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Sunday, December 23, 2018

बार डांसर से कॉल गर्ल बन गई

मेरा नाम कविता है मैं जयपुर की रहने वाली हूं, मेरी उम्र 25 वर्ष है। मैं मुंबई की कंपनी में काम करती हूं, मुझे मुंबई में दो वर्ष हो चुके हैं, इन दो वर्षों में मेरे घरवाले मुझसे मिलने कई बार मुंबई आ चुके हैं। मुझे बहुत ही अच्छा लगता है जब मेरे माता पिता मुझसे मिलने के लिए मुंबई आते हैं। मेरे साथ में एक लड़की रहती है उसका नाम काजल है। काजल बहुत ही अच्छी लड़की है और काजल भी दिल्ली की रहने वाली है। हम दोनों की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के रूप में शुरू हुई और जब हम दोनों की मुलाकात हुई तो उसके बाद हम दोनों की बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी। मैंने जब एक बार काजल से कहा कि मुझे रहने की बहुत दिक्कत है इसी वजह से उसने मुझे कहा कि हम लोग कहीं पर फ्लैट लेते हैं ताकि हम दोनों साथ में ही रह पाए, इसीलिए मैं काजल के साथ रहने चली गई। काजल और मेरे बीच में बहुत अच्छी दोस्ती है इसीलिए जब भी मेरे घर वाले मुझसे मिलने आते हैं तो वह मेरे पास ही रुकते हैं और जब वह आते हैं तो उस वक्त मैं अपने ऑफिस से छुट्टी ले लेती हूं।
मेरे पिताजी बहुत ही सिंपल और साधारण व्यक्ति हैं, वह अभी भी बहुत ही पुराने ख्यालातो के हैं। जब भी वह मुझसे मिलने आते हैं तो काजल हमेशा कहती है कि तुम्हारे पिताजी तो बहुत ही पुराने ख्यालातो के हैं। मैं काजल से कहती हूं कि वह पहले से ही ऐसे हैं, वह बहुत ही सिंपल और साधारण व्यक्ति हैं। उन्हें ना तो किसी के साथ ज्यादा बात करना अच्छा लगता है और ना ही वह कभी भी किसी के साथ कुछ गलत बात करते हैं। वह जब भी मुंबई आते हैं तो ज्यादा किसी से भी बात नही करते। मैं और काजल साथ में बहुत अच्छे से रहते हैं, हम दोनों के बीच कभी भी झगड़ा नहीं हुआ। मैं जिस कंपनी में नौकरी करती हूं, एक दिन उस कंपनी का बहुत बड़ा नुकसान हो गया और इसी वजह से उस कंपनी के सारे लोगों को नौकरी छोड़नी पड़ी। कुछ समय तक तो हमारी कंपनी ने हमें पैसा दिया लेकिन उसके बाद हमें तनख्वा मिलनी बंद हो गई इसलिए मैं अब घर पर ही थी और मेरे पास कुछ भी काम नहीं था। मैंने काजल से भी कहा कि यदि तुम्हारी कंपनी में कोई जॉब हो तो तुम मुझे बता देना, वह कहने लगी ठीक है मेरी कंपनी में यदि कोई जॉब होगी तो मैं तुम्हें बता दूंगी।
मैंने अपने और भी दोस्तों को इस बारे में बता दिया था लेकिन मैं जिस भी कंपनी में जाती हूं वहां पर ज्यादा सैलरी नहीं मिलती इसलिए मैंने कहीं पर भी ज्वाइन नहीं किया। मैं घर पर ही थी और काफी समय से खाली बैठी हुई थी लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए क्योंकि मुझे कहीं भी नौकरी नहीं मिल रही थी, मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गई थी। एक दिन मुझे एक व्यक्ति मिला और वह मुझे कहने लगा कि मेरे पास तुम्हारे लिए एक काम है परंतु तुम शायद वह नहीं कर पाओगे, मैंने पूछा की वह किस प्रकार का काम है, तो वह कहने लगा कि तुम्हें डांस बार में डांस करना होगा। मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हें इस बारे में सोच कर बताऊंगी, पहले मैंने उसे कुछ भी जवाब नहीं दिया लेकिन जब मेरे पास कोई भी काम नहीं था तो मैंने उसे कहा कि ठीक है मैं बारडांस का काम करने के लिए तैयार हूं। उस व्यक्ति का नाम सुरजीत है, वह मुझे एक बार में ले गया और उसने मुझे वहां के मालिक से मिलवाया। जब मैं उसके मालिक से मिली तो उन्होंने मुझे सब कुछ समझा दिया। अब मैं डांस बार में डांस करने लगी थी। मुझे उसके बदले बहुत अच्छे पैसे मिलते थे लेकिन मैंने कभी भी इस बारे में काजल को नहीं बताया। मेरे पास बहुत अच्छे पैसे होने लगे थे इसलिए मुझे डांस बार में काम करना अच्छा लगता था। वहां पर कई लोग आते थे और मेरी उनसे भी मुलाकात होती थी। वह सब पैसे वाले लोग थे और मेरी भी अब पैसों को लेकर भूख बढ़ने लगी। बीच-बीच में मुझे सुरजीत मिल जाया करता था और मैं उसे भी कुछ पैसे देती थी। वह भी बहुत खुश होता था जब मैं उसे पैसे देती थी क्योंकि उसका यही काम था और वह एक दलाल है, जो की लड़कियों को डांस बार में काम पर लगाता है और उसके बदले लड़किया उसे कुछ पैसे देती हैं। उसने मुझसे भी कुछ पैसे लिए, मैंने शुरुआत में उसे पैसे दिए थे लेकिन मैं उसे बीच बीच में कुछ ना कुछ पैसे दे दिया करती। डांस बार में मैं बहुत से कस्टमर बनने लगे थे और सब मुझ पर बहुत पैसा उड़ाते थे। मुझे भी अच्छा लगता था जब वह मुझ पर पैसा उड़ाते थे लेकिन मैंने यह बात कभी भी काजल को नहीं बताई। काजल मुझसे एक दिन पूछने लगी की तुम्हारी कौन सी कंपनी में जॉब लगी है। मैंने उसे बताया कि मेरी एक बहुत ही अच्छी कंपनी में नौकरी लग गई है और वहां पर मेरी बहुत अच्छी तनख्वाह है।
वह मुझे कहती कि अब तुम पहले से बहुत ज्यादा पैसे खर्च करती हो। मैंने उसे कहा कि अब मुझे ज्यादा तनख्वाह मिलती है इसीलिए मुझे अपने ऊपर पैसे खर्च करना अच्छा लगता है। मैं काजल को जब भी शॉपिंग के लिए लेकर जाती तो मैं अपने लिए हमेशा ही महंगे ब्रेंड के कपड़े लेती थी और कई बार मैं काजल को भी कुछ कपड़े दिला दिया केरती थी इसीलिए वह मुझसे हमेशा ही पूछती थी लेकिन मैंने उसे कभी भी उसे अपने काम के बारे में नहीं बताया। मैं अपने काम पर शाम के वक्त जाती थी। मुझे अब पैसों का बहुत ज्यादा लालच बढ़ने लगी थी तो मैं अब और बड़ा कुछ करना चाहती थी इसलिए मैंने सुरजीत से इस बारे में बात की तो सुरजीत मुझे कहने लगा अभी फिलहाल तुम डांस बार में काम करो। मैं चाहती थी कि मैं अब और ज्यादा पैसे कमाऊ। मेरी इस बारे में कोई लोगों से मुलाकात हो चुकी थी और मैंने उनसे भी बात की थी परंतु मुझे कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जिससे कि मैं खुलकर बात करू। मैंने अपनी जिंदगी को दो तरीके से जीना शुरू कर दिया था।
काजल और मेरे घर वालों को लगता था कि मैं एक अच्छी कंपनी में काम करती हूं। मैंने यह बात किसी को भी नहीं बताई थी कि मैं एक बार में डांस करती हूं इसीलिए मुझे कई बार ऐसा लगता था कि शायद मैं दोहरी जिंदगी जी रही हूं लेकिन मैं अपने जीवन से खुश थी और मुझे पैसा भी अच्छा मिलता था इसीलिए मैं डांस बार में काम करना पसंद करती थी। डांस बार में भी मेरी कई दोस्त बन चुकी थी जो कि मुंबई में कुछ ना कुछ करने आई थी परंतु वह अपने जीवन में कुछ भी नहीं कर पाई इसलिए मजबूरी में उन्होंने बार में डांस करना शुरू कर दिया। एक दिन मैं घर में ही थी उस दिन काजल की भी छुट्टी थी। मैंने काजल से कहा कि क्यों ना हम लोग कहीं घूमने चलें, काजल कहने लगी कि काफी समय से मैंने भी कुछ सामान नहीं लिया है इसलिए आज हम लोग मॉल चलते हैं। जब हम लोग मॉल गए तो हम लोग शॉपिंग करने लगे।  मैंने भी अपने लिए कुछ कपड़े ले लिए और उसके बाद मैं और काजल घर वापस आ गए हैं। जब हम लोग घर पर बैठे हुए थे तो उस वक्त मुझे सुरजीत का फोन आया और वह मुझे कहने लगा कि मुझे तुमसे मिलना है, मैंने उसे कहा ठीक है मैं कुछ देर में तुम्हारे पास आती हूं। जब मैं उसके पास गयी तो वह मुझे एक होटल में लेकर गया और वहां मुझे कहने लगा कि आज मैं तुम्हें एक बहुत ही पैसे वाले व्यक्ति से मिलाता हूं। मैंने सुरजीत से पूछा कि वह व्यक्ति कौन है वह कहने लगा तुम्हें उसे खुश करना है और उसके बदले वह तुम्हें बहुत पैसे देंगा। मैने सुरजीत से पूछा कि मुझे किस प्रकार से उसे खुश करना होगा। वह कहने लगा कि तुम्हें उनका पूरा मूड बनाना है और उसके बदले वह बहुत ही अच्छा पैसा देगा मैंने सुरजीत से कहा ठीक है। जब हम लोग उस व्यक्ति के रूम में गए तो उन्होंने बहुत ही महंगी से घड़ी और सूट बूट पहना हुआ था। उन्होंने मुझे पैसे दिए और मैंने उन पैसों में से सुरजीत को कुछ पैसे दे दिए उसके बाद वह वहां से चला गया।
वह व्यक्ति और मैं साथ में ही थे उन्होंने अपने 9 इंच मोटे लंड को अपनी पैंट से बाहर निकाला तो मुझे उनका लंड देखकर सेक्स करने का मन होने लगा। मैंने उनके लंड को अपने मुंह में समा लिया और बहुत अच्छे से चूसने लगी। मैंने उनके लंड को अपने पूरे मुंह के अंदर तक ले लिया और काफी देर तक उनके लंड को मैंने ऐसा ही सकिंग किया। वह पूरे मूड में थे उन्होंने मेरे सारे कपड़े खोल दिए। जब उन्होंने मेरी योनि पर अपनी जीभ को लगाया तो मुझे बड़ा अच्छा लगा। उन्होंने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया और जैसे ही उनका लंड मेरी योनि में गया तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा। वह मुझे तेजी से धक्के दे रहे थे मैं अपने मुंह से सिसकिया ले रही थी और मुझे काफी आनंद आ रहा था। उन्होंने मुझे बड़ी तेज तेज धक्के मारे जिससे की उनका वीर्य मेरी योनि में गिर गया। उसके बाद मैंने अपनी योनि को साफ किया और उन्होंने मेरी गोरी और मुलायम गांड को अपने हाथों में दबाना शुरू कर दिया और बड़ी तेजी से वह मेरी गांड को दबा रहे थे मुझे अच्छा लगा। उन्होंने अपने लंड पर कुछ लिक्विड लगा लिया और उन्होंने मुझे घोड़ी बना दिया। जैसे ही उन्होंने मेरी गांड के अंदर अपने लंड को डाला तो मैं चिल्ला उठी और मुझे बहुत दर्द होने लगा। वह बड़ी तेजी से झटके दे रहे थे मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। जब उनका मोटा लंड मेरी गांड के अंदर जाता तो मुझे बहुत ज्यादा दर्द होता लेकिन उसके बावजूद भी मुझे मजा आने लगा था। मैं उनसे अपनी गांड को टकराने लगी थी। मैंने उन्हें कहा आप मुझे तेज धक्के मार रहे हो मुझे बहुत मजा आ रहा है। वह मुझे ऐसे ही धक्के मारने पर लगे हुए थे वह ज्यादा समय तक मेरी गांड की गर्मी को  झेल नही पाए उनका माल मेरी गांड मे गिर गया।

मक्के के खेत में चचेरी बहन की पहली चुदाई



मेरा नाम किशोर है, मैं यू.पी. के एक छोटे से गाँव में रहता हूँ। बात सन् 2006 की है, मैं उस वक्त ग्यारहवीं कक्षा पास करके बारहवीं में आया था। मैं एक सीधा-सादा, शर्मीला लड़का हुआ करता था, पर पढ़ने में बहुत तेज़। आज से आठ-नौ साल पहले गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूल 1 जुलाई को खुलते थे, पर गाँव के स्कूलों की कक्षाओं में अगस्त-सितम्बर से पहले रौनक नहीं होती थी।
गाँव में मेरा घर लगभग बीच में ही है। हमारे घर के ठीक पीछे एक घर है, जिसकी छत हमारी छत से मिली हुई है। उस घर में मेरे एक दूर के ताऊ जी रहते थे। उनकी एक इकलौती लड़की थी सीमा। वो लड़की हमारी बिरादरी में सबसे सुन्दर मानी जाती थी। बात सच भी थी। हालाँकि मैं लड़कियों के साईज़ नहीं नापता, पर कह सकता हूँ कि वो एक ऐसी लड़की थी, जिसे देखते ही आपके जैसे लोग, उसे अपने नीचे होने का सपना देखने लगें। गोल चेहरा, बड़ी आँखें, सुर्ख़ लाल होंठ, गुलाबी गाल और गोरा बदन, सभी के होश फाख़्ते करने वाले थे।
अगस्त का महीना था, सावन पूरा झूम रहा था, बारिशों का दौर शुरु हो गया था, पर गर्मी जस की तस थी। बिजली की सुविधाएँ गाँव में आज भी न के बराबर हैं, तब की तो बात ही क्या करें। इसलिए गर्मी से बचने के लिए हम छत पर ही बिछौना करके सोते थे। ताऊ जी की छत कच्ची थी और हमारी पक्की, इसलिए उनके घर के सदस्य हमारी छत पर ही सोते थे।
सामान्यतः मैं सीमा को दीदी कहकर बुलाता था क्योंकि वो मुझसे चार साल बड़ी थी। हम दोनों को अंताक्षरी खेलने का बहुत शौक था। जब भी मौका मिलता हम खेलने लग जाते।
एक दिन शाम को हल्की सी बारिश हो गई, जिसके कारण मेरे परिवार के लोग नीचे आँगन में ही सो गए, पर मैं ज़िद करके ऊपर छत पर ही चला गया। वहाँ ताई जी और सीमा पहले से लेटी थीं।
सीमा ने मेरा बिछौना अपने पास ही करवाया और फिर हम अंताक्षरी खेलने लगे। हालाँकि गाँवों में (खासकर हमारे गाँव में) लड़का-लड़की के ज्यादा पास रहने को शक की नज़र से देखा जाता है, पर हम पर शक ना करने के दो कारण थे। पहला यह कि सीमा मेरी चचेरी बहन थी दूसरा यह कि वो मुझसे 4 साल बड़ी थी और 23 साल की थी। और फिर हम दोनों ही बहुत समझदार माने जाते थे, इसलिए हम पर शक शायद ही कोई करता।
अंताक्षरी ज्यादा देर नहीं चली, लगभग आधे घण्टे में ही सीमा को नींद आ गई और वह सो गई। पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। हालाँकि मेरे मन में कोई गंदगी नहीं थी पर फिर भी मन अशान्त था। दरअसल कहीं पढ़ा था कि जब जाड़ों के बाद गर्मियाँ और गर्मियों के बाद बरसात शुरू हो यानि होली के आसपास और सावन के दिनों में मनुष्य में प्रेम और काम भावनाओं का कुछ ज्यादा ही विस्तार होता है, शायद इसी कारण अशान्त था।
खैर थोड़ी देर में मैं भी सो गया।
थोड़ी देर ही हुई होगी कि ताई जी ने खर्राटे लेना शुरु कर दिया जिससे मेरी आँख खुल गईं। आँख खुलते ही मैंने पाया कि सीमा का एक हाथ मेरे सीने पर रखा था और एक टाँग मुड़कर मेरी टाँगों पर रखी थी। उसकी जाँघ मेरे शिश्न पर दबाब डाल रही थी, मतलब वो मेरी ओर करवट लेकर लेटी थी। उसकी साँसें मेरी गर्दन पर महसूस हो रहीं थीं।
सीमा के हाथ, जाँघ और साँसों के स्पर्श का अहसास होते ही मेरे शरीर में मानो एक अद्भुत ऊर्जा की एक बड़ी सी लहर दौड़ गई। मेरे लण्ड को सिर्फ 3 सैकेण्ड लगी होंगी खड़े होने में। मैं केवल एक कच्छे में था। मेरा लण्ड खड़ा होने के बाद कच्छे और सीमा की हल्की सी सलवार में से भी उसकी मलाई सी मुलायम जांघ को महसूस कर रहा था। पहले तो मैं ताई जी को उनके खर्राटों की वजह से जगाना चाहता था, पर सीमा के उस अद्भुत कामुक स्पर्श ने मुझे ऐसा करने से रोक दिया।
लण्ड इतना ज़ोर लगा रहा था मानो किसी भी क्षण कच्छे और सलवार को फाड़ता हुआ सीमा की जाँघ में छेद कर देगा। शरीर में इतनी बेचैनी हो गई थी कि लगता था कि फटने वाला हूँ। मैं पड़ा-पड़ा अपने यौवन के उस प्रथम नारी स्पर्श का आनन्द ले रहा था।
तभी सीमा हल्की सी अंगड़ाई लेते हुए मेरी तरफ और ज्यादा खिसकी। इससे उसके होंठ मेरी गर्दन पर छू गए, और मेरा लण्ड उसकी चूत के पास पहुँच गया। इस घटना ने मेरे अन्दर और भी अधिक उत्तेजना भर दी। इस प्रकार का अहसास मुझे पहली बार हो रहा था।
जब उत्तेजना ज्यादा बढ़ गई तो मैंने हिम्मत करके उसकी ओर करवट ली और अपना हाथ उसकी बगल में डाल दिया। उसके उरोजों को छूने की हिम्मत अभी नहीं आयी थी। उसकी ओर करवट लेने पर मेरा लण्ड उसके पेट पर टक्कर मारने लगा। सीमा ने सलवार कमीज पहनी थी, उसकी कमीज थोड़ी ऊपर उठी थी। इसी कारण मेरे लण्ड और उसके पेट के बीच बस मेरे कच्छे की परत थी।
मेरी इस पहल से सीमा हरकत में आई और मेरी कमर पर हाथ रखकर मुझे अपनी ओर खींचने लगी। अब मुझे पता चल गया कि वह भी जाग रही है, मगर हमने एक-दूसरे से कुछ बोला नहीं। जब उससे मैं एक हाथ से नहीं खिंचा तो उसने अपना दूसरा हाथ मेरी नीचे वाली बगल में डालकर मुझे दोनों हाथों से अपनी ओर खींचा। मौका पाकर मैंने भी उसकी नीचे वाली बगल में हाथ डालकर उसे अपने में समेटने की कोशिश करने लगा।
लगभग दस मिनट हमने एक दूसरे को कसकर भींचा। उस आलिंगन से ऐसा मज़ा आ रहा था जैसे… उफ़ बयां नहीं कर सकता। अब तक दोस्तों से सुना था कि लड़की को चोदने में बहुत मज़ा आता है मगर मुझे तो आज बस सीमा को कसकर गले लगाने में ही इतना मज़ा आ रहा था कि लग रहा था जन्नत में हूँ।
हमने धीरे-धीरे एक दूसरे को रगड़ना शुरु कर दिया। इस रगड़ ने मेरे अन्दर इतनी ऊर्जा भर दी कि एक-एक नस में खून की बाढ़ आ रही थी। हम लिपटे-लिपटे एक दूसरे को खूब ज़ोर से रगड़ रहे थे। मेरा लण्ड उसकी चूत से बस थोड़ा ही ऊपर रगड़ रहा था। उसके बिना ब्रा वाले उरोजों की घुण्डियों को मैं उसकी पतली सी कमीज के ऊपर से महसूस कर सकता था।
कुछ देर बाद सीमा ने मुझको खुद से थोड़ा दूर किया और एक हाथ से कच्छे के ऊपर से मेरे लण्ड को टटोलने लगी। उसका हाथ लगते ही मेरा लण्ड इतना व्याकुल हो गया जैसे मेरे शरीर को छोड़ उसके हाथों में चिपकना चाहता हो।
मैं भी सही अवसर भाँपते हुए अपने एक हाथ से उसकी कमीज़ के बटन खोलने लगा। उसके स्तन थोड़ी देर में ही मैंने नंगे कर दिए और एक हाथ से ही उन्हें सहलाना शुरु कर दिया। मैंने जैसे ही उसकी चूचियों पर हाथ रखा वो सिहर उठी। इधर मुझे भी ऐसा लगा जैसे हाथों ने पहली बार कोई इतनी अनमोल चीज छुई हो।
व्याकुल होकर सीमा ने मेरा लण्ड कच्छे से बाहर निकाला और उसे हल्के से सहलाने लगी। फिर सलवार के ऊपर से ही अपनी चूत पर रखकर मुझसे लिपटने लगी। पर मैंने उसे रोका और अपना बनियान उतार दिया, उधर सीमा ने भी अपनी बटन खुली कमीज़ उतार दी। चूँकि सीमा ने मेरा कच्छा नीचे कर दिया, जिसे मैंने पैरों से उतार दिया, अब मैं तो पूरा नंगा था और सीमा ऊपर से नंगी थी पर नीचे सलवार थी।
ताई जी अभी भी भयानक खर्राटे ले रहीं थीं, उनके खर्राटे हम भाई बहन को संतुष्ट कर रहे थे कि अभी कोई खतरा नहीं है। अब फिर से हम एक दूसरे से लिपट गए और एक दूसरे को अपने अंदर समेटने की कोशिश करने लगे। मैं अपने लण्ड को उसकी सलवार के ऊपर से ही रगड़ रहा था, और वो भी इसमे मेरा साथ दे रही थी।
इसी दौरान पश्चिम से चमक के साथ बादल उठना शुरू हो गया, हल्की-हल्की शीतल बयार चलने लगी, जिसने हमारी कामुकता को और बढ़ा दिया था। उस सुहाने मौसम में हम लिपटे हुए अपनी जवानी के रस का सम्पूर्ण आनन्द ले रहे थे। तभी सीमा ने मेरे गाल पर एक चुम्मा लिया। यह मेरे लिए एक और नया अहसास था। कमाल की बात थी कि पिछले एक घण्टे में मुझे जितने नए अनुभव हुए थे, पहले कभी इतने अनुभव एक साथ न हुए थे।
उसके चुम्मे के बाद मैंने भी उत्तर में एक बड़ा सा चुम्मा लिया।
इस बार न जाने क्यों उसकी हँसी छूट गई, जैसे ही वो हँसी मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये और उन्हें चूसने लगा। पहले तो उसने अपने होंठ बहुत कसकर आपस में भींचे रखे, पर थोड़ी देर बाद उसने अपने होंठ खोल दिए, और फिर वो मेरे और मैं उसके होंठों का कामुक रस पीने लगे।
फिर धीरे-धीरे मैं उसके नाड़े की ओर बढ़ा। मैंने उसका नाड़ा खोल दिया और धीरे से अपना हाथ उसकी चूत की ओर बढ़ाने लगा। वो शायद बहुत उत्तेजना में थी, इसीलिए उसने कोई विरोध नहीं किया। मैं उसकी चूत को सहलाने लगा, जो उसके रस से बिल्कुल भीग रही थी।
अभी तक कोई भी रस मैंने जबान से चखा था, आज पहली बार पता चला कि एक रस ऐसा भी है जो हाथों से भी चखा जा सकता है, जो कि बहुत नशीला भी होता है।
अब सीमा ने मेरे कान में धीरे से कहा- अंदर घुसायेगा?
मैंने हाँ में उत्तर दिया।
फिर बोली- बहुत धीरे से घुसाना, मम्मी पास में ही है.
मैंने स्वीकृति में हाँ बोला।
फिर हम कामुक मिलन के लिए तैयार हो ही रहे थे कि अचानक बहुत तेज़ हवा चलने लगी। आँधी आ गई, हल्की-हल्की बूँदें भी थीं। इससे पहले कि ताई जी जाग जायें, हम होश में आए और एक दूसरे से अलग हो गए और फिर जल्दी-जल्दी कपड़े पहने।
तभी बारिश तेज़ हो गई। वो अपने घर चली गई और मैं अपने घर। पर हम दोनों की प्यास अधूरी रह गई।
बारिश पूरी रात पड़ी और उस बारिश की रात में मेरी बेचैनी इतनी बढ़ी रही कि नींद नहीं आई। सुबह के समय थोड़ा बहुत सोया होऊँगा।
सुबह-सुबह पिता जी ने जगाया और कहा कि आज तुझे मक्का रखवानी है। दरअसल हमारे एक खेत में मक्का उगी हुई है। वह खेत गाँव से बाहर ट्यूबवेल पर है।
मैंने पिता जी से कहा- मेरे बस की नहीं है मक्का रखवानी, मुझे डर लगता है वहाँ।
तो पिता जी बोले- अरे डरने की कौन सी बात है, सीमा भी तो रखवाती है अपनी मक्का वहाँ। सीमा का खेत भी बिल्कुल हमारे खेत से मिलकर है।
इतना सुनते ही मैं फट से तैयार हो गया खेत पर जाने के लिए, और जैसे ही मैंने बाहर जाकर देखा तो सीमा हमारे दरवाज़े पर खड़ी थी, वो मुझे बुलाने आई थी।
मुझे देखते ही वो शर्मा गई और आँखें नीचे झुका लीं। उसका चेहरा शर्म से लाल हो रहा था और वो मुझसे नज़र नहीं मिला पा रही थी। मैं भी उससे नज़र नहीं मिला पा रहा था, मगर हमारे हाव-भाव बता रहे थे कि हम दोनों ही अपनी अधूरी प्यास को बुझाने के लिए बेचैन थे।
मैंने पिता जी से कहा- सीमा मुझे बुलाने आई है, मैं जाकर खेत में मक्का रखवा देता हूँ।
पिता जी ने कहा- ठीक है, मगर टाँड पर मक्का रखते समय ध्यान रखना कि कहीं चोट न लग जाए।
गाँव से बाहर निकलते ही खेत शुरू हो जाते थे, हम दोनों खेत पर पहुँच गए।
सीमा ने कहा- मैं अपने खेत से मक्का उठाकर लाती हूँ और तुम अपने खेत से ले आओ.
हम दोनों अपने-अपने खेतों से मक्का उठाकर लाने लगे और खेत की कोठरी में लाकर इकट्ठा करने लगे। जब सारा मक्का इकट्ठा हो गया तो उसको टाँड पर भी रखना था। मैंने सीमा से कहा कि वो नीचे से मक्का उठाकर मुझे उठाकर पकड़ाती रहे और मैं उसे ऊपर टाँड पर रख दूँगा।
सीमा ने गले में जो चुन्नी डाली हुई थी उसे कमर पर बाँध लिया और नीचे झुकते हुए मुझे मक्का की टोकरी भर कर पकड़ाने लगी। जब वो नीचे झुकती तो उसकी कमीज़ के अंदर लरज़ते उसके स्तनों की झलक भी मुझे मिल जाती जिसने बरसात की पहली रात की कामुकता को फिर से जगाना शुरू कर दिया।
दो तीन-बार कमीज़ में लटकते उसके स्तनों को देखकर मेरे लण्ड ने अपना आकार लेना शुरू कर दिया और वो मेरे पजामे में खड़ा होकर उछलने लगा।
मेरी कामुकता बढ़ती ही जा रही थी इसलिए जब सीमा मक्के की टोकरी उठाकर ऊपर उठती हुई मेरी टाँगों को देखती तो मैं अपने लण्ड में जोश का एक झटका उसे दिखा देता।
वो मेरे लण्ड की हरकत देख रही थी, मगर देखकर नज़रें झुका लेती थी। टोकरी उठाते-उठाते उसके गोरे गाल लाल हो चुके थे और इधर मेरे लण्ड का बुरा हाल हो रहा था। मन कर रहा था उसकी कमीज़ उतार कर उसके चूचों पर टूट पड़ूँ।
मैंने सोचा ये ऐसे ही शर्माती रही तो काम नहीं बनेगा। जब वो अगली टोकरी उठाकर देने लगी तो मैंने मक्का पर पैर फिसला दिया और गिरने का नाटक करते हुए जान-बूझ कर उसके बदन को लपक लिया। मेरे शरीर और मक्के की टोकरी दोनों का भार वो संभाल नहीं सकी और टोकरी उसके हाथ से छूट कर गिरने के साथ हम दोनों भी नीचे पड़ी मक्का पर गिर गए।
मैं उसके ऊपर था और वो मेरे नीचे। उसने मेरी आँखों में देखा और मैंने उसकी।
वो मुस्कुरा दी और मुझे सिग्नल मिल गया। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके रसीले अधरों का रसपान करने लगा। वो भी मेरी कमर पर हाथ लपेट कर मेरा साथ देने लगी। मेरा लण्ड तो पहले से ही तना हुआ था। मगर उसके लबों को चूसते हुए वो उसकी चूत में जाने के लिए ऐसे तड़प रहा था जैसे कोई प्यासा बिना पानी के मरने ही वाला हो।
सीमा ने मेरी हालत देखी और अपना एक हाथ मेरी कमर से हटाकर नीचे मेरे लण्ड पर ले जाकर उसे पजामे के ऊपर से ही सहलाने लगी। मेरी उत्तेजना अब मेरे काबू के बाहर हो गयी और मैंने उसके कमीज को उतरवाकर उसके स्तनों को नंगा करवा दिया। सफेद, कोमल, मखमली, मलाई जैसे श्वेत उसके उरेज़ और उनके बीच में तन चुके उसके निप्पल जैसे ही मैंने नज़रों के सामने देखे, मैं उन पर टूट पड़ा। मैं उसके स्तनों को इतनी ज़ोर से चूसने लगा कि उसकी चीख निकल गई।
मगर मेरी उत्तेजना मेरे वश में कहाँ थी, मैंने उसके स्तनों को चूसते हुए उसकी सलवार का नाड़ा खोलना शुरू कर दिया। नाड़ा खुलते ही उसकी चूत को अपनी हथेली से रगड़ने लगा और उसकी टाँगें स्वत: ही फैलने लगीं। मैंने उसकी सलवार को निकाल कर उसको बिल्कुल नंगी कर दिया और साथ ही अपना कुर्ता और पजामा भी निकाल दिया। मेरे कच्छे में तने मेरे लण्ड ने अपना कामरस छोड़-छोड़कर उस पर एक बड़ा सा धब्बा बना दिया था।
मैं नंगी पड़ी अपनी बहन सीमा पर लेट कर उसके होंठों को फिर से चूसने लगा और मेरे कच्छे में तना हुआ मेरा लण्ड उसकी जांघों के बीच में टकराने लगा। सीमा ने अपनी दोनों टांगें ऊपर उठाकर मेरी कमर पर रख लीं और मेरी नंगी कमर को सहलाते हुए मेरे होंठों को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। उसके मखमली कोमल स्तनों को दबाए मेरी छाती से नीचे हाथ ले जाते हुए मैंने अपना कच्छा भी निकाल कर नीचे कर दिया और अपने लण्ड को उसकी चूत के मुंह पर सेट कर दिया।
मेरे लण्ड ने जैसे ही बहन की चूत के होंठों को छूआ तो मैं आनन्द के असीम सागर में गोते लगाने लगा। अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत में अंदर धकेल दिया। वो मुझसे लिपट गई और मेरी गर्दन को चूमने लगी।
मैंने उसको कस कर अपनी बाहों के आगोश में लिया और उसकी चूत में लण्ड को डालकर अंदर-बाहर करना शुरू किया।
आह… आज समझ में आया कि नारी के तन में ऐसी क्या काबिलियत होती है तो जो मर्द को उसका गुलाम बना देती है।
मेरे आनन्द का अनुभव, जो उस समय मुझे मिल रहा था वो मैं बता नहीं सकता। मैंने उसके अधरों को चूसते हुए उसकी चुदाई शुरू कर दी। हम दोनों काम के रस को भोगने लगे।
पहली बार था तो मैं ज्यादा देर टिक नहीं पाया और मैंने 3-4 मिनट के अंदर ही संयम खोकर उसकी चूत में अपने लण्ड से वीर्य की हर एक बूंद निचोड़ कर उसके नंगे कोमल बदन पर गिर गया। वो मेरे गालों को चूमती रही, मुझे प्यार करती रही।
उसके ऊपर से उठने का अब भी मन नहीं कर रहा था मगर डर था कि कहीं कोई देख न ले इसलिए हमने उठकर अपने कपड़े पहन लिए। उसके बाद मक्का को टाँड पर लगाकर घर आ गए।
अब जब भी हमें मौका मिलता हम दोनों एक-दूसरे की प्यास बुझाने लगे।
नीचे लिखी मेल आई-डी पर इस कहानी के बारे में अपनी राय देना न भूलें।
singh.rak55@gmail.com

मेरी छोटी बहन की चुत की तड़फ

हाय फ्रेंड्स.. मेरा नाम बिक्की अरोड़ा है. मैं पंजाब के पटियाला का रहने वाला हूँ. मैं अन्तर्वासना पर बहुत सारी सेक्स स्टोरी पढ़ चुका हूँ और आज भी नियमित रूप से सेक्स कहानी पढ़ने के लिए सबसे पहले अन्तर्वासना साईट को ही खोलता हूँ. इधर की रंगीन कहानी पढ़ कर आज मेरे मन में एक विचार आया कि क्यों न मैं भी आप सभी अपनी आंखों देखी घटना आप सब को बताऊं.
चूंकि हर चीज़ शेयर करने का एक प्लॅटफॉर्म होता है और जब कोई साईट पर आपकी गोपनीयता बनी रहने की उम्मीद होती है, तो मुझे क्या, किसी को भी अपनी बात खुल कर रखने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए. आज इसी विचार को लेकर मुझे हिम्मत मिली और मैं अपना अनुभव आप सबके साथ शेयर कर रहा हूँ.
यह घटना मेरी छोटी बहन के साथ की है जो अभी पढ़ रही है. यह बात उन दिनों की है जब हमारा पूरा परिवार अपने मामा के घर रहने घूमने गया था. वैसे तो मैं अपनी बहन के बारे में कोई निगेटिव बात दिमाग़ में नहीं लाता था, पर एक घटना ने मुझको झकझोर के रख दिया. यह घटना मेरी आंखों के सामने हुई, पर मैं कुछ ना कर सका बल्कि उसी बहाव में खुद बह गया.
मेरी बहन, जिसका नाम पल्लवी है, को मैं अक्सर देखता था कि वो जब भी सोती थी, तो वो कमरा बंद करके अकेले ही सोती थी. मेरे मन में कुछ कुछ संदेह सा होता था.. क्योंकि वो उम्र के जिस दौर से गुजर रही थी, वो मैं पार कर चुका था.. इसलिए मुझे इस बात का गहरा अनुभव था.
जब हम सभी मामाजी के घर पर थे. तो एक दिन की बात थी, मैं मामा जी के घर की छत पर टहल रहा था. तभी बगल के घर की खिड़की से एक लड़का दिखा. उसका नाम करण था, वो किसी को फ्लाइयिंग किस दे रहा था. मैं कुछ समझ नहीं पाया.
मैंने जब छत से नीचे आके देखा तो वो मेरी बहन के कमरे की ओर देख कर किस कर रहा था. मेरी बहन रूम बंद करके अन्दर थी. मैं फिर से छत पर आ गया.. और उसको छुप कर देखने लगा.
कुछ देर बाद करण ऐसे ही सेक्स करने का इशारा कर रहा था.
मैंने सोचा कि इन लोगों की हरकतों को रंगे हाथ पकड़ा जाए. मैं उस समय तो करण को कुछ नहीं बोल सकता था, क्योंकि इससे मेरी बहन का इज़्ज़त खराब होने का डर था. लेकिन मैं अब उन दोनों पर चुपके से ध्यान रखने लगा. करण मेरे मामाजी के घर भी आता था. मैं इस बात को लेकर उसके साथ कुछ कर भी नहीं सकता था.
मेरी बहन मुझसे छोटी थी और जब तक मैं उसे रंगे हाथ नहीं पकड़ता, तब तक मैं उसको भी कुछ नहीं बोल सकता था. सो मैंने अब उन दोनों पर नजर रखना शुरू कर दिया.
एक दिन मेरी बहन पल्लवी नहा कर आई और कमरे में कपड़े चेंज कर रही थी. तो करण फिर से उसको कुछ इस तरह का इशारा कर रहा था जैसे वो किसी चीज को लाइक कर रहा हो.
मुझको लगा कि अन्दर कमरे में बहुत कुछ गड़बड़ चल रही है. इसी वजह से मुझे ये भी लगने लगा कि करण रात में मेरी सिस्टर के कमरे में आता है.
एक दिन मैंने अपना फोन में हिडन कैमरा ऑन करके उसके कमरे की खूंटी में टांग कर चार्जिंग पिन को लगा दिया. ताकि इस तरह से उसको शक ना हो.
जब मैंने सुबह फोन निकाला तो जो वीडियो उसमें शूट हुआ था, उसको देख करके मैं दंग रह गया. मैं सोच भी नहीं सकता था कि मेरी बहना पल्लवी, जिसको इतने अच्छे संस्कार मिले हों, वो ये सब काम भी कर सकती है.
मुझे उस वीडियो में चल रही क्लिप को देख कर कई दिनों तक ये चिंता बनी रही थी.
दरअसल करण जिस तरह से उसके मुँह में अपना लंड डाले हुए चुसवा रहा था … वो ऐसा लग रहा था मानो पल्लवी कोई पॉर्न स्टार हो. दूसरे सीन में वो लंड चुसवाता हुआ पल्लवी की गांड पर तेज तेज थप्पड़ भी बरसा रहा था, जिससे पल्लवी के चूतड़ एकदम लाल हो गए थे.
मैं ये सब याद कर कर के पागल हो गया. मुझे पल्लवी को लंड चूसते देख कर ये ध्यान ही नहीं रहा था कि यह लड़की मेरी सगी बहन है, हम दोनों एक ही माँ के जाये हैं. नतीजा यह हुआ कि अंत में मैं भी पल्लवी को चोदने का प्रयास करने में जुट गया. मैंने सोचना चालू किया कि ये सब उसके साथ कैसे करूँ.
मैं एक दिन दोपहर में उसके कमरे में गया और अपने मोबाइल में फीड उस लंड चुसाई वाले वीडियो को, उसके रूम के टीवी में कनेक्ट करके प्ले कर दिया.
मेरी भगिनी ने सेक्स वीडियो को देखा तो वो घबरा गई और उसके पास कुछ बोलने कहने को कोई शब्द ही नहीं थे.
अब मुझे मेरी सेक्सी बहन को कुछ बोलने की आवश्यकता ही रह गई नहीं थी. वो मेरे करीब आकर रोने लगी- भैया.. आप किसी को मत बोलना.. आप जो चाहो कर लो, पर इस बात को किसी से मत बोलना.
मेरा गुस्सा उफान पर था. मैंने बहन की गांड पर 5-6 झापड़ जड़ दिए और उसको बोला- अब तू रंडी बन गई है.. तू मुझे भाई मत बोल.
उस दिन तो मैं वहां से चला गया.
दो दिन तक जब भी मेरा मन होता, मैं उस वीडियो को देखने लगता. तीसरे दिन मैंने उससे कहा कि रात में तुम मेरे कमरे में आ जाना.
रात हुई, सब लोग खाना खाकर सोने चले गए. मैं भी अपने कमरे में आ गया. मैंने कमरे के दरवाजे को खुला छोड़ दिया था. करीब 11:30 बजे वो मेरे कमरे में आई और सिसक सिसक के रोने लगी.
मैंने कहा- जो हुआ सो हुआ.. अब चुप हो जाओ.. जब तुमको चुदाई ही करवाना था तो मुझको बोल देती.
इतना कहते हुए मैंने एक ब्लू मूवी चालू कर दी. मैंने टीवी का वॉल्यूम म्यूट कर दिया था. जैसे जैसे ब्लू मूवी की चुदाई आगे बढ़ने लगी, मेरी बहन की कामुकता जागती गई. मैंने उसे देखा तो वो नंगी होने लगी और अपना रंग दिखाने लगी. में लेटा हुआ सब देख रहा था.
वो मेरे करीब आई और चिपकने लगी. मैंने उसको दूर हटाया तो वो मुझको उत्तेजित करने के लिए अपने कपड़े खोलने लगी.
मैं जीवन में पहली बार अपनी बहन की चूचियों को देख रहा था. क्या मस्त चूचियां थीं … एकदम से तनी हुई. मुझे तो पता भी नहीं था कि उसके चूचियों के निप्पल डार्क ब्राउन रंग के हो गए हैं. नीचे देखा तो उसकी चूत में झांटें भी आ गई थीं.
अगले दस मिनट में मेरे सामने एक 18 साल की लड़की पूरी तरह नंगी खड़ी थी. उसका साइज़ तो नहीं बता सकता, पर हां जब वो पीछे घूमी, तो उसकी उठी हुई गांड देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.
अब मैं सोचने लगा कि इसलिए ही करण इसकी गांड पर थप्पड़ बरसा रहा था.
अब उसकी गांड पर थप्पड़ बरसाने की बारी मेरी थी. मैं उसको अपनी गोद में लेकर उसकी गांड को मसलने लगा. उसके मम्मों को मसलने लगा. मैं भूल चुका था कि वो मेरी छोटी बहन है. मैं उसके साथ रंडी जैसे व्यवहार करने लगा.
पहले मैं 20 मिनट तक उसके चूचों को मसलता रहा. जब वो गर्म हो चुकी तो उसने मुझे खड़ा किया और खुद नीचे बैठ कर मेरा पैन्ट खोल कर मेरे लौड़े को, जो 6 इंच से कुछ ज़्यादा ही होगा, उसको निकाल लिया.
मैंने उसको इशारा किया तो वो मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी. मैं उसके माथे को पकड़ के उसके मुँह में अपना लंड पेल रहा था. वाह क्या चूसना सीख गई थी एकदम रंडी जैसे लंड चूस रही थी.
इस वक्त उसके चूचे मेरे हाथों में दबे थे. उसके कसे लेकिन मुलायम मम्मों, जैसे गुब्बारों में पानी भरा हो, का क्या कहना. फिर मैंने उसको घोड़ी बना दिया. पीछे आकर उसकी चुत को चूमना शुरू किया.
उसकी चुत से पानी की धार आ रही थी. मैं उसकी चुत को मस्ती से चूस रहा था.
दस मिनट उसकी चुत को चूसने के बाद मैंने अपनी छोटी बहन की चुत में अपना लंड लगाया और एक ही झटके में पूरा लंड घुसा दिया. उम्म्ह… अहह… हय… याह… उसकी चुत बहुत ही टाइट थी. वो इससे पहले एक दो बार ही चुदी थी. मैं उसकी चुत को करीब 15 मिनट तक चोदता रहा.
वो मेरे लंड की मोटाई को झेल नहीं पा रही थी, जिससे वो हल्के स्वर में चिल्लाए जा रही थी- आह … भैया छोड़ दो … मुझे दर्द हो रहा है … आपका बहुत बड़ा है.
जब भी वो चिल्लाती, मैं उसके मुँह को दबा कर अपनी स्पीड और तेज कर देता था. कुछ देर बाद वो झड़ गई. मगर मैं अभी गरम था. तो मैंने उसकी चुत को चोदने के बाद उसकी गांड मारने का सोचा.
मैंने उसको बेड के किनारे पर घोड़ी बना कर दिया और मैं नीचे खड़ा हो गया. जैसे ही मैंने उसकी गांड में अपना लंड लगाया, वो समझ गई. वो उठ कर बैठ गई और मेरे पैर पकड़ते हुए बोली- भैया, प्लीज़ गांड मत मारो.. बहुत दर्द होता है.. और आपका तो बहुत बड़ा है.
मैंने उसके चूचों को दबाते हुए कहा- रंडी साली.. जब करण तेरी गांड मार रहा था.. तो दर्द नहीं कर रहा था.
वो चुप रह गई.
फिर मैंने उसको घोड़ी बना कर उसकी गांड में लंड पेलना शुरू किया.
अगर अन्तर्वासना के पाठकों को मेरी छोटी बहन की गांड देखना हो तो वे उसे वीडियो पर देख सकते हैं.
उसकी मस्त गांड देख कर आपलोगों को भी उसकी गांड में लंड पेलने का मन करने लगेगा.
अब मैं उसकी गांड को लंड पेल कर बेरहमी से चोद रहा था. वो चिल्ला रही थी, लेकिन मैं बिना परवाह किए, उसकी गांड को चोदे जा रहा था.
थोड़ी देर में मैं झड़ने लगा.. मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके मुँह में पेलने लगा. कुछ देर बाद मैंने सारा माल उसके मुँह में ही निकाल दिया और मैंने उसकी नाक को दबाए रखा क्योंकि मैं चाहता था कि वो मेरे लंड के माल को उगल ना दे. जब उसने मेरे लंड का पूरा पानी पी लिया, तभी मैंने लंड को बाहर निकाला.
अब जब भी मेरा सेक्स करने का मन होता है तो मैं अपनी बहन को चोद लेता हूँ. अब वो रोती भी नहीं है, मजे से पूरी गांड उठा कर गांड और चूत मरवाती है.
आप लोग मेल करके बताएं कि आपको मेरी बहन की गांड चूत चुदाई स्टोरी कैसी लगी. यह मेरा पहली कहानी थी.
bikkyarrora0007@gmail.com

Saturday, December 22, 2018

चुदाई का मौक़ा लंड का चौका

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शादी का मंडप और चुदाई

दोस्तो, मैं सविता सिंह …
आपने मेरी सेक्स कहानी
शादी में चूत चुदवा कर आई मैं
पढ़ी रहे हैं कि कैसे राजस्थान के एक गाँव में मैं अपने पति के साथ गई और वहाँ मैंने एक बिल्कुल ही अंजान आदमी से एक नहीं कई बार सेक्स किया और बार बार सेक्स किया।
मेरा सबसे यादगार सेक्स तब हुआ जब एक तरफ मंडप में लड़की फेरे ले रही थी, और दूसरी तरफ मैं अपनी चुदाई करवा रही थी, उसी गैर मर्द शेर सिंह से।
कैसे? लीजिये पढ़िये:
अगले दिन शादी थी, तो सब तरफ चहल पहल ज़्यादा थी। सुबह से न मेरे पति, न शेर सिंह कोई भी नहीं दिखा। मैं पहले तो सुबह तैयार हुई, मगर दोपहर तक शेर सिंह का कोई पता नहीं। अब उसकी बीवी वहीं थी, मगर उससे भी नहीं पूछ सकती थी।
लोग आए और उन्होंने दोपहर के बाद मंडप भी सजा दिया। शाम के 5 बज गए थे, वैसे तो फेरे रात के 1 बजे के बाद थे, मगर फिर भी घर में औरतों ने शोर मचा रखा था।
मैं एक तरफ बैठी सब देख रही थी, सुन रही थी और जल भुन रही थी कि साला मेरा कोई इंतजाम ही नहीं हो रहा।
इंतज़ार करते करते जब मैं थक गई तो मैं और चंदा दोनों कमरे में बैठी थी, तभी उसकी ब्यूटीशियन आ गई, जिसने चंदा को तैयार करना था, उसने चंदा को तैयार किया तो साथ में मुझे भी मेकअप करके सजा दिया।
मगर दिक्कत यह हुई कि मुझे बहुत से औरतों ने ये कॉम्प्लिमेंट दिया कि मैं दुल्हन से भी ज़्यादा सुंदर लग रही हूँ। मेरे आसपास से जो भी मर्द गुज़रे, उनकी आँखों में भी मेरे रूप के लिए मूक प्रशंसा थी, कुछ एक आँखों में तो मैंने कामुकता भी महसूस करी, जैसे कह रहे हों ‘आज अगर ये मिल जाए तो साली की फाड़ कर रख दूँ।’
मेरे पति जब मुझसे मिले तो उन्होंने भी कहा- आज तो बहुत गजब ढा रही हो, लगता है आज सुहागरात मनानी ही पड़ेगी।
उनका मतलब साफ था कि बहुत जल्द वो मुझसे सेक्स करेंगे.
मगर क्या मैं भी उनसे सेक्स करने को उतावली थी?
मेरा जवाब था, बिल्कुल भी नहीं!
मैं तो शेर सिंह को खोज रही थी, वो मिल जाए और अपने खुरदुरे लंड से मेरी काम पिपासा बुझाये।
कुछ देर बाद वो भी दिख गया, सफ़ेद शेरवानी, और चकाचक सफ़ेद कुर्ता पाजामा, सर सुर्ख पगड़ी, लंबा सा लंड आगे को छोड़ा हुआ। अपने कद काठी और बड़ी बड़ी मूँछों के कारण वो पूरा कोई रजवाड़े का मालिक लग रहा था।
जब उसने मुझे देखा तो इशारे से एक तरफ बुलाया। मैं गई तो बोला- सविता जी, लगता है आप मेरा तलाक करवा कर ही दम लोगी।
मैं उसका आशय समझ तो गई, पर अंजान बन कर बोली- क्यों क्या हुआ, आपकी पत्नी को हमारा पता चल गया क्या?
वो हंस कर बोला- अरे नहीं, आप आज इतनी सुंदर लग रही हैं कि दिल करता है, अपनी पत्नी को तलाक दे कर आपसे ही शादी कर लूँ।
मैंने कहा- तो देर किस बात की है, शादी का मंडप तो सजा ही हुआ है, कर लेते हैं शादी!
वो मेरी आँखों में गहरा झांक कर बोला- क्या तुम छोड़ सकती हो अपने पति को?
बेशक ये मेरे लिए मुश्किल था, मगर मैं झूठ ही कह दिया- हाँ, छोड़ दूँगी।
उसके चेहरे पर जैसे खुशी, परेशानी और ना जाने क्या क्या भाव उभरे।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोला- आपने धर्म संकट में डाल दिया। सच में सविता जी, मैं आपसे बहुत प्यार करने लगा हूँ, अब आपके बिना नहीं रह सकता। चलो देखता हूँ, अगर मेरा जुगाड़ फिट बैठा तो मैं अपनी पत्नी को छोड़ दूँगा।
मैं उसके विचार सुन कर थोड़ा विचलित हुई- अरे अरे, शेर सिंह जी, इतनी जल्दी क्या है, अभी देखते हैं, हमारा रिश्ता और कितना आगे बढ़ता है, उसके बाद सोच लेंगे। आप भी यही हैं, मैं भी यहीं हूँ।
वो परेशान हो कर बोला- क्या खाक यहीं हो, आपके पति ने परसों वापिस जाने का प्रोग्राम फिक्स कर लिया, मेरे सामने अपने ताऊजी से बात कर रहा था। परसों आप चली जाओगी, फिर क्या बात होगी हमारी?
मैंने कहा- पर अभी तो परसों जाना है न, परसों तक तो हम अपने इस प्यार भरे रिश्ते का मज़ा ले सकते हैं।
वो बोला- तो ठीक है, आप भी आज दुल्हन बनी हैं, मैं भी आज पूरा सजधज कर आया हूँ, तो आज हम सबके होते हुये प्यार करेंगे।
मैंने कहा- वो कैसे?
वो बोला- बता दूँगा, बस मेरे इशारे का इंतज़ार करना।
उसके बाद हम सब शादी में मसरूफ़ हो गए, मैं चंदा के साथ उसकी बेस्ट फ्रेंड का रोल निभा रही थी, मगर हर कोई दुल्हन को छोड़ मुझे ही घूर रहा था, क्या औरत क्या मर्द, क्या बच्चा क्या बूढ़ा। रात के 12 बज कर 50 मिनट का फेरों का टाईम था। घूमते फिरते, नाचते गाते, खाते पीते, बड़ी मुश्किल से शुभ समय आया। जब दूल्हा दुल्हन विवाह मंडप में बैठ गए और पंडित ने मंत्र- उच्चारण शुरू कर दिया तो शेर सिंह ने मुझे इशारा किया। मैं भी चुपके से उठ कर चल दी।
वो मुझे अपने पीछे पीछे सीढ़ियाँ चढ़ा कर घर की बिल्कुल ऊपर वाली छत पर ले गया। वहाँ से नीचे सारा विवाह मंडप, सभी लोग दिख रहे थे।
ऊपर ले जा कर शेर सिंह बोला- अब पंडित के मंत्रोउच्चार के साथ हम भी फेरे लेंगे।
मैंने कहा- तो क्या हम चोरी से शादी करेंगे, घर वालों की मर्ज़ी के खिलाफ?
वो बोला- हाँ, और जब सही वक़्त आएगे, तो सबके सामने भी शादी करेंगे।
मैंने कहा- शेर सिंह जी, आप तो सच में मेरे दीवाने हो गए हो।
उसने मुझे बांहों में कस लिया और बोला- सविता जी, आप नहीं जानती कि मैं आपसे कितना प्यार करता हूँ, अगर जान भी देनी पड़ी आपके लिए तो दे दूँगा।
बेशक मेरे मन में शेर सिंह के लिए ऐसी कोई प्रेम प्यार की भावना नहीं थी क्योंकि मैं तो सिर्फ उसके सेक्स के रिश्ते तक ही खुद को सीमित रखा था। मगर वही था जो इस रिश्ते को चूत की गहराई से दिल की गहराई तक ले गया था।
और वैसे यहाँ ऊपर छत पर भी हमें किसने देखना था, तो जैसे जैसे नीचे पंडित मंत्र पढ़ पढ़ कर चंदा की शादी करवाता रहा, वैसे वैसे ही मैंने और शेर सिंह ने पूरे सात फेरे लिए, उसने अपनी तरफ से लाया हुआ मंगलसूत्र भी मेरे गले में डाला, मेरी मांग में सिंदूर भी भरा।
एक तरह से देखा जाए तो मैं उसकी पत्नी हो चुकी थी।
फेरों के बाद और कोई रस्म हमने नहीं की, जबकि नीचे मंडप में बहुत सी रस्में चल रही थी। मैंने भी नीचे झुक कर शेर सिंह के पाँव छूये, उसने मुझे उठा कर अपने सीने से लगा लिया।
कितनी देर वो मुझे अपने सीने से चिपकाए खड़ा रहा।
मैंने ही कुछ देर बाद उससे पूछा- क्या हुआ जी?
वो बोला- कुछ नहीं, बस अपनी किस्मत को देख रहा था कि कितनी सुंदर पत्नी मिली है मुझको!
मैंने अपना चेहरा उठा कर उसकी ओर देखा तो उसने मेरे होंटों को चूम लिया। एक, दो, तीन, चार और फिर तो उसने जैसे झड़ी ही लगा दी चुंबनों की।
मैं भी खुश थी, मैं भी चुंबनों में उसका साथ देने लगी।
चूमते चूमते मेरे तो बदन में हलचल होने लगी और मैंने महसूस किया कि शेर सिंह का पाजामा भी टाईट होने लगा था। मैंने ही हाथ आगे बढ़ाया और पाजामे में ही उसका लंड पकड़ लिया।
उसने मेरी आँखों में देखा और पूछा- चाहिए?
मैंने हाँ में सर हिलाया।
उसने मेरे लहंगे के ऊपर से ही मेरे दोनों चूतड़ सहलाए और मुझे घुमा दिया, मेरा चेहरा पंडाल की तरफ कर दिया। मैंने छतरी के बने हुये दो खंबों का सहारा लिया तो शेर सिंह ने पीछे से मेरे सारा घागरा उठा कर मेरी कमर पे रख दिया। मैं थोड़ा सा और आगे को झुक गई ताकि मेरी गांड और शेर सिंह की तरफ हो जाए, और मैं अपनी टाँगें भी खोल कर खड़ी हो गई।
शेर सिंह ने अपना पायजामे का नाड़ा खोला, और अपना पाजामा और चड्डी नीचे को सरका दी, अपने लंड पर हल्का सा थूक लगाया और पीछे से मेरी चूत में धकेल दिया। मोटा खुरदुरा सा टोपा मेरी चूत में थोड़ा अटक कर घुसा, मुझे हल्की से तकलीफ हुई, मगर फिर भी अच्छा लगा।
ऊपर से मैं पूरी शादी को देख रही थी, मैंने देखा मेरे पति भी वहीं घूम रहे हैं, एक दो औरतों से जैसे उन्होंने मेरे बारे में पूछा, मैंने ऊपर से चिल्ला कर कहा- अजी मैं यहाँ हूँ, ऊपर!
मगर शादी के शोर शराबे में चौथी मंज़िल की आवाज़ नीचे कहाँ सुनती।
शेर सिंह मुझे चोदता रहा और मैं ऊपर से यूं ही अपनी मज़ाक में अपने पति को और बाकी सबको शादी में घूमते फिरते देखती रही। मेरे लिए शादी नहीं, सेक्स महत्त्वपूर्ण था, और शेर सिंह नहीं उसका लंड महत्त्वपूर्ण था।
शेर सिंह मुझे बड़े अच्छे से चोदा और अपना माल मेरी चूत के अंदर ही गिराया। जब वो झड़ गया तो हम चुपचाप नीचे उतर आए।
मगर रास्ते में मैंने शेर सिंह को कह दिया- अभी एक बार से मेरा मन नहीं भरा है, मुझे ये सब फिर से चाहिए.
मैंने कहा तो शेर सिंह बोला- चिंता मत करो मेरी जान, आज सारी रात मैं तुम्हारे साथ हूँ, जितनी बार कहोगी, मैं उतनी बार तुम्हें संतुष्ट करूंगा।
अभी मैं एक बार और सेक्स करना चाहती थी, मगर शेर सिंह नहीं माना तो मैं मजबूरन उसके साथ नीचे आ गई। उसके बाद मैं अपने पति से मिली, तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया- अरे कहाँ चली गई थी मेरी जान, मैं तो बहुत मिस कर रहा था तुम्हें!
उन्होंने मुझे गले से लगा कर मुझे कसा, तो शेर सिंह के वीर्य मेरी चूत से चू कर मेरे घुटनों तक जाता मुझे महसूस हुआ। मैंने भी उन्हें थोड़ा कस कर आलिंगन किया और बोली- अरे क्या बताऊँ, मुझे तो चंदा के काम से फुर्सत नहीं मिल रही, कभी ये करो, कभी वो करो।
मेरे पति बोले- तो यार फ्री कब होगी, मेरा दिल कर रहा है, तुम्हें किसी अकेली जगह लेजा कर खूब प्यार करूँ।
मैंने कहा- रुको एक मिनट मैं आती हूँ।
अपने पति को छोड़ कर मैं सीधी बाथरूम में गई, पहले मैंने अपनी चूत को अच्छे से पानी से धोया और फिर कपड़े से सुखाया। शेर सिंह के पहनाया मंगल सूत्र उतार कर बाथरूम में ही रख दिया। और फिर से फ्रेश होकर बाहर आई।
मैंने अपने पति का हाथ पकड़ा और उन्हें वहीं ऊपर शिखर पर ले गई। वहाँ जाकर मैंने उनको गले से लगा लिया। सबके बीच, सबसे दूर ऐसी जगह देख कर मेरे पति बहुत खुश हुये- अरे वाह, क्या जगह ढूँढी है, यहाँ तो हम सबको देख सकते हैं पर हमे कोई नहीं देख सकता।
मगर मैंने बात करने की बजाए अपना घागरा ऊपर उठाया, और फिर से उसी जगह उसी पोज में आ गई, मेरे पति ने मेरी हालत देखी, तो बोले- लगता है, तुम्हें भी बड़ी इच्छा हो रही थी सेक्स की?
और उन्होंने भी अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया।
कोई 5 मिनट की चुदाई चली, मगर इस चुदाई में वो मज़ा नहीं था जो शेर सिंह की चुदाई में था। पति को भी सेक्स किए काफी दिन हो गए थे, तो बस 5 मिनट में ही वो अपनी सारी गर्मी मेरी चूत में ही निकाल गए।
मुझे बेशक इस सेक्स से कोई मज़ा नहीं आया, मगर हाँ, मेरी चूत की खुजली को थोड़ा आराम आया।
उसके बाद हम दोनों नीचे आ गए।
करीब सुबह चार बजे मुझे शेर सिंह फिर से वहीं ऊपर ले गया, और इस बार उसने करीब 35 मिनट लगातार मुझे नीचे लेटा कर मुझे चोदा। क्या मस्त और क्या खूब चुदाई की मेरी। मेरा 4 बार पानी गिरा, मगर वो फिर भी डटा रहा।
करीब 35 मिनट बाद जब वो थक कर झड़ा तो मेरी चूत को पूरा भर दिया उसने अपने माल से। मैं नीचे लेटी पसीने पसीने हो रही थी, उसकी तो हालत ही बहुत बिगड़ गई थी, पगड़ी उतार दी, कपड़े उतार दिये, सांस तेज़, दिल की धड़कन तेज़।
झड़ने के बाद वो तो जैसे गिर ही गया।
मैं उठी और अपने आप को ठीक करके वापिस नीचे आ गई। उसके बाद मैं चंदा की विदाई में शामिल हो गई। फिर करीब 6 बजे अपने कमरे में सोने चली गई।
दोपहर के 12 बजे मेरे पति ने मुझे जगाया, मेरा सारा बदन जैसे टूट रहा था। उसके बाद चाय पीकर फ्रेश हो कर मैं फिर से तैयार हो कर परिवार में घुलमिल गई।
अगले दिन शेर सिंह नहीं मिला. जिस दिन हम वापिस आने वाले थे, वो मिला, अकेले में लेजा कर मुझसे बोला- आज आ जा रही हैं?
मैंने कहा- हाँ, जाना तो पड़ेगा।
वो बोला- फिर मिलोगी?
मैंने कहा- अब मिले बिना रहा भी न जाएगा।
वो बोला- ठीक है, कभी मौका लगा तो मैं भी मिलने आऊँगा आपसे।
फिर मुझे अपने गले से लगाया और कहा- आज जाने से पहले एक आखिरी बार!
कहते हुये उसने अपनी पैन्ट खोली, मुझे लगा शायद फिर से सेक्स करेगा, मैंने कहा- नहीं शेर सिंह जी, इतना टाईम नहीं है मेरे पास!
वो बोला- अरे नहीं, चोदना नहीं है, सिर्फ थोड़ा सा चूस जाओ।
मैंने नीचे बैठ कर 1 मिनट उसका लंड चूसा। उसका काला, नाड़ीदार, खुरदुरा सा लंड फिर से खड़ा हो गया। मेरा दिल तो किया के उसका लंड चूसती ही रहूँ और आखरी बार फिर से एक बार इस से चुदवा कर जाऊँ, मगर ये संभव नहीं था।
मैं उठी और खुद ही एक बार शेर सिंह के होंठो को चूमा और दौड़ कर बाहर आ गई। शेर सिंह मेरे पीछे नहीं आया।
मैं अपने घर पहुंची, उसके बाद फिर से वही रूटीन ज़िंदगी। रात को पति से सेक्स, दिन में चाचाजी से सेक्स। मगर शेर सिंह शेर सिंह था, उसके जैसे मज़ा, और कोई नहीं दे सका मुझे।
savsingh775@gmail.com

Wednesday, November 1, 2017

रिक्शेवाला और स्कूल गर्ल

ये sex story है एक कमीने रिक्शेवाले की जो एक Indian school girl को अपनी बातों में फसा के उसकी जवानी की शुरुआत कर देता है। मेरा दावा है की इस erotic sex kahani पढ़ के आपका भी निकल जायेगा।
एक गर्ल्स स्कूल के सामने दो रिक्शेवान खड़े होकर बतिया रहे थे।
“स्कूल में छुट्टी होने वाली है…”-एक रिक्शेवान बोला।
“सुबह से बोहनी नहीं हुई….शायद भाड़ा मिल जाय…..”-दूसरा बोला।
“भाड़ा मिले न मिले लौंडिया तो देखने को मिलेगी।….”
“कल तू क्यों नहीं आया था?….एक कन्टास माल मिली थी।….दूध की तरह गोरी-गोरी टाँग…..उसके घर के सामने ही
मूतने के बहाने मूठ मारा था।”
“कल मेरी साली जाने वाली थी तो सोचा क्यों न रगड़ दूँ….”
“तो….रगड़ दिया….”
“सोच तो यही रहा था….लेकिन साली के नखरे बहुत हैं….बोल रही थी मैं किसी रिक्शेवाले को नहीं दूँगी….मन तो कर रहा
था वहीं लिटाकर उसकी गाड़ चोद दूँ लेकिन बीवी थी इसलिये बच गई बहन की लौड़ी….”
“तो….कुछ तो किया ही होगा…”
“ऐसे कैसे छोड़ देता…..चूची इतनी कस के मीजा है कि एक महीना मुझे याद करेगी….”
“जियो शेर…..और नीचे वाले में ऊँगलीबाजी नहीं की…”
“मन तो कर रहा था 5 कि पाँचों घुसा दूँ लेकिन फिर भी 3 तो घुसेड़ कर ही माना……”
“तेरी जगह मैं होता तो लिटाकर चाप दिया होता साली को……वो मर्द ही क्या जो हाथ में आई चूत को छोड़ दे….”
“घर में बीवी नहीं होती तो बचने वाली कहाँ थी……लेकिन शादी से पहले तो बोरी (चूत) में छेद करके ही मानूँगा…”
“ये हुई न मर्दो वाली बात…….”
तभी घंटी बजी।
यानि छुट्टी हो गई थी।
नीले चेकदार स्कर्ट और सफेद शर्ट में हाई स्कूल व इंटर की लड़कियाँ निकलने लगीं।
ऐसा लग रहा था जैसे पूरा भेड़ो का झुंड ही भागता चला आ रहा हो।
सारी लड़कियाँ अच्छे घरों की थी इसलिये गोरी, मोटी और चिकनी टांगें देख-देख कर
सारे रिक्शावालों का लौड़ा फन्नाने लगा।
सब कि सब एक से एक कन्टास थी। अगर छाँटने को कहा जाय तो जो भी हाथ में आ जाय वही बेहतर।
“साली क्या खाती हैं ये सब……..एक दम दूध मलाई की तरह चिकनी…”
“सब ताजा-ताजा जवान हुई मुर्गियाँ हैं……नरम गोस्त है अभी….पकड़ के दबोच लो तो खून फेंक दें……”
“गाँड़ देख सालियों की…..एकदम चर्बी से लद गई है…….जिसके हत्थे चढ़ेगीं छेदे बिना नहीं छोड़ेगा….”
तभी एक मस्त कुँवारी कच्ची लड़की एक के पास आकर बोली-
“भइया, मिश्रा कालोनी चलने का क्या लोगे?”
लड़की के आते ही दोनों की भाव-भंगिमायें ऐसी हो गई मानों दुनिया के सबसे शरीफ इंसान वही हो।
“जो समझ में आये दे देना अब आप लोगों से क्या माँगें”- शराफ़त से उसने बोला तो लेकिन लड़की की चूचियों का उभार
और उसकी तन्नाई हुई नुकीली चोच देखकर उसका लौड़ा चड्ढी में लिसलिसाने लगा था।
“नहीं पहले भाड़ा बोलो तब बैठूंगी….बाद में आप 10 का 20 मागो तो….”
“अच्छा चलो 15 दे देना……”
लड़की ने दूसरे रिक्शेवाले से पूछा-
“भइया…आप कितना लोगे?”
अभी तक दोनों में बड़ा याराना लग रहा था लेकिन लड़की के सामने आते ही दोनों मानों कटखने कुत्ते की तरह एक दूसरे
को देखने लगे थे।
“अब बेवी जी आप से क्या मोल-तोल करें…10 ही दे दीजियेगा……सुबह से बोहनी नहीं हुई आप के
हाथों से ही बोहनी कर लूँगा……”
लड़की झट से उस रिक्शेवाले के रिक्शे पर बैठ गई।
पहला वाला उसे जलती निगाहों से घूरता रहा।
पर दूसरे वाले की तो बल्ले-बल्ले निकल पड़ी थी।
इधर रास्ते में-
“अच्छा हुआ बेवी जी आप उसके रिक्शे में नहीं बैठी…”
“क्यों?”-लड़की ने पूछा।
“अरे वो बहुत कमीना है……”
“मतलब…..”-लड़की की दिलचस्पी कुछ बढ़ी।
“कैसे कहे आपसे?…….आपको बुरा लग सकता है।”
लड़की कुछ देर सोचती रही।
30 मिनट के इस सफर में बोर होने से अच्छा था कि रिक्शेवाले की चटपटी बातें ही सुनी जाए।
“बताओ तो क्या हुआ…..”
“अरे वो लड़कियों से बदतमीज़ी करता है…”
“किस तरह की बदतमीज़ी…..”
ये वो उमर होती है जब लड़कियों को बदतमीज़ी शब्द सुनकर ही गुदगुदी हो जाती है।”
“अरे वो लड़कियों को लेकर बहुत गंदा-गंदा बोलता है…..”
“क्या बोलता है?”
“आप लोगों को देखकर बोलता है क्या माल है यार…….बस एक बार मिल जाय….”
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खेत में फासी कुंवारी चिकनी माल
लड़की हल्के से फुसफुसाकर हंस पड़ी।
“मैं सच कह रहा हूँ बेवी जी….भगवान कसम…..इससे भी गंदी-गंदी बातें बोलता है…”
रिक्शेवान को लग रहा था कि लड़की चालू टाइप की है। इसलिये वो जानबूझकर मजा ले रहा था।
“पूरी बात बताओ न क्या-क्या बोलता है?….”
“अब जब आप इतना कह ही रही है तो बोल ही देता हूँ….”-रिक्शेवाले का लौड़ा चड्ढी में फनफनाने लगा-“…बोल रहा था
कि कितनी चिकनी-चिकनी हैं जैसे जवान मुर्गी……”
“अच्छा……सच में बहुत कमीना है…”-लड़की भी मस्त होकर सुन रही थी।
“अरे इतना ही नहीं……कह रहा था इनकी उस पर कितनी चर्बी चढ़ गई है….”
“किस पर?”-लड़की ने जानबूझकर रिक्शेवाले को बढ़ावा दिया।
“अब आपके सामने नाम कैसे ले?”
“तुम बताओ ताकि पता तो चले कि वो कितना कमीना है…..”- लड़की की धड़कने बढ़ने लगीं थीं।
न जाने रिक्शावान क्या बोले।
“बात तो सही है आपकी…जब तक आपको बताउंगा नहीं तब तक आप जानेगीं कैसे कि कितना बड़ा कमीना है……..बोल
रहा था कि आप लोगों की गाँड़ पर कितनी चर्बी चढ़ गई है।”
लड़की का हँसने का मन कर रहा था लेकिन किसी तरह उसने कंट्रोल किया।
नासमझ बनने का नाटक करती हुई बोली- “ये क्या होता है?”
रिक्शेवाले को लगा की अंग्रेजी पढ़ने वाली लड़कियों को क्या पता की गाँड़ क्या होता है। इसलिये वो मस्ती से बताने लगा-
“अब आप लोग अंग्रेजी में पता नहीं क्या बोलती है लेकिन हम लोग उसे गाँड़ ही बोलते हैं…..”
“किसे?” -लड़की ने और बढ़ावा दिया। उसे ये सब सुनकर काफी मजा आ रहा था।
“अरे वहीं जहाँ से आप लोग पादती हैं…..”
“शिट…..”-लड़की को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि रिक्शेवाला इतना खुला-खुला बोल देगा-
“….आप लोग करते होंगे
हम लोग नहीं करते इतना गंदा काम……”
लड़की की बात सुनकर रिक्शेवाले का लौड़ा फनफना गया था। चड्ढी के अंदर एकाध बूँद माल भी चूँ गया था। उसे तो
अजीब सी मस्ती चढ़ रही थी।
“अब झूठ न बोलिये बेवी जी…….पादती तो आप भी होगी……हमारे सामने कहने से शर्मा रही हैं…..भला गाँड़ है तो पाद
निकलेगी ही….इसमें शर्माने की क्या बात है….”
“ये सब काम गंदे लोग करते हैं……..हम लोग नहीं….”
लड़की की गाँड़ डर के मारे सच में चोक लेने लगी कि कहीं वो सच में ही न पाद निकाल बैठे और रिक्शेवान को आवाज
सुनाई दे जाय।
“अब आपका तो पता नहीं बेवी जी लेकिन जब हम अपनी बीवी को रात में गाँड़ में चापते हैं तब वो ज़रूर पाद मारती
है…..हो सकता है शादी के बाद आपके साथ भी हो……अरे मैं भी क्या बात कर रहा हूँ…….आप इतनी सुन्दर है…..आपकी
गाँड़ भी मोटी है…..आपका पति तो पक्का आपकी गाँड़ चोदेगा……..और जब चोदेगा तो पाद तो निकलेगी ही….”
रिक्शेवाला अपनी औकात भूल बैठा था। मस्ती का खुमार ऐसा उस पर चढ़ गया था कि वो क्या-क्या बके जा रहा है उसे
पता नहीं चल पा रहा था।
“अच्छा अब चुप करो और चुपचाप रिक्शा चलाओ……”- लड़की ने जब देखा की रिक्शेवाला कुछ ज्यादा ही अंट-शंट बकने
लगा है तो उसने उसे हड़काया।
रिक्शावाले की मस्ती को मानों ब्रेक लगा हो।
“सॉरी बेवी जी……लगता है कुछ ज्यादा ही बोल गया…..”
इसके बाद रिक्शे पर कुछ पलों के लिये संनाटा छाया रहा।
रिक्शेवाले की हिम्मत न पड़ी दुबारा कुछ भी बोलने की।
लेकिन अब लड़की को अपने भीतर एक अजीब सी बेचैनी महसूस हो रही थी।