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Tuesday, December 25, 2018

बहन को मजे से चोदा

incest sex यह घटना अब से करीब 4 साल पहले की है. मेरी बहन कपड़ो पर इतना ध्यान नही
देती थी। बहुत बार ऐसे बैठती थी की उसके बोब्स या फिर पेंटी नज़र आते
थे। मै इन्हे देखकर गर्म हो जाता था. कभी-कभार बाथरूम मे जाकर मुठ मार
लेता। अक्सर मै खेल-खेल मे अपनी रूपाली को छू-लेता या फिर उसके दूध पकड
के दबा
देता।
एक बार हमारे घर वाले मामा के यहाँ गये थे. आउट ऑफ स्टेशन. मे और मेरी
बहन नही गये. मैने अपनी हरकते करना शुरू कर दी. बात-बात पर उसके बोब्स पर
हाथ मारना. उसके बोब्स दबा देना। एक दिन रात को मैने एक बहुत हॉट फिल्म
देखी. मे गर्म हो गया। मैने देखा मेरी बहन बेड पर एक टॉप और स्कर्ट पहन
कर सो रही थी. मुझसे रहा नही गया।
मे धीरे से उसके बेड के पास जाकर बैठ गया. उसकी बॉडी को देखता रहा. धीरे
से उसके बोब्स टॉप के उपर से सहलाने लगा। फिर मैने उसकी स्कर्ट की ओर
देखा. मैने उसका स्कर्ट उपर सरका दिया। वाह क्या नज़ारा था. बहन की
गोरे-गोरे पैर. थोड़ी देर उसके पैर को सहलाता रहा. फिर मे तोडा और उपर
गया और सहलाने लगा और फाइनली उसकी वाइट “वी” शेप की वाइट पेंटी दिखी.
मुझसे रहा नही गया और मैने उसके चूत को सहलाया और चूमा. इससे मेरी बहन
जाग गयी।
वो हैरान थी और बोली ” भैया ! यह क्या कर रहे हो? शर्म नही आती अपनी बहन
के साथ ” मे बोला तू लड़की है. मे लड़का हूँ. मुझे मन किया तो मैने छू
लिया ” वो बोली ” नही, यह ग़लत है… मम्मी पापा को पता चलेगा तो क्या
बोलेंगे? तुम मेरे रूम से चले जाओ “. मे चुप-चाप चला गया।
अगले दिन सब कुछ नॉर्मल था. मुझे फिल्म देखने का बड़ा मन कर रहा था. मे
मार्केट गया और वहाँ से एक अच्छी और कुछ सेक्सी फिल्म ले आया। मेरे रूम
मे मेरा अलग टी वी. है। मैने एक सेक्सी फिल्म देखी और दूसरे को आधे मे
छोड़ कर नहाने चला गया. जब मे नहा रहा था तो मेरी बहन बाथरूम के बाहर से
चिल्लाई के उसे स्केल नही मिल रहा। मेने कहा के मे बाहर आ कर देता हूँ.
तो वो रूम मे टीवी पर लगी सेक्सी फिल्म देखने लगी।
उसने ऐसी फिल्म पहले नही देखी थी. मे बाहर आया तो देखा वो फिल्म देख रही
थी. मैने कुछ नही कहा.चुप-चाप हमने फिल्म देखी और अपना लंच किया. फिर
मैने बहन से पूछा ” और एक फिल्म देखनी है ?”. तो उसने कहा हां। मैने पहले
वाली सेक्सी फिल्म लगा दी. हम दोनो बेड पर पेट के बल लेट कर फिल्म देखने
लगे. फिल्म मे बहुत से हॉट सीन थे. उन्हे देख कर रूपाली भी गर्म हो गयी।
देखते -देखते मैने अपना हाथ उसके स्कर्ट के उपर सहलाने लगा. वो बोली ”
नही भैया यह सब नही.” मे बोला ” मे तो सिर्फ़ कपडे के उपर से मजा ले रहा
हूँ. थोरी देर टच करने दो कपडे के उपर से ही प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़.” वो बोली
” ठीक हे पर उपर से ही “.मैने कहा हा-हा और उसके पिछवाड़े को स्कर्ट के
उपर से सहलाने लगा. दबाने लगा।
फिर धीरे से उसके स्कर्ट के अंदर उसकी पेंटी के उपर. वो फिर बोली ” तुमने
कहा था उपर से ही सहलाओगे ” मे बोला ” हा तो पेंटी के कपडे के उपर ही तो
है”।
उसे भी मजा आने लगा था तो चुप-चाप फिल्म देखने लगी. अब मे पेंटी के उपर
से सहला रहा था. फिर मैने उसके अन्दर की तरफ उसकी चूत को भी सहलाने,
दबाने लगा. उसके मूह से कभी-कभी दबी सी आवाज निकलती ” ओह आ मम” । मैने
उसका स्कर्ट पीछे से उठाया और उसके गोरे-गोरे पिछवाड़े को देखने लगा। फिर
पेंटी के उपर से ही किस किया. अब तक उसने आँखे बंद कर ली थी।
मैने उसे सीधा लिटाया और उसके पेंटी के उपर उसके चूत को किस करने लगा. वो
“आ म्म्म ओह भैया आआ” करने लगी. मैने जब देखा की वो गर्म हो गयी है तो
मैने उसके पेंटी के साइड से अंदर हाथ घुसा दिया और उसकी चूत पेंटी के
अंदर सहलाने लगा। वो “अहह म्म्म नहियीई भैया” बोल रही थी। मैने ने उसकी
पेंटी उतार दी. तब वो होश मे आई और बोली ” नही यह सब ठीक नही है भैया.
मम्मी पापा को पता चलेगा तो क्या सोचेंगे?” मैने कहा ” कुछ ग़लत नही है
और उन्हे पता नही चलेगा. बस एक बार रूपाली प्लज़्ज़्ज़”।
मे उसकी चूत को चूमने लगा और उसे पागल कर दिया. उसकी चूत को किस
करते-करते अपने दोनो हाथ उसकी टॉप के अंदर ले जा कर उसकी ब्रा के अंदर
उसकी चुचियाँ यानी दूध ओर बोब्स दबाने लगा। उसे बहुत मजा आने लगा. मैने
ने पूछा ” कैसा लग रहा है? ” उसने कहा ” आह बहुत अच्छा भेया “।
फिर मैने उसके पूरे कपडे उतार कर उसे एक दम नंगा कर दिया. अब मे उसकी
पूरी बॉडी को चूम रहा था, सहला रहा था. मैने उसकी एक चूची मुहं मे लेकर
चूसने लगा तो दूसरे को हाथ से दबा रहा था. और वो मेरा सर के बाल सहला रही
थी।
15 मि. बाद मैने उसकी चूत मे अपना लंड लगाया और प्रेशर दिया. वो चिल्ला
गयी ” नहि..ईई भैया बहुत दर्द हो रहा है. फिर मैने उसकी चूत पर तोडा
वॅसलीन लगा कर फिर से घुसाया अपने लंड को। 3-4 बार ट्राइ करने पर मेरा
पूरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया. तोडा सा खून भी निकला। फिर थोडी देर
बाद उसे मजा आने लगा. वो बोली ” अहहहहह भैया बहुत मज़ा आ रहा
हे..इईईईईईई. जोर से करो “।
हम दोनो पसीना -पसीना हो रहे थे. मुझे लगा की वो झड गयी है . पर मे
कंटिन्यू करता रहा और कुछ देर बाद मुझे लगा की मेरा निकलने वाला है तो
मेने टाइम पर लंड निकाल कर सारा माल उसकी छाती पर और मूह पर डाल दिया। ओर
फिर मे उसके बगल मे लेट गया. ओर फिर वो बेड पर से उठी ओर बाथरूम मे चली
गयी।
उसके बाद तो हम दोनों कभी भी समय मिलता तो हम सेक्स या छेड़छाड़ करे बगेर नही रहते।

दोस्त की बीवी की चुदाई

xxx story इस हिस्से के सभी प्यारे दोस्तो एवं सहेलियों को मेरा प्यार भरा नमस्कार
में अपने अनुभव के साथ आ गया हूँ. बात अभी दो दिन पहले की ही है. मुझे
चोदने की बुरी आदत हो गई है. जब तक एक बार चुदाई ना कर लू नींद ही नही
आती. मेरी वाइफ भी एक दम ठंडी पड़ी रहती है. उसे उकसाने के बाद बड़ी
मुश्किल से वो करने देती है.
दोस्तो आप लोग मेरी समस्या समझ रहे होगे. कितनी विकट समस्या और ऊपर से
चुदाई का आलम एक तो मदहोशी का आलम उपर से लंड ने गदर ढाई है. यारो मत
पूछो मेरी तबीयत की चुदाई की कितनी याद आई है. फनफनाते लंड को कैसे दबाता
हूँ. मैंने यारो कई बार हाथो से ही रग़ड कर उसकी जान निकाली है.
जब जिसकी ज़रूरत हो और खुदा से जिसे दिल से माँगो तो वो मिल ही जाती है.
ठीक यही हुआ मेरे साथ, मेरे साथ के मेरे घनिष्ट मित्र अपने परिवार के साथ
अचानक आ गए. उन्हे अपनी पत्नी को लखनऊ ले के जाना था.
उनके बच्चे की तबीयत खराब हुई तो बीच रास्ते मे ही उन्होने निश्चय किया.
की ओम मल्होत्रा के घर चलते है. वैसे भी राकेश को मेरे यहां आने मे
दिक्कत नही होती है. ड्रिंक करने का शोकीन है शाम 8:00 बजे से ही बोतल की
ढक्कन खुल जाती है.
लेकिन बुराई ये है 3-4 पेग के बाद उससे सम्भलती नही बेहोश हो जाता है.
यही हुआ अभी, उसे सम्भालना पड़ा समय ज़्यादा हो गया था. मैंने अपनी वाइफ
को बोला बच्चो के साथ तुम सो जाओ. वो मेरे और राकेश के बच्चो को ले कर
सोने चली गई.
ईधर मै और राकेश की वाइफ राकेश को सम्भालते हुए आपस मे बाते करने लगे. ये
राक्षस भी जब साले को हजम नही होती तो इतनी क्यो पी लेता है. “तों वो
बोली” इनका तो रोज का यही हाल है. बच्चे को सम्भालू या इन्हे – तब तो
बड़ी दिक्कत होती होगी ना.
हाँ कई दिन गुजर जाते है, रात मे इनसे बात किए हुए-तब तो रात के काम भी
नही हो पाते होगे. मैने घुमा कर कहा. हाँ,(आहे भरते हुए उसने कहा)-तब तो
आप प्यासी रह जाती होगी, अगर आप कहे तो मै आप की मदद करू. (बड़ी हिम्मत
जुटा कर कहा था.)उसकी मुस्कुराती आँखो से इशारा मिलते ही में उसके पास आ
गया. और उसके होटो पर आकर किस जड़ दिया. आँखो मे खुला आमंत्रण था. मै जोश
मे आ गया और उसके होटो को मूहँ मे भर कर चूसने लगा. और जोरो से चूसा उधर
हाथो से बोब्स दबाए जा राहा था. दबाते-दबाते मै उसकी चूत की तरफ अपना हाथ
ले गया और चूत मे उंगली डाली.
उसकी चूत गजब की गीली हुई पड़ी थी. और वो खुद मदहोश हुए जा रही थी. तवा
एक दम गरम था. मै भी पूरे जोश मे बस मन कर रहा था लंड को निकाल कर जल्दी
से चूत मे डाल दू. उस रात 3 बार उसकी चुदाई की धीरे- धीरे बताता हूँ.
होटो को जेसे ही छोड़ा वो सिस्काए मरने लगी जान………न्न्-ाीननन्……न्‍नन्न्
ज…लल्ल्ल्ल…….दी से चो………दददददो चू…..तत्त……त्त्त्तत्त बेचैन है. मैने
जल्दी से उसके कपड़े उतार दिए और अपने भी उतार दिए मूहँ मे उसके बोब्स के
निप्पल डाल कर चूसने लगा. बस खा जाने वाले अंदाज मे चूसे जा रहा था.
और वो सिसकारिया मारे जा रही थी आहह…… जान और ज़ोर से चूसो मज़ा आ गया
जान ऐसा तो राकेश ने कभी भी नही किया मैने अपना लंड उसके हाथ मे दे दिया.
हाथ मे मोटा लंड पकड़ते ही चीख निकल गई और बोली ” इतना मोटा लंड कैसे
घुसेगा ” वो मस्त हुई जा रही थी. और मैरा सब्र बी ख़त्म हुऐ जा रहा था.
मै उसके उपर आ गया. लंड को उसकी चूत से सटाया और धक्का देते ही पूरा सिर
अंदर घुस गया.
वो चीखी मैने जल्दी से उसका मुहँ दबाया और बोला चिल्लओ मत सब जाग जाएंगे.
वो आहिस्ते से दर्द बयां करने लगी आआआ… जान मार दिया तूने! मै धीरे-धीरे
लंड को अंदर करने लगा बस थोड़ी देर मे ही वो मस्ती की चाले भरने लगी— ”
मेरे राजा जमके चोदो तुम्हारा लंड तो बड़ा ही मस्त है ” आज जम के चोदो.
आआआअ जिओ मेरे रररररा…….आआआ………ज्ज्ज्ज्ज्जा…और चोदो आआआ हह आआआआ वो भी
नीचे से गांड उछाल उछाल कर चुदा रही थी. वो मस्त हो कर चुदा रही थी. और
मै धक्के लगाए जा रहा था. मेरे राजा निककककककककककक…लल्ल………. रहा है मेरी
चुत का पानी वो झड़ रही थी आहाआआआआ जान ये ल्ल्ल्ललो मेरे
लन्न्न्न्नन्न…… न्ड्चुत का
प्प्प्प्पा………प्प्पा…न्न्न्नीन्न्न्नीन्नी…………ईईईईईईईईईईईई ये कहते हुए
मै उसकी चुत मे ही झड़ गया.
हम दोनो चिपक कर लेट गये. उसने मुझे कस कर चिपका लिया था बता रही थी आज
बहुत दिनों बाद उसने चुदाई का आनंद लिया था. इतनी मस्ती उसे बस सुहागरात
वाले दिन ही आई थी. उसके बाद वो कभी सन्तुष्ट नही हो पाई. अब तो वो खुल
कर बाते किए जा रही थी….उसने फिर से लंड को पकड़ लिया था, मै बोला “क्या
हुआ अभी मन नही भरा क्या”.
उसने कहा “नही और चुदाई करो ना” अभी चोदे हुए 15 मिनट ही हुए थे उसका मन
फिर से करने लगा मैने उसकी टॅंगो को चौड़ा किया और उसकी चूत चाटने लगा.
वो बोली ये क्या कर रहे हो, ऐसा करते हुए मै समझ गया कि उसने आज तक चूत
चटाई का मज़ा नही लिया है. मै ज़ोरों से उसकी चूत चाटने लगा. वो मादकता
मे डूबने लगी………………… “चूत वो बला है, जो अच्छों-अच्छों का मन डूला दे.
बुड्डो को भी जवान बना दे, बुझे लंड मे भी जान डाल दे.”
यही हाल हुआ मेरे झडे हुए लंड का और फंफना के खड़ा हो गया. मै उसकी चूत
को जोरो से चाट रहा था आआआआअहह………..आ……..न………ई………..ल मेरी
ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्जजा….. आआआआअ………….न्न्आआआननननन……….. ऐसे…क्यययायायाया
……………किईईईईई……ऐऐऐऐऐऐऐएऐ…………. ज़ाआाआआआआ ……..रहेऐऐऐऐऐऐऐ……………. होऊऊऊऊओ.
उसने मेरे बालो को कस के पकड़ लिया
मज़्ज़्ज़्जाज़्ज़्ज़्जजाज़्जा……आआआआआआ ………….रहा है.
ववववाआआहाहाह……….उसकी इतनी मस्त चूत चटाई किसी ने नही की, मैने अपनी जीभ
को जैसे ही उसकी चूत मे घुसाया तों वो चीख उठी आहा मार डाला मेरे बालो को
ज़ोर से नोच लिया मेरी तो बारह यहीं बजा दी. चूसो राजा और ज़ोर से…… थक
गये हो तो बताओ मै ऊपर आ कर चुदवा लू……. इस भोसडी को….. ओह अब मैं
नहीहीईईईईईईईईईईईई………….रुक्कककककककक सकती हूँ.
यह लो मै आ गई हूँ अब राजा तुम भी आ जाओ” वो अपनी मस्ती मे बोले जा रही
थी मै समझ गया था. अब इसकी चूत मे लंड डालना पड़ेगा लेकिन इस बार जल्दी
नही थी. मै उसे लंड चूसाना चाह रहा था. इतना अंदाज़ा लग गया था. की जब
राकेश ने कभी इसकी चूत नही चूसी तो साले ने लंड भी नही चूसाया होगा.
ये अभी मस्त हैं तो मस्ती मे पूरा लंड चूस लेगी मैने उससे लंड चूसने को
बोला पहले तो कुन्मुनाई जब बताया अभी और मस्ती आएगी तो वो लंड चूसने को
राज़ी हो गई. तुम्हारा लंड बडा जानदार है……. बहुत आच्छा लग रहा
हाईईईईईईईईईईईईईई….. हाईईईईईई और ज़ोर सीईई मेरे राज्ज्जज्जज्जा…… और
ज़ोर…… ..सीईए…….मेरे मूहँ को ही चोदोगे क्या लंड हेहेहेहे……. ओह
म्ह………हह वो गजब से चूसे जा रही थी. मै सोच रहा था. जो अभी मना कर रही थी
और वो अब कितनी मस्त हो कर लंड को मूहँ मे लिए जा रही हैं.
मैने उसे 69 पोज़िशन मे लिटाया और चालू हो गया आज उसे लंड और चूत के सारे
तरीके सीखा देना चाहता था. जिससे अगली बार और मस्ती मे चूदाई कर सकू कुछ
बी बताना नही पडेगा. अब तो उसे चोदने का मन हो रहा था.
लंड को उसकी चूत से सटा कर ज्यो ही अंदर डाला वो चीख उठी ओह चोदो मेरे
राजा…… क्या जानदार लोडा है……मेरी चूत को चोद-चोद कर निहाल कर दो…… मारो
राजा मारो…….कस कस कर धक्के मारो…….चोद
दो…..चो…..ओओओओ……..ददद……डालो…हाईईईईईईईई……..मैमैमैमै…….म….अअअ……रररर……….
गइईईई”………. और वो भल भला कर झर गयी 1:30 घंटे चुदाई चली.
जो पाठक चूत का मजा ले रहे है वो समझ रहे होंगे दूसरे राउंड मे चुदाई का
क्या मज़ा होता है.
धन्यवाद

आंटी की सोच

desi aunty हेलो दोस्तो, आज में आपको एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ जो मेरे साथ
कुछ महीने पहले हुई हैं मेरा नाम …………….. नाम में क्या रखा हैं सीधे
कहानी पे आता हूँ ये कहानी मेरे और मेरी आंटी की हैं मेरी उम्र २५ साल
हैं और मेरी आंटी की उम्र ३९ साल हैं मेरी आंटी सवाले रंग की पतले नाक
बड़े बड़े दूध के गोले और बड़ी सी कुल्हे वाली एक औरत हैं। जिसे मैं
सेक्स की देवी कहता हूँ क्यूंकी वो इतनी सेक्सी हैं की जो भी उन्हे
देखेगा उनका लंड खड़ा हो जाएगा और ऐसा मान करेगा की रात भर बजाओ और रात
भर बजाने के बाद भी लॅंड सबेरे बोलेगा बजा साली को बजा इतनी सेक्सी हैं।
यारो बचपन से ही में और आंटी बहुत क्लोज़ रहे हैं हम हर तरह की बात करते
हैं एक दूसरे के साथ मेरी आंटी के दो छोटे बच्चे हैं में अपनी आंटी को १८
साल की उम्र से ही बजाना चाहता हूँ पर मौका २५ साल की उम्र में मिला।एक
बार अंकल को शादी में जाना था पर आंटी का मूड नही था तो वो बच्चे के साथ
रुक गयी अंकल ने मुझे कहा था की तू अपनी आंटी का ख्याल रखना और सोने चला
जाना में रात को सोने चला गया। हमने १०.३० बजे तक टीवी देखा फिर में
सामने के रूम में सोने के लिए चला गया तो आंटी ने मुझे कहा तू यहा क्यूँ
सो रहा हैं चल आ हम बेडरूंम में साथ में सोएंगे वैसे भी मुझे नींद नही आ
रही वात भी करेंगे मे चला गया और जाकर बेडरूम में लेट गया आंटी ने कहा
में साड़ी चेंज करके आती हूँ आंटी आई गाउन पहन कर उनको देखते ही मेरा लंड
खड़ा हो गया उनके बड़े बड़े दूध के गोले मोटी कूले खुले बॉल और कातिल
हंसी मुझे पागल कर रही थी। मेरा लंड खड़ा हो गया था। दिल कर रहा था की
अभी घुसा डू अपना लंड उनके मूह में और कहूँ की चूस साली कुतिया चूस मेरा
लंड और ऐसे रात भर बजाऊं की चल भी ना पाए।अगले दिन फिर आंटी लाइट बंद कर
के आ गयी बेड पर हम दोनो बात करने लगे आंटी ने पूछा कोई तितली फसाई की
नही कॉलेज में, मैने कहा आप तो मुझे जानती हैं मुझे इन सब मे कोई
इंटरेस्ट नही हैं मैने आंटी से पूछा क्या शादी के बाद मज़ा आता हैं तो
आंटी बोली ये तो किस्मत पर डिपेंड करता हैं मैने कहा किस्मत पे कैसे
उन्होने कहा अगर शादी बड़े लंड वाले सो हो गयी तो मज़ा और अगर छोटे लंड
वाले से हो गयी तो सज़ा मेने आंटी से पूछा तो आपको मज़ा आया की सज़ा मिली
आंटी ने मुझे गुस्से से कहा चुप चाप सो जाओ बहुत सवाल पूछते हो में सो
गया अगले दिन सुबह आंटी ने मुझे सॉरी कहा और बताया की मैने किसी और का
गुस्सा तुम पर निकल दिया तुम फ्रेश हो के आओं में सब बताती हूँ। आंटी ने
बताया की तुम तो जानते हो की मे शादी से पहले कभी सेक्स नही किया और शादी
की रात जब पहली बार तुम्हारे अंकल के लंड को देखा तो डर गयी क्या बड़ा
हैं पर मेरी ये ग़लतफमी दूर हो गयी शादी के कुछ दीनो बाद जब तुम्हारे
अंकल ने मुझे ब्लू फिल्म दिखाई तो मुझे पता चला की तेरे अंकल का तो लंड
सबसे छोटे लंड की श्रेणी मे आता हैं फिर मैने सोचा की सेक्स के बारे में
जानकारी पता करूँगी मैने एक दिन अपनी पड़ोसन से पूछा की तुम्हारे पति का
कितना बड़ा हैं तू उसने मुझे बताया की उनका ५.५ इंच का हैं मैने पूछ मज़ा
आता होगा उसने कहा मत पूछ यार में उस दिन से ही ये जानना चाहती हूँ की
बड़े लंड से कैसा लगता होगा मैने आंटी से पूछा अंकल का कितना बड़ा हैं तो
उन्होने कहा ३.५ इंच का हैं और बता कर मेरे गले लग गयी मेरा तो लंड खड़ा
हो गया। मन किया की साली को बजा डालूं पर क्या करता।
मैने एक तरकीब सोची उस रात को हम जल्दी सो गये और सुबह में उनसे पहले जाग
गया फिर मैने अपने लंड को हिला हिला कर खड़ा कर दिया और मेरा लंड ८ इंच
का खड़ा हो गया और चुप नंगा लेट गया आंटी उठी तो मेरे लंड को देख कर बोली
हाए राम कितना बड़ा हैं। इसकी बीवी तो हमेशा मज़े करेगी और देखने लगी में
चुप आँख बंद करके उनकी बात सुन रहा था आंटी से रहा नही गया और उन्होने
मेरे लंड को पकड़ लिया उनके पकड़ते ही मुझे एक करेंट सा लगा फिर वो मेरे
सुपाडे को उपर नीचे करने लगी और बोली हाय राम इसकी तो सील भी नही टूटी है
मैं जाग गया मुझे देखते ही आंटी बिना बोले भाग गयी में भी वाहा से भाग
गया और घर आ गया रात को ९.३० बजे आंटी का फोन आया की तुम सोने क्यूँ नही
आ रहे अब तक, मेने कहा आ रहा हूँ और फिर मैं गया आज तो आंटी बहुत सेक्सी
लग रही थी उन्होने जान बूझ कर ट्रॅन्स्परेंट गाउन पहना था और ब्रा नही
पहनी थी जिसे उनके गोले बिल्कुल उभरे हुए लग रहे थे मेरा तो देख के ही
खड़ा हो गया हम लोग बेडरूम में जाकर लेट गये और बात करने लगे आंटी ने
पूछा मेरा एक काम करोगे मुझे एक बार देखना हैं की बड़े लंड का झटका कैसा
होता हैं मेरी तो मुराद पूरी हो गयी थी समझो मैने कहा मेरी तो सील भी नही
टूटी हैं आंटी ने कहा में सब कर दूंगी और तुम्हे पता भी नही चलेगा और
मेरे हाथ को पकड़ कर अपने दूध के गोलो के उपर रख दिया मेने जैसे ही उनके
गोलो को दबाया उनकी आ …….ह निकल गयी मैने उनके ब्रा खोल दिया और उनके
गोलो को चूसने लगा उन्होने मेरे सारे कपड़े निकल दिए और मेरे लंड को
देखने लगी मैने उनकी पेंटी उतार दी और उनकी गुफा देखकर बोला वाह क्या
गुफा हैं आंटी ने कहा क्या नाग हैं घुसा दो मेरी गुफा में आंटी ने कहा
मेरी गुफा को चाट कर चिकना बना दो ताकि नाग आसानी से घुस जाए मैने चाट
चाट के गुफा को चिकना बना दिया आंटी ने मेरे लंड को मूह मे लिया और चूसा
और कहा सील टूटने के बाद तुम्हे और भी मज़ा आएगा और मुझे भी आंटी ने कहा
मेरी गुफा मे लंड घुसा दो और याद रखना जब तक वीर्य ना गिरे ठोकते जाना
मैने कहा ठीक हैं उन्होंने कहा ठोकते वक़्त मेरी आँखो में देखते रहना
मैने अपना लंड आंटी की गुफा में घुसा दिया और आंटी चिल्ला उठी
आ……………………………उई……………ही
राम…………………………………गयी…………….उई……….मा……ई…………………….आ………………………………उई…..इस……………………इस/
मैने तुरान लंड बाहर निकल दिया आंटी ने कहा क्यूँ लंड बाहर निकाला मैने
कहा आपको दर्द हो रहा हैं इसलिए उन्होने कहा जितना दर्द होगा उतना ही
मज़ा आएगा उन्होने कहा अब जब तक वीर्य ना निकले ठोकते रहो मेरी आँखो में
देखते हुए मैने ठोकना सुरू किया और आंटी कहने लगी ……………………फाड़ दे गुफा
को……………………………मार कासके मार………………………….उई……………….एस……………….ही राम…………मज़ा
आगेया ………………….उई ……………….मार मुझे मार …………………….दे कस के पेल……………….उई और
कुछ देर बाद में मेरा वीर्य गिर गया में अपने लंड को गुफा मे ही रहने
दिया और आंटी के उपर लेट गया थोड़ी देर बाद जब लंड आंटी की गुफा से बाहर
निकाला तो लगा जैसे कुछ जलन सी हो रही हैं देखा तो मेरी सील टूट चुकी थी
में खुश हो गया आंटी भी मेरी टूटी सील देख कर खुश हो गयी और कहा अब और
मज़ा आएगा और मेरे लंड को मूह मे लेकर चूसने लगी मेरे सुपाडे के पीछे के
भाग को जैसे ही आंटी ने जीभ से चूसा मुझे ऐसा लगा इससे अच्छी चीज़ दुनिया
मे कोई नही हैं। अब आंटी ने कहा तू लेट जा में तेरे लंड पे सवारी करूँगी
में लेट गया आंटी मेरे लंड पे बैठ कर कूदने लगी मुझे भी मज़ा आ रहा था।
कुछ देर तक ऐसे ही कूदने के बाद आंटी ने कहा आज मूज़े इतना मज़ा आ रहा
हैं की क्या कहूँ, मैंने उस दिन आंटी को खूब बजाया और अगले दिन जब अंकल
आए तो अंकल ने आंटी से पूछा की तुम लंगड़ा के क्यूँ चल रही हूँ तो आंटी
ने कहा की कल एक पत्थर के उपर गिर गयी थी। और मुझे देखकर हँसने लगी इसके
बाद हमें जब भी मौका मिलता हम खूब सेक्स करते है। आंटी की गांड की चुदाई
कैसे की ये अगली कड़ी में बताऊँगा।

Sunday, December 23, 2018

देसी प्यासी भाभी की चुदाई खेत में

यह मेरी पहली कहानी है अपनी चचेरी प्यासी भाभी की चुदाई की … मेरे जीवन में हुई यह एक सच्ची घटना है.
दोस्तो, मेरा नाम दिव्येश मिश्रा है और मैं जामनगर गुजरात का रहने वाला हूँ. मैं अपने मम्मी पापा के साथ रहता हूं. मेरे चाचा चाची और उनके बेटे, मतलब मेरा भाई और भाभी हमारे पुश्तैनी गांव में रहते हैं. वहां हमारा खेत है, जिसकी देखभाल वे ही करते हैं.
उन दिनों की बात है.. जब मैं 12वीं में पढ़ता था. मेरे चाचा के लड़के की शादी करीब 2 साल पहले हुई थी. भाभी का नाम रंजू है.. जो दिखने में गांव की देसी गर्ल लगती हैं, पर हैं बहुत सुंदर और सेक्सी. उनके बूब्स बहुत बड़े बड़े हैं. भाभी की फिगर साइज़ 36-30-34 की होगी.
मैं छुट्टियों में अपने गांव चाचा के घर गया था. वहां खेत में काम करने चाचा चाची और भैया जाते थे और भाभी घर पर रहती थीं. मेरे मन में भाभी के लिए थोड़े खराब विचार आने लगे थे. तब मैं भाभी को तिरछी नजर से घूरता रहता था. वो जब काम करतीं तो मैं उनके सामने खड़ा हो जाता और वो झुकतीं, तब मैं उनके हिलते हुए मम्मों को देखता रहता था और उनके सामने ही अपने लौड़े को सहलाने लगता था. भाभी ये सब देख कर बस मुस्कुरा देती थीं.
एक दिन भैया और चाचा को किसी काम से बाहर जाना पड़ा. चाची की भी तबियत खराब हो गई थी, तो वो भी खेत में नहीं गईं और घर पर आराम करने के लिए लेट गईं. चाची ने भाभी को बोला- तुम और दिव्येश खेत में जाकर बैलों को पानी पिला कर चारा आदि डाल आओ.
मैं और भाभी खेत में चले गए. वहां पर कुएं से पानी खींचना था, तो भाभी पानी खींच रही थीं और मैं बैलों को पिला रहा था. तभी भाभी का पैर फिसला और वो गिर गईं. मैं दौड़ के भाभी के पास गया देखा तो भाभी पानी में गिरी हुई थीं और उनकी साड़ी का पल्लू नीचे आ गया था, जिससे उनके बड़े बड़े बूब्स बहुत अच्छे से दिख रहे थे.
मैंने भाभी को संभाला और हाथ से पकड़ के खड़ा किया. भाभी को कमर में मोच आ गई थी, जिससे उन्हें चलने में दिक्कत हो रही थी. मैंने देखा कि पास में एक झोपड़ी थी, वहां पर भाभी को ले जाकर खटिया पर भाभी को बैठा दिया. मैंने भाभी को पानी पिलाया और फिर उनको डॉक्टर के पास जाने को बोला, तो भाभी ने मना कर दिया.
भाभी ने बोला- पास में एक झाड़ है, उसके पत्ते ले आओ, उनके रस से मालिश करूँगी, तो ठीक हो जाएगा.
मैंने उस झाड़ के कुछ पत्ते तोड़े और उनका रस निकाल कर दिया, जिसे भाभी अपने हाथों से कमर पर मालिश करने लगीं.
पर दर्द के चलते भाभी से मालिश नहीं हो पा रही थी. इधर मैं भाभी के गोरे बदन को घूर रहा था.
तभी भाभी बोली- दिव्येश, तुम मेरी थोड़ी मदद कर दो.
मैंने बोला- हां भाभी बोलो.. क्या करूँ?
भाभी ने अपनी कमर पर मालिश करने को बोला और भाभी खटिया पर उल्टा लेट गईं. मैं धीरे धीरे भाभी की कमर पर मालिश करने लगा. भाभी को आराम हो रहा था और मुझसे रहा नहीं जाता था. मैं भाभी की कमर से ऊपर तक मालिश करते करते भाभी के मम्मों को टच कर लेता था. धीरे धीरे भाभी को मजा आने लगा और उनको नींद सी आ गई.. या उन्होंने यूं ही अपनी आंखें बंद कर लीं.
मैंने आवाज दी, तो उनका कोई उत्तर नहीं आया. मैंने देखा कि भाभी सो गई हैं. तो इस बात का फायदा उठाते हुए मैंने धीरे से भाभी की साड़ी को ऊपर करके उनके पैरों के बीच देखने की कोशिश की. मैंने हिम्मत की और भाभी की साड़ी ऊपर करके देखा तो भाभी ने अन्दर कुछ नहीं पहना था और उनकी चूत एकदम क्लीन शेव थी.
भाभी की गोरी और सफाचट चूत देखते ही मेरा तो लंड खड़ा हो गया.
तभी भाभी को कुछ महसूस हुआ और वो हिलने लगीं तो मैंने झट से उनकी साड़ी ठीक कर दी.
भाभी उठ गईं और मुझे देखकर बोलीं- दिव्येश मैं कुछ थक भी गई हूं, सो आराम कर लेती हूँ.. मुझे नींद आ रही है और थोड़ी देर सो जाती हूँ.
मैंने लंड सहलाया और उनकी चूचियों की तरफ देखते हुए बोला- हां सो जाओ भाभी.
भाभी भी अपने होंठों पर एक कातिलाना मुस्कान लाती हुई बोली- आओ तुम भी मेरे पास में सो जाओ, तुम भी थोड़ी देर आराम कर लो.
मैं कुछ कुछ समझ तो गया था, सो मैं जल्दी से उनके बगल में ही लेट गया. चूंकि खटिया सिर्फ एक ही थी और दो जनों के लेटने से हम दोनों चिपके हुए ही लेटे थे. भाभी के बदन की आग और मेरी वासना के चलते मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था. मेरा लंड तन के मोटा हो गया था. जो भाभी के पीछे घुसने की कोशिश कर रहा था. भाभी की गांड बहुत बड़ी थी.
थोड़ी देर बाद मैंने देखा भाभी सो रही हैं, तो मैंने धीरे से भाभी की साड़ी ऊपर करके उनकी गांड के ऊपर हाथ फेरने लगा और अपने खड़े लंड को बाहर निकाल कर उनकी गांड पर टच करने लगा. इससे भाभी हिलीं और थोड़ा और पीछे होकर मुझसे चिपक कर सो गईं.
अब मैं समझ गया कि भाभी सेक्स की प्यासी हैं, सोने का नाटक कर रही हैं और उन्हें मुझसे चुदवाना है.
मैंने देर ना करते हुए अपने हाथ को भाभी की चूत पर लगा दिया और हल्के से उनकी चूत को सहलाने लगा. मैंने महसूस किया कि भाभी की चूत गीली हो गई थी और उनकी सांसें तेज हो गई थीं. मैंने पीछे से भाभी के मम्मों को पकड़ा और जोर जोर से दबाने लगा. भाभी भी मजे ले रही थीं, पर सोने का नाटक भी कर रही थीं.
थोड़ी देर बाद ऐसे ही सोते हुए भाभी चित होकर अपने पैर फैलाकर सो गईं, जिससे समझ गया कि भाभी को अब चूत में खुजली हो रही है और चुदवाना है. मैंने अपने एक हाथ से भाभी की टांग को जरा और फैलाया और साड़ी ऊपर करके उनकी चूत को खोल दिया. जब भाभी की आंखें नहीं खुलीं तो मैं उन पर चढ़ गया और उनको चुम्मी करने लगा और धीरे से उनकी चुत को चाटने लगा. भाभी भी सोने का नाटक करते हुए अपनी चूत उठाकर मेरे मुँह पर हिलाने लगी और अपनी चूत से पानी छोड़ने लगीं.
अब मैं भाभी के पैरों के बीच में आ गया. उनके ऊपर चढ़कर उनकी चूत पर अपना लंड सैट किया और उनको कसके अपनी बांहों में जकड़ कर उनके होंठों पर अपने होंठ रख कर उन्हें किस करने लगा. भाभी अभी भी सोने का नाटक कर रही थीं, लेकिन मुझे किस करने में पूरा सहयोग कर रही थीं. फिर मैंने भाभी की चूत की फांकों में अपने लंड का सुपारा ऊपर नीचे किया, तो भाभी ने अपनी चुत को मेरे लंड के लिए खोल दी. मैंने जोर से एक झटका मारा और मेरा 8 इंच का 3 इंच मोटा लंड उनकी चूत फाड़ते हुए अन्दर घुस गया, जिससे उनकी चीख़ निकलने को हुई. पर भाभी की चीख मेरे मुँह में ही दब कर रह गई, क्योंकि मेरे होंठों का ढक्कन उनके मुँह पर जमा हुआ था. मोटे लंड के एकदम से घुसने के कारण भाभी की आंखें खुल गई थीं और वे दर्द से तड़प रही थीं.
उनके दर्द से ऐसा लग रहा था कि पहली बार इतना मोटा लंड अन्दर गया था. भाभी खुद को मुझसे छुड़ाने के लिए उछल रही थीं. पर मैंने उनको कसके जकड़ रखा था. साथ ही भाभी की चूत में अपने लंड के लम्बे लम्बे धक्के मारता हुआ उन्हें चोदे जा रहा था.
थोड़ी देर बाद उनकी चुत में लंड की सैटिंग हो गई और भाभी को आराम मिलने लगा. अब मैंने होंठ हटा दिए.
भाभी गहरी सांस लेती हुई धीरे से बोली- मार ही डाला यार तूने तो … फाड़ दी मेरी चूत तूने … बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने भाभी को किस करते हुए अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर जोर से उन्हें चोदने लगा. अब भाभी को भी मजा आ रहा था और वो भी अपनी गांड उछाल उछाल कर चुदवा रही थीं. ऐसे ही भाभी को चोदते हुए मैंने अपना सारा माल भाभी की चूत में ही उतार दिया और ऐसे ही उनके ऊपर पड़ा रहा.
कुछ देर बाद भाभी ने किस करके मुझे साइड में किया और खुद खड़ी हो गईं. भाभी ने अपने कपड़े ठीक किए. मैं उनको देखे जा रहा था. भाभी मेरे सामने शरमा रही थीं. वे कुछ बोले बिना झोपड़ी के बाहर चली गईं.
मैंने बाहर जाकर देखा तो भाभी ठीक से चल नहीं पा रही थीं. फिर धीरे धीरे हम घर आ गए और खाना खाके सब सो गए. सुबह देखा तो भाभी को बुखार चढ़ गया था और भैया उनको डॉक्टर के पास ले जा रहे थे. भाभी अभी भी मुझे देख कर शरमा रही थीं.
फिर मैं अपने घर जामनगर आ गया.
थोड़े दिनों बाद मुझे भाभी का फोन आया और थोड़ी देर बात करने के बाद उन्होंने बताया कि खेत में अपने जो शरारत की थी, उसी के कारण अब मैं माँ बनने वाली हूँ.
मैंने भाभी को बधाई दी, तो शरमा कर उन्होंने फोन काट दिया. अभी भाभी को उस दिन की निशानी के रूप में एक लड़का है. अब जब भी मैं गांव जाता हूं तो भाभी बहुत चुदवाती हैं.
यह है मेरी प्यासी भाभी की सच्ची कहानी, आपको कैसी लगी.. आपकी राय मेरा ईमेल आईडी divyeshmishra2018@gmail.com पर जरूर भेजें.

कुंवारी लड़की की कहानी:

दो माह पहले ही मैं अठारह वर्ष की हुई. पापा ने मेरे जन्मदिन को स्पेशल बनाने में कोई कर नहीं छोड़ी. होटल में पार्टी अरेंज की गयी. मेरे स्कूल कॉलेज के दोस्तों के साथ ही रिश्तेदार भी थे. और उस वक्त तो मैं खुशी से पागल हो गयी जब केक काटने के दौरान हेप्पी बर्थ डे का गायन समाप्त होते ही मेरे सामने गिफ्ट के रूप में बीस हजार रूपये मूल्य का स्मार्ट फोन था, सब फीचर थे उसमें और जियो की सिम. डेढ़ जीबी रोज इंटरनेट डाटा.
अब मैं एडल्ट हो गयी थी. इसके पहले की मेरी जिन्दगी बहुत ही मासूम रही. पापा की परी और माँ की लाड़ली थी. घर से स्कूल और स्कूल से घर. मगर अब तो क़ानून और मेडिकल साइंस दोनों मुझे मंजूरी देते हैं कि मैं जिन्दगी के नये मोड़ को भी समझूं और उसे जियूं. बस इसी भावना ने मेरी जीवन शैली में परिवर्तन किया और वह घटना घटी, जिसे मैं पहली कहानी के रूप में आपके सामने पेश कर रही हूँ.
घर में हम तीन ही सदस्य हैं. माँ, पापा और मैं. पापा डॉक्टर हैं. माँ एडवोकेट हैं. मैं बी.एससी. कर रही हूँ. साथ ही नीट की तैयारी भी कर रही हूँ. अगर पास हो गयी तो डॉक्टर बनूंगी. नहीं पास हो पायी तो सोचूंगी कुछ और!
दिन में घर पर अकेली ही रहती हूँ. एक दो दिनों में ही मैं मोबाइल के सारे फंक्शन समझ गयी. उस दिन पहली बार मोबाइल पर एडल्ट कंटेंट सर्च की. कुछ वीडियो देखे. इसी सर्च के दौरान मैं अन्तर्वासना तक पहुँच गयी. जहां आप मुझसे मुलाक़ात कर रहे हैं.
अन्तर्वासना पर मैंने हर श्रेणी की एक दो कहानियाँ पढ़ीं. आश्चर्य से भर गयी. ऐसा भी होता है. यहाँ तो कोई किसी को नहीं छोड़ रहा है. न पिता, न भाई, न अंकल, न पड़ोसी, न शिक्षक. सब एक ही कार्य में लगे हैं. क्या वाकई ऐसा होता है. फिर ध्यान आया कि कभी कभी समाचारों में भी देखने पढ़ने को मिलता है कि रिश्तों की मर्यादा तार तार हो गयी. पिता अपनी बेटी के साथ कई वर्षों तक यौनक्रिया करता रहा आदि आदि. तो होता है ऐसा.
अब मेरा भी मन मचलने लगा. मैं भी इस अनुभव से गुजरने की सोचने लगी. शादी को तो अभी कम से कम पांच सात वर्ष हैं. या तो इतना इन्तजार करूं या फिर कोई जुगाड़ लगाऊं. इतंजार अब होने का नहीं तो क्यों तकलीफ में रहूँ. बस एक बार करके देखती हूँ, ऐसा मैंने सोचा और आँखों को खुला छोड़ दिया. तलाशो अपने लिए कोई बांका यार.
मैंने अपने आपको विशेष रूप से सजाना संवारना प्रारम्भ कर दिया. कांच के सामने खड़े होकर अपने को निहारती रहती हूँ. बिना कपड़ों के भी और फैशनेबल कपड़े पहनकर भी.
मेरे कमरे में ही बाथरूम है. वहां से नहाकर निकलती हूँ तो तन पर एक भी वस्त्र नहीं रहता है. कमरे में ड्रेसिंग टेबल है. आदमकद है ड्रेसिंग टेबल. गीले बदन के साथ उसके सामने खड़ी होती हूँ तो अपने पर ही मोहित हो जाती हूँ. पांच फीट पांच इंच का मंझला कद है मेरा. रंग एकदम गोरा. जैसे किसी ने मक्खन में थोड़ा सा सिंदूर मिला दिया हो. चेहरे पर चमक है जो इस उम्र की लड़कियों में होती ही है. आँखें बड़ी बड़ी हैं. होठ एकदम लाल सुर्ख हैं. सुराहीदार गला है. सोने की चेन पहनती हूँ.
गले से नीचे नजर जाती है तो कहना ही क्या. मेरा सीना जबर्दस्त है. मेरी सहेलियां मुझे छेड़ा करती हैं. बड़े बड़े उरोज हैं. एकदम सफेद झक्क. छोटे छोटे निप्पल हैं. निप्पल के आसपास भूरे रंग के दो घेरे हैं.
पेट सपाट है. नाभि गोल और सुदर है.
और नीचे आइये ना … हल्के हल्के बाल उग रहे हैं. अभी तक एक बार भी मैंने नहीं काटे हैं. बालों का रंग सुनहरा है और सुनहरे बालों से घिरी हुई है मेरी चूत. चूत की फांकें थोड़ी उभरी हुई हैं. गुलाबी आभा लिए यह चूत किसी को भी मदहोश कर देने के लिए काफी है.
जब मैं दर्पण में खुद को देखती तो इस बात के लिए आश्वस्त हो जाती कि इस कायनात में कोई भी बन्दा ऐसा नहीं होगा जिसको मैं चाहूँ और वो मेरा न हो सके. मेरे पास पूरा मायाजाल था. बस अब एक ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जिसके साथ मैं वयस्कता यानि एडल्टहुड का अनुभव कर सकूं. सुरक्षित भी रहूँ. बदनामी भी न हो. माता पिता मेरे बड़े प्रतिष्ठित हैं. उनका नाम खराब न हो इस बात की भी मुझे फ़िक्र है.
किसके साथ लूँ यह रंगीन अनुभव? जिस पॉश कालोनी में मैं रहती हूँ वहां एक से बढ़कर एक स्मार्ट लड़के हैं. जब मैं अपनी स्कूटी से निकलती हूँ तो सब हसरत भरी निगाहों से देखते हैं. उम्रदराज लोग भी ताकते रहते हैं. फब्तियां भी कसते हैं. कॉलेज में मेरे क्लास फेलो लड़के भी हमेशा मेरे इर्द गिर्द घूमते रहते हैं. इनमें से कोई भी मेरी एक मुस्कान से ही मेरे कदमों में आ पड़ेगा.
परन्तु मैं ऐसा नहीं चाहती हूँ. इससे बदनामी हो सकती है.
कोई ऐसा लड़का हो, जिससे मैं पहली बार मिलूं और मेरा काम हो जाये.
मैंने तलाश जारी कर दी. जहाँ चाह वहां राह.
माम डेड के जाते ही उस दिन मैं भी अपनी स्कूटी से घर से निकल गयी. बड़े शहर में रहती हूँ. नाम नहीं बताऊँगी. घर से दस बारह किलोमीटर चलते हुए एक काफी हाउस के बाहर रुकी. अंदर गयी और काफी पीते हुए अपने जीवन के पहले अनुभव के लिए साथी की तलाश करने लगी.
कोई नहीं दिखा ढंग का बन्दा … निराश होकर बाहर आ गयी.
स्कूटी पर बैठकर स्टार्ट की तो वह घुर्र घुर्र करके बंद हो गयी. बार बार कोशिश करने के बाद भी वह चालू नहीं हुई. आठ दस बार किक भी मारी, मगर ढाक के तीन पात. कोई परिणाम नहीं निकला.
तभी वहां एक लड़का आया. बहुत ही शालीनता से बोला- छोड़िये ! मैं कर देता हूँ स्टार्ट!
मैंने देखा तो धड़कन बढ़ गयी. बस यही है, जिसकी मुझे तलाश थी.
मैंने उस दिन मेरून रंग का बड़े गले का टॉप पहना था और बहुत ही टाईट जींस थी. बूब्स तो आधे से अधिक दिख रहे थे. थोड़ा सा झुकती तो दोनों बाहर भागने को तैयार हो जाते. अगर कोई थोड़ा ध्यान से मेरी जींस की तरफ देखता तो उसे मेरी चूत की बनावट का आभास हो जाता और गांड का तो कहना ही क्या. वह तो जींस फाड़कर बाहर निकलने को बेताब थी.
मैं थोड़ा झुकी और स्कूटी से अलग हटकर खडी हो गयी.
उस लड़के ने जमकर दो तीन किक मारी और गाड़ी स्टार्ट हो गयी.
मुझे गुस्सा आया. इतनी जल्दी स्कूटी ऑन हो गयी. पर प्रकट रूप में कहा- थेंक्स !! आपने आते तो बहुत तकलीफ हो जाती मुझे.
वह- मेरा नाम धर्मेन्द्र है. मैं ऑटोमोबाइल इंजीनियर हूँ. मेरे लिए किसी भी गाड़ी को ठीक करना बाएं हाथ का खेल है.
मैं- और मेरा नाम नंदिनी है. मैं डॉक्टर बनने की कोशिश कर रही हूँ.
धर्मेन्द्र- गुड … अब मैं चलूं?
मैं- जी, मगर मुझे यहाँ से दस किलोमीटर जाना है, अगर गाड़ी फिर बंद हो गयी तो?
धर्मेन्द्र- वैसे तो बंद नहीं होगी अब आपकी गाड़ी, आप किस तरफ जा रही हैं?
मैंने अपने घर की उल्टी दिशा के बारे में बता दिया.
धर्मेन्द्र- अरे वाह! उधर तो मेरा भी घर है. चलिए मैं भी उधर ही जा रहा हूँ. रास्ते में अगर कोई तकलीफ हुई तो मैं आपकी हेल्प कर दूंगा.
मैं तो तैयार ही थी. चल दी साथ. धर्मेन्द्र की मोटर सायकल स्टायलिश थी.
कोई आठ किलोमीटर जाने के बाद धर्मेन्द्र ने एक मल्टी के सामने अपनी मोटरसायकल खडी कर दी और बोला- यहीं मैं रहता हूँ. अब आपका घर भी पास में ही है. अब आपको कोई दिक्कत नहीं आयेगी. आप चाहें तो मेरे घर चलिए, काफी पी लीजिये.
इसके पहले कि धर्मेन्द्र का इरादा बदलता मैंने तुरंत स्कूटी साइड में लगाई और उसके साथ उसके घर आ गयी.
धर्मेन्द्र एक जेंटलमेन था. वह कोई कोशिश नहीं कर रहा था. मैंने एक लड़की थी और इससे मेरा इगो हर्ट हो रहा था.
उसके घर पर कोई नहीं था. उसने बताया कि सभी परिवारजन किसी शादी में शामिल होने के लिए गये हैं और वह भी शाम को जायेगा.
मैं सोफे पर बैठ गयी. धर्मेन्द्र काफी बनाने चला गया. मैंने मन ही मन कहा ‘बेटा नंदिनी, तुझे भाग्य से मौका मिला है चूकना मत!’
काफी बहुत ही अच्छी थी.
मैं- आपका कर्ज कैसे उतारूँ. आपने पहले मेरी गाड़ी स्टार्ट की और अब काफी पिलाई.
धर्मेन्द्र- नहीं कर्ज की कोई बात नहीं है. मेरा मोबाइल नम्बर ले लीजिये कभी कोई काम हो तो बताइए.
मैं- आप मेरे लिए क्या कर सकते हैं?
धर्मेन्द्र- जो भी आप कहें.
मैं- अगर मैं आपसे अभी कोई काम बताऊं तो आप करेंगे.
धर्मेन्द्र- जरुर. बोलो ना नन्दिनी जी.
मुझे उसके मुंह से नन्दिनी जी सुनना अच्छा लगा. इसलिए मैंने यह कहानी नन्दिनी जी के नाम से ही लिखी है.
मैं- आप नाराज भी हो सकते हैं!
धर्मेन्द्र- प्रोमिस बाबा नहीं होऊंगा नाराज, बोलो?
मैंने संक्षेप में धर्मेन्द्र को अपनी ख्वाहिश बताई.
वह पहले तो भौचक्का रह गया. फिर मेरे पास आकर बैठ गया. उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और गार्जियन की तरह समझाने लगा- नन्दिनी जी, यह रास्ता बहुत फिसलन भरा है. सम्भल जाओ.
मैं- बस एक बार … इसके बाद नहीं.
धर्मेन्द्र- ओके, बताओ क्या चाहती हो?
मैं- आपको पूरा नंगा देखना चाहती हूँ. और आपके लंड को छूना चाहती हूँ.
मेरे मुंह से लंड शब्द सुनकर धर्मेन्द्र मुस्कुरा दिया, बोला- तो पक्का इरादा करके निकली हो तुम. भगवान का शुक्र है कि मुझसे मिल गयी. आओ मैं तुम्हारी इच्छा भी पूरी कर दूंगा और तुम्हें नुक्सान भी नहीं पहुँचने दूंगा.
वह मुझे अपने कमरे में ले गया और बोला लो कर लो जो चाहो, मैं आधे घंटे के लिए तुम्हारे हवाले हूँ.
मैंने उसके शर्ट को खोल दिया. बनियान भी निकाल दी. उसने जींस पहना हुआ था. उसका लंड खड़ा हो गया था.
मैंने जींस का बटन खोला और चेन भी खोल दी. काले रंग की कट वाली अंडरवियर उसने पहन रखी थी.
मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया.
वाह क्या दर्शनीय शरीर था उसका. एकदम फ़िल्मी हीरो की तरह.
लंड भी लम्बा और मोटा था. लंड की जड में घुंघराले बाल थे.
मैं उसके शरीर के एक एक भाग को ध्यान से देखने लगी. फिर मैंने अपने कपड़े भी उतार दिए. धर्मेन्द्र ने मुझे देखा और बोला- बहुत सुंदर हो नन्दिनी जी. खुद को बर्बाद मत करो.
मैं उससे लिपट गयी. उसका लंड मेरे पेट पर टकरा रहा था. मैंने अपने बूब्स उसके सीने में गड़ा रखे थे. मेरे कहने पर उसने मुझे अपनी बांहों में ले लिया. दस मिनट तक मैं उसे फील करती रही.
मेरी चूत गीली हो गयी थी. मन हो रहा था कि यह मुझे पटक के चोद दे तो मजा आ जाये.
पर वह किसी और ही मिट्टी का बना था. नपुंसक नहीं था वह. उसका लंड खड़ा था. एक मिनट में ही वह मेरी चूत को फाड़ सकता था. मुझे उसके संयम पर प्यार आने लगा.
मैं- धर्मेन्द्र जी! क्या मैं आपके लंड को छू सकती हूँ?
उसने हाँ में सिर हिलाया.
मैंने उसका लंड हाथ में लिया. गर्म और कड़क. मैं उस पर अपने हाथ फिराने लगी. मेरा मन हुआ कि चूम लूं इसे! अबकी बार मैंने पूछा नहीं और लंड पर तीन चार चुम्मे दिए. चूसने का मन हुआ. मुंह खोला और लंड अंदर ले लिया. चूसने लगी. धर्मेन्द्र अविचल खड़ा था. बस कभी कभी सिसकारी निकल जाती उसके मुंह से पर वह बेकाबू नहीं हो रहा था.
मैं- धर्मेन्द्र जी मेरे बूब्स को दबा सकते हो आप?
वह- हाँ मगर एक बार ही. आपको अनुभव देने के लिए.
मैं गांड की तरफ से उनके सीने से चिपक गयी, अब उसका लंड मेरी गांड को स्पर्श कर रहा था और मैंने उनके हाथ पकड़कर अपने बूब्स पर रख दिए. धर्मेन्द्र ने पांच मिनट तक बूब्स को दबाया. मालिश की. मैं मस्त हो गयी.
मैं- क्या आप मेरे चूत को छू सकते हो. थोड़ा चाट सकते हो.
उसने बिना कोई जवाब दिए वैसा कर दिया.
मैं- अब घुसा दो अपना लंड मेरी चूत में प्लीज.
वह- नहीं यह नहीं करूंगा नन्दिनी. लेटो तुम. मैं लंड तुम्हारी चूत से स्पर्श कर देता हूँ पर चोदूँगा नहीं.
उसने चूत के बाहर से अपने लंड को घिसा. मुझे अच्छा लगा. मैं उल्टी लेट गयी. वह मेरी भावना समझ गया. उसने मेरी गांड की दरार और उसके छेद पर भी अपना लंड घिसा.
धर्मेन्द्र- नन्दिनी जी, आपकी इच्छा पूरी हो गयी ना. चलो अब पहन लो कपड़े!
वाकई मुझे ऐसा लगा जैसे मैं पूरी तरह तृप्त हो गयी. मैं बिना चुदे ही अपने आपको तृप्त महसूस कर रही थी. मैं एक बार और धर्मेन्द्र से लिपटी और कपडे पहन लिए. धर्मेन्द्र भी वापस तैयार हो गया.
एक बार फिर उसने काफी बनाई और मुझे इस शर्त के साथ विदा किया कि मैं सीधे घर जाऊँगी और घर पहुँचते ही उसे फोन करूंगी.
मैं बच गयी उस दिन. कोई और होता तो मेरी लालसा का लाभ उठाता और मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ देता. मगर धर्मेन्द्र अलग था. मैं उसपर मोहित हो गयी. दमदार लंड का मालिक अपने सामने नंगी पड़ी मस्त लड़की को देखकर भी संयम रख ले तो उसमें कोई बात है.
मैं गुनगुनाते हुए घर पहुँची और उसे फोन किया- थेंक्स धर्मेन्द्र जी.
धर्मेन्द्र- वेलकम नन्दिनी जी.
मैं- कभी और मेरा मन हुआ तो?
धर्मेन्द्र- मैं हूँ ना!
उसके बाद मैं धर्मेन्द्र से कई बार मिली.
यह कहानी आपको कैसी लगी. भारतीय समाज में अभी भी मर्यादा है. धर्मेन्द्र जैसे युवक देश की शान है. आप मुझे कहानी के बारे में nandiniji1999@gmail.com पर लिखें. अपने जीवन में सेक्स का आनन्द अवश्य लें पर अपने परिवार की प्रतिष्ठा का ध्यान रखें. अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी होगी तो मैं आपको अपनी अन्य कहानियाँ भी सुनाऊँगी.