लड़की पूरी तरह नंगी खड़ी थी. उसका साइज़ तो नहीं बता सकता, पर हां जब वो पीछे घूमी, तो उसकी उठी हुई गांड देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.
अब मैं सोचने लगा कि इसलिए ही करण इसकी गांड पर थप्पड़ बरसा रहा था.
अब उसकी गांड पर थप्पड़ बरसाने की बारी मेरी थी. मैं उसको अपनी गोद में लेकर उसकी गांड को मसलने लगा. उसके मम्मों को मसलने लगा. मैं भूल चुका था कि वो मेरी छोटी बहन है. मैं उसके साथ रंडी जैसे व्यवहार करने लगा.
पहले मैं 20 मिनट तक उसके चूचों को मसलता रहा. जब वो गर्म हो चुकी तो उसने मुझे खड़ा किया और खुद नीचे बैठ कर मेरा पैन्ट खोल कर मेरे लौड़े को, जो 6 इंच से कुछ ज़्यादा ही होगा, उसको निकाल लिया.
मैंने उसको इशारा किया तो वो मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी. मैं उसके माथे को पकड़ के उसके मुँह में अपना लंड पेल रहा था. वाह क्या चूसना सीख गई थी एकदम रंडी जैसे लंड चूस रही थी.
इस वक्त उसके चूचे मेरे हाथों में दबे थे. उसके कसे लेकिन मुलायम मम्मों, जैसे गुब्बारों में पानी भरा हो, का क्या कहना. फिर मैंने उसको घोड़ी बना दिया. पीछे आकर उसकी चुत को चूमना शुरू किया.
उसकी चुत से पानी की धार आ रही थी. मैं उसकी चुत को मस्ती से चूस रहा था.
दस मिनट उसकी चुत को चूसने के बाद मैंने अपनी छोटी बहन की चुत में अपना लंड लगाया और एक ही झटके में पूरा लंड घुसा दिया. उम्म्ह… अहह… हय… याह… उसकी चुत बहुत ही टाइट थी. वो इससे पहले एक दो बार ही चुदी थी. मैं उसकी चुत को करीब 15 मिनट तक चोदता रहा.
वो मेरे लंड की मोटाई को झेल नहीं पा रही थी, जिससे वो हल्के स्वर में चिल्लाए जा रही थी- आह … भैया छोड़ दो … मुझे दर्द हो रहा है … आपका बहुत बड़ा है.
जब भी वो चिल्लाती, मैं उसके मुँह को दबा कर अपनी स्पीड और तेज कर देता था. कुछ देर बाद वो झड़ गई. मगर मैं अभी गरम था. तो मैंने उसकी चुत को चोदने के बाद उसकी गांड मारने का सोचा.
मैंने उसको बेड के किनारे पर घोड़ी बना कर दिया और मैं नीचे खड़ा हो गया. जैसे ही मैंने उसकी गांड में अपना लंड लगाया, वो समझ गई. वो उठ कर बैठ गई और मेरे पैर पकड़ते हुए बोली- भैया, प्लीज़ गांड मत मारो.. बहुत दर्द होता है.. और आपका तो बहुत बड़ा है.
मैंने उसके चूचों को दबाते हुए कहा- रंडी साली.. जब करण तेरी गांड मार रहा था.. तो दर्द नहीं कर रहा था.
वो चुप रह गई.
फिर मैंने उसको घोड़ी बना कर उसकी गांड में लंड पेलना शुरू किया.
अगर अन्तर्वासना के पाठकों को मेरी छोटी बहन की गांड देखना हो तो वे उसे वीडियो पर देख सकते हैं.
उसकी मस्त गांड देख कर आपलोगों को भी उसकी गांड में लंड पेलने का मन करने लगेगा.
अब मैं उसकी गांड को लंड पेल कर बेरहमी से चोद रहा था. वो चिल्ला रही थी, लेकिन मैं बिना परवाह किए, उसकी गांड को चोदे जा रहा था.
थोड़ी देर में मैं झड़ने लगा.. मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके मुँह में पेलने लगा. कुछ देर बाद मैंने सारा माल उसके मुँह में ही निकाल दिया और मैंने उसकी नाक को दबाए रखा क्योंकि मैं चाहता था कि वो मेरे लंड के माल को उगल ना दे. जब उसने मेरे लंड का पूरा पानी पी लिया, तभी मैंने लंड को बाहर निकाला.
अब जब भी मेरा सेक्स करने का मन होता है तो मैं अपनी बहन को चोद लेता हूँ. अब वो रोती भी नहीं है, मजे से पूरी गांड उठा कर गांड और चूत मरवाती है.
आप लोग मेल करके बताएं कि आपको मेरी बहन की गांड चूत चुदाई स्टोरी कैसी लगी. यह मेरा पहली कहानी थी.
bikkyarrora0007@gmail.com

Sunday, December 16, 2018

गांव के लड़के के लंड से लगाव

मेरा नाम लता है मैं कोलकाता की रहने वाली हूं, मैं एक कंपनी में जॉब करती हूं और मेरी पैदाइश कोलकाता की ही हुई है, मैं बचपन से ही कोलकाता में रही हूं। मेरे पापा स्कूल में टीचर हैं और मेरी मम्मी भी गवर्नमेंट जॉब पर हैं। मैं घर में इकलौती हूं इसलिए मैं बहुत ज्यादा शरारत करती हूं, वैसे तो मुझे ज्यादा समय नहीं मिल पाता परंतु मुझे जितना भी वक्त मिलता है उस वक्त मैं बहुत ज्यादा शरारात करती हूं और जब भी मेरे मम्मी पापा घर पर होते हैं तो वह लोग मुझसे बहुत परेशान रहते हैं और कहते हैं तुम जब भी घर पर होती हो तो तुम हमें बहुत परेशान कर देती हो, अब तुम बड़ी हो चुकी हो लेकिन अब भी तुम्हारे अंदर पहले जैसा ही बचपना भरा पड़ा है। मैंने अपनी मम्मी से कहा क्यों आप ऐसे क्यों बात कर रही हैं मुझे आप लोग अच्छे से जीने भी नहीं दे रहे, मेरी मम्मी ने उस दिन मुझे गले लगा लिया और कहने लगी हम लोग तो सिर्फ तुम्हें डांटते हैं और तुम्हें छेड़ते हैं, हम लोग भी चाहते हैं कि तुम हमेशा ही खुश रहो और तुम्हारी खुशी को किसी की नजर ना लगे।
मेरे ऑफिस में मेरा एक बॉयफ्रेंड है उसका और मेरा रिलेशन काफी समय से चल रहा है लेकिन अब हम दोनों का रिलेशन कुछ ठीक नहीं चल रहा, मैंने एक दिन उसे अपने ऑफिस की कैंटीन में कहा कि तुम आगे हम दोनों के रिलेशन के बारे में क्या सोचते हो, वह कहने लगा मैं तो तुमसे शादी करना चाहता हूं और तुम्हारे साथ ही जीवन बिताना चाहता हूं लेकिन उसकी बातों से मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था कि वह मेरे साथ आगे जीवन बिताना चाहता है। मैंने उसे कहा कि मुझे बिल्कुल भी नहीं लगता कि तुम मुझसे शादी करने वाले हो, वह कहने लगा तुम्हें ऐसा क्यों लग रहा है, मैंने उसे कहा पता नहीं क्यों मेरा दिल ऐसा कह रहा है कि तुम मुझसे ना तो खुश हो और ना ही मैं तुम्हारे साथ खुश हूं। मेरा ना जाना अपने रिलेशन से क्यों मोहभंग हो चुका था, मुझे अपने बॉयफ्रेंड में कोई इंटरेस्ट नहीं था इसी वजह से मैंने उससे अब थोड़ा बहुत दूरी बना ली थी।

हम लोग फोन पर बात करते थे और हम दोनों रिलेशन में भी थे लेकिन रिलेशन में होते हुए भी ना जाने मुझे उसको लेकर कोई भी फीलिंग नहीं थी। मैंने जब यह बात अपनी मम्मी को बताई तो मेरी मम्मी कहने लगी यह तुम्हारा खुद का ही निर्णय है यदि तुम उसके साथ अपना जीवन आगे नहीं बताना चाहती तो तुम उसके लिए स्वतंत्र हो। मुझे भी ना जान अपने बॉयफ्रेंड को लेकर बिल्कुल  अच्छा नहीं लगता था। मेरी मम्मी के साथ में मैं हमेशा ही खुल कर बात करती थी और उनसे मैंने कभी भी कोई बात नहीं छुपाई, वह मेरी बहुत अच्छी दोस्त भी हैं और मैं उन्हें अपनी अच्छी दोस्त मानती हूं। एक दिन हम तीनो लोग साथ में बैठे हुए थे और मेरे पिताजी कहने लगे कि हम लोग काफी वक्त से अपने गांव भी नहीं गए हैं क्यों ना हम लोग अपने गांव हो आए। हमारा गांव कोलकाता से कुछ दूरी पर है। मैंने भी पापा से कहा हां आप बिल्कुल सही कह रहे हैं, हम लोग काफी समय से अपने गांव नहीं गए हैं, हम लोगों को गांव जाना चाहिए। जब पापा से मैंने यह बात कही तो वह कहने लगे यदि तुम भी जाने के लिए तैयार हो तो हम सब लोग कुछ दिनों बाद ही चलते हैं, मैंने पापा से कहा ठीक है हम लोग कुछ दिनों बाद चलते हैं, मैं ऑफिस से भी छुट्टी ले लेती हूं, वैसे भी मेरी काफी सारी छुट्टियां बची हुई हैं और मैंने काफी समय से छुट्टी भी नहीं ली है। मैंने अब ऑफिस से भी छुट्टी ले ली थी। पापा मम्मी ने भी छुट्टियां ले ली थी और जब हम लोग हमारे गांव गए तो मैं अपने गांव जाकर बहुत खुश हो रही थी। हमारे कुछ रिश्तेदार गांव में ही रहते हैं, मैं जब उनसे मिली तो मुझे बहुत खुशी हो रही थी। हम लोग गांव में ही रुके हुए थे, उसी दौरान मेरी मुलाकात सोमेश के साथ हुई, सोमेश बहुत ही अच्छा लड़का है। सोमेश गांव में ही पढ़ा लिखा है और वह बहुत ही सिंपल और साधारण है, ना जाने उसकी तरफ मैं क्यों खींची चली गई, मुझे पता नहीं चला लेकिन मैं जब भी सोमेश को देखती तो मुझे अच्छा लगता था। सोमेश से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी थी इसीलिए मैंने उसे अपना नंबर भी दे दिया। जितने दिन मैं गांव में रूकी उतने दिनों तक हम दोनों साथ में ही घूमे, मुझे सोमेश के साथ वक्त बिताना भी अच्छा लगने लगा था।
हम लोग जब कोलकाता लौट आए तो मैं सोमेश के साथ में फोन पर बात करती रही, मुझे सोमेश ने फोन किया और कहने लगा कि मैं कोलकाता कुछ काम से आ रहा हूं, मैंने उसे कहा चलो इसी बहाने तुमसे मुलाकात भी हो जाएगी। मैंने उसे पूछा तुम कोलकाता किसके पास आ रहे हो, वह कहने लगा कोलकाता में मेरी दीदी रहती है मैं उन्हीं के पास कुछ दिनों के लिए आ रहा हूं। मैं बहुत ही खुश थी क्योंकि मैं सोमेश से मिलने वाली थी, मैं उसका बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी। वह सुबह कोलकाता आया तो उसने मुझे फोन कर दिया और कहने लगा मैं कोलकाता आ चुका हूं। मैं भी उससे मिलने के लिए बहुत बेताब थी, मैंने उससे उसका एड्रेस ले लिया और उससे मिलने के लिए चली गई। जब मैं सोमेश से मिली तो ना जाने मुझे क्या हुआ मैंने उसे गले लगा लिया। जब मैंने उसे गले लगाया तो उसने भी मुझे बहुत जोर से पकड़ लिया उसका हाथ मेरी गांड से लग रहा था इसलिए मेरे अंदर की सेक्स भावना जागने लगी क्योंकि काफी समय से मैंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स नहीं किया था और सोमेश मेरे लिए बिल्कुल ही नया था इसीलिए मैंने भी उसे  स्मूच कर लिया। सोमेश ने मुझे कहा मुझे यहां पर अच्छा नहीं लग रहा है हम लोग कहीं अकेले में चलते हैं।
मुझे मेरा बॉयफ्रेंड जिस होटल में लेकर जाता था मैं उसे वही ले कर चली गई और मैंने ही वहां का बिल पे किया। जब सोमेश और मैं साथ में बैठे हुए थे तो हम दोनों के शरीर से बहुत गर्मी निकल रही थी। सोमेश ने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया वह मेरे ऊपर से लेट गया, मेरे गुलाब जैसे होठों का रसपान कर रहा था और काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे को स्मूच करते रहे। जब मेरी योनि से पानी निकालने लगा तो मैंने सोमेश से कहा तुम मेरे सारे कपड़े खोल दो उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया। जब उसने मेरे स्तनों का रसपान किया तो मेरी योनि पूरी गीली हो गई और उसने मेरे स्तनों से खून भी निकाल दिया। सोमेश का लंड पूरा खड़ा हो चुका था उसने कुछ देर तक तो मेरे स्तनों के बीच में अपने लंड को रगडा जिससे कि उसका पानी गिरने लगा। कुछ देर बाद उसने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। उसका लंड मेरी योनि के अंदर गया तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी योनि के अंदर कोई डंडा घुस गया हो। मेरी चूत से बड़ी तेज पानी की धार निकलने लगी उसका 9 इंच का लंड था लेकिन बहुत ही मोटा था। जब वह अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था तो मेरी योनि से बहुत तेज पानी बाहर की तरफ को निकल रहा था और मेरे अंदर की गर्मी भी बाहर आ रही थी। मुझे सोमेश के साथ सेक्स करके बड़ा अच्छा लग रहा था और जिस गति से वह मुझे चोद रहा था उसका लंड मेरी चूत के पूरे अंदर जा रहा था मुझे बहुत अच्छा महसूस होता। जब हम दोनों ही पूरी तरीके से गर्म हो चुके थे तो वह ज्यादा समय तक मेरी चूत की गर्मी को नहीं झेल पा रहा था, 200 धक्कों के बाद जब उसका वीर्य मेरी योनि में गिरने वाला था तो मैंने सोमेश से कहा कि तुम अपने वीर्य को मेरी योनि के अंदर ही गिरा देना। मैं झड चुकी थी मैंने सोमेश को अपने दोनों पैरों के बीच में जकड़ लिया और वह भी समझ चुका था कि मैं झड़ चुकी हूं इसलिए उसने भी तेज गति से मुझे चोदने शुरू कर दिए। सोमेश ने मुझे इतनी तेज गति से धक्के मारे की उसका वीर्य मेरी योनि के अंदर गिर गया मुझे उसका वीर्य अपनी योनि में जाता हुआ प्रतीत हुआ। सोमेश और मैंने उस दिन रात भर चार बार संभोग किया। सोमेश के साथ मुझे रहना अच्छा लगने लगा था।

Friday, December 14, 2018

दोस्त की कजिन की धमाकेदार चुदाई

नमस्कार दोस्तों | मैं रितेश वर्मा आपका स्वागत करता हूँ | अपनी चुदाई और मस्त गांड पेलाई से भरी हवश की इस कहानी में | मेरी उम्र 29 साल की है | मैं एक बैंक में नौकरी करता हूँ | वैसे तो लोगों के हिसाब से मैं एकदम शरीफ आदमी हूँ लेकिन मेरे अंदर चुदाई के लिए कितनी हवस भरी पड़ी है वो तो बस मैं ही जानता हूँ या वो जिनकी मैंने चूत फाड़ी है | मैं ये चुदाई का खेल आज से नही करीब पिछले 10 सालों से खेल रहा हूँ | आज मन में आया कि क्यों न कुछ यादें आप लोगों से साझा करू | मेरे शरीर को देख कर कोई ये हिसाब नही लगा सकता है कि मेरी उम्र इतनी है | आखिर मैंने ऐसे जो मेन्टेन कर रखा है अपने शरीर को | अब अपने लंड का भी तो ज्ञान दे दूं | मेरे लंड महराज 7 इंच लम्बे है | चुदाई के मामले में तो इनका कोई तोड़ नही | ऐसी चुदाई करते हैं की चूत का भोसड़ा बना कर रख देते हैं और अगर गांड में घुसे तो फिर तो गांड फटना पक्का | मेरी शादी 2 साल पहले हो गई थी | मैंने अपनी बीवी की तो जम कर चुदाई की | इतनी की उसकी चूत का भोसड़ा बन गया | उसकी गांड मार मार कर तो मैंने ऐसे कर दिया है कि अब उसकी गांड हमेशा उठी ही रहती है | पहले तो उसे दिक्कत हुई फिर वो भी मज़े से मुझसे चुदवाने लगी |
वैसे तो मेरी जिन्दगी में चुदाई के किस्सों की कमी नही है लेकिन उनमे से सबसे यादगार चुदाई के बारे में आज बताता हूँ | मेरे और मेरे दोस्त की बहन की चुदाई का किस्सा | ये बात 4 साल पहले की है | अभी मेरी नौकरी नही लगी थी | अभी मैं बैंक के पेपर की तैयारी कर रहा था | मेरा एक दोस्त है अनुराग | जो मेरे साथ बचपन से रहा हम ने साथ में पढाई की और खूब मस्त भी की | वो बहुत ही सीधा लड़का था | एमें अक्सर उसके घर जाया करता था | हम वहां साथ में बैठ कर टीवी देखते और पढाई भी करते | अनुराग का घर ज्यादा दूर नही है इसी लिए हमारा ज्यादा समय साथ में ही बीतता था | एक बार मैं अनुराग के घर गया तो देखा कि उसके घर कुछ मेहमान आये हुवे हैं | मैं वापस जाने लगा | तभी अनुराग  आ गया | वो मुझे अपने साथ में अपने कमरे में ले गया | और बताया कि उसके घर पर उसके मामा जी का परिवार आया हुआ है | हम बैठ कर साथ में टी वी देखने लगे तभी एक लड़की कमरे में आयी | क्या मस्त माल थी |उसका फिगर 36-30-32 था | एक दम कड़क पटाका लग रही थी |  उसके बड़े बड़े मम्मे तो बस देखते ही मुंह में रख लेने का मन हो रहा था | वो जैसे ही कमरे में आयी मैं उसे घूरने लगा वो भी मुझे बड़े ध्यान से देखने लगी | तभी अनुराग ने बताया कि ये उसके मामा जी की लड़की है | इसका नाम इशिका है | और ये अभी लखनऊ से स्नातक कर रही है | वो उसके बारे में बताये जा रहा था लेकिन मैं तो बस इशिका को ताड़ने में लगा हुआ था | तभी अनुराग ने बताया कि वो यहाँ दो महीने रुकने के लिए आयी है | फिर तो मैंने सोच लिया कि कैसे भी इसे पटाउँगा | फिर तो मैं अब रोज़ अनुराग के घर जाने लगा और ज्यादा से ज्यादा समय अनुराग के घर पर रहने लगा | जिससे मेरी इशिका से बहुत जल्दी दोस्ती हो गई |
एक बार की बात है शाम के वक्त मेरे मन में आया क्यों न एक बार इशिका से मिल आऊ | ये सोच कर मैं अनुराग के घर चला गया | जब मैं पहुंचा तो मैंने डोर बेल बजाई | तो फिर इशिका ने दरवाजा खोला | उसने बताया कि कि अनुराग घर पर नही है | तो मै वापस जाने लगा तो इशिका ने मुझे रोका और कहा आओ वो अभी आ जायेगा तब तक बैठो | मै मान गया  और उसके साथ अंदर चला गया | तभी मैंने देखा कि घर में कोई नही था पूछने पर इशिका ने बताया कि आंटी बाज़ार गई है | ये सुन कर मेरी धड़कने बढ़ गई | तभी मैंने सोचा कि ये एक अच्छा मौका है | थोड़ी देर बाद बाते करते करते मैंने झट से इशिका का हाँथ पकड़ा और बोला इशिका मैं तुमसे प्यार करता हूँ जब से तुम्हे देखा है | बस तुम्हारे लिए जी रहा हूँ | मैं तुमसे कब सीपने मन की बातें बताना चाह रहा था लेकिन नही बता पा रहा था | कह दो कि तुम भी मुझसे प्यार करती हो | वो मुझे ध्यान से देखने लगी | मैं डर गया लेकिन थोड़ी ही देर बाद उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और गले से लगा लिया |और बोली रितेश मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ | आई लव यु | मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना नही रहा | ऐसा लग रहा था मानो मेरा सपना पूरा हो गया हो | हम कुछ देर ऐसे ही चिपके रहे |  मुझे अब कुछ अजीब सा हो रहा था मैंने तुरंत उसके गले पर किस कर दिया | उसने भी मुझे किस किया | फिर मैंने उसके लिप्स पर अपने लिप्स रख दिये और जोर जोर से स्मूच करने लगा वो बेकाबू हो रही थी | फिर मैंने उसके मम्मों पर हाँथ रख दिया और धीरे से दबाया उसकी आह्ह.. निकल गई | उसने मन किया और बोली ये सब आज नही कोई आ जायेगा | फिर फिर मैं मान गया और एक गाल पर किस दिया और चला आया | मेरा लंड तो खड़ा हो चुका था | इसी लिए मुझे मुठ मार कर अपने लंड को शांत करना पड़ा |

फिर क्या था अब तो रोज़ 2 – 3 बार मैं किसी न किसी बहाने अनुराग के घर जाता और  आँखों ही आँखों में इशिका से बात होती | तो कभी मौका पा कर मैं उसे किस कर देता तो कभी उसके बूब्स को दबा देता था | एक बार शाम को इशिका ने मुझे फ़ोन कर के अर्जेंट घर बुलाया मैं डर गया | मैं जल्दी से भाग कर अनुराग के घर गया जैसे ही बेल बजाई | इशिका ने दरवाज खोला मैंने पुछा कि क्या हुआ तो उसने कहा अन्दर चलो बताती हूँ | मैं अंदर गयेशिका ने दरवाज़ा बंद किया और झटके से मेरे पास आ गई और मेरे लिप्स पे लिप्स रख दिए | मैंने कहा क्या हुआ तो उसने बोला कि तुमने मेरे अंदर जो आग भड़काई है | उसे आज बुझा दो | मैं अब और नही सह सकती फिर क्या था किसो का दौर शुरू हो गया | वो मुझ को तेज़ तेज़ से किस किये जा रही थी | फिर क्या था मेरा भी लंड एकदम तैयार हो गया था | मै उसके बूब्स को जोर जोर से दबाने लगा | वो मोअन करने लगी | आह्ह्ह्ह… आह्हह…. आई लव यू बेबी …. | मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसे कमरे में लेकर गया | और जोर जोर से उसके बूब्स को दोनों हाँथो से दबा कर पीने लगा | वो अब और भी जोर से चिल्ला रही थी | फिर मैं नीचे बैठ गया | और मैंने धीरे से इशिका की चूत को किस किया वो एकदम चिहुक गई आह्हह … अब मुझे और न तड़पाओ मेरी जान | मैंने कहा आज मैं तुम्हे पूरा मज़ा दूंगा  और | मैंने अपनी जबान उसकी चूत में डाल दी और उसे चाटने लगा | इशिका के मुहं से निकलती हुई आवाजें और भी तेज हो गई | थोड़ी ही देर में उसने पानी छोड दिया |मै उसका सारा रस पी गया | खड़ा हुआ मेरा लंड एकदम कड़क हो गया था | मैंने इशिका से लंड चूसने को कहा तो उसने मन कर दिया मुझे बुरा लगा लेकिन मैंने भी जबरदस्ती नही की | फिर मैंने इशिका को बेड पर सीधा लिटा दिया और अपना लंड अन्दर घुसाना चाहा | लेकिन उसकी चूत बड़ी टाईट थी इसलिए मेरा लंड फिसल गया | उसने मेरे लंड को पकड के सही लगाया और फिर मैं धीरे धीरे कर के अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया और उसको चोदने लगा | अभी वो चिल्ला रही थी | उसे पहले तो थोडा दर्द हुआ फिर मज़ा भी आने लगा | पहले तो मैंने एकदम धीरे धीरे चोदा | फिर मेरी स्पीड बढ़ गई | वो भी आह्ह्हह्ह्ह्हह्ह… आय्ह्ह्ह…अय्य्य्हह्ह्ह कर के हिल रही थी | और अब मस्त चुदवा रही थी |  उसके बाद मैं सीधा लेट गया और  वो मेरे ऊपर आ कर बैठ गई और मेरा लंड अपनी चूत में ले लिया | और खूब कूद कूद कर मज़े से चुदी | ऐसे ही करीब 2 घंटे तक मैंने उसे चोदा | फिर मै अपने घर चला गया |
कुछ दिनों के बाद इशिका वापस चली गई | फिर उसने मुझसे दोबारा कांटेक्ट नही किया | बाद में पता चला कि उसकी शादी हो गई | वो दोबारा मुझे नही मिली लेकिन उसकी चुदाई के बारे में जब भी सोचता हूँ मेरा लड़ खड़ा हो जाता है |

घर से बाहर निकलते ही चूत मिली

मेरा नाम सचिन है मैं मुजफ्फरनगर का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 22 वर्ष है। मैं बचपन से ही बहुत शरारती हूं। हमेशा ही मेरे शरारतो की वजह से मेरे परिवार वालों को शर्मिंदा होना पड़ता है लेकिन मुझे शायद उन लोगों की बिल्कुल भी परवाह नहीं है और मैं अपनी शैतानियो से अब तक बाज नहीं आया हूं। मेरे पिताजी पुलिस में है उन्होंने मुझे कई बार मेरी शरारतो की वजह से बाहर बदनाम होने से बचाया लेकिन उसके बावजूद भी मैं सुधरने का नाम नहीं ले रहा था। मेरे दोस्त लोग भी बड़े ही शैतान हैं। मेरी जब से प्रशांत के साथ दोस्ती हुई है उसके बाद से तो जैसे मैं और भी ज्यादा खुला सांड बन चुका हूं। मेरी दोस्ती प्रशांत से कमलेश ने करवाई थी। कमलेश मेरे साथ स्कूल में पढ़ता था और वह मेरे साथ कॉलेज में भी पढ़ाई कर रहा है। वह भी एक नंबर का शैतान है लेकिन एक बार बहुत ज्यादा ही बड़ी गलती हम लोगों से हो गई। हम लोग प्रशांत की कार में घूमने के लिए जा रहे थे हम लोगों ने उस दिन ड्रिंक भी की हुई थी। हम लोग नशे में थे।
प्रशांत ने कहा कि यार गाड़ी में पेट्रोल खत्म होने वाला है हम लोग गाड़ी में पेट्रोल भरवा लेते हैं। मैंने उससे कहा आगे ही एक पेट्रोल पंप है हम लोग वहां पर पैट्रोल भरवा लेते हैं। जब हम लोगों ने वहां पर पेट्रोल भरवाया। जैसे ही उसने पेट्रोल का टैंक फुल किया तो प्रशांत ने गाड़ी आगे दौड़ा दी। जब प्रशांत ने गाड़ी आगे दौड़ाई तो वह लोग भी हमारे पीछे दौड़ने लगे। उस दिन हम लोग नशे में ज्यादा ही थे इस वजह से प्रशांत गाड़ी को संभाल नहीं पाया और वह एक कोने में जाकर टकरा गया। जैसे ही गाड़ी कोने से टकराई तो मेरा सर आगे की तरफ लग गया और मैं वहीं पर बेहोश हो गया। मुझे उसके बाद कुछ भी याद नहीं था। मेरी जब आंख खुली तो मैं उस वक्त अस्पताल में था। मैं थोड़ी देर तक तो कुछ समझ ही नहीं पाया और मैंने किसी से भी बात नहीं की। मेरे सामने ही मेरे पिताजी बैठे हुए थे और वह बहुत गुस्से में थे लेकिन उस वक्त उन्होंने अपने गुस्से को कंट्रोल में किया हुआ था। मेरी मम्मी मुझसे पूछने लगी सचिन तुम कब सुधरोगे क्या तुम अब भी हमारी बदनामी करवाते रहोगे।

जब मेरी मम्मी ने मुझसे यह बात कही तो मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आया और मुझ पर दवाइयों का इतना ज्यादा असर था कि मैं उसके बाद सो गया। मैं जब दोबारा उठा तो मैंने जब अपने सर पर हाथ लगाया तो मेरे सर पर पट्टी लगी हुई थी। मुझे ठीक होने में कुछ दिन लग गए लेकिन जब मैं ठीक हुआ तो उसके बाद तो जैसे मेरे परिवार वालों ने मुझ पर हमला ही बोल दिया और वह सब लोग मुझ पर बरस पड़े। सबसे पहले तो मेरे पिताजी ने मुझे सुनाना शुरू किया वह कहने लगे यदि उस दिन मैं समय पर नहीं पहुंचता तो तुम लोगों की जान चली जाती। मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था मैं एक कान से सुन रहा था और दूसरे कान से उनकी बातों को निकाल रहा था लेकिन जब उन्होंने मुझे बताया कि प्रशांत बहुत ही ज्यादा सीरियस है और उसके दोनों पैर भी टूट चुके हैं तब मुझे लगा कि हमसे यह बहुत बड़ी गलती हो गई। हमें ऐसा नहीं करना चाहिए था। मेरी मम्मी ने भी उसके बाद मुझे बहुत डांटा और बहुत ही सुनाया। मैं जब ठीक हुआ तो मेरा जैसे घर से बाहर निकालना ही मुश्किल हो गया था और मेरे पापा ने मुझसे बात करनी भी बंद कर दी। मैं प्रशांत से मिलने के लिए जाना चाहता था लेकिन मेरे पापा ने मुझे घर से बाहर ही नहीं भेजा उन्होंने कहा कि अब तुम घर पर ही रहोगे। मैंने कॉलेज भी छोड़ दिया था और मैं घर पर ही रहता हूं। मेरे परिवार वालों का मुझ पर से पूरा भरोसा खत्म हो चुका था। मैं अपने आप को अकेला महसूस करने लगा। मुझे अपनी गलती का एहसास होने लगा और मैं सोचने लगा कि मुझे प्रशांत का उस दिन साथ नहीं देना चाहिए था लेकिन प्रशांत ने पता नही उस दिन ऐसा क्यों किया। मेरे दिमाग में सिर्फ यही बात घूम रही थी परंतु अब जो होना था वह तो हो चुका था लेकिन इस वजह से मेरे परिवार की नजरों में मेरी छवि गिर गई थी और जो भी रिश्तेदार हमारे घर पर आता वह सब मुझे ऐसे देखते जैसे कि मैं कोई बड़ा बदमाश हूं।
मैं बहुत दिनों तक घर पर ही रहा और इस बीच में मेरा किसी के साथ भी संपर्क नहीं हो पा रहा था। मैंने एक दिन अपनी मम्मी से बात की और कहा कि मुझे बाहर जाना है मैं काफी दिनों से घर पर ही हूं और कहीं बाहर भी नहीं गया। मेरी मम्मी कहने लगी हम क्या तुम्हें बाहर भेजकर दोबारा से कोई मुसीबत अपने सर मोल ले ले। हम लोग नहीं चाहते कि अब तुम घर से बाहर जाओ तुम घर पर ही रहो और तुम्हें जो भी करना है तुम घर पर करो। मैं बाहर जाने के लिए तड़प रहा था। मुझे उस दिन एहसास हुआ की मैंने कितना गलत किया। मैंने एक दिन अपने पापा से बात की मैंने उन्हें कहा कि आप मुझे बाहर जाने दीजिए। वह मुझ पर बहुत गुस्सा हो गए और कहने लगे नहीं मैं तुम्हें बाहर नहीं जाने दे सकता। मैंने भी सोच लिया था कि मुझे अब किसी भी हालत में घर से बाहर जाना है। एक दिन रात के वक्त मैं घर से बाहर चला गया। मैं जब बाहर टहल रहा था तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कितने दिनों बाद मैं जेल से आजाद हुआ हूं और मैं अपनी छाती चौड़ी कर के बाहर टहलने लगा। मैंने एक पनवाड़ी से सिगरेट लिया। मैंने उसे पैसे दिए और कहा कि तुम इतनी रात तक अभी दुकान खोलकर बैठे हो। वह कहने लगा रात को ही मेरे पास लोग आते हैं।
मै पनवाड़ी की दुकान मे खड़ा होकर सिगरेट पी रहा था। तभी सामने से बड़ी सी गाड़ी आई। उसमें एक सुंदर सी महिला बैठी हुई थी। उसने उस पनवाड़ी को आवाज देते हुए कहा मुझे एक सिगरेट दो। उस पनवाड़ी ने उसे एक लंबी सी सिगरेट दी। वह अपनी गाड़ी क अंदर सिगरेट पीने लगी। मै उसे बडे ध्यान से देख रहा था। वह भी मुझे ऐसे घूर रही थी जैसे कि मुझे कच्चा ही चबा जाएगी। यह सिलसिला 5 मिनट तक चलता रहा। जब उसने मुझे अपनी कार में बैठने के लिए कहा तो मैं उसके साथ उसकी कार में बैठ गया। मैं जैसे ही उसकी कार के अंदर बैठा तो उसने बड़ी ही छोटी सी ड्रेस पहनी हुई थी। मैं पहले अपनी सिगरेट पी। मैंने जब उसकी नंगी टांगों पर अपने हाथ को रखा तो वह अपने आपको ज्यादा समय तक नहीं रोक पाई। उसने गाड़ी को एक कोने मे लगाते हुए मुझे किस करना शुरू कर दिया। उसके मुंह से हल्की शराब की स्मेल आ रही थी। हम दोनों ने एक दूसरे को ऐसे किस किया जैसे हम दोनों एक दूसरे के लिए तड़प रहे हो। उसने मुझे कहा हम पीछे वाली सीट में चलते हैं। हम दोनो पीछे वाली सीट में चले गए। उसने अपनी ड्रेस को ऊपर उठाते हुए मुझे कहा मेरी योनि को तुम अच्छे चाटो। जब मैंने उसकी योनि को बड़े ही अच्छे तरीके से चाटा तो उसकी चूत बाहर की तरफ पानी छोडने लगी। मैंने उसके पानी को पूरा अंदर अपने मुंह में ले लिया। मैंने उसकी योनि का रसपान बहुत देर तक किया। मुझे बहुत मजा भी आया जब मैंने अपने मोटा लंड को उसकी योनि पर लगाया तो उसकी योनि से गर्म पानी छूट रहा था। मैंने भी तेज झटका देते हुए उसकी गरमा गरम योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी और मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड बड़ा ही मोटा है। तुम ऐसे ही मुझे झटके देते रहो। मैंने उसे ऐसे ही धक्का देना जारी रखा मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया और बड़ी तेज गति से उसे चोदना जारी रखा। उसकी योनि से लगातार पानी बाहर की तरफ निकल रहा था। मैंने जब उसकी ड्रेस के अंदर हाथ डालते हुए उसके स्तनों को बाहर निकाला तो मैंने उसके स्तनों को भी काफी देर तक चूसा। उसके स्तन चूसने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था और मै उसे तीव्र गति से धक्के देता। मुझे उसे धक्के देने में भी बहुत आनंद आ रहा था। मैं कुछ देर तक ही उसके साथ संभोग कर पाया। जब हम दोनों की इच्छा भर गई तो उसने मुझे दोबारा वही छोड़ दिया। मैं हमेशा रात को उसी पनवाड़ी के पास उस महिला का इंतजार करता। वह हमेशा आती है और मुझे अपने हुस्न का जाम पिला कर चली जाती है।

Wednesday, December 12, 2018

टीचर भाभी के साथ पहली चुदाई

इस इंडियन सेक्स कहानी के सभी पात्र और घटनाएँ काल्पनिक हैं, इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है। यदि किसी जीवित या मृत व्यक्ति या घटना से इसकी समानता होती है, तो उसे मात्र एक संयोग समझा जाये।
आपका परिचय अपनी कहानी के कुछ पात्रों से करवाता हूँ।
मेरे घर में 5 सदस्य हैं। पापा रमेश 42 वर्ष, मम्मी सुनीता 40 वर्ष, सबसे बड़ा भाई अमित 22 वर्ष, उनसे छोटी बहन नेहा 20 वर्ष, और सबसे छोटा मैं हूँ सुनीत 18 वर्ष।
मेरे पापा एफ सी आई विभाग में क्लर्क हैं, मम्मी हाउसवाइफ हैं, अमित भैया, नेहा दीदी कॉलेज में पढ़ते हैं और मैं 12वीं कक्षा में पढ़ता हूँ। हम दिल्ली में एक तीन मंज़िल की बिल्डिंग में रहते हैं। सबसे नीचे वाले फ्लोर पर दो दुकानें हैं, एक ब्यूटी पार्लर की और दूसरी मेडिकल स्टोर की और बाकी जगह में पार्किंग है।
फर्स्ट फ्लोर पर एक परिवार रहता है उसमें 4 सदस्य हैं अंकल (43 वर्ष टीचर) आंटी (38 वर्ष टीचर) और उनकी दो बेटियाँ कनिष्का (21 वर्ष) और साक्षी (18 वर्ष), दोनों कॉलेज में पढ़ती हैं। फर्स्ट फ्लोर की दूसरी साइड अभी खाली है।
दूसरे फ्लोर पर आमने-सामने दो फैमिली रहती हैं, राइट साइड पर जो भैया-भाभी रहते हैं, उनकी शादी को 4 वर्ष हो गए हैं, उनकी एक बेटी है 1 वर्ष की, मनीष भैया 26 वर्ष, बैंक में क्लर्क हैं और किरण भाभी (24 वर्ष) हाउसवाइफ हैं।
लेफ्ट साइड पर भी एक फैमिली भैया-भाभी रहते हैं उनकी शादी को 3 वर्ष हो गए हैं पवन भैया (28 वर्ष) सॉफ्टवेयर कम्पनी में हैं और रीना भाभी (25 वर्ष) हाउसवाइफ हैं।
सबसे ऊपर तीसरे फ्लोर पर हम रहते हैं, एक साइड पर मम्मी-पापा रहते हैं और दूसरी साइड पर हम तीनों के रूम हैं।
अब मैं कहानी पर आता हूँ। पढ़ाई में मैं ठीक-ठाक हूँ, स्पोर्ट्स में अच्छा हूँ। स्कूल में पढ़ाई के अलावा हम काफी कुछ सीखते हैं। तो कहानी की शुरुआत होती है क्लास के चैप्टर ‘मानव जनन कैसे करता है?’ से!
टीचर ने हमें कहा- तुम्हें सब पता है और ये चैप्टर जरूरी नहीं है.
ऐसे कहकर मतलब इसे टाल दिया और कहा- खुद ही पढ़ लेना।
अब मेरी उत्सुकता हुई इसके बारे में और अधिक जानने की!
यकीन मानो दोस्तो … इससे पहले मेरी कोई रूचि नहीं थी इस विषय को लेकर। मेरे दोस्त जो इस बारे में पहले से ही जानते थे, उनसे सुना था और अब तक मैं इन बातों पे ज्यादा ध्यान नहीं देता था लेकिन अब ये सब जानने की मेरी थोड़ी इच्छा हुई।
रीना भाभी मुझे पढ़ाती हैं, कभी-कभी किरण भाभी भी मुझे पढ़ाती थी लेकिन अब वो सिर्फ नेहा दीदी को पढ़ाती हैं क्यूंकि वो बड़ी कक्षा में है।
मेरी सभी से अच्छी बनती है। मेरी नेहा दीदी से बहुत अच्छी बनती है, हम भाई बहन से ज्यादा अच्छे दोस्त हैं। रीना भाभी और मैं बहुत क्लोज़ हैं बेस्ट फ्रैंड्स की तरह। खूब हंसी मजाक और सारी बात एक दूसरे से शेयर करते हैं। रीना भाभी दिखने में बहुत सुन्दर हैं, भाभी घर पर थोड़े खुले सलवार कमीज पहनती हैं। अक्सर भाभी मेरी पीठ पर अपने बूब्स दबा देती हैं, कभी कभी मुझे अपनी बाँहों में कसकर पकड़ लेती हैं, अब तक मेरे दिल या दिमाग में भाभी या किसी और को लेकर कोई अलग बात नहीं थी। मैं खेल कूद में मस्त रहने वाला था उस दिन तक, जब तक वो (जनन वाला) चैप्टर नहीं आया था।
अगले सप्ताह से स्कूल में रिविज़न शुरू हो गया.
इधर घर पर रीना भाभी ने मम्मी को बताया कि पवन कुछ दिनों के लिए गाँव जा रहे हैं और मैं यहीं रहूंगी, मुझे अकेले डर लगता है। अगर सुनीत रात को मेरे पास रुक जाये तो उसकी पढ़ाई हो जाएगी और मुझे कंपनी मिल जाएगी।
मम्मी ने कहा- रीना, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है… लेकिन तुम जानती हो सुनीत बहुत शरारती है।
भाभी बोली- कोई बात नहीं आंटी, वो इतना भी शरारती नहीं है और मैं उसे पढ़ाती भी तो हूँ।
मैं स्कूल से आया और खाना खाकर वीडियो गेम खेलने लगा. तभी मम्मी आयी और बताया कि आज सुबह पवन भैया कुछ दिनों के लिए गाँव गए हैं तो कुछ दिन नीचे रीना भाभी के पास सो जाना।
मैंने कहा- भाभी सिर्फ पढ़ने को बोलती रहेगी।
तो मम्मी बोली- मैंने उसको बोल दिया है कि ज्यादा पढ़ाई करने को न बोले तुझे!
“अब ठीक है!” मैंने सोचा कि बहुत अच्छा मौका है अब तो भाभी से सब कुछ पूछ लूँगा।
तो मैंने हाँ कर दी।
शाम को साढ़े 8 बजे मैं भाभी के पास अपनी किताबें लेकर पहुँच गया.
भाभी बर्तन धो रही थी, मुझे देखते ही बोली- क्या बात है … तू तो बिना कहे ही किताबें लेकर आ गया?
मैंने कहा- हाँ भाभी, मैंने सोचा आप बोलो, इससे अच्छा है खुद ही ले चलूँ।
फिर बर्तन धोकर भाभी आई और मुझसे बोली- चल बता … मैथ पढ़ेगा या सोशल स्टडीज़?
मैंने कहा- भाभी आज टी.वी. देखते हैं, कल पढ़ेंगे!
वो बोली- नहीं, तू किताब कॉपी निकाल, मैं अभी आती हूँ।
भाभी बाथरूम की तरफ जाने लगी. तभी एक छिपकली भाभी की तरफ गिर पड़ी। भाभी चिल्लाती हुई कमरे की तरफ भागी, मैं भी आवाज सुनकर भाभी की तरफ भागा. तभी भाभी मुझसे टकराई और हम दोनों नीचे गिर पड़े.
जब हम टकराये तो अनजाने में भाभी के बूब्स मुझसे दब गए थे, मुझे बहुत अच्छा लगा.
अब भाभी बोली- छिपकली … छिपकली …
मैंने कहा- क्या भाभी? डरा दिया बिना फालतू में!
फिर मैं उठा और भाभी को भी उठाया।
फिर कुछ देर बाद भाभी मुझे पढ़ाने लगी। कुछ देर बाद हम लेट गए सोने के लिए भाभी बेड पर और मैं पलंग पर।
मुझे उस रात काफी देर से नींद आयी, मैं भाभी के बारे मैं सोचता रहा, ऐसा पहली बार नहीं हुआ था कि भाभी के बूब्स मुझसे टकराये हों लेकिन आज पहली बार मैं वही सोचे जा रहा था। दिल में अजीब सी हलचल थी।
अगले दिन स्कूल में भी मेरा मन नहीं लग रहा था, मैं बस भाभी के बारे में ही सोचता रहा.
दूसरी शाम भाभी मुझे पढ़ाने लगी, काफी देर तक एक सवाल समझाने के बाद भी मुझे समझ नहीं आ रहा था, तो भाभी गुस्से में बोली- तेरा ध्यान कहाँ है?
मैंने कहा- कहीं नहीं!
वो बोली- मुझे बता जो भी बात है?
मैंने कहा- ऐसी कोई बात नहीं है, आज मन नहीं कर रहा पढ़ने का!
वो बोली- अच्छा कोई बात नहीं, टी.वी. देखते हैं.
मैं कुछ नहीं बोला तो वो बोली- तेरा ध्यान कहाँ है, कुछ हुआ है क्या, मुझे नहीं बताएगा?
मैंने कहा- भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है आप टी.वी. चलाओ ना।
फिर हम दोनों टी.वी. देखने लगे.
कॉमेडी शो चल रहा था, भाभी हँस रही थी लेकिन मेरा दिमाग तो वही सब सोच रहा था। भाभी यह बात नोटिस कर रही थी और बोली- तू मुझे नहीं बतायेगा तो मैं तेरी मदद कैसे करूंगी।
भाभी ने टी.वी. बंद कर दिया, फिर मेरे दोनों हाथ अपने हाथों में लेकर बोली- बता क्या बात है?
मैंने हाथ हटाते हुए कहा- कुछ नहीं भाभी!
वो बोली- अच्छा ठीक है, मत बता, वैसे भी मैं तेरी लगती कौन हूँ बस बोलने के लिए बेस्ट फ्रेंड हूँ।
मैंने कहा- नहीं भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है.
वो बोली- गर्लफ्रेंड से लड़ाई हो गई?
मैंने कहा- नहीं भाभी, आप भी ना!
वो रूठे स्वर में बोली- मुझसे बात मत करियो!
फिर मैंने कहा- अच्छा वादा करो कि आप गुस्सा नहीं करोगी और मुझे सब सच-सच बताओगी।
वो बोली- चल ठीक है वादा, मैं गुस्सा नहीं करूंगी और सब सच-सच बताऊँगी पूछ क्या पूछना है?
मैंने कहा- मुझे वो… मुझे वो… सब बताओ शुरू से, शुरू से सब कुछ बताओ।
वो बोली- क्या बताऊँ?
मैंने कहा- वो पीरियड, सेक्स के बारे में।
भाभी मना करने लगी लेकिन मैं जिद करने लगा, मैंने कहा- आपने वादा किया है.
तो वो बोली- ठीक है, लेकिन तू ये बात किसी को नहीं बताना, तुझे मेरी कसम।
मैंने कहा- आपकी कसम … किसी को नहीं बताऊँगा।
फिर भाभी ने मुझे सब बताया कि सेक्स कैसे होता है, पीरियड के बारे में और बच्चा कैसे पैदा होता है।
ये बातें सुनकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया, मैंने कहा- मैं बाथरूम होकर आता हूँ।
मैं वापस आया तो भाभी बोली- इतनी देर हिलाने लग गया था क्या?
मैंने कहा- क्या मतलब भाभी?
वो बोली- अब इतना भोला भी मत बन, जैसे कुछ जानता ही ना हो।
मैंने कहा- भाभी, मैं सच में नहीं समझा।
भाभी बोली- अच्छा ज्यादा ड्रामे मत कर, मैं तुझे कल से देख रही हूँ, तू मेरे बूब्स घूर रहा है और कल शाम को छत पे मेरी ब्रा-पैंटी को भी छूकर देख रहा था।
मैंने कहा- सॉरी भाभी, वो स्कूल में बच्चे गन्दी बातें करते हैं लण्ड, चूत चुदाई तो मैंने सोचा कि …!
फिर मैं चुप हो गया।
भाभी जोर-जोर से हँसने लगी और बोली- अच्छा बता और कौन सी बात करते हो तुम स्कूल में?
फिर मैंने सब कुछ बताया।
वो बोली- अच्छा यह बता कि मैं तुझे कैसी लगती हूँ?
मैंने कहा- आप बहुत अच्छी हो!
इतना सुनकर भाभी ने मेरे होंठों पे चुम्बन किया, फिर बोली- तू किसी को बताएगा तो नहीं?
मैंने कहा- बिल्कुल भी नहीं भाभी!
फिर मैंने कहा- भाभी, आप बहुत सुन्दर हो.
वो बोली- तू क्या कम स्मार्ट है!
इतना कहकर भाभी ने मेरे होंठों पर एक और चुम्मा किया और फिर भाभी ने मेरी टीशर्ट उतार दी और पजामा उतारने का इशारा किया, तो मैंने पजामा भी उतार दिया।
इतने में भाभी ने भी अपनी कमीज उतार दी थी, अब वो ब्रा और सलवार में मेरे सामने खड़ी थी।
मैंने कहा- सो हॉट भाभी … ये आपके बूब्स तो बहुत मस्त हैं, मैं छूकर देखूँ?
वो बोली- बुद्धू … यह भी कोई पूछने की बात है।
मैंने भाभी के बूब्स दबाये और होंठों पर चुम्बन किया तो भाभी बोली- सुनीत … तू तो बड़े अच्छे से चुम्बन करना सीख गया है।
फिर मैंने भाभी के बूब्स दबाये ब्रा के ऊपर से … और सलवार के अंदर हाथ डाल कर भाभी की चूत को सहलाया. भाभी ने मेरे लण्ड को कच्छे के ऊपर से रगड़ना शुरू कर दिया।
फिर भाभी ने मेरे लण्ड को कच्छे से बाहर निकाला और मेरी मुठ मारना शुरू कर दिया.
थोड़ी देर में मैं झड़ गया तो भाभी पूछने लगी- सुनीत मजा आया?
मैंने कहा- हाँ भाभी, बहुत मजा आया।
अब भाभी ने अपनी सलवार उतार दी और वे बेड पे लेट गई। मैं पहली बार किसी लेडी को ऐसे देख रहा था, लाल ब्रा-पैंटी में भाभी बहुत सुन्दर लग रही थी। मैंने भाभी की पैंटी उतारी और लण्ड को उनकी चूत में घुसाने लगा लेकिन वो अंदर नहीं गया.
भाभी ने अपनी चूत पे थोड़ा थूक लगाया, मैंने भी उनको देखके अपने लण्ड पे थूक लगाया और भाभी की चूत में धीरे से घुसाया तो आधा अंदर लण्ड गया.
अब भाभी बोली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… यार … और जोर से झटका मार ना!
मैंने फिर एक और झटका मारकर अपना लण्ड भाभी की चूत में घुसा दिया.
फिर मैं धीरे-धीरे झटके मारता गया, भाभी ‘हाँ हाँ… जोर से… जोर से…’ बोलती रही, मैं झटके मारता गया. 5-6 मिनट बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने कहा- भाभी, फिर आने वाला है.
वो झट से बोली- बाहर निकाल!
फिर उन्होंने अपने हाथ से मेरी मुठ मारी और मैं फिर झड़ गया.
भाभी ने अपनी पैंटी से मेरा सारा वीर्य साफ़ किया और पूछने लगी- मजा आया ना?
मैंने हाँ मैं सर हिलाया.
फिर भाभी बोली- अब सो जा!
फिर हम दोनों उसकी हालत में ही सो गए।
रात को मेरी आँख खुली तो भाभी जाग रही थी और मुझे बड़े प्यार से देख रही थी।
मैंने पूछा- क्या हुआ भाभी?
वो बोली- तू बहुत प्यारा लग रहा है इसलिए तुझे देख रही हूँ।
मैंने भाभी को किस किया और हमने फिर चुदाई की और सो गए।
इस तरह मेरी पहली चुदाई खत्म हुई और चुदाई की सिलसिला शुरू हुआ।
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