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Tuesday, December 25, 2018

मौसी के साथ चुदाई मस्ती

मैं सर्मिला हीरो पटना बिहार से एक सेक्सी स्टोरी लेकर फिर आया हूं। सबसे पहले सभी आंटियों, भाभियों लड़कियों को मेरा नमस्कार।
अपनी आपबीती कहानी पर आता हुं मेरी उमर २८ साल है और मेरी एक मौसी ३३ साल की थीं। मैं अपनी मामी के घर उनके बच्चे के बर्थडे में गया था।
रात में सभी पार्टी इंजोय कर एक कमरे में बैठ कर बाते कर रहे थे मुझे कुछ कुछ नींद आ रहे थी। लॅडीज़ बहुत ही गरम गरम बातें करते हुए बहुत ज़ोर ज़ोर से हंस रहीं थीं।
थोड़ी देर तक तो मैने सहन किया उसके बाद मैने कहा कि आप लोग दूसरे कमरे मैं चले जायें तो उन्होंने कहा कि तुम ऊपर वाले कमरे में जाकर सो जाओ और साथ मैं मौसी से भी कहा कि तुम भी जाकर सो जाओ।
हम दोनो ऊपर वाले कमरे में गये तो देखा कि वहां पर कई बच्चे और कज़िन सो रहे थे। हम दोनो एक किनारे लेट गये और सोने की कोशिश करने लगे पर मुझे अब नींद नही आ रही थी मौसी के बड़े बड़े बूब्स को ही देख रहा था थोड़ी देर बाद उन्होंने उठकर लाइट ऑफ कर दी।
लगभग आधे घंटे तक कुछ नहीं हुआ फिर मैने कुछ हिम्मत जुटाकर मौसी के कमर पर हाथ रख दिया उन्होंने कुछ नहीं कहा!
थोड़ी देर बाद मैने अपना हाथ उनकी बूब्स के ऊपर रख दिया इस पर वो थोड़ा हिली पर उन्होंने हाथ हटाने की कोशिश नहीं की मैने हाथ को वहीं थोड़ी देर रख कर रिअक्शन जानना चाहा जब वो कुछ नहीं बोली तो मैने बूब्स को थोड़ा प्रेस किया तो वो बोली ये तुमने कहाँ से सीखा?
मैने कोई जवाब नहीं दिया।
मैं धीरे रे उनके कुर्ते को उठाने लगा उन्होने कोई विरोध नहीं किया मैं उनके ब्रा के उपर से ही उनके बड़े बड़े चूचियों को दबाने लगा फिर मैने उनकी ब्रा को आगे ककी तरफ़ से उनकी चूचियों के ऊपर कर दिया उनके काले काले और बड़े निप्पल मुझे आउट ओफ़ कन्ट्रोल कर रहे थे मेरा लंड एकदम स्टील रोड हो चुका था।
मौसी ने मेरी पैंट में हाथ डाल कर मेरा लंड पकड़ लिया। कमरे में दिनभर के सब थके हुए सो रहे थे इस लिये कोई प्रोब्लम नहीं थी
धीरे धीरे मौसी ने मेरा लंड सहलाना शुरु कर दिया और मैंने उनके बुर में उंगलियां डाल कर अंदर बाहर करने लगा वो आआआ आआआ आआअह्हह्हह्ह ह्हह्हाआआअ ओह येस्सस् ह्हह् ह्हह्ह होफ़्फ़फ़् फ़फ़्फ़ फ़फ़्फ़फ़् फ़फ़्फ़फ़् फ़फ़ वोव्वव्व कर रहीं थीं मैं भी जोश में था वो थोड़ी देर मै झड़ गईं और मै भी शान्त हो कर हम दोनो चिपक कर सो गये।
अगले दिन हम दोनो एक दूसरे को देख कर मुस्करा दिये। दिन में मामी किसी काम से मार्केट चले गये तो मैने बिना समय गंवाये उनके बूब्स को पकड़ कर दबाने लगा और उनके कपड़े उतारने लगा अब वो बिलकुल मेरे सामने नंगी खड़ी थीं मैने उन्हें किस किया और उठा कर बेडरूम में ले गया और अपना लंद जो स्टील के रोड की तरह हो गया था उनकी बुर जो कि बिलकुल ही गीली हो गयी थी बुर के मुँह पर रख कर एक झटका दिया
वाव क्या टाइट चूत थी मेरे लंड में थोड़ा दर्द होने लगा था मैने उसके बुर को उंगली से फ़ैलाया और एक और झटका दिया मेरा आधा लंड उनके बुर में घुस गया था बुर टाइट होने के वजह से बुर की झिल्ली फट गई और वो बहुत जोर से चीखी ओह माआआआ ऊऊऊह्ह हह्हह्हह हह्ह्हह्ह गोड प्लीज़ डू इट स्लोवली ओह्हह्ह ह्हह्हह्हह दिस इस हर्टिंग मी । दर्द कर रहा है प्लीज़ निकाल लो अपना लंड…
पर मैने उनके एक भी नहीं सुनी और एक जोर का झटका और दिया मेरा पुरा लंड उनके बुर में घुस गया था । अब मै थोड़ी देर रुका और उनके बूब्स को मुँह में ले कर चूसने लगा इससे उनका दर्द कुछ कम हुआ और वो अपनी गांड को उठा कर लंड को और अंदर लेने की कोशिश करने लगी मै उनके इशारे को समझ एक जोरदार धक्का मारा
अब वो आआआआअ ह्हहह्ह ह्हहह्हवोव्व व्वव्वव्व व्वव्वव व्वव ह्हह्हह्हह ह्हह्हह्ह ह्हह् हह्हह् हह्हह्हह्हह कर रहीं थीं कुछ देर के बाद वो बोली मै झड़ रही हूँ ऊऊऊओ ह्हह्हह ह्हहहह्ह ह्ह्हह्हा आआआआआ आआआआ आआसोमीईईईइन ग्गगगग्गग्गग ग्गगग्गग्गग ओह येस्सस्सस्सस्स स्सस्स्सस ससस्सस्स सस्सस्सस्सस और उन्होंने अपना पुरा पानी बाहर उड़ेल दिया.
मैने भी अपने धक्के तेज कर दिये और कुछ ही मिनटो में मेरा पुरा वीर्य उनके बुर में गिर गया वोव कितना मजा आया था।
मामी के आने का टाइम हो गया था हम दोनो ने उठ कर जल्दी से कपड़े पहने और रूम के बाहर आ गये। रात में हमने मौका निकाल कर फिर चुदाई की। उसके बाद जब कभी भी हमें मौका मिलता हम चुदाई कर लेते।
कुछ दिनों बाद सबलोग अपने अपने घर चले गये, पर अभी जब वो घर आती हैं तो मौका देखकर मै उनके बूब्स को दबा देता हूं और अगर चान्स मिला तो चुदाई भी कर लेते हैं

Sunday, December 23, 2018

सोनिया की गांड के परखच्चे



मेरा नाम राकेश है मैं मेरठ का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 30 वर्ष है। मैं जिस कंपनी में नौकरी करता था वहां से मेरी जॉब छूट गई और उसके बाद मैं काफी समय तक खाली बैठा रहा, मैंने सोचा कि मैं कुछ अपना ही काम शुरू कर लेता हूं। जब मैंने अपना काम शुरू किया तो कुछ समय तक तो मेरा काम अच्छा चला इसीलिए मैंने सोचा कि क्यों ना अब मैं ब्याज में पैसे ले लूं और अपने काम को और बड़ा करूं इसीलिए मैंने ब्याज में पैसे ले लिए, उसके बाद मैंने अपने काम को और भी बढ़ा लिया। जब मैंने अपने काम को बड़ा किया तो उसके बाद मेरा काम काफी अच्छा चलने लगा, मैं अपने काम से बहुत खुश था इसलिए मैंने एक प्रॉपर्टी ले ली।  उस प्रॉपर्टी के लिए मैंने बैंक से लोन ले लिया था और मैं अब बैंक की किस्त भरने लगा था। मैं समय पर बैंक की क़िस्त दे दिया करता, जिससे की मेरा लोन भी अच्छे से चल रहा था।
उसी बीच मेरी जिंदगी में एक लड़की ने दस्तक दी और मुझे उससे प्यार हो गया, उसका नाम सोनिया था। सोनिया और मैं करीब आने लगे, मुझे पता ही नहीं चला कि कब वह मुझसे इतना प्रेम करने लगी और मैं भी उसे बहुत ज्यादा प्रेम करने लगा था, मैं उस पर आंख बंद कर भरोसा कर लेता था। एक दिन वह मुझे कहने लगी कि मुझे कुछ पैसों की आवश्यकता है, मैंने उसे कहा कि ठीक है तुम मुझसे पैसे ले लेना। मैंने उसे कुछ पैसे दे दिए, वह कॉलेज में पढ़ती थी, मैंने जब उसे पैसे दिए तो वह बहुत खुश हुई और उसने मुझे गले लगा लिया, उसके बाद कई बार वह मुझसे पैसे की डिमांड करने लगी, मैं उसे हमेशा ही पैसे दे दिया करता और उस पर आंख बंद करके भरोसा करता था। मैं उसे अपने घर भी लेकर आया और मैंने अपने माता पिता से भी सोनिया को मिलाया, मेरे माता-पिता को सोनिया बहुत ही पसंद थी लेकिन मुझे उसके बारे में पता नहीं था कि वह सिर्फ मुझसे पैसे लूट रही है, उसने कई लड़कों से ऐसे ही पैसे लूटे हैं।
उसने मेरी आंखों पर अपने प्यार का जाल बिछा दिया था, मैं उस पर बिल्कुल भी शक नहीं कर पाया। मुझे लगा कि सोनिया भी मेरे लिए पूरी तरीके से समर्पित है इसीलिए मैंने भी उसकी हर बात को मानना शुरू कर दिया और सोनिया भी मेरी हर बात को मानती थी। मुझे उसने कभी भी ऐसा शक नहीं होने दिया कि वह मुझसे प्रेम नहीं करती लेकिन मुझे नहीं पता था कि उसके दिल में मेरे लिए बिल्कुल भी प्यार नहीं है और ना ही वह मुझसे प्यार करती है। एक दिन मैंने उसे एक लड़के के साथ देख लिया था, उसके बाद मैंने उससे पूछा लेकिन उसने मुझे कुछ भी नहीं बताया, वह कहने लगी कि वह मेरा भाई है। मैंने उसे कहा कि यदि वह तुम्हारा हमारा भाई है तो  तुमने मुझे उससे कभी मिलाया क्यों नही,  वह कहने लगी कि वह मेरा दूर का भाई है और उस दिन वह मुझे मिल गया था तो इसीलिए मैंने उससे बात कर ली। उस दिन मुझे सोनिया पर शक हो गया था और मैं सोचने लगा कि यदि कभी सोनिया ने मुझे धोखा दे दिया तो मैं तो पूरी तरीके से बर्बाद हो जाऊंगा लेकिन तब तक उसने मुझे अपने जाल में फंसा लिया। मुझे उसने उस लड़के से मिलवाया तो वह लड़का भी कहने लगा कि सोनिया मेरी बहन है और हम दोनों दूर के रिश्तेदार हैं, मुझे भी उस दिन सोनिया पर पूरा यकीन हो गया और मैंने उस पर शक करना छोड़ दिया लेकिन मैं उस दिन बहुत गलत था, मुझे नहीं पता था कि वह मेरे साथ बहुत बड़ा गेम खेल रही है। एक दिन वह मेरे पास आई और कहने लगी कि मेरे पिताजी की बहुत ज्यादा तबीयत खराब है और वह बहुत ही सीरियस हो चुके हैं, मैं सोनिया से वैसे भी अंधा प्यार करता था तो मैंने उसे कहा कि उन्हें क्या हो गया है, वह कहने लगी कि उन्हें कैंसर हो गया है और वह बहुत सीरियस हो चुके हैं, डॉक्टरों ने कहां है कि यदि उनका जल्दी से ऑपरेशन नहीं हुआ तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। जब यह बात सोनिया ने मुझसे कहीं तो मैंने सोनिया से कहा कि क्या तुमने उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवा दिया है, वह कहने लगी हां वह हॉस्पिटल में ही है और हमारे पास कुछ पैसे कम पड़ गए यदि तुम मेरी मदद कर दो तो मैं तुम्हें वह पैसे कुछ दिनों बाद ही लौटा दूंगी।
मैं सोनिया के प्यार में पागल था तो मैंने उसे पैसे दे दिए, मैंने जब सोनिया को पैसे दिए तो वह कहने लगी कि तुमने आज साबित कर दिया कि तुम मुझसे कितना ज्यादा प्यार करते हो। उसके बाद वह हो चली गई और मैं दुकान में बैठा हुआ था, मैंने सोनिया को फोन किया तो वह कहने लगी कि मैं अस्पताल में ही हूं और तुम्हें कुछ समय बाद मैं फोन करती हूं। मैंने जब सोनिया को फोन किया तो मुझे पता चला कि वह किसी और का नंबर है और सोनिया ने वह नंबर लिया हुआ था। मैंने जब उस व्यक्ति से पूछा तो वह कहने लगा कि सोनिया ने मुझे भी धोखा दिया है, मेरी और सोनिया की शादी हो चुकी थी लेकिन उसके बाद वह किसी और के साथ भाग गई। जब मुझे यह बात पता चली तो मैं उस व्यक्ति से मिला, वह व्यक्ति बहुत फूट फूट कर रो रहा था और कह रहा था कि क्या तुम्हें भी उसने बेवकूफ बना दिया, मैंने उसे कहा कि हां वह कह रही थी कि मेरे पिताजी की तबीयत खराब है, मुझे कुछ पैसों की आवश्यकता है तो मैंने उसे कुछ पैसे दे दिए थे लेकिन उसके बाद से ना तो सोनिया का फोन लग रहा है और ना ही उसका कुछ पता है।
मुझे भी अब पूरा शक हो चुका था कि सोनिया ने मुझे चूना लगा दिया है और अब वह कभी भी मेरे पास वापस नहीं आने वाली है। मैं जब अपनी दुकान पर गया तो मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ और मुझे लगा कि शायद अब मैं इस हादसे से नहीं भरने वाला हूं क्योंकि मैंने पहले ही बहुत सारे पैसे बाजार से प्याज में लिए हुए थे और मैं वैसे ही कर्जे में चल रहा था और ऊपर से मैंने सोनिया को पैसे भी दे दिए थे। मेरे पास कुछ भी पैसे नहीं बचे थे इसलिए मैंने सोचा कि मैं शायद अब यह पैसे नहीं चुका पाऊंगा।  जितनी भी मेरे पास शेविंग थी, मैंने वह सब निकाल कर लोगों को लौटा दिए, जितना मुझसे हो सकता था मैंने उतने पैसे सबको लौटा दिए, उसके बावजूद भी काफी पैसे कम पड़ रहे थे लेकिन मैंने उन लोगों से समय मांग लिया और जब उन्हें मेरे बारे में जानकारी हुई तो उन लोगों ने मुझे समय दे दिया। मुझे लगा कि शायद अब मैं मेरठ में ना रहूं तो ही अच्छा रहेगा इसीलिए मैं सोचने लगा की मैं किसी और शहर जाकर बस जाता हूं।
मैं बहुत ज्यादा टूट चुका था और अब मैं बिल्कुल भी अपने बारे में नहीं सोच रहा था इसीलिए मैं बहुत शराब पीने लगा, मुझे लगा कि शायद अब मेरा जीवन बर्बाद हो चुका है लेकिन मुझे उस वक्त मेरे एक दोस्त ने बहुत ही सपोर्ट किया, उसने कहा कि तुम मेरे साथ चंडीगढ़ चलो, मैं उसके साथ चंडीगढ़ चला गया और मैं चंडीगढ़ में कुछ दिन काम करने लगा तो मैंने थोड़े बहुत पैसे लोगों के लौटा दिए थे। मैं बहुत ज्यादा ही दुखी था लेकिन मैं अपना काम भी अच्छे से कर पा रहा था। एक दिन मुझे एक व्यक्ति मिला वह कहने लगा कि क्या तुम जिगोलो सर्विस में काम करोगे उसके बदले तुम्हें बहुत अच्छे पैसे मिल जाया करेंगे। मैंने उसे कहा ठीक है मैं जिगोलो सर्विस में काम करने के लिए तैयार हूं। उस व्यक्ति ने मुझे एक महिला के पास भेजा और जब मैं उस महिला के पास गया तो मैंने देखा कि वह तो सोनिया है। मेरा पूरा दिमाग खराब हो गया और मैंने उसे कस कर पकड़ लिया। वह भागने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैंने उसकी सलवार को खोलते हुए उसकी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया। मेरा लंड जैसे ही सोनिया की गांड में घुसा तो वह चिल्लाने लगी। मैंने उसे बड़ी तेज तेज धक्के देने शुरू किए और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
वह भी बहुत खुश हो रही थी और कह रही थी मुझे बहुत मजा आ रहा है। मैंने उसे कहा कि तुम्हारी वजह से मेरी गांड फट गई है और मैं लोगों को मुंह दिखाने के लायक भी नहीं रहा। वह कहने लगी मैं तुम्हारे पैसे तुम्हें लौटा दूंगी तुम उसकी चिंता मत करो। मैं अब उसकी चूतडो को पकड़कर उसे धक्के दे रहा था वह बहुत चिल्ला रही थी। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था जब मैं उसे धक्के दे रहा था। मैं उसकी गांड की गर्मी को ज्यादा समय तक नहीं झेल पाया और उसकी गांड के अंदर मेरा माल गिर गया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मेरे अंदर का गुस्सा अभी तक शांत नहीं हुआ था मैंने अपने लंड को हिलाते हुए दोबारा से सोनिया की गांड के अंदर डाल दिया। जब मेरा लंड सोनिया की गांड में घुसा तो मुझे बहुत मजा आने लगा मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के देने लगा। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा है जिस प्रकार से तुम मुझे झटके दे रहे हो। मैंने सोनिया से कहा कि तुमने भी मेरी गांड फाड़ी है आज मैं तुम्हारी गांड के  परखच्चे उड़ा कर रख दूंगा। मैंने अब उसे बड़ी तेज तेज धक्के मारे उसकी गांड से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर आने लगी थी लेकिन मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था। मैं सोनिया को बड़ी तेजी से पेल रहा था जैसे ही मेरा माल दोबारा से सोनिया की गांड में घुसा तो मैंने अपने लंड को सोनिया की गांड से बाहर निकालते हुए सोनिया को अपनी बाहों में ले लिया। वह मुझे कहने लगी मैं तुम्हें तुम्हारे पैसे भी लौटा दूंगी। मैंने उसे कहा कि तुम मेरे पैसे मुझे अभी लौटा दो। उसने अपनी अलमारी से पैसे निकाले और उसके बाद मैंने उसे वह पैसे लिए। जितने समय तक वह चंडीगढ़ में थी मैंने उसकी गांड मारी। उसने मुझसे कहा कि मुझे अपनी गांड मरवाने में बहुत मजा आता है ना जाने उसने कितने लोगों के लंड अपनी गांड में लिए होंगे।

Sunday, December 16, 2018

जब मैं चुदी पहली बार

मेरा नाम राकेश है और मैं एक बड़ा कारोबारी हूं। मैं दिल्ली का रहने वाला हूं और मेरी उम्र 35 वर्ष है। मुझे काम करते हुए काफी वर्ष हो चुके हैं। पहले मैं नौकरी किया करता था लेकिन बाद में मैंने हिम्मत करते हुए अपना काम खोल लिया और जब मैंने अपना काम खोला तो फिर बाद में मुझे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। परंतु उसके बाद जैसे कैसे मैंने अपने काम को संभाल लिया और अब मेरा काम बहुत ही अच्छे से चल रहा है। मैं अपने काम से बहुत खुश भी हूं। क्योंकि मुझे अब बहुत अच्छा मुनाफा भी होने लगा है और मेरे घर वाले भी इस बात से बहुत खुश हैं। जब मेरी शादी हुई तो उस समय मेरी स्थिति कुछ ठीक नहीं थी। परंतु फिर भी मैंने शादी कर ली। क्योंकि मेरे पिताजी मुझे जिद कर रहे थे और कह रहे थे कि मैं शादी कर लूं। उनकी जिद की वजह से मैंने शादी कर ली लेकिन जब मैंने शादी की तो मैंने अपनी पत्नी को सब कुछ बता दिया। तो उसने मेरे साथ बहुत ही एडजेस्ट किया लेकिन धीरे-धीरे जब मेरा वक़्त अच्छा होता गया और मैं अच्छे पैसे कमाने लगा तो अब वह बहुत ही खुश थी और मुझे कहती कि शुरुआत में आपने कितनी दिक्कतें झेली थी। परंतु अब आपका बिजनेस बहुत ही अच्छा चल पड़ा है और मैं भी बहुत खुश हूं।
मैं अपने कारोबार के सिलसिले में अक्सर इधर उधर जाता रहता हूं और इस बार भी मैं अपने कारोबार के सिलसिले में जयपुर जा रहा था। मैंने सोचा कि मेरा एक पुराना दोस्त है तो मैं उससे जयपुर में मिल लेता हूं। जब मैंने उसे फोन किया तो वह बहुत ही खुश हुआ और कहने लगा कि तुमने इतने वर्षों बाद मुझे फोन कैसे कर लिया। मैंने उसे कहा कि तुम तो मुझे कभी फोन करने वाले नहीं हो। तो मैंने सोचा आज मैं ही तुम्हें फोन कर देता हूं। इस वजह से मैंने तुम्हें फोन किया। जब मैंने उसे बताया कि मैं जयपुर आ रहा हूं तो वह बहुत खुश हुआ और कहने लगा कि तुम मेरे घर पर ही रुकने वाले हो। मैं उसे मना नही कर पाया और मैं उसके घर चला गया। जब मैं उसके घर गया तो वह मुझसे मिलकर बहुत ही खुश हुआ और कहने लगा तुम इतने वर्षों बाद मुझे मिले हो। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। अब हम दोनों बैठकर बातें कर रहे थे। तभी संतोष की पत्नी आ गई और संतोष ने मुझे उससे इंट्रोडक्शन करवाया। उसका नाम सुरभि है। अब हम तीनों बैठकर बातें कर रहे थे तो संतोष हमारी कुछ पुरानी यादें ताजा कर रहा था और मुझे भी बहुत खुशी हो रही थी। बातें करते-करते अब हमारे काम की बात आ गई। संतोष ने मुझे पूछा कि तुम्हारा कारोबार कैसा चल रहा है।

मैंने उसे बताया कि मेरा कारोबार तो बहुत ही बढ़िया चल रहा है। शुरुआत में तो बहुत ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। परंतु अब काम अच्छा चल पड़ा है और जब मैंने संतोष से इस बारे में पूछा तो वह कहने लगा कि मेरी स्थिति तो कुछ ठीक नहीं चल रही। मैं नौकरी से बहुत ज्यादा परेशान हो गया हूं और मुझे अब लगने लगा है कि मैं अपना ही कोई छोटा मोटा कारोबार शुरू कर लू लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा कि मुझे क्या काम शुरू करना चाहिए। मैंने उसे कहा, मैं तुम्हारी तुम्हारा कारोबार खोलने में मदद कर सकता हूं। वह यह बात सुनकर बहुत खुश हो गया और कहने लगा कि लेकिन मुझे उसके लिए इन्वेस्टमेंट डालनी पड़ेगी और वह मेरे पास नहीं है। मैंने उसे कहा तुम उसकी चिंता मत करो। मैं तुम्हें सेटअप लगा कर दे दूंगा। उसके बाद तुम अपने काम को चला लेना। अब वह बहुत खुश हुआ और उसकी पत्नी भी बहुत खुश थी लेकिन मैंने उसे कहा कि तुम्हें उसके लिए दिल्ली आना पड़ेगा और दिल्ली से ही काम करना पड़ेगा। वह कहने लगा ठीक है मैं अपनी नौकरी से कुछ दिनों बाद रिजाइन दे दूंगा और दिल्ली आ जाऊंगा। सुरभि यहां रह लेगी। मैं अपना काम कर के जयपुर से वापस अपने घर लौट गया और कुछ दिनों बाद संतोष का फोन आया और कहने लगा कि मैं दिल्ली आना चाहता हूं। तुम मुझे बताओ मुझे कब आना है। मैंने उसे कहा कि तुम 5 दिन बाद आ जाना। क्योंकि मैं अभी कुछ काम के सिलसिले में बाहर जा रहा हूं और दो-तीन दिन बाद मैं लौट आऊंगा। अब संतोष भी मेरे साथ दिल्ली आ गया और वह मेरे साथ ही काम करने लगा। मैंने उसे एक सेटअप लगा कर दे दिया और उसके बाद वह काम करने लगा। मैंने उसे रहने के लिए अपना एक फ्लैट दे दिया था और वह वहीं पर रह रहा था। धीरे-धीरे संतोष का काम भी अच्छा चलने लगा और वह मुझसे कहने लगा कि तुम्हारी बदौलत अब मेरा काम भी अच्छा चलने लगा है। मैं बहुत खुश हूं और मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है।
अब संतोष भी बहुत खुश था और मैं भी उससे बहुत खुश था। एक बार मुझे काम के सिलसिले में जयपुर जाना था तो मैंने इस बारे में संतोष से जिक्र किया। वह कहने लगा तुम मेरे घर पर ही चले जाना और मेरी पत्नी से भी मिल लेना। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हारे घर पर चला जाऊंगा और सुरभि से भी मिल लूंगा। अब मैं जयपुर चला गया जब मैं जयपुर गया तो सुरभि मुझे देखकर बहुत खुश हुई और मुझसे संतोष के बारे में पूछने लगी। मैंने उसे कहा कि वह बहुत अच्छा है और बहुत ही अच्छे से काम कर रहा है वह इस  बात से बहुत ही ज्यादा खुश थी। मैंने सुरभि से कहा कि मैं फ्रेश हो लेता हूं उसके बाद मैं थोड़ी देर आराम करता हूं। जब मैं बाथरुम में गया तो मैंने सुरभि की लाल रंग की पैंटी दिखी जिससे कि मेरा मन खराब हो गया मैं उसे सुघने लगा। जब मैं बाहर आया तो मुझे सुरभि को देखकर बहुत ही ज्यादा उत्तेजना आने लगी और मैं उसकी गांड को देखने लगा मै उसके बड़े बड़े स्तनों को देख रहा था। जब सुरभि मेरे पास बैठी हुई थी तो मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके होठों को अपने होठों में ले लिया। मैं उसे बहुत ही अच्छे से किस करने लगा अब उसके होंठों से खून भी निकल रहा था। वह भी पूरी उत्तेजना में आ गई और मैंने तुरंत अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह में डाल दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को उसके मुंह के अंदर डाला तो वह बहुत ज्यादा खुश हो गई। मै अपने लंड को अंदर बाहर करती जा रही थी मुझे भी बहुत मजा आ रहा था।
थोड़ी देर बाद मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए तो मैंने देखा उसने पिंक कलर की पैंटी पहनी हुई है और वह उसमें बहुत ही सेक्सी लग रही थी। मैंने उसकी पैंटी को खोलते हुए उसकी चूत मे हाथ लगाना शुरु किया उसकी चूत मे हल्के हल्के बाल थे। मैंने उसकी चूत के अंदर जैसे ही उंगली डाली तो उसकी चूत से पानी निकलने लगा और वह बहुत ही उत्तेजित होने लगी। थोड़ी देर में मैंने भी उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी योनि में घुसेड़ा तो उसके मुंह से चीख निकल पड़ी और वह बहुत ज्यादा मूड में आ गई। अब मैं उसे ऐसे ही बड़ी तीव्रता से चोदने लगा। उसे बहुत ही मजा आ रहा था जब मैं उसे चोदे जा रहा था मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया और उसे चोदता रहा। थोड़ी देर में मैंने उसके स्तनों को भी अपने मुंह में लेकर उनका रसपान करना शुरू कर दिया उनसे दूध निकल रहा था मैंने वह सब अपने मुंह में लेकर निकाल लिया। मैं अब उसके होठों को किस करते हुए बहुत ही ज्यादा मस्त हो रहा था। मैं उसे बड़ी तीव्रता से धक्के दिए जा रहा था उसका बदन भी पूरा लाल होने लगा और मुझे उसका बदन देखकर बहुत ही मजा आ रहा था। लेकिन मुझसे उसकी चूत की गर्मी नहीं झेली जा रही थी। फिर भी मैं उसे चोदने पर लगा हुआ था और बड़ी तेज धक्के दिए जा रहा था। मैंने उसे इतनी तीव्रता से चोदना शुरू किया कि उसका पूरा शरीर और भी गरम हो गया। वह पसीना-पसीना हो गई अब वह इतना ज्यादा पसीना हो चुकी थी कि मुझसे भी बिल्कुल नहीं रहा गया। मैंने तुरंत ही अपने वीर्य को उसकी योनि में डाल दिया जैसे ही मैंने अपने वीर्य को उसकी योनि में डाला तो वह बहुत ज्यादा खुश हुई। वह कहने लगी आपने तो संतोष की कमी को पूरा कर दिया है मुझे बहुत ही अच्छा लगा जब आप ने मुझे चोदा। जब भी मैं जयपुर जाता हूं तो सुरभि की चूत जरूर मारता क्योंकि उसकी चूत बहुत ज्यादा टाइट है और मुझे उसे चोदने में एक अलग ही अनुभूति होती है।

Thursday, December 13, 2018

मेरी मर्दानगी को देखकर मुझ पर मर मिटी

मेरा नाम सुरेंद्र है मैं पंजाब का रहने वाला हूं। मैं पंजाब में जिस जगह रहता हूं वहां से कॉलेज काफी दूर है। मुझे कॉलेज पढ़ने के लिए चंडीगढ़ आना पड़ता था लेकिन फिर भी मैंने अपनी पढ़ाई में पूरा ध्यान दिया और जब मेरी पढ़ाई पूरी हो गई तो उसके बाद मैंने कॉलेज से ही पीएसडी की। मैं उसके बाद कॉलेज में ही पढ़ाने लगा। एक बार मुझे बिहार के कॉलेज से पढ़ाने का ऑफर मिला। मैंने अपने पिताजी से इस बारे में बात की तो वह कहने लगे कि बेटा अगर तुम्हें अच्छी तनख्वाह मिल रही है तो तुम वहां चले जाओ। मैंने उनसे कहा वहां पर तो मुझे अच्छी तनख्वाह मिल रही है और मेरा एक दोस्त भी वहां पर पढा रहा है जो हमारे साथ ही कॉलेज में पढ़ाई करता था। मेरे पापा कहने लगे तो तुम भी वहां चले जाओ। मैंने भी सोचा कि चलो मैं वहां चले जाता हूं। मैं जब वहां पढ़ाने के लिए पहुंचा तो वहां का माहौल ही थोड़ा अजीब सा था। मुझे तो बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन मैंने सोचा कि चलो अच्छी तनख्वाह मिल रही है तो यहीं पढा लेता हूं।
मैं सबसे पहले जाकर अपने दोस्त से मिला। मेरे दोस्त का नाम मनजीत है। वह मुझे कहने लगा तुम भी यहां आ गए? मैंने उसे कहा हां यहां अच्छी तनख्वाह मिल रही है तो क्यों नहीं आता। मनजीत कहने लगा यहां का माहौल बिल्कुल भी ठीक नहीं है और कॉलेज में बड़ी ही गुंडागर्दी चलती है। यहां पर तो क्लास भी नहीं चलती। हम लोग तो सिर्फ नाम के ही कॉलेज जाते हैं। वहां ना तो बच्चे पढ़ने आते हैं और ना ही पढ़ाई की स्थिति यहां ठीक है। मैंने उसे कहा तो फिर यहां पढा कर क्या फायदा। वह कहने लगा अरे जब फ्री में तनख्वाह मिल रही है तो कहीं जाने की जरूरत क्या है। मैंने सोचा चलो कॉलेज की स्थिति देख ली जाए। मैं अगले दिन मनजीत के साथ कॉलेज चला गया। मैंने वहां जॉइनिंग कर लिया और मैंने वहां का माहौल देखा तो स्थिति बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी। वहां पर बड़ी ही बदमाशी थी। मैं पहले दिन तो वापस ही लौट आया और घर पर ही आराम करने लगा। उस दिन मनजीत और मैं साथ में बैठे हुए थे। मैंने मनजीत से पूछा कि तुम यहां अपना समय कैसे बिता लेते हो? वह कहने लगा बस घर पर ही बैठे रहते हैं और कॉलेज के जो भी प्रोफेसर हैं। उनसे ही बात कर के समय बिता लेते हैं।
अब मैं कॉलेज बढ़ाने के लिए जाने लगा लेकिन कॉलेज की स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं थी। मैं जब कॉलेज जाता तो वहां पर हमेशा कुछ ना कुछ समस्या हो जाती। कभी वहां किसी का पैर टूट जाता तो कभी किसी का सर फूट जाता। यही स्थिति बनी हुई थी। हर दिन वहां झगड़े होते और झगड़ो की वजह से कॉलेज बंद करना पड़ता। मैं एक दिन अपने क्लास में पढ़ा रहा था। क्लास में वैसे ही कम बच्चे जाते थे लेकिन उस दिन मैं जब क्लास में पढा रहा था तभी कॉलेज का छात्र नेता बड़े दबंग के साथ अंदर घुस आया। मैंने उसे कहा कि तुम इस तरीके से क्लास में मत आओ लेकिन वह मेरे साथ उलझ गया। उस वक्त पता नहीं मेरा पारा भी चढ़ा हुआ था। मैंने उसे कहा कि तुम कॉलेज के प्रोफेसर से इस तरीके से बात करोगे? जब उसने मेरे कॉलर को पकड़ा तो मैंने भी उसे एक जोरदार तमाचा लगा दिया। जैसे ही उसके कनपटी पर तमाचा लगा तो वह मुझे देख कर आग बबूला हो गया और मुझ पर वह हाथ उठाने की कोशिश करने लगा। मैंने भी उसकी क्लास के अंदर ही ऐसी धुनाई की। कि उसे भी छठी का दूध याद दिला दिया। जब उसकी धुनाई हो गई तो कॉलेज में बड़ा ही अफरा-तफरी मच गई कि कॉलेज के छात्र नेता पर हाथ उठा दिया गया है लेकिन मुझे नहीं पता था कि कॉलेज में इतना ज्यादा तमाशा बन जाएगा। मुझे भी मेरे सीनियरों ने बुला दिया और उस नेता को भी बुला दिया। वह बड़ी बत्तमीजी से बात कर रहा था। मैंने सर से कहा कि यदि मेरी इसमें कोई गलती है तो आप बच्चों से पूछ सकते हैं जो बच्चे उस वक्त क्लास में बैठे हुए थे। वह कहने लगे कि इसमें सर की कोई भी गलती नहीं है सर बिल्कुल ही निर्दोष हैं। उसके बाद तो जैसे मैं कॉलेज का हीरो ही बन गया था और मेरी क्लास में भी भीड़ बढ़ने लगी थी। मुझे भी अब अच्छा लगने लगा था कि मैं बच्चों को पढ़ाने लगा हूं।
मनजीत मुझे कॉलेज में मिला और कहने लगा कि अरे दोस्त तुम तो यहां पर हीरो ही बन गए। लगता है तुम्हारे हाथ पैरों में अभी पहले वाली जान बची है। तुमने भी कॉलेज में कम बदमाशी नहीं की थी। जब मनजीत ने मुझे यह बात कही तो मैंने उसे कहा अरे अब यह तुम रहने दो। पहले की बात कुछ और है। अब हम लोग यहां पर पढ़ाने के लिए आए हैं। यहां पर हम लोग कोई गुंडागर्दी थोड़ी करने आए हैं। उस दिन उस लड़के की गलती थी इसलिए मैंने उसकी धुनाई कर दी। उसके बाद से वह छात्र नेता मुझे देख कर बहुत डरने लगा और मेरे पास भी नहीं आता था। कॉलेज में भी अब बच्चे सही से पढ़ने लगे थे। मेरी क्लास में तो सारे बच्चे आते थे लेकिन कॉलेज का माहौल फिर भी खराब था। मुझे लगा कि मुझे थोड़ी बहुत स्थिति सुधारने का अवसर मिला है तो मैं इस मौके को ना ही गवाऊं तो अच्छा होगा इसलिए मुझसे जितना होता मैं अपनी क्लास पढ़ाता था। हमारे कॉलेज में समीरा मैडम हैं। वह उस दिन के बाद मेरे ऊपर फ्लैट हो गई थी और हमेशा मुझ पर चांस मारने की कोशिश करती लेकिन मैंने उन्हें कभी मौका नहीं दिया। मंजीत मुझे हमेशा कहता समीरा मैडम तो तुम पर पूरी तरीके से फिदा है तुम क्यों उनकी बातों का जवाब नहीं देती। मैं हमेशा ही उन्हें टालने की कोशिश करता।
एक दिन वह कॉलेज में बहुत पटाखा बनकर आई हुई थी उस दिन उन्हें देखकर मेरा भी मन फिसल गया और मैंने उनसे बात कर ली। मैंने उनसे बात की तो जैसे उन्होंने मुझे अपना पूरा बदन ही सौंप दिया हो। वह मुझे कहने लगी सर आप तो बड़े ही जोशीले व्यक्ति हो। मैंने उन्हें कहा आपको मेरे अंदर जोश कहां से दिखता है। वह कहने लगी बस आपकी मर्दानगी को देखकर मुझे आपका जोश का एहसास हो गया। जब उन्होंने यह बात कही तो मैं समझ गया वह मुझसे अपनी चूत मरवाना चाहती है। हुआ भी बिल्कुल ऐसा ही वह मुझे अपने साथ अपने घर ले गई। उस दिन उनके घर पर कोई भी नहीं था। जब उन्होंने अपने कपड़े खोले तो मैं उनके बदन को देखकर खुश हो गया उनकी चूतडो को देखकर मेरा पूरा मूड खराब हो गया। मैंने भी उनके पूरे बदन का रसपान किया जब मैं उनके स्तनों को चूसता तो उनकी योनि से पानी का रिसाव होने लगता उनकी योनि से गर्म पानी बाहर निकाल रहा था। जब मैंने अपने लंड को उनकी योनि पर लगाया तो वह मुझे कहने लगी आपका लंड बहुत गर्म है। मैंने उन्हें कहा आपकी योनि से भी कम गर्म पानी बाहर नहीं आ रहा। यह कहते हुए मैंने उनकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया जैसे ही मेरा मोटा लंड उनकी योनि के अंदर घुसा तो वह उत्तेजित हो गई थी और उनके मुंह से चीख निकल गई। मैंने धीरे धीरे अपने लंड को अंदर करना शुरू किया। उनकी योनि से पानी लगातार बाहर की तरफ को निकलने लगा जिससे कि उनकी योनि चिकनी हो गई और उनकी योनि में लंड डालने में आसानी होने लगी। वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर रही थी और मैं भी उन्हें उतने ही तेज गति से धक्के मार रहा था। मैंने उन्हें तेज तेज धक्के मारे उनकी योनि से उतना ज्यादा तरल पदार्थ बाहर निकलता। मैं समझ गया यह झड़ चुकी हैं। मैंने भी उनके साथ 5 मिनट तक संभोग किया और उन 5 मिनटो के दौरान मैंने उन्हें 300 झटके मारे लेकिन मुझे उनकी चूत मारकर बहुत मजा आया। जैसे ही मेरा वीर्य उनकी योनि के अंदर गिरा तो वह बहुत खुश हो गई। मेरा मन उन्हें देखकर नहीं भरा था मैंने दोबारा से उनकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया जैसे ही मेरा कड़क लंड उनकी योनि में दोबारा प्रवेश हुआ तो वह दोबारा से चिल्ला उठी। मैंने बड़ी तेज गति से उन्हें चोदना शुरू किया। मैंने समीरा मैडम को कहा आपका बदन तो बड़ा ही गजब का है और आपकी चूत मारने मे तो मुझे बड़ा मजा आ रहा है। वह मुझे कहने लगी मैं तो कब से आपसे अपनी चूत मरवाने के लिए उतारु थी लेकिन आप मेरी तरफ देखते ही नहीं थे। मैंने उन्हें कहा आज के बाद मैं सिर्फ आपकी तरफ ही देखूंगा यह कहते कहते मेरा वीर्य उनकी योनि के अंदर जा गिरा।