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Sunday, December 23, 2018

बॉयफ्रेंड ने मेरी सील तोड़ डाली

मेरा नाम राधिका है मैं कॉलेज में पढ़ती हूं, मेरा यह कॉलेज का पहला वर्ष है। मैं जब कॉलेज में आई तो मुझे पहले बहुत ही अजीब लग रहा था क्योंकि हमारे स्कूल में सब लोग यूनिफॉर्म में आते थे और कॉलेज में किसी भी प्रकार की कोई यूनिफॉर्म नहीं थी। हमारे कॉलेज में सब लोग बड़े ही फैशनेबल है और इसीलिए हमारे कॉलेज में सब लोग बहुत बन ठन कर आते हैं। हमारे कॉलेज के लड़के भी बहुत परेशान करते हैं और सब लड़के लड़कियों पर ही चांस मारते हैं। मैं जब कॉलेज में गयी तो मुझ पर भी कुछ लड़के बहुत लाइन मार रहे थे लेकिन मैंने उनकी तरफ देखा भी नहीं क्योंकि मैं सिर्फ अपनी पढ़ाई करना चाहती हूं,  इस वजह से मैंने उनके साथ ज्यादा बात नहीं की। वह लड़के मुझे अच्छे नहीं लगे। मैं अपनी क्लास में पढ़ने में भी अच्छी हूं और सब टीचर मेरी बहुत तारीफ करते हैं इसलिए मुझे लगता है कि मुझे अपनी पढ़ाई पर ही ध्यान देना चाहिए।
मेरे माता-पिता भी मेरी पढ़ाई को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं, वह हमेशा ही मुझसे पूछते हैं कि तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है, मेरे पिताजी स्कूल में क्लर्क हैं और मेरी माता घर का काम संभालती हैं इसीलिए मुझे कई बार ऐसा लगता है कि मुझे अपने जीवन में कुछ अच्छा करना चाहिए। उसके बाद मैं अपने घर वालों का सहारा बनना चाहती हूं। मेरा भाई अभी छोटा है और वह स्कूल में पढ़ रहा है, मेरे भाई की उम्र 15 वर्ष है। वह बहुत शरारती है उसके बावजूद भी मेरे माता-पिता उसे कभी कुछ नहीं कहते, मेरी मां उसको बहुत ही सपोर्ट करती है और कहती है कि अभी उसकी उम्र कम है इसलिए उसे अभी कुछ मत कहो। वह मुझे भी बहुत परेशान करता है और जब भी मैं घर पर होती हूं तो वह मुझे कुछ ज्यादा ही परेशान करता है, जिस वजह से मैं कई बार उस पर गुस्सा भी हो जाती हूं लेकिन उसके बाद मुझे लगता है कि मुझे अपने भाई पर गुस्सा नहीं होना चाहिए और मैं ही उससे बात कर लेती हूं।
मेरे पिताजी जब भी मेरे साथ अकेले में बैठे होते हैं तो वह मुझे हमेशा ही समझाते हैं वह कहते हैं कि तुम अपनी पढ़ाई अच्छे से करो ताकि तुम अपने जीवन में सफलता पा सको। मैं अपने पिताजी को हमेशा ही कहती हूं कि आप मुझ पर पूरा भरोसा रखिए मैं आपके भरोसे को बिल्कुल भी नहीं तोड़ूंगी। वह हमेशा ही मुझे याद दिलाते रहते हैं कि हम लोगों ने कितनी कठिनाइयों से निकल कर तुम्हें अच्छे स्कूल में पढ़ाया है क्योंकि हमारे समाज में लड़कियों को बिल्कुल भी पढाया नहीं जाता, उसके बावजूद भी मैंने तुम्हें पढ़ाने की सोची। मुझे सब लोग मना कर रहे थे उसके बावजूद भी मैंने तुम्हें कॉलेज में पढ़ाया। मैंने अपने पिताजी से कहा कि मुझे यह बात अच्छे से मालूम है कि आपको सब लोग इतना मना कर रहे थे, उसके बावजूद भी आपने मुझे कॉलेज में दाखिला दिलवाया और इसीलिए मैं आपकी हमेशा इज्जत करती हूं क्योंकि आपने मुझ में और मेरे भाई में कभी भी किसी प्रकार का अंतर नहीं किया,  आपने हम दोनों की जरूरतों को एक समान समझा और हमेशा ही आपने हम दोनों की जरूरतों को पूरा किया। मेरे पिताजी का नेचर जिस प्रकार का है वह बड़े ही अच्छे से और बड़ी शालीनता से समझाते हैं इसीलिए मुझे उनका नेचर बहुत अच्छा लगता है। मेरी मम्मी भी उनकी बहुत तारीफ करती हैं और कहती हैं कि तुम्हारे पिताजी का व्यवहार सब लोगों के साथ एक समान है इसीलिए सब लोग उनकी बड़ी इज्जत करते हैं और हमेशा ही उनसे सलाह मशवरा लेते हैं। मैं हमेशा की तरह ही कॉलेज से आती जाती रहती थी। हमारा कॉलेज बहुत बड़ा है इसलिए हमारे कॉलेज में काफी बच्चे हैं लेकिन मैं सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती थी इसलिए मुझे ज्यादा किसी के साथ बात करना अच्छा नहीं लगता था। हमारे क्लास के कुछ ही बच्चों से मैं बात करती थी क्योंकि बाकी बच्चे तो सिर्फ हमारे कॉलेज में घूमने के लिए आते थे, उन्हें पढ़ाई से कुछ भी लेना-देना नहीं था। एक दिन हम कॉलेज के ग्राउंड में बैठे हुए थे और मेरे पास की सीट में एक लड़का बैठा हुआ था। वह अकेले ही बैठा था, मुझे काफी अजीब लग रहा था जब वह अकेला बैठा हुआ था,  वह अपनी किताब खोल कर बैठा हुआ था। मुझे पहले लगा कि शायद वह किसी का इंतजार कर रहा है लेकिन वह बैठा हुआ था और अपनी किताब पढ़ने पर लगा हुआ था।
मैं काफी देर से उसे देख रही थी परंतु वह सिर्फ अपनी किताब में ध्यान से दे रहा था और मुझे भी काफी देर हो चुकी थी इसलिए मैंने सोचा कि मैं उस लड़के से बात करती हूं। मैं अब उस लड़के के पास चली गई और मैंने उससे पूछा कि क्या तुम यहां बैठकर किसी का इंतजार कर रहे हो, वह कहने लगा कि नहीं मैं किसी का भी इंतजार नहीं कर रहा हूं मैं पढ़ाई कर रहा हूं। मैंने उसे अपना इंट्रोडक्शन दिया और कहा कि यह मेरा कॉलेज का पहला वर्ष है। उसने भी मुझे अपना इंट्रोडक्शन दिया और अपना नाम बताया, उसका नाम संतोष है, वह कहने लगा कि मैं बी कॉम का छात्र हूं और यह मेरा आखिरी वर्ष है। मैंने उससे पूछा कि क्या तुम्हें किताब पढ़ना अच्छा लगता है। वह कहने लगा हां मुझे किताबें पढ़ने का बहुत शौक है और मैं हमेशा ही कुछ ना कुछ नई चीजें पढ़ना चाहता हूं, जिससे कि मेरा ज्ञान बड़े। मैं संतोष के साथ काफी देर तक बैठी हुई थी और मैं जितनी देर भी उसके साथ बैठी हुई थी। मुझे उसके साथ बात करना अच्छा लग रहा था। मैंने संतोष को भी बताया कि मुझे भी किताब पढ़ने का बहुत शौक है और मैं भी खाली समय में किताब पढ़ लिया करती हूं। संतोष और मेरी पहली मुलाकात बहुत अच्छी रही और मुझे बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगा कि मैं पहली बार संतोष से मिल रही हूं।
हम दोनों ही काफी अच्छे से बात कर रहे थे और काफी देर तक हम लोग साथ में बैठे रहे। मैंने संतोष से कहा कि अब मैं चलती हूं, फिर कभी तुमसे मिलूंगी। जब मैं जा रही थी तो संतोष ने मुझे आवाज लगाई और रोक लिया, उसने कहा कि क्या तुम मुझे अपना नंबर दे सकती हो, मैंने संतोष को आप अपना नंबर दे दिया उसके बाद मैं वहां से चली गई। मैं हमेशा की तरह ही कॉलेज जाती और उसके बाद अपने घर निकल जाती। कभी कबार संतोष मुझे मिल जाया करता था तो हम दोनों साथ में बैठकर समय बिता लेते। संतोष और मैं बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे लेकिन शायद यह दोस्ती अब किसी और तरफ मुड गई थी और मुझे संतोष से बात करना भी अच्छा लगने लगा था। वह भी मुझसे बात किए बिना बिल्कुल भी नहीं रह सकता था इसीलिए वह मुझे हमेशा फोन कर दिया करता था। जब भी हम लोग साथ में होते तो कभी कबार हम लोग कॉलेज से घूमने के लिए भी चले जाते थे। एक दिन संतोष ने मुझे कहा कि हम लोग कहीं बाहर घूमने चलते हैं, मैंने उसे कहा कि मैं ज्यादा समय तक तुम्हारे साथ नहीं रुक पाऊंगी, वह कहने लगा कि हम लोगों को आने में देर हो जाएगी इसीलिए तुम अपने घर पर यह बात बता दो।  मैंने उस दिन अपने जीवन में पहली बार अपने घर वालों को झूठ बोला और कहा कि मैं आज अपनी सहेली के घर पर ही रुकने वाली हूं इसलिए मुझे आने में देर हो जाएगी और उस दिन मैं कॉलेज भी नहीं गई। संतोष और मैं उस दिन सुबह ही घूमने के लिए निकल पड़े। हम लोगों ने उस दिन एक साथ काफी समय बिताया।  मुझे संतोष के साथ समय बिताना अच्छा लग रहा था और संतोष भी मेरे साथ समय बिता कर बहुत खुश था। वह कहने लगा कि हम लोग किसी होटल में चलते हैं मुझे पहले तो घबराहट हो रही थी लेकिन जब उसने मुझे कहा कि तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं तुम्हारे साथ हूं तो वह मुझे एक होटल में ले गया। जब हम दोनों उस होटल में गए तो मुझे थोड़ा डर लग रहा था लेकिन उसने रूम ले लिया। उसके बाद हम लोग होटल के कमरे में चले गए जब संतोष ने होटल में कमरा लिया तो हम दोनों अंदर चले गए और कुछ देर तक हम दोनों बैठे रहे।
अब हम दोनों ही एक साथ बैठे हुए थे कुछ समय बाद संतोष ने मुझे नंगा कर दिया और मेरी योनि को चाटने लगा। सतोष मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मेरी योनि को चाटने लगा मुझे बड़ा मजा आ रहा था जिस प्रकार से संतोष मेरी योनि को चाट रहा था। मैं उसे कहने लगी कि तुम बहुत ही अच्छी तरीके से मेरी योनि को चाट रहे हो मुझे बहुत ही मजा आ रहा है काफी समय तक उसने ऐसा ही किया। मेरी योनि पूरी गीली हो चुकी थी तो उसने अपने लंड को धीरे धीरे मेरी योनि के अंदर डाल दिया और जैसे ही उसका मोटा लंड मेरी योनि में घुसा तो मुझे बहुत तेज दर्द होने लगा मैं चिल्लाने लगी लेकिन उसने भी मुझे कसकर पकड़ा हुआ था। वह मुझे बड़ी तीव्र गति से धक्के देने पर लग गया मैंने उसे कहा कि मुझसे तुम्हारे मोटे लंड को बिल्कुल भी नहीं झेला जा रहा है लेकिन वह ऐसे ही मुझे बड़ी तीव्र गति से झटके दे रहा था मेरी योनि से भी बहुत तेज खून निकल रहा था। उसने मेरे स्तनों को अपने मुंह में लिया और मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेते ही चूसने लगा वह बड़े अच्छे से मेरे स्तनों का रसपान कर रहा था मैं बहुत खुश थी। उसने मुझे 10 मिनट तक चोदा उसका वीर्य मेरी योनि के अंदर ही गिर गया। उसका वीर्य मेरी योनि में गिरा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ और बहुत मजा आया। हम दोनो ने रात भर सेक्स किया और अगले दिन मेरी चूत में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। संतोष का भी लंड बुरी तरीके से छिल चुका था मैंने उसे कहा कि मुझे तो बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है मैं अच्छे से चल भी नहीं पा रही हूं। वह कहने लगा कोई बात नहीं यह दर्द ठीक हो जाएगा हम दोनों अपने घर चले गए। जब मैं अपने घर गई तो मैंने संतोष को फोन कर दिया उसके बाद संतोष और मैं फोन सेक्स करने लगे। जब भी वह मेरी चूत मारता है तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है।

Saturday, December 22, 2018

शादी का मंडप और चुदाई

दोस्तो, मैं सविता सिंह …
आपने मेरी सेक्स कहानी
शादी में चूत चुदवा कर आई मैं
पढ़ी रहे हैं कि कैसे राजस्थान के एक गाँव में मैं अपने पति के साथ गई और वहाँ मैंने एक बिल्कुल ही अंजान आदमी से एक नहीं कई बार सेक्स किया और बार बार सेक्स किया।
मेरा सबसे यादगार सेक्स तब हुआ जब एक तरफ मंडप में लड़की फेरे ले रही थी, और दूसरी तरफ मैं अपनी चुदाई करवा रही थी, उसी गैर मर्द शेर सिंह से।
कैसे? लीजिये पढ़िये:
अगले दिन शादी थी, तो सब तरफ चहल पहल ज़्यादा थी। सुबह से न मेरे पति, न शेर सिंह कोई भी नहीं दिखा। मैं पहले तो सुबह तैयार हुई, मगर दोपहर तक शेर सिंह का कोई पता नहीं। अब उसकी बीवी वहीं थी, मगर उससे भी नहीं पूछ सकती थी।
लोग आए और उन्होंने दोपहर के बाद मंडप भी सजा दिया। शाम के 5 बज गए थे, वैसे तो फेरे रात के 1 बजे के बाद थे, मगर फिर भी घर में औरतों ने शोर मचा रखा था।
मैं एक तरफ बैठी सब देख रही थी, सुन रही थी और जल भुन रही थी कि साला मेरा कोई इंतजाम ही नहीं हो रहा।
इंतज़ार करते करते जब मैं थक गई तो मैं और चंदा दोनों कमरे में बैठी थी, तभी उसकी ब्यूटीशियन आ गई, जिसने चंदा को तैयार करना था, उसने चंदा को तैयार किया तो साथ में मुझे भी मेकअप करके सजा दिया।
मगर दिक्कत यह हुई कि मुझे बहुत से औरतों ने ये कॉम्प्लिमेंट दिया कि मैं दुल्हन से भी ज़्यादा सुंदर लग रही हूँ। मेरे आसपास से जो भी मर्द गुज़रे, उनकी आँखों में भी मेरे रूप के लिए मूक प्रशंसा थी, कुछ एक आँखों में तो मैंने कामुकता भी महसूस करी, जैसे कह रहे हों ‘आज अगर ये मिल जाए तो साली की फाड़ कर रख दूँ।’
मेरे पति जब मुझसे मिले तो उन्होंने भी कहा- आज तो बहुत गजब ढा रही हो, लगता है आज सुहागरात मनानी ही पड़ेगी।
उनका मतलब साफ था कि बहुत जल्द वो मुझसे सेक्स करेंगे.
मगर क्या मैं भी उनसे सेक्स करने को उतावली थी?
मेरा जवाब था, बिल्कुल भी नहीं!
मैं तो शेर सिंह को खोज रही थी, वो मिल जाए और अपने खुरदुरे लंड से मेरी काम पिपासा बुझाये।
कुछ देर बाद वो भी दिख गया, सफ़ेद शेरवानी, और चकाचक सफ़ेद कुर्ता पाजामा, सर सुर्ख पगड़ी, लंबा सा लंड आगे को छोड़ा हुआ। अपने कद काठी और बड़ी बड़ी मूँछों के कारण वो पूरा कोई रजवाड़े का मालिक लग रहा था।
जब उसने मुझे देखा तो इशारे से एक तरफ बुलाया। मैं गई तो बोला- सविता जी, लगता है आप मेरा तलाक करवा कर ही दम लोगी।
मैं उसका आशय समझ तो गई, पर अंजान बन कर बोली- क्यों क्या हुआ, आपकी पत्नी को हमारा पता चल गया क्या?
वो हंस कर बोला- अरे नहीं, आप आज इतनी सुंदर लग रही हैं कि दिल करता है, अपनी पत्नी को तलाक दे कर आपसे ही शादी कर लूँ।
मैंने कहा- तो देर किस बात की है, शादी का मंडप तो सजा ही हुआ है, कर लेते हैं शादी!
वो मेरी आँखों में गहरा झांक कर बोला- क्या तुम छोड़ सकती हो अपने पति को?
बेशक ये मेरे लिए मुश्किल था, मगर मैं झूठ ही कह दिया- हाँ, छोड़ दूँगी।
उसके चेहरे पर जैसे खुशी, परेशानी और ना जाने क्या क्या भाव उभरे।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोला- आपने धर्म संकट में डाल दिया। सच में सविता जी, मैं आपसे बहुत प्यार करने लगा हूँ, अब आपके बिना नहीं रह सकता। चलो देखता हूँ, अगर मेरा जुगाड़ फिट बैठा तो मैं अपनी पत्नी को छोड़ दूँगा।
मैं उसके विचार सुन कर थोड़ा विचलित हुई- अरे अरे, शेर सिंह जी, इतनी जल्दी क्या है, अभी देखते हैं, हमारा रिश्ता और कितना आगे बढ़ता है, उसके बाद सोच लेंगे। आप भी यही हैं, मैं भी यहीं हूँ।
वो परेशान हो कर बोला- क्या खाक यहीं हो, आपके पति ने परसों वापिस जाने का प्रोग्राम फिक्स कर लिया, मेरे सामने अपने ताऊजी से बात कर रहा था। परसों आप चली जाओगी, फिर क्या बात होगी हमारी?
मैंने कहा- पर अभी तो परसों जाना है न, परसों तक तो हम अपने इस प्यार भरे रिश्ते का मज़ा ले सकते हैं।
वो बोला- तो ठीक है, आप भी आज दुल्हन बनी हैं, मैं भी आज पूरा सजधज कर आया हूँ, तो आज हम सबके होते हुये प्यार करेंगे।
मैंने कहा- वो कैसे?
वो बोला- बता दूँगा, बस मेरे इशारे का इंतज़ार करना।
उसके बाद हम सब शादी में मसरूफ़ हो गए, मैं चंदा के साथ उसकी बेस्ट फ्रेंड का रोल निभा रही थी, मगर हर कोई दुल्हन को छोड़ मुझे ही घूर रहा था, क्या औरत क्या मर्द, क्या बच्चा क्या बूढ़ा। रात के 12 बज कर 50 मिनट का फेरों का टाईम था। घूमते फिरते, नाचते गाते, खाते पीते, बड़ी मुश्किल से शुभ समय आया। जब दूल्हा दुल्हन विवाह मंडप में बैठ गए और पंडित ने मंत्र- उच्चारण शुरू कर दिया तो शेर सिंह ने मुझे इशारा किया। मैं भी चुपके से उठ कर चल दी।
वो मुझे अपने पीछे पीछे सीढ़ियाँ चढ़ा कर घर की बिल्कुल ऊपर वाली छत पर ले गया। वहाँ से नीचे सारा विवाह मंडप, सभी लोग दिख रहे थे।
ऊपर ले जा कर शेर सिंह बोला- अब पंडित के मंत्रोउच्चार के साथ हम भी फेरे लेंगे।
मैंने कहा- तो क्या हम चोरी से शादी करेंगे, घर वालों की मर्ज़ी के खिलाफ?
वो बोला- हाँ, और जब सही वक़्त आएगे, तो सबके सामने भी शादी करेंगे।
मैंने कहा- शेर सिंह जी, आप तो सच में मेरे दीवाने हो गए हो।
उसने मुझे बांहों में कस लिया और बोला- सविता जी, आप नहीं जानती कि मैं आपसे कितना प्यार करता हूँ, अगर जान भी देनी पड़ी आपके लिए तो दे दूँगा।
बेशक मेरे मन में शेर सिंह के लिए ऐसी कोई प्रेम प्यार की भावना नहीं थी क्योंकि मैं तो सिर्फ उसके सेक्स के रिश्ते तक ही खुद को सीमित रखा था। मगर वही था जो इस रिश्ते को चूत की गहराई से दिल की गहराई तक ले गया था।
और वैसे यहाँ ऊपर छत पर भी हमें किसने देखना था, तो जैसे जैसे नीचे पंडित मंत्र पढ़ पढ़ कर चंदा की शादी करवाता रहा, वैसे वैसे ही मैंने और शेर सिंह ने पूरे सात फेरे लिए, उसने अपनी तरफ से लाया हुआ मंगलसूत्र भी मेरे गले में डाला, मेरी मांग में सिंदूर भी भरा।
एक तरह से देखा जाए तो मैं उसकी पत्नी हो चुकी थी।
फेरों के बाद और कोई रस्म हमने नहीं की, जबकि नीचे मंडप में बहुत सी रस्में चल रही थी। मैंने भी नीचे झुक कर शेर सिंह के पाँव छूये, उसने मुझे उठा कर अपने सीने से लगा लिया।
कितनी देर वो मुझे अपने सीने से चिपकाए खड़ा रहा।
मैंने ही कुछ देर बाद उससे पूछा- क्या हुआ जी?
वो बोला- कुछ नहीं, बस अपनी किस्मत को देख रहा था कि कितनी सुंदर पत्नी मिली है मुझको!
मैंने अपना चेहरा उठा कर उसकी ओर देखा तो उसने मेरे होंटों को चूम लिया। एक, दो, तीन, चार और फिर तो उसने जैसे झड़ी ही लगा दी चुंबनों की।
मैं भी खुश थी, मैं भी चुंबनों में उसका साथ देने लगी।
चूमते चूमते मेरे तो बदन में हलचल होने लगी और मैंने महसूस किया कि शेर सिंह का पाजामा भी टाईट होने लगा था। मैंने ही हाथ आगे बढ़ाया और पाजामे में ही उसका लंड पकड़ लिया।
उसने मेरी आँखों में देखा और पूछा- चाहिए?
मैंने हाँ में सर हिलाया।
उसने मेरे लहंगे के ऊपर से ही मेरे दोनों चूतड़ सहलाए और मुझे घुमा दिया, मेरा चेहरा पंडाल की तरफ कर दिया। मैंने छतरी के बने हुये दो खंबों का सहारा लिया तो शेर सिंह ने पीछे से मेरे सारा घागरा उठा कर मेरी कमर पे रख दिया। मैं थोड़ा सा और आगे को झुक गई ताकि मेरी गांड और शेर सिंह की तरफ हो जाए, और मैं अपनी टाँगें भी खोल कर खड़ी हो गई।
शेर सिंह ने अपना पायजामे का नाड़ा खोला, और अपना पाजामा और चड्डी नीचे को सरका दी, अपने लंड पर हल्का सा थूक लगाया और पीछे से मेरी चूत में धकेल दिया। मोटा खुरदुरा सा टोपा मेरी चूत में थोड़ा अटक कर घुसा, मुझे हल्की से तकलीफ हुई, मगर फिर भी अच्छा लगा।
ऊपर से मैं पूरी शादी को देख रही थी, मैंने देखा मेरे पति भी वहीं घूम रहे हैं, एक दो औरतों से जैसे उन्होंने मेरे बारे में पूछा, मैंने ऊपर से चिल्ला कर कहा- अजी मैं यहाँ हूँ, ऊपर!
मगर शादी के शोर शराबे में चौथी मंज़िल की आवाज़ नीचे कहाँ सुनती।
शेर सिंह मुझे चोदता रहा और मैं ऊपर से यूं ही अपनी मज़ाक में अपने पति को और बाकी सबको शादी में घूमते फिरते देखती रही। मेरे लिए शादी नहीं, सेक्स महत्त्वपूर्ण था, और शेर सिंह नहीं उसका लंड महत्त्वपूर्ण था।
शेर सिंह मुझे बड़े अच्छे से चोदा और अपना माल मेरी चूत के अंदर ही गिराया। जब वो झड़ गया तो हम चुपचाप नीचे उतर आए।
मगर रास्ते में मैंने शेर सिंह को कह दिया- अभी एक बार से मेरा मन नहीं भरा है, मुझे ये सब फिर से चाहिए.
मैंने कहा तो शेर सिंह बोला- चिंता मत करो मेरी जान, आज सारी रात मैं तुम्हारे साथ हूँ, जितनी बार कहोगी, मैं उतनी बार तुम्हें संतुष्ट करूंगा।
अभी मैं एक बार और सेक्स करना चाहती थी, मगर शेर सिंह नहीं माना तो मैं मजबूरन उसके साथ नीचे आ गई। उसके बाद मैं अपने पति से मिली, तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया- अरे कहाँ चली गई थी मेरी जान, मैं तो बहुत मिस कर रहा था तुम्हें!
उन्होंने मुझे गले से लगा कर मुझे कसा, तो शेर सिंह के वीर्य मेरी चूत से चू कर मेरे घुटनों तक जाता मुझे महसूस हुआ। मैंने भी उन्हें थोड़ा कस कर आलिंगन किया और बोली- अरे क्या बताऊँ, मुझे तो चंदा के काम से फुर्सत नहीं मिल रही, कभी ये करो, कभी वो करो।
मेरे पति बोले- तो यार फ्री कब होगी, मेरा दिल कर रहा है, तुम्हें किसी अकेली जगह लेजा कर खूब प्यार करूँ।
मैंने कहा- रुको एक मिनट मैं आती हूँ।
अपने पति को छोड़ कर मैं सीधी बाथरूम में गई, पहले मैंने अपनी चूत को अच्छे से पानी से धोया और फिर कपड़े से सुखाया। शेर सिंह के पहनाया मंगल सूत्र उतार कर बाथरूम में ही रख दिया। और फिर से फ्रेश होकर बाहर आई।
मैंने अपने पति का हाथ पकड़ा और उन्हें वहीं ऊपर शिखर पर ले गई। वहाँ जाकर मैंने उनको गले से लगा लिया। सबके बीच, सबसे दूर ऐसी जगह देख कर मेरे पति बहुत खुश हुये- अरे वाह, क्या जगह ढूँढी है, यहाँ तो हम सबको देख सकते हैं पर हमे कोई नहीं देख सकता।
मगर मैंने बात करने की बजाए अपना घागरा ऊपर उठाया, और फिर से उसी जगह उसी पोज में आ गई, मेरे पति ने मेरी हालत देखी, तो बोले- लगता है, तुम्हें भी बड़ी इच्छा हो रही थी सेक्स की?
और उन्होंने भी अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया।
कोई 5 मिनट की चुदाई चली, मगर इस चुदाई में वो मज़ा नहीं था जो शेर सिंह की चुदाई में था। पति को भी सेक्स किए काफी दिन हो गए थे, तो बस 5 मिनट में ही वो अपनी सारी गर्मी मेरी चूत में ही निकाल गए।
मुझे बेशक इस सेक्स से कोई मज़ा नहीं आया, मगर हाँ, मेरी चूत की खुजली को थोड़ा आराम आया।
उसके बाद हम दोनों नीचे आ गए।
करीब सुबह चार बजे मुझे शेर सिंह फिर से वहीं ऊपर ले गया, और इस बार उसने करीब 35 मिनट लगातार मुझे नीचे लेटा कर मुझे चोदा। क्या मस्त और क्या खूब चुदाई की मेरी। मेरा 4 बार पानी गिरा, मगर वो फिर भी डटा रहा।
करीब 35 मिनट बाद जब वो थक कर झड़ा तो मेरी चूत को पूरा भर दिया उसने अपने माल से। मैं नीचे लेटी पसीने पसीने हो रही थी, उसकी तो हालत ही बहुत बिगड़ गई थी, पगड़ी उतार दी, कपड़े उतार दिये, सांस तेज़, दिल की धड़कन तेज़।
झड़ने के बाद वो तो जैसे गिर ही गया।
मैं उठी और अपने आप को ठीक करके वापिस नीचे आ गई। उसके बाद मैं चंदा की विदाई में शामिल हो गई। फिर करीब 6 बजे अपने कमरे में सोने चली गई।
दोपहर के 12 बजे मेरे पति ने मुझे जगाया, मेरा सारा बदन जैसे टूट रहा था। उसके बाद चाय पीकर फ्रेश हो कर मैं फिर से तैयार हो कर परिवार में घुलमिल गई।
अगले दिन शेर सिंह नहीं मिला. जिस दिन हम वापिस आने वाले थे, वो मिला, अकेले में लेजा कर मुझसे बोला- आज आ जा रही हैं?
मैंने कहा- हाँ, जाना तो पड़ेगा।
वो बोला- फिर मिलोगी?
मैंने कहा- अब मिले बिना रहा भी न जाएगा।
वो बोला- ठीक है, कभी मौका लगा तो मैं भी मिलने आऊँगा आपसे।
फिर मुझे अपने गले से लगाया और कहा- आज जाने से पहले एक आखिरी बार!
कहते हुये उसने अपनी पैन्ट खोली, मुझे लगा शायद फिर से सेक्स करेगा, मैंने कहा- नहीं शेर सिंह जी, इतना टाईम नहीं है मेरे पास!
वो बोला- अरे नहीं, चोदना नहीं है, सिर्फ थोड़ा सा चूस जाओ।
मैंने नीचे बैठ कर 1 मिनट उसका लंड चूसा। उसका काला, नाड़ीदार, खुरदुरा सा लंड फिर से खड़ा हो गया। मेरा दिल तो किया के उसका लंड चूसती ही रहूँ और आखरी बार फिर से एक बार इस से चुदवा कर जाऊँ, मगर ये संभव नहीं था।
मैं उठी और खुद ही एक बार शेर सिंह के होंठो को चूमा और दौड़ कर बाहर आ गई। शेर सिंह मेरे पीछे नहीं आया।
मैं अपने घर पहुंची, उसके बाद फिर से वही रूटीन ज़िंदगी। रात को पति से सेक्स, दिन में चाचाजी से सेक्स। मगर शेर सिंह शेर सिंह था, उसके जैसे मज़ा, और कोई नहीं दे सका मुझे।
savsingh775@gmail.com

मौसी के लड़के से बिंदास चुदी

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रेखा है. मैं एक साधारण परिवार से हूँ. मैं बहुत ही ज्यादा कामुक हूँ और किसी से चुदवा लेती हूँ. मुझे शुरू से ही चुदवाने का बहुत शौक है. मैं हमेशा अन्तर्वासना की कहानी पढ़ती रहती हूँ और मुझे इधर प्रकाशित हर तरह की सेक्स से भरपूर चुदाई की कहानी पढ़ना बहुत अच्छा लगता है. इन चुदाई की सेक्स स्टोरी को पढ़ कर मेरी चुदास बहुत बढ़ जाती है. मैं आज आप सबको अपने एक शारीरिक सम्बन्ध के बारे में बताने जा रही हूँ कि कैसे मैंने अपनी चुदास को शांत करने के लिए अपनी मौसी के लड़के से चुदवा लिया. ये सच्ची चुदाई की कहानी मेरी असली आपबीती है.
मेरे घर में सब लोग एक साथ रहते हैं. मैं अपने घर की बाक़ी की महिलाओं के साथ खुद भी घर का काम करती हूँ. इस काम में मेरे घर की भाभी लोग भी मेरी सहायता करती हैं. घर के सभी काम करने से मेरा शरीर काफी फुर्तीला हो गया है. मैं दिखने में भी बहुत सेक्सी हूँ और बहुत मजबूत इरादे वाली लड़की हूँ. मेरी चूची और गांड भी बिल्कुल तने हुए आकार में हैं.. घर के काम करने से मेरी चूची एकदम टाइट रहती हैं.
मेरे उठे हुए मम्मे और मेरी तोप सी तनी हुई गांड किसी भी मर्द को मेरी ओर आकृष्ट करने के लिए पर्याप्त हैं. मैं कुल मिलकर बहुत मेहनती लड़की हूँ और मस्ती से चूत चुदवाने वाली भी हूँ. मैंने हाल ही में अपनी मौसी के लड़के से अपने शारीरिक सम्बन्ध बनाए हैं. उसी कहानी को आज मैं आपको बताने जा रही हूँ.
मेरी मौसी का लड़का चिराग अपनी पढ़ाई के चलते हमारे ही घर में रहने आ गया था. हम लोगों में मजाक होता रहता था. मैं थोड़ी खुली विचारधारा वाली लड़की हूँ और हर विषय पर खुलकर बातें कर लेती हूँ. वो जब भी मुझे छेड़ता था.. तो मैं उसकी गर्लफ्रेंड को गाली दे देती थी. एक दिन उसने मुझे मजाक में ही अपनी गर्लफ्रेंड बनाने के लिए मुझसे कहा कि वो मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहता है.
मैंने उस वक्त तो उसकी बात को मजाक में ले ली थी. लेकिन मुझे क्या मालूम था कि वो मुझसे सही में ऐसी दोस्ती करना चाहता था.
शुरुआत यूं हुई कि चिराग कभी कभी मेरा मोबाइल चला लेता था. मैं एक लड़के से मोबाइल पर बात करती थी. उसको ये बात मेरी कॉल रिकॉर्डिंग से पता चल गयी. वो मुझसे पूछने लगा कि मैं किससे बात करती हूँ?
मैंने उसको कुछ नहीं बताया.
उस दिन से वो मेरे ऊपर निगरानी रखने लगा. उसने बाद में मुझे बताया कि वो मुझे पसंद करता है. उसकी बात सुनकर मैं उसको दूसरी नजर से देखने लगी.
दूसरी तरफ संयोग से कुछ दिन बाद मैंने उस बाहरी लड़के से मोबाइल पर बात करना बंद कर दिया क्योंकि हम दोनों में झगड़ा हो गया था.
मैं और चिराग हम दोनों लोग पहले से ही एक दूसरे से बहुत बात करते थे. लेकिन अब हम दोनों लोग के बीच गर्लफ्रेंड ब्वॉयफ्रेंड की तरह बातें होने लगीं.
मैं जब घर का काम करती थी, तो मेरी मौसी का लड़का मेरे पीछे खड़ा होकर मुझसे बात करता था. वो मेरी खूबसूरती का दीवाना तो पहले ही हो गया था. अब वो मेरी खूबसूरती का तारीफ करने लगा था. उसकी इस तरह की बातें मुझे मस्त कर देती थीं. मैं भी उसको कुछ भी कहने की छूट देने लगी थी.
मेरी तरफ से कोई भी विरोध न पा कर अब वो मुझे किसी का किसी बहाने से मुझे टच भी करने लगा था. मैं उसकी हरकतों से अपनी चुदास को हवा देने लगी थी.
हमारे घर में रात को सब लोग जल्दी ही सो जाते थे तो मैं और चिराग, हम दोनों लोग देर रात तक एक दूसरे से बात करते रहते थे. हम दोनों लोग घर के अन्य अभी लोगों से थोड़ी दूरी पर ही सोते थे. सभी के अलग अलग बिस्तर थे.
मैं जब देर तक बात करने के बाद सो जाती थी.. तो मेरी चिराग मेरी गांड को देखता रहता था.. क्योंकि मैं उसकी तरफ गांड करके सोती थी.
चिराग इस तरह मेरे करीब आने लगा था. जब मैं ब्रा और पेंटी छत पर सुखाने के लिए जाती थी, तो वो मुझे ब्रा पेंटी को हवा में हिलाकर सुखाने के डालते हुए देख कर मुस्कुराता था.
इन सब वजहों से हम दोनों लोग के बीच कुछ चलने लगा था, जिसका अहसास हम दोनों करने लगे थे और एक दूसरे के साथ काफी हद तक घुल मिल गए थे.
चिराग ने पहले भी अपनी गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स किया था और मैं भी अपने ब्वॉयफ्रेंड से चुदी थी. हम दोनों लोग सेक्स के बारे में सब कुछ जानते थे.
मेरी मौसी का लड़का चिराग कभी कभी मुझे अपनी बाइक से बाजार लेकर जाने के लिए कहता था. तो मैं भी उसके साथ बाइक पर बैठ कर बाजार चली जाती थी. जब मैं उसके साथ बाइक पर जाती थी.. तो मैं दोनों तरफ टांगें डाल कर बाइक पर बैठ जाती थी, जिससे मेरी चूचियां उसकी पीठ से टकरा कर रगड़ जाती थीं वो भी मेरी चूचियों का मजा लेने के लिए बार बार अपनी बाइक के ब्रेक मार कर मुझसे चूची रगड़ने का सुख ले लेता था. उसकी इन हरकतों से मैं भी सेक्स के मूड में आ जाती थी.
फिर एक दिन चिराग ने मुझे हग करते हुए मुझसे कहा कि वो मुझे पसंद करता है. उसने जब मुझे अपने सीने से लगाया तो मैं भी गर्म हो उठी. हम दोनों की नजरें एक दूसरे से मिल रही थीं. तभी उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ धर के किस कर दिया. मैं भी उससे चिपक कर चुम्मी का मजा लेने लगी.
इसके बाद चिराग मुझे बहुत बार अपने साथ बाहर घुमाने के लिए ले गया. हम दोनों लोग अपने गांव से दूर शहर में कई सुनसान जगहों पर घूमने जाते थे और किसी पार्क में बैठकर एक दूसरे से सेक्स की बातें करते रहते थे. मेरा घर थोड़ा गाँव में था, इसलिए शहर में हम लोग कोई जानता नहीं था. तो हम लोग आराम से एक दूसरे की बांहों में हाथ डालकर घूमते थे.
अब हम दोनों लोग ब्वॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड की तरह रहते थे. मेरी मौसी का लड़का अब अक्सर मेरी मुलायम चूचों को दबा देता था और मेरी गांड को भी दबा कर सहला देता था. हम लोगों के बीच अब जिस्मानी सम्बन्ध बनने की राह तैयार होने लगी थी, पर मौका और जगह की कमी के कारण चुदाई में देरी हो रही थी.
एक दिन रात को सब लोग सो गए थे तो मैं और चिराग हम दोनों लोग अकेले में एक दूसरे से बात कर रहे थे. वो मेरी चूची को दबा रहा था और मेरे होंठों को चूस रहा था. हम दोनों ने ये सब बहुत देर तक किया और उसके बाद हम दोनों अलग होकर सोने चले गए.
इसी तरह से ये सब हम दोनों लोग के बीच आए दिन ये सब चलने लगा था और इसी वजह से हम दोनों के बीच और भी नजदीकियां हो गयी थीं. अब लगभग हर रात को हम दोनों एक दूसरे को किस करते थे. वो मेरे मम्मों को मसलता था और मैं उसके लंड को पकड़ कर सहला देती थी. चूंकि घर में होने के कारण ये सब कपड़ों के ऊपर से हो पाता था.
हम दोनों में एक दूसरे के साथ चुदाई की कसक दिनों दिन बढ़ने लगी थी. अब मैं और चिराग एक दूसरे के इतने करीब हो गए थे कि हम दोनों साथ में रात को अकेले में खाना खाते थे. एक दूसरे को खिलाते थे, वो मुझे अपने मुँह का निवाला मेरे मुँह में डाल देता था और मैं अपने मुँह में पानी भर के उसके मुँह में डाल देती थी. ये सब हमारे बढ़ते प्यार की निशानियां थीं.
एक दिन मेरी मौसी के लड़के ने रात को मुझे अकेले में बुलाया और मेरी चूची को चूसने लगा. मैं भी गर्म होने लगी और वो भी गर्म हो गया था. हम दोनों लोग को सेक्स करने का मन कर रहा था. लेकिन हम दोनों लोग को डर भी लग रहा था कि घर में सब लोग सो रहे हैं और कोई ने देख लिया तो हम दोनों को बहुत डांट पड़ेगी. इससे हम दोनों की बदनामी भी होगी. कुछ देर अपनी चूची चुसवाने के बाद मैं मौसी के लड़के को मना करके सोने चली गयी.
फिर मौसम बदला और गर्मी के दिन आ गए. एक दिन रात को मैं अकेले घर में सो रही थी और सब लोग बाहर सो रहे थे. मेरी मौसी का लड़का चिराग अन्दर आया और मेरे साथ ही मेरे बिस्तर पर आ गया. वो मेरी चूची को दबाने लगा. मैं सिसकारियां लेने लगी और मुझे सेक्स करने का मन करने लगा. मैं भी उसका साथ देने लगी और हम दोनों लोग एक दूसरे को किस करने लगे.
मैं आज अन्दर अकेले सो रही थी इसलिए मुझे डर भी नहीं लग रहा था कि कोई हमें देखेगा क्योंकि घर के सब लोग बाहर सो रहे थे.
हम दोनों लोग एक दूसरे को किस करने लगे. चिराग ने मेरे मम्मों को ब्रा में से निकाल दिया और मेरे मम्मों को चूसने लगा. वो एक हाथ से मेरे एक मम्मे को दबाने लगा और दूसरे को चूसने लगा. उसने मेरी ब्रा में से मेरे दोनों लोग मम्मों को निकाल लिया और मेरे मम्मों को चूसने लगा. जिससे मैं गर्म होने लगी. उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और मेरी पेंटी को निकाल फेंका. वो मेरी नंगी चूत को सहलाने लगा. मेरी चूत पर थोड़े से बाल थे. मेरी चूत गर्म हो चुकी थी और मेरी चूत से पानी आ रहा था.
चिराग मेरी चूत में उंगली करने लगा, इससे मुझे मजा आने लगा. वो मेरी चूत में उंगली कर रहा था और मेरी चूची चूस रहा था. मैं गर्म हो रही थी और मेरी चूत में से पानी भलभला कर निकलने लगा था.
मैं कामुक सिसकारियां लेने लगी- आह आह आह ओह्ह ओह्ह.
हम दोनों सेक्स करने के लिए बेचैन हो गए थे. उसने मेरी चूत में दस मिनट तक उंगली की और इतने में मेरी चूत ने दो बार पानी छोड़ दिया. उसके बाद वो मुझे अपना लंड चूसने के लिए बोलने लगा. मैं उसको लंड चुसाई के लिए मना कर दिया. उसने कुछ नहीं कहा और वो मेरी चूत को चाटने लगा. मेरी चूत गीली हो गयी. उसको मेरी चूत चाटने में अच्छा लग रहा था और वो मेरी चूत में जीभ के साथ उंगली भी कर रहा था.. वो मेरी चूत के दाने को भी चाट रहा था.
मैं एकदम से चुदासी हो गई और उससे लंड डाल कर चुदाई के लिए कहने लगी.
मेरी चूत का पानी नमकीन था और मेरी मौसी का लड़का मेरी चूत को चाट कर मजा लिए जा रहा था. कुछ देर बाद वो मेरी चूत को चाट कर अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा और मुझे लगने लगा कि बस ये जल्दी से लंड पेल कर चुदाई कर दे.
मैंने टांगें फैला कर उसे इशारा किया और अपनी गांड उठा कर उसके लंड को लीलने की कोशिश की तो उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. मुझे मानो चैन पड़ गया था. हालांकि काफी दिन बाद चुदाई के कारण मेरी हल्की सी आह निकल गई, लेकिन चूत एकदम चिकनी और लिसलिसी होने के कारण उसका लंड सट से मेरी चूत घुसता चला गया.
चिराग अपना लंड डाल मुझे चोदने लगा. हम दोनों पूरी मस्ती में सेक्स कर रहे थे और साथ ही एक दूसरे को किस भी कर रहे थे. कुछ ही देर में हम दोनों के बीच में चरम जैसी स्थिति आ गई और हम एक दूसरे को किस करते हुए जल्दी जल्दी चुदाई करने लगे. वो मुझे किसी मशीन की तरह जल्दी जल्दी चोदने लगा. उसकी धकापेल चुदाई के कारण मेरी चूचियां हिल रही थीं.. मेरी कामुक सिसकारियां भी तेज हो गयी थीं. हम दोनों बीच बीच में थोड़ी देर तक एक दूसरे को किस भी कर रहे थे. फिर सेक्स करते करते हम दोनों झड़ गए और हमारा पानी एक साथ निकल गया.
चुदाई के बाद हम दोनों शिथिल अवस्था में पड़े रहे.. थोड़ी देर आराम किया.
फिर हमने अपना अपना पानी साफ़ किया और उसके बाद एक दूसरे को किस करने लगे. उसने मुझे अपने ऊपर सुला लिया और मुझे बहुत देर तक किस किया. कुछ ही देर में हम दोनों एक बार फिर से गर्म हो गए और एक दूसरे को किस करने लगे. कुछ ही देर में फिर से चुदास भड़क गई और उसने दुबारा मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और हम लोग फिर से चुदाई करने लगे. दस धक्के के बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मैं बिस्तर पर ही चौपाया होकर घोड़ी सी बन गयी थी. वो मेरी गांड तरफ से लंड को मेरी चूत में पेल कर मेरे बाल पकड़ कर मेरी घुड़सवारी करने लगा. वो ऊपर से मेरी चूत को चोद रहा था और नीचे मेरी चूचियां बुरी तरह से हिल रही थीं. उसके लंड के धक्के से मेरी चूत में पानी आने लगा और मैं चुदासी आवाज निकालते हुए चुदाई का मजा लेने लगी. हम दोनों मदहोश होकर सेक्स कर रहे थे और गर्मी के कारण हम दोनों के शरीर से पसीना निकल रहा था.
कुछ बीस मिनट तक हम दोनों लोग सेक्स करते करते अब झड़ने वाले थे.
तभी उसने अपना लंड निकाल दिया और मुझे पलट कर मेरे ऊपर मिशनरी पोज में चढ़ गया. अब वो मेरी चूची को चूसने लगा और मेरी चूत में अपना लंड डाल कर मुझे चोदने लगा. हम दोनों ने सेक्स पोजीशन को बदल लिया था और अब मैं टांगें उठा कर उसका लंड अपनी चूत में लेने लगी थी. इस पोज में भी हम दोनों लोग जबरदस्त सेक्स करने लगे थे. वो मेरी एक चूची को चूस रहा था और दूसरी को आटा सी गूँथ रहा था. साथ ही वो अपना लंड मेरी चूत में डाल कर मेरी चूत को चोद रहा था.
कुछ ही देर में हम दोनों लोग सेक्स करते करते झड़ गए. हम दोनों का एक बार फिर से साथ में ही पानी निकल गया. इस बार हम दोनों का बहुत सारा पानी निकला था.
झड़ने के बाद दो मिनट तक यूं ही एक दूसरे को चूमते रहने के हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहन लिए. मुझे चोदने के बाद वो बाहर सोने चला गया. मैं अपने बिस्तर पर उसके लंड को याद करते हुए लेटी रही थी. आज मुझे उससे चुदवाने के बाद बहुत अच्छा लग रहा था. मैं बहुत दिन के बाद इतने आराम से चुदी थी.
इसके बाद तो जब भी हम दोनों को मौका मिलता था.. तो हम दोनों सेक्स कर लेते थे.
मैं अपनी मौसी के बेटे चिराग अलावा भी अपने एक ब्वॉयफ्रेंड से चुदवाती थी.. लेकिन चिराग के बड़े लंड से चुदवाने में अच्छा लगता था. उसके साथ एक अच्छी बात ये भी थी कि हम दोनों लोग घर में ही बिना किसी डर के आराम से सेक्स कर लेते थे.
आप सबको मेरी चुदाई की कहानी कैसी लगी. प्लीज़ मुझे मेल करके बताएं. मैं आप सबके मेल का इंतजार करूँगी.

Sunday, December 16, 2018

चचेरे भाई की पत्नी को चोदा

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Thursday, December 13, 2018

मेरी मर्दानगी को देखकर मुझ पर मर मिटी

मेरा नाम सुरेंद्र है मैं पंजाब का रहने वाला हूं। मैं पंजाब में जिस जगह रहता हूं वहां से कॉलेज काफी दूर है। मुझे कॉलेज पढ़ने के लिए चंडीगढ़ आना पड़ता था लेकिन फिर भी मैंने अपनी पढ़ाई में पूरा ध्यान दिया और जब मेरी पढ़ाई पूरी हो गई तो उसके बाद मैंने कॉलेज से ही पीएसडी की। मैं उसके बाद कॉलेज में ही पढ़ाने लगा। एक बार मुझे बिहार के कॉलेज से पढ़ाने का ऑफर मिला। मैंने अपने पिताजी से इस बारे में बात की तो वह कहने लगे कि बेटा अगर तुम्हें अच्छी तनख्वाह मिल रही है तो तुम वहां चले जाओ। मैंने उनसे कहा वहां पर तो मुझे अच्छी तनख्वाह मिल रही है और मेरा एक दोस्त भी वहां पर पढा रहा है जो हमारे साथ ही कॉलेज में पढ़ाई करता था। मेरे पापा कहने लगे तो तुम भी वहां चले जाओ। मैंने भी सोचा कि चलो मैं वहां चले जाता हूं। मैं जब वहां पढ़ाने के लिए पहुंचा तो वहां का माहौल ही थोड़ा अजीब सा था। मुझे तो बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन मैंने सोचा कि चलो अच्छी तनख्वाह मिल रही है तो यहीं पढा लेता हूं।
मैं सबसे पहले जाकर अपने दोस्त से मिला। मेरे दोस्त का नाम मनजीत है। वह मुझे कहने लगा तुम भी यहां आ गए? मैंने उसे कहा हां यहां अच्छी तनख्वाह मिल रही है तो क्यों नहीं आता। मनजीत कहने लगा यहां का माहौल बिल्कुल भी ठीक नहीं है और कॉलेज में बड़ी ही गुंडागर्दी चलती है। यहां पर तो क्लास भी नहीं चलती। हम लोग तो सिर्फ नाम के ही कॉलेज जाते हैं। वहां ना तो बच्चे पढ़ने आते हैं और ना ही पढ़ाई की स्थिति यहां ठीक है। मैंने उसे कहा तो फिर यहां पढा कर क्या फायदा। वह कहने लगा अरे जब फ्री में तनख्वाह मिल रही है तो कहीं जाने की जरूरत क्या है। मैंने सोचा चलो कॉलेज की स्थिति देख ली जाए। मैं अगले दिन मनजीत के साथ कॉलेज चला गया। मैंने वहां जॉइनिंग कर लिया और मैंने वहां का माहौल देखा तो स्थिति बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी। वहां पर बड़ी ही बदमाशी थी। मैं पहले दिन तो वापस ही लौट आया और घर पर ही आराम करने लगा। उस दिन मनजीत और मैं साथ में बैठे हुए थे। मैंने मनजीत से पूछा कि तुम यहां अपना समय कैसे बिता लेते हो? वह कहने लगा बस घर पर ही बैठे रहते हैं और कॉलेज के जो भी प्रोफेसर हैं। उनसे ही बात कर के समय बिता लेते हैं।
अब मैं कॉलेज बढ़ाने के लिए जाने लगा लेकिन कॉलेज की स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं थी। मैं जब कॉलेज जाता तो वहां पर हमेशा कुछ ना कुछ समस्या हो जाती। कभी वहां किसी का पैर टूट जाता तो कभी किसी का सर फूट जाता। यही स्थिति बनी हुई थी। हर दिन वहां झगड़े होते और झगड़ो की वजह से कॉलेज बंद करना पड़ता। मैं एक दिन अपने क्लास में पढ़ा रहा था। क्लास में वैसे ही कम बच्चे जाते थे लेकिन उस दिन मैं जब क्लास में पढा रहा था तभी कॉलेज का छात्र नेता बड़े दबंग के साथ अंदर घुस आया। मैंने उसे कहा कि तुम इस तरीके से क्लास में मत आओ लेकिन वह मेरे साथ उलझ गया। उस वक्त पता नहीं मेरा पारा भी चढ़ा हुआ था। मैंने उसे कहा कि तुम कॉलेज के प्रोफेसर से इस तरीके से बात करोगे? जब उसने मेरे कॉलर को पकड़ा तो मैंने भी उसे एक जोरदार तमाचा लगा दिया। जैसे ही उसके कनपटी पर तमाचा लगा तो वह मुझे देख कर आग बबूला हो गया और मुझ पर वह हाथ उठाने की कोशिश करने लगा। मैंने भी उसकी क्लास के अंदर ही ऐसी धुनाई की। कि उसे भी छठी का दूध याद दिला दिया। जब उसकी धुनाई हो गई तो कॉलेज में बड़ा ही अफरा-तफरी मच गई कि कॉलेज के छात्र नेता पर हाथ उठा दिया गया है लेकिन मुझे नहीं पता था कि कॉलेज में इतना ज्यादा तमाशा बन जाएगा। मुझे भी मेरे सीनियरों ने बुला दिया और उस नेता को भी बुला दिया। वह बड़ी बत्तमीजी से बात कर रहा था। मैंने सर से कहा कि यदि मेरी इसमें कोई गलती है तो आप बच्चों से पूछ सकते हैं जो बच्चे उस वक्त क्लास में बैठे हुए थे। वह कहने लगे कि इसमें सर की कोई भी गलती नहीं है सर बिल्कुल ही निर्दोष हैं। उसके बाद तो जैसे मैं कॉलेज का हीरो ही बन गया था और मेरी क्लास में भी भीड़ बढ़ने लगी थी। मुझे भी अब अच्छा लगने लगा था कि मैं बच्चों को पढ़ाने लगा हूं।
मनजीत मुझे कॉलेज में मिला और कहने लगा कि अरे दोस्त तुम तो यहां पर हीरो ही बन गए। लगता है तुम्हारे हाथ पैरों में अभी पहले वाली जान बची है। तुमने भी कॉलेज में कम बदमाशी नहीं की थी। जब मनजीत ने मुझे यह बात कही तो मैंने उसे कहा अरे अब यह तुम रहने दो। पहले की बात कुछ और है। अब हम लोग यहां पर पढ़ाने के लिए आए हैं। यहां पर हम लोग कोई गुंडागर्दी थोड़ी करने आए हैं। उस दिन उस लड़के की गलती थी इसलिए मैंने उसकी धुनाई कर दी। उसके बाद से वह छात्र नेता मुझे देख कर बहुत डरने लगा और मेरे पास भी नहीं आता था। कॉलेज में भी अब बच्चे सही से पढ़ने लगे थे। मेरी क्लास में तो सारे बच्चे आते थे लेकिन कॉलेज का माहौल फिर भी खराब था। मुझे लगा कि मुझे थोड़ी बहुत स्थिति सुधारने का अवसर मिला है तो मैं इस मौके को ना ही गवाऊं तो अच्छा होगा इसलिए मुझसे जितना होता मैं अपनी क्लास पढ़ाता था। हमारे कॉलेज में समीरा मैडम हैं। वह उस दिन के बाद मेरे ऊपर फ्लैट हो गई थी और हमेशा मुझ पर चांस मारने की कोशिश करती लेकिन मैंने उन्हें कभी मौका नहीं दिया। मंजीत मुझे हमेशा कहता समीरा मैडम तो तुम पर पूरी तरीके से फिदा है तुम क्यों उनकी बातों का जवाब नहीं देती। मैं हमेशा ही उन्हें टालने की कोशिश करता।
एक दिन वह कॉलेज में बहुत पटाखा बनकर आई हुई थी उस दिन उन्हें देखकर मेरा भी मन फिसल गया और मैंने उनसे बात कर ली। मैंने उनसे बात की तो जैसे उन्होंने मुझे अपना पूरा बदन ही सौंप दिया हो। वह मुझे कहने लगी सर आप तो बड़े ही जोशीले व्यक्ति हो। मैंने उन्हें कहा आपको मेरे अंदर जोश कहां से दिखता है। वह कहने लगी बस आपकी मर्दानगी को देखकर मुझे आपका जोश का एहसास हो गया। जब उन्होंने यह बात कही तो मैं समझ गया वह मुझसे अपनी चूत मरवाना चाहती है। हुआ भी बिल्कुल ऐसा ही वह मुझे अपने साथ अपने घर ले गई। उस दिन उनके घर पर कोई भी नहीं था। जब उन्होंने अपने कपड़े खोले तो मैं उनके बदन को देखकर खुश हो गया उनकी चूतडो को देखकर मेरा पूरा मूड खराब हो गया। मैंने भी उनके पूरे बदन का रसपान किया जब मैं उनके स्तनों को चूसता तो उनकी योनि से पानी का रिसाव होने लगता उनकी योनि से गर्म पानी बाहर निकाल रहा था। जब मैंने अपने लंड को उनकी योनि पर लगाया तो वह मुझे कहने लगी आपका लंड बहुत गर्म है। मैंने उन्हें कहा आपकी योनि से भी कम गर्म पानी बाहर नहीं आ रहा। यह कहते हुए मैंने उनकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया जैसे ही मेरा मोटा लंड उनकी योनि के अंदर घुसा तो वह उत्तेजित हो गई थी और उनके मुंह से चीख निकल गई। मैंने धीरे धीरे अपने लंड को अंदर करना शुरू किया। उनकी योनि से पानी लगातार बाहर की तरफ को निकलने लगा जिससे कि उनकी योनि चिकनी हो गई और उनकी योनि में लंड डालने में आसानी होने लगी। वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर रही थी और मैं भी उन्हें उतने ही तेज गति से धक्के मार रहा था। मैंने उन्हें तेज तेज धक्के मारे उनकी योनि से उतना ज्यादा तरल पदार्थ बाहर निकलता। मैं समझ गया यह झड़ चुकी हैं। मैंने भी उनके साथ 5 मिनट तक संभोग किया और उन 5 मिनटो के दौरान मैंने उन्हें 300 झटके मारे लेकिन मुझे उनकी चूत मारकर बहुत मजा आया। जैसे ही मेरा वीर्य उनकी योनि के अंदर गिरा तो वह बहुत खुश हो गई। मेरा मन उन्हें देखकर नहीं भरा था मैंने दोबारा से उनकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया जैसे ही मेरा कड़क लंड उनकी योनि में दोबारा प्रवेश हुआ तो वह दोबारा से चिल्ला उठी। मैंने बड़ी तेज गति से उन्हें चोदना शुरू किया। मैंने समीरा मैडम को कहा आपका बदन तो बड़ा ही गजब का है और आपकी चूत मारने मे तो मुझे बड़ा मजा आ रहा है। वह मुझे कहने लगी मैं तो कब से आपसे अपनी चूत मरवाने के लिए उतारु थी लेकिन आप मेरी तरफ देखते ही नहीं थे। मैंने उन्हें कहा आज के बाद मैं सिर्फ आपकी तरफ ही देखूंगा यह कहते कहते मेरा वीर्य उनकी योनि के अंदर जा गिरा।

Wednesday, November 1, 2017

मकान मालकिन की लड़की को चोदा


हेल्लो कैसे है दोस्तों मैं आपका अभिजीत जैसा की आप ने मेरी पहली कहानी मैं पढ़ा की मैंने कैसे अपनी मकान मालकिन की चुदाई कैसे की | ये कहानी मैं जो लिख रहा हूँ | जो की मकान मालकिन की लड़की रिया की है | जैसा की मैंने बताया था की उस दिन रिया को शक हो गया था की और उस दिन की अलका भाभी की चूत चुदाई के बाद मैंने रिया की चूत कैसे मरी उसकी कहानी मैं आज आप लोंगों को बताने जा रहा हूँ जैसे की की उस दिन मैंने आप लोगों को बताया था की मेरे गीले कपडे व खड़ा लंड देख कर रिया को शक हो गया था | पर अलका भाभी और मुझे नहीं पता था की जब उस दिन हम दोनों की चुदाई के समय रिया भी वंहा थी | इसकी खबर हम दोनों को नहीं थी | जब अलका भाभी की चुदाई के बाद अलका भाभी को मैं अगली सुबह मिला तो अलका भाभी ने बताया की कल की सारी बात रिया को पता चल गयी है | मेरी तो गांड फट गयी की अब रिया की चूत चोदने का सपना अब मेरा सपना ही रह जायेगा | पर भाभी ने कहा की तुम चिंता न करो मैं रिया को समझा लूंगी | और भाभी ने बताया की रिया भी मुझको पसंद करती है | तो मैंने भी भाभी को बताया की मैं भी रिया को बहुत पसंद करता हूँ तो भाभी ने कहा की चिंता मत करो मैं तुम्हारी ये भी इच्छा पूरी करूंगी बस तुम मेरी प्यास ऐसे ही बुझाते रहना आज मैं रिया को तुम्हारे पास भेजूंगी पूरी कर लेना अपनी तमन्ना | तब जाके मुझे कुछ आराम मिला | और मैं रिया के खयालो मैं खो गया | उसकी चिकनी चूत के बारे मैं सोंच कर ही मेरा लंड पानी छोड़ने लगता है | अगले दिन मैं अपने कमरे मैं लेटा था तभी रिया मेरे कमरे मैं आयीं और खड़े होकर मेरे लंड को देखने लगी जो की उस समय उसी के ख्यालों मैं खड़ा हुआ था | मैं रिया को अपने कमरे मैं देख कर एक दम से चौंक गया | क्यूंकि वो पहलीं बार वो मेरे कमरे मैं आयी थी | देख कर मेरा लंड पैन्ट फाड़कर बाहर आने लगा पर मैंने कंट्रोल किया और मैंने रिया से पूंछा की तुम यंहा क्या कर रही हो तो उसने बताया की उसे मम्मी और मेरे बारे मैं सब पता है | सायद अलका भाभी ने उसे सब कुछ बता दिया था | उसकी ये बात सुनकर मैं डर गया की कही वो अपने पापा से सब न बता दे पर उसने मुझ से कहा की डरने की कोई बात नहीं हैं मैं जानती हूँ की मेरे पाप मेरी मम्मी की प्यास नहीं बुझा पाते मम्मी ने मुझे बताया था | तब जाके मुझे कुछ आराम मिला और फिर मैंने उससे कहा की मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ | तो उसने कहा की प्यार तो वो भी मुझ से करती है पर आज तक वो कह नहीं पायी | और उसने बताया की उसने भी कई बार मेरे बारे मैं सोंच कर अपनी चूत मैं ऊँगली की है | इतना सुनते ही मेरे अन्दर की वासना जाग उठी और मैंने उसे पकड़ लिया और जोर से किस करने लगा | सलवार कुरते मैं क्या गजब लग रही थी | मैंने उसे बेड पे लिटाया और उसकी गर्दन पे किस करने लगा और उसके मम्मो को मसलने लगा | धीरे – धीरे वो गरम होने लगी और वो भी मुझे जोर से किस कर रही थी जैसे की वो भी बहुत दिनों से इसी का इन्तजार कर रही हो | मैं उसे किस करते हुए उसके मम्मो को मसल रहा था और उसकी चूत मैं ऊँगली कर रहा था | उसकी चूत गीली होने लगी थी | फिर मैंने धीरे से उसका कुर्ता निकाल दिया | उसकी काली रंग की ब्रा मैं उसकी चुचियों का उभार देख कर मैं पागल हुआ जा रहा था | मैंने उसकी सलवार भी निकाल फेंकी अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी मैं थी क्या कमाल लग रही थी | मुझे लग रहा था की आज मेरे बरसो की मेहनत रंग ला रही थी | अब रिया भी बहुत गर्म हो चुकी थी | उसने मेरी पैन्ट निकाल कर फेक दी और मेरे लंड को बाहर निकाला मेरा मेरा मोटा लंड देख कर उसकी गांड फट गयी | क्यूंकि इससे पहले उसने लंड के दरसन नहीं किया था | फिर मैंने अपना लंड उसे अपने मुह मैं लेने को कहा पहले तो उसने मन किया पर मेरे बहुत कहने पर वो मान गयी | और उसने मेरा पूरा लंड अपने मुह मैं ले लिया और मजे से चूसने लगी | मुझे भी बहुत मजा आ रहा था आज मेरा वो सपना पूरा हो रहा था जो की मैं बहुत दिनों से देख रहा था | मैं उसके मुह को बराबर अपना लंड डाल के चोद रहा था और वो भी मेरा लंड चूसते हुए मजे लिए जा रही थी | मैंने थोड़ी देर तक उसको अपना लंड चूसाया फिर मेरा मन उसे चोदने का हुआ | मैंने अपना लंड उसके मुह से बाहर निकला और उसके बाद में मैंने उसकी ब्रा- पैंटी निकालकर फैंक दिया और उसको मैंने बेड पर लिटा दिया | मैंने भी अपने सारे कपडे निकाल दिए और उसके साथ बेड पर लेट गया | मैंने थोड़ी देर तक अपनी होंठो को उसकी होंठ में डाल कर चूसा | फिर मैंने उसकी दोनों टांगो को अपने हाँथ में पकड़ कर फैला दिया और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया वो एक दम से सिहर उठी उसके आँखों मैं आंसू आ गए थे उसकी चूत से खून निकल रहा था | मेरे लंड पे भी उसकी चूत का खून लग चुका था | खून देख कर वो डर गयी और रोने लगी मैंने उसे समझाया की तुमने ये पहली बार किया है तभी ऐसा हुआ है | मैंने उसे समझाया की उसकी सील टूट चुकी है |
फिर मैं उसे किस करने लगा और और अपने लंड को बड़े ही आराम से उसकी गुलाबी चूत में डाल दिया और वो भी अब अपने मुह से बहुत तेज-तेज आह आह आहा अहः आहा ओह्ह्ह आह आह उह्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह इह्ह इह्ह ओह्ह्ह आह आहा आहा आहा आहा अह आहा आहा उह्नुंह उन्ह उन्ह उन्ह ओह्नोह्ह ओह्ह ओह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह्ह इह्ह इह्ह इह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह्ह ओह्ह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह्ह ओह्ह उन्ह उन्ह उन्हुंह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह ओह्ह ओह्ह्ह ओह्ह की सिस्कारिया निकाल रही थी | मुझे भी बहुत मजा आ रहा था और नों भी अपने मुह से आह आह आहा अ आहा आह आह आह आह आह आहा आहा अ आ आ आहा उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह की आवाज़े निकाल रही थीं | मैं शॉट पे शॉट मरे जा रहा था और धीरे – धीरे मैंने स्पीड तेज की अब वो मेरा साथ दे रही थी सायद उसे भी मज़ा आने लगा था | मैं जोर –जोर से चोद रहा था और उसके मम्मो को मसल रहा था और उसके गुलाबी होंठों का रसपान कर रहा था | वो जोर – जोर से अहह उन्हह ओह्ह्ह अह्ह्ह आह्ह्ह आःह्ह ओह्ह्ह फक में अह्ह्ह ओंन्ह्ह अह्ह्ह चोदो मुझे और जोर से चोदो ओह्ह्ह अह्ह्ह उम्म्म अह्ह्ह फाड़ दो मेरी चूत को आज से मेरी चूत तुम्हारी | मैं भी उसकी आवाज़े सुन कर और कामुक हो गया और मैं और जोर से धक्के लगाने लगा |वो भी गांड उठा कर मेरा साथ दे रही थी | फिर धोड़ी देर की चुदाई के बाद उसने मुझ से कहा की वो झड़ने वाली है मैंने धक्के और जोर कर दिया और वो झड गयी |पर मैं अभी कहा झड़ने वाला था मैं धक्के पे धक्के लगाये जा रहा था था फिर मैं भी थोड़ी देर बाद झड़ने वाला था तो मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुह मैं दे दिया | और वो मेरे लंड को मजे से चूसने लगी मैंने अपना सारा माल उसके मुह मैं ही निकाल दिया वो मेरा सारा माल गटक गयी | उसने मेरा लंड चूस-चूस कर फिर से खड़ा कर दिया | और मैंने फिर उसे बेड पे गिरा लिया और उसकी चूत पे अपना मुह रख दिया और उसके चूत के दानो को धीरे-धीरे सहलाने लगा और उसकी चुचियों को मसल-मसल लाल कर दिया हम दोनों एक दुसरे को बराबर किस कर रहे थे | वो फिर से गरम हो चुकी थी | और मेरा लंड तो पहले से ही उसकी चूत की गहराइयों मैं जाने के लिए तैयार था | पर मैंने पहले उसके बूब्स पे लंड रख कर उसके बूब्स की चुदाई करने लगा | और उसकी चूत मैं ऊँगली दल कर चोदने लगा | वो बहुत गरम हो चुकी थी | उसने मुझ से कहा अभिजीत अब मुझे मत तडपाओ डाल दो अपना लंड मेरी चूत मैं वरना मैं मर जाउंगी फाड़ दो मेरी चूत को आज तक इसने किसी का लंड नहीं खाया आज मिटा दो भूख मेरी चूत की | अब मैंने अपना लंड उसकी चूत के निशाने पर रखा और पूरा लंड उसकी चूत मैं घुसा दिया उसकी चूत अब भी बहुत टाईट थी | मैंने धक्के जोर किये और अब वो भी चूतड उचका कर मेरा साथ दे रही थी | मुझे बहुत मज़ा आ रहा था आज तक मैंने ऐसी रसीली छूट कभी नहीं चोदी थी | लगभग 20 मिनट की चुदाई के बाद उसने कहा मैं झड़ने वाली हूँ मैंने धक्के और तेज किये हम दोनों ही झड गए फिर हम दोनों थोड़ी देर एक दुसरे के ऊपर लेटे रहे फिर वह उठी और अपने कपडे पहन कर मुझे किस किया और मुस्कुरा कर चली गयी |

Tuesday, October 31, 2017

दोस्त की साली को चोदा

हेल्लो दोस्तों मैं एक बार फिर एक कहानी लेकर आया हूँ | मेरा नाम अजय है मैं एक बार फिर अपनी कहानी लेकर आया हूँ | मैं राजस्थान का रहने वाला हूँ मेरी उम्र 25 वर्ष है | मेरे लंड की लम्बाई 6 इंच है जिसे देख कर अच्छी अच्छी लौंडियों की चूत मैं पानी आ जाता है | मैं एक साधारण युवक हूँ जो अपनी लाइफ को अपने हिसाब से इंजॉय करता हूँ |
दोस्तों वैसे मेरी जिन्दगी मैं कई मोड़ आये है | ये कहानी भी उन्ही में से एक है जो की मेरे साथ घटी हुई है और मैं आप लोगों के बीच आज लेकर आया हूँ | मुझे पता है की ये आप को पसंद आयेगी तो दोस्तों मैं आप सब का समय खराब न करते हुए अपनी कहानी पर आता हूँ |
दोस्तों मैं अपने एक ख़ास दोस्त की शादी मैं गया हुआ था वंहा पर मैं अपने दोस्तों के साथ खड़ा होकर इंजॉय कर रहा था | तभी मेरी नजर एक भाभी पर पड़ी जिनकी उम्र लगभग 26 या 27 की होगी कमाल लग रही थी | उनके चूतडो का उठान देख कर किसी का भी सामान हिलोरे लेने लगे और उनके गोल-गोल बूब्स देखकर तो मेरा सामान खड़ा होने लगा बड़ी मुस्किल से मैंने उसे सम्हाला और फिर मैं अपने दोस्तों के बीच बिजी हो गया |
पर सायद उन्होंने मुझे देख लिया था की मैं उनके बूब्स को देख रहा था इसी वजह से मैंने जब मुड कर देखा तो वो मुझे देख रही थी | तो मैंने नजरे वह से हटा ली पर मेरा मन नहीं मान रहा था तो मैंने अपने दोस्त से पुछा की जिसकी शादी थी की ये कौन है | तब मुझे पता चला की वो तो मेरे दोस्त की बड़ी साली है |
मेरी नजरे पूरी शादी में उन्ही पर टिकी रही और सायद उन्होंने ने भी इस बात पर गौर किया था | क्योंकि वो भी मुझे बहुत देर से घूरे जा रही थी | तो मैंने उनकी तरफ देख के प्यारी सी स्माइल की जिसका जवाब उन्होंने भी स्माइल से दिया | मानो मेरी तो लाटरी लग गयी हो फिर हम सब खाना खाने पहुंचे तो मैं अपने लिए प्लेट लेने गया तो वो भी प्लेट लेने मेरे पास आ गयी तो मैंने अपनी प्लेट उनको थमा दी और मैंने दूसरी प्लेट खुद ले ली वो मुस्कुरा कर वह से चली गयी | फिर पूरी शादी मैं हम एक दुसरे से इशारों से बाते करते रहे चलते वक़्त मैंने अपना मोबाइल नंबर चुपके उनको दे दिया और काल करने को कहकर मैं वहा से चला आया | उस रात मैं सो नहीं पाया मैं जब भी आँखें बंद करता उनका चेहरा मेरी आँखों के सामने घूमने लगता मैं उनके बारे मैं सोंच कर पागल हुआ जा रहा था की न जाने कब वो मुझे चोदने को मिलेंगी कब उनके उठे हुए मम्मे मसलने को मिलेंगे | उस रात तो मैं उनके नाम की मुठ मार के सो गया और उनके सपनो मैं खो गया |
अगले दिन उनका फ़ोन आया तो मैंने फोन उठाया क्या सेक्सी आवाज़ थी | लग रहा था की जैसे मैं 16 साल की लड़की से बात कर रहा हूँ | उसने अपना नाम सरिता बताया | मैंने कहा सरिता मुझे तुमसे प्यार हो गया है मैं तुम्हे बहुत चाहता हूँ | तो सरिता ने कहा की वो भी मुझे पसंद करती है | फिर हम दोनों एक दुसरे से रोज बाते करने लगे |
उसने बताया की उसके पति बिजनेस मैंन हैं और ज्यादातर घर से बाहर ही रहते है | और उसके घर मैं उसके सास-ससुर वो ही रहती है | और वो रोने लगी तो मैंने उसे चुप कराया और उसे पुछा की वो रो क्यों रही है | तो उसने बताया की उसके पति का चक्कर एक लड़की के साथ है और वो सही से उसकी आग नहीं बुझा पाता और उसका लंड भी बहुत छोटा इसी के कारण शादी के तीन साल बाद भी आज तक वो आज तक माँ नहीं बन सकी और उसके सास-ससुर उसे ताने देते रहते है |
मैं तो एक दम से उचल पड़ा जो बात मैं बोलना चाहता था की मैं उनकी चूत के लिए पागल हूँ | पर उसने ही वो बात बोल दी मैंने कहा की वो परेशान न हो मैं हूँ मैं उसकी प्यास बुझाऊंगा |
इस तरह हम दोनों एक दुसरे से गरम-गरम बाते किया करते थे और वो अपनी चूत मैं ऊँगली डाल कर और मैं मुट्ठ मार कर अपना कम चलने लगे | एक दिन की बात है | सुबह का समय था सरिता का फोन आया उसने बताया की उसके सास-ससुर आज बाहर जा रहे है | और आज शाम को मुझे अपने घर बुलाया आज वो समय आ ही गया जिसका हम दोनों को इन्तजार था | मैं तो खुशी से पागल होने लगा था | उस दिन मैं दिन भर सरिता के ख्यालो मैं खोया रहा | और शाम को मैं उसके घर पहुंचा और उसके दरवाजे की घंटी बजाई सरिता ने दरवाजा खोला तो मैं तो उसे देखता ही रह गया नीले कलर की नाइटी में कहर था रही थी |
उसे देखते ही मेरा लंड पैन्ट फाड़कर बाहर आने लगा तो उसने कहा अन्दर आओ राजा क्या आँखों से चोदोगे क्या तो मैं फिर उसके घर के अन्दर गया |
और उसने दरवाज़ा जैसे ही बंद किया मैंने उसे उठा कर अपनी बाँहों मैं ले लिया और उसके बेडरूम मैं ले जाकर बेड पे पटक दिया और अपने होंठों को उसके होंठो पर रख कर जोर से चुम्मा लेने लगा वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी वो मेरे बालो को पकड कर कसके किस कर थी | फिर मैं उसके मम्मो को मसलने लगा क्या मस्त मम्मे थे | एक दम कडक जैसे कि किसी ने छुआ ही न हो वो मदहोस होने लगी | मैंने उसकी नाइटी निकाल कर फेंक दी अब वो सिर्फ ब्रा और पैन्टी मैं मेरे सामने थी क्या गज़ब लग रही थी काली ब्रा और पैन्टी मैं फिर मैंने उसे उल्टा किया और उसके पीठ पर किस करने लगा और ब्रा के हुक खोल कर उसकी ब्रा निकाल कर फैंक दी और उसके मम्मो को आज़ाद कर दिया | और उसकी चूत मैं ऊँगली करने लगा उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी | मैंने उसकी पैंटी निकाल दी और उसकी चूत पर अपना मुह रख कर उसे चाटने लगा और उसके मम्मो को अपने हांथों मैं लेकर मसलने लगा | वो मेरे सर को पकड़ कर मेरे मुह को अपनी चूत की ओर दबा रही थी | और जोर से सिस्कारिया ले रही थी | अब वो बहुत गरम हो चुकी थी उसने मेरी पैन्ट खोल दी और मेरा लंड को निकाल कर उससे खेलने लगी मेरा मोटा लंड देख कर वो बहुत खुश थी | उसने मेरा लंड अपने मुह मैं डाल लिया और उसे चूसने लगी मेरा लंड लोहे की राड की तरह कड़क हो चूका था | उसने मुझसे कहा की अब मुझे मत तडपाओ मेरे राजा डाल दो अपना लंड मेरी चूत में | बुझा दो इसकी प्यास बहुत दिनों से प्यासी है और तुम्हारे लंड का इंतज़ार कर रही है | मैंने अपने लंड के सुपाडे पर थोडा सा थूक लागाया और उसकी टाँगे फैलाकर उसकी चूत पर रगड़ने लगा | साथ मैं उसके मम्मो को मसलने लगा और एक जोर के धक्के के साथ मैंने अपना आधा लंड उसकी चूत मैं घुसा दिया वो एक दम चीख उठी इतने दिनों से सुखी पड़ी उसकी चूत टाइट हो चुकी थी| उसकी चीख निकलते ही मैंने अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया और किस करने लगा और धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा अब वो मेरा साथ देने लगी थी | मैंने भी धक्को की स्पीड बढ़ा दी और अपना पूरा लंड उसकी चूत मैं पेल दिया |
अब वो भी मज़ा ले रही थी और गांड उठा-उठा मेरा साथ दे रही थी उसकी मादक सिस्कारिया आह ओह्ह उम्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह अह्ह्हओ अह्ह्ह फक मी अहह ओह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह आह्ह आह्ह्ह उम्म्ह्ह ओह्ह्ह कम ऑन फक मी अहह ओह्ह्ह उम्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह उम्ह्ह्ह ओह्ह्ह अहह्ह्ह आह्ह्ह ओह्ह्ह आह्ह्ह्ह येस्स ओह्ह्ह उम्ह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह उम्ह्ह्ह ओम्ह्ह्ह यस्स्स्स उम्म्हह्ह अह्ह्ह आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्म उम्ह्ह्ह अह्ह्ह्हा उम्ह्ह उम्ह्ह्ह पूरे कमरे में गूँज रही थी | उसकी मादक सिस्कारियों से मेरा जोश और बढ़ रहा था मैं और जोर से धक्के लगाने लगा | 15 मिनट की चुदाई के बाद वो झड गयी पर मैं कहा झड़ने वाला था | मैं बराबर धक्के लगाये जा रहा था और उसकी चुचियो पर अपना मुह रख कर उन्हें अपनी जीभ से सहला रहा था | वो आह्ह ओह्ह नो ओह्ह आह्ह्ह एस ओह्ह नो अह्ह्ह उम्ह्ह ओह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्ह उम्ह्ह्ह अह्ह्ह उम्ह्ह ओह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह की आवाज़े निकाल रही थी और मेरे बालो मैं हाँथ डालकर सहला रही थी | अब मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने उससे पूंछा की बाहर निकालू या अन्दर ही रहने दूँ उसने कहा अन्दर ही रहने दो | मैं धक्के लगाता गया उसकी चूत को अपने वीर्य से भर दिया उसके बाद हम एक दुसरे के ऊपर ऐसे लेटे रहे और एक दुसरे को चूमते रहे सरिता ने कहा आज जो मुझे आनंद मिला है वो आज तक मेरे पति मुझे नहीं दे पाए मेरी चूत धन्य हो गयी आज तुम्हारा लंड पाकर आज से चूत तुम्हारी फिर मने उस रात तीन बार चोदा और सुबह होते ही अपने घर चला आया | उसके बाद मैंने सरिता को कई बार चोदा |आज एक बच्चे की माँ है और वो मेरा बच्चा है